बहु और ससुर ने मिलकर कर दिया करनामा/ – News

बहु और ससुर ने मिलकर कर दिया करनामा/

बहु और ससुर ने मिलकर कर दिया करनामा/

बहु और ससुर ने मिलकर कर दिया करनामा/

.

उदयपुर के बेडला गांव में जमीन, नशा और वर्जित संबंध की वह रात जब बेटे ने पिता और पत्नी दोनों का कत्ल कर दिया

राजस्थान के उदयपुर जिले के बेडला गांव में वेद प्रकाश की हत्या और उनकी पुत्रवधू पिंकी देवी की हत्या का मामला पूरे इलाके में दहशत फैलाए हुए है। पुलिस के अनुसार आरोपी अजय ने नशे की हालत में कुल्हाड़ी से पहले पत्नी के सिर पर वार किए और फिर पिता के हाथ-पैर काटकर गर्दन धड़ से अलग कर दी। इसके बाद वह खुद थाने में फोन कर पुलिस बुला लाया। मौके पर दो लाशें मिलीं। अजय को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने पिता और पत्नी के बीच चल रहे संबंध की कहानी बताई। मामला अब अदालत में जाएगा।

वेद प्रकाश गांव के सबसे अमीर लोगों में गिने जाते थे। उनके पास अट्ठाईस एकड़ जमीन थी, पैसा था और दबदबा था। फिर भी गांव वाले उनकी इज्जत नहीं करते थे। वजह साफ थी—गरीब परिवारों की खूबसूरत महिलाओं को रात में बैठक में बुलाना, उनके साथ समय बिताना और कुछ पैसे देकर मामला रफा-दफा कर देना उनकी आदत बन चुकी थी। परिवार में इकलौता बेटा अजय था। अजय पिता के नक्शेकदम पर चल पड़ा था। दोस्तों के साथ नशा करना उसकी दिनचर्या थी। पुत्रवधू पिंकी देवी देखने में सुंदर और जवान थी। वेद प्रकाश बहू पर गलत नजर रखते थे। आगे चलकर ससुर और बहू मिलकर जो रास्ता चुने, उसका अंत खून से हुआ।

दस अगस्त दो हजार छब्बीस की सुबह दस बजे वेद प्रकाश घर में खाना खा रहे थे। अजय पास बैठा था। उसे एक हजार रुपये नशे के लिए चाहिए थे। पिता ने साफ कहा कि पैसे नहीं हैं और होते भी तो नहीं देते। अजय उदास हो गया। वेद प्रकाश ने कहा कि बेटा और बहू हमेशा खर्च के पीछे पड़े रहते हैं, कमाने से भागते हैं। अजय गुस्से में भी चुप रहा। दस मिनट बाद पड़ोसन रजनी देवी आई और तीन हजार रुपये मांगे। वेद प्रकाश कमरे की अलमारी से तीन हजार निकालकर दे दिए। रजनी खुश होकर चली गई। अजय ने पूछा कि रजनी को तीन हजार दिए और बेटे को एक हजार नहीं। झगड़ा बढ़ गया। पड़ोसी आए, बीचबचाव किया। अजय ने कहा कि अब घर नहीं आएगा, बड़ी बहन सुमन के घर चला जाएगा। कपड़े लिए, दोस्त से उधार लिए और निकल गया। घर में पिंकी अकेली रह गई। वेद प्रकाश भी बाहर चले गए।

शाम छह बजे वेद प्रकाश ने दोस्त मोहन प्रकाश को बैठक में बुलाया। नौकर मुकुल शराब लाया। दोनों पीते रहे। साढ़े नौ बजे मोहन घर चला गया। वेद प्रकाश बैठक में और पिए। साढ़े दस बजे घर लौटे तो देखा कि बहू अकेली है। नियत खराब हो गई। उन्होंने पिंकी से कहा कि कमरे में खाना लेकर आओ। पिंकी रसोई से खाना ले आई। वेद प्रकाश ने साफ कहा—आज घर में कोई नहीं है, किसी को भनक नहीं लगेगी, बिस्तर गर्म करना पड़ेगा। पिंकी के पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन वह भी कम नहीं थी। उसके मन में एक ही बात आई कि अगर ससुर को वश में कर लिया तो अट्ठाईस एकड़ जमीन और जायदाद उसके हाथ आ सकती है। वेद प्रकाश ने हाथ पकड़ा, पिंकी ने विरोध नहीं किया। ससुर मुख्य दरवाजा बंद कर बहू को बेडरूम में खींच ले गए। उन्होंने कहा कि पैसा, पावर और जमीन सब तुम्हारे हाथ में है, हर जरूरत पूरी कर दूंगा। पिंकी राजी हो गई। दोनों की सहमति से गलत संबंध बने। देर तक चले। बाद में वेद प्रकाश ने कहा कि पति न लौटे तो सब संभाल लेंगे, शारीरिक और आर्थिक जरूरतें पूरी करते रहेंगे। पिंकी खुश हुई और बोली कि अब पति से कुछ लेना-देना नहीं।

कई दिन बीत गए। पच्चीस अगस्त दो हजार छब्बीस की सुबह नौ बजे पिंकी ने अजय को फोन किया कि शादी की सालगिरह है, घर आना चाहिए। अजय ने कहा कि रात आठ बजे पहुंच जाएगा। अजय ने बहन सुमन से कहा कि पैसे नहीं हैं। सुमन ने तरस खाकर दो हजार दिए और शराब न पीने की नसीहत की। अजय बस से गांव की ओर निकला। रास्ते में शराब का ठेका दिखा तो नियत फिर खराब हो गई। पैसे से शराब खरीदी, खेतों में बैठकर पी। नशे में घर पहुंचा। पिंकी ने देखा कि न तो गिफ्ट है और ऊपर से शराब। झगड़ा हुआ, अजय ने हाथ उठाया। ठीक उसी समय वेद प्रकाश घर आए। उन्होंने दोनों को शांत किया, अजय को पैसे दिए और बाहर भेज दिया। अजय फिर ठेके पर पीने चला गया।

दूसरी तरफ वेद प्रकाश ने बहू को समझाया कि पति उसकी जरूरतें पूरी नहीं कर सकता। पिंकी ने कहा कि सालगिरह पर ससुर भी गिफ्ट नहीं लाए। वेद प्रकाश ने वादा किया कि कल शहर जाकर सोने के कंगन लाएंगे। पिंकी खुश हो गई। वेद प्रकाश खाना खाकर बैठक में लेट गए। तभी रजनी का खयाल आया। फोन किया, रजनी रात में बैठक पहुंच गई। दोनों ने फिर अपनी जरूरतें पूरी कीं। गांव वालों को पता था कि वेद प्रकाश और रजनी के अनैतिक संबंध हैं, लेकिन वेद प्रकाश को फर्क नहीं पड़ता था।

अगली सुबह नौ बजे वेद प्रकाश घर आए और पिंकी से कहा कि खाना खाकर शहर जाएंगे, कंगन लाएंगे। मोटरसाइकिल से शहर गए, सुनार से सोने के कंगन खरीदे, बहू के लिए कपड़े भी लिए। घर लौटकर पिंकी से कहा कि कंगन और कपड़े लाए हैं, लेकिन पूरी रात इनकी कीमत वसूल करेंगे। पिंकी हंसते हुए राजी हो गई। वेद प्रकाश ने मुकुल से शराब मंगवाई, बैठक में पीते रहे। दस बजे घर आए, पिंकी ने दरवाजा खोला। ससुर ने कहा कि मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर दो। पिंकी ने बंद कर दिया। दोनों बेडरूम में चले गए और सहमति से संबंध बनाए।

उसी समय अजय नशे में धुत घर आया। दरवाजे पर दस्तक दी, आवाज लगाई। अंदर से कोई नहीं खुला। गुस्से में दीवार फांदकर घर में घुसा। कमरे में जाकर आंखें फटी रह गईं—पत्नी पिंकी और पिता वेद प्रकाश आपत्तिजनक स्थिति में थे। अजय दोनों को गालियां देने लगा। गुस्सा सातवें आसमान पर था। घर में हथियार ढूंढा, हाथ में कुल्हाड़ी आ गई। सबसे पहले पिंकी के सिर में तीन-चार वार किए। पिंकी मौके पर मर गई। वेद प्रकाश भागने की कोशिश कर रहे थे, अजय ने पकड़ लिया। हाथ-पैर कुल्हाड़ी से काटे, फिर गर्दन धड़ से अलग कर दी। पड़ोसी जमा हो गए, तांडव देखकर दंग रह गए। अजय यहीं नहीं रुका। नशे में मोबाइल उठाया, खुद थाने में फोन किया। एक घंटे बाद पुलिस पहुंची। दो लाशें बरामद कीं—एक वेद प्रकाश की, दूसरी पिंकी की। अजय को मौके पर गिरफ्तार कर थाने ले गए।

थाने में पूछताछ शुरू हुई तो अजय ने पूरी कहानी रखी—दस अगस्त का झगड़ा, बहन के घर जाना, पिता का बहू पर नजर रखना, सालगिरह की रात का दृश्य, रजनी से संबंध और जमीन-जायदाद के लालच में पिंकी का ससुर से समझौता। पुलिस के अनुसार अजय ने दोहरा हत्याकांड किया है। कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। रजनी देवी और नौकर मुकुल से भी पूछताछ हो सकती है। अट्ठाईस एकड़ जमीन और परिवार की संपत्ति अब विवाद का विषय बनेगी। बड़ी बहन सुमन की भूमिका सिर्फ इतनी है कि उसने भाई को दो हजार दिए थे और शराब से दूर रहने को कहा था।

गांव में चर्चा दो धाराओं में बंटी है। एक पक्ष कहता है कि पिता ने बहू के साथ वर्जित संबंध बनाकर घर की नींव ही तोड़ दी, बेटे ने नशे में वही देखा जो कोई बेटा नहीं देखना चाहता। दूसरा पक्ष कहता है कि कुल्हाड़ी चलाना कानून हाथ में लेना है, अदालत का रास्ता था। पिंकी की भूमिका पर भी सवाल हैं—क्या वह पीड़ित थी या जायदाद के लालच में ससुर के जाल में खुद फंसी। वेद प्रकाश सालों से गांव की महिलाओं का शोषण करते आए थे, फिर भी दबंगई के कारण कोई खुलकर नहीं बोलता था। यह कांड उसी संस्कृति का नतीजा माना जा रहा है जहां पैसा और पावर नैतिकता से ऊपर बैठ जाते हैं।

अजय जेल में है। दो शवों का पोस्टमार्टम हो चुका होगा, सबूत जमा किए जा रहे हैं। अदालत तय करेगी कि हत्या पूर्व नियोजित थी या अचानक गुस्से और नशे का विस्फोट। ससुर-बहू के संबंध सहमति से थे, यह अजय के बयान और परिस्थिति से उभरता है, लेकिन कानून में हत्या हत्या ही रहती है। बेडला गांव आज भी उस रात की चर्चा करता है जब अमीरी की दीवारें कुल्हाड़ी की धार के आगे ढह गईं।

इस पूरे घटनाक्रम में अजय ने पिता और पत्नी के साथ जो किया, वह सही था या गलत—यह सवाल अब समाज और अदालत दोनों के सामने है। कमेंट में अपनी राय लिखें। जय हिंद।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

Related Articles