भरी पंचायत में दबंग सरपंच को 4 गोलियां मा*री/सरपंच की हुई मौ*त/
भाग 1: मिर्जापुर का आदलपुरा गांव और मंजू देवी का परिवार
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के आदलपुरा गांव में मंजू देवी नाम की एक विधवा महिला अपने परिवार के साथ रहती थी। वह घर पर अचार बनाकर बेचने का काम करती थी, जिससे उसके घर का गुजारा चलता था।
मंजू के परिवार में उसका अविवाहित देवर रघु, 12वीं पास बेटी दीपा और 9वीं कक्षा में पढ़ने वाला होशियार बेटा शिव शामिल थे। गरीबी के कारण दीपा आगे नहीं पढ़ सकी थी। रघु एक कारखाने में मजदूरी करता था और अपनी पूरी कमाई भाभी मंजू को दे देता था।
भाग 2: देवर रघु का सपना और साहूकार करमपाल की गंदी नीयत
कारखाने के मालिक द्वारा समय पर वेतन न मिलने से परेशान होकर रघु ने ऑटो-रिक्शा चलाने की इच्छा जताई। ऑटो खरीदने के लिए ₹2,000,000 की जरूरत थी, लेकिन रघु के पास केवल ₹500 थे। मंजू ने पड़ोसियों से पैसे मांगे, पर किसी ने मदद नहीं की।

मंजू गांव के अय्याश साहूकार करमपाल सिंह के पास ₹1,500,000 उधार मांगने गई। करमपाल ने पैसे देने के बदले मंजू के सामने गलत संबंध बनाने की शर्त रख दी। जब उसने मंजू का हाथ जबरदस्ती पकड़ा, तो मंजू ने उसे थप्पड़ जड़ दिया। करमपाल ने उसे अंजाम भुगतने की धमकी दी। मंजू ने डर के मारे यह बात घर में किसी को नहीं बताई।
भाग 3: सरपंच किशन सिंह की एंट्री और खौफनाक साजिश
20 मई 2026 को साहूकार करमपाल ने अपने जिगरी दोस्त गांव के सरपंच किशन सिंह को खेत में बुलाया। शराब पीते हुए करमपाल ने थप्पड़ का बदला लेने की बात बताई। सरपंच किशन सिंह ने मंजू को अपने जाल में फंसाने का जिम्मा लिया।
शाम को सरपंच मंजू के घर पहुंचा और उसे अपने खेत में 3 दिनों की मजदूरी के लिए राजी कर लिया। पैसों के लालच में आकर मंजू ने खेत में काम करने के लिए हां कर दी।
भाग 4: खेत में पहली दरिंदगी
अगली सुबह करीब 9:00 बजे मंजू काम करने सरपंच के खेत में पहुंची। थोड़ी देर बाद सरपंच ने करमपाल को फोन करके बुला लिया। शराब के नशे में धुत दोनों ने रिवॉल्वर की नोक पर मंजू को पेड़ के पीछे ले जाकर उसके हाथ-पैर बांध दिए और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया।
दोनों ने बारी-बारी से मंजू के साथ दरिंदगी की। जाते-जाते सरपंच ने उसे धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो पूरे परिवार को जान से मार देंगे। डर के मारे मंजू चुपचाप घर लौट आई और यह खौफनाक सच अपने परिवार से छिपा लिया।
भाग 5: बेटी दीपा और उसकी सहेली पिंकी के साथ धोखा
30 मई 2026 को मंजू की बेटी दीपा अपनी सहेली पिंकी के साथ शहर से दवाइयां लेने गई। लौटते समय गांव के बस अड्डे पर कोई साधन न मिलने पर दोनों पैदल चलने लगीं।
तभी सरपंच किशन सिंह अपनी गाड़ी से वहां पहुंचा, जिसमें साहूकार करमपाल भी बैठा था। दोनों ने लड़कियों को गांव छोड़ने का झांसा देकर गाड़ी में बैठा लिया।
भाग 6: दोनों मासूमों के साथ हैवानियत
गाड़ी चलते ही सरपंच ने रिवॉल्वर निकालकर दोनों लड़कियों को डराया और गाड़ी खेत की तरफ मोड़ दी। खेत में गाड़ी खड़ी करके शराब पीते हुए सरपंच ने दीपा को उसकी मां मंजू के साथ हुई हैवानियत की कहानी सुनाई।
दोनों हैवानों ने गाड़ी के अंदर ही दीपा और पिंकी के साथ गलत काम किया। इसके बाद वे ठेके से और शराब लाए और शाम को एक बार फिर दोनों मासूमों को अपनी हवस का शिकार बनाया। आखिर में जान से मारने की धमकी देकर दोनों को गांव के बाहर फेंक दिया।
भाग 7: घर में सच का खुलासा और पुलिस का ढुलमुल रवैया
रोती-बिलखती दीपा जब घर पहुंची, तो उसने पिंकी के साथ मिलकर अपनी मां को पूरी आपबीती सुनाई। यह सुनकर मंजू के होश उड़ गए। उसने तुरंत देवर रघु को बुलाया।
जब वे दोनों लड़कियों को लेकर नजदीकी थाने के दरोगा दिलीप कुमार के पास पहुंचे, तो दरोगा ने मदद करने के बजाय गरीबों को झूठा बताकर भगा दिया।
भाग 8: झूठी पंचायत और पीड़ित परिवार का अपमान
पुलिस से निराशा हाथ लगने पर रघु रात में ही गांव के पंच रमेश कुमार के घर गया। अगले दिन सुबह 10:00 बजे पंचायत बुलाई गई, जिसमें सरपंच किशन और करमपाल को भी बुलाया गया।
जब पंचों ने पूछताछ की, तो सरपंच ने उलटा आरोप लगा दिया कि लड़कियां उनसे पैसे ऐंठने के लिए झूठा इल्जाम लगा रही हैं। पंच रमेश कुमार ने भी सरपंच का पक्ष लेते हुए लड़कियों को झूठा ठहरा दिया।
भाग 9: छोटे बेटे शिव का गुस्सा और खूनी अंजाम
अपनी बहन दीपा को रोते और अन्याय होते देख मंजू का 9वीं में पढ़ने वाला छोटा बेटा शिव अपने गुस्से पर काबू न रख सका। उसने पास पड़ा एक भारी पत्थर उठाकर सरपंच किशन सिंह के माथे पर मार दिया।
गुस्साए सरपंच ने जैसे ही शिव पर रिवॉल्वर तानी, चाचा रघु ने डंडे से सरपंच के हाथ पर वार किया। रिवॉल्वर नीचे गिरते ही शिव ने उसे उठा लिया और सरपंच किशन सिंह को दो गोलियां मार दीं। इसके बाद शिव ने साहूकार करमपाल को भी दो गोलियां मारकर वहीं ढेर कर दिया।
भाग 10: पुलिस कार्रवाई और सवाल
दोहरे हत्याकांड से पूरी पंचायत और गांव में हड़कंप मच गया। पंच की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पुलिस ने मौके से ही नाबालिग शिव और उसके चाचा रघु को गिरफ्तार कर लिया। थाने में जब रघु ने अपनी भाभी और भतीजी पर हुए अत्याचार की पूरी कहानी बयान की, तो पुलिस भी सन्न रह गई। मामला अब अदालत में है, जहां दोनों की सजा तय होनी बाकी है।