राजस्थान भूत ने विधवा महिला के साथ कर दिया कां#@ड/ वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
राजस्थान की तपती धूप और अरावली की दूर तलक फैली पहाड़ियों के बीच भरतपुर जिले का एक छोटा सा गांव बसा है, जिसका नाम है कनावर। यह गांव बाहर से देखने में जितना शांत और साधारण लगता था, अंदर से इसके कई परिवारों की कहानियां उतनी ही उलझी हुई थीं। इसी गांव के एक कोने में महेश कुमार का घर था। महेश कुमार एक बेहद मेहनती, ईमानदार और भगवान से डरने वाला किसान था। उसके पास अपनी सात एकड़ पुश्तैनी जमीन थी, जिस पर दिन-रात पसीना बहाकर वह अपने परिवार का पेट पालता था। गांव के लोग महेश की बहुत इज्जत करते थे क्योंकि वह अपने काम से काम रखने वाला इंसान था और जरूरत पड़ने पर हर गरीब की मदद के लिए सबसे आगे खड़ा रहता था।
महेश कुमार के जीवन में दुख का प्रवेश तब हुआ, जब छह साल पहले एक गंभीर बीमारी के चलते उसकी पत्नी का देहांत हो गया। पत्नी के जाने के बाद महेश अंदर से टूट गया था, लेकिन उसने अपने आंसुओं को कभी अपने बच्चों के सामने बहने नहीं दिया। उसने खुद को संभाला और मां तथा बाप, दोनों की जिम्मेदारी अपने मजबूत कंधों पर उठा ली। महेश के परिवार में उसका एक बेटा नीरज, बहू राखी देवी और एक छोटा बेटा नवीन था। सब कुछ धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा था कि नियति ने महेश के घर पर एक और वज्रपात कर दिया। दो साल पहले, उसका बड़ा बेटा नीरज अपने दोस्तों के साथ पास की ही एक नदी में नहाने गया था। पैर फिसलने के कारण नीरज गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

इस हादसे ने महेश कुमार के घर की सारी खुशियां छीन लीं। जवान बेटे की लाश देखकर महेश पत्थर का हो गया, लेकिन सबसे बुरी हालत उसकी पुत्रवधू राखी देवी की थी। राखी, जो देखने में बेहद खूबसूरत और नौजवान थी, अपने पति की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई। उसकी मांग का सिंदूर और हाथों की चूड़ियां छिन जाने का दर्द उसके दिलो-दिमाग पर इतना गहरा असर कर गया कि उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। राखी घंटों अपने कमरे में गुमसुम बैठी रहती। वह अक्सर अजीबोगरीब बातें करने लगी थी। मोहल्ले की औरतें जब भी उससे मिलने आतीं, तो राखी उन्हें शून्य में घूरते हुए कहती, “काकी, मेरा नीरज मरा नहीं है। वो तो जिंदा है। हर रात जब पूरी दुनिया सो जाती है, तो वो मुझसे मिलने मेरे कमरे में आता है। हम दोनों बहुत बातें करते हैं।”
गांव की औरतें उसकी ये बातें सुनकर सिहर उठतीं। वे आपस में खुसुर-फुसुर करतीं कि जवानी में विधवा होने का सदमा बेचारी के दिमाग पर चढ़ गया है। महेश कुमार अपनी बहू की इस हालत से वाकिफ था। वह उसे शहर के डॉक्टरों को दिखाता था, उसकी दवाइयां लाता था, लेकिन राखी के मन से यह वहम नहीं निकल पा रहा था। घर में राखी का एक सोलह साल का देवर नवीन भी था, जो ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था। नवीन सुबह आठ बजे स्कूल जाता और दोपहर तीन बजे लौटकर अपने पिता के साथ खेतों में काम करने लगता। पूरा परिवार अपने-अपने दुखों को सीने में दबाए किसी तरह जिंदगी की गाड़ी खींच रहा था।
वक्त अपनी रफ्तार से बीत रहा था। 25 जून 2026 का दिन था। आसमान में काले बादल घिरे थे और उमस बहुत ज्यादा थी। शाम के करीब सात बज रहे थे। महेश कुमार खेतों में दिन भर हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद थका-हारा घर लौटा। उसने आंगन में चारपाई पर बैठते हुए आवाज लगाई, “बहू, आज बहुत जोरों की भूख लगी है। जल्दी से खाना परोस दे।” राखी देवी, जो स्वभाव से बहुत आज्ञाकारी थी, तुरंत रसोई में गई और अपने ससुर के लिए गर्म रोटियां और सब्जी ले आई। महेश ने चुपचाप खाना खाया। थोड़ी देर में नवीन भी गांव के लड़कों के साथ खेलकर लौट आया। उसने भी खाना खाया और अपनी किताबों में उलझ गया। रात के नौ बजते-बजते राखी ने भी अपना खाना खा लिया और घर के सारे काम निपटा कर सभी अपने-अपने कमरों में सोने चले गए।
उस रात गांव में अजीब सा सन्नाटा था। झींगुरों की आवाजें उस सन्नाटे को और डरावना बना रही थीं। रात के करीब साढ़े ग्यारह बज रहे होंगे, महेश कुमार गहरी नींद में था कि अचानक राखी के चीखने की आवाज से उसकी आंख खुल गई। राखी बुरी तरह हांफती और रोती हुई महेश के कमरे की तरफ भागी चली आ रही थी। “पिताजी! पिताजी उठिए! मेरे कमरे में कोई है… कोई भूत-प्रेत है!” राखी ने महेश के दरवाजे पर जोर-जोर से हाथ मारते हुए कहा।
महेश हड़बड़ा कर उठा और उसने दरवाजा खोला। सामने राखी खड़ी थी, उसका पूरा शरीर पसीने से लथपथ था और वह बुरी तरह कांप रही थी। “क्या हुआ बहू? तू इतनी घबराई हुई क्यों है? कौन है तेरे कमरे में?” महेश ने चिंता से पूछा।
राखी फफक-फफक कर रोने लगी, “पिताजी, मेरे कमरे में कोई मायावी साया था। उसने मुझे दबोच लिया। उसने मेरे कपड़े फाड़ने की कोशिश की। वो कोई इंसान नहीं था, वो भूत था जो मेरे साथ गंदा काम करना चाहता था।”
महेश कुमार ने अपनी बहू को ध्यान से देखा। राखी के कपड़े बिल्कुल सही सलामत थे, उन पर कोई खरोंच या फटने का निशान नहीं था। महेश ने एक गहरी सांस ली। उसे लगा कि राखी की दिमागी बीमारी फिर से हावी हो रही है। उसने राखी के सिर पर प्यार से हाथ रखा और भारी आवाज में बोला, “बहू, शांत हो जा। देख, तेरे कपड़े तो बिल्कुल ठीक हैं। कुछ नहीं हुआ है तुझे। तूने जरूर कोई डरावना सपना देखा होगा। इस घर में कोई भूत-प्रेत नहीं है। जा, भगवान का नाम ले और सो जा।”
राखी बार-बार सिर हिला रही थी, “नहीं पिताजी, वो सपना नहीं था। मैंने महसूस किया है। कोई था वहां।”
महेश ने उसे बहुत समझाया-बुझाया और किसी तरह वापस उसके कमरे में ले जाकर सुला दिया। पूरी रात महेश भी ठीक से सो नहीं पाया। अगले दिन 26 जून की सुबह नौ बजे महेश ने राखी से कहा, “बहू, तैयार हो जा। हम गांव के डॉक्टर विनोद के पास चलेंगे। मुझे लगता है तेरी दवाइयां बदलनी पड़ेंगी। तेरे दिमाग पर तनाव ज्यादा बढ़ गया है।”
राखी चुपचाप तैयार हो गई। गांव में डॉक्टर विनोद का एक छोटा सा क्लीनिक था। विनोद वैसे तो एक डॉक्टर था, लेकिन गांव में उसका चरित्र बहुत बदनाम था। वह औरतों को बुरी नजर से देखता था और अफवाह थी कि उसने कई मजबूर औरतों का फायदा भी उठाया है। महेश अपनी बहू को लेकर क्लीनिक पहुंचा। वहां पहले से दो मरीज बैठे थे। विनोद ने उन्हें दवाइयां देकर विदा किया और फिर उसकी नजर राखी पर पड़ी। राखी की जवानी और खूबसूरती देखकर विनोद की आंखों में एक गंदी चमक आ गई।
“आओ महेश काका, कहो कैसे आना हुआ? बहू को क्या परेशानी है?” विनोद ने अपनी नजरें राखी पर से बिना हटाए पूछा।
महेश ने हाथ जोड़कर कहा, “डॉक्टर साहब, मेरी बहू की तबीयत कुछ ठीक नहीं चल रही है। रात को सोते-सोते अचानक डर जाती है। कहती है कि सपने में भूत-प्रेत आते हैं और इसके साथ गलत काम करने की कोशिश करते हैं। आप इसे अच्छी सी दवा दे दीजिए।”
विनोद ने मन ही मन मुस्कुराते हुए कहा, “काका, आप फिक्र मत करो। दिमागी तनाव है। मुझे बहू का अंदर कैबिन में मेडिकल चेकअप करना पड़ेगा।” विनोद राखी को लेकर अंदर कैबिन में गया। चेकअप के बहाने उसने राखी को गलत नीयत से छुआ। राखी असहज हो गई, लेकिन अपने ससुर की वजह से चुप रही। विनोद ने बाहर आकर कुछ दवाइयां महेश के हाथ में पकड़ा दीं। “काका, ये गोलियां बहू को रोज रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध के साथ देनी हैं। इसे गहरी नींद आएगी और कोई सपना नहीं आएगा।”
महेश ने डॉक्टर की फीस दी और राखी को लेकर वापस घर की तरफ चल पड़ा। रास्ते में गांव के नुक्कड़ पर एक दूध की डेयरी पड़ती थी, जिसे प्रताप नाम का एक नौजवान लड़का चलाता था। महेश ने अपनी मोटरसाइकिल रोकी और प्रताप से कहा, “प्रताप बेटा, मेरी भैंस ने दूध देना बंद कर दिया है। आज से तू रोज शाम को दो लीटर दूध मेरे घर पहुंचा दिया कर। बहू को रात में दवाई दूध के साथ लेनी होती है।”
प्रताप ने मुस्कुराते हुए हामी भरी, “काका, आप बेफिक्र रहो। रोज शाम को एकदम ताजा दूध आपके घर पहुंच जाएगा।”
उस दिन शाम सात बजे महेश के घर के दरवाजे पर दस्तक हुई। राखी ने दरवाजा खोला तो सामने प्रताप हाथ में दूध का बर्तन लिए खड़ा था। “भाभी जी, काका ने दूध भिजवाया है। बर्तन ले आइए।” राखी अंदर से एक पतीला ले आई और प्रताप ने उसमें दो लीटर दूध डाल दिया। दूध देते वक्त प्रताप की नजरें भी राखी के बदन को टटोल रही थीं, लेकिन राखी ने इस पर ध्यान नहीं दिया और अंदर चली गई।
रात के साढ़े आठ बज चुके थे। राखी ने खाना बनाया। महेश और नवीन ने खाना खाया और अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। राखी ने रसोई में जाकर उस दूध को गर्म किया। उसने एक गिलास दूध महेश को दिया, एक गिलास नवीन को और बाकी बचे दूध के साथ उसने डॉक्टर विनोद की दी हुई गोलियां खा लीं। दवाई खाने के आधे घंटे बाद राखी को इतनी गहरी नींद आई कि वह बिस्तर पर गिरते ही बेसुध हो गई।
रात के बारह बज चुके थे। पूरा गांव गहरी नींद के आगोश में था। महेश के घर में हर तरफ सन्नाटा पसरा था। तभी घर की पिछली दीवार के सहारे एक सीढ़ी लगाई गई। एक साया चुपके से घर के अंदर दाखिल हुआ। वह दबे पांव सीधा राखी के कमरे की तरफ बढ़ा। कमरे का दरवाजा खुला और वह साया अंदर घुस गया। राखी बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी, मानों उसके शरीर में जान ही न हो।
उस साये ने धीरे-धीरे राखी के शरीर से एक-एक कपड़ा हटाना शुरू किया। राखी पूरी तरह निर्वस्त्र हो गई, लेकिन उसे होश नहीं था। उस अनजान व्यक्ति ने राखी के साथ मुंह काला किया। वह दरिंदा अपनी हवस मिटाता रहा, लेकिन दवाइयों और दूध के असर के कारण राखी ऐसी पड़ी रही जैसे कोई लाश हो। अपना घिनौना काम खत्म करने के बाद वह व्यक्ति उसी खामोशी से घर से बाहर निकला और अंधेरे में गायब हो गया।
अगली सुबह जब सात बजे राखी की आंख खुली, तो उसके सिर में भारी दर्द था। उसने जैसे ही करवट ली, तो उसे एहसास हुआ कि उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं है। वह बुरी तरह चौंक गई। उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि रात में उसके साथ क्या हुआ है। उसे याद आया कि कैसे वह कपड़े पहनकर सोई थी। उसके दिमाग में फिर से वही खौफनाक ख्याल आया कि जरूर रात में कोई भूत उसके कमरे में आया था और उसी ने उसके साथ यह दरिंदगी की है।
राखी ने कांपते हाथों से जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहने। वह फूट-फूट कर रोना चाहती थी, लेकिन उसने अपने आंसुओं को रोक लिया। वह सोच में पड़ गई कि अगर उसने यह बात अपने ससुर महेश को बताई, तो वह कभी यकीन नहीं करेंगे। उलटा, वे यही सोचेंगे कि यह कुलटा हो गई है और पागलपन का नाटक करके घर का नाम डुबो रही है। समाज और बदनामी के डर से राखी ने अपने होंठ सी लिए। उसने न ससुर को कुछ बताया, न देवर नवीन को और न ही किसी पड़ोसन को।
लेकिन यह उस खौफनाक सिलसिले की सिर्फ शुरुआत थी। अब यह रूटीन बन गया था। प्रताप रोज शाम को दूध दे जाता। राखी उस दूध को पीती और दवाई खाती। वह बेसुध हो जाती और हर तीसरी-चौथी रात वह मायावी साया उसके कमरे में दाखिल होता, उसकी आबरू लूटता और गायब हो जाता। सुबह राखी खुद को निर्वस्त्र पाती और खून के घूंट पीकर रह जाती। यह सिलसिला पूरे एक महीने तक चलता रहा।
राखी अंदर ही अंदर घुट रही थी। उसका शरीर सूखता जा रहा था। आंखों के नीचे गहरे काले घेरे पड़ गए थे। वह हर समय उदास और डरी हुई रहती। कई बार तो उसने रसोई में रखा चाकू उठाकर अपनी जान देने की भी सोची, लेकिन मरने की हिम्मत भी वो नहीं जुटा पाई। उसे लगता था कि उसका जीवन अब एक श्राप बन चुका है।
आखिरकार 25 जुलाई 2026 की सुबह आई। राखी का सब्र का बांध टूट चुका था। उसने तय किया कि वह अब यह बोझ और नहीं सह सकती। सुबह दस बजे वह अपने घर से निकली और गांव के दूसरे मोहल्ले में रहने वाली अपनी बड़ी बहन सीमा के घर पहुंच गई। सीमा की शादी इसी गांव के रिंकू नाम के लड़के से हुई थी। जब राखी वहां पहुंची, तो रिंकू काम पर गया था और सीमा घर पर अकेली थी।
अपनी बहन को देखते ही राखी उसके गले लगकर फफक-फफक कर रो पड़ी। उसका रोना ऐसा था जैसे बरसों का दर्द एक साथ बाहर आ रहा हो। सीमा बुरी तरह घबरा गई। “राखी! क्या हुआ मेरी बहन? तू इतनी कमजोर क्यों लग रही है? और ऐसे रो क्यों रही है? किसी ने कुछ कहा क्या तुझे? महेश काका ने या नवीन ने?”
राखी ने सिसकते हुए कहा, “नहीं दीदी, पिताजी और नवीन तो मुझे बहुत प्यार करते हैं। लेकिन मेरे घर में कोई मायावी साया है… कोई भूत है। पिछले एक महीने से वो भूत हर तीसरी-चौथी रात मेरे कमरे में आता है। सुबह मैं खुद को बिना कपड़ों के पाती हूँ। वो रात भर मेरे साथ हैवानियत करता है दीदी। मैं मर जाना चाहती हूँ, मुझसे अब ये और बर्दाश्त नहीं होता।”
सीमा अपनी बहन की बातें सुनकर पहले तो हैरान रह गई, फिर उसे लगा कि राखी का पुराना पागलपन फिर से लौट आया है। उसने राखी के कंधे पकड़कर कहा, “राखी, पागल मत बन। इस दुनिया में भूत-प्रेत कुछ नहीं होते। तेरा दिमाग खराब हो गया है नीरज के जाने के बाद। तू वहम कर रही है।”
राखी ने सीमा के हाथ पकड़ लिए, “दीदी, भगवान की कसम, मैं वहम नहीं कर रही। मेरे शरीर पर निशान होते हैं। मुझे दर्द होता है। कोई है जो मेरे साथ रोज ये घिनौना काम कर रहा है। तू मेरी बात मान ले दीदी।”
सीमा ने राखी की आंखों में वो खौफ देखा जो झूठा नहीं हो सकता था। सीमा ने कुछ देर सोचा और फिर कहा, “ठीक है, अगर तू इतनी ही पक्की है, तो आज की रात मैं तेरे साथ तेरे घर पर रुकूंगी। मैं भी तो देखूं कि ऐसा कौन सा भूत है जो बंद दरवाजों के पार आ जाता है। और अगर भूत नहीं है, तो पक्का तेरे घर का ही कोई भेदी है। क्या पता रात को महेश काका या नवीन में से ही कोई तेरे कमरे में आता हो?”
राखी ने तुरंत अपने कान पर हाथ रख लिए, “नहीं दीदी! ऐसी बात मत बोल। पिताजी मेरे लिए भगवान जैसे हैं और नवीन मुझे सगी मां की तरह मानता है। वे दोनों ऐसा कभी नहीं कर सकते।”
“तो फिर आज रात दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाएगा,” सीमा ने दृढ़ निश्चय के साथ कहा।
शाम के पांच बज चुके थे। सीमा राखी के साथ महेश के घर आ गई। इत्तेफाक से उसी समय महेश कुमार घर में दाखिल हुआ और बोला, “बहू, मुझे और नवीन को पास के गांव में एक रिश्तेदार की शादी में जाना है। हम आज रात वहीं रुकेंगे और कल सुबह लौटेंगे। तू घर का ख्याल रखना।”
राखी ने हामी भरी। महेश और नवीन तैयार होकर शादी में चले गए। अब घर में सिर्फ सीमा और राखी थीं। तभी दरवाजे पर फिर दस्तक हुई। राखी ने कहा, “दीदी, पक्का प्रताप दूध लेकर आया होगा। तू जाकर ले आ।”
सीमा ने दरवाजा खोला। सामने प्रताप खड़ा था। उसने सीमा को देखा तो थोड़ा चौंका, “भाभी जी, आप? राखी भाभी कहां हैं?”
“वो अंदर है, ला दूध बर्तन में डाल दे,” सीमा ने सख्ती से कहा। प्रताप ने दूध दिया और वहां से चला गया।
रात का समय था। सीमा ने खुद रसोई में जाकर खाना बनाया। दोनों बहनों ने खाना खाया। इसके बाद सीमा ने दूध गर्म किया। उसने एक गिलास दूध खुद पिया और एक गिलास राखी को दिया। राखी ने रोज की तरह अपनी दवाई खाई और दोनों बहनें एक ही कमरे में सोने चली गईं। सीमा ने सोच रखा था कि वह रात भर जागकर पहरा देगी, लेकिन दूध पीते ही उसके सिर में भारीपन आने लगा। कुछ ही मिनटों में सीमा की आंखें बोझिल हो गईं और वह भी राखी की तरह गहरी नींद में डूब गई।
रात के ग्यारह बज चुके थे। दोनों बहनें बिस्तर पर बेसुध पड़ी थीं। तभी घर का पिछला दरवाजा बहुत ही खामोशी से खुला। वह अनजान साया आज फिर घर में दाखिल हुआ। उसने कमरे का दरवाजा खोला। अंदर अंधेरा था। उस साये ने सबसे पहले राखी के पास जाकर उसके कपड़े उतारे और अपनी हवस पूरी की। जब उसका काम खत्म हो गया, तो उसकी नजर बिस्तर पर लेटी दूसरी महिला पर पड़ी। उसने अंधेरे में टटोलकर देखा। उसे समझ नहीं आया कि वह कौन है, लेकिन हवस में अंधे उस इंसान ने सीमा के भी कपड़े उतार दिए और उसके साथ भी वही घिनौना काम किया। अपना पाप करके वह साया हमेशा की तरह चुपचाप वहां से निकल गया।
अगली सुबह जब धूप की किरणें कमरे में आईं, तो सबसे पहले सीमा की आंख खुली। उसका सिर चकरा रहा था। जैसे ही उसकी नजर खुद पर पड़ी, उसकी चीख निकल गई। वह पूरी तरह निर्वस्त्र थी। उसने हड़बड़ाकर अपने पास देखा, राखी भी उसी हालत में थी। सीमा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने जल्दी से अपने कपड़े पहने और राखी को झकझोर कर उठाया।
“राखी! उठ! राखी!”
राखी उठी और अपनी हालत देखकर फिर रोने लगी। “देखा दीदी? मैंने कहा था ना कि भूत आता है। कल रात वो फिर आया था और उसने तेरे साथ भी…”
सीमा का चेहरा गुस्से और खौफ से लाल हो चुका था। “राखी, ये कोई भूत नहीं है! महेश काका और नवीन घर पर नहीं थे, फिर भी ये हुआ। इसका मतलब बाहर का कोई इंसान है जो तेरे घर में आता है। और कल रात जो दूध हमने पिया था, मुझे पक्का यकीन है उसमें कोई तेज नशा मिला हुआ था। हम दोनों लाशों की तरह सो रही थीं।”
तभी अचानक राखी को जोर की उबकाई आई। वह दौड़कर बाथरूम में गई और उसे भयानक उल्टियां होने लगीं। उसे चक्कर आ रहे थे। सीमा घबरा गई। “राखी, तेरी तबीयत बहुत खराब लग रही है। चल, अभी शहर के अस्पताल चलते हैं।”
सीमा किसी तरह राखी को संभालते हुए शहर की एक लेडी डॉक्टर के पास पहुंची। डॉक्टर ने राखी की जांच की। कुछ देर बाद डॉक्टर ने सीमा को अंदर बुलाया और एक ऐसी बात कही जिसने सीमा की दुनिया हिला दी।
“तुम्हारी बहन डेढ़ महीने की प्रेग्नेंट है,” डॉक्टर ने सपाट स्वर में कहा।
सीमा के कान सुन्न पड़ गए। “ये… ये आप क्या कह रही हैं डॉक्टर साहिबा? मेरी बहन तो विधवा है। उसके पति को मरे दो साल हो गए हैं। ये कैसे संभव है?”
डॉक्टर ने कहा, “देखो, मुझे नहीं पता कि ये कैसे हुआ। मैं सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट बता रही हूँ। तुम्हारी बहन के पेट में बच्चा है।”
सीमा राखी को लेकर सुन्न हालत में घर लौटी। अब तक राखी को यह नहीं बताया गया था कि वह गर्भवती है। सीमा ने घर पहुंचते ही सबसे पहले अपने पति रिंकू को फोन किया और रोते हुए उसे तुरंत वहां बुलाया।
रिंकू, जो एक मजबूत और समझदार युवक था, तुरंत वहां पहुंच गया। सीमा ने उसे कमरे में ले जाकर पूरी कहानी रो-रोकर बता दी। राखी का पागलपन, दूध, रात का साया और अब राखी का प्रेग्नेंट होना।
रिंकू की आंखें गुस्से से लाल हो गईं। उसने मुट्ठी भींचते हुए कहा, “सीमा, इस घर में कोई भूत-प्रेत नहीं है। ये किसी बहुत ही शातिर इंसान का काम है। और मुझे पूरा शक उस दूध वाले प्रताप पर है। दूध पीने के बाद ही तुम दोनों बेहोश हुईं। पक्का वो दूध में कोई बेहोशी की दवा मिलाकर लाता है। आज रात मैं इस भूत का ऐसा इलाज करूंगा कि वो अपनी जिंदगी में कभी खड़ा नहीं हो पाएगा।”
शाम को महेश और नवीन भी शादी से लौट आए। रिंकू ने उन्हें कुछ नहीं बताया। उसने महेश से कहा, “काका, आज रात मैं और मेरे कुछ दोस्त आपके घर के बाहर वाली बैठक में रुकेंगे। मुझे कुछ काम है।” महेश ने खुशी-खुशी इजाजत दे दी।
रात का अंधेरा गहराने लगा। सीमा और राखी कमरे में सोने चली गईं, लेकिन आज उन्होंने न तो दूध पिया था और न ही कोई दवाई खाई थी। वे दोनों पूरी तरह होश में थीं और डर के मारे कांप रही थीं। बाहर, रिंकू ने अपने चार हट्टे-कट्टे दोस्तों को बुला लिया था। वे सब लाठी-डंडों के साथ घर के आंगन और पिछली दीवार के पास छुपकर बैठ गए।
रात के ग्यारह बजे। सन्नाटा इतना गहरा था कि सांसों की आवाज भी सुनी जा सकती थी। तभी घर की पिछली दीवार के पास कुछ आहट हुई। एक लोहे की सीढ़ी के दीवार से टकराने की हल्की सी आवाज आई। रिंकू ने अपने दोस्तों को इशारा किया। दीवार के ऊपर से एक साया अंदर कूदा। उसने अपना चेहरा एक काले कपड़े से ढक रखा था।
वह साया दबे पांव राखी के कमरे की तरफ बढ़ा। जैसे ही उसने कमरे के दरवाजे के हैंडल पर हाथ रखा, रिंकू ने पीछे से उसके सिर पर एक जोरदार डंडा मारा।
“मारो साले को!” रिंकू चिल्लाया।
चारों दोस्त उस साये पर टूट पड़े। घूंसे, लातें और डंडों की ऐसी बरसात हुई कि वह साया चीखने-चिल्लाने लगा। शोर सुनकर महेश और नवीन भी हड़बड़ाकर अपने कमरे से बाहर आ गए। रिंकू ने उस इंसान को कॉलर से पकड़ा और घसीटते हुए आंगन के बीचों-बीच ले आया।
“लाइट जलाओ!” रिंकू ने कहा।
रोशनी होते ही रिंकू ने उस साये के चेहरे से काला कपड़ा नोच लिया। वहां मौजूद हर इंसान की आंखें फटी की फटी रह गईं।
वो कोई और नहीं, बल्कि दूध की डेयरी चलाने वाला प्रताप था! उसका चेहरा खून से लथपथ था और वह रहम की भीख मांग रहा था।
“तू? साले कमीने! तू ये सब करता था?” महेश कुमार गुस्से से पागल हो गया। उसने पास पड़ा एक डंडा उठाया और प्रताप को पीटना शुरू कर दिया।
रिंकू ने तुरंत पुलिस को फोन कर दिया। एक घंटे के भीतर पुलिस की सायरन बजाती हुई जीप महेश के दरवाजे पर आकर रुकी। पुलिस ने प्रताप को अपने कब्जे में लिया और जब थाने ले जाकर उसकी ठीक से ‘खातिरदारी’ की, तो प्रताप ने सारा सच उगल दिया।
“साहब, मुझे माफ कर दो,” प्रताप ने पुलिस के सामने रोते हुए कबूल किया। “मैं जब भी दूध देने जाता था, मेरी नजर राखी की जवानी पर रहती थी। मुझे पता था कि वो विधवा है और मानसिक रूप से कमजोर है। मैंने शहर से एक गहरी नींद की लिक्विड दवा खरीदी थी। मैं रोज शाम को उस दो लीटर दूध में दवा की कुछ बूंदें मिला देता था। दूध पीने के बाद पूरा परिवार मुर्दे की तरह सो जाता था। फिर मैं रात को सीढ़ी लगाकर घर में घुसता था और राखी के साथ मुंह काला करता था। कल रात मैंने सीमा भाभी को भी नहीं छोड़ा। मैं लालच और हवस में अंधा हो गया था साहब।”
पुलिस ने प्रताप का बयान दर्ज किया और उसे कई गंभीर धाराओं (दुष्कर्म, जहर देना, घर में जबरन घुसना) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यह खबर अगले दिन पूरे गांव और आसपास के इलाकों में आग की तरह फैल गई।
राखी को जब पता चला कि वह गर्भवती है, तो वह पूरी तरह टूट गई, लेकिन सीमा और महेश ने उसे संभाला। महेश ने समाज की परवाह किए बिना अपनी बहू का पूरा साथ देने का फैसला किया। प्रताप जैसे दरिंदे की सच्चाई सामने आने के बाद गांव वालों को भी समझ आ गया कि भूत-प्रेत सिर्फ इंसान के दिमाग का वहम होते हैं, असली राक्षस तो हमारे बीच ही इंसान का मुखौटा पहनकर घूमते हैं।
इस घटना ने सबको यह सिखा दिया कि आंखें मूंदकर किसी पर भरोसा करना और अंधविश्वास के जाल में फंसना कितना खतरनाक हो सकता है। आज प्रताप सलाखों के पीछे अपनी सजा काट रहा है, लेकिन राखी के मन पर जो गहरे घाव लगे हैं, उन्हें भरने में शायद एक पूरी उम्र लग जाएगी।