सत्संग में खूबसूरत महिला को बाबा ने नशीला प्रसाद खिला दिया/
सत्संग में खूबसूरत महिला को बाबा ने नशीला प्रसाद खिला दिया/
अध्याय 1: सामान्य दिन और दुखद घटना
बारेली जिले के अंतपुर गाँव में जगदीश कुमार एक साधारण आदमी था। वह हर सुबह 8 बजे कारखाने में मजदूरी के लिए जाता था और शाम 8 बजे साइकिल पर घर लौटता था। वह मेहनती, ईमानदार और साफ-सुथरा था। उसने अपनी मेहनत से एक छोटा सा प्लॉट खरीदा और घर बनाया। उसके साथ रहती थीं दो औरतें – देवरानी उर्मिला देवी, जो बहुत सुंदर और शुद्ध थी, और भाभी सुदेश देवी, जिसकी विधवा होने के बाद रूह और शरीर दोनों बिगड़ गए थे।

एक दिन जगदीश कुमार कारखाने से लेट हो गया और ट्रक से टकरा गया। उसकी रीढ़ टूट गई। अब वह चारपाई पर लेटा रहता था। डॉक्टर ने कहा कि वह कभी चल-फिर नहीं पाएगा। उर्मिला और सुदेश दोनों बहुत परेशान हो गईं।
अध्याय 2: दुर्गा प्रसाद का आगमन
जुलाई 2026 के 2 तारीख को सुबह 11 बजे सुदेश देवी घर में काम कर रही थी। उर्मिला कपड़े धो रही थी। दरवाजे पर दस्तक हुई। सुदेश ने दरवाजा खोला तो सामने एक बलवान बाबा खड़ा था – दुर्गा प्रसाद।
दुर्गा प्रसाद ने सुदेश की खूबसूरती देखकर आँखें चमका दीं। बोला, “माँजी, मैं इस गाँव से थोड़ी दूर के आश्रम में रहता हूँ। सत्संग होता है, दान इकट्ठा कर रहा हूँ। थोड़ा दान दो।” सुदेश ने हँसते हुए दान दिया और कहा, “बाबा, अंदर बैठ जाओ, मैं खाना लाती हूँ।” दुर्गा प्रसाद भी अंदर आ गया और दोनों महिलाओं की सुंदरता देखकर मन में लालच आ गया।
उर्मिला भी आ गई। दुर्गा प्रसाद ने सोचा, “इस घर में दो खूबसूरत महिलाएँ हैं। दोनों को जाल में फँसाऊँगा।” उसने कहा, “सुदेश, तुम रोज सत्संग सुनने आओ। उर्मिला भी आ जाओगी तो अच्छा है।” सुदेश ने हाँ कर दी।
अध्याय 3: पहला कांड और पैसे
सुदेश देवी सत्संग में बैठी। एक घंटे बाद दुर्गा प्रसाद ने कहा, “मैंने तुम्हारे लिए खास प्रसाद बनाया है।” सुदेश प्रसाद खाकर घर गई। रात में सुदेश दरवाजा बंद कर दिया। दुर्गा प्रसाद ने कहा, “मुझे कम से कम ₹5000 दो।” सुदेश ने पैसे दिए और दोनों की रात रंगी। अगले दिन दुर्गा प्रसाद ने सुदेश को कहा, “मेरे पास बहुत पैसे हैं, लेकिन तुम मेरी इच्छा पूरी करो।”
दिन गुजरते गए। सुदेश हर शाम 4 बजे आश्रम जाती, सत्संग सुनती, फिर रात में गलत काम करती और पैसे लेती।
अध्याय 4: उर्मिला को भी फँसाना
एक दिन दुर्गा प्रसाद सुदेश से बोला, “तुम्हारी देवरानी उर्मिला बहुत सुंदर है। मैं उर्मिला को भी हासिल करना चाहता हूँ।” सुदेश ने कहा, “वह नहीं आती।” लेकिन दुर्गा प्रसाद ने कहा, “मैं उर्मिला को अपने आश्रम ले आऊँगा।”
10 जुलाई को सुबह 11 बजे दुर्गा प्रसाद सुदेश के घर पहुँचा। उर्मिला ने दरवाजा खोला। दुर्गा प्रसाद की नजर उर्मिला की सुंदरता पर पड़ी। उसने कहा, “मैं दान नहीं लेने आया, बात करने आया हूँ।” उर्मिला ने अंदर बैठकर बात की। दुर्गा प्रसाद ने कहा, “तुम्हारे पति का एक्सीडेंट हुआ है, लेकिन मैं जानता हूँ वह ठीक हो जाएगा। इसके लिए तुम्हें मुझे आश्रम में आना पड़ेगा और 15 दिन में तुम्हारा पति ठीक हो जाएगा।” उर्मिला ने हाँ कर दी।
अध्याय 5: पहला कांड उर्मिला के साथ
शाम 4 बजे सुदेश और उर्मिला आश्रम पहुँचे। सत्संग खत्म हुआ। दुर्गा प्रसाद ने उर्मिला को कहा, “मैंने तुम्हारे लिए खास प्रसाद बनाया है।” उर्मिला प्रसाद खाने लगी। दुर्गा प्रसाद ने अंदर कुछ मिक्स किया और दिया। उर्मिला खा ली तो 15 मिनट बाद बेहोश हो गई।
दुर्गा प्रसाद ने सुदेश को दरवाजा बंद करने को कहा। सुदेश बंद किया। दुर्गा प्रसाद उर्मिला को उठाकर अपने कमरे में ले गया। उर्मिला बेहोशी की हालत में भी कई घंटों तक गलत काम हुआ। जब उर्मिला होश में आई तो देखा कि वह अकेली कमरे में लेटी है। उसने सुदेश को बुलाया और कहा, “सुदेश, बाबा ने मुझे बहुत गंदा काम किया।”
सुदेश ने झूठ बोला, “यह शुद्धिकरण था, तुम बेहोश हुई थीं। मैंने तुम्हारा पति को बताया कि हम सहेली के घर रुके थे।” उर्मिला ने विश्वास कर लिया। सुदेश ने उर्मिला को घर छोड़ दिया और कहा, “मेरा पति भी ठीक हो गया।”
अध्याय 6: रोज का खेल
इसके बाद सुदेश हर शाम उर्मिला को आश्रम ले जाती। दुर्गा प्रसाद सत्संग सुनाता, फिर नशीला प्रसाद खिलाता, उर्मिला बेहोश होती, फिर कमरे में ले जाता और रात भर रंगीन करता। सुदेश बाहर बैठती और पैसे लेती। कई दिन गुजर गए। उर्मिला के साथ बदन की हालत खराब होने लगी।
अध्याय 7: प्रेग्नेंसी की खबर
15 अगस्त 2026 की सुबह उर्मिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह सुदेश को रोते हुए बोली, “सुदेश, मेरी तबीयत बहुत खराब है, मुझे अस्पताल ले चलो।” सुदेश ने कहा, “ठीक है, लेकिन शाम को हम आश्रम भी चले जाते हैं।” दोनों अस्पताल गईं।
डॉक्टर ने चेकअप किया और कहा, “तुम प्रेग्नेंट हो।” सुदेश के पैरों के नीचे जमीन खिसक गई। उर्मिला चिंतित हो गई। दोनों घर वापस आईं। उर्मिला ने सुदेश को सारी बात बताई – आश्रम में लाया गया, नशीला पदार्थ, गलत काम और अब प्रेग्नेंसी।
अध्याय 8: पुलिस में शिकायत
उर्मिला ने ऑटो लेकर पास के पुलिस स्टेशन पहुँचा। दरोगा राजवीर सिंह से कहा, “मेरे साथ गंदा काम हुआ है। एक बाबा ने मुझे नशीला पदार्थ दिया और गलत काम किया।” राजवीर सिंह ने पूछा, “कब और कैसे हुआ?” उर्मिला ने सारी डिटेल बताई। राजवीर सिंह ने अपनी टीम लेकर सीधा आश्रम पहुँचा।
अध्याय 9: गिरफ्तारी और पिटाई
आश्रम में दुर्गा प्रसाद को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस स्टेशन ले जाकर उसकी जमकर पिटाई की गई। दुर्गा प्रसाद ने पोल पट्टी खोली और कहा, “पहले मैं चोर था। सरपंच ने मुझे आश्रम बनाने का दान दिया। मैंने इस आश्रम की आड़ में कई महिलाओं के साथ गलत काम किया। सुदेश देवी को भी बहुत पैसे दिए। उर्मिला को भी।”
पुलिस ने सुदेश को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों को तुरंत जेल भेज दिया गया।
अध्याय 10: आगे क्या होगा
दोस्तों, इस पूरे घटनाक्रम को सुनने का मेरा उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं था। मैंने सिर्फ एक सच्ची घटना सुनाई है – जो एक छोटे से आश्रम को बड़े कांड में बदल गई। यह घटना हमें सिखाती है कि हमेशा संदेह से काम लो। अगर कोई अजनबी या बाबा तुम्हें अकेले में बुलाए तो तुरंत पुलिस को बताओ।
दुर्गा प्रसाद जैसे लोगों के चाल-बाज के खिलाफ सतर्क रहना जरूरी है। अगर तुम्हारी कोई रिश्तेदार इस तरह फँसी हो तो तुरंत लोकल पुलिस में शिकायत करो।
यह कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज की रक्षा के लिए है।
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