(PART 2) भाभी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/ पुलिस के होश उड़ गए/
(PART 2) भाभी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/ पुलिस के होश उड़ गए/
रघु की गिरफ्तारी के बाद थाने में पुलिस ने उसे अकेले में रखा था। वह काँप रहा था। पिटाई के निशान उसके चेहरे पर थे। पुलिस ने कहा, “तुम्हारा पूरा सच्चाई बता दो। हमने देख लिया है सब।” रघु ने सिर झुकाकर कहा, “जी हाँ सर, मैंने सब कुछ किया। मनीषा भाभी को भी और सपना भतीजी को भी… मैंने नशे में सब कुछ उड़ा दिया।” पुलिस ने रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। रघु ने पहले तो विरोध किया, लेकिन जब घंटों तक धमकी दी गई तो उसने पूरी कहानी बता दी। सपना को भी पुलिस ने थाने में बुलाया। वह डर से काँप रही थी। पुलिस ने कहा, “तुम सच बता दो। हम सब जानते हैं।” सपना ने धीरे-धीरे अपनी पूरी बात रख दी – चाचा का नशा, चाकू, रस्सी, रातों की हर घटना। मनीषा देवी भी अस्पताल से लौट आईं। तीन दिन बाद उन्हें होश आया था। वे थाने आईं। देखते ही देखते उनकी आँखें लाल हो गईं। उन्होंने रघु को देखा और कहा, “तुम्हारी हिम्मत क्या थी भाई? मेरी बेटी को भी, मेरी जान को भी… आज मैं खुद तुम्हें कत्ल करने आ रही हूँ।”

रघु को कोर्ट में पेश किया गया। जज साहब ने पूछा, “रघु सिंह, तुमने अपनी भतीजी और भाभी को क्या किया?” रघु ने रोते हुए कहा, “सर, मैंने गलती कर दी। मैं शराब से अंधा हो जाता था। माफ कर दीजिए।” जज साहब ने गंभीरता से कहा, “यह गंभीर अपराध है। कुकड़िल्ड डिफेंस, रेप, मर्डर का इरादा। मैं तुम्हें आज से फरौद में रख रहा हूँ।” कोर्ट ने अगली तारीख तक रुकावट की। रघु के पिता कदम सिंह (जो अब जेल से लौटे थे) रोते हुए कोर्ट गए। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा सजा पाने का हकदार है। लेकिन मेरी पत्नी और बहू की जान बच गई, यही मेरा शुक्रिया।” सपना ने माँ से कहा, “माँ, चाचा को जेल में डाल दो। वह कभी घर न आए।” मनीषा देवी ने आँसू पोछते हुए कहा, “बेटी, हमने पुलिस को सब बताया। अब कानून खुद फैसला करेगा।”
तीन हफ्ते बाद जज साहब ने फैसला सुनाया। रघु सिंह को कुकड़िल्ड डिफेंस, दो बार रेप, और दो गंभीर चोटें देने का दोषी ठहराया गया। उम्रकैद की सजा हुई – कम से कम १५ साल जेल। कोर्ट ने कहा, “तुमने परिवार के अंदरूनी सदस्यों का अपमान किया। समाज में ऐसा नहीं होना चाहिए।” रघु को जेल भेज दिया गया। सपना ने माँ से कहा, “माँ, अब हम नई जिंदगी शुरू करेंगे। स्कूल जाना शुरू कर देंगे।” मनीषा देवी ने कहा, “हाँ बेटी, अब हम सिलाई का काम और बढ़ाएंगे। तुम्हारी पढ़ाई पूरी हो जाएगी।”
सपना अब पूरी तरह बदल चुकी थी। वह स्कूल जाती, अच्छे नंबर लाती। मनीषा देवी ने अपने पुराने कपड़े बेचकर नई मशीन खरीदी। दोनों ने रघु की जेल भेजने के लिए भी पैसे इकट्ठा किए। पड़ोस की महिलाओं ने भी मदद की। सपना ने एक दिन माँ से कहा, “माँ, अब मैं कभी अकेली नहीं रहूँगी। तुम्हारे साथ हमेशा रहूँगी।” मनीषा ने आँखों में आँसू भरकर कहा, “हाँ बेटी, हम दोनों एक-दूसरे के सहारे बनी रहेंगी।”
दो साल बाद २६ जुलाई २०२८ को सपना १३वीं में पास हुई। स्कूल में उत्सव मनाया गया। मनीषा देवी ने कहा, “ये सब तुम्हारे चाचा की वजह से हुआ, लेकिन अब हम आगे बढ़ेंगे।” पुलिस स्टेशन पर पुलिस ने भी कहा, “रघु सिंह का केस हमेशा के लिए बंद। जेल में भी उसकी हिम्मत नहीं हुई।” परिवार अब खुशहाल जीवन जी रहा था। सपना ने कहा, “माँ, जिंदगी फिर से नई शुरू हो गई है।”
कॉमेंट में बताओ दोस्तों, रघु को क्या सजा मिलनी चाहिए थी? ज्यादा सजा? या ये सजा काफी है? आपका मत क्या है? जय हिंद, वंदे मातरम। मिलते हैं अगली कहानी में।