7 साल बाद IPS बनकर लौटी पत्नी… पति चाय बेचता मिला! 😱
7 साल बाद IPS बनकर लौटी पत्नी… पति चाय बेचता मिला! 😱
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जिस आदमी को अदिति ने 7 साल पहले सबके सामने गलत समझकर छोड़ दिया था, आज वही आदमी एक छोटी चाय की दुकान चलाता था। लेकिन कहानी का सबसे बड़ा राज यह नहीं था कि अर्जुन की जिंदगी कैसे बर्बाद हुई। सबसे बड़ा राज था। अर्जुन ने 7 साल तक अदिति से सच क्यों नहीं कहा। और जब 7 साल बाद अदिति को उस रात की असली सच्चाई पता चली तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि जिस इंसान पर उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया था, उसी ने अर्जुन और अदिति के रिश्ते के बीच सबसे बड़ी गलतफहमी पैदा की थी। लेकिन क्या अब बहुत देर हो चुकी थी? क्या अदिति अर्जुन से माफी मांग पाएगी? और क्या अर्जुन अपने टूटे हुए रिश्ते को एक और मौका देगा?

शर्मा जी की चाय की दुकान सुबह के समय हमेशा मस्त रहती थी। अर्जुन अपनी साधारण मेहनत से चाय बना रहा था। शर्मा जी उसके पास आकर चाय का कप थमाते हुए बोले, “अरे अर्जुन बेटा, आज चीनी थोड़ी कम रखी है जैसा तुम रोज कहते हैं।” अर्जुन मुस्कुराया। “शर्मा जी, हर आदमी की पसंद याद रखता हूं। कभी अपनी जिंदगी की पसंद भी याद कर लिया करो। कुछ पसंदें ऐसी होती हैं शर्मा जी जिन्हें याद करके इंसान खुश नहीं होता। बस चुप हो जाता हूं।”
फिर वही बात 7 साल हो गए बेटा। आखिर कब तक उसका इंतजार करेगा? इंतजार मैं किसी इंसान का नहीं कर रहा हूं। जब सच खुद मेरे सामने आएगा। सच कभी-कभी बहुत देर से आता है। देर से आने वाला सच भी झूठ से बेहतर होता है। इंसान को उसकी पूरी कहानी जाननी चाहिए।
तभी सड़क पर पुलिस वाहनों की आवाज सुनाई दी। शहर में नई पुलिस अधीक्षक के आने की चर्चा होने लगी। अर्जुन ने कहा कि इंसान की पहचान उसके पद से नहीं होती। पुलिस का काफिला चाय की दुकान के पास आकर रुक गया। कार से उतरने वाली अधिकारी को देखकर अर्जुन चौंक गया। वह अधिकारी कोई और नहीं बल्कि 7 साल पुरानी अदिति थी।
7 साल बाद दोनों पहली बार आमने-सामने खड़े थे। अदिति ने अर्जुन को चाय बेचते देखकर हैरानी जताई। अर्जुन ने अदिति को पुलिस अधिकारी के रूप में देखकर जवाब दिया। दोनों की आंखों में 7 साल पुराने सवाल साफ दिखाई दे रहे थे। अदिति ने उस रात का जिक्र किया जब उनका रिश्ता टूट गया था। अर्जुन ने कहा कि उस रात की पूरी कहानी अदिति कभी जान ही नहीं पाई। अदिति ने बताया कि उसे अर्जुन के बारे में एक अलग सच्चाई बताई गई थी।
अर्जुन ने सवाल किया कि उसने उसे सच जानने की कोशिश क्यों नहीं की? धीरे-धीरे बातचीत में अदिति के भाई विक्रम का नाम सामने आया। अर्जुन ने बताया कि विक्रम ने उसे कहा था कि अदिति उससे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती। अदिति के लिए यह बात एक बड़ा झटका था क्योंकि विक्रम ने उसे कभी ऐसा नहीं बताया था।
अर्जुन आप मुझे पहचाना नहीं। चेहरे बदल जाते हैं अदिति लेकिन कुछ आवाजें समय के बाद भी पहचान ली जाती हैं। तुम यहां चाय बेच रहे हो। और तुम आईपीएस अधिकारी बन गई हो। 7 साल बाद भी तुम्हारे चेहरे पे वही शांति है। और 7 साल बाद भी तुम्हारी आंखों में बहुत सारे सवाल हैं।
सवाल नहीं अर्जुन हैरानी है। तुमने अपनी जिंदगी के साथ ये क्या कर लिया? शायद वही जो जिंदगी ने मेरे साथ किया। तुमने मुझे छोड़ दिया था। क्या तुम्हें एक बार भी नहीं लगा कि मैं कहां जाऊंगी? मैंने तुम्हें कभी नहीं छोड़ा अदिति। झूठ मत बोलो। जिस रात तुमने मुझे घर से जाने के लिए कहा था वो रात मैं कभी नहीं भूल सकती। और जिस बात पर तुमने मुझ पर विश्वास किया था वो बात मैं भी कभी नहीं भूल सकता।
मतलब तुम आज भी मुझे ही दोष दे रहे हो। दोष देने से कोई रिश्ता वापस नहीं आता। तुमने कहा था मेरे घर से चली जाओ। क्या वो तुम्हारी आवाज नहीं थी? हां मेरी आवाज थी। लेकिन उसके पीछे की कहानी तुमने कभी जाननी ही नहीं चाही।
क्योंकि तुमने मुझे तो जानने का मौका ही नहीं दिया। तुम्हारे भाई ने दिया था। मेरे भाई का इस बात से क्या संबंध है? यही सवाल तुम्हें 7 साल पहले पूछना चाहिए था।
तुम साफ-साफ बात क्यों नहीं कर रहे हो अर्जुन? क्यों क्योंकि 7 साल पहले जब मैंने सच बताने की कोशिश की थी, तब तुमने मेरी बात सुनने के बजाय मुझ पर विश्वास करना छोड़ दिया था।
मैंने तुम्हारी बात पर विश्वास करना क्यों छोड़ दिया था? आखिर ऐसा क्या हुआ था उस रात? कि उस रात तुम्हारे भाई ने तुम्हें मुझसे दूर करने का फैसला कर लिया था। नहीं, मेरे भाई ऐसा कभी नहीं कर सकते।
उन्होंने हमेशा मेरी खुशी के बारे में सोचा है। हर इंसान अपने आप को सही समझता है अदिति। लेकिन कभी-कभी किसी की रक्षा करने के नाम पर हम उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला गलत कर देते हैं।
अगर तुम्हें इतने सालों से सच पता था तो तुमने मुझे कभी बताया क्यों नहीं? मैंने तुम्हें ढूंढने की कोशिश की थी अदिति लेकिन तुम अपनी नई जिंदगी शुरू कर चुकी थी। मुझे लगा शायद तुम्हारे लिए मेरा वापस आना पुराने घाव खोलने जैसा होगा।
तुमने यह कैसे मान लिया कि मैं तुम्हें भूल गई हूं। क्योंकि तुम कभी वापस नहीं आए। मैं वापस आना चाहती थी अर्जुन लेकिन मुझे लगा तुम मुझे अपनी जिंदगी में दोबारा नहीं चाहते। और मुझे लगा तुमने जाने का फैसला खुद किया था।
देखा अर्जुन 7 सालों तक हम दोनों एक ही झूठ को सच समझते रहे। लेकिन मेरे भाई ने ऐसा क्यों किया होगा? उन्हें हमारे रिश्ते से आखिर क्या परेशानी थी? शायद उन्हें मेरा साधारण होना पसंद नहीं था। शायद उन्हें लगता था कि मैं तुम्हें वो जिंदगी नहीं दे सकता जिसकी तुम हकदार थी।
तुम्हें पता है मुझे सबसे ज्यादा दुख किस बात का हो रहा है? इस बात का कि सात सालों तक मैं तुम्हें दोष देती रही और तुम भी मुझे। लेकिन हमने कभी एक दूसरे तक पहुंचने की कोशिश नहीं की।
रिश्ते अक्सर किसी एक बड़े झूठ से नहीं टूटते। अदिति वे छोटी-छोटी गलतफहमियों से टूटते हैं जिन्हें हम समय रहते दूर नहीं करते।
अब मैं पूरी सच्चाई जानना चाहती हूं अर्जुन। चाहे वो सच्चाई मेरे लिए कितनी भी मुश्किल क्यों ना हो। तो फिर तुम्हें अपने भाई से मिलना होगा। मैं आज ही अपने भाई से मिलूंगी।
अदिति ने अर्जुन से कहा कि वह उसी दिन अपने भाई विक्रम से मिलने जाएगी। अर्जुन ने उसे गंभीरता से देखते हुए कहा कि उसे सच्चाई के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि सच्चाई कभी-कभी हमें अपने ही लोगों को नए नजरिए से देखने पर मजबूर कर देती है।
अदिति ने साफ कहा कि सच्चाई चाहे कितनी भी दर्दनाक क्यों ना हो वह उसे जानना चाहती है। 7 साल तक एक झूठ के साथ जीने के बाद अब वह और कुछ छिपा हुआ नहीं रखना चाहती थी। अर्जुन ने उसे समझाया कि सच्चाई सामने आने के बाद गुस्से में कोई फैसला ना ले।
अदिति ने उससे पूछा कि क्या वह उसके साथ चलेगा? लेकिन अर्जुन कुछ देर चुप रहा और अपनी नजरें झुका ली। फिर उसने कहा कि यह लड़ाई अदिति को खुद लड़नी होगी। लेकिन अगर उसे उसकी जरूरत पड़ी तो वह उससे दूर नहीं रहेगा। अदिति वहां से जाने लगी।
अपनी गाड़ी तक पहुंचने के बाद वह अचानक रुक गई और पीछे मुड़कर अर्जुन की चाय की दुकान को देखने लगी। इसके बाद वह अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से चली गई। अर्जुन उसे जाते हुए देखता रहा और उसने कहा कि 7 साल पुरानी कहानी के अंत की शुरुआत हो चुकी है।
अदिति एक बड़े घर के सामने पहुंची। गाड़ी से उतर कर उसने घर के प्रवेश द्वार की ओर गंभीर नजरों से देखा और अंदर चली गई। उसे अचानक सामने देखकर विक्रम हैरान हो गया और उसने पूछा कि वह अचानक क्यों आई?
तुम अचानक यहां अदिति ने कहा कि उसे 7 साल पहले की एक बात के बारे में उससे सवाल पूछना है। भैया मुझे आपसे 7 साल पुरानी एक बात पूछनी है।
विक्रम गंभीर हो गया और उसने पूछा कि इतने सालों बाद उसे वह पुरानी बात अब क्यों याद आ रही है? 7 साल पुरानी बात अचानक तुम्हें आज वो सब क्यों याद आ रहा है?
अदिति ने बताया कि आज उसकी मुलाकात अर्जुन से हुई है। अर्जुन का नाम सुनते ही विक्रम के चेहरे पर अचानक हैरानी दिखाई दी क्योंकि आज मैं अर्जुन से मिली हूं।
विक्रम ने पूछा कि अर्जुन कहां है? लेकिन आदित्य ने साफ कहा कि उसे यह सवाल उसे नहीं पूछना चाहिए। अर्जुन वो अब कहां है? यह सवाल आपको मुझसे नहीं पूछना चाहिए भैया।
इसके बाद अदिति ने विक्रम से पूछा कि उस रात आखिर क्या हुआ था? विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया और उसकी नजरें अदिति से बचने लगी। उस रात क्या हुआ था भैया?
अदिति ने सीधे पूछा कि क्या उसने ऐसा कुछ किया था जिसकी वजह से उसका और अर्जुन का रिश्ता टूट गया? विक्रम फिर भी चुप रहा। क्या आपने अर्जुन और मेरे बीच कुछ ऐसा किया था जिसकी वजह से हमारा रिश्ता टूट गया?
उसने अदिति से पूछा कि वह इतने सालों बाद यह सवाल क्यों कर रही है? अदिति ने कहा कि हो सकता है कि इतने वर्षों तक उसने गलत इंसान को दोष दिया हो। तुम इतने साल बाद मुझसे यह सवाल क्यों पूछ रही हो?
क्योंकि इतने साल बाद मुझे पता चला है कि शायद मैं गलत इंसान को दोष देती रही। विक्रम ने कहा कि कुछ पुरानी बातें भूल जाना ही बेहतर होता है। लेकिन अदिति ने जवाब दिया कि गलत शब्दों को भूलना आसान हो सकता है। मगर उस दर्द को भूलना आसान नहीं होता जिसे कोई इतने सालों तक अपने साथ लेकर जीता रहा हो।
अदिति कुछ पुरानी बातें भूल जाना ही बेहतर होता है। नहीं भैया गलत बात को भूल जाना आसान है लेकिन उसके साथ जिया हुआ दर्द भूलना आसान नहीं होता।
आदित्य ने आखिर में विक्रम से सीधे पूछा कि क्या वह उस रात अर्जुन से मिला था? यह सवाल सुनकर विक्रम पूरी तरह चुप हो गया। उसके चेहरे पर डर और अपराध बोध साफ दिखाई देने लगा। क्या आपने उस रात अर्जुन से मुलाकात की थी?
कुछ पल की खामोशी के बाद विक्रम ने आखिरकार स्वीकार कर लिया कि वह उस रात अर्जुन से मिला था। यह सुनते ही अदिति हैरान होकर एक कदम पीछे हट गई। मैं उस रात अर्जुन से मिला था। विक्रम ने कहा कि अदिति अर्जुन की वजह से अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही थी। अदिति ने उससे पूछा कि उसने उसकी जिंदगी का फैसला खुद कैसे कर लिया?
क्योंकि तुम उसकी वजह से अपनी जिंदगी बर्बाद कर रही थी। मेरी जिंदगी का फैसला तुमने कैसे कर दिया? विक्रम ने कहा कि उसने देखा था कि अदिति अर्जुन के लिए सब कुछ छोड़ सकती थी। अदिति ने याद दिलाया कि अर्जुन उसका पति था। विक्रम ने कहा कि अर्जुन गरीब था।
मैंने देखा था कि तुम उसके लिए सब कुछ छोड़ सकती हो। वो मेरा पति था। लेकिन वो गरीब था। इस पर अदिति ने सवाल किया कि क्या गरीब होना कोई अपराध है? विक्रम ने कहा कि उसने अदिति के लिए बड़े सपने देखे थे। अदिति ने जवाब दिया कि उसके सपनों में अर्जुन भी शामिल था। विक्रम ने कहा कि अगर वह कदम नहीं उठाता तो शायद अदिति आज भी अर्जुन के साथ एक छोटे घर में रहती।
तो क्या गरीबी अपराध है? अपराध नहीं है। लेकिन मैंने तुम्हारे लिए बड़े सपने देखे थे। और मेरे सपनों में अर्जुन था। तुम आज आईपीएस हो। अगर मैं वह कदम नहीं उठाता तो शायद तुम आज भी उसके साथ एक छोटे घर में होती। अदिति ने उससे पूछा कि क्या वह मानता है कि उसकी सफलता के लिए उसने उसका घर तोड़ा? विक्रम ने कहा कि उसने अदिति का भविष्य बनाया।
तो तुम मानते हो कि मेरी सफलता के लिए तो सफलता के लिए तुमने मेरा घर तोड़ा। मैंने तुम्हारा भविष्य बनाया। अदिति ने कहा कि भविष्य बनाने के नाम पर किसी का वर्तमान छीन लेना प्यार नहीं होता।
नहीं भैया भविष्य बनाने के नाम पर किसी का वर्तमान छीन लेना प्यार नहीं होता। विक्रम ने फिर कहा कि उसने जो किया अदिति के भले के लिए किया। अदिति ने समझाया कि किसी गलत काम के पीछे अच्छा बहाना होने से वह सही नहीं बन जाता।
मैंने जो किया तुम्हारे भले के लिए किया है। हर गलत काम के पीछे एक अच्छा बहाना हो सकता है। लेकिन बहाना उसे सही नहीं बनाता। अब क्या करोगी? मुझे गिरफ्तार करोगी। विक्रम ने पूछा कि अब अदिति क्या करेगी और क्या वह उसे गिरफ्तार करेगी? अदिति ने कहा कि वह अपने पद का दुरुपयोग नहीं करेगी।
लेकिन अर्जुन से माफी जरूर मांगूंगी। मैं इस मामले में अपने पद का दुरुपयोग नहीं करूंगी। लेकिन मैं अर्जुन से माफी जरूर मांगूंगी। विक्रम ने पूछा कि क्या अदिति अर्जुन के पास वापस जाएगी? अदिति ने कहा कि वापस जाना और माफी मांगना अलग बातें हैं और पहले उसे अर्जुन के टूटे हुए विश्वास के सामने खड़ा होना होगा।
तुम उसके पास वापस जाओगी? वापस जाना और माफी मांगना दो अलग बातें हैं। पहले मुझे उसके टूटे हुए विश्वास के सामने खड़ा होना होगा।
इसके बाद बारिश के बीच अर्जुन अपनी चाय की दुकान पर खड़ा था। उसने कहा कि आज बारिश में कोई ग्राहक नहीं आएगा। तभी अदिति बारिश में वहां पहुंची और कहा कि आज एक ग्राहक आई है। आज बारिश में कोई ग्राहक नहीं आएगा।
एक ग्राहक आई है। अदिति ने अर्जुन से कहा कि उसके लिए चाय की दुकान हमेशा खुली है। फिर उसने कहा कि उसे अर्जुन से कुछ कहना है। अर्जुन ने शांत होकर उससे कहा कि वह अपनी बात कहे।
अदिति ने अर्जुन को बताया कि उसे सच मिल गया है। तुम्हारे लिए दुकान हमेशा खुली है। मुझे तुमसे कुछ कहना है। कहो। मुझे सच मिल गया। अर्जुन ने कहा कि उसे पहले से पता था।
अदिति ने हैरानी से पूछा कि उसे कैसे पता था? अर्जुन ने बताया कि जब अदिति सवाल पूछने लगी थी तभी उसे समझ आ गया था कि वह सच के जवाब मुझे पता पहुंच जाएगी। तुम्हें कैसे? तुम जब सवाल पूछने लगी थी, तभी समझ गया था कि तुम जवाब तक पहुंच जाओगी। अदिति ने बताया कि उसके भाई ने सब कुछ किया था।
मेरे भाई ने सब कुछ किया। अर्जुन ने कहा कि आखिर वह उसका भाई है। अदिति ने स्वीकार किया कि उसके भाई ने उनके साथ गलत किया था। अर्जुन ने संक्षेप में उसकी बात से सहमति जताई। अदिति ने पूछा कि अर्जुन उससे नाराज क्यों नहीं है? अर्जुन ने स्वीकार किया कि वह नाराज है।
अदिति ने पूछा कि अगर वह नाराज है तो इतना शांत क्यों है? हां। तुम मुझसे नाराज क्यों नहीं हो? हम फिर तुम इतने शांत क्यों हो? अर्जुन ने कहा कि 7 साल की नाराजगी एक दिन में खत्म नहीं हो सकती। अदिति ने अर्जुन से कहा कि वह उससे माफी मांगने आई है।
क्योंकि सात साल की नाराजगी एक दिन में खत्म नहीं होती। मैं तुमसे माफी मांगने आई हूं। अर्जुन ने कहा कि माफी केवल शब्दों से नहीं मिलती। अदिति ने पूछा कि फिर उसे क्या करना चाहिए?
माफी शब्दों से नहीं मिलती अदिति। तो क्या करूं? अर्जुन ने कहा कि उसे सबसे पहले खुद को माफ करना सीखना होगा। अदिति ने अपने पुराने फैसलों को याद करते हुए कहा कि उसने अर्जुन को चोर समझा, उसे छोड़ दिया और 7 साल तक पहले खुद को माफ करना सीखो।
मैं खुद को कैसे माफ करूं? मैंने तुम्हें चोर समझा। 7 साल तक तुम्हारी बात नहीं सुनी। अर्जुन ने स्वीकार किया कि उसने भी अदिति को जाने दिया था। और मैंने भी तुम्हें जाने दिया।
अदिति ने अर्जुन से पूछा कि उसकी अपनी गलती क्या थी? अर्जुन ने बताया कि उसकी गलती यह थी कि उसने अदिति को सच बताने की कोशिश बहुत देर से की। और मैंने भी तुम्हें जाने दिया। तुम्हारी गलती क्या थी? मेरी गलती थी कि मैंने तुम्हें सच बताने की कोशिश बहुत देर से की।
अदिति ने माना कि उस समय वह अर्जुन की बात सुनने के लिए तैयार नहीं थी। अर्जुन ने समझाया कि रिश्ते में गलती कभी-कभी सिर्फ एक इंसान की नहीं होती। एक इंसान चुप हो जाता है और दूसरा सुनना बंद कर देता है। फिर दोनों के बीच झूठ बोलने वालों के लिए जगह बन जाती है। अदिति ने अर्जुन से पूछा कि उसने दोबारा शादी क्यों नहीं की?
अर्जुन ने शांत होकर पूछा कि वह किससे शादी करता? अदिति ने कहा कि उससे अलग होने के बाद अर्जुन को कोई और मिल सकती थी। अर्जुन ने कहा कि कोई और मिल सकती थी। लेकिन किसी नए इंसान को पुराने जख्म की सजा देना गलत होता। अदिति ने अर्जुन की चाय की दुकान की ओर देखते हुए उसके बारे में बात शुरू की।
अर्जुन ने पूछा कि वह जानना चाहती है कि दुकान कैसे शुरू हुई। अदिति ने हां में जवाब दिया। अर्जुन ने बताया कि अदिति के जाने के बाद उसने नौकरी की कोशिश की लेकिन मुश्किलें बढ़ती गई। उसे अपना घर बेचना पड़ा और कुछ पुराने खर्च भी बाकी थे।
तुम्हारे जाने के बाद मैंने नौकरी ढूंढी लेकिन मुश्किलें बढ़ती गई। फिर मुझे अपना घर बेचना पड़ा। कुछ पुराने खर्च भी बाकी थे। अदिति ने अर्जुन से पूछा कि उसने उसे यह सब क्यों नहीं बताया? अर्जुन ने कहा कि जिससे बात करने की सबसे ज्यादा जरूरत थी उसी ने बात करने का रास्ता बंद कर दिया था।
तुमने मुझे बताया क्यों नहीं? जिससे बात करने की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उसी ने बात करने का रास्ता बंद कर दिया था। अदिति ने स्वीकार किया कि उसने रास्ता बंद किया था। लेकिन उसने अर्जुन से पूछा कि क्या अर्जुन ने दरवाजा खटखटाना बंद नहीं किया था?
मैंने रास्ता बंद किया था। लेकिन क्या तुमने दरवाजा खटखटाना बंद नहीं किया? अर्जुन ने कहा कि शायद दोनों ने ही रास्ता बंद कर दिया था। अदिति ने कहा कि वह चाहती है कि दोनों फिर से बात करना शुरू करें।
शायद दोनों ने किया। मैं चाहती हूं कि हम फिर से बात करना शुरू करें। अर्जुन ने पूछा कि क्या वह पति-पत्नी की तरह फिर से बात शुरू करने की बात कर रही है? अदिति ने स्पष्ट किया कि अभी नहीं बल्कि दो इंसानों की तरह जो एक दूसरे को फिर से समझना चाहते हैं।
पति-पत्नी की तरह अभी नहीं दो इंसानों की तरह जो एक दूसरे को फिर से समझना चाहते हैं। कई सालों की दूरी और गलतफहमी के बाद अर्जुन और अदिति के बीच एक बार फिर बातचीत शुरू हुई। यह शुरुआत हो सकती है। दोनों जानते थे कि पुराना रिश्ता एक दिन में पहले जैसा नहीं हो सकता। लेकिन अर्जुन के शब्दों ने एक नई उम्मीद जगा दी। यह शुरुआत हो सकती है।
कुछ सप्ताह बीत गए। अब अर्जुन और अदिति पहले से ज्यादा खुलकर एक दूसरे से बात करने लगे थे। दोनों एक दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे थे और पुराने दर्द को धीरे-धीरे पीछे छोड़ रहे थे। अदिति अब कभी-कभी अर्जुन की चाय की दुकान पर उसका हाथ बटाने लगी। उसके लिए यह सिर्फ एक दुकान नहीं थी बल्कि वह जगह थी जहां उसे अर्जुन की सादगी और मेहनत की असली कीमत समझ आने लगी थी।
मैं चाहती हूं कि हम फिर से बात करना शुरू करें। अर्जुन तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत यही है। शर्मा जी दोनों को साथ देखकर खुश होते थे। उन्हें महसूस हो रहा था कि 7 साल पहले टूट गया रिश्ता अब धीरे-धीरे जुड़ने की राह पर था। अदिति ने अर्जुन को समझते हुए महसूस किया कि उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका पैसा पद या पहचान नहीं बल्कि उसकी ईमानदारी और सादगी थी। अर्जुन ने भी महसूस किया कि अदिति अब पहले वाली अदिति नहीं रही। अब उसमें अपने सच को स्वीकार करने और अपनी गलतियों का सामना करने की हिम्मत थी।
शर्मा जी ने दोनों को समझाया कि रिश्तों में किसी की कुर्सी या हैसियत बड़ी नहीं होती। असली बड़प्पन इस बात में होता है कि इंसान सामने वाले को सम्मान कितना देता है। बड़ा वो होता है जो सामने वाले को छोटी कुर्सी पर बैठ-बैठा देखकर भी छोटा ना समझे।
लेकिन दूसरी तरफ अदिति के भाई विक्रम के मन में अभी भी अर्जुन को लेकर चिंता और पुराने विचार मौजूद थे। उसने अदिति से उसके रोज अर्जुन के पास जाने को लेकर सवाल किया। विक्रम को डर था कि कहीं अर्जुन अदिति की जिंदगी में फिर से वापस ना आ जाए। लेकिन आदित्य ने साफ कर दिया कि वह अपनी जिंदगी का फैसला खुद करेगी।
तुम रोज उस चाय वाले के पास जा रही हो। उसका नाम अर्जुन है। तुम फिर से उसके साथ जिंदगी बिताने का सोच रही हो। मैंने अभी कोई फैसला नहीं किया है। अदिति ने पहली बार अपने भाई के सामने पूरी मजबूती से कहा कि उसकी जिंदगी के फैसले लेने का अधिकार सिर्फ उसे है। अब वह किसी और की सोच के आधार पर अपनी जिंदगी नहीं जीना चाहती थी।
आज भी तुम यही मानते हो कि मुझे अपनी जिंदगी समझी समझने का अधिकार नहीं है। विक्रम आखिरकार अपनी गलती स्वीकार करने लगा। उसे समझ आने लगा कि उसने अदिति की भलाई के नाम पर उसकी जिंदगी का एक बहुत बड़ा फैसला खुद कर दिया था।
मैंने गलती की। ठीक है। अदिति ने विक्रम से कहा कि वह उसे सजा नहीं दे रही। वह सिर्फ यह चाहती है कि विक्रम अपनी गलती को स्वीकार करें और अर्जुन से माफी मांगे।
मैं तुम्हें सजा नहीं दे रही। मैं तुमसे माफी की उम्मीद कर रही हूं। लेकिन विक्रम अभी भी अपने अहंकार और पुराने विचारों में फंसा हुआ था। उसने अर्जुन से माफी मांगने से इंकार कर दिया।
मैं अर्जुन से माफी नहीं मांगूंगा। आदित्य ने उसे समझाया कि वह बदला नहीं चाहती। वह सिर्फ चाहती है कि विक्रम सच को स्वीकार करें और उस गलती को समझे जिसने तीन जिंदगियों को प्रभावित किया।
नहीं भैया तुमने मुझे खुद से दूर किया था। उस रात विक्रम अकेला बैठकर 7 साल पुरानी घटनाओं को याद करता रहा। उसके सामने एक-एक करके पुराने फैसले और आदित्य की जिंदगी के बदले हुए रास्ते घूमने लगे। विक्रम को आखिरकार एहसास हुआ कि किसी को बचाने के नाम पर उसकी जिंदगी का फैसला करना भी एक तरह की गलती है। उसने आदित्य की सुरक्षा चाही थी लेकिन उसकी पसंद और आजादी को समझ नहीं पाया।
इसी बीच शहर में नागरिक सम्मान समारोह की तैयारियां शुरू हुई। इस बार उन लोगों को सम्मानित किया जाना था जिन्होंने बिना किसी प्रसिद्धि की इच्छा के समाज के लिए अच्छा काम किया था।
मैडम शहर के नागरिक सम्मान समारोह की तैयारियां पूरी हैं। अदिति ने सम्मान पाने वाले लोगों की सूची में अर्जुन का नाम जोड़ दिया। एक नाम और जोड़िए अर्जुन शर्मा। वही चाय दुकान वाले।
क्योंकि वह जानती थी कि अर्जुन पिछले दो सालों से अपनी कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की किताबों के लिए देता रहा था। जब अर्जुन को समारोह का निमंत्रण मिला तो वह कुछ देर तक उसे देखता रहा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह उस समारोह में जाए या नहीं। अर्जुन मंच और सम्मान का आदमी नहीं था। वह अपनी छोटी सी दुकान और अपनी साधारण जिंदगी में ही खुश था। फिर भी इस बार वह अदिति की बात के लिए समारोह में जाने का फैसला करता है।
समारोह शुरू हुआ। हॉल में लोगों की हल्की बातचीत के बीच मंच से उन लोगों के योगदान के बारे में बताया जाने लगा जिन्होंने समाज के लिए चुपचाप काम किया था। आज के इस नागरिक सम्मान समारोह में हम उन लोगों का सम्मान करेंगे जिन्होंने बिना किसी प्रसिद्धि की इच्छा के समाज के लिए योगदान दिया। अर्जुन लोगों के बीच चुपचाप बैठा रहा। वह मंच से दूर रहना चाहता था।
लेकिन अदिति की नजर लगातार उस पर थी। अदिति अर्जुन के पास पहुंची और उससे पूछा कि वह इतना घबरा क्यों रहा है?
अर्जुन तुम यहां आने से इतना घबरा क्यों रहे हो? अर्जुन ने बताया कि वह मंचों पर बोलने वाला इंसान नहीं है। क्योंकि मैं मंचों का आदमी नहीं हूं।
आदित्य ने उसे समझाया कि आज सिर्फ सम्मान लेने की बात नहीं है। आज कुछ ऐसी बातें भी सामने आनी थीं जो बहुत लंबे समय से चुप थी। अर्जुन अब भी शांत था। लेकिन अदिति जानती थी कि 7 साल की चुप्पी को हमेशा के लिए दबाकर नहीं रखा जा सकता।
अदिति मंच पर पहुंची और पहली बार सबके सामने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती स्वीकार की। आज मैं यहां एक अधिकारी के रूप में नहीं बल्कि एक ऐसी इंसान के रूप में खड़ी हूं जिसने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती एक अधूरी सच्चाई पर विश्वास करके की। उसने माना कि उसने एक अधूरी सच्चाई पर विश्वास करके अर्जुन के बारे में फैसला किया था।
आदित्य ने बताया कि 7 साल पहले उसने अर्जुन की पूरी परिस्थिति जाने बिना उसे दोषी समझ लिया था। उसने उसकी बात नहीं सुनी और उसी गलतफहमी ने दोनों की जिंदगी बदल दी।
7 साल पहले मैंने एक इंसान को दोषी मान लिया था। मैंने उसकी बात सुने बिना फैसला कर लिया।
अदिति ने सबके सामने कहा कि जब किसी गलती से किसी इंसान की जिंदगी बदल जाए तो माफी सिर्फ अकेले में मांगना काफी नहीं होता। उस सच को भी स्वीकार करना पड़ता है जिसने रिश्ते को तोड़ा।
हे अर्जुन क्योंकि जब गलती ने किसी की जिंदगी सबके सामने बदल दी हो तो माफी सिर्फ बंद कमरे में नहीं मांगनी चाहिए। विक्रम ने आखिरकार अपनी गलती स्वीकार की और अर्जुन से माफी मांगी। अर्जुन ने उसकी बात सुनी। उसके चेहरे पर पुराने दर्द की झलक थी। लेकिन उसके दिल में बदले की भावना नहीं थी।
अर्जुन और आदित्य ने तुरंत अपने पुराने रिश्ते को वापस लाने की जल्दबाजी नहीं की। दोनों ने फैसला किया कि वे धीरे-धीरे एक दूसरे पर फिर से भरोसा करना सीखेंगे। 7 साल की गलतफहमी के बाद यह उनके रिश्ते का अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत थी।
मैं चाहती हूं कि हम धीरे-धीरे फिर से एक दूसरे पर भरोसा करना सीखें। इस बार हम जल्दबाजी नहीं करेंगे।
7 साल पहले एक गलतफहमी ने दो जिंदगियां अलग कर दी थी। लेकिन सच सामने आने के बाद अर्जुन ने बदला नहीं चुना बल्कि माफ करना चुना। अदिति ने भी समझा कि किसी रिश्ते को बचाने के लिए सिर्फ प्यार काफी नहीं होता। एक दूसरे की बात सुनना और सच पर भरोसा करना भी जरूरी होता है। क्योंकि कभी-कभी एक छोटी सी गलतफहमी इंसान को उस व्यक्ति से दूर कर देती है जिसे वह सबसे ज्यादा चाहता है।
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और याद रखिए किसी की बात सुने बिना उसके बारे में फैसला मत कीजिए। क्योंकि अधूरा सच पूरे रिश्ते को बर्बाद कर सकता है।