GB रोड पर बहन को बचाने के लिए ग्राहक बनकर पहुंचा सगा भाई 😱 | पूरी कहानी | – News

GB रोड पर बहन को बचाने के लिए ग्राहक बनकर पहुंचा सगा भाई 😱 | पूरी कहानी |

GB रोड पर बहन को बचाने के लिए ग्राहक बनकर पहुंचा सगा भाई 😱 | पूरी कहानी |

GB रोड पर बहन को बचाने के लिए ग्राहक बनकर पहुंचा सगा भाई 😱 | पूरी कहानी |

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दिल्ली में फँसी एक लड़की: बहन की गुमशुदगी, भाई की जंग और महिला आयोग की तारीफ

राजस्थान के जोधपुर जिले के एक छोटे से गाँव में रहती थी रानी। वह कोलकाता की एक मल्टी-नेशनल कंपनी में नौकरी करती थी। उसके पिता और माँ उसे बहुत प्यार करते थे। गाँव वाले उसे देखकर कहते, “रानी बहुत होशियार लड़की है, अच्छी नौकरी कर रही है।” रानी हर महीने पैसा भेजती और घर को खुश रखती।

एक दिन उसको एक अच्छा ऑफर मिला। कंपनी ने कहा, “दिल्ली आओ, इंटरव्यू हो जाएगा, शुरुआत में 1 लाख रुपये सैलरी, बाद में और ज्यादा।” रानी को लगा, “अब घर की हर जरूरत पूरी हो जाएगी।” वह दिल्ली की ओर निकल पड़ी।

दिल्ली पहुँचकर इंटरव्यू

दिल्ली पहुँचकर वह इंटरव्यू लाइन में खड़ी थी। तभी एक चपरासी पास आया और बोला, “मैडम, चाय लेंगी या कॉफी?” रानी ने कहा, “चाय ले आना, लेकिन थोड़ी कड़क।” चपरासी चाय ले आया। रानी ने पी लिया और थकान में सो गई। कई घंटे बाद उसे होश आया तो वह बिस्तर पर पड़ी थी। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। सामने एक बुजुर्ग सा आदमी उसके साथ खेलने की कोशिश कर रहा था। रानी की ताकत खत्म हो चुकी थी। उसने पानी माँगा, खाना माँगा, लेकिन कुछ नहीं मिला। उसे पीटा जाता, मार खाता। उसने चीखने की कोशिश की तो उसे और ज्यादा नशिया दे दिया जाता। 24 घंटे किसी न किसी की नजर रहती।

रानी की गुमशुदगी की खबर पूरे देश में फैल गई।

कोलकाता से आया भाई

सुबह कोलकाता से एक लड़का पहुँचा। उसका नाम था सूर्यकांत गुर्जर। वह अपने पिता से पूछता, “माँ-पापा, रानी कहाँ है?” पिता ने बताया, “दिल्ली में अच्छी नौकरी का ऑफर मिला था, वह दिल्ली गई थी।” सूर्यकांत ने तुरंत दिल्ली की ओर रवाना हो गया।

कोलकाता से आने वाले लड़के ने रानी के भाई से कहा, “मैं रानी का भाई बात कर रहा हूँ। तुम्हारी बहन जीबी रोड के कोठा नंबर 68 में है।” सूर्यकांत रोने लगा। उसने कहा, “मुझे मदद करो।” लेकिन वह लड़का डर गया। बोला, “मुझे नुकसान नहीं होना चाहिए।”

कोठे नंबर 68 में प्रवेश

सूर्यकांत ने मैनेजर से कहा, “मुझे रानी से मिलना है।” मैनेजर ने कहा, “रानी पहले से एक ग्राहक के साथ है, लेकिन तुम इंतजार कर सकते हो।” सूर्यकांत ने हाँ कर दी।

जब रानी बाहर आई तो दोनों भाई-बहन गले लग गए। रोते हुए उन्होंने अपनी पूरी कहानी सुनाई। रानी ने बताया, “मुझे 1 लाख का ऑफर मिला। मल्टी-नेशनल कंपनी में काम कर रही थी, 35-40 हजार मिलते थे। लेकिन दिल्ली में जॉब मिल गई। 10 जून को दिल्ली आई थी। फिर ये लोग ने मुझे कोठे पर फँसाया। हर दिन लोगों के साथ गंदा काम होता है। मुझे पानी और खाना नहीं मिलता। मुझे पीटा जाता है।”

सूर्यकांत रोता रहा। बोला, “भाई, तुम्हें बाहर निकलना है।”

महिला आयोग का एक्शन

सूर्यकांत ने कहा, “मुझे महिला आयोग की मदद चाहिए।” वह दिल्ली महिला आयोग में गया। वहाँ किरण नेगी और स्वाति मालीवाल ने पूरी कहानी सुनी। स्वाति मालीवाल ने तुरंत डीसीपी मनदीप सिंह रंधावा को फोन किया। रंधावा ने कहा, “ठीक है, 9 अगस्त 2019 को रेड डालेंगे।”

रेड डालना

9 अगस्त 2019 को सुबह। सूर्यकांत ने कहा, “जब तक टीम नहीं आएगी, मैं अंदर रहूँगा।” वह अंदर गया। रानी बाहर आई तो दोनों गले लग गए। रोते हुए उन्होंने अपनी कहानी दोबारा बताई।

तभी दरवाजा खटखटाया जा रहा था। “तुम्हें बाहर निकलना होगा, समय खत्म हो गया।” सूर्यकांत ने कहा, “मुझे थोड़ा और समय दो।” लेकिन मैनेजर ने कहा, “डबल चार्ज लगेगा।” सूर्यकांत ने कहा, “ठीक है, मैं ज्यादा पैसे दूँगा।”

तभी पुलिस और महिला आयोग की टीम ने दरवाजा तोड़ा। रानी और सूर्यकांत बच गए। पूरे कोठे में 15 महिलाएँ भी बचीं। मैनेजर गिरफ्तार हो गई।

मीडिया और तारीफ

अखबारों में लिखा, “एक भाई ने अपनी बहन को जीबी रोड से बचा लिया।” स्वाति मालीवाल, मनदीप सिंह रंधावा और किरण नेगी की तारीफ हुई। दिल्ली पुलिस ने धारा 370, 376, 109, 34 के तहत केस दर्ज किया।

अब क्या?

रानी और सूर्यकांत दोनों कोलकाता लौट गए। रानी अब पहले जॉब में लौट आई। लेकिन उसने कहा, “अगली बार ऑफर मिले तो पहले क्रॉस वेरिफाई कर लूँ।”

दोस्तों, आज की कहानी हमें सिखाती है कि बड़े ऑफर पर सोच-समझकर जाना चाहिए। गलती से बचना चाहिए। और जब मदद चाहिए तो महिला आयोग और पुलिस से संपर्क करें।

आज के जन्मदिन वालों को बर्थडे बिस्मिल्ला।
आज जयपुर की आंचल कुमारी, सूरत की पिंटू, बंटू यादव और बदायूं के सूर्यकांत गुर्जर का जन्मदिन है। इन सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

कुलदीप राणा कहते हैं — सच्ची घटनाएँ हमें जागरूक करती हैं।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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