(PART 2) करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था
भाग 2: शादी का मंडप, परिवार का नया अध्याय और अनंत आभार
शादी का दिन नोएडा के पास एक खूबसूरत गांव में तय हो गया था। राजेंद्र ने शीतल के लिए खुद शादी का मंडप सजाया था। लाल और सफेद रंगों से सजा हुआ, पीछे गुलाबों की माला, चारों तरफ फूलों की छतरी। अमन को राजेंद्र ने खुद गाड़ी से ले आया था। अमन ने सोचा था कि शादी में वो ज्यादा खर्च होगा, लेकिन राजेंद्र ने कहा था, “बेटा, तू मेरे लिए सिर्फ शादी करना है, मेरी तरफ से कोई दिखावा नहीं चाहिए।” अमन ने चुपचाप सिर हिलाया था। उसने सोचा था कि वो गरीब लड़का है, जूस का ठेला चलाता है, लेकिन आज वो करोड़पति के घर में दुल्हन बन रही है।
शीतल के कपड़े देखकर अमन की आंखें भर आईं। शीतल ने पहली बार अपनी पुरानी शादी की याद दिलाई। उसने कहा, “अमन, आज मैं तूसे अपनी सच्चाई सुनाऊंगी।” अमन ने मुस्कुराकर कहा, “मुझे कुछ छिपाने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हें सिर्फ सम्मान देना चाहता हूं।” शीतल ने अमन के हाथ में हल्का सा हाथ डाल दिया और फुसफुसाया, “आज से हम एक हैं।”

फेरे शुरू हुए। पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे। अमन और शीतल एक दूसरे के साथ-साथ फेरे ले रहे थे। शीतल की आंखों में खुशी के साथ आंसू थे। उसे अपनी पहली शादी याद आ रही थी, लेकिन आज उसके मन में डर नहीं था। अमन ने सातवें फेरे के बाद शीतल की तरफ देखकर कहा, “मैं आपसे एक वादा करता हूं। मैं आपको कभी किसी चीज के लिए मजबूर नहीं करूंगा। हम दोनों मिलकर जिंदगी के फैसले करेंगे।” शीतल की आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने कहा, “और मैं वादा करती हूं कि मैं आपके साथ हर मुश्किल में खड़ी रहूंगी।”
राजेंद्र दूर खड़ा सब देख रहा था। उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे। शादी के बाद राजेंद्र ने अमन को अपने पास बुलाया और कहा, “बेटा, यह कागज लो।” अमन ने पूछा, “यह क्या है?” राजेंद्र ने कहा, “तुम्हारे नाम कुछ संपत्ति कर रहा हूं।” अमन ने कागज लेने से इंकार कर दिया। बोला, “अंकल, मुझे इसकी जरूरत नहीं है।” राजेंद्र ने कहा, “यह तुम्हें खरीदने के लिए नहीं है। यह एक पिता की तरफ से अपने बेटे के लिए है.”
अमन कुछ नहीं बोला। राजेंद्र ने कहा, “तुमने मुझे यह सिखाया है कि असली अमीरी बैंक खाते में नहीं, इंसान के चरित्र में होती है। इसलिए आज मुझे लगता है कि मेरी संपत्ति का सही हकदार वही इंसान है जो उसके पीछे नहीं भागता.” अमन की आंखों में आंसू आ गए। उसने कागज ले लिया लेकिन उसने कहा, “अंकल, मैं वादा करता हूं कि इस संपत्ति का इस्तेमाल सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं, जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी करूंगा.”
शादी के बाद अमन ने जूस का अपना काम बंद नहीं किया। राजेंद्र ने उसकी मदद से शहर में एक बड़ी जूस और हेल्थ ड्रिंक की दुकान शुरू करवाई। कुछ ही समय में अमन ने अपने काम को इतना बढ़ाया कि उसके पास कई कर्मचारी काम करने लगे। लेकिन अमन में कोई घमंड नहीं आया। वह आज भी सुबह उठकर सबसे पहले अपनी दुकान पर जाता था। उसने राजेंद्र को बताया, “अंकल, जूस का ठेला मेरी शुरुआत है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं इतना बड़ा बन जाऊंगा। लेकिन आपकी भरोसा ने मुझे मजबूत बनाया है.”
एक दिन वही बुजुर्ग महिला उसके पास आई जिसे उसने कभी पैसे ना होने पर मुफ्त जूस पिलाया था। अमन ने उसे पहचान लिया। वह तुरंत उठकर उसके पास गया। बोला, “अम्मा, आप बैठिए।” महिला ने कहा, “बेटा, अब तो तुम्हारी बड़ी दुकान हो गई। मुझे पहचान लिया।” अमन मुस्कुराकर बोला, “अम्मा, जिसने मुझे दुआ दी हो उसे मैं कैसे भूल सकता हूं?” शीतल यह सब देख रही थी। उसने मुस्कुराकर कहा, “अमन, आपने अपना वादा निभा दिया।”
अमन ने पूछा, “कौन सा?” शीतल बोली, “आपने कहा था कि अगर कभी आपके पास पैसा आया तो आप जरूरतमंद बच्चों की मदद करेंगे.” अमन ने कहा, “हां, और वह काम अभी शुरू हुआ है.” कुछ महीनों बाद अमन ने गरीब बच्चों के लिए एक छोटा सा शिक्षा केंद्र खुलवाया। वहां उन बच्चों को पढ़ाया जाने लगा जिनके माता-पिता उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे। राजेंद्र अक्सर वहां जाता और बच्चों को देखकर खुश होता।
एक दिन उसने अमन से कहा, “बेटा, जब तुम पहली बार मेरे घर आए थे तो तुमने कहा था कि बिना मेहनत के ज्यादा पैसे लेने की आदत नहीं डालना चाहता। आज तुम करोड़ों की संपत्ति के बीच खड़े हो। लेकिन तुम्हारे अंदर कोई बदलाव नहीं आया.” अमन ने मुस्कुराकर कहा, “अंकल, आपने मुझे पैसा नहीं दिया। आपने मुझे परिवार दिया.”
राजेंद्र की आंखों में आंसू आ गए। वो बोला, “नहीं बेटा, परिवार तुमने मुझे दिया है.”
दोस्तों, इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिंदगी में इंसान की कीमत उसकी जेब से नहीं उसके चरित्र से तय होती है। अमन के पास पैसा नहीं था लेकिन उसके पास ईमानदारी थी। शीतल के पास एक टूटा हुआ अतीत था। लेकिन उसके अंदर फिर से खुश होने की हिम्मत थी। राजेंद्र के पास करोड़ों की संपत्ति थी। लेकिन वह अपनी बेटी के लिए सिर्फ एक ऐसा इंसान चाहता था जो उसे सम्मान दे। और आखिरकार तीनों को वही मिला जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी। इसलिए दोस्तों, कभी किसी इंसान को उसके कपड़ों, उसके काम या उसकी आर्थिक स्थिति देखकर छोटा मत समझिए। क्योंकि हो सकता है जिसके पास आज कुछ नहीं है उसके पास कल पूरी दुनिया हो और हो सकता है जिसके पास आज करोड़ों रुपए हैं उसे भी जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत सिर्फ एक सच्चे इंसान की हो।
याद रखिए, पैसा इंसान को अमीर बना सकता है लेकिन संस्कार ही उसे बड़ा इंसान बनाते हैं। रिश्ते दौलत से नहीं भरोसे से टिकते हैं और सच्चा जीवन साथी वही है जो आपके अच्छे समय में नहीं बल्कि आपके बुरे समय में आपका हाथ पकड़ कर कहे “मैं तुम्हारे साथ हूं”. दोस्तों, यहां पर कहानी का अंत होता है और यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताइएगा और हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लीजिएगा क्योंकि मैं आप लोगों के लिए एक से बढ़कर एक कहानियां लेकर आता रहता हूं। धन्यवाद।