महिला ने दुकान पर नौकर रख लिया/पति ने पत्नी को नौकर संग देख लिया/
जोधपुर का गुप्त प्रेम त्रिकोण: पत्नी और जेठानी की गलतियाँ, नौकर के साथ इश्क़ और मौत का आखिरी चैप्टर
राजस्थान के जोधपुर जिले में बिरामी नाम का एक छोटा सा गाँव है। वहाँ रहता है नवीन कुमार। उसकी छोटी सी जूते-चप्पल की दुकान गाँव की एकमात्र दुकान है। नवीन ने इस दुकान से अच्छे पैसे कमाए और एक आलीशान महल जैसा घर बना रखा है। वह एक काला रंग का मर्द है। इसकी शादी मुश्किल से हो पाती थी। आखिरकार रूपा नाम की लड़की से उसकी शादी हो गई। रूपा देखने में बहुत खूबसूरत और जवान थी, लेकिन पाँव से विकलांग थी। उसके साथ एक विधवा भाभी भी थी — दिव्या देवी। दिव्या के पति कई साल पहले गुजर चुका था। वह घर संभालती थी, लेकिन उसके चाल-चलन में कुछ खासा खासा था।
नवीन कुमार की दुकान अच्छी चल रही थी। वह रोज पैसे कमा लेता और घर में आराम से रहता। लेकिन उसकी पत्नी रूपा और भाभी दिव्या दोनों में कुछ ऐसा शुरू हो गया था कि गाँव में सब बातें करने लगे।
रूपा देवी का नया सपना
दो-चार महीनों बाद रूपा देवी ने अपने पति नवीन से कहा, “मुझे भी इस गाँव में कपड़े बेचने की दुकान खोलनी है।” नवीन ने हँसकर कहा, “ठीक है, मैं दो दिन में दुकान खुलवा देता हूँ।” नवीन ने एक लड़के को बुलाया और कहा, “सुधीर, मेरी पत्नी रूपा की दुकान पर काम करेगा।” सुधीर ने कहा, “हाँ, सर।” अगले दिन सुधीर रूपा की दुकान पर काम करने लगा। रूपा और सुधीर हर रोज सुबह दुकान पर आते, दिन भर कपड़े बेचते और शाम को घर लौट जाते थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातें बढ़ने लगीं।
रूपा सोचती, “सुधीर अच्छा लड़का है, मेरे साथ वक्त बिताता है।” सुधीर सोचता, “रूपा बहुत खूबसूरत है, मैं उसकी जरूरत पूरी कर दूँगा।” दोनों एक-दूसरे के बिना रह नहीं पाते थे।

दिलबाग सिंह से रिश्वत
एक दिन रूपा परेशान हुई। दुकान पर ज्यादा ग्राहक आ रहे थे। वह सोचती, “किसी नौकर को रख लूँ।” नवीन ने सुधीर को ही रख लिया। कुछ दिनों बाद रूपा की दुकान चलने लगी।
अब दिव्या देवी की बारी थी। दिव्या ने अपने देवर नवीन से कहा, “भैया, मुझे भी ब्यूटी पार्लर की दुकान खोलनी है।” नवीन ने कहा, “पैसे कहाँ से आएँगे?” दिव्या ने साहूकार दिलबाग सिंह के पास जाकर ₹5,000 माँगे। दिलबाग ने कहा, “पैसे दूँगा, लेकिन बदले में एक रात मेरे साथ गुजारो।” दिव्या ने हाँ कर दी।
दो रातें — एक जाल
27 मई 2026 की रात। दिव्या और दिलबाग ने गुप्त रूप से मिलकर एक कमरे में जाते हैं। सुबह फिर मिलते हैं। दिव्या कहती, “मैं अकेली हूँ, तुम्हारा साथ चाहिए।” दिव्या ने सुधीर को भी अपने घर बुलाना शुरू कर दिया। सुधीर और दिव्या के बीच इश्क़ शुरू हो गया।
रूपा भी सुधीर को बुलाती और कहती, “कल फिर मिलना।” दोनों औरतें सुधीर को एक साथ बुलातीं और रात गुजारतीं। सुधीर अब इन दोनों के बीच फँस चुका था। वह कहता, “मालकिन दिव्या और रूपा, मैं तैयार हूँ।”
26 जून 2026 — टूटती योजना
नवीन दो दिन के लिए अपनी बहन नीलम के घर गया। रूपा और दिव्या अकेली रह गईं। दोनों ने सुधीर को बुलाया। दोनों औरतें सुधीर के साथ रात गुजारतीं। सुधीर अब खुश था।
अगले दिन नवीन ने कहा, “मैं दो दिन के लिए बाहर जाऊँगा।” रूपा खुश हुई। दोनों औरतें फिर सुधीर को बुलाईं।
20 जुलाई 2026 — हॉस्पिटल की खबर
दिव्या की तबीयत खराब हो गई। नवीन उसे अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने कहा, “तुम्हारी भाभी प्रेग्नेंट है।” नवीन को लगा जैसे गाँव का आग लगा दिया। वह चुपचाप कुछ दवाइयाँ दिलवा के घर आ गया।
घर पहुँचते ही उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने दिव्या से पूछा, “भाभी, तुमने किसके साथ मुंह काला किया?” दिव्या चुप रही। नवीन गुस्सा होकर उठा और चाकू उठा लिया।
आखिरी हत्याएँ
नवीन ने सबसे पहले दिव्या का गला चाकू से काट दिया। फिर रूपा को घसीटकर कमरे में ले गया, उसके हाथ-पैर रस्सी से बाँध दिए, गैस पर चाकू गर्म किया और संवेदनशील हिस्से में डाल दिया। रूपा मौके पर ही मर गई।
नवीन ने पास के पुलिस स्टेशन में जाकर खुद को सरेंडर कर दिया। बोला, “मेरी पत्नी और भाभी हमारे ही नौकर सुधीर के साथ गलत रिश्ते में थीं। मैंने बदला लिया।”
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों लाशों का पोस्टमार्टम करवाया। नवीन को हत्या का केस दर्ज हुआ। कोर्ट में नवीन ने साफ-साफ कहा, “मेरी पत्नी और भाभी हमारे नौकर सुधीर के साथ गलत काम करती थीं। मैंने उन्हें मारा।”
क्या सजा होगी?
जज साहब अब फैसला सुनाएँगे। लेकिन एक बात तय है — गाँव में अब एक नई कहानी चल रही है। जिसका नाम है “गलतियाँ और बदला”।
नवीन ने अपनी पत्नी और भाभी के साथ जो किया, क्या वह सही था या गलत?
कृष्णा की कहानी में भी पिता की गलतियाँ बदले लेती थीं।
कुलदीप राणा कहते हैं — गलती करने वालों को अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। परिवार को एकजुट रखना चाहिए।
दोस्तों, आप क्या सोचते हैं? कमेंट में जरूर लिखें।
मिलते हैं अगली कहानी में।
जय हिंद। वंदे मातरम।