संभल मर्डर केस: पति के लापता होने से शव के टुकड़े मिलने तक, पुलिस जांच में सामने आई कथित खौफनाक साजिश
संभल मर्डर केस: पति के लापता होने से शव के टुकड़े मिलने तक, पुलिस जांच में सामने आई कथित खौफनाक साजिश
संभल, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से जुड़ा यह कथित हत्या मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। एक व्यापारी के अचानक लापता होने के बाद उसके शव के क्षत-विक्षत हिस्से मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई उसकी पत्नी और एक परिचित व्यक्ति की ओर गई। हालांकि, इस मामले में सामने आई कई बातें पुलिस जांच और आरोपों पर आधारित हैं तथा अंतिम सत्य अदालत की कार्यवाही के बाद ही तय होगा।
मामला चंदौसी थाना क्षेत्र के चुन्नी मोहल्ले से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां करीब 40 वर्षीय व्यापारी राहुल कुमार अपने परिवार के साथ रहता था। बताया जाता है कि राहुल का बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता था। कम उम्र में माता-पिता को खोने के बाद उसने पढ़ाई छोड़कर काम करना शुरू किया और लंबे समय की मेहनत के बाद जूतों का कारोबार खड़ा किया।
राहुल ने वर्ष 2010 में रूबी से शादी की थी। दंपती के दो बच्चे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए राहुल लगातार काम करता रहा। लेकिन पुलिस के मुताबिक, समय के साथ पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव पैदा होने लगा और इसी बीच कुछ अन्य लोगों से रूबी की कथित नजदीकियों की बात सामने आई।
18 नवंबर को अचानक गायब हुआ राहुल
बताया जाता है कि 18 नवंबर 2025 को राहुल ने घर से बाहर जाने की बात कही थी। उसने कथित तौर पर अगले दिन लौटने की बात कही, लेकिन वह वापस नहीं आया। रात बीत गई और अगले दिन भी उसका कोई पता नहीं चला।
रूबी ने राहुल के मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला। परिवार और रिश्तेदारों से पूछताछ की गई। राहुल के देहरादून जाने की जानकारी भी सामने आई, जिसके बाद वहां भी उसके बारे में पता लगाया गया। लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।
आखिरकार 24 नवंबर को राहुल की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई गई। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और उसके मोबाइल तथा अन्य संभावित सुरागों की जांच शुरू कर दी।
15 दिसंबर को मिला ऐसा सुराग जिसने बदल दी पूरी जांच
राहुल के घर से लगभग 800 मीटर दूर एक सुनसान स्थान पर 15 दिसंबर की सुबह लोगों को एक बड़ा पॉलिथीन बैग दिखाई दिया। स्थानीय लोगों को संदेह हुआ और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान बैग से मानव शरीर के अवशेष मिलने की बात सामने आई। शरीर के कुछ हिस्से अलग-अलग स्थानों पर पाए गए। इस वजह से मृतक की तत्काल पहचान करना मुश्किल था।
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण सुराग सामने आया—बरामद हाथ पर ‘राहुल’ नाम का टैटू बताया गया। पुलिस ने राहुल की पुरानी तस्वीरों की जांच की तो उसके हाथ पर भी इसी तरह का टैटू दिखाई दिया।
इसके बाद पुलिस का ध्यान राहुल की गुमशुदगी और बरामद अवशेषों के बीच संभावित संबंध की ओर गया।

पत्नी से पूछताछ के बाद बढ़ा संदेह
पुलिस ने राहुल की पत्नी रूबी से पूछताछ की। कथित तौर पर शुरुआत में उसने बरामद अवशेषों और कपड़ों को राहुल का मानने से इनकार किया। लेकिन पुलिस ने मोबाइल फोन, तस्वीरों और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू की।
जांच में राहुल और रूबी की पुरानी तस्वीरें सामने आईं। पुलिस के अनुसार, तस्वीरों में राहुल द्वारा पहनी गई टी-शर्ट और बरामद सामान के बीच समानता मिली। टैटू से भी पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण सुराग मिला।
इसके बाद पुलिस ने राहुल के परिवार, पड़ोसियों और बच्चों से भी पूछताछ की।
जांच में सामने आया कथित प्रेम संबंध
पुलिस की जांच के अनुसार, रूबी की पहचान अभिषेक नाम के एक युवक से हुई थी। कथित तौर पर उसका घर आना-जाना बढ़ गया था। परिवार के बच्चों ने पुलिस को बताया कि अभिषेक अक्सर राहुल की गैरमौजूदगी में घर आता था।
इसके बाद कहानी में गौरव नाम के एक अन्य व्यक्ति का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, गौरव और रूबी के बीच भी कथित नजदीकियां बढ़ी थीं।
जांच एजेंसियों ने मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच की। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस ने कथित तौर पर रूबी और गौरव के बीच संपर्क की बात कही।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए ऐसे आरोपों को अदालत में साबित किया जाना जरूरी है।
18 नवंबर की रात क्या हुआ?
पुलिस की जांच के अनुसार, 18 नवंबर की रात राहुल वास्तव में कहीं बाहर नहीं गया था। कथित तौर पर वह घर के आसपास ही था और अपनी पत्नी की गतिविधियों पर नजर रखना चाहता था।
पुलिस के मुताबिक, उसी रात गौरव कथित तौर पर घर पहुंचा। इसके बाद राहुल ने दोनों को एक साथ देख लिया और विवाद शुरू हो गया।
जांच में आरोप लगाया गया कि विवाद के दौरान राहुल पर हमला किया गया और उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने की कथित योजना बनाई गई।
यही वह हिस्सा है जिसे पुलिस ने अपनी जांच में हत्या की साजिश से जोड़कर देखा।
शव को छिपाने की कथित कोशिश
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव को कई हिस्सों में काटकर अलग-अलग पॉलिथीन बैग में रखा गया। जांच में एक ग्राइंडर मशीन का भी उल्लेख सामने आया, जिसे कथित तौर पर शव को काटने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद घर से खून के निशान मिटाने और दूसरे सबूत हटाने की कोशिश की गई।
इसके बाद शव के कुछ हिस्सों को कथित तौर पर नदी और नाले के आसपास अलग-अलग स्थानों पर फेंका गया। राहुल का मोबाइल फोन और कपड़े भी कथित तौर पर सबूत मिटाने के उद्देश्य से ठिकाने लगाए गए।
इसी दौरान बच्चों को घटना की वास्तविकता से दूर रखने की कोशिश किए जाने का भी पुलिस ने आरोप लगाया।
गुमशुदगी की रिपोर्ट से लेकर गिरफ्तारी तक
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद रूबी ने कुछ दिनों तक राहुल की तलाश करने का दिखावा किया और फिर 24 नवंबर को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
लेकिन पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मोबाइल रिकॉर्ड, लोगों के बयान, वाहनों और अन्य सामान से जुड़े सुराग सामने आते गए।
जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर एक ग्राइंडर मशीन, बाइक, स्कूटी और किराए की कार समेत कई वस्तुओं को जांच के दायरे में लिया। इसके बाद रूबी और गौरव को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई।
बच्चों के लिए सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू राहुल के दो बच्चे हैं। जिन बच्चों ने अपने पिता के वापस आने का इंतजार किया, उन्हें बाद में पता चला कि उनके पिता अब कभी घर नहीं लौटेंगे।
यह मामला केवल एक हत्या की जांच नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि पारिवारिक विवाद, विश्वासघात और कथित अवैध संबंध किस तरह बेहद गंभीर अपराध में बदल सकते हैं।
फिलहाल इस मामले में सामने आए आरोपों और पुलिस की जांच को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अदालत में पेश होने वाले सबूत और न्यायिक प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषी कौन है।