गर्त में गिरती मर्यादा: मेरठ के ईंट भट्टे की एक दर्दनाक दास्तान
गर्त में गिरती मर्यादा: मेरठ के ईंट भट्टे की एक दर्दनाक दास्तान
उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला अपनी ऐतिहासिक गरिमा के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी जिले के एक छोटे से गाँव सरसोल में एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल नैतिकता को तार-तार किया, बल्कि यह भी दिखाया कि गरीबी और लालच का मिश्रण किस तरह अपराध की नई इबारत लिख सकता है।
1. अभावों में पलता परिवार और सादगी
सरसोल गाँव में ऋषिपाल सिंह नाम का एक मेहनती व्यक्ति रहता था। वह गाँव से कुछ दूरी पर स्थित एक ईंटों के भट्टे पर मजदूरी का काम करता था। ऋषिपाल का जीवन संघर्षों से भरा था, क्योंकि वह अक्सर बीमार रहता था, लेकिन घर की गरीबी उसे आराम करने की इजाजत नहीं देती थी। उसके परिवार में उसकी पत्नी रीटा देवी और दो मासूम बेटियाँ, मीना (11) और पल्लवी (9) थीं।
रीटा देवी स्वभाव से शांत और दिखने में काफी सुंदर महिला थी। वह घर की चारदीवारी के भीतर ही अपनी गृहस्थी संभालती थी। लेकिन पति की लगातार गिरती सेहत और घर की तंगहाली को देखकर रीटा के मन में चिंता घर करने लगी। एक दिन उसने ऋषिपाल से कहा, “आप अकेले इतना कष्ट उठाते हैं, क्यों न मैं भी आपके साथ भट्टे पर काम/ करना शुरू कर दूँ? इससे घर की गरीबी कुछ कम होगी।” ऋषिपाल ने अपनी लाचारी को देखते हुए हामी भर दी।
2. ईंट भट्टा: साजिशों की पहली बिसात
5 जनवरी 2026 से रीटा और ऋषिपाल ने साथ में काम करना शुरू किया। उसी भट्टे पर राजन नाम का एक युवक भी काम करता था। राजन महिलाओं के प्रति दूषित/ मानसिकता रखता था। जैसे ही उसकी नजर रीटा की सुंदरता पर पड़ी, उसके मन में खोट आ गया। उसने जान-बूझकर ऋषिपाल से दोस्ती बढ़ाई और रीटा की तारीफों के पुल बाँधने लगा ताकि वह उनके करीब आ सके।
दोपहर के समय, जब ऋषिपाल पास के ट्यूबवेल पर पानी लेने गया, राजन ने रीटा से बातचीत शुरू की। राजन की बातों में एक अजीब सा आकर्षण था जो रीटा को धीरे-धीरे अपनी ओर खींचने लगा। उस शाम दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर बदल लिए और यहीं से मर्यादा की लक्ष्मण रेखा टूटने की शुरुआत हुई।
3. 15 जनवरी: जंगल की ओट और अनैतिकता/ की शुरुआत
समय बीतता गया और रीटा और राजन के बीच फोन पर घंटों बातें होने लगीं। 15 जनवरी को ऋषिपाल की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और उसने काम पर जाने से मना कर दिया। उसने रीटा को भी रुकने को कहा, लेकिन रीटा ने राजन से मिलने की बेताबी में बहाना बनाया कि “बेटियों के भविष्य के लिए काम करना जरूरी है।”
भट्टे पर पहुँचते ही राजन ने मौका पाकर रीटा को पास की झाड़ियों के पीछे चलने को कहा। वहां उन दोनों के बीच अनुचित/ संबंध/ कायम हुए। यह सब उनकी आपसी रजामंदी से हो रहा था। लेकिन नियति का संकेत देखिए, उस समय झाड़ियों में मौजूद कई कीड़े और बिच्छू/ उनके शरीरों पर चढ़ गए थे, लेकिन वे अपनी हवस/ में इतने अंधे थे कि उन्हें इसका अहसास नहीं हुआ। काम खत्म होने के बाद राजन ने कीड़ों को हटाया, पर यह तो बस एक भयानक अंत की शुरुआत थी।