खूबसूरत भाभी ने अपने ही घर में कर दिया कां*/*ड/ पुलिस के होश उड़ गए/
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माँ और बेटी का हत्याकांड: वध और गलत रिश्तों का रहस्य
राजस्थान के भरतपुर जिले के अनपुर गांव में २५ जून २०२६ को एक अंधेरी और भयानक घटना घटी। भरतपुर के एक छोटे से गांव में रहने वाली बरखा देवी, ३२ साल की विधवा महिला, अपने घर की सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा चुकी थी। सात साल पहले उसके पति बलदेव सिंह की कैंसर की वजह से मौत हो गई थी। बरखा देवी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने घर की सारी जिम्मेदारियां संभालीं, अपनी एकमात्र बेटी नेहा को पढ़ाने की कोशिश की और अपने घर के पास छोटा सा कपड़े की दुकान खोल ली। दुकान से अच्छा मुनाफा होने लगा और बरखा देवी ने एक अच्छा प्लॉट भी खरीद लिया। गांव के मर्द लोग उसकी खूबसूरती देखकर मंत्रमुग्ध रह जाते थे, लेकिन बरखा देवी हमेशा दूरी बनाकर रखती थी।
बरखा देवी की एकमात्र बेटी नेहा, १७ साल की लड़की, कक्षा १२ में पढ़ रही थी। लेकिन नेहा की मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता था। वह बार-बार अपनी मां से कहती, “मां, मैं १२वीं पास कर लूं तो पढ़ाई बंद कर दूंगी।” बरखा देवी बार-बार समझाती, “बेटी, पढ़ाई जीवन की नींव है, तुम्हें पढ़ना चाहिए।” नेहा अपनी मां की बातों को कान से निकाल देती थी। दोनों मां-बेटी के बीच एक अजीब सी दूरी थी।
घर में इंद्रजीत सिंह नाम का एक देवर भी रहता था। इंद्रजीत सिंह पैसे से ट्रक चलाता था। वह शराब, कबाब और औरतों का बड़ा शौकीन था। गांव की जो भी खूबसूरत महिला इंद्रजीत की नजर में पड़ती, वह उसे पैसे देकर बिस्तर तक ले आता। जब भी इंद्रजीत ट्रक लेकर गांव से बाहर जाता, तो महीने में सिर्फ एक दिन घर आता।
सुबह के आसपास ८:०० बजे, नेहा अपनी मां बरखा से कहा, “मां, आज मेरी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। मैं १२वीं पास कर लूं तो पढ़ाई बंद कर दूं।” बरखा देवी ने देर तक समझाया, लेकिन नेहा अपने स्कूल चली गई। थोड़ी देर बाद बरखा देवी भी अपनी दुकान पर पहुंच गई। दो घंटे बाद लता, उनकी पड़ोसन, दुकान पर आई और बोली, “बरखा, मेरा बेटा प्रकाश १२वीं पास कर चुका है, लेकिन काम नहीं मिला। उसे तुम्हारी दुकान पर रख लो, वह थोड़ा काम सिखा दो।” बरखा देवी ने हामी भर दी। लता चली गई और प्रकाश को बुलाया। प्रकाश सुबह ५:०० बजे तक दुकान पहुंच गया।

बरखा देवी की नजर प्रकाश पर पड़ते ही उसकी नियत बदल गई। प्रकाश कद-काठी अच्छा, नौजवान और हैंडसम था। बरखा देवी ने सोचा, “इस लड़के को रखने से मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं।” उसने प्रकाश को ५००० रुपये प्रति माह की नौकरी दे दी। प्रकाश ने खुशी से हामी भरी और काम शुरू कर दिया। प्रकाश बहुत मेहनती और ईमानदार था। हर रोज दुकान पर आता, काम करता और शाम को घर चला जाता। लेकिन बरखा देवी की नजरें अब प्रकाश पर टिक चुकी थीं।
कुछ दिनों बाद, १५ जून २०२६ की सुबह। नेहा अपनी मां से कहा, “मां, आज मेरी सहेली सलोनी का जन्मदन है, मैं उसके घर जाऊंगी।” बरखा देवी ने विरोध किया, लेकिन नेहा कहने लगी, “मां, मैं सुबह १० बजे जाऊंगी और ८:३० बजे वापस आऊंगी।” बरखा देवी मजबूर हो गई और नेहा को जाने दिया।
एक घंटे बाद बरखा देवी भी दुकान बंद करके घर की ओर चली। आधे घंटे बाद प्रकाश भी दुकान पर आ गया। बरखा देवी ने कहा, “प्रकाश, आज मैं अपने घर में अकेली हूं। मेरे पति गुजर चुके हैं, मैं बहुत तनहा हूँ।” प्रकाश समझ गया। बरखा ने ५००० रुपये दिए और कहा, “मुझे २००० रुपये और देना पड़ेगा, लेकिन तुम्हें मेरी हर इच्छा पूरी करनी पड़ेगी, सोना भी पड़ेगा।” प्रकाश ने हामी भर दी। बरखा ने दरवाजा बंद किया और दोनों बेडरूम में चले गए। वहां उन्होंने गलत रिश्ते शुरू कर दिए। दोनों की जरूरतें पूरी हो गईं। बरखा ने कहा, “किसी बात की फिक्र मत करो, मैं हमेशा पैसे दूंगी, लेकिन तुम्हें मेरी जरूरतों का ख्याल रखना पड़ेगा।”
इस तरह से बरखा देवी और प्रकाश का गलत रिश्ता शुरू हो गया। जब भी बरखा का मन करता, वह प्रकाश को पैसे देकर घर ले आती और दोनों रिश्ता शुरू कर देते। प्रकाश भी खुश रहता और बरखा भी।
फिर २ जुलाई २०२६ की सुबह। बरखा नेहा के लिए खाना बना रही थी। नेहा ने कहा, “मां, चाचा इंद्रजीत का फोन आया है।” बरखा ने गुस्से में कहा, “वह झूठ बोलता है, कभी घर नहीं आता।” नेहा स्कूल चली गई। ११ बजे तक बरखा भी दुकान पर पहुंच गई। प्रकाश आ गया। बरखा ने कहा, “आज मैं अकेली हूँ, साथ चलो।” दोनों घर गए। बार-बार रिश्ता शुरू हुआ। ११ बजे के बाद नेहा घर आई और चाचा इंद्रजीत को घर में देखकर बहुत खुश हुई। नेहा ने कहा, “चाचा, आज मेरा जन्मदन है, मैं स्कूल नहीं जाऊंगी।” इंद्रजीत ने हामी भरी और कहा, “कल हम खेत में जाएंगे।”
इंद्रजीत ने शराब की खरीदारी की और रात तक पीता रहा। रात ९ बजे के बाद वह घर पहुंचा। बरखा ने कहा, “अगले दिन तुम्हारे कमरे में आऊंगी।” इंद्रजीत नेहा को खाना खाने को भेज दिया और खुद लेट गया। १०:३० बजे के बाद बरखा नेहा को नींद में सोया समझकर उसके कमरे में गई और इंद्रजीत के साथ गलत रिश्ता शुरू कर दिया। दोनों रिश्ता पूरा कर लिया।
अगले दिन ३ जुलाई २०२६ को सुबह। नेहा ने कहा, “मां, आज चाचा का जन्मदन है, मैं स्कूल नहीं जाऊंगी।” बरखा ने हामी भरी। इंद्रजीत ने शराब खरीदी, नेहा को साथ ले जाकर खेत में पहुंचा। खेत में पहुंचते ही इंद्रजीत नेहा को अकेला देखा और उसकी नियत बदल गई। उसने नेहा को अकेला रखा, शराब दिया और जब नेहा थोड़ी नशे में चली गई, तो इंद्रजीत ने एक चारा की डोर ले ली और नेहा के गले पर रख दिया। उसने कहा, “चीखना मत, वरना गला काट दूंगा।” नेहा डरकर चुप रही। इंद्रजीत ने गंदा काम किया, नेहा की हिम्मत नहीं हुई। फिर उसने नेहा को मार डाला।
इंद्रजीत ने नेहा की लाश को बांधा, उसके सिर को काट लिया और मोटरसाइकिल पर बिठाकर गांव में लाया। घर पर पहुंचते ही नेहा उदास बैठी थी। बरखा ने पूछा, “बेटी, आज तू इतनी उदास क्यों है?” नेहा फूट-फूट कर रो पड़ी, “मां, चाचा ने मुझे… गंदा काम किया… मैं डर गई हूँ।”
बरखा के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने इंद्रजीत को बुलाया। इंद्रजीत गुस्से में आया। बरखा ने नेहा को ५००० रुपये दिए और कहा, “अभी चाचा को मार डालो।” दोनों ने इंद्रजीत के कमरे में जाकर उसका पेट में लोहे का सरिया घुसा दिया, चाकू से काट लिया और गला काट दिया। इंद्रजीत चीखने लगा, लेकिन कोई मदद नहीं आया। मां-बेटी ने इंद्रजीत की लाश का सिर काट लिया और घर छोड़ दिया।
पड़ोसियों ने आवाज सुनी तो दौड़कर आए। उन्होंने देखा कि इंद्रजीत की लाश बिछी हुई है, सिर अलग पड़ा है। पुलिस को बुलाया गया। करीब १ घंटे बाद पुलिस पहुंची। बरखा और नेहा को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
बार-बार पूछताछ में बरखा ने अपनी बेटी नेहा की पूरी कहानी बताई। नेहा भी रोते हुए सब कुछ मान लिया। दोनों ने अपने गलत रिश्ते और हत्याओं का कबूल किया।
प्रकाश ने भी अपनी बात कबूल की कि बरखा ने उसे ५००० रुपये देकर हर हफ्ते अपने साथ रिश्ता शुरू करवाया था। इंद्रजीत के साथ भी बार-बार ऐसा हुआ था। पुलिस ने पूरी तस्वीर सामने रख दी।
रायबरेली और भरतपुर के लोग इस घटना पर हैरान थे। कई लोग बोले, “मां-बेटी ने पति को मारने के बाद बेटी को भी मार डाला।” लेकिन कुछ लोग कहते थे, “घरेलू हिंसा का मामला था।”
कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। अब तक बरखा और नेहा दोनों को दोषी ठहराया गया है। आज भी दोनों राजस्थान की जेल में बैठी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है।