आधी रात घर लौटा पति, सामने खुला खौफनाक राज: बलिया के देवेंद्र राम हत्याकांड की पूरी कहानी
आधी रात घर लौटा पति, सामने खुला खौफनाक राज: बलिया के देवेंद्र राम हत्याकांड की पूरी कहानी
बलिया, उत्तर प्रदेश: 10 मई 2025 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के खरीद गांव में एक खेत के पास से आ रही तेज दुर्गंध ने स्थानीय लोगों को रोक दिया। झाड़ियों के बीच उन्हें प्लास्टिक की बोरियां और पॉलिथीन के पैकेट दिखाई दिए। शक होने पर ग्रामीणों ने उन्हें खुद छूने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस मौके पर पहुंची और जब संदिग्ध पॉलिथीन खोली गई, तो उसमें मानव शरीर के कटे हुए हाथ-पैर मिले। धड़ और सिर वहां नहीं था। देखते ही देखते यह मामला एक गुमशुदगी की जांच से बदलकर एक सनसनीखेज हत्या की जांच बन गया।
पुलिस के मुताबिक, बरामद शरीर के टुकड़ों की पहचान बाद में 62 वर्षीय देवेंद्र राम के रूप में हुई। देवेंद्र सीमा सड़क संगठन (BRO) में इलेक्ट्रिशियन के पद पर काम कर चुके थे और 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई उनकी पत्नी माया देवी और उसके कथित साथी अनिल यादव समेत कुछ अन्य लोगों तक पहुंची।
लेकिन इस पूरे मामले का सबसे अहम सुराग खुद देवेंद्र की बेटी ने पुलिस को दिया।
रिटायरमेंट के बाद बदल गई जिंदगी
देवेंद्र राम ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा नौकरी में बिताया था। सेवानिवृत्ति के बाद उनकी इच्छा थी कि वह परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिताएं। उनकी पत्नी माया देवी और तीन बच्चे थे—दो बेटियां और एक बेटा।
बच्चे बड़े हुए तो पढ़ाई और शादी के कारण अलग-अलग शहरों में रहने लगे। बड़ी बेटी अमली गौतम शादी के बाद जयपुर में रहने लगी, जबकि दूसरी बेटी सुप्रिया प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोटा में रह रही थी। बेटा भी पढ़ाई के सिलसिले में घर से बाहर रहता था।
देवेंद्र ने नौकरी के दौरान कमाई गई रकम और रिटायरमेंट के बाद मिले पैसों से परिवार के भविष्य के लिए एक मकान भी बनवाया था। बलिया शहर के बहादुरपुर इलाके में बना यह घर उनके लिए सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की यादों से जुड़ी जगह था।
लेकिन बच्चे दूर होते गए और घर में धीरे-धीरे सन्नाटा बढ़ता गया।
देवेंद्र का अधिकतर समय अपने पैतृक गांव हरिपुर में गुजरने लगा। वहां खेती, पुराने दोस्त और ग्रामीण जीवन उन्हें सुकून देता था। दूसरी तरफ माया शहर वाले घर में रहने लगी।

घर में आया अनिल यादव
पुलिस जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, इसी दौरान माया की मुलाकात अनिल यादव नाम के करीब 30 वर्षीय ट्रक ड्राइवर से हुई।
बताया गया कि अनिल सामान पहुंचाने के सिलसिले में इलाके में आता-जाता था। शुरुआत में वह माया के घरेलू कामों में मदद करने लगा। कभी बाजार से सामान लाना हो, बिजली या प्लंबिंग से जुड़ा कोई काम हो—माया जरूरत पड़ने पर उसे फोन करने लगी।
धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं।
पुलिस के अनुसार, बाद में दोनों के बीच कथित प्रेम संबंध बन गया। अनिल का माया के घर आना-जाना बढ़ गया और वह कई बार वहां रुकने भी लगा।
इसी दौरान देवेंद्र को पत्नी के व्यवहार में बदलाव महसूस होने लगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब देवेंद्र माया को फोन करते तो कई बार उसका फोन व्यस्त मिलता। आसपास के लोगों से भी उन्हें ऐसी बातें सुनने को मिलीं कि उनकी गैरमौजूदगी में एक युवक अक्सर घर आता है।
देवेंद्र ने पहले इन बातों पर सीधे भरोसा नहीं किया।
आधी रात का वह दृश्य
कथित तौर पर देवेंद्र ने माया और अनिल के संबंधों की सच्चाई खुद जानने का फैसला किया।
एक दिन वह शहर वाले घर पहुंचे और कुछ समय बाद माया से कहा कि वह वापस अपने गांव जा रहे हैं। लेकिन पुलिस जांच में सामने आई कहानी के अनुसार, देवेंद्र वास्तव में दूर नहीं गए। वह आसपास ही रहे और रात होने का इंतजार करते रहे।
आधी रात के करीब वह अचानक घर लौटे।
पुलिस के अनुसार, उसी समय उन्होंने माया को अनिल के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया।
इसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया। देवेंद्र ने कथित तौर पर माया से अनिल से संबंध खत्म करने और उसे घर से दूर रखने को कहा।
लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ।
जांच के मुताबिक, दोनों के बीच कई बार झगड़ा हुआ। देवेंद्र माया को अपने साथ गांव ले जाना चाहते थे, जबकि माया शहर में ही रहना चाहती थी।
इसी तनाव के बीच कथित तौर पर हत्या की साजिश तैयार हुई।
9 मई की रात क्या हुआ?
पुलिस की जांच के मुताबिक, इस साजिश में अनिल के साथ मिथिलेश और सतीश नाम के दो अन्य लोग भी शामिल थे। हालांकि मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होना है।
पुलिस के अनुसार, 9 मई 2025 को देवेंद्र की छोटी बेटी सुप्रिया कोटा से लौट रही थी। उसे लेने के लिए देवेंद्र को बक्सर रेलवे स्टेशन जाना था।
यही मौका कथित तौर पर आरोपियों ने चुना।
माया ने देवेंद्र से कहा कि वह भी सुप्रिया को लेने जाएगी और घर से ही उसे रिसीव कर लेगी। देवेंद्र इस बात पर सहमत हो गए और हरिपुर से बहादुरपुर स्थित अपने घर पहुंचे।
पुलिस के मुताबिक, उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि घर के अंदर कुछ लोग पहले से छिपे हुए थे।
माया ने सामान्य व्यवहार किया। फिर कथित तौर पर उसने देवेंद्र के लिए चाय बनाई, जिसमें नशीला पदार्थ मिलाया गया था।
चाय पीने के बाद देवेंद्र बेहोश हो गए।
इसके बाद पुलिस के अनुसार, अनिल, मिथिलेश और सतीश कमरे में पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने देवेंद्र का गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
इसके बाद शव को ठिकाने लगाने की कथित योजना शुरू हुई।
शव को बोरे में डालकर सुनसान जगह ले गए
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपियों ने शव को एक बोरे में रखा और बोलेरो वाहन से दियारा क्षेत्र की ओर ले गए।
वहां कथित तौर पर शव के कई टुकड़े किए गए। इसके बाद शरीर के अलग-अलग हिस्सों को पॉलिथीन में पैक कर सिकंदरपुर क्षेत्र के खरीद गांव के सुनसान इलाके में फेंक दिया गया।
जांच के मुताबिक, शव का धड़ एक सूखे कुएं में फेंका गया, जबकि सिर को घाघरा नदी में बहाने की बात सामने आई।
इसके बाद माया अपनी बेटी सुप्रिया को लेने बक्सर रेलवे स्टेशन चली गई।
घर लौटने पर सुप्रिया ने जब अपने पिता के बारे में पूछा, तो कथित तौर पर माया ने बताया कि देवेंद्र उसे लेने स्टेशन के लिए निकले थे लेकिन वहां पहुंचे ही नहीं। उनका फोन भी बंद आ रहा था।
इसके बाद 10 मई को माया ने बलिया शहर कोतवाली में देवेंद्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
बेटी के एक सवाल ने खोल दिया पूरा राज
लेकिन कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब सुप्रिया को अपनी मां की बातों पर शक हुआ।
उसने देवेंद्र के मोबाइल फोन पर कॉल किया।
तभी उसे पता चला कि फोन घर के अंदर ही मौजूद था।
सुप्रिया के मन में सवाल उठा—अगर उसके पिता उसे लेने बक्सर स्टेशन गए थे, तो उनका मोबाइल घर पर क्यों था?
यही सवाल आगे पुलिस जांच के लिए बड़ा सुराग बन गया।
सुप्रिया ने पुलिस से संपर्क किया और अपनी मां के कथित संबंधों तथा पिता के लापता होने के पीछे माया की संभावित भूमिका की जानकारी दी।
इसी बीच उसी दिन खरीद गांव के खेत से मानव शरीर के अंग मिलने की सूचना पुलिस को मिली।
अब दोनों घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ती नजर आने लगीं।
खेत से मिले हाथ-पैर, कुएं से बरामद हुआ धड़
पुलिस ने बरामद मानव अंगों की पहचान कराने की कोशिश शुरू की। आसपास के थानों में दर्ज हालिया गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाली गई।
इसी दौरान देवेंद्र राम की गुमशुदगी का मामला सामने आया।
पुलिस ने परिवार से संपर्क किया। सुप्रिया ने बरामद शरीर के अंगों को अपने पिता से जोड़ते हुए जांच में सहयोग किया।
पुलिस ने माया देवी से पूछताछ की। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान मामले में कई अहम जानकारियां सामने आईं।
माया की कथित निशानदेही पर 12 मई को एक सूखे कुएं से बोरे में बंद देवेंद्र का धड़ बरामद किया गया। कपड़ों और शारीरिक बनावट के आधार पर परिवार ने इसकी पहचान की।
हालांकि सिर की तलाश लंबे समय तक जारी रही।
पुलिस ने नदी और आसपास के इलाकों में भी तलाश की, लेकिन सिर बरामद होने की जानकारी सामने नहीं आई।
पुलिस पर फायरिंग का भी आरोप
मामले में अनिल यादव और सतीश के खिलाफ पुलिस से बचने की कोशिश के दौरान फायरिंग करने का भी आरोप सामने आया।
पुलिस के अनुसार, दोनों ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर गोली चलाई। इसके बाद हुई मुठभेड़ में अनिल के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इलाज के बाद उसे जेल भेजे जाने की बात पुलिस की ओर से कही गई।
मामले में माया देवी, अनिल यादव, मिथिलेश और सतीश को गिरफ्तार किया गया।
कई सवाल अब भी बाकी हैं
देवेंद्र राम की हत्या का यह मामला कई सवाल छोड़ता है।
क्या हत्या की साजिश पहले से बनाई गई थी? कथित साजिश में किसकी क्या भूमिका थी? शव को ठिकाने लगाने की पूरी योजना कैसे तैयार हुई? और इस मामले में अदालत के सामने कौन-कौन से सबूत पेश किए जाएंगे?
इन सभी सवालों का अंतिम जवाब न्यायिक प्रक्रिया में सामने आएगा।
फिलहाल पुलिस की जांच और अदालत में चलने वाली कानूनी प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि आरोपों में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक भूमिका क्या थी और उसके खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य किस हद तक आरोपों को साबित करते हैं।
एक रिटायर्ड कर्मचारी, एक परिवार, एक सुनसान घर और फिर खेत में मिली मानव शरीर की बोरियां—देवेंद्र राम हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
इस कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि किसी भी अपराध के पीछे दिखाई देने वाली पहली कहानी हमेशा पूरी सच्चाई नहीं होती। कई बार एक छोटा-सा सवाल—जैसे घर में मौजूद मोबाइल फोन—पूरे मामले की दिशा बदल देता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध वीडियो/रिपोर्ट में बताए गए घटनाक्रम को पत्रकारिता शैली में प्रस्तुत करता है। हत्या और साजिश से जुड़े आरोपों को अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक आरोप के