भतीजा और चाची खेत में गए थे/चाची ने कर दिया बड़ा कां**ड/
भतीजा और चाची खेत में गए थे/चाची ने कर दिया बड़ा कां**ड/
**मैं कुलदीप राणा।**
नमस्ते दोस्तों। आज हमारी कहानी शुरू होती है उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से। बलरामपुर जिले में अमवा नाम का एक छोटा सा गांव है। इसी अमवा गांव में रहते हैं वेद प्रकाश।
वेद प्रकाश के पास अपनी छ एकड़ जमीन है। वह खेती किसानी करता है। रोज सुबह चार बजे उठता है, खेत में काम करता है, शाम को थका हुआ घर लौटता है। खेती से उसने अच्छी कमाई की है। कई किसानों ने उसे देखा है कि वह मेहनती है, ईमानदार है।
वेद प्रकाश गरीब लोगों को ब्याज पर पैसे भी देता है। कभी भी किसी को परेशान नहीं करता। गरीब लोग उसकी बहुत इज्जत करते हैं। गांव वाले कहते हैं, “वेद प्रकाश जैसा इंसान कम मिलता है।” वह बहुत अच्छा पिता और पति भी था।
अब बात करते हैं उसके परिवार की। वेद प्रकाश की धर्मपत्नी साक्षी देवी है। साक्षी देखने में बहुत खूबसूरत हैं। उम्र करीब ३० साल। उनका शरीर युवा और आकर्षक है। साक्षी घर का सारा काम संभालती हैं। सुबह से शाम तक रसोई में, कपड़े धोने में, खेत के काम में मदद करती हैं।

साक्षी बहुत मेहनती हैं। लेकिन उनके मन में कुछ कमी महसूस होती थी। कभी-कभी वे उदास रहती थीं।
एक दिन साक्षी ने वेद प्रकाश से कहा, “स्वामी, इस गांव में कोई भी अच्छी ब्यूटी पार्लर की दुकान नहीं है। आप मुझे मेरी ब्यूटी पार्लर की दुकान खोलवा दो।”
वेद प्रकाश हंसकर बोले, “कोई बात नहीं पत्नी। मैं जल्दी ही तुम्हारी ब्यूटी पार्लर खोल दूंगा।”
साक्षी बहुत खुश हो गईं। लेकिन उनके मन में एक अजीब सा दर्द था।
वेद प्रकाश के साथ रात को सिर्फ एक कमरा था। दोनों सोते थे। लेकिन पिछले छ साल से वेद प्रकाश की शारीरिक समस्या थी। छ साल पहले खेत में जाते समय उनकी मोटरसाइकिल का हादसा हो गया था। एक ट्रैक्टर से टक्कर लग गई। प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोट लग गई। डॉक्टरों ने कहा, “भाई, अब आगे से कोई बच्चा नहीं पैदा होगा और आपकी पत्नी की इच्छाएं पूरी नहीं हो सकेंगी।”
यह बात वेद प्रकाश को बहुत परेशान करती थी। वे साक्षी को खुश नहीं रख पाते थे। लेकिन साक्षी खूबसूरत और युवा थीं। उनकी जरूरतें थीं। वे अकेलापन महसूस करने लगी थीं।
छह साल का अकेलापन उन्हें परेशान करता था। वे सोचने लगी थीं कि अब कोई काम करना होगा। वे दो बड़ी घटनाएं करने वाली थीं। लेकिन पति को कुछ पता नहीं था।
समय गुजरता गया। ६ जुलाई २०२६ को सुबह करीब नौ बजे वेद प्रकाश अपने घर में बैठे थे। साक्षी घर के काम में व्यस्त थीं। वेद प्रकाश ने कहा, “साक्षी, जल्दी से मेरा खाना तैयार कर दो। मैं खेत जाना है।”
साक्षी बोलीं, “पहले आपकी ब्यूटी पार्लर की दुकान खोल लो। फिर मैं खाना बनाऊंगी।”
वेद प्रकाश ने कहा, “चिंता मत करो। मैं आज ही दुकान किराए पर लेकर तुम्हारी ब्यूटी पार्लर खोल दूंगा।”
उन्होंने अमवा गांव में एक छोटी सी दुकान देख ली। किराए पर ली। ब्यूटी पार्लर खोल दी। साक्षी ने पहले दिन ही काम शुरू किया। धीरे-धीरे दुकान अच्छी चलने लगी। लेकिन साक्षी अभी भी उदास रहती थीं।
कई दिनों बाद एक दिन सुबह करीब दस बजे साक्षी के घर का फ्रिज खराब हो गया। उन्होंने वेद प्रकाश को फोन किया। वेद प्रकाश ने कहा, “कोई बात नहीं, मैं बिजली मिस्त्री पारस को फोन करता हूं। वो तुम्हारे घर आ जाएगा।”
साक्षी खुश हुईं। लेकिन पारस ने कहा, “जमींदार साहब, मेरा समय नहीं है। कल सुबह ही आऊंगा।”
फोन काट दिया गया।
वेद प्रकाश ने साक्षी को बताया, “फ्रिज कल ठीक हो जाएगा।”
साक्षी ने पूछा, “आज क्यों नहीं ठीक होगा?”
वेद प्रकाश बोले, “पारस की दुकान पास है। वो खुद बात कर ले।”
साक्षी बाहर निकलीं और पारस की दुकान पर पहुंच गईं।
पारस एक साधारण लड़का था। महिलाओं में दिलचस्पी रखता था। जब भी कोई खूबसूरत महिला उसकी दुकान पर आती, वो उसे आसानी से बिस्तर तक ले जाता था। आज साक्षी को देखकर पारस की नियत खराब हो गई।
साक्षी ने कहा, “हमारा फ्रिज खराब है। आप ठीक करो।”
पारस बोले, “भाभी जी, समय नहीं है। लेकिन शाम छह बजे तक आ जाऊंगा।”
साक्षी ने अपना फोन नंबर दिया।
शाम छह बजे पारस आया। साक्षी अकेली थीं। उन्होंने कहा, “अब फीस दो सौ रुपये।”
पारस ने फीस मांगी। साक्षी ने दो हजार रुपये दिए और बोलीं, “ये पैसे इसलिए हैं कि तुम मेरी इच्छाएं पूरी कर सको।”
पारस का दिमाग घूम गया। साक्षी ने दरवाजा बंद किया। कहा, “मेरा पति नहीं आएगा। वो मुझसे सुख नहीं दे पाता।”
पारस ने कहा, “अगर आपकी इच्छा है तो मैं पूरा कर दूंगा।”
साक्षी ने पारस का हाथ पकड़ा और बेडरूम में ले गईं। दोनों की रातें रंगीन हो गईं। साक्षी का अकेलापन दूर हो गया। पारस को पैसे मिले। दोनों खुश हो गए।
साक्षी ने कहा, “अब जब भी मैं बुलाऊंगी, तुम आ जाओ। मैं अकेली रहती हूं।”
दिन बीतते गए। साक्षी खुश रहने लगी थीं।
वेद प्रकाश ने साक्षी से पूछा, “तुम आजकल बहुत खुश क्यों हो?”
साक्षी बोलीं, “अब मुझे खुश रहने की आदत पड़ गई है।”
उसी समय वेद प्रकाश का बड़ा भाई मोहन प्रकाश फोन किया। उसने कहा, “वेद प्रकाश, तुम्हारा छोटा भतीजा शक्ति मेरे पास भाग गया है। वो लड़कियां के साथ आवारा है। उसे अपने पास बुला लो और खेती सिखाओ।”
वेद प्रकाश ने सहमति दी। शाम को शक्ति गांव में आ गया। साक्षी ने शक्ति को देखकर गले लगाया। शक्ति ने कहा, “चाची, अब मैं यहां रहूंगा। चाचा के साथ खेती सीखूंगा।”
साक्षी को शक्ति का स्पर्श अच्छा लगा। लेकिन शक्ति को कुछ नहीं पता था।
दस दिन बाद वेद प्रकाश शक्ति को खेत में ले जाते थे। साक्षी घर में अकेली रह जाती थीं। एक दिन उन्होंने पारस को फोन किया और कहा, “आओ।”
पारस आया। दोनों बेडरूम में चले गए। गलत रिश्ता फिर शुरू हो गया।
ठीक उसी समय घर के मुख्य दरवाजे पर दस्तक हुई। साक्षी डर गईं। पारस को कहा, “घबराओ मत, दरवाजा खोलो।”
साक्षी ने दरवाजा खोला। शक्ति खड़ा था। उसने देखा कि साक्षी ने सिर्फ दस मिनट बाद दरवाजा खोला। उसने पूछा, “चाची, क्या काम था?”
शक्ति ने कमरे में घुसा। उसने पारस को देखा। साक्षी को गाली दी और बाहर धकेल दिया।
शक्ति ने साक्षी से पूछा, “चाची, तुम पारस के साथ गलत काम क्यों कर रही थीं?”
साक्षी ने रोते हुए कहा, “तुम्हारा चाचा कई साल से बीमार है। वो मुझे सुख नहीं दे पाता। मैंने यह किया है। लेकिन तुम चुप रहो। मैं तुम्हारी हर जरूरत पूरी कर दूंगी।”
शक्ति ने कहा, “चाची, यह गलत है।”
साक्षी ने शक्ति का हाथ पकड़ा। बोलीं, “यह बताना मत। मैं खुश कर दूंगी।”
दोनों बेडरूम में गए। गलत काम फिर से हुआ। शक्ति भी कहने लगा, “चाची, अब मेरी हर इच्छा पूरी करनी पड़ेगी।”
इस तरह साक्षी ने अपने ही भतीजे को भी अपनी जाल में फंसा लिया।
अब साक्षी रोज शक्ति को बुलाती। दोनों मिलकर इच्छाएं पूरी करते। शक्ति चाचा के फोन लेकर खेत में काम करता।
एक दिन वेद प्रकाश शहर गए। शक्ति साक्षी को कहा, “चाची, मैं खेत जा रहा हूं।”
साक्षी ने कहा, “मैं भी तुम्हारे साथ जाऊंगी।”
दोनों ईक खेत में गए। वहां दोनों मिलकर गलत रिश्ता फिर शुरू कर दिया।
वेद प्रकाश की मोटरसाइकिल आ गई। उन्होंने दोनों को देख लिया। शक हुआ।
वेद प्रकाश ने कहा, “चलो घर चलते हैं।”
रात को शक्ति कमरे में सो गया। साक्षी और वेद प्रकाश के कमरे में वेद प्रकाश हथियार लेकर आए। पहले शक्ति की गर्दन काट दी। फिर साक्षी की गर्दन काट दी।
दोनों की मौत हो गई। वेद प्रकाश ने पुलिस को फोन किया। कहा, “मैंने अपनी पत्नी और भतीजे का कत्ल कर दिया है।”
पुलिस पहुंची। शव देखे। दोनों को पोस्टमार्टम के लिए ले गए। वेद प्रकाश गिरफ्तार।
कानूनी कार्यवाही शुरू हुई। जज साहब को सजा सुनानी है।
दोस्तों, इस पूरे घटनाक्रम में वेद प्रकाश ने अपनी पत्नी साक्षी देवी और भतीजे शक्ति सिंह के साथ जो किया, क्या वो सही था या गलत था?
कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
मिलते हैं अगली कहानी में। नमस्कार।
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