PART 3 उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery – News

PART 3 उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery

PART 3 उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत, 6 साल बाद चौकाने वाला खुलासा! Sushant Singh Rajput Case mystery

उस रात गिड़गिड़ाता रहा सुशांत – भाग 3: डार्क वेब का रहस्य, बड़े राजनीतिक दबाव और अंतिम सच!

(Sushant Singh Rajput Mystery – Part 3)

प्रस्तावना: बंद फाइलों में दबा सच और 6 साल का सन्नाटा

14 जून 2020 की उस खौ/फ/नाक दोपहर के बाद भारत के आपराधिक इतिहास में इतना बड़ा जन-आंदोलन कभी नहीं देखा गया। बांद्रा वाले फ्लैट से शुरू हुई जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, उसने सिर्फ एक बॉलीवुड स्टार की सं/दि/ग्ध म/ौ/त के रहस्य को ही नहीं उघाड़ा, बल्कि देश की सत्ता, पुलिस प्रशासन और अंडरवर्ल्ड के उस नापाक सिंडिकेट का नकाब भी उतार दिया जो दशकों से पर्दे के पीछे से सब कुछ नियंत्रित कर रहा था।

भाग 1 और भाग 2 में आपने देखा कि कैसे एक होनहार, पढ़े-लिखे नौजवान को अलग-थलग किया गया, उसके खिलाफ साजिशें रची गईं, उसके पैसों का हेरफेर हुआ और 13 जून की काली रात को उससे वो सीक्रेट पेनड्राइव छीनने के लिए ह/द से ज्यादा द/रिं/द/गी की गई।

अब भाग 3 में हम उस रहस्य की सबसे गहरी और डरावनी परतों को खोलने जा रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक टीमों, साइबर एक्सपर्ट्स और जांच एजेंसियों के खुफिया सूत्रों के आधार पर दबाने की कोशिश की गई।

1. डार्क वेब, बिटकॉइन और डिजिटल डेटा का सफाया

जब सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच सीबीआई और एनसीबी के हाथों में आई, तो साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने सुशांत के आईपैड, मैकबुक और पर्सनल ड्राइव्स की गहराई से जांच शुरू की। इस जांच में जो सच बाहर आया, उसने फॉरेंसिक टीम के भी होश उड़ा दिए:

  • डार्क वेब से डेटा डिलीट करना: 13 और 14 जून की दरमियानी रात सुशांत के क्लाउड स्टोरेज और पर्सनल सर्वर्स पर डार्क वेब (Dark Web) के जरिए दूर बैठे साइबर हैकर्स ने अटैक किया था।
  • इरेजेबल सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल: सुशांत की डायरियों के स्कैन किए गए पन्ने, 13 बड़ी घटनाओं के ऑडियो रिकॉर्डिंग्स और बॉलीवुड के हवाला नेटवर्क से जुड़े सबूतों को विशेष ‘वाइप-आउट’ सॉफ्टवेयर के जरिए हमेशा के लिए मिटा दिया गया।
  • क्रिप्टो और बिटकॉइन ट्रांजैक्शन: एनसीबी की खुफिया फॉरेंसिक जांच में यह खुलासा हुआ कि सुशांत के आसपास मौजूद सिंडिकेट के कुछ लोग डार्क वेब पर क्रिप्टो-करेंसी के जरिए प्रतिबंधित पदार्थों और सीक्रेट डील्स का लेन-देन कर रहे थे।

सुशांत खुद एक बेहतरीन कोडर थे और उन्होंने अपने लैपटॉप में एक ऐसा ‘सेल्फ-डिस्ट्रक्ट’ और ‘एनक्रिप्टेड’ फोल्डर बनाया हुआ था, जिसे खोलने की कोशिश में हैकर्स का डेटा भी ट्रेस हो गया था। लेकिन उस बैकअप की मुख्य हार्ड ड्राइव आज भी गायब है।

2. एम्स (AIIMS) मेडिकल बोर्ड की कंट्रोवर्शियल रिपोर्ट और यू-टर्न

सुशांत केस में सबसे बड़ा यू-टर्न तब आया जब एम्स (AIIMS) दिल्ली के फॉरेंसिक मेडिकल बोर्ड को कूपर अस्पताल की पो/स्ट/मा/र्ट/म रिपोर्ट और बिसरा की री-एग्जामिनेशन का काम सौंपा गया।

डॉक्टर सुधीर गुप्ता का चौंकाने वाला यू-टर्न:

  1. शुरुआती लीक ऑडियो: एम्स बोर्ड के प्रमुख डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने कूपर अस्पताल की शुरुआती तस्वीरों को देखकर खुद स्वीकार किया था कि “यह साफ तौर पर ह/त्या का मामला लगता है, सु/सा/इ/ड का नहीं।”
  2. अचानक बदली रिपोर्ट: लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद एम्स बोर्ड ने एक आधिकारिक रिपोर्ट जारी कर इसे पूरी तरह से फांसी लगाने यानी सु/सा/इ/ड करार दे दिया।
  3. टाइम ऑफ डेथ गायब होना: कूपर अस्पताल की पो/स्ट/मा/र्ट/म रिपोर्ट में म/ौ/त का सही समय (Time of Death) दर्ज ही नहीं था। इसके बावजूद एम्स बोर्ड ने बिना बिसरा के सही नमूनों (क्योंकि बिसरा खराब हो चुका था) के इस थ्योरी पर मुहर लगा दी।

जनता और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाया कि जब पो/स्ट/मा/र्ट/म के दौरान वीडियोग्राफी नहीं की गई, शरीर पर मा/र-पी/ट और चोट के निशान थे, तो एम्स इतनी जल्दी किसी अंतिम नतीजे पर कैसे पहुँच गया? क्या उन पर किसी शीर्ष अधिकारी या राजनीतिक आका का दबाव था?

3. दुबई कनेक्शन, हवाला और इंटरनेशनल सिंडिकेट

ईडी (ED) की शुरुआती जांच में केवल मुंबई या बॉलीवुड के ही तार नहीं जुड़े थे, बल्कि इस केस की आंच खाड़ी देशों तक फैली हुई थी:

  • दुबई के संदिग्ध कॉल्स: 8 जून से 13 जून के बीच सुशांत के बांद्रा वाले फ्लैट में मौजूद कुछ संदिग्ध लोगों के फोन पर दुबई और कराची के अनजान नंबरों से दर्जनों इंटरनेशनल कॉल्स आए थे।
  • हवाला नेटवर्क: सुशांत की कंपनियों में लगे पैसों का एक हिस्सा बेनामी शेल कंपनियों के जरिए दुबई भेजा गया था। जब सुशांत को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपने सीए (CA) को बर्खास्त करने और कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी थी।
  • अंडरवर्ल्ड का दबाव: सुशांत को अपनी कुछ फिल्मों के राइट्स और इंटरनेशनल शो डिस्ट्रीब्यूशन के लिए एक खास सिंडिकेट की तरफ से ध/म/कि/यां मिल रही थीं। सुशांत ने बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड के इस गठजोड़ में झुकने से साफ इनकार कर दिया था।

4. सीबीआई (CBI) की ‘क्लोजर रिपोर्ट’ न आना: सबसे बड़ा सबूत

अदालत में जब भी कोई मामला जाता है, तो जांच एजेंसी को अपनी अंतिम रिपोर्ट या तो चार्जशीट के रूप में या फिर क्लोजर रिपोर्ट के रूप में दाखिल करनी होती है। लेकिन 6 साल से भी ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी सीबीआई ने सुशांत सिंह राजपूत केस में कोई ‘क्लोजर रिपोर्ट’ (Closure Report) पेश नहीं की है।

यह खामोशी क्या बयान करती है?

  • अगर यह एक साधारण आत्म/ह/त्या होती, तो सीबीआई महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल कर केस बंद कर देती।
  • सीबीआई का केस को खुला रखना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जांच एजेंसियों को ऐसे पुख्ता सुराग मिले हैं जो देश के सबसे रसूखदार और ताकतवर चेहरों से जुड़े हैं।
  • सूत्रों के अनुसार, कई गवाहों के बयानों में भारी अंतर है, डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट्स में डेटा में हेरफेर पाया गया है और 13 जून की रात की कड़ियों को आपस में जोड़ना बाकी है।

5. गवाहों की रहस्यमयी स्थितियां और खौ/फ का माहौल

इस पूरे मामले में सबसे डरावनी बात यह रही कि सुशांत से जुड़े कई मुख्य गवाहों और सहयोगियों के साथ एक-एक करके अजीब घटनाएं घटीं:

  1. मुख्य गवाहों का अंडरग्राउंड होना: बांद्रा फ्लैट में मौजूद नीरज, दीपेश सावंत और सिद्धार्थ पिठानी जैसे मुख्य किरदार जांच के बाद से ही मीडिया और जनता की नजरों से पूरी तरह गायब हो गए।
  2. दिशा साल्यान के मंगेतर की खामोशी: दिशा साल्यान की संदिग्ध म/ौ/त के बाद उनके मंगेतर रोहन राय ने शुरुआत में मीडिया के सामने आने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्हें भी कथित तौर पर खामोश करा दिया गया।
  3. अस्पताल कर्मियों को ध/म/कि/यां: कूपर अस्पताल के मोर्चरी अटेंडेंट रूपकुमार शाह, जिन्होंने सनसनीखेज खुलासा किया था कि सुशांत की गर्दन पर ता/र के निशान और शरीर पर मा/र-पी/ट की चोटें थीं, उन्हें भी लगातार जान से मा/र/ने की ध/म/कि/यां दी गईं।

निष्कर्ष: क्या कभी मिलेगा सुशांत को पूरा इंसाफ?

सुशांत सिंह राजपूत की कहानी केवल एक अभिनेता के दुखद अंत की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे होनहार, प्रतिभावान और सच्चे इंसान की दास्तान है जिसने बॉलीवुड की सड़ चुकी व्यवस्था, नेपोटिज्म, ड्/र/ग्/स सिंडिकेट और भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ अकेले खड़े होने की जुर्रत की थी।

13 जून की उस काली रात बांद्रा के उस बंद कमरे में भले ही सुशांत अपनी जान के लिए गिड़गिड़ाए हों, लेकिन उनकी उस अंतिम चीख ने पूरे देश को जगा दिया। उस रात का सच आज भी उन बंद फाइलों, गायब पेनड्राइव और एम्स की फॉरेंसिक फाइलों में छिपा हुआ है।

सुशांत सिंह राजपूत का नाम आज एक क्रांति बन चुका है। करोड़ों प्रशंसकों का यह सवाल आज भी हवा में तैर रहा है— “आखिर 13 जून की रात सुशांत के साथ क्या हुआ था और उनके असली ह/त्या/रे कानून की गिरफ्त में कब आएंगे?”

जब तक उस आखिरी रात का पूरा सच बेनकाब नहीं हो जाता, तब तक इंसाफ की यह मशाल बुझने वाली नहीं है।

next part 👉👉

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

Related Articles