बुढ़िया से लड़का पैसा पाकर पूरे गांव में मिठाई बटवाया फिर !
राम दुलारी और गोपी की कहानी
अमनपुर नामक एक छोटे से गाँव में राम दुलारी देवी नाम की एक बहुत ही सुंदर बूढ़ी महिला रहती थी。 यह गाँव एक नदी के किनारे बसा था और इसकी आबादी लगभग 500 थी। राम दुलारी गाँव की एक प्रसिद्ध और सम्मानित महिला थी。 जब भी वह अपने घर से निकलती थी, लोग उसका हाल-चाल पूछते थे। राम दुलारी का कोई पति या बच्चे नहीं थे। उसके पति का कई साल पहले निधन हो गया था और वह अपने घर में बिल्कुल अकेली रहती थी।
राम दुलारी के घर से करीब 50 मीटर दूर गोपी नाम का एक लड़का अपने चाचा-चाची के साथ रहता था। गोपी बचपन में ही अनाथ हो गया था और उसके चाचा-चाची ने ही उसका पालन-पोषण किया था। गोपी ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था और कोई काम नहीं करता था। वह सारा दिन अपने दोस्तों के साथ घूमता रहता था。 जब भी गोपी को भूख लगती थी, तो वह राम दुलारी के घर खाने चला आता था。 राम दुलारी ने उसे अपने घर पर खाने की आदत लगा दी थी और वह उसे बहुत लाड-प्यार करती थी।

गोपी सुबह अपने दोस्तों के साथ घूमने जाता और दोपहर में खाना खाने के लिए राम दुलारी के घर आ जाता। गोपी के चाचा-चाची राम दुलारी को पसंद नहीं करते थे। उनका मानना था कि राम दुलारी गोपी को बिगाड़ रही है। वे अक्सर गोपी को राम दुलारी के घर न जाने के लिए कहते थे, लेकिन गोपी उनकी एक नहीं सुनता था। जब भी उसे भूख लगती, वह सीधा राम दुलारी के दरवाजे पर पहुँच जाता। गोपी के चाचा-चाची उसे समझाकर थक चुके थे, लेकिन वह मानने वाला नहीं था।
पति की मृत्यु के बाद राम दुलारी बहुत रंगीन मिजाज की हो गई थी। जब भी वह गोपी को अपने घर पर देखती, वह बहुत खुश होती और उसे खूब खाना खिलाती। राम दुलारी को सिरदर्द की एक पुरानी बीमारी थी। रात होने पर उसके सिर में बहुत तेज दर्द होता था। इसलिए, रात में खाना खाने के बाद जब राम दुलारी सोने जाती, तो गोपी उसके सिर की मालिश करता था। मालिश के बाद ही राम दुलारी को नींद आती थी। फिर गोपी सोने के लिए अपने घर चला जाता। यह गोपी का रोज़ का काम था।
एक रात, जब गोपी राम दुलारी के घर उसकी मालिश करने गया, तो राम दुलारी ने उसे कहीं और मालिश करने के लिए कहा। गोपी हैरान हो गया और उसने पूछा कि वह ऐसा क्यों कह रही है। राम दुलारी ने कहा कि उसका मन बहुत व्याकुल है। गोपी उसकी बात मान गया और उसके कहे अनुसार मालिश करने लगा। लेकिन थोड़ी देर बाद, गोपी का मन भी व्याकुल हो गया और वह राम दुलारी के साथ हरकतें करने लगा। राम दुलारी ने उसे समझाने की कोशिश की कि रात बहुत हो चुकी है और उसे घर चले जाना चाहिए, नहीं तो बदनामी होगी। उसने कहा कि गाँव के लोग उसका सम्मान करते हैं और अगर उन्हें इस बारे में पता चला तो वे उसके बारे में क्या सोचेंगे।
लेकिन गोपी का मन इतना व्याकुल था कि उसने राम दुलारी की एक बात नहीं सुनी और उसके साथ एक हो गया। लगभग एक घंटे बाद, राम दुलारी गोपी पर बहुत गुस्सा हुई और गोपी डरकर अपने घर चला गया। इसके बाद राम दुलारी ने गोपी से बातचीत करना बंद कर दिया。 लगभग एक महीने तक उसने गोपी से कोई बात नहीं की। गोपी समझ गया कि राम दुलारी आंटी उससे नाराज है, इसलिए उसने भी उसके घर जाना बंद कर दिया। गोपी के चाचा-चाची यह जानकर बहुत खुश हुए कि गोपी अब राम दुलारी के घर नहीं जाता है।
गोपी अपने चाचा-चाची के साथ रहने लगा और उनके कामकाज में मदद भी करने लगा। लेकिन वह कुछ कमाता नहीं था, इसलिए उसके पास पैसे नहीं होते थे। जब भी वह अपने दोस्तों के साथ बाहर जाता, तो वे उससे पैसे खर्च करने के लिए कहते। गोपी को बहुत शर्मिंदगी महसूस होती थी और वह अपने दोस्तों से कहता कि एक दिन वह बहुत सारा पैसा कमाएगा और पूरे गाँव में मिठाइयाँ बाँटेगा। उसके दोस्त उस पर हँसते थे और उसका मज़ाक उड़ाते थे, जो गोपी को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था।
इधर, राम दुलारी भी गोपी से एक महीने तक बात न करने पर बहुत दुखी थी। एक रात, जब वह सोने गई, तो उसके सिर में बहुत तेज दर्द हुआ। उसे गोपी की याद आई और वह सोचने लगी कि अगर गोपी होता, तो वह उसके सिर की मालिश कर देता और उसे नींद आ जाती। उसने खुद अपने सिर की मालिश की और सो गई। कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। एक दिन, राम दुलारी ने फिर से गोपी के बारे में सोचा और उसे बुलाया। उसने गोपी से कहा कि वह उसके बारे में सोचती रहती है और उसे नींद नहीं आती।
गोपी ने राम दुलारी से कहा कि वह अब पहले जैसा नहीं रहा है और बदल चुका है। उसने कहा कि अगर राम दुलारी उससे अपनी ज़रूरत पूरी करना चाहती है, तो उसे पैसे देने होंगे। राम दुलारी परेशान हो गई और उसने पूछा कि उसे कितने पैसे चाहिए। गोपी ने ₹10,000 माँगे। राम दुलारी ने उसे अपनी तिजोरी से ₹10,000 निकालकर दे दिए। गोपी बहुत खुश हुआ और राम दुलारी उसे अपने कमरे में ले गई।
राम दुलारी ने गोपी से कहा कि उसका मन बहुत व्याकुल है और वह चाहती है कि गोपी उसकी सारी मुरादें पूरी कर दे। गोपी ने कहा कि वह भी यही चाहता है और वह उसकी सारी मनोकामना पूरी कर देगा। फिर दोनों एक हो गए और पूरी रात अपनी ख्वाहिशें पूरी करते रहे। सुबह होने पर, गोपी चुपचाप राम दुलारी के घर से निकला और अपने घर जाकर सो गया। सुबह करीब 10:00 बजे उठने के बाद, गोपी सबसे पहले एक मिठाई की दुकान पर गया और ₹100 की मिठाई खरीदकर पूरे गाँव में बँटवाई।
गाँव के लोग यह देखकर हैरान रह गए कि गोपी के पास इतना पैसा कहाँ से आ गया कि वह पूरे गाँव में मिठाई बँटवा रहा है और अपने दोस्तों को भी खिला रहा है। गाँव के कुछ लोग गोपी के पास इतना पैसा कहाँ से आया, यह जानने की कोशिश में लग गए। एक दिन, जब गोपी फिर से राम दुलारी के घर गया, तो गाँव के कुछ लोग भी उसके पीछे-पीछे चले गए। उन्होंने देखा कि राम दुलारी गोपी के साथ मिलकर अपनी सारी ख्वाहिशें पूरी कर रही है। उन्हें समझ में आ गया कि गोपी के पास इतने पैसे कहाँ से आ रहे हैं।
धीरे-धीरे, राम दुलारी की चर्चा पूरे गाँव में होने लगी। सभी को पता चल गया कि राम दुलारी गोपी के साथ मिलकर अपने सारे अरमान पूरे करती है। इसके बाद, राम दुलारी की बहुत बदनामी हुई। जो लोग पहले उसका सम्मान करते थे और उसका हाल-चाल पूछते थे, वही लोग अब उसे गाँव से बाहर निकालने की बात करने लगे। गाँव वालों ने राम दुलारी से कहा कि वह गाँव में रहने लायक नहीं है और उसे गाँव छोड़कर चले जाना चाहिए, वरना वे उसे निकाल देंगे।
राम दुलारी यह सुनकर बहुत घबरा गई और उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह गाँव वालों के पैरों में गिर गई और उनसे माफ़ी माँगने लगी। उसने कहा कि यह उसकी पहली और आखिरी गलती है और वह आगे से ऐसा कभी नहीं करेगी। गाँव वालों को राम दुलारी पर तरस आ गया और उन्होंने उसे माफ़ कर दिया। इसके बाद, राम दुलारी बिल्कुल सुधर गई और गोपी ने भी उसके घर आना-जाना बंद कर दिया। राम दुलारी अपने घर पर ही रहने लगी। उसकी छवि एकदम से धूमिल पड़ चुकी थी और अब गाँव के लोग उसका पहले जैसा सम्मान नहीं करते थे।