12 साल के लड़के ने पुलिस दरोगा को 4 गोलियां मा*री/S.P साहब के होश उड़ गए/
12 साल के लड़के ने पुलिस दरोगा को 4 गोलियां मा*री/S.P साहब के होश उड़ गए/
**नमस्ते दोस्तों, मैं कुलदीप राणा।**
आज की हमारी कहानी उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से शुरू होती है। अमेठी जिले में बदलापुर नाम का एक छोटा सा गांव है। इसी गांव में रहती हैं रूबी देवी। रूबी बहुत गरीब और विधवा हैं। चार साल पहले उनके पति ऋषिपाल की हार्ट अटैक में मौत हो गई थी। घर की सारी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है।
रूबी दिहाड़ी मजदूरी करती हैं। एक कमरे में उनकी पूरी परिवार रहता है। बेटी खुशी बारहवीं कक्षा पास कर चुकी थी, लेकिन आगे की पढ़ाई नहीं पूरी कर पाई। क्योंकि घर में बहुत गरीबी थी। बेटा विक्रम नौवीं कक्षा में पढ़ रहा था। वह बहुत होशियार और तेज लड़का था। परिवार की हालत पहले ठीक चल रही थी।
लेकिन आगे चलकर परिवार के साथ एक बड़ी घटना आने वाली थी। रूबी और खुशी इस बारे में कुछ भी नहीं जानती थीं। पड़ोस में पुलिस दरोगा राजपाल सिंह रहते थे। वे नजदीकी पुलिस स्टेशन में काम करते थे। उनकी पत्नी पहले से ही तलाक ले चुकी थीं और अपने मायके चली गई थीं। अब राजपाल अकेले थे।

राजपाल हर रात एक नई औरत को अपने घर पर बुलाते और उसकी रात रंगीन कर लेते। उनकी हद बहुत बढ़ चुकी थी। वे गाँव में बड़े-बड़े कांड करने वाले थे।
एक दिन सुबह करीब आठ बजे राजपाल पुलिस स्टेशन जाने को तैयार होकर बुलेट मोटरसाइकिल पर बैठे थे। रूबी की बेटी खुशी घर के सामने झाड़ू लगा रही थी। राजपाल की नजर खुशी पर पड़ी। खुशी बहुत खूबसूरत और युवा थी। राजपाल के मन में एक नया प्लान आ गया।
उन्होंने मोटरसाइकिल रोकी और खुशी के पास गए। खुशी ने कहा, “चाचा जी, मेरी मां दिहाड़ी मजदूरी करती हैं। घर का चूल्हा जलता है। मैंने बारहवीं पास की है, लेकिन नौकरी नहीं मिली।”
राजपाल बोले, “तुम्हें चिंता नहीं करनी। मैं तुम्हारी मां से मिलना चाहता हूं। आज रात आठ बजे तुम अपनी मां को मेरे घर पर भेज दो। मैं उनसे जरूरी बात करूंगा।”
खुशी हंसकर बोलीं, “चाचा जी, मैं मां को आपके घर भेज दूंगी।” राजपाल ने कहा, “मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं।” दोनों बातें करके राजपाल चले गए।
रात आठ बजे राजपाल बिना शराब पीए अपने घर आए। उन्होंने यूनिफॉर्म बदला और रूबी देवी के घर पहुंचे। रूबी ने दरवाजा खोला। राजपाल बोले, “रूबी, तुम बहुत गरीब हो। पति मर गया। मैं तुम्हारी मदद के लिए आया हूं।”
रूबी ने कहा, “हमारे घर बहुत गरीबी है। बेटी खुशी ने बारहवीं पास की है, लेकिन नौकरी नहीं मिली।”
राजपाल बोले, “तुम्हारी बेटी जवान हो चुकी है। शादी में दहेज देना पड़ेगा। लेकिन तुम दिहाड़ी से नहीं कर सकती। मैं तुम्हारी बेटी खुशी को अच्छी नौकरी दिलवा दूंगा। जब तक नौकरी नहीं मिलती, तुम मेरे घर पर कामकाज कर सकती हो।”
रूबी ने कहा, “दरोगा साहब, हम बहुत धन्यवाद करते हैं।” राजपाल बोले, “कल सुबह से तुम्हारी बेटी खुशी मेरे घर कामकाज पर आ जाए। मैं कुछ दिनों बाद नौकरी दिलवा दूंगा।”
रूबी बहुत खुश हुईं। लेकिन उनके बेटे विक्रम ने कहा, “मां, पुलिस दरोगा का चाल-चलन ठीक नहीं है। उनकी हद बहुत बढ़ गई है।”
रूबी ने कहा, “बेटा, पांच उंगलियां समान नहीं होतीं। यह पुलिस दरोगा हमारे लिए भगवान बनकर आया है।”
रूबी ने विक्रम की बात नजरअंदाज कर दी। खुशी ने कहा, “मां, मैं कल से चाचा राजपाल के घर काम पर जा रही हूं। घर में दो पैसे आ जाएंगे।”
सुबह खुशी राजपाल के घर पहुंची। राजपाल ने कहा, “आज मैं छुट्टी का दिन हूं। मैं पूरा दिन घर पर रहूंगा।” खुशी ने काम शुरू किया। लेकिन राजपाल ने शराब पीना शुरू कर दिया। आधे घंटे बाद वह शराब में नशे में था। उसने मुख्य दरवाजा बंद किया।
वह खुशी के काम के कमरे में गया। खुशी झाड़ू पोछ रही थी। राजपाल ने लाइसेंसी पिस्तौल निकाली और खुशी की गर्दन पर रख दी। बोला, “अगर चीखने की कोशिश की तो तुम्हारी जान ले लूंगा।”
खुशी के होश उड़ गए। राजपाल ने कहा, “तुम्हें मेरे बेडरूम में चलना पड़ेगा।” खुशी डर के मारे मजबूर हो गई। दोनों कमरे में गए। राजपाल ने खुशी के साथ गलत काम शुरू कर दिया। खुशी रोती रही, हाथ जोड़ती रही, लेकिन राजपाल कुछ नहीं सुनता था।
कुछ देर बाद राजपाल ने खुशी को धमकी दी, “अगर किसी को बताई या बताने की कोशिश की तो तुम्हारे पूरे परिवार को जान से मार दूंगा।”
खुशी ने कहा, “मैं किसी को नहीं बताऊंगी।” राजपाल ने घर का सारा काम खुशी से करवाया। काम खत्म होने पर खुशी घर आई। घर आकर खुशी ने न तो मां रूबी को बताया, न बेटे विक्रम को बताया।
रात आठ बजे रूबी ने कहा, “बेटी, आज तुम बहुत उदास हो। खाना भी नहीं खाया। क्या बात है?” खुशी झूठ बोली, “मां, मेरी तबीयत थोड़ी खराब है।”
रूबी ने विश्वास किया। अगले दिन खुशी फिर नहीं गई। राजपाल कई बार रूबी से फोन पर पूछते रहे। रूबी हर बार कहती, “मेरी बेटी की तबीयत ठीक नहीं है।”
तीन दिन बाद राजपाल रूबी के घर आए। खुशी चारपाई पर लेटी थी। राजपाल बोले, “रूबी, अब तुम्हारी बेटी ठीक हो गई है। कल से खुशी मेरे घर काम पर भेजो।” रूबी ने कहा, “अभी दो-चार दिन आराम करेगी।”
राजपाल ने कहा, “तुम्हें मदद करनी पड़ेगी। मैं घर के काम नहीं कर सकता।” रूबी ने हां कर दी। राजपाल खुश हुए।
दस दिन बाद राजपाल ने रूबी को फोन किया, “रूबी, आज मैं शाम को जल्दी घर आऊंगा। तुम वहीं काम करो। मैं तुमसे जरूरी बात करूंगा।” राजपाल थाने गए, शाम को शराब का ठेका मिला। वहां से शराब खरीदी, नशे में अपने घर पहुंचे।
रूबी रसोई में खाना बना रही थी। राजपाल ने मुख्य दरवाजा बंद किया। रसोई में धारदार चाकू लिया। रूबी की गर्दन पर रख दिया। बोला, “अगर चीखने की कोशिश की तो गला काट दूंगा।” रूबी डर गई। राजपाल ने रूबी को बेडरूम में ले गए। हाथ-पैर बांधे, मुंह पर कपड़ा ठूंस दिया। फिर रूबी के साथ गलत काम कर लिया।
रूबी रोती रही, हाथ जोड़ती रही। राजपाल ने धमकी दी, “अगर किसी को बताई तो तुम्हारे परिवार को भी जान से मार दूंगा।” काम पूरा होने पर रूबी को घर भेज दिया। लेकिन रूबी ने भी परिवार को कुछ नहीं बताया।
तीन-चार दिन बाद रूबी फिर नहीं गई। राजपाल खुद रूबी के घर आए। बोले, “रूबी, तुम क्यों नहीं आ रही हो?” रूबी ने कहा, “मेरी तबीयत खराब थी। लेकिन कल सुबह आऊंगी।”
राजपाल हर रात शराब पीकर आते। रूबी के साथ काम कर लेते और घर भेज देते।
बारह अगस्त को रात नौ बजे राजपाल ने रूबी को फोन किया, “तुम्हें तुरंत मेरे घर आना है।” रूबी ने मना किया। राजपाल ने धमकी दी, “नहीं आई तो तुम्हारे पूरे परिवार को जान से मार दूंगा।”
रात दस बजे रूबी ने देखा कि खुशी और विक्रम सो गए हैं। रूबी चुपके से राजपाल के घर पहुंची। राजपाल ने दरवाजा खोला। रूबी ने रूबी का हाथ पकड़ा और अंदर खींच लिया। राजपाल बोले, “रूबी, मैंने तुम्हारी बेटी खुशी के लिए अच्छी नौकरी की तलाश की है। दो-चार दिन बाद खुशी नौकरी पा लेगी। लेकिन आज तुम्हारे साथ काम करना है।”
राजपाल रूबी के साथ गलत काम करने लगे। रूबी के गुस्सा आ गया। राजपाल बोले, “तुम्हारी बेटी खुशी भी अब जवान है। मैंने पहले भी एक रात गुजारी है। अब दूसरी रात भी चाहिए। पैसे दूंगी।”
रूबी के पैरों तले जमीन खिसक गई। राजपाल ने कहा, “पहले भी एक रात गुजारी। अब दूसरी रात फ्री नहीं।” रूबी कुछ नहीं बोली। राजपाल काम पूरा करने के बाद रूबी को घर भेज दिया।
रूबी घर आईं। सीधे खुशी के कमरे में गईं। खुशी को नींद से जगा दिया। रूबी ने पूछा, “बेटी, पुलिस दरोगा ने तेरे साथ क्या काम किया?” खुशी रोने लगी। विक्रम भी आंख खोलकर सुनने लगा। खुशी ने पूरी सच्चाई बता दी कि राजपाल ने उसके साथ गलत काम किया है।
रूबी ने कहा, “बेटी, कल सुबह हम पुलिस थाने जाएंगे।” खुशी और विक्रम बोले, “मां, पुलिस थाने जाने से क्या होगा? राजपाल पैसे देकर छूट जाएगा। अब उसे जान से ही मारना पड़ेगा।”
तीनों परिवार की योजना बन गई। रात भर नींद नहीं आई। अगली दिन भी गुजर गया। रात दस बजे राजपाल शराब में नशे में धुत होकर घर पहुंचे और सो गए।
रूबी ने विक्रम को गंडासी दी और खुशी को चाकू दिया। खुद भी चाकू लिया। रात दस बजे तीनों राजपाल के घर पहुंचे। रूबी कई बार आवाज लगाई। राजपाल की आंखें खुलीं। राजपाल ने दरवाजा खोला। रूबी ने रूबी का बेटा विक्रम को सिर पर गंडासी मार दी। राजपाल संभला, पिस्तौल निकाला।
रूबी ने चाकू से राजपाल के पेट में कई वार मारे। पिस्तौल गिर गई। विक्रम ने पिस्तौल उठाई। चार गोलियां मार दीं। गोलियों की आवाज से पड़ोसी जागे। एक पड़ोसी सूर ने पुलिस स्टेशन को फोन किया। दो घंटे बाद पुलिस आई। राजपाल का शव देखा। रूबी, विक्रम और खुशी को गिरफ्तार किया।
पुलिस रूबी से पूछताछ की। रूबी ने अपनी बेटी खुशी और बेटा विक्रम के साथ मिलकर राजपाल के साथ जो किया, पूरी सच्चाई बताई। पुलिस के होश उड़ गए। लेकिन तीनों ने जुर्म किया था। पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। जज साहब को सजा सुनानी है।
दोस्तों, इस पूरे घटनाक्रम में रूबी देवी के बेटे विक्रम ने राजपाल पुलिस दरोगा के साथ जो किया, क्या वह सही था या गलत था?
कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ। तब तक के लिए दोस्तों, जय हिंद।
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