पति ने पत्नी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/पत्नी की तड़प तड़प कर हुई मौ**त/ – News

पति ने पत्नी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/पत्नी की तड़प तड़प कर हुई मौ**त/

पति ने पत्नी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/पत्नी की तड़प तड़प कर हुई मौ**त/

नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से। कानपुर जिले में एक पारस नाम का गांव पड़ता है और इसी पारस गांव में रहने वाला वेद प्रकाश। वेद प्रकाश जो कि पैसे से किसान होता है। वेद प्रकाश के पास अपनी तीन-चार एकड़ जमीन होती है। खेती किसानी का काम किया करता था। वेद प्रकाश खेती किसानी का काम करके जितने भी पैसे कमाया करता था। उन सारे पैसों को अपने बैंक में जमा करवा दिया करता था। वेद प्रकाश की पत्नी की 3 साल पहले मौत हो चुकी थी। जिसकी वजह से वेद प्रकाश अपने जीवन में अकेला पड़ गया था।

लेकिन पत्नी के गुजर जाने के बाद वेद प्रकाश का चरित्र बिल्कुल खराब हो जाता है। वेद प्रकाश के खेत में जो भी खूबसूरत महिला एक बार चली जाया करती थी, वेद प्रकाश उस खूबसूरत महिला को कुछ पैसे देकर उसके साथ अपनी रात रंगीन कर लिया करता था और फिर इसके बाद मामले को रफादफा कर दिया करता था। वेद प्रकाश का बस यही काम होता है। वेद प्रकाश के परिवार में इसका इकलौता ही बेटा होता है जिसका नाम शेरपाल सिंह होता है और वेद प्रकाश के परिवार में इसकी एक पुत्रवधू भी होती है जिसका नाम अंजलि देवी होता है। अंजलि देवी जो कि देखने में काफी खूबसूरत और सुंदर और जवान महिला होती है। अंजलि देवी का चाल चलन और चरित्र कुछ ठीक नहीं होता है। क्योंकि अंजलि का पति शेरपाल सिंह हमेशा अपना ट्रक ही चलाया करता था। वो महीने में एक या दो बार ही घर पर आया करता था। शेरपाल बहुत ही लालची किस्म का व्यक्ति होता है। शेरपाल हमेशा पैसे के पीछे पड़ा रहता था। शेरपाल अपनी पत्नी का ख्याल तक नहीं रखता था। जिसकी वजह से शेरपाल की पत्नी अंजलि अब गलत रास्ते पर चलने के लिए मजबूर हो जाती है।

अंजलि आगे चलकर तीन बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाली थी। जिसके बारे में कोई कुछ भी नहीं जानता था। कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 5 जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। वेद प्रकाश घर के अंदर बैठकर खाना खा रहा होता है। जबकि वेद प्रकाश की पुत्रवधू अंजलि रसोई के अंदर खाना तैयार कर रही होती है। उसी समय अंजलि अपने ससुर वेद प्रकाश के पास आती है और वेद प्रकाश ससुर को कहती है कि पिताजी मेरा पति तो 20 दिनों से पहले घर पर आने वाला नहीं है। लेकिन मुझे अपने लिए कुछ कपड़े खरीदने हैं। मुझे ₹5000 दे दो। वेद प्रकाश अपनी बहू की तरफ अजीब नजरों से देखता हुआ कहता है कि मेरे पास ₹5000 नहीं है और मैं तुम्हें ₹5000 कहां से दे सकता हूं। अंजलि यह सारी बातें सुनकर बड़ी मायूस हो जाती है। इसके बाद वेद प्रकाश खाना भी खाता है और खाना खाने के बाद अपनी बहू की तरफ अजीब नजरों से देखता हुआ घर से बाहर निकल जाता है। लेकिन जैसे ही थोड़ा सा वक्त गुजर जाता है तो इसके बाद अंजलि देवी अपने पति शेरपाल सिंह के पास फोन कॉल करती है और शेरपाल को कहती है कि मुझे अपने लिए कुछ कपड़े खरीदने हैं। तुम ऐसा करो कि मेरे खाते में कुछ पैसे डलवा दो।

लेकिन शेरपाल कहने लगता है कि इस समय तो मेरे पास पैसे नहीं है। 20 दिनों के बाद जैसे ही मैं घर पर आऊंगा तो इसके बाद मैं तुम्हें बहुत अच्छे-अच्छे कपड़े दिलवा दूंगा। लेकिन अंजलि जिद पकड़ लेती है। अंजलि कहती है कि मुझे कपड़े आज ही खरीदने हैं। थक हार कर शेरपाल सिंह कहने लग जाता है कि देखो हमारे गांव में एक कपड़ा बेचने की बहुत अच्छी दुकान है। और उस दुकान पर एक प्रवीण नाम का लड़का बैठता है। तुम उस दुकान पर चली जाओ और उधारी में कपड़े खरीद कर ले आओ। अब पत्नी अंजलि जैसे ही अपने पति की इन बातों को सुनती है तो फोन कॉल काट देती है और फिर इसके बाद अंजलि देवी अपने घर से बाहर निकलती है और देखते ही देखते प्रवीण की दुकान पर चली जाती है। प्रवीण की इस गांव में सबसे बड़ी और अच्छी कपड़ा बेचने की दुकान होती है। लेकिन प्रवीण एक ऐसा लड़का होता है जो कि खूबसूरत महिलाओं का गुलाम होता है। जो भी गांव की खूबसूरत महिला परवीन की दुकान पर एक बार चली जाया करती थी। परवीन उस खूबसूरत महिला को फ्री में कपड़े दे दिया करता था और फ्री में कपड़े देने के बाद उसके साथ अपनी रातें रंगीन कर लिया करता था। लेकिन जैसे ही अंजलि आज के समय में प्रवीण की दुकान पर पहुंचती है और प्रवीण की नजरें इस महिला अंजलि की कंचन कोमल काया पर पड़ती है तो प्रवीण की नियत में कमी आ जाती है। प्रवीण इस महिला की खूबसूरती को देखते हुए कहने लगता है कि भाभी जी तुम्हें क्या खरीदना है? अंजलि देवी कहने लगती है कि मुझे अपने लिए चार साड़ियां खरीदनी है और चार सूट भी खरीदने हैं। लेकिन पैसे मेरा पति दे देगा और मेरा पति 20 दिनों के बाद गांव में आएगा वो तुम्हें पैसे लौटा देगा।

अब जैसे ही प्रवीण अंजलि की बातों को सुनता है तो कहने लगता है कि देखो भाभी जी मैं उधारी बिल्कुल भी नहीं करता हूं। और वैसे भी मैंने अपनी दुकान के सामने बोर्ड लगा रखा है और जिस पर लिखा है कि उधारी बिल्कुल सख्त मना है। अब इसके बाद अंजलि वहीं पर खड़ी रह जाती है। अंजलि कहने लगती है कि कोई बात नहीं तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं तुम्हारे पैसे अगले महीने लौटा दूंगी। लेकिन लड़का साफ-साफ मुंह कर जाता है। कहता है कि मैं उधारी में कपड़े नहीं बेचता हूं। इसके बाद अंजलि रंग दिखाना शुरू कर देती है। अंजलि कहने लगती है कि देखो मैं अपने घर में बिल्कुल अकेली रहती हूं। मेरा पति पैसे से एक ट्रक ड्राइवर है। घर में मेरा बस एक छ साल का बेटा आरव रहता है और मेरा जो ससुर है वो अपने खेत में हमेशा कामकाज में व्यस्त रहता है और रात के समय में भी वो खेत में ही अपना वक्त गुजारता है और जैसे ही आज मैं घर में बिल्कुल अकेली हूं तो तुम मेरे घर पर आ सकते हो और जितने भी मैं कपड़े खरीदूंगी उन कपड़ों की तुम सारी कीमत वसूल कर सकते हो। जब साफ-साफ शब्दों में प्रवीण को यह सारी बातें कही जाती है तो प्रवीण भी बड़ा खुश हो जाता है। प्रवीण कहने लगता है कि अगर ऐसी बात है तो मैं तुम्हें साड़ियां और सूट देने के लिए तैयार हूं। इसके बाद प्रवीण उसी समय इस महिला को चार साड़ियां देता है और चार सूट देता है और कहता है कि इन कपड़ों की कीमत वसूल करने के लिए आज रात मैं तेरे घर पर आ जाऊंगा। यह महिला भी बड़ी खुश हो जाती है और इसके बाद यह महिला कपड़ों को लेकर अपने घर पर वापस आ जाती है।

शाम का समय हो जाता है। शाम के समय अब अंजलि देवी अपने ससुर के लिए खाना तैयार करती है और जैसे ही आधे घंटे का वक्त गुजर जाता है तो ससुर वेद प्रकाश अपने घर पर आता है। वेद प्रकाश अपनी बहू को कहने लगता है कि बहू आज मैं जल्दी ही खाना खाऊंगा और खाना खाने के बाद मैं अपने खेत में चला जाऊंगा क्योंकि खेत में जाने के बाद मुझे और भी काम करने होते हैं। इसके बाद अंजलि अपने ससुर को खाना खिलाती है और खाना खाने के बाद वेद प्रकाश अपने खेतों की तरफ चला जाता है और जैसे ही रात हो जाती है तो रात के करीब 9:00 बजे के आसपास अंजलि देवी अपने बेटे आरव को खाना खिलाती है और खाना खिलाने के बाद उसको गहरी नींद में सुला देती है और इस तरीके से आधे घंटे का वक्त गुजरने के बाद अंजलि देवी अपने प्रेमी प्रवीण के पास फोन कॉल करती है और प्रवीण को कहती है कि मेरा ससुर तो खेत में जा चुका है और मैं घर में बिल्कुल अकेली हूं और मेरा बेटा आरव गहरी नींद में सो चुका है। तुम मेरे घर पर आ सकते हो। अब जैसे ही प्रवीण को यह बातें कही जाती है, तो प्रवीण उसी समय अपने घर से बाहर निकलता है और थोड़ी देर में ही प्रवीण इस महिला के घर के दरवाजे पर आ जाता है। इसके बाद प्रवीण इस महिला अंजलि के पास फोन कॉल करता है और अंजलि को कहता है कि तुम ऐसा करो घर का दरवाजा खोल दो और फिर मैं अंदर आ जाऊंगा। अंजलि देवी उसी समय अपने घर का दरवाजा खोलती है तो देखती है कि उसके सामने परवीन खड़ा होता है। परवीन को देखकर अंजलि बड़ी खुश हो जाती है और इसके बाद प्रवीण घर के अंदर प्रवेश कर जाता है।

प्रवीण कहने लगता है कि देखो तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा कर दिया करूंगा। तुम्हें अगर पैसों की जरूरत पड़ेगी तो मैं तुम्हें पैसे भी दे दिया करूंगा। लेकिन बदले में तुम्हें मेरी जरूरतों का ख्याल रखना होगा। अंजलि कहती है कि तुम भी किसी बात की फिक्र मत करो। मैं तुम्हारे बिल्कुल साथ खड़ी हूं। और इसके बाद यह महिला अंजलि देवी अपने इस प्रेमी प्रवीण को लेकर अपने बेडरूम के अंदर चली जाती है। और फिर इसके बाद अंजलि और प्रवीण के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। और जैसे ही दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है, तो इसके बाद प्रवीण रात के करीब 12:00 बजे के आसपास इस घर से बाहर निकलता है और अपने घर पर चला जाता है। और इस तरीके से इस महिला अंजलि देवी ने इससे कपड़े बेचने वाले प्रवीण को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था। अब तो प्रवीण कुमार का जब भी मन करता था प्रवीण कुमार इस महिला के पास फोन कॉल किया करता था और फोन कॉल करके इसके घर पर आ जाया करता था और इस महिला को कुछ पैसे देकर इसके साथ अपनी रातें रंगीन कर लिया करता था। आखिरकार कई दिनों का वक्त गुजर जाता है और इतना वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 20 जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब 9:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। अंजलि देवी अपने पति शेरपाल के पास फोन कॉल करती है और शेरपाल को कहती है कि तुम घर पर कब आओगे? शेरपाल कहने लगता है कि कुछ ही दिनों की बात है और मैं जल्दी ही घर पर आऊंगा। लेकिन शेरपाल की पत्नी अंजलि देवी कहती है कि मुझे कुछ पैसों की जरूरत है। तुम कुछ पैसे मेरे खाते में डलवा दो। लेकिन पति शेरपाल साफ-साफ मना कर देता है। कहता है कि मैं कुछ ही दिनों में घर पर आ जाऊंगा। इसके बाद जो तुम्हें खरीदना है तुम खरीद सकती हो। और इस तरीके से अंजलि देवी गुस्से में फोन कॉल काट देती है।

लेकिन अब अंजलि देवी आगे चलकर बहुत ही बड़ा भयानक कांड करने वाली थी। अंजलि देवी उसी समय अपने प्रेमी प्रवीण के पास फोन कॉल करती है और प्रवीण को कहती है कि प्रवीण देखो मैं अपने घर पर बिल्कुल अकेली हूं। बस मेरा बेटा आरव घर में है। तुम ऐसा करो जैसे तैसे करके मेरे घर पर आ जाओ और साथ में ₹000 लेकर जरूर आना। प्रवीण जैसे ही अंजली की बातों को सुनता है तो खुश होकर कहता है कि तुम पैसों की फिक्र मत करो। मैं अभी पैसे लेकर तेरे घर पर आ रहा हूं। और इसके बाद प्रवीण अपनी दुकान बंद करता है। अपनी मोटरसाइकिल लेकर सीधा ही अंजलि के घर पर आ जाता है। अंजलि के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है और अंजलि का बेटा आरव अपने घर का दरवाजा खोल देता है। प्रवीण घर के अंदर प्रवेश करता है तो देखता है कि वहां पर आरव बैठा होता है। अब प्रवीण अंजलि के पास जाता है और अंजली को कहता है कि तुम जैसे तैसे करके अपने बेटे आरव को घर से बाहर भेज दो और इसके बाद मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा। अंजलि सब कुछ समझ जाती है। अंजली उसी समय अपने बेटे आरव को कुछ पैसे देती है और कहती है कि बेटा तुम अपने दोस्तों के साथ बाहर जाकर खेल लो। इसके बाद बेटा आरव पैसे लेने के बाद घर से बाहर निकल जाता है और अपने दोस्तों के साथ खेलना शुरू कर देता है। लेकिन अंजलि देवी अब अपने प्रेमी प्रवीण को कहती है कि मुझे ₹000 की सख्त जरूरत थी। प्रवीण कहने लगता है कि तुम ऐसा करो घर का दरवाजा बंद कर लो। लेकिन अंजलि देवी कहने लगती है कि इस समय मेरा ससुर घर पर आने वाला है। अगर मेरे ससुर ने हमें देख लिया तो फिर बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। लेकिन प्रवीण जिद पकड़ देता है। प्रवीण कहता है कि ऐसा कुछ भी होने वाला नहीं है और इस तरीके से प्रवीण अब इस महिला अंजलि देवी पर ज्यादा दबाव बनाता है और दबाव की वजह से अंजलि देवी उसी समय अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लेती है और फिर इसके बाद प्रवीण इस महिला अंजलि देवी का हाथ पकड़ कर इसको इसके बेडरूम में ले जाता है और इसके बाद अंजलि और प्रवीण के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। लेकिन इसी बीच अंजलि का ससुर वेद प्रकाश अपने खेत से अपने घर पर आ जाता है। वेद प्रकाश अपनी बहू अंजलि देवी को आवाज लगाता है। लेकिन घर का दरवाजा 10 मिनट तक नहीं खोला जाता है। थक हारकर वेद प्रकाश अपनी बहू पर चिल्लाना शुरू कर देता है। लेकिन जैसे ही अंजलि देवी अपने ससुर वेद प्रकाश की चिल्लाने की आवाज को सुनती है तो काफी डर जाती है। अंजलि देवी अपने प्रेमी प्रवीण को कहती है कि तुम ऐसा करो कि बेड के नीचे छुप जाओ और इसके बाद जो लड़का प्रवीण होता है वह बेड के नीचे छिप जाता है और फिर अंजली देवी अपने घर का दरवाजा खोल देती है। अंजलि का ससुर वेद प्रकाश घर के अंदर प्रवेश कर जाता है और फिर इसके बाद वेद प्रकाश सीधा ही कमरे के अंदर चला जाता है और कमरे के अंदर एक पुराना साइकिल का टायर तलाशना शुरू कर देता है क्योंकि वेद प्रकाश को साइकिल के पुराने टायर की जरूरत होती है और जैसे ही ससुर वेद प्रकाश घर के अंदर टायर की तलाश कर रहा होता है तो उसी समय वेद प्रकाश की नजरें प्रवीण पर पड़ जाती है। प्रवीण को बेड के नीचे छिपा हुआ देखकर वेद प्रकाश प्रवीण पर चिल्लाना शुरू कर देता है। गालियां देना शुरू कर देता है और कहता है कि तेरे घर में आने की हिम्मत कैसे हुई है? लेकिन प्रवीण एक हैंडसम नौजवान लड़का होता है। मौका देखते ही वहां से फरार हो जाता है। लेकिन अब वेद प्रकाश अपनी बहू पर चिल्लाना शुरू कर देता है।

वेद प्रकाश अपनी बहू अंजलि को कहने लगता है कि तेरा पति तो पैसे कमाने के लिए दिन रात ये कर रहा है। वो तुम्हारे लिए मेहनत मजदूरी करता है। ट्रक चलाता है। लेकिन तुम गैर मर्दों के साथ यहां पर रंगरलियां मना रही हो। जैसे यह बातें अंजलि को कही जाती है तो अंजलि अपने ससुर को कहने लगती है कि पिताजी मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। तुम यह बातें मेरे पति को मत बताना नहीं तो मेरा पति शेरपाल सिंह मुझे तलाक दे देगा। लेकिन उसी समय वेद प्रकाश अपनी बहू अंजलि को कहता है कि मैं अभी अपने बेटे शेरपाल के पास फोन कॉल करता हूं। उसको यहीं घर पर बुलाता हूं और तेरे बारे में सब कुछ बता दूंगा। लेकिन अंजलि देवी एक ऐसी महिला होती है जो कि अपने आप को बचाने के लिए किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार हो जाती है। अंजलि देवी उसी समय अपने ससुर का हाथ पकड़ लेती है और अपने ससुर वेद प्रकाश को कहती है कि मैं तुम्हारी सारी जरूरतों को तुम्हारी सारी इच्छाओं को पूरा कर सकती हूं। मैं जानती हूं कि तुम मुझ पर हमेशा गलत और गंदी नजर रखा करते थे। लेकिन आज मैं तुम्हारी उन सारी जरूरतों को, सारी इच्छाओं को पूरा कर सकती हूं और तुम्हें यह सारी बातें मेरे पति को नहीं बतानी है। जैसे ही वेद प्रकाश को यह सारी बातें कही जाती है तो वेद प्रकाश की नियत अपनी बहू अंजलि देवी पर खराब हो जाती है और इसके बाद अंजलि खुद ब खुद अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद करती है और अपने ससुर वेद प्रकाश का हाथ पकड़ कर कमरे के अंदर ले जाती है और फिर इसके बाद वेद प्रकाश और अंजलि के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। और जैसे इन दोनों की जरूरतें पूरी हो जाती है, दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है। तो वेद प्रकाश अपनी बहु अंजलि को कहने लगता है कि देखो अंजली आज के बाद यह लड़का मेरे घर में नहीं आना चाहिए। जिस दिन मैंने इस लड़के को अपने घर में देख लिया तो मैं यह सारी बातें अपने बेटे शेरपाल को बता दूंगा। अंजली कहने लगती है कि आज के बाद यह लड़का इस घर में नहीं आएगा। लेकिन तुम्हें अब मेरी सारी जरूरतों को पूरा करना पड़ेगा। जितने भी पैसे मैं तुमसे मांगा करूंगी तुम्हें मुझे पैसे देने पड़ेंगे। वेद प्रकाश कहता है कि कोई बात नहीं जितनी भी हो सकेगी मैं तुम्हारी मदद करूंगा और इस तरीके से इस महिला अंजलि देवी ने अपने ही ससुर को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था।

लेकिन अंजलि यहीं पर रुकने वाली नहीं होती है। अंजलि इससे भी बड़ा और भयानक कांड करने वाली थी। जिसके बारे में ना तो वेद प्रकाश कुछ जानता था और ना ही अंजलि का पति शेरपाल कुछ जानता था। इस तरीके से कुछ दिनों का और वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 8 अगस्त 2026 का दिन। सुबह के करीब 9:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। वेद प्रकाश थकाहारा अपने घर पर आता है। वेद प्रकाश देखता है कि उसकी बहू अंजलि होती है वह घर में खाना बना रही होती है। अंजलि अपने ससुर को देखकर बड़ी खुश हो जाती है। अंजलि अपने ससुर को कहने लगती है कि पिताजी तुम ऐसा करो जितने भी तुम्हारे बैंक खाते में पैसे हैं वह सारे पैसे अपने बैंक खाते से बाहर निकलवा लो और तुम्हें मुझे एक सोने की नई चैन खरीद कर देनी पड़ेगी। वेद प्रकाश जैसे ही अपनी बहू अंजलि की यह सारी बातें सुनता है तो कहने लगता है कि देखो बहू इतने पैसे तो मेरे खाते में नहीं है लेकिन अगले साल तक मैं इतने पैसे जरूर कमा लूंगा कि मैं तुम्हारे लिए एक सोने की चैन खरीद कर दे सकूं। अंजलि इस बात पर भड़क जाती है। अंजली कहने लगती है कि तुमने तो कहा था कि तुम मेरी सारी जरूरतों को पूरा कर दोगे। लेकिन तुमने तो मेरी एक भी जरूरत को पूरा नहीं किया है। जैसे तैसे करके वेद प्रकाश खाना खाता है और खाना खाने के बाद अपने खेत में चला जाता है। लेकिन अंजलि अब एक सोने की चैन को हासिल करना चाहती थी और अंजलि सोने की चैन को हासिल करने के लिए किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार हो जाती है। अब इसके बाद अंजलि अपने पहले प्रेमी प्रवीण के पास फोन कॉल करती है और प्रवीण को कहती है कि मुझे एक सोने की नई चैन खरीदनी है। लेकिन प्रवीण साफ-साफ मना कर देता है। प्रवीण कहने लगता है कि अब तो मैं तेरे घर पर भी नहीं आ सकता हूं। तेरे ससुर ने मुझे धमकी दी है कि मैं तेरे घर पर नहीं आ पाऊंगा। अगर मैं तेरे घर में आता हूं तो मैं फंस सकता हूं। लेकिन अंजलि कहने लगती है कि तुम मुझे सोने की चैन खरीद कर देने वाले हो या नहीं देने वाले हो। प्रवीण कहता है कि मेरे पास इतने पैसे नहीं है। इसके बाद थक हारकर अंजलि फोन कॉल काट देती है। अब अंजलि इस बात के बारे में अच्छे तरीके से जानती थी कि उसके गांव में एक सोहन लाल सुनार रहता है और सोहन लाल सुनार एक ऐसा सुनार होता है जो कि औरतों का गुलाम होता है। औरतों में काफी ज्यादा दिलचस्पी रखा करता था। अब इसके बाद अंजलि देवी उसी समय अपने घर से बाहर निकलती है और सोहन लाल सुनार की दुकान की तरफ चली जाती है। थोड़ी देर में ही यह महिला सुनार की दुकान पर पहुंच जाती है। सोहन लाल सुनार उस समय अपनी दुकान में अकेला बैठा होता है। सोहन लाल की पत्नी के 9 साल पहले मौत हो गई थी। सोहन लाल के जो बच्चे होते हैं वह विदेश में रहते थे। सोहन लाल एक अमीर व्यक्ति होता है। लेकिन नाड़े और लंगोट का ढीला होता है। अब सोहन लाल की दुकान में जैसे यह महिला प्रवेश करती है और सोहन लाल की नजरें इस महिला की कंचन कोमल काया पर पड़ती है तो सोहन लाल की नियत भी खराब हो जाती है। सोहन लाल कहने लगता है कि तुम बहुत दिनों के बाद मेरी दुकान पर आई हो। तुम्हें क्या खरीदना है? उसी समय अंजलि कहने लगती है कि मुझे एक सोने की चैन खरीदनी है लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं है। मैं तुम्हें दो-ती महीनों के अंदर यह सारे पैसे दे सकती हूं। तुम मुझे सोने की चैन दे दो। लेकिन सोहन लाल कहते हैं कि मैं उधारी में सोना नहीं बेचता हूं और वैसे भी मैं उधारी तो बिल्कुल भी नहीं करता हूं। लेकिन इसके बाद अंजली देवी अपने रंग दिखाना शुरू कर देती है। अंजलि देवी कहने लगती है कि मैं तुम्हारी सारी जरूरतों को सारी इच्छाओं को पूरा कर सकती हूं। बस मुझे एक सोने की चैन दे दो। सोहन लाल एक बहुत ही चालाक व्यक्ति होता है। सोहनल कहने लगता है कि अगर तुम्हें सोने की चैन ही चाहिए तो आज रात तुम मेरे घर पर आ सकती हो और मेरे घर पर आकर मेरी जरूरतों को पूरा करके एक सोने की चैन ले जा सकती हो। अब अंजली देवी सोने की चैन को लेने के लिए किसी भी हद से गुजर सकती थी। अंजलि देवी खुश होकर कहती है कि कोई बात नहीं आज रात के करीब 10:00 बजे के आसपास मैं तेरे घर पर आ जाऊंगी और फिर तुम मुझे एक सोने की चैन दे देना। यह दो चार बातें करने के बाद अंजली उसी समय सोहन लाल सुनार के दुकान से बाहर निकलती है। अपने घर पर आ जाती है और फिर कामकाज में व्यस्त हो जाती है। अब देखते ही देखते पूरा दिन गुजर जाता है और जैसे रात का समय होता है तो रात के समय अंजलि देवी अपने बेटे आरव को खाना खिलाने के बाद कमरे में सुला देती है और जैसे ही रात के 10:30 बजे के आसपास का वक्त होता है तो अंजलि उसी समय अपने घर से बाहर निकलती है और फिर इसके बाद सोहन लाल के घर की तरफ चल पड़ती है। थोड़ी देर में ही महिला सोहन लाल के घर पर पहुंच जाती है। घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है। सोहन लाल अपने घर का दरवाजा खोल देता है। सोहन लाल ने काफी ज्यादा शराब भी पी रखी होती है। सोहन लाल जैसे ही इस महिला की खूबसूरती को देखता है तो बड़ा खुश हो जाता है। सोहन लाल कहता है कि अंजली घर के अंदर आ जाओ। मैंने तुम्हारे लिए एक सोने की चैन बहुत अच्छे से संभाल कर रखी हुई है। इसके बाद अंजली देवी घर के अंदर प्रवेश कर जाती है। अंजलि कहने लगती है कि पहले मैं सोने की चैन लूंगी और इसके बाद तुम अपना काम कर सकते हो। सोहन लाल उसी समय इस महिला को सोने की चैन देता है और फिर अपने बेडरूम के अंदर ले जाता है और फिर इसके बाद सोहन लाल और इस महिला अंजलि देवी के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं। यह दोनों मिलकर अपनी इच्छाओं को तब तक पूरा करते हैं जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती है। और जैसे ही दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो इसके बाद सोहलाल कहते हैं कि अंजली तुम अब हर तीसरी चौथी रात मेरे घर पर आ सकती हो और बदले में मैं तेरी सारी जरूरतों को पूरा कर दिया करूंगा लेकिन तुम्हें भी मेरी जरूरतों का ख्याल रखना पड़ेगा। अंजली भी हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि सुनार साहब तुम किसी बात की फिक्र मत करो। जब भी तुम मेरे पास फोन कॉल करोगे तो मैं तेरे घर पर हाजिर हो जाया करूंगी। इस तरीके से रात के करीब 1:00 बजे के आसपास अंजलि देवी सोने की चैन लेकर इस घर से बाहर निकलती है और अपने घर पर आ जाती है और इस तरीके से अब अंजली देवी ने इस गांव के तीन लोगों को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था। लेकिन आगे चलकर अंजलि के साथ कितना बड़ा कांड होने वाला था इसके बारे में अंजलि कुछ भी नहीं जानती थी। इस तरीके से काफी लंबा समय गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 22 अगस्त 2026 का दिन। सुबह के करीब 9:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। अंजलि देवी अपने पति शेरपाल के पास फोन कॉल करती है और शेरपाल को कहती है कि देखो डेढ़ महीने का वक्त गुजर चुका है लेकिन तुम अब तक घर पर एक बार भी नहीं आए हो। तुम घर पर कब आने वाले हो? शेरपाल कहता है कि आज शाम तक मैं घर पर जरूर आ जाऊंगा और इसके बाद अंजलि फोन कॉल काट देती है। आधे घंटे का वक्त गुजरने के बाद अब अंजली देवी अपने घर से बाहर निकलती है और एक किरियाने की दुकान पर चली जाती है और इस किरियाने की दुकान पर एक अमित कुमार नाम का लड़का बैठा था। अमित को कहने लगती है कि मुझे एक घर का राशन पानी खरीदना है। अमित कहता है कि देखो भाभी तूने पहले ही ₹10,000 की उधारी कर रखी है और मैं आगे उधारी नहीं कर सकता हूं। लेकिन अंजलि कहती है कि आज मेरा पति गांव में आने वाला है और शाम के समय तुम्हें पैसे मिल जाएंगे। लेकिन अमित साफ-साफ मना कर देता है। अमित कहता है कि मैं और उधारी में सामान नहीं दे सकता हूं। इसके बाद यह महिला अंजली देवी इस दुकान से बाहर निकलती है और फिर इसके बाद यह महिला सोहन लाल सुनार के पास चली जाती है और सोहन लाल सुनार को कहती है कि देखो मुझे घर के लिए राशन पानी खरीदना है। मुझे ₹2000 दे दो। सोहन लाल कहने लगता है कि देखो मैं तुम्हें ₹000 जरूर दे सकता हूं लेकिन मैं इसी समय तुम्हारे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं। सोहन लाल कहता है कि तुम मेरे घर के अंदर आ जाओ और मैं तुम्हारे साथ वक्त गुजारूंगा। लेकिन उसी समय यह महिला अंजलि देवी कहने लगती है कि देखो मेरे घर पर इस समय कोई भी नहीं है। तुम ऐसा करो मेरे घर पर आ जाना और मेरे साथ वक्त गुजार लेना। लेकिन इस समय मुझे ₹2000 चाहिए। सोहन लाल जैसे तैसे करके इस महिला को ₹2000 देता है और फिर यह महिला अंजली देवी ₹2000 लेकर अमित किरियाने वाले की दुकान पर चली जाती है। वहां से घर का राशन पानी खरीद लेती है और फिर राशन पानी खरीदने के बाद अपने घर पर आ जाती है। उस समय तक सोहन लाल भी इसके घर की तरफ चल पड़ता है। सोहन लाल जैसे इसके घर पर पहुंचता है तो घर के दरवाजे पर दस्तक देता है। अंजली देवी घर का दरवाजा खोल देती है और सोहन लाल घर के अंदर प्रवेश कर जाता है। और फिर अंजली देवी घर का मुख्य दरवाजा बंद करके सोहन लाल का हाथ पकड़ कर इसको अपने बेडरूम के अंदर ले जाती है। और फिर सोहन लाल और अंजली देवी के बीच गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं। लेकिन उसी समय आज अंजलि देवी का ससुर वेद प्रकाश घर पर आ जाता है। वेद प्रकाश जैसे अपने घर का दरवाजा बंद देखता है तो वेद प्रकाश को अपनी बहू पर शक हो जाता है। क्योंकि वेद प्रकाश ने अपनी बहू को कई बार रंगे हाथ पकड़ रखा होता है। वेद प्रकाश जैसे तैसे करके अपने घर की दीवार फाकर घर के अंदर घुस जाता है और कमरे में जाकर वेद प्रकाश देखता है तो उसकी आंखें पटी की पटी रह जाती है। वेद प्रकाश देखता है कि उसकी बहू अंजलि देवी सोहन लाल सुनार के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाई जाती है। इसके बाद वेद प्रकाश सोहनल सुनार को गालियां देता है और सोहनलाल सुनार को धक्के मार मार कर अपने घर से बाहर निकाल देता है।

लेकिन अब वेद प्रकाश उसी समय अपना फोन कॉल उठाता है और अपने बेटे शेरपाल के पास फोन कॉल करता है और शेरपाल को कहता है कि बेटा शेरपाल तुम जल्दी से घर पर आ जाओ। मुझे तुमसे बहुत ही जरूरी बातें करनी है। अगर तुम घर पर नहीं आए तो घर का सर्वनाश होने वाला है। अब जैसे यह बात शेरपाल को कही जाती है तो शेरपाल अपने पिता को कहता है कि पिताजी मैं रात के करीब 8:00 बजे तक घर पर पहुंच जाऊंगा। तुम किसी प्रकार की कोई चिंता मत करो और इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है। वेद प्रकाश इसके बाद अपनी बहू अंजलि को कहने लगता है कि अंजली तुम बहुत गलत रास्ते पर चल पड़ी हो। तुमने तो उस दिन मुझसे वादा किया था कि तुम किसी को भी अपने घर पर नहीं बुलाओगी। लेकिन सोहन लाल सुनार हमारे घर में क्या कर रहा था? आज अंजलि के पास कोई भी शब्द नहीं होते हैं। आखिरकार पूरा दिन गुजर जाता है और रात के करीब 9:30 बजे के आसपास अब वेद प्रकाश का बेटा शेरपाल अपना ट्रक लेकर इस गांव में आता है। घर पर पहुंचता है। अपने पिता वेद प्रकाश से पूछने लगता है कि पिताजी ऐसी कौन सी जरूरी बातें करनी थी? वेद प्रकाश कहने लगता है कि बेटा तुम्हारी पत्नी गलत रास्ते पर चल पड़ी है। तेरी पत्नी अंजलि देवी बहुत सारे लड़कों के साथ अपनी रातें गुजार चुकी है। यहां तक कि तेरी पत्नी ने मुझ पर भी डोरे डालना शुरू कर दिया था। लेकिन जैसे तैसे करके मैंने तो अपने आप को संभाल लिया है। अब इसके बाद शेरपाल को बहुत गुस्सा आता है। शेरपाल उसी समय अपनी पत्नी अंजलि को घसीट कर कमरे के अंदर ले जाता है और अपनी पत्नी से पूछने लगता है कि तुम किस-किस के साथ रातें रंगीन करती हो। अंजलि अपनी बीती हुई पूरी कहानी अपने पति को सुनाती है। अंजलि अपने पति को कहती है कि तुम मेरी किसी भी जरूरत को पूरा नहीं करते थे। ना तो तुम घर पर पैसे भेजते थे जिसकी वजह से मैंने लोगों के साथ वक्त गुजारना शुरू कर दिया था। यहां तक कि मैंने अपने ससुर के साथ भी अपने गलत रिश्ते कायम करने पड़े। क्योंकि मुझे पैसों की तंगी थी। लेकिन शेरपाल कहता है कि बाकी औरतों के पास भी तो पैसों की तंगी होती है। बाकी औरतों ने तो किसी के साथ भी गलत काम नहीं किया है। तुमने तो हद पार कर दी है। और इसके बाद जो बेटा शेरपाल होता है अपनी पत्नी के हाथ पैर बांधना शुरू कर देता है। रस्सी के साथ अपनी पत्नी के हाथ पैर बांध देता है और घर में एक लोहे का सरिया पड़ा होता है। उस लोहे के सरिए को गर्म करता है और गर्म करने के बाद फिर से कमरे में आता है और कमरे में आने के बाद अपनी पत्नी अंजलि के संवेदनशील हिस्से के अंदर उस गर्म लोहे को यानी उस गर्म सरिए को डाल देता है और जैसे ही लोहे का गर्म सरिया संवेदनशील हिस्से में डाला जाता है तो मौके पर ही अंजलि की मौत हो जाती है और जैसे ही अंजली की मौत होती है तो उसी समय शेरपाल अपने घर से बाहर निकलता है। 1 घंटे के अंदर-अंदर रात के ही समय में नजदीकी पुलिस थाने में जाकर अपने आप को सरेंडर कर दे देता है। पुलिस के सामने बताता है कि मैंने अपनी पत्नी अंजलि का कत्ल कर दिया है और इसके बाद पुलिस घटना स्थल पर पहुंचती है और अंजलि का शव अपने कब्जे में लेती है और फिर इसके बाद जब शेरपाल से अंजलि के कत्ल की वजह पूछी जाती है तो शेरपाल पूरी कहानी पुलिस के सामने बताता है और जैसे ही पुलिस शेरपाल की पूरी कहानी को सुनती है तो पुलिस भी सोचने पर मजबूर हो जाती है। आखिरकार पुलिस शेरपाल के खिलाफ आगे की कानूनी कारवाई शुरू कर देती है। यह बात भविष्य में तय की जाएगी कि जज साहब शेरपाल को आखिरकार क्या सजा सुनाने वाला है। लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शेरपाल ने अपनी पत्नी अंजलि के साथ जो किया क्या वह सही था या गलत था? कमेंट में बताना।

 

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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