एक महिला श्मशान घाट पर अपने प्रेमी से मिलने जाया करती थी, भूत ने उसके साथ कुछ भयानक कर दिया। #
एक महिला श्मशान घाट पर अपने प्रेमी से मिलने जाया करती थी, भूत ने उसके साथ कुछ भयानक कर दिया। #
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एक समय उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में करमपुर नाम के गांव में गायत्री देवी रहती थी। वह विधवा थी लेकिन देखने में बहुत खूबसूरत और जवा/नी लगती थी। उसके पति जगदेव की मौत छ साल पहले शराब के नशे में हुई थी। फिर भी गायत्री ने खुद को संभाल लिया।
गायत्री देवी ने गांव में ही एक अच्छी खासी किराने की दुकान शुरू की थी। दुकान के बलबूते पर उसने अच्छे खासे पैसे कमा लिए थे। इसी पैसे से उसने घर के ठीक सामने शमशान के पास एक छोटा सा बना हुआ घर भी खरीद लिया था। गायत्री रोज सुबह सात बजे दुकान पर आती और रात आठ आठ बजे तक घर पर रहती।

उसके इकलौते देवर का नाम राकेश कुमार था। राकेश एक आंख वाला, काला रंग का और चेहरे का बिगड़ा हुआ लड़का था। वह शराब का दीवाना था। गायत्री उसे पसंद नहीं करती थी क्योंकि राकेश हमेशा औरतों पर गंदी नजर रखता था।
उसके परिवार में सास भी थी जिसका नाम सुधा देवी था। सुधा घर संभालती थी और गायत्री दुकान का काम करती थी।
पांच मई 2026 को सुबह आठ बजे सुधा ने गायत्री से कहा कि मैं थोड़ी देर पड़ोसियों के घर जाती हूं। गायत्री अकेली रह गई। राकेश भी घर में था। वह शराब की हालत में भाभी के हाथ पकड़ने लगा। गायत्री ने हाथ छुड़ाया और राकेश का मुंह पर जोरदार थप्पड़ मार दिया।
राकेश गुस्से में घर से बाहर निकल गया। सुधा घर आ गई। गायत्री ने पूरी बात सुधा को बताई। सुधा ने राकेश को डांटा और घर से बाहर निकाल दिया। राकेश अपने दोस्त के घर रहने लगा।
कुछ दिन बाद गायत्री को अकेलापन महसूस होने लगा। वह किसी भी हैंडसम लड़के को देखकर फिदा हो जाती थी। दस मई 2026 को उसने दुकान खोली। दुकान में बैठकर मोबाइल पर अश्ली/ल वीडियो देख रही थी।
तभी गांव के जमींदार का बेटा अशोक कुमार आया। अशोक दुकान पर आ गया। गायत्री की खूबसूरती और जवा/नी देखकर उसकी आंखों में लालच आ गया। गायत्री ने अशोक को कॉपियां दे दीं और कहा कि दुकान के लिए दस हजार रुपये चाहिए। अशोक ने कहा कि घर से चोरी कर दूंगा। बदले में वक्त गुजार सकता हूं।
गायत्री ने कहा कि अगर दस हजार दोगे तो वक्त गुजार लूंगी। अशोक ने शमशान में आने का वादा किया लेकिन डर गया। गायत्री ने मनाया कि शमशान ही ठीक है। अशोक ने घर चला गया।
शाम को गायत्री ने खाना बनाया और सास को खिलाया। दोनों एक कमरे में सो गए। रात दस बजे सुधा की नींद लग गई। गायत्री ने चुपके से शमशान में पहुंच गया।
रात के दस बतीस पर अशोक भी शमशान पहुंच गया। दोनों ने वहां ग/लत का/म किया। रात भर इच्छा पूरी हुई। दोनों बाहर निकले।
अगले दिन दुकान खोली। ग्राहक आए। सुधा ने फोन किया कि बिजली की तारें जल गई हैं। गायत्री ने रघु नाम के बिजली मिस्त्री को बुलाया। रघु आया।
रघु ने तारें ठीक कीं। गायत्री ने पांच सौ रुपये दिए। सुधा बाहर चली गई। रघु ने गायत्री का हाथ पकड़ लिया। दोनों ने शमशान में वक्त गुजारने का फैसला किया। रघु ने पांच हजार रुपये मांगे। गायत्री ने हां कर दी।
रात दस बतीस पर रघु शमशान पहुंचा। गायत्री ने फोन किया लेकिन रघु ने मना कर दिया।
तभी भूत गायत्री को दबोच लिया। भूत ने उसके कप/ड़े उता/रने लगा और ग/लत का/म किया। गायत्री बेहो/श हो गई। कई घंटे बाद आधी रात को उसे होश आया। वह समझ गई कि भूत ने उसके साथ ग/लत का/म किया है। उसने कपड़े पहने और घर पहुंच गई।
पूरा रात नींद नहीं आई। सुबह गायत्री दुकान नहीं गई। सुधा ने पूछा। गायत्री ने कहा कि तबीयत खराब है। सुधा ने मायके जाने का फैसला किया और तीन चार दिन बाद वापस आने का वादा किया।
गायत्री घर में अकेली रह गई। रात ग्यारह बजे घर का दरवाजा खुला। एक भूत अंदर आ गया। गायत्री बेहो/श हो गई। भूत ने कप/ड़े उता/रे और ग/लत का/म किया।
तीन बतीस पर आंख खुली। गायत्री परेशान हो गई। वह सोचती रही कि भूत रोज रात बारह बजे आता है। चार दिनों तक यही चलता रहा। गायत्री उदास रहने लगी।
अट्ठाईस मई को पड़ोसन सुंदरी आई। गायत्री रोने लगी। उसने कहा कि भूत हर रात घर में आता है। सुंदरी ने कहा कि पुलिस स्टेशन चलो। गायत्री ने मना किया।
सुंदरी ने दबाव डाला। दोनों पुलिस स्टेशन गईं। दरोगा जय सिंह ने कहा कि कोई भूत नहीं है। कोई इंसान है। सिपाही बुलाकर शमशान के सामने पहरा देने का वादा किया।
रात ग्यारह बजे दरवाजा खुला। सिपाही ने पकड़ लिया। लड़का राकेश था।
राकेश को पुलिस स्टेशन ले जाया गया। उसने पोल पट्टी खोल दी। उसने कहा कि भाभी का चरि/त्र ख/राब था। वह कई लड़कों के साथ वक्त गुजारती थी। एक रात शमशान गई तो मैं पीछा करने लगा। भाभी किसी को लेकर जाती। मैं नशा करके बैठा रहता।
मैंने भाभी को नशी/ला इंजे/क्शन लगाया। बेहो/श हो जाने पर मैं उसके साथ ग/लत का/म करता।
पुलिस ने चार्जशीट दायर कर ली। राकेश के खिलाफ केस दर्ज हो गया। जज साहब बाद में फैसला सुनाएंगे।
लेकिन दोस्तों, इस घटना ने हमें सिखाया कि अकेलेपन में गलत रास्ता नहीं चुनना चाहिए। भूत या इंसान जो भी हो, परिवार की खुशी सबसे बड़ी होती है।
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