मंदिर में पूजा के बहाने बुलाया, फिर महिला के साथ हुआ भयावह अपराध; शव ठिकाने लगाने निकले दो पुजारी, रास्ते में पकड़े गए
मंदिर में पूजा के बहाने बुलाया, फिर महिला के साथ हुआ भयावह अपराध; शव ठिकाने लगाने निकले दो पुजारी, रास्ते में पकड़े गए
मेरठ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आई एक कथित आपराधिक घटना ने गांव और आसपास के इलाके में सनसनी पैदा कर दी। एक विधवा महिला, जो अपने परिवार का पालन-पोषण पशुओं से मिलने वाले दूध की आय से कर रही थी, उसके साथ मंदिर के एक पुजारी द्वारा कथित तौर पर गंभीर अपराध किए जाने और बाद में उसकी देवरानी की हत्या किए जाने का मामला सामने आया है।
बताई गई कहानी के अनुसार, घटना में दो पुजारियों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि एक पुजारी ने पहले महिला का विश्वास जीता, फिर नशीला पदार्थ देकर उसके साथ यौन अपराध किया। कुछ समय बाद उसी महिला की देवरानी को भी कथित रूप से निशाना बनाया गया। मामला तब खुला जब दोनों आरोपी कथित तौर पर महिला के शव को ठिकाने लगाने के लिए ले जा रहे थे और रास्ते में कुछ ग्रामीणों ने उन्हें रोक लिया।
हालांकि, इस पूरी घटना में सामने आए आरोपों और बयानों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। किसी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक उसे कानूनी रूप से दोषी नहीं माना जा सकता।
पति की मौत के बाद खुद संभाली जिंदगी
बताई गई जानकारी के अनुसार, मेरठ जिले के एक गांव में कांता देवी नाम की महिला रहती थी। कांता के पति आनंद कुमार की कथित तौर पर नहर में डूबने से मौत हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद कांता विधवा हो गईं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी।
उनके पास कुछ पशु थे। वह रोज सुबह खेतों में जाकर पशुओं के लिए चारा काटती थीं। पशुओं से मिलने वाला दूध स्थानीय डेयरी में बेचकर वह परिवार का खर्च चलाती थीं।
कांता के परिवार में उनकी देवरानी मधु देवी भी रहती थीं। मधु के पति राकेश कुमार दिल्ली में नौकरी करते थे और काम की वजह से अक्सर घर से बाहर रहते थे। इस कारण घर की रोजमर्रा की जिम्मेदारियां काफी हद तक दोनों महिलाओं के आसपास ही रहती थीं।
गांव में ही एक मंदिर था, जहां सुंदर सिंह नाम का पुजारी रहता था।
दूध लेने के बहाने घर तक पहुंचने लगा पुजारी
घटना की कहानी के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 की सुबह सुंदर सिंह कथित तौर पर दान-दक्षिणा मांगने के लिए कांता के घर पहुंचा। वहां उसकी मुलाकात कांता से हुई।
कांता ने मंदिर के पुजारी को आटा और चावल जैसी सामग्री दी। इसी दौरान पुजारी ने कथित तौर पर कहा कि उसे रोज दूध की जरूरत होती है और वह कांता से प्रतिदिन एक लीटर दूध लेना चाहता है।
कांता ने कथित रूप से पैसे लेने से इनकार करते हुए दूध देने की बात कही।
इसके बाद सुंदर सिंह का कांता के घर आना-जाना बढ़ गया। कहानी के अनुसार, वह रोज दूध लेने के बहाने घर पहुंचता और दोनों महिलाओं से बातचीत करता। धीरे-धीरे उसने कथित तौर पर उनका विश्वास हासिल कर लिया।
यही विश्वास आगे चलकर इस मामले का सबसे गंभीर हिस्सा बना।

प्रसाद में नशीला पदार्थ मिलाने का आरोप
एक दिन कांता घर में अकेली थीं। उनकी देवरानी मधु खेत में चारा काटने गई हुई थीं। इसी दौरान सुंदर सिंह कथित तौर पर घर पहुंचा।
आरोप है कि उसने कांता को प्रसाद दिया और कहा कि इसे खाने से घर में सुख-शांति आएगी। कांता ने प्रसाद खा लिया।
कुछ समय बाद वह कथित तौर पर बेहोश हो गईं।
कहानी में आरोप लगाया गया है कि प्रसाद में नशीला पदार्थ मिलाया गया था। महिला के बेहोश होने के बाद पुजारी ने कथित तौर पर उसके साथ यौन अपराध किया और वहां से चला गया।
कुछ समय बाद मधु घर लौटीं। उन्होंने कांता को अचेत अवस्था में पाया और पानी पिलाया। धीरे-धीरे कांता को होश आया।
जब उन्हें पता चला कि उनके साथ क्या हुआ हो सकता है, तो वह स्तब्ध रह गईं।
बदनामी के डर से मामला दबाने की कोशिश?
कहानी के अनुसार, कांता और मधु ने तुरंत पुलिस से संपर्क नहीं किया। कथित तौर पर उन्हें समाज और बदनामी का डर था।
ग्रामीण समाज में लोग क्या कहेंगे, इस चिंता के कारण दोनों महिलाओं ने घटना को छिपाए रखने का फैसला किया।
अगले दिन जब सुंदर सिंह फिर दूध लेने पहुंचा, तो कांता ने कथित तौर पर उससे घटना के बारे में सवाल किया।
आरोप है कि पुजारी ने वास्तविकता स्वीकार करने के बजाय महिला को यह कहकर भ्रमित किया कि उसके घर में कोई भूत-प्रेत या नकारात्मक शक्ति है और उसी वजह से यह घटना हुई।
इसके बाद उसने कथित तौर पर घर में पूजा कराने की पेशकश की।
कांता ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया।
पूजा के नाम पर फिर बनाया विश्वास
पुजारी ने पूजा के लिए सामान की एक सूची दी और शाम को घर आने की बात कही। कांता ने सामान खरीदा और निर्धारित समय पर सुंदर सिंह घर पहुंचा।
उसने कथित तौर पर पूजा की। पूजा के बाद उसने पैसे लेने से भी इनकार कर दिया।
इससे दोनों महिलाओं का उसके प्रति भरोसा और बढ़ गया। उन्हें लगा कि पुजारी वास्तव में उनकी मदद करना चाहता है।
लेकिन इस भरोसे के पीछे क्या चल रहा था, इसका खुलासा बाद की घटनाओं में हुआ।
कांता मायके गईं, तो मधु पर नजर
28 अप्रैल 2026 को कांता को कथित तौर पर अपनी मां की तबीयत खराब होने की खबर मिली। वह कुछ दिनों के लिए मायके चली गईं।
घर पर अब मधु अकेली थीं।
अगले दिन सुंदर सिंह दूध लेने के बहाने घर पहुंचा। जब उसे पता चला कि कांता घर पर नहीं हैं, तो उसने मधु से शाम की आरती में मंदिर आने के लिए कहा।
मधु ने कथित तौर पर उसकी बात मान ली।
शाम को वह मंदिर पहुंचीं। वहां कुछ अन्य श्रद्धालु भी मौजूद थे। आरती के बाद लोग अपने-अपने घर चले गए।
मधु ने पुजारी से प्रसाद मांगा तो उसने कथित तौर पर कहा कि उसके लिए अलग प्रसाद रखा गया है।
यहीं से घटना ने फिर भयावह मोड़ लिया।
मंदिर में महिला को कथित तौर पर नशीला प्रसाद दिया
आरोप है कि सुंदर सिंह ने मधु को ऐसा प्रसाद दिया जिसमें नशीला पदार्थ मिला हुआ था। प्रसाद खाने के कुछ समय बाद मधु कथित तौर पर बेहोश हो गईं।
इसके बाद मंदिर का दरवाजा बंद कर दिया गया।
कहानी में आरोप है कि सुंदर सिंह ने बेहोश महिला के साथ यौन अपराध किया।
इसके बाद उसने कथित तौर पर अपने परिचित कैलाश सिंह को फोन किया, जो दूसरे गांव में मंदिर से जुड़ा हुआ था।
आरोप है कि सुंदर सिंह ने कैलाश को मंदिर आने के लिए बुलाया और उसे बताया कि वहां एक महिला मौजूद है।
कुछ समय बाद कैलाश कथित तौर पर मोटरसाइकिल से वहां पहुंच गया।
दूसरे पुजारी पर भी गंभीर आरोप
कहानी के अनुसार, दोनों आरोपियों ने मंदिर में बैठकर नशा किया। इसी दौरान उन्हें कथित रूप से डर हुआ कि महिला को होश आने पर वह शोर मचा सकती है और पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
इसके बाद आरोप है कि कैलाश ने भी महिला के साथ यौन अपराध किया।
घटना के बाद दोनों कथित तौर पर इस बात पर चर्चा करने लगे कि महिला को कैसे चुप कराया जाए।
यहीं से मामला यौन हिंसा से आगे बढ़कर हत्या तक पहुंच गया।
महिला की हत्या का आरोप
आरोप है कि दोनों ने महिला की हत्या करने और शव को नदी में फेंकने की योजना बनाई।
इसके बाद रस्सी का इस्तेमाल कर मधु की कथित तौर पर हत्या कर दी गई।
रात होने का इंतजार करने के बाद दोनों आरोपी शव को मोटरसाइकिल पर रखकर कथित तौर पर नदी की ओर निकल पड़े।
उन्हें लगा कि अंधेरे में वे शव को ठिकाने लगाकर वापस लौट आएंगे।
लेकिन रास्ते में उनकी योजना विफल हो गई।
चार ग्रामीणों ने रास्ते में रोका
कथित तौर पर चार ग्रामीण अपने खेतों से वापस लौट रहे थे। उनमें श्रवण कुमार नाम का व्यक्ति भी था।
मोटरसाइकिल पर संदिग्ध गतिविधि देखकर ग्रामीणों ने दोनों को रोक लिया।
जब उन्होंने देखा कि मोटरसाइकिल पर एक महिला का शव रखा हुआ है, तो वे हैरान रह गए।
दोनों आरोपियों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी।
कुछ ही समय बाद पुलिस मौके पर पहुंची। महिला के शव को कब्जे में लिया गया और दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।
इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
जांच में पुराने मामले का भी खुलासा होने का दावा
पुलिस जांच के दौरान कथित तौर पर कांता देवी से जुड़ी पिछली घटना की जानकारी भी सामने आई।
बताया गया कि पूछताछ में सुंदर सिंह ने कथित रूप से कांता के साथ भी अपराध करने की बात स्वीकार की। हालांकि, पुलिस हिरासत में दिए गए किसी कथित बयान को अंतिम सत्य तभी माना जा सकता है जब वह कानूनन स्वीकार्य साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से पुष्ट हो।
मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
आगे अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य सबूत यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि वास्तव में घटनाओं का क्रम क्या था और किस आरोपी की क्या भूमिका थी।
घटना ने कई सवाल खड़े किए
यह कथित घटना सिर्फ एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं है। इसके कई सामाजिक पहलू भी हैं।
पहला सवाल है कि किसी धार्मिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा यदि विश्वास का दुरुपयोग किया जाता है, तो उसका असर पीड़ित और पूरे समुदाय पर कितना गंभीर हो सकता है।
दूसरा सवाल महिलाओं के सामने मौजूद सामाजिक दबाव का है। बदनामी और समाज के डर के कारण यदि कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस या परिवार से मदद लेने में हिचकता है, तो अपराधी को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल है—किसी भी महिला या पुरुष के साथ जबरदस्ती, नशीला पदार्थ देकर अपराध या यौन हिंसा हो तो इसे छिपाने के बजाय तुरंत सहायता लेना क्यों जरूरी है।
पुलिस जांच और अदालत की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
इस मामले में सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे और कहानियां सामने आ सकती हैं। लेकिन किसी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट को अदालत के फैसले का विकल्प नहीं माना जा सकता।
किसी भी आपराधिक मामले में पुलिस जांच, मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और न्यायालय की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो कानून के तहत दोषियों को सजा मिल सकती है। लेकिन अंतिम निर्णय अदालत का ही होगा।
इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि एक महिला की जान चली गई और उसके परिवार को अपूरणीय क्षति हुई।
यह मामला एक गंभीर चेतावनी की तरह भी देखा जा सकता है—धर्म, रिश्ते या किसी सामाजिक पद के नाम पर किसी व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा करना सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
यदि किसी व्यक्ति के साथ जबरदस्ती, नशीला पदार्थ देकर अपराध, धमकी या यौन हिंसा होती है, तो उसे अकेले सहने के बजाय तुरंत पुलिस, परिवार, भरोसेमंद व्यक्ति या उपलब्ध कानूनी सहायता से संपर्क करना चाहिए।
किसी भी पीड़ित की सुरक्षा और सम्मान, समाज की तथाकथित “बदनामी” से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।