(PART 2) देहरादून में शहीद आर्मी कर्नल के इकलौते बेटे के कत्ल में करोड़पति सगी मां की भूमिका की पूरी कहानी!
भाग 2: विनोद उनियाल का अंधेरा अतीत और परिवार की पीड़ा
अर्जुन की हत्या की खबर पूरे देहरादून को हिला गई। बसंत विहार में रहने वाले लोग, जो कभी सोचते थे कि कर्नल रमेश चंद की विधवा बेटी अमीर है, अब उनका गला घोंटने लगे थे। अर्जुन शर्मा को जब दून हॉस्पिटल में शव मिला, तो अस्पताल में मरीजों ने भी रोते हुए देखा। अर्जुन की पत्नी अभिलाषा, जो उसी समय घर में थी, सन्नाटे में बैठी रही। उनके छोटे से बेटे विक्रम और बेटी प्रिया ने पूछा, “पापा कहाँ गए?” अभिलाषा ने आँखें बंद कर लीं। उनका दिल टूट चुکا था। वे जानती थीं कि अर्जुन का बाप शहीद हुआ था, लेकिन परिवार के अंदरूनी झगड़े ने उन्हें भी आखिरी रास्ते पर ले जा दिया।
अब पुलिस ने विनोद उनियाल की जिंदगी का पूरा रिकॉर्ड खोला। विनोद उनियाल, जिसे लोग रसूखदार और अजीब रिश्तेदार कहते थे, 50 साल का था। वह अर्जुन का चाचा का छोटा भाई था, लेकिन उसका रिश्ता बिना शर्मा से हमेशा से अजीब था। पुलिस के जांच के दौरान पता चला कि विनोद उनियाल की पत्नी संगीता उनियाल भी उसकी कंपनी में काम करती थी। दोनों ने मिलकर कई प्रॉपर्टी सौदे किए थे। एक प्रॉपर्टी, जिसकी कीमत 18 करोड़ थी, विनोद ने बिना शर्मा को बेचने की कोशिश की थी। बिना शर्मा ने मना कर दिया और डॉक्टर अजय ने ही सौदा किया। डॉक्टर अजय के घर से पुलिस ने कई लैपटॉप और ड्राइव मिली। उनमें से एक फाइल में लिखा था, “अर्जुन को खत्म कर दो, वरना 2027 में सब खत्म।” यह फाइल विनोद के पास से मिली थी।

कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। जज साहब ने सख्ती से कहा, “यह सिर्फ प्रॉपर्टी का झगड़ा नहीं, बल्कि परिवार को खत्म करने की साजिश है।” सभी को चार्जशीट पेश की गई। विनोद, डॉक्टर, बिना शर्मा, पंकज और राजीव को गैंगस्टर एक्ट के तहत 10 साल से 20 साल तक की सजा हो सकती थी। लेकिन हत्या का केस अलग से चल रहा था।
अब परिवार टूट चुका था। अभिलाषा और उसके बच्चे बेसुध हैं। बिना शर्मा जेल में बैठी सोचती हैं कि अगर उन्होंने अर्जुन से बात की होती, तो शायद यह हत्याकांड नहीं होता। अर्जुन की याद में हर रात वे रोती हैं। उनके बच्चे अब बड़े हो रहे हैं, लेकिन उनके दादा नहीं हैं।
पुलिस और कोर्ट ने अपना काम किया। सबूत साफ हो गए। विनोद उनियाल, डॉक्टर अजय खन्ना, बिना शर्मा और दोनों शूटर को सजा सुनाई गई। जून 2026 तक सभी जेल में थे।
लेकिन यह घटना सिखाती है कि परिवार में झगड़ा गलत रास्ता ले जाता है। पैसे, जमीन, रिश्तों को समझना जरूरी है। अगर मां और बेटे ने एक-दूसरे को समझ लिया होता, तो अर्जुन आज भी जीवित होते और परिवार खुशहाल होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आज भी देहरादून में लोग इस घटना की चर्चा करते हैं। वे कहते हैं कि हर विवाद को समझदारी से हल करना चाहिए। पैसे से ज्यादा रिश्ते की कीमत है। अगर कोई विवाद हो तो वकील या रिश्तेदारों से बात करो, कोर्ट तक न पहुँचो। यही सीख आज भी कई परिवार ले रहे हैं।
भाग 3: परिवार का अंतिम सदमा और समाज की आवाज
अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने एक नई बात की। उन्होंने कहा, “मेरे पति ने मुझे बताया था कि बिना शर्मा कभी अर्जुन को बेटा नहीं मानती थीं। उन्होंने कहा था, ‘पापा ने शहीद होने के बाद भी मुझे कभी मां नहीं कहा।’” यह बयान पुलिस और कोर्ट को और गहराई दे गया। अभिलाषा ने वकील से कहा कि वे बच्चों को अब विनोद के घर नहीं छोड़ना चाहतीं। वे चाहतीं कि बच्चे उनके साथ रहें। लेकिन बिना शर्मा की प्रॉपर्टी के केस में अब अभिलाषा भी शामिल हो गई थी, क्योंकि वह अर्जुन की विधवा थी।
देहरादून में लोग इस घटना पर चर्चा करते थे। कई लोग कहते, “पैसे ने परिवार तोड़ दिया।” कुछ कहते, “बिना शर्मा की अहंकार ने सब बर्बाद कर दिया।” अर्जुन की दादी, जो कर्नल रमेश की मां थीं, अब फ्लैट में अकेली रहती थीं। वे रोज अर्जुन के फोटो को देखतीं और रोतीं। उन्होंने कहा था, “मेरा पोता समझदार था, लेकिन मां का डर उसको अंधा कर गया।”
अब विनोद उनियाल को जेल में सालों गुजरने पड़ेंगे। जेल के अंदर भी उसके साथी उसे घूरते थे। उन्होंने बताया कि विनोद ने अर्जुन को पहले से ही धमकी दी थी। “अगर तुम मां के साथ मतलब नहीं रखोगे, तो मैं सब संभाल लूँगा।” लेकिन अर्जुन ने इनकार कर दिया। विनोद ने फिर भी योजना बनाई।
दोस्तों, यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है। यह परिवार के अंदरूनी संघर्ष, पैसे के अहंकार, और रिश्तों की कीमत की कहानी है। बिना शर्मा ने 38 साल से विनोद को पैसे दिए, लेकिन कभी उसे बेटा नहीं माना। विनोद ने अर्जुन को अपना भाई समझा, लेकिन बिना शर्मा ने उसे कभी नहीं देखा। डॉक्टर अजय ने सिर्फ पैसे के लिए साथ दिया। दोनों शूटर सिर्फ काम के लिए थे।
अब परिवार टूट चुका था। अभिलाषा और उसके बच्चे बेसुध हैं। बिना शर्मा जेल में बैठी सोचती हैं कि अगर उन्होंने अर्जुन से बात की होती, तो शायद यह हत्याकांड नहीं होता। अर्जुन की याद में हर रात वे रोती हैं। उनके बच्चे अब बड़े हो रहे हैं, लेकिन उनके दादा नहीं हैं।
पुलिस और कोर्ट ने अपना काम किया। सबूत साफ हो गए। विनोद उनियाल, डॉक्टर अजय खन्ना, बिना शर्मा और दोनों शूटर को सजा सुनाई गई। जून 2026 तक सभी जेल में थे।
लेकिन यह घटना सिखाती है कि परिवार में झगड़ा गलत रास्ता ले जाता है। पैसे, जमीन, रिश्तों को समझना जरूरी है। अगर मां और बेटे ने एक-दूसरे को समझ लिया होता, तो अर्जुन आज भी जीवित होते और परिवार खुशहाल होता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आज भी देहरादून में लोग इस घटना की चर्चा करते हैं। वे कहते हैं कि हर विवाद को समझदारी से हल करना चाहिए। पैसे से ज्यादा रिश्ते की कीमत है। अगर कोई विवाद हो तो वकील या रिश्तेदारों से बात करो, कोर्ट तक न पहुँचो। यही सीख आज भी कई परिवार ले रहे हैं।