महिला IPS की बहन के साथ पुलिस की बदसलूकी – आगे जो हुआ उसने सबको हिला दिया
महिला IPS की बहन के साथ पुलिस की बदसलूकी – आगे जो हुआ उसने सबको हिला दिया
सुबह का समय था। बाजार में सड़क के किनारे सुमित्रा देवी हमेशा की तरह टोकरी में मछली बेच रही थी।
उनकी दो बेटियां रेखा और प्रिया दूर सीमा पर देश की सेवा में लगी हुई थीं। दोनों बहनें आर्मी ऑफिसर थीं।
उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनकी मां किस परिस्थिति में जीवन बिता रही हैं और आज उनकी मां के साथ कुछ ऐसा होने वाला था जो उनकी आत्मा को झकझोर देगा। सुमित्रा देवी चुपचाप मछली बेचने में व्यस्त थी।
तभी एक इंस्पेक्टर जिसका नाम दीपक वर्मा था मोटरसाइकिल पर आया। उसने बाइक सड़क के किनारे रोक दी और गुस्से में बोला, तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई सड़क के किनारे मछली बेचने की? तुम्हारी वजह से यहां जाम लग सकता है। जल्दी यहां से हट जाओ।
यह कहकर उसने अचानक टोकरी को जोर से लात मारी। मछलियां जमीन पर बिखर गईं। चारों तरफ मछलियों की गंध फैल गई और लोग तमाशा देखने के लिए ठिठक कर खड़े हो गए।

इंस्पेक्टर ने और गुस्से में चिल्लाकर कहा, क्या यह तुम्हारे बाप की सड़क है? जहां मन करे बैठकर मछली बेचना शुरू कर दिया। अगर बेचना है तो अपनी जगह पर जाकर बेचो।
सुमित्रा देवी चुपचाप उसकी बातें सुनती रही। अपमान सहन करती रही। उनकी आंखों में आंसू आ गए। लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा और जमीन पर बिखरी हुई मछलियों को उठाना शुरू कर दिया। भीड़ में खड़े लोग बस तमाशा देख रहे थे। किसी ने विरोध नहीं किया। किसी ने मदद भी नहीं की।
भीड़ में एक लड़का था जो सोशल मीडिया पर मशहूर था। उसने अपना मोबाइल निकाला और पूरी घटना को रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। इंस्पेक्टर उसे डांटता रहा, अपमान करता रहा और लोग बस हंसते-हंसते देखते रहे।
सुमित्रा देवी मन ही मन सोच रही थी। अगर मेरी दोनों बेटियों को यह पता चलेगा तो क्या होगा? काश वे इस घटना को कभी ना जाने वरना तूफान आ जाएगा।
आंखों में आंसू लिए मछलियां टोकरी में वापस रखकर वह धीरे-धीरे घर की तरफ चल दी।
इधर जिस लड़के ने वीडियो बनाया था, वह घर पहुंचकर वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। कैप्शन में लिखा, “इस बूढ़ी मां की कोई गलती नहीं थी, लेकिन इंस्पेक्टर ने उनकी मछलियां फेंक दी और सड़क पर अपमान किया। क्या यह सही है?”
वीडियो तेजी से वायरल हो गया। लोग शेयर करने लगे, कमेंट करने लगे। सब इस घटना को गलत बता रहे थे।
कुछ देर बाद वीडियो प्रिया के मोबाइल पर पहुंचा। वीडियो देखते ही उसका खून खल उठा। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी मां के साथ ऐसा बर्ताव किया गया है। लोगों के सामने अपमान किया गया है। यहां तक कि थप्पड़ भी मारा गया है।
प्रिया ने तुरंत वीडियो अपनी बड़ी बहन रेखा को भेज दिया। रेखा वीडियो देखकर गुस्से से लाल हो गई।
आंखों में आंसू आ गए। मन ही मन सोचा काश पिताजी होते तो हमें यह दिन नहीं देखना पड़ता। हम इतनी मेहनत करके इस मुकाम पर पहुंचे हैं। फिर भी मां को सुख नहीं दे पाए। लेकिन मैं उस इंस्पेक्टर को छोडूंगी नहीं। बदला लेकर ही रहूंगी।
वीडियो देखने के बाद रेखा ने तुरंत प्रिया को फोन किया। उसकी आवाज में गुस्सा साफ था। प्रिया तुम यहीं रहो। मैं घर जा रही हूं और उस इंस्पेक्टर से बदला लूंगी।
प्रिया ने तुरंत कहा, नहीं दीदी मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी। मां के साथ जो हुआ वह मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं। उसे उसकी औकात दिखानी ही होगी।
रेखा ने समझाया तुम्हारा यहीं रहना ठीक होगा। मैं मां को लेकर वापस आऊंगी और हम उन्हें यहीं पास में रखेंगे। कुछ देर बहस चली। लेकिन अंत में प्रिया राजी हो गई। ठीक है दीदी तुम जाओ। लेकिन मां को साथ लेकर वापस आना।
रेखा ने फोन रख दिया। यूनिफार्म उतारकर पीले रंग का सलवार सूट पहन लिया और कहा कोई है और अच्छी तरह जानते हैं कि उसमें क्या लिखा है। मैं उसी कानून की मदद से उसे सजा दिलवाऊंगी। अगर आप रिपोर्ट नहीं लिखेंगे तो मैं आपके खिलाफ भी कार्यवाही करूंगी।
सुरेश सिंह हक्का-बक्का रह गया। यह साधारण गांव की लड़की इतने आत्मविश्वास के साथ और बिना किसी डर के बात कर रही थी। मानो उसके पीछे कोई बड़ी ताकत हो।
उसने कहा तुम कौन हो और तुम्हारी इतनी हिम्मत कि हमें सस्पेंड करवाओगी। हम चाहे तो अभी तुम्हें जेल में डाल सकते हैं।
रेखा ने कुछ नहीं कहा और अपना सरकारी आईडी कार्ड टेबल पर रख दिया। आईडी देखकर सुरेश सिंह की आंखें फटी रह गई। डरते-डरते बोला, “आप आर्मी ऑफिसर हैं।” “सॉरी मैडम, बोलिए क्या करना है?”
रेखा ने सख्त लहजे में कहा इस थाने की हालत बहुत खराब है। यहां न्याय जैसी कोई चीज नहीं है। सॉरी कहने से कुछ नहीं होगा। अब मैं सीधे आपके और आपके इंस्पेक्टर के खिलाफ कारवाई करूंगी।
यह कहकर थाने का दरवाजा खुला और इंस्पेक्टर दीपक वर्मा अंदर आया। लड़की को देखकर हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा। क्या बात है? क्या करने आई हो?
रेखा के मन में अंदर ही अंदर तूफान चल रहा था। अगर वह कानून का सम्मान ना करती तो उसी पल उसे थप्पड़ मार देती। लेकिन वह कानून की रक्षक थी। इसलिए सिर्फ बोली याद रखना मैं तुम्हें सस्पेंड करवा कर रहूंगी। तुम्हारा कानून में रहने का कोई अधिकार नहीं है। मेरी बात तुम्हारे लिए बहुत भारी पड़ेगी।
यह कहकर रेखा थाने से निकल गई। अंदर खड़े सिपाही सुरेश सिंह और खुद इंस्पेक्टर दीपक भी सोच में पड़ गए। क्या यह लड़की सच में कार्यवाही करेगी?
रेखा घर लौटी। थोड़ी देर सोचा। फिर एक योजना उसके दिमाग में आई। अगले दिन सुबह वह सीधे ईएसपी ऑफिस पहुंची। ऑफिस में ईएसपी मैडम श्रुति हसन बैठी थी।
रेखा ने समय बर्बाद ना करते हुए मोबाइल निकाला और उन्हें वायरल वीडियो दिखाया। मैडम, मैं इंस्पेक्टर दीपक के खिलाफ कड़ी कारवाई चाहती हूं।
श्रुति हसन ने गंभीर लहजे में कहा, मैडम रेखा, मैं जानती हूं कि आप आर्मी ऑफिसर हैं। लेकिन हमारे कानून के लिए सबूत और गवाह की जरूरत होती है। जब तक आप ठोस सबूत और गवाह लेकर नहीं आएंगी तब तक कार्यवाही संभव नहीं है।
रेखा ने सहमति जताई और निकल पड़ी। घर लौटकर उसने उसी सोशल मीडिया अकाउंट की जांच शुरू की जहां से वीडियो पोस्ट हुआ था।
कुछ घंटों में उसने उस लड़के को ढूंढ निकाला जिसने वीडियो बनाया था। वह उसके घर गई और बोली, तुमने यह वीडियो अपनी आंखों के सामने रिकॉर्ड किया है। मुझे इसका मूल संस्करण चाहिए और तुम्हें ही गवाह बनना होगा।
लड़का पहले डर गया। फिर राजी हो गया और उसे बिना संपादन वाला वीडियो दे दिया।
रेखा उसे साथ लेकर फिर से ईएसपी ऑफिस पहुंची। श्रुति हसन ने सबूत देखे। फिर सीधे डीएम अखिलेश को फोन किया। डीएम ने वीडियो देखा और दंग रह गए। इस इंस्पेक्टर ने बहुत गलत किया है और कानून के खिलाफ काम किया है। इसे सजा मिलनी चाहिए।
अगले दिन ही डीएम ने जिले के सबसे बड़े ऑफिस में प्रेस मीटिंग रखी। सुबह 11:00 बजे जिला मुख्यालय के बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल में डीएम अखिलेश की प्रेस मीटिंग शुरू होने वाली थी। हॉल के बाहर मीडिया की गाड़ियां कतार में खड़ी थीं। हर बड़े अखबार और न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर कैमरे के साथ अंदर जाने की तैयारी कर रहे थे।
हॉल के अंदर मंच पर चार कुर्सियां लगी थीं। बीच में डीएम अखिलेश दाई ओर एसपी श्रुति हसन और बाई ओर दो खाली कुर्सियां थी जहां अभी कोई नहीं बैठा था। सामने पत्रकारों की लंबी कतार थी।
डीएम ने टेबल पर रखी घंटी बजाकर कहा सभी पत्रकार बैठ जाएं। मीटिंग शुरू हो रही है। पूरा हॉल शांत हो गया।
कैमरे चालू हो गए। डीएम ने गंभीर लहजे में बोलना शुरू किया। कल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है। जहां एक पुलिस इंस्पेक्टर ने एक वृद्ध महिला के साथ सड़क पर दुर्व्यवहार किया है। मछली की टोकरी फेंक दी है। थप्पड़ मारा है और खुलेआम अपमान किया है।
यह सिर्फ नैतिकता के खिलाफ नहीं है। हमारे कानून और पुलिस आचार संहिता के भी खिलाफ है।
पत्रकारों के कैमरे क्लिक- क्लिक करने लगे। डीएम ने आगे कहा हमारे पास पीड़ित पक्ष की तरफ से ठोस सबूत और प्रत्यक्षदर्शी गवाह हैं। सबूत के तौर पर हमारे पास बिना संपादन वाली वीडियो फुटेज है जो घटना के समय उपस्थित एक युवक ने रिकॉर्ड की थी। गवाह भी यहां उपस्थित है और बयान देने के लिए तैयार है।
यह कहकर रेखा मंच पर आई और मीडिया की तरफ मुंह करके बोली मैं रेखा सिंह भारतीय सेना में कैप्टन हूं। यह पीड़ित महिला मेरी मां सुमित्रा देवी हैं। पूरा हॉल सन रह गया।
पत्रकार एक दूसरे की तरफ देखने लगे। मानो अब मामला और बड़ा हो गया हो। रेखा रुकी नहीं बोलती रही। मैंने कानून पढ़ा है और जानती हूं कि किसी को भी सड़क पर इस तरह अपमानित करना अपराध है। चाहे वह आम आदमी हो या पुलिस ऑफिसर। कानून सबके लिए समान है।
पत्रकारों ने सवाल पूछने शुरू किए। मैडम आप क्या चाहती हैं? सिर्फ इंस्पेक्टर के खिलाफ कारवाई हो या इसमें कोई और भी शामिल है?
रेखा ने जवाब दिया इस घटना में सिर्फ इंस्पेक्टर ही नहीं थाने के एसएचओ सुरेश सिंह भी समान रूप से दोषी हैं। जिन्होंने शिकायत लेने से इंकार किया है।
पीड़ित का उपहास किया है और कानून का मजाक उड़ाया है। एसपी श्रुति हसन ने माइक्रोफोन लिया और बोली हम आंतरिक जांच शुरू कर दी है। लेकिन क्योंकि मामला गंभीर है और पीड़ित पक्ष के पास पुख्ता सबूत हैं। मैं सिफारिश करती हूं कि दोनों अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष हो।
डीएम ने सिर हिलाकर आदेश पढ़ा। तत्काल प्रभाव से इंस्पेक्टर दीपक वर्मा और एसएओ सुरेश सिंह को निलंबित किया जाता है। इस आदेश की प्रति पुलिस मुख्यालय और राज्य गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी।
पत्रकारों में फुसफुसाहट शुरू हो गई। इतनी जल्दी कारवाई यह तो एक मिसाल है। मीटिंग खत्म होते ही डीएम ने जिला प्रशासन के कानूनी सलाहकार को बुलाया। मैं पूरी प्रक्रिया को कानूनी ढांचे के भीतर करना चाहता हूं। नोटिस तैयार करें और निलंबन पत्र तैयार करें।
कानूनी सलाहकार ने बताया, “सर, पहले हमें एक चार्जशीट बनानी होगी जिसमें आईपीसी की धाराएं और पुलिस अधिनियम के तहत की गई गलतियां लिखी होंगी। फिर एक विभागीय जांच समिति का गठन किया जाएगा। हालांकि निलंबन आदेश तत्काल प्रभावी हो सकता है ताकि आरोपी जांच को प्रभावित ना कर सके।”
डीएम ने तुरंत आदेश दिया और 2 घंटे में निलंबन पत्र तैयार हो गया। इस बीच गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई। बाजार के लोग एक दूसरे को बताने लगे। सुना है? सुमित्रा देवी के साथ जो हुआ था, अब उसका न्याय होने वाला है। उसकी बेटी आर्मी ऑफिसर है। उसने यह सब करवाया है।
सुमित्रा देवी के घर के बाहर भीड़ लग गई। कोई हौसला बढ़ाने आया तो कोई बस देखने। सुमित्रा देवी बार-बारी कह रही थी, मैंने बदला नहीं मांगा था। सिर्फ सम्मान मांगा था। लेकिन मेरी बेटियां तो आग हैं। वे अन्याय बर्दाश्त नहीं करती।
जब निलंबन आदेश थाने पहुंचा तब सिपाहियों में खलबली मच गई। एक सिपाही धीरे से बोला, भाई, इस लड़की ने तो सच में कर दिखाया। हमने तो सोचा भी नहीं था कि मामला डीएम तक पहुंचेगा।
दीपक वर्मा और सुरेश सिंह दोनों को आदेश सुनाया गया। आप दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। जांच पूरी होने तक आप किसी भी सरकारी पद का उपयोग नहीं कर सकते।
दीपक वर्मा ने आदेश का कागज जमीन पर फेंक दिया। लेकिन सुरेश सिंह के चेहरे पर साफ डर था। यह लड़की हमारी जिंदगी बर्बाद कर देगी। मैंने कहा था ना कि उससे पंगा मत लो।
शाम होते ही टीवी चैनलों की हेडलाइन चलने लगी। इंस्पेक्टर और एसएओ निलंबित आर्मी ऑफिसर मां को न्याय दिला पाई वायरल वीडियो बन गया हथियार पुलिस अधिकारियों पर पड़ी सजा की हथौड़ी रेखा के मोबाइल पर एक के बाद एक कॉल आने लगे कोई बधाई देने के लिए कोई मीडिया इंटरव्यू के लिए लेकिन रेखा ने सिर्फ कहा यह सिर्फ मेरी मां का मामला नहीं है। यह उन सभी के लिए है जिनके साथ चुपचाप अन्याय होता है।
एक हफ्ते बाद विभागीय जांच में सबूतों और गवाहों के आधार पर दोनों अधिकारी दोषी पाए गए। रिपोर्ट में लिखा गया कि इंस्पेक्टर दीपक वर्मा ने पद का दुरुपयोग किया है। अनुशासन तोड़ा है और जनता के साथ अशिष्ट व्यवहार किया है। एसएओ सुरेश सिंह ने शिकायत लेने से इंकार करके कर्तव्य की उपेक्षा की है।
राज्य पुलिस मुख्यालय से आदेश आया कि दोनों अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा।
जब यह खबर सुमित्रा देवी के घर पहुंची तो रेखा ने सिर्फ कहा मां यह जीत सिर्फ हमारी नहीं है। हर उस इंसान की है जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है। सुमित्रा देवी ने मुस्कुराते हुए कहा, बेटा अच्छा हुआ। अब तुम्हारी मां को शांति मिली है।