(PART 3) करोड़पति बाप अपनी तलाकशुदा बेटी कि शादी करना चाहता था
भाग 3: नई खुशहाली, बड़ा सपना और अनंत आभार
दो साल बीत चुके थे। नोएडा के पास उस बड़े गांव में राजेंद्र की नई जूस और हेल्थ ड्रिंक की दुकान अब “राजेंद्र अमन हेल्थ प्रोडक्ट्स” नाम से चल रही थी। अमन अब २७ साल का हो चुका था। उसकी छोटी सी जूस की गाड़ी आज शहर की सड़कों पर नहीं, बल्कि अपनी कंपनी की कई बड़ी गाड़ियों में काम करती थी। शीतल का गर्भावस्था बहुत अच्छी तरह चल रहा था। डॉक्टर ने कहा, “श्रीमती शीतल, बच्चा बहुत मजबूत है।” शीतल ने अमन को गले लगाते हुए कहा, “अमन, आज हमारा बच्चा हमारे परिवार में जुड़ने वाला है।” अमन की आंखें नम हो गईं। उसने कहा, “जी हां, अब हम तीनों साथ होंगे।”
एक सुबह अमन राजेंद्र के साथ अपने हॉस्पिटल और स्कूल के प्रोजेक्ट पर जा रहा था। राजेंद्र ने अमन का कंधा थपथपाया और बोला, “बेटा, जब तुम फुटपाथ पर बैठा था और मैं तुम्हें जूस दे रहा था, तब मुझे लगा था कि एक अच्छा लड़का मिल गया है। आज तुम करोड़ों की संपत्ति के बीच हो, फिर भी वही पुराना दिल है।” अमन हंसकर बोला, “अंकल, पैसा इंसान को बदल नहीं सकता। आपने मुझे परिवार दिया, अब मैं आपको परिवार में रखना चाहता हूं।”
शादी के बाद अमन ने जूस का अपना काम बंद नहीं किया। वह आज भी सुबह उठकर अपने ठेले पर जाता था। राजेंद्र ने उसकी मदद से एक बड़ी हेल्थ ड्रिंक कंपनी शुरू करवाई। कुछ ही समय में अमन के पास ५० से ज्यादा ड्राइवर और २०० कर्मचारी काम करने लगे। लेकिन अमन में कोई घमंड नहीं आया। वह आज भी गरीब बच्चों को जूस मुफ्त पिलाता था।
शीतल का गर्भावस्था और नया घर
एक दिन शीतल ने अमन से कहा, “अमन, आज मैं गर्भवती हूँ। बच्चा जन्मेगा तो हमारा घर बहुत बड़ा हो जाएगा।” अमन ने शीतल का हाथ पकड़ा और बोला, “मैंने सोचा भी नहीं था कि मैं एक दिन दुल्हन की शादी करूंगा और उसके बाद बच्चा पावेगा। लेकिन अब मैं तैयार हूँ।” राजेंद्र ने तुरंत एक बड़ा बंगला बना दिया। बंगले में १० कमरे, बगीचा, स्विमिंग पूल और एक छोटा सा हॉस्पिटल भी था। शीतल बंगले में रहते हुए रोज सुबह अमन के साथ जूस के ठेले पर जाती और कहती, “यहां से शुरू हुई हमारी जिंदगी।”
राहुल अब ५ साल का हो चुका था। वह रोज सुबह अमन के ठेले पर जाता और कहता, “पापा, जूस दो।” अमन मुस्कुराकर उसे जूस देता। रिया ३ साल की थी। वह अमन के गले में दौड़ती और “पापा अमन” कहती। राजेंद्र अक्सर बंगले आते और बच्चों को देखकर कहते, “मेरी बेटी ने मुझे एक सच्चा परिवार दिया है।”
अमन का नया सपना – हॉस्पिटल और स्कूल का विस्तार
एक शाम अमन राजेंद्र से बोला, “अंकल, मैं सोच रहा हूँ कि गांव में एक बड़ा हॉस्पिटल बनाऊं। जहां गरीब लोग मुफ्त इलाज करा सकें। और गांव में एक और बड़ा स्कूल बनाऊं।” राजेंद्र की आंखें चमक उठीं। बोले, “बेटा, मैं तुम्हारे साथ हूँ। पहले मैंने तुम्हें जूस दिया था, आज मैं तुम्हारा हॉस्पिटल और स्कूल चलाऊंगा।” अमन ने राजेंद्र के पैर छुए और कहा, “अंकल, आपने मुझे माँ बनाया। अब मैं आपको बेटा का दर्जा देना चाहता हूं।”
राजेंद्र ने तुरंत २५ करोड़ रुपये का हॉस्पिटल बनाने का काम शुरू कर दिया। नाम रखा गया – “राजेंद्र अमन हॉस्पिटल एंड मेडिकल सेंटर”. गांव के ५०० गरीब लोग अब वहां फ्री इलाज करा सकते थे. अमन रोज हॉस्पिटल जाता और गरीबों को जूस पीने को कहता। एक दिन एक बुजुर्ग ने अमन से कहा, “बेटा, तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है।”
भूतिया ट्विस्ट और परिवार की परीक्षा
दो साल बाद गांव से एक अनजान आदमी आया। उसने अमन से कहा, “अमन, शीतल की पहली शादी के दस्तावेजों में कुछ गलत है। मैं विक्रम का भाई हूँ। मैं जानता हूँ कि शीतल की शादी झूठी थी।” अमन का चेहरा उतर गया। उसने राजेंद्र को सारी बात बताई। राजेंद्र ने तुरंत वकील बुलाया। वकील ने कहा, “सर, शीतल का तलाक पूरी तरह कानूनी है। कोई झूठ नहीं है।” लेकिन अमन के मन में सवाल उठा। वह सोचने लगा कि क्या शीतल का अतीत अभी भी किसी को परेशान कर रहा है।
शाम को अमन ने शीतल से कहा, “जी हां, मैंने तुम्हें कभी झूठ नहीं बताया। लेकिन अब मुझे डर लग रहा है कि लोग क्या कहेंगे।” शीतल ने अमन का हाथ पकड़ा और रोते हुए बोली, “अमन, मैं जानती हूँ तुम मेरे अतीत के लिए मुझसे दूर नहीं होंगे। लेकिन अगर तुम चाहो तो मैं वापस पहली शादी की बात नहीं बताऊंगी।” अमन ने उसे गले लगाया और कहा, “नहीं शीतल जी। मैं तुम्हें कभी झूठ नहीं सुनना चाहता। लेकिन मैं तुम्हारे साथ हूं।”
राजेंद्र ने दोनों को घर बुलाया और कहा, “बेटा, अब तुम दोनों एक परिवार हो। मैं तुम्हें कभी कोई सवाल नहीं पूछूंगा। लेकिन अगर कभी कोई नया झूठा आरोप आए तो मैं तैयार हूँ।” अमन और शीतल ने मिलकर फैसला किया – वे दोनों एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।
नया बिजनेस और परिवार की खुशहाली
अमन ने अब अपनी जूस कंपनी को ५० करोड़ का प्रॉफिट किया। उसने एक नई ड्रिंक लॉन्च की – “अमन हेल्थ जूस”. राजेंद्र ने कहा, “बेटा, तुमने मेरे सपने को पूरा किया।” शीतल ने अमन के साथ मिलकर एक छोटा सा हॉस्पिटल फंड शुरू किया। गरीब माताओं के लिए।
एक शाम अमन और शीतल अपने बच्चों के साथ बगीचे में बैठे थे। राहुल और रिया खेल रहे थे। शीतल ने अमन से कहा, “अमन, मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक बार बारिश में छज्जे के नीचे खड़े लड़के को देखकर मैं इतना बड़ा परिवार पा लूंगी।” अमन ने शीतल का हाथ पकड़ा और बोला, “मैंने भी कभी सोचा नहीं था। लेकिन आज मैं खुश हूं कि हमने एक-दूसरे को चुना।”
राजेंद्र अक्सर बंगले आते और बच्चों को देखकर कहते, “मेरी बेटी ने मुझे सच्चा परिवार दिया है। अब मैं बूढ़े हो गए हूं, लेकिन मेरे बच्चे मेरे परिवार हैं।”
अंतिम संदेश
दोस्तों, इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिंदगी में इंसान की कीमत उसकी जेब से नहीं उसके चरित्र से तय होती है। अमन के पास पैसा नहीं था लेकिन उसके पास ईमानदारी थी। शीतल के पास एक टूटा हुआ अतीत था। लेकिन उसके अंदर फिर से खुश होने की हिम्मत थी। राजेंद्र के पास करोड़ों की संपत्ति थी। लेकिन वह अपनी बेटी के लिए सिर्फ एक ऐसा इंसान चाहता था जो उसे सम्मान दे। और आखिरकार तीनों को वही मिला जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी। इसलिए दोस्तों, कभी किसी इंसान को उसके कपड़ों, उसके काम या उसकी आर्थिक स्थिति देखकर छोटा मत समझिए। क्योंकि हो सकता है जिसके पास आज कुछ नहीं है उसके पास कल पूरी दुनिया हो और हो सकता है जिसके पास आज करोड़ों रुपए हैं उसे भी जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत सिर्फ एक सच्चे इंसान की हो।
याद रखिए, पैसा इंसान को अमीर बना सकता है लेकिन संस्कार ही उसे बड़ा इंसान बनाते हैं। रिश्ते दौलत से नहीं भरोसे से टिकते हैं और सच्चा जीवन साथी वही है जो आपके अच्छे समय में नहीं बल्कि आपके बुरे समय में आपका हाथ पकड़ कर कहे “मैं तुम्हारे साथ हूं”. दोस्तों, यहां पर कहानी का अंत होता है और यह कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में जरूर बताइएगा और हमारे चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लीजिएगा क्योंकि मैं आप लोगों के लिए एक से बढ़कर एक कहानियां लेकर आता रहता हूं। धन्यवाद।