भाग 3: अस्तबल में मिला वह राज – News

भाग 3: अस्तबल में मिला वह राज

भाग 3: अस्तबल में मिला वह राज

भाग 3: अस्तबल में मिला वह राज

रघु के परिवार को लगा था कि पुरानी बातें अब धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं।

लेकिन उन्हें नहीं पता था कि असली रहस्य अभी सामने आना बाकी था।

एक रात गांव में अचानक खबर फैल गई कि रघु के अस्तबल से एक महंगा घोड़ा गायब हो गया है।

अगली सुबह अस्तबल का दरवाजा खुला मिला और अंदर घोड़े की जगह सिर्फ टूटी हुई रस्सी पड़ी थी।

रघु के पैरों तले जमीन खिसक गई।

वह घोड़ा उसके कारोबार के सबसे कीमती घोड़ों में से एक था। उसकी कीमत इतनी थी कि उसके गायब होने से रघु को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता था।

गांव वालों ने तुरंत तरह-तरह की बातें शुरू कर दीं।

किसी ने कहा कि यह चोरी है।

किसी ने कहा कि चोरी करने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं हो सकता, क्योंकि उसे अस्तबल की व्यवस्था की पूरी जानकारी थी।

लेकिन सबसे ज्यादा शक उस महिला पर किया जाने लगा, जो वर्षों से अस्तबल में काम करती थी।

जब पुलिस गांव पहुंची तो उससे भी पूछताछ की गई।

महिला ने रोते हुए कहा,

“मैंने कुछ नहीं किया। मैं गरीब हूं, लेकिन चोर नहीं हूं।”

रघु भी उसके पक्ष में बोल रहा था।

लेकिन पुलिस को अस्तबल के पीछे कुछ पैरों के निशान मिले।

जांच करने पर पता चला कि घोड़े को मुख्य दरवाजे से नहीं, बल्कि पीछे की छोटी पगडंडी से बाहर ले जाया गया था।

इसका मतलब था कि चोरी करने वाला व्यक्ति अस्तबल के अंदर की व्यवस्था अच्छी तरह जानता था।

नेहा को अचानक कुछ याद आया।

पिछले कुछ दिनों से उसने रात के समय अस्तबल के पास किसी के चलने की आवाज सुनी थी।

उसने यह बात रघु को बताई।

रघु ने तुरंत पूछा,

“तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”

नेहा ने कहा,

“मुझे लगा कोई गांव का आदमी होगा। मैंने सोचा बात बढ़ाने से फिर से वही पुरानी बातें शुरू हो जाएंगी।”

पुलिस ने गांव के कुछ लोगों से पूछताछ शुरू की।

इसी दौरान एक नया नाम सामने आया—सुरेश।

वही सुरेश, जो कुछ समय पहले रघु के घर आकर पुरानी बातों का खुलासा कर चुका था।

पुलिस ने उससे पूछा कि वह चोरी वाली रात कहां था।

सुरेश ने कहा कि वह अपने घर पर था।

लेकिन पुलिस को उसकी बात पर संदेह हुआ क्योंकि एक ग्रामीण ने दावा किया था कि उसने रात में सुरेश को अस्तबल की तरफ जाते देखा था।

रघु के बेटे को यह सुनकर गुस्सा आ गया।

उसने कहा,

“क्या सुरेश इतने साल बाद हमारे परिवार को नुकसान पहुंचाने आया है?”

लेकिन नेहा ने उसे रोक दिया।

“सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।”

पुलिस ने अस्तबल और आसपास के इलाके की फिर से जांच की।

उन्हें जमीन पर घोड़े के खुरों के निशान के साथ-साथ मोटरसाइकिल के टायरों के निशान भी मिले।

निशान गांव से बाहर जाने वाली सड़क की तरफ जा रहे थे।

पुलिस ने आसपास के गांवों में भी जानकारी भेजी।

दो दिन बाद एक खबर आई।

करीब बीस किलोमीटर दूर एक गांव में एक घोड़ा बेचने की कोशिश की गई थी।

घोड़े की पहचान तुरंत हो गई।

लेकिन जिस व्यक्ति ने उसे बेचने की कोशिश की थी, वह वहां से भाग चुका था।

अब मामला सिर्फ चोरी का नहीं रह गया था।

पुलिस को शक था कि इसके पीछे कोई ऐसा व्यक्ति है जो रघु के कारोबार और उसके अस्तबल की पूरी जानकारी रखता है।

तीसरे दिन पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला।

अस्तबल के पीछे पड़े पुराने लकड़ी के बक्से में एक छोटा-सा मोबाइल फोन मिला।

फोन बंद था।

जब उसे चालू किया गया तो उसमें सिर्फ कुछ तस्वीरें और एक रिकॉर्डिंग मिली।

रिकॉर्डिंग सुनते ही नेहा के चेहरे का रंग उड़ गया।

उसमें रघु की आवाज थी।

लेकिन रघु ने दावा किया कि उसने वह बातचीत कभी रिकॉर्ड नहीं की थी।

रिकॉर्डिंग में वह किसी व्यक्ति से कह रहा था,

“अगर यह बात बाहर चली गई तो बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा।”

नेहा ने रघु की ओर देखा।

“पिताजी, यह क्या है?”

रघु कुछ नहीं बोला।

उसके बेटे ने भी पूछा,

“आप हमसे अभी भी कुछ छिपा रहे हैं?”

रघु ने सिर झुका लिया।

काफी देर बाद उसने कहा,

“यह आवाज मेरी है… लेकिन यह बातचीत कई साल पुरानी है।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

“उस समय मुझे एक ऐसे आदमी के बारे में पता चला था जो घोड़ों के कारोबार में गलत तरीके से पैसा कमाता था। मैंने उसके खिलाफ जाने की कोशिश की थी। लेकिन उसने मुझे धमकी दी थी।”

पुलिस ने रिकॉर्डिंग को जांच के लिए भेज दिया।

अब सवाल यह था कि वह पुरानी रिकॉर्डिंग चोरी की घटना से कैसे जुड़ी थी।

और सबसे बड़ा सवाल—

वह मोबाइल अस्तबल में किसने रखा था?

उसी रात पुलिस को एक और सुराग मिला।

अस्तबल के पीछे की दीवार पर मिट्टी में एक नाम लिखा था।

सिर्फ चार अक्षर।

“मोहन।”

रघु ने नाम पढ़ते ही पहचान लिया।

उसका चेहरा सफेद पड़ गया।

नेहा ने पूछा,

“मोहन कौन है?”

रघु ने धीमी आवाज में जवाब दिया—

“वह आदमी… जिसे मैंने करीब पंद्रह साल पहले गांव से जाने के लिए मजबूर किया था।”

अब परिवार के सामने एक नया रहस्य था।

क्या मोहन वापस आ चुका था?

क्या घोड़े की चोरी सिर्फ चोरी थी?

या फिर यह रघु के अतीत से जुड़ी किसी पुरानी दुश्मनी का हिस्सा था?

पुलिस ने उसी रात मोहन की तलाश शुरू कर दी।

लेकिन सुबह होने से पहले रघु के घर के दरवाजे के नीचे एक कागज मिला।

उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“जिस राज को तुमने पंद्रह साल छिपाया, अब पूरा गांव उसे जानेगा।”

नेहा ने वह कागज पढ़ा और उसकी आंखों में डर साफ दिखाई देने लगा।

क्योंकि अब उसे समझ आ चुका था—

घोड़े का गायब होना शायद इस कहानी की शुरुआत थी।

असली राज अभी बाकी था।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

Related Articles

Chưa phân loại 8 hours ago

फटी पुरानी सलवार-कमीज़ में शादी में पहुंची गरीब लड़की, सबने उड़ाया मजाक… फिर खुला ऐसा राज कि सबकी आंखें झुक गईं

फटी पुरानी सलवार-कमीज़ में शादी में पहुंची गरीब लड़की, सबने उड़ाया मजाक… फिर खुला ऐसा…

Chưa phân loại 10 hours ago

बेटे ने बूढ़े माँ-बाप को वृद्धाश्रम भेजने की सोची… फिर पिता ने ऐसा फैसला लिया कि पूरा परिवार रो पड़ा

बेटे ने बूढ़े माँ-बाप को वृद्धाश्रम भेजने की सोची… फिर पिता ने ऐसा फैसला लिया…