पुलिस इंस्पेक्टर ने घर पर एक नौकर रखा / नौकर का पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी के साथ संबंध बन गया। – News

पुलिस इंस्पेक्टर ने घर पर एक नौकर रखा / नौकर का पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी के साथ संबंध बन गया।

पुलिस इंस्पेक्टर ने घर पर एक नौकर रखा / नौकर का पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी के साथ संबंध बन गया।

पुलिस इंस्पेक्टर ने घर पर एक नौकर रखा / नौकर का पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी के साथ संबंध बन गया।

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एक समय राजस्थान के अलवर जिले में टहला नाम के कस्बे में बसंत विहार कॉलोनी में रहता था जगदीश कुमार। वह एक पुलिस दरोगा था। जगदीश कुमार शराब, कबाब और रिश्वत से बहुत प्यार करता था। उसकी पत्नी कांता देवी और बेटा उज्जवल थे। कांता देवी गर्भवती थी लेकिन जगदीश कुमार कभी उसके पास नहीं जाता था।

जगदीश कुमार की नियत हमेशा गलत थी। वह किसी भी खूबसूरत महिला को आसानी से अपनी इच्छा पूरी करने के लिए मजबूर कर लेता था। उसने गरीब लोगों से रिश्वत ले ली थी और बैंक बैलेंस भर गया था। परिवार में सब ठीक चल रहा था लेकिन आगे चलकर सब कुछ बदल गया।

एक दिन सुबह के करीब आठ बजे जगदीश कुमार थाने जाने के लिए निकला। दो घंटे बाद थाने में एक खूबसूरत महिला कविता देवी आई। उसकी आंखों में दुख था। उसने कहा कि उसके पति सुरेश को पुलिस ने चोरी का मामला दाग दिया है। उसे रिहा करवाने में मदद चाहिए।

जगदीश कुमार ने कविता को देखा और उसकी नजर में बदलाव आ गया। उसने कहा कि मैं तुम्हारी मदद करूंगा लेकिन एक शर्त है। कविता ने पूछा क्या शर्त है। जगदीश कुमार बोला कि तुम्हें एकांत जगह पर चलना पड़ेगा। कविता थोड़ा डर गई लेकिन गरीबी और पति की मदद की जरूरत में मानने को तैयार हो गई।

जगदीश कुमार ने कविता को एकांत स्थान पर ले जाकर कहा कि आज रात तुम मेरे बिस्तर गर्म कर दो। मैं कल सुबह तुम्हारे पति को रिहा कर दूंगा। कविता ने कहा हां सर मैं मान जाती हूं। जगदीश कुमार ने अपना पता और फोन नंबर मांगा। कविता ने अपना फोन दिया। रात को जब आठ बजे हुए जगदीश ने शराब का ठेका लिया और नशे में कविता के घर पहुंच गया।

कविता के पति मजदूरी पर काम करते थे। जगदीश ने घर का दरवाजा बंद किया और कविता के साथ अपनी इच्छा पूरी की। कविता मजबूर थी इसलिए सहमति दे रही थी। सुबह छह बजे जगदीश चला गया और पति को रिहा कर दिया। लेकिन वह हर तीसरी या चौथी रात कविता के घर जाता और पैसे भी देता। कविता उदास रहती लेकिन परिवार बचाने के लिए सब सह लेती।

कुछ दिन बाद कांता देवी के घर की नौकरानी मंजू ने काम छोड़ दिया। कांता ने जगदीश से कहा कि कोई नौकरानी न आए तो तुम्हें ही काम करना पड़ेगा। जगदीश ने कहा कि मैं जल्दी बंदोबस्त कर दूंगा। लेकिन कांता को घर का काम अकेले करना पड़ता। वह शराब और जिम्मेदारी से थक जाती।

एक दिन कांता सब्जी खरीदने शहर गई। वहां शंकर नाम का एक हट्टा कट्टा लड़का मिला। शंकर सब्जी बेचता था और महीने में बारह हजार कमाता था। कांता ने कहा कि मैं तुम्हें पंद्रह हजार दूंगी अगर तुम मेरे घर में छोटा काम करो। शंकर खुश हो गया। कांता ने जगदीश से फोन पर बात करके शंकर को नौकरी दे दी।

शंकर ने कहा कि कमरा आठ किलोमीटर दूर है। कांता ने कहा कि घर के बाहर कमरा बनाया है। शंकर मान गया और घर आ गया। वह तेज चालाक था और बड़ी उम्र की महिलाओं में दिलचस्पी रखता था। कांता को वह अच्छा लगा।

जगदीश थाने में रहता था और उज्जवल स्कूल जाता था। कांता और शंकर के बीच बातें बढ़ने लगीं। धीरे धीरे करीब आ गए। तीन जुलाई 2026 को जगदीश ने कहा कि मेरी बहन का पति बीमार है। मुझे दो तीन दिन उसके घर जाना है। कांता ने कहा कि मैं भी चलूंगी लेकिन उज्जवल पढ़ाई खराब हो जाएगी। जगदीश अकेले गया।

कांता अकेली रह गई। नौकर शंकर काम कर रहा था। आधे घंटे बाद कांता ने शंकर को बुलाया और बोला कि पति बाहर है और बेटा स्कूल गया है। हम किसी होटल चलें। शंकर की आंखें फटी रह गईं लेकिन पांच हजार रुपये देखकर लालच हो गया। कांता ने पैसे दिए और दोनों शहर गए।

होटल में कमरा बुक किया गया। दोनों ने खाना खाया और कमरे में चले गए। रात भर उनकी इच्छा पूरी हुई। दोनों खुश होकर वापस घर आए। कांता का मन कभी भी शंकर के साथ होटल ले जाता। जगदीश की इच्छा खत्म हो चुकी थी। कांता का दिल शंकर पर आ गया।

बीस जुलाई को कांता ने कहा कि आज हमारी शादी की सालगिरह है। जगदीश ने कहा कि मैं जल्दी आऊंगा। लेकिन रात सात बजे जगदीश थाने से निकला। बीच में शराब का ठेका लिया और नशे में कविता के घर पहुंच गया। वहां कविता के पति मजदूरी पर काम करते थे।

जगदीश ने घर का दरवाजा बंद किया और कविता के साथ रात गुजार ली। उसी समय कांता ने जगदीश को फोन किया। जगदीश ने कहा कि आज काम है और घर नहीं आ सकता। फोन काट दिया गया। कांता नाराज हुई। उज्जवल को खाना खिलाया और दूसरे कमरे में लेटा दिया।

कांता ने शंकर को रात दस बजे बुलाया। दोनों कमरे में चले गए। उज्जवल की आंख खुल गई। वह मां की तलाश करता हुआ उसी कमरे तक पहुंच गया। शंकर दरवाजा खोलकर बाहर निकल गया। उज्जवल ने मां से पूछा कि नौकर तुम्हारे कमरे में क्या कर रहा था। कांता ने झूठ बोला कि दवाइयां लेने आया था। उज्जवल ने कहा कि यह गलत है। कांता ने पैसे का लालच दिया और कहा कि किसी को मत बताना।

रात भर कांता और शंकर का गलत काम चलता रहा। कांता का मन शंकर के लिए जलता था। जगदीश की पत्नी कभी उसकी तरफ नहीं देखती थी। कांता ने कई रातें होटल में गुजारीं और पैसे भी दिए।

चौबीस अगस्त 2026 को जगदीश घर में खाना खा रहा था। कांता ने कहा कि मेरी तबीयत खराब है। मुझे हॉस्पिटल ले जाओ। जगदीश ने कहा कि तुम्हारा चेकअप की जरूरत नहीं। मैं रात कभी नहीं गुजारी। कांता बेहोश हो गई। उज्जवल ने शंकर को बुलाया। शंकर ने जगदीश को फोन किया कि मालकिन बेहोश है।

जगदीश ने कांता को हॉस्पिटल ले जाया। डॉक्टर ने चेकअप किया और कहा कि तुम बाप बनने वाले हो। कांता एक महीने की गर्भवती है। जगदीश का माथा ठनक गया। उसने कहा कि मैंने पत्नी के साथ रात नहीं गुजारी। डॉक्टर ने कहा कि पत्नी ही बता सकती है। जगदीश ने गुस्से में कहा कि पेट में किसका बच्चा है।

कांता डर गई और अपनी पूरी कहानी सुनाई। उसने कहा कि तुम कभी प्यार नहीं करते थे। मैं रास्ते से भटक गई और शंकर ने मेरे साथ अनगिनत रातें होटल में गुजारीं। जगदीश ने पहले शंकर को दो गोलियां मारीं। फिर कांता पर दो गोलियां चला दीं। दोनों लाशें हो गईं। पड़ोसी दौड़े। पुलिस आई और जगदीश को गिरफ्तार किया गया।

जगदीश ने पुलिस को अपनी पूरी कहानी बताई। वह जानता था कि उसकी पत्नी गलत रास्ते पर चली थी। लेकिन उसने भी गलत किया था। फैसला बाद में होगा। दोस्तों, यह सच्ची घटना है। जगदीश कुमार ने अपनी पत्नी कांता देवी के साथ जो किया क्या वह सही था या गलत? कमेंट में जरूर बताएं। जय हिंद।

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https://www.youtube.com/watch?v=c-Lw9vxqiIQ
Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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