दादा को चार गोलियां, मां की भी हत्या: पुलिस के सामने पोती ने बताई ऐसी वजह कि हर कोई रह गया स्तब्ध
दादा को चार गोलियां, मां की भी हत्या: पुलिस के सामने पोती ने बताई ऐसी वजह कि हर कोई रह गया स्तब्ध
धौलपुर, राजस्थान: राजस्थान के धौलपुर जिले से सामने आई एक कथित पारिवारिक हत्या की कहानी ने रिश्तों, भरोसे और घरेलू शोषण को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के सामने दिए गए कथित बयान के अनुसार, एक किशोरी ने अपने दादा की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद अपनी मां को भी गोली मार दी। घटना के बाद जब पुलिस ने उससे हत्या की वजह पूछी तो उसके कथित खुलासे ने जांच अधिकारियों को भी चौंका दिया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े कई आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए किसी भी व्यक्ति को अदालत के अंतिम निर्णय से पहले दोषी मानना उचित नहीं होगा।
32 एकड़ जमीन और गांव में बड़ा प्रभाव
कहानी की शुरुआत धौलपुर जिले के आदमपुर गांव से बताई जाती है। यहां देशराज सिंह नाम का एक व्यक्ति कथित तौर पर बड़ी जमीन का मालिक था। उसके पास करीब 32 एकड़ जमीन होने और आर्थिक रूप से मजबूत होने की बात कही गई है।
स्थानीय स्तर पर उसका काफी प्रभाव बताया जाता था। परिवार में उसकी विधवा बहू कमलेश देवी और पोती चांदनी भी रहती थीं। चांदनी स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा थी और पढ़ाई में अच्छी बताई जाती थी।
बाहर से यह परिवार सामान्य दिखाई देता था, लेकिन कहानी के अनुसार घर के भीतर रिश्तों में कई ऐसी बातें चल रही थीं, जिनकी जानकारी धीरे-धीरे सामने आई।
एक घटना ने पोती के मन में पैदा किया डर
कथित घटनाक्रम के अनुसार, अप्रैल 2026 में चांदनी अपने स्कूल की किताबें खरीदने के लिए पैसे मांगने अपनी मां के पास पहुंची थी। मां ने उसे दादा से पैसे लेने के लिए कहा।
चांदनी कथित तौर पर दादा के कमरे में जाने से झिझक रही थी। इसके बावजूद वह पैसे लेने कमरे में गई। कहानी के अनुसार, वहां दादा के व्यवहार से उसे असहजता महसूस हुई और वह जल्दी से कमरे से बाहर निकल गई।
यही घटना बाद की घटनाओं के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

घर में काम करने आई युवती से जुड़ा आरोप
इसके बाद कहानी में परिवार के खेत पर काम करने वाले एक मजदूर की बेटी रूबी का जिक्र आता है। कथित तौर पर उसे घर में काम करने के लिए भेजा गया था।
आरोप है कि घर के बुजुर्ग व्यक्ति ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और उसे धमकाया। बाद में जब चांदनी ने कथित तौर पर ऐसी स्थिति देखी तो उसने इसका विरोध किया।
मामले की कहानी के अनुसार, इसके बाद रूबी और उसके पिता को काम से निकाल दिया गया।
यह घटना चांदनी के मन में अपने दादा को लेकर मौजूद डर और अविश्वास को और गहरा करने वाली बताई जाती है।
जन्मदिन पर फिर बदला व्यवहार
कुछ समय बाद चांदनी का जन्मदिन आया। वह नया मोबाइल फोन चाहती थी। परिवार में बातचीत के बाद दादा ने उसके लिए फोन खरीदने की बात कही।
शुरुआत में चांदनी उसके साथ अकेले शहर जाने को तैयार नहीं थी। लेकिन परिवार के समझाने के बाद वह दादा के साथ चली गई।
बताया जाता है कि दादा ने उसे खाना खिलाया, मोबाइल फोन खरीदा और जन्मदिन के लिए केक भी लिया। इसके बाद चांदनी के मन में उसके प्रति भरोसा दोबारा बनने लगा।
परिवार के भीतर होने वाली इस तरह की घटनाओं में विश्वास का टूटना और फिर दोबारा बनना जांच का अहम हिस्सा हो सकता है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक परिस्थितियां जांच और अदालत के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होंगी।
खेत पर ले जाने के बाद सामने आया गंभीर आरोप
28 मई 2026 को कथित तौर पर दादा अपनी पोती को खेत दिखाने के बहाने वहां लेकर गया।
कहानी के अनुसार, खेत पर पहुंचने के बाद चांदनी को एक कमरे के पास बैठने के लिए कहा गया। आरोप है कि इसके बाद बुजुर्ग ने उसे धमकाया और उसके साथ गंभीर यौन अपराध किया।
कथित तौर पर चांदनी को धमकी दी गई कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो उसे और उसकी मां को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
चांदनी घर वापस लौटी, लेकिन डर के कारण उसने तत्काल अपनी मां को कुछ नहीं बताया।
यौन शोषण के मामलों में पीड़ित का चुप रह जाना असामान्य नहीं है। डर, धमकी, पारिवारिक दबाव और अपराधी के प्रभाव जैसी परिस्थितियां पीड़ित को लंबे समय तक चुप रहने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
मां को लेकर भी चौंकाने वाला खुलासा
कुछ दिनों बाद चांदनी अपनी सहेली के साथ घर से बाहर गई। वापस लौटने पर उसे घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला।
कुछ देर बाद दरवाजा खोला गया। कहानी के अनुसार, चांदनी ने घर के भीतर ऐसी स्थिति देखी जिससे उसे कथित तौर पर अपनी मां और दादा के बीच चल रहे अनुचित संबंधों का पता चला।
यह दावा भी जांच का विषय है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
कहा जाता है कि इस घटना के बाद चांदनी मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई। उसके सामने एक तरफ कथित शोषण की पीड़ा थी, दूसरी तरफ परिवार के भीतर मौजूद रिश्तों को लेकर गहरा सदमा।
रात में उठाया पिस्तौल और चली गोलियां
इसके बाद कहानी का सबसे भयावह हिस्सा सामने आता है।
रात के समय परिवार के लोग सो रहे थे। कथित तौर पर चांदनी को नींद नहीं आ रही थी। वह दादा के कमरे में गई और वहां रखी लाइसेंसी पिस्तौल उठा ली।
पुलिस के सामने दिए गए कथित बयान के अनुसार, उसने दादा पर चार गोलियां चलाईं।
गोलियों की आवाज सुनकर उसकी मां कमलेश की नींद खुल गई। वह कमरे में पहुंची तो कथित तौर पर उसने अपनी बेटी के हाथ में पिस्तौल देखी।
इसके बाद चांदनी ने अपनी मां पर भी गोलियां चला दीं। पुलिस के अनुसार, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद चांदनी ने कथित तौर पर स्वयं पुलिस को फोन किया और अधिकारियों को घर बुलाया।
पुलिस के सामने क्या बताया?
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर दोनों शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इसके बाद चांदनी से पूछताछ की गई।
कहानी के अनुसार, चांदनी ने पुलिस को बताया कि उसके दादा ने उसके साथ कथित तौर पर यौन शोषण किया था और उसकी मां के भी दादा के साथ कथित रूप से अनुचित संबंध थे।
उसने इन्हीं घटनाओं को हत्या की वजह बताया।
हालांकि, किसी भी आरोपी या पीड़ित के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच, मेडिकल साक्ष्य, गवाहों के बयान और अदालत की कार्यवाही के बाद ही निकाला जा सकता है।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर यह सब यहां तक पहुंचा कैसे?
इस मामले की सबसे बड़ी चिंता केवल दो मौतें नहीं हैं। इससे बड़ा सवाल यह है कि अगर लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो कथित शोषण और घरेलू दबाव की स्थिति समय रहते सामने क्यों नहीं आ सकी?
क्या परिवार के किसी सदस्य को पहले से इसकी जानकारी थी?
क्या बच्ची ने किसी से मदद मांगने की कोशिश की थी?
क्या धमकियों के कारण वह चुप रही?
और क्या समय रहते किसी विश्वसनीय व्यक्ति, शिक्षक, रिश्तेदार या बाल संरक्षण तंत्र तक बात पहुंचती तो स्थिति अलग हो सकती थी?
इन सवालों के जवाब जांच से ही मिल सकते हैं।
कानून अपने हाथ में लेना समाधान नहीं
इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि गंभीर अपराध या शोषण की स्थिति में कानून अपने हाथ में लेना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
यदि किसी बच्चे या किशोर को परिवार, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति से खतरा महसूस हो, तो उसे किसी भरोसेमंद वयस्क, शिक्षक, पुलिस या बाल संरक्षण व्यवस्था से तुरंत मदद लेने की कोशिश करनी चाहिए।
भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित मामलों के लिए POCSO कानून मौजूद है। ऐसे मामलों में बच्चे की सुरक्षा और पहचान की रक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इस मामले में भी अदालत यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और घटना की कानूनी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
एक परिवार, कई टूटे हुए रिश्ते
धौलपुर की इस कथित घटना ने एक परिवार को पूरी तरह बदल दिया। एक तरफ दो लोगों की जान चली गई, दूसरी तरफ एक किशोरी गंभीर आपराधिक मामले में पहुंच गई।
लेकिन इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिन रिश्तों से सुरक्षा और भरोसे की उम्मीद की जाती है, उन्हीं रिश्तों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अभी इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया बाकी है। इसलिए सोशल मीडिया या सार्वजनिक चर्चा में किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
फिर भी, यह घटना एक जरूरी सवाल जरूर छोड़ती है—अगर किसी बच्चे को घर के भीतर ही डर महसूस होने लगे, तो उसकी आवाज सबसे पहले कौन सुनेगा?
समाज, परिवार और संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि ऐसी आवाज को अनसुना न किया जाए। क्योंकि कई बार किसी बड़े हादसे से पहले संकेत मौजूद होते हैं—जरूरत सिर्फ उन्हें समय रहते पहचानने की होती है।