तीन बेटियों ने मिलकर अपने पिता को कु@हाड़ी से हम@ला कर मा@र डाला। सच्चाई जानकर पु@लिस भी है@रान रह गई…
तीन बेटियों ने मिलकर अपने पिता को कु@हाड़ी से हम@ला कर मा@र डाला। सच्चाई जानकर पु@लिस भी है@रान रह गई…
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आज हमारी इस घटना की शुरुआत होती है राजस्थान के जिले प्रतापगढ़ से। प्रतापगढ़ जिले में एक धोला पानी नाम का गांव पड़ता है और इसी धोला पानी गांव में रहने वाला आत्माराम। आत्माराम जो कि पेशे से मजदूर होता है।
आत्माराम इस गांव से 2 किलोमीटर दूर एक गत्ता फैक्ट्री में मेहनत मजदूरी का काम किया करता था। आत्माराम मेहनत मजदूरी करके ठीक ठाक पैसे भी कमाया करता था। लेकिन आत्माराम के अंदर सबसे बड़ी कमी यह होती है कि वह हर रोज शाम के समय शराब पीकर घर पर आता था क्योंकि वह शराब का शौकीन होता है। शराब का आदि होता है।

आत्माराम के परिवार में इसकी तीन बेटियां होती हैं। जिनमें बड़ी बेटी का नाम दीपा होता है और छोटी बेटियों के नाम मंजू और गीता होते हैं। दीपा ने 12वीं कक्षा पास कर ली थी और जैसे ही दीपा 12वीं कक्षा पास कर लेती है तो उसके बाद वह स्कूल में जाना बंद कर देती है। दीपा अपने मन में सोचने लग जाती है कि उसका पिता दिन रात मेहनत मजदूरी करता है। क्यों ना वह अपने पिता के साथ मेहनत मजदूरी का काम करना शुरू कर दे।
और इस तरह से अब दीपा जैसे तैसे करके अपने पिता आत्माराम के साथ मिलजुलकर मेहनत मजदूरी का काम करना शुरू कर देती है। जबकि दीपा की छोटी बहनें मंजू और गीता अपने स्कूल में पढ़ाई करने जाया करती थीं। लेकिन कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद आत्माराम का चाल चलन और चरित्र देखकर अब जो इस गत्ता फैक्ट्री का मालिक होता है विकास कुमार वो इस मजदूर को अपनी फैक्ट्री से बाहर निकाल देता है जिसकी वजह से आत्माराम की नौकरी छूट जाती है साथ में इसकी बेटी दीपा की भी नौकरी चली जाती है।
और इस तरह से दीपा और आत्माराम यह दोनों घर पर खाली बैठ जाते हैं। आत्माराम अपनी बेटी दीपा को कहने लगता है कि बेटी अब तो हमारा काम धंधा बिल्कुल ठप हो चुका और हमारे घर में गरीबी है। अब कैसे काम चलेगा? दीपा अपने पिता को कहने लगती है कि कोई ना कोई रास्ता जरूर निकल जाएगा। उसी समय अब आत्माराम को ख्याल आता है कि गांव में एक जमींदार है जिसका नाम किशन लाल है।
क्यों ना उसके पास चला जाऊं और उसके पास अगर कोई काम धंधा होगा तो वहां पर मैं काम धंधा शुरू कर दूंगा। इस तरह से शाम के करीब 4:00 बजे के आसपास आत्माराम अब किशन लाल जमींदार के घर पर चला जाता है। किशन लाल जमींदार अपनी बैठक में बैठकर हुक्का पानी पी रहा होता है।
अब आत्माराम उस जमींदार किशन लाल को कहने लग जाता है कि जमींदार साहब अगर मेरे लिए कोई खेतों में काम हो तो मुझे बता दो। मैं खेत में काम करने के लिए तैयार हूं। तभी किशन लाल जमींदार कहने लगता है कि तुम सही समय पर आए हो। दो दिन पहले मेरा नौकर काम छोड़कर चला गया है और तुम मेरे खेतों में नौकरी करना शुरू कर सकते हो। मैं तुम्हें महीने के 101000 दे दिया करूंगा।
अब जैसे ही किशन लाल जमींदार यह बातें आत्माराम को कहता है तो आत्माराम बड़ा खुश हो जाता है। आत्माराम अपने मन में सोचने लग जाता है कि उसको काम मिल गया है और इस तरह से खुश होकर आत्माराम अपने घर पर आता है और अपनी तीनों बेटियों को कहने लगता है कि बेटी अब मुझे काम धंधा मिल गया है। मैं कल से ही किशन लाल के खेत में मेहनत मजदूरी का काम करना शुरू कर दूंगा और जल्दी ही हमारी गरीबी दूर होने वाली है।
इस तरीके से आत्माराम अब किशन लाल के खेतों में मेहनत मजदूरी का काम करना शुरू कर देता है। लेकिन जैसे ही कुछ दिनों का वक्त गुजर जाता है तो एक तारीख आ जाती है 10 फरवरी 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। आत्माराम की दोनों छोटी बेटियां गीता और मंजू स्कूल में जाने के लिए तैयार होती हैं।
और जैसे ही वह दोनों स्कूल में चली जाती हैं तो उसी समय आत्माराम अपनी बड़ी बेटी दीपा को कहने लगता है कि दीपा आज खेत में बहुत ज्यादा काम है और मेरी तबीयत भी कुछ ठीक नहीं है। लेकिन काम ज्यादा होने की वजह से मैं और भी ज्यादा बीमार हो सकता हूं। तुम ऐसा करो आज मेरे साथ जमींदार के खेत में चलो और जल्दी ही काम खत्म कर देंगे।
दीपा कहती है कि कोई बात नहीं पिताजी मैं तुम्हारे साथ किशन लाल जमींदार के खेत में काम करने के लिए चली जाऊंगी और इस तरह से करीब आधे घंटे का वक्त गुजर जाने के बाद आत्माराम और आत्माराम की बेटी दीपा यह दोनों ही जमींदार किशन लाल के खेत में कामकाज करने के लिए चले जाते हैं। पिता और बेटी दोनों खेत में जाकर मेहनत मजदूरी करना शुरू कर देते हैं।
जैसे एक घंटे का वक्त गुजर जाता है तो इतना वक्त गुजर जाने के बाद किशनल लाल जमींदार भी खेत में आ जाता है और किशनल लाल जमींदार देखता है कि आज आत्माराम खेत में अकेला नहीं आया था बल्कि आत्माराम की बेटी दीपा भी खेत में आई थी और किशनल लाल की नजरें जैसे ही दीपा की खूबसूरती और सुंदरता पर पड़ती हैं तो उसकी खूबसूरती और सुंदरता को देखकर किशन लाल की नियत में कमी आ जाती है।
किशनल लाल उसी समय अपने मन में सोचने लग जाता है कि इतनी खूबसूरत लड़की मैंने जिंदगी में नहीं देखी है। इस लड़की को जैसे तैसे करके हासिल करना पड़ेगा। जब ऐसे ऐसे ख्याल इस किशन लाल के मन में आ रहे होते हैं तो दूसरे ही पल किशनल लाल अब अपने इस नौकर आत्माराम को आवाज लगाता है। आत्माराम भी दौड़ा दौड़ा उसी समय अपने जमींदार किशनल लाल के पास आ जाता है और किशनल लाल इस आत्माराम को कहने लग जाता है कि देखो आत्माराम आज मैं खेत में बैठकर शराब पीना चाहता हूं।
लेकिन यहां पर शराब लाने के लिए कोई दूसरा या तीसरा व्यक्ति नहीं है। तभी आत्माराम कहने लगता है कि यह भी कोई कहने वाली बात है। चलो मैं ही तुम्हारे लिए शराब खरीद कर ले आता हूं। और इस तरह से कृष्ण लाल अब इस आत्माराम को कुछ पैसे देता है और फिर आत्माराम शराब खरीदने के लिए इस खेत से निकल कर बाहर चला जाता है। शराब के ठेका यहां से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर होता है और आत्माराम पैदल ही होता है।
जैसे ही आत्माराम शराब के ठेके की तरफ चला जाता है तो अब खेत में आत्माराम की बेटी दीपा बिल्कुल अकेली रह जाती है। दूसरी तरफ जमींदार किशन लाल अब अपने मन में सोचने लग जाता है कि खेत में दूर दूर तक कोई भी नहीं है। और यही सबसे अच्छा मौका है। क्यों ना इस लड़की दीपा का फायदा उठा लेना चाहिए। ऐसी बातें सोचने के बाद किशनल लाल उसी समय अपने खेत में बने कमरे के अंदर चला जाता है। कमरे के अंदर चारा काटने की दराती पड़ी होती थी।
किशनल लाल उसी समय उस दराती को उठाता है और दराती उठाने के बाद वह सीधा ही दीपा के पास चला जाता है। दीपा को संभलने तक का मौका नहीं मिलता है। किशनल लाल उसी समय दीपा की गर्दन पर दराती रख लेता है और दीपा को धमकी देता है कि अगर तुमने चीखले चिल्लाने की कोशिश की तो तुम्हारा गला यहीं पर काट दूंगा।
अब जैसे ही यह धमकी दीपा को दी जाती है तो दीपा तुरंत डर जाती है। दीपा किसी भी बात को कहने या सुनने या समझने की स्थिति में नहीं होती है। और इसके बाद किशनल लाल इस लड़की दीपा को कहने लगता है कि मेरे खेत में जो कमरा बना है तुम्हें मेरे साथ उस कमरे के अंदर जाना पड़ेगा। इस तरह से जैसे तैसे करके किशन लाल इस लड़की दीपा को लेकर उस कमरे के अंदर चला जाता है। उस कमरे का दरवाजा बंद कर लिया जाता है।
इसके बाद किशनल लाल इस लड़की दीपा का दुपट्टा इससे छीन लेता है और दुपट्टा छीनने के बाद इसके हाथ पैर उस दुपटे के साथ बांध दिए जाते हैं। पास में एक कपड़ा पड़ा होता है। उस कपड़े को दीपा के मुंह के अंदर ठूस देता है और इसके बाद इस किशनल लाल जमींदार का गंदा और घिनौना खेल शुरू हो जाता है।
यह किशनल लाल जमींदार इस लड़की दीपा के साथ गलत काम करना शुरू कर देता है। कि सलाल जमींदार इस लड़की की बिना रजामंदी के इसके साथ गलत रिश्ते कायम करने लग जाता है। और यह गलत काम तब तक किया जाता है जब तक इस जमींदार का मन नहीं भर जाता है। दूसरी तरफ दीपा इसके सामने हाथ जोड़ती रहती है। वो बार बार कहती रहती है कि मेरे साथ यह गलत काम मत करो।
लेकिन यह जमींदार किशन लाल रुकने वाला नहीं होता है। जमींदार किशनल लाल लगातार इसका फायदा उठाता रहता है। और जैसे ही जमींदार किशनल लाल का मन भर जाता है इसका मन खुश हो जाता है तो इसके बाद जमींदार इस लड़की को डराने लगता है धमकाने लगता है। लड़की दीपा को धमकी दी जाती है कि अगर तुमने यह बात किसी को बताने की कोशिश की तो तुम्हें जान से मार दिया जाएगा।
यहां तक कि तुम्हारे परिवार को भी जान से मार दिया जाएगा। जब ऐसी ऐसी धमकियां दीपा को दी जाती हैं तो दीपा डर जाती है सहम जाती है और इसके बाद किस लाल इस लड़की को कहता है कि तुम मेरे खेत में कामकाज करना शुरू कर दो और इस तरह से दीपा उसी समय फिर से इसके खेत में कामकाज करना शुरू कर देती है। लगभग 20 से 25 मिनट का वक्त गुजर जाने के बाद दीपा का पिता आत्माराम शराब लेकर के खेत में आ जाता है।
खेत में आने के बाद यह जो किशनल लाल होता है अब इसके पिता आत्माराम से शराब लेता है और शराब लेने के बाद खेत में बैठकर शराब पीना शुरू कर देता है। थोड़ा सा वक्त गुजर जाने के बाद किशन लाल अपने इस नौकर आत्माराम को भी आवाज लगाता है। आत्माराम की सबसे बड़ी कमजोरी शराब होती है। आत्माराम भी उसी समय इस जमींदार किशन लाल के पास चला जाता है और किशनल लाल फिर इसको कुछ शराब देता है।
आत्माराम भी अपने इस जमींदार के पास बैठकर शराब पीने लग जाता है। जैसे ही आधे घंटे का वक्त गुजर जाता है तो किशन लाल जमींदार अपने इस नौकर आत्माराम को ज्यादा शराब पिलाता है और जिसकी वजह से आत्माराम को गहरा नशा हो जाता है। लेकिन दूसरी तरफ जो बेटी दीपा होती है वो ना तो अपने पिता को कुछ बताती है और चुपचाप खेत में काम करती रहती है।
दीपा इस बात को भी सोचने लग जाती है कि अगर मैंने यह बात किसी को बता दी तो उसके पिता की बदनामी हो जाएगी और ऐसा भी हो सकता है कि यह जमींदार उनके पूरे परिवार को जान से ना मरवा दे। जब ऐसे से ख्याल दीपा के मन में आने लग जाते हैं तो दीपा काफी डर जाती है और इसी बात को सोचकर दीपा बिल्कुल चुपचाप रह जाती है।
आखिरकार एक दो घंटे का वक्त गुजर जाने के बाद किशनल जमींदार अपने गांव में वापस आ जाता है और जैसे शाम हो जाती है तो शाम के करीब 6:00 बजे के आसपास दीपा अपने पिता आत्माराम को लेकर अपने घर पर आ जाती है। लेकिन दीपा ना तो अपने पिता को यह बात बताती है और ना ही अपनी दोनों छोटी बहनों को इस बात के बारे में कुछ भी बताती है। दीपा की यही सबसे बड़ी गलती होती है।
दीपा की यही सबसे बड़ी भूल हो जाती है और इस तरह से फिर से दिन गुजरने शुरू हो जाते हैं। कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 17 फरवरी 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। आत्माराम और आत्माराम का पूरा परिवार अपने घर में बैठा होता है। उसी समय किशन लाल जमींदार आत्माराम के घर पर आता है।
और जैसे ही किशन लाल जमींदार इसके घर के अंदर प्रवेश करता है तो किशनल लाल की नजरें अब आत्माराम की दोनों बेटियों पर पड़ जाती है। इसकी दोनों छोटी जो बेटियां मंजू और गीता होती है उनकी तरफ यह किशन लाल अजीब तरीके से देखना शुरू कर देता है। किसान अपने मन में सोचने लग जाता है कि आत्माराम की जो दोनों छोटी बेटियां हैं गीता और मंजू यह भी देखने में काफी खूबसूरत है। इन लड़कियों को भी जैसे तैसे करके हासिल करना पड़ेगा।
ऐसेसे विचार किसान के मन में आने शुरू हो जाते हैं। किसान उसी समय आत्माराम को कहने लगता है कि आत्माराम आज भी खेत में बहुत ज्यादा काम है। तुम ऐसा करना आज खेत में अपनी बेटी दीपा को खेत में लेकर आ जाना। और जैसे ही तुम्हारा काम खेत में खत्म हो जाएगा तो तुम जल्दी ही गांव में वापस आ जाना। और इसके बाद यह दो चार बातें कहने के बाद किशनल लाल जमींदार इस घर से बाहर निकलता है और अपने घर की तरफ चला जाता है।
लेकिन उसी समय आत्माराम अपनी बड़ी बेटी दीपा को कहने लगता है कि दीपा आज भी तुम्हें मेरे साथ खेत में चलना पड़ेगा क्योंकि आज खेत में काम कुछ ज्यादा है। लेकिन दीपा अपने पिता आत्माराम को साफ साफ शब्दों में मना कर देती है। दीपा कहती है कि मैं खेत में नहीं जाऊंगी क्योंकि मेरी तबीयत थोड़ी सी खराब है और इसी वजह से मैं खेत में नहीं जा सकती हूं।
इसके बाद आत्माराम कहने लगता है कि चलो कोई बात नहीं तुम आज आराम कर लो। लेकिन दूसरे ही पल आत्माराम अपनी छोटी बेटी मंजू को कहने लगता है कि मंजू आज तुम स्कूल में मत जाना क्योंकि तुम्हें आज मेरे साथ जमींदार के खेत में चलना पड़ेगा और खेत में आज बहुत ज्यादा काम है। दीपा जैसे ही अपने पिता की इन बातों को सुनती है तो दीपा कहने लगती है कि पिताजी तुम खेत में अकेले ही चले जाओ। तुम मंजू को क्यों खेत में ले जा रहे हो?
तभी आत्माराम दीपा को कहता है कि मंजू को भी खेत में काम करने की आदत पड़ जाएगी। आगे चलकर इसको भी मेहनत मजदूरी करनी पड़ेगी। और इस तरीके से जैसे तैसे करके आत्माराम अपनी छोटी बेटी मंजू को लेकर खेत में चला जाता है। लेकिन दूसरी तरफ दीपा अपने मन में सोचने लग जाती है कि उसकी छोटी बहन मंजू के साथ कुछ गलत काम ना हो जाए और होने वाला भी यही होता है।
इस तरह से आत्माराम जैसे ही अपनी बेटी मंजू को लेकर खेत में जाता है और खेत के कामकाज में व्यस्त हो जाता है तो थोड़ा सा वक्त गुजरने के बाद किशन लाल खेत में आ जाता है और किशनल लाल देखता है कि आत्माराम आज खेत में अकेला नहीं था बल्कि उसकी छोटी बेटी मंजू खेत में आई थी और इस तरह से किशन लाल की नजरें जैसे ही मंजू पर पड़ती हैं तो मंजू की खूबसूरती को देखकर इस किशनल लाल की नियत में कमी आ जाती है।
किशनल लाल उसी समय अपने एक दोस्त ओम प्रकाश के पास फोन कॉल करता है और ओम प्रकाश को कहता है कि आज खेत में बैठकर शराब पीने वाले हैं। तुम ऐसा करो पास ही के एक शराब के ठेके पर चले जाओ और वहां से कुछ शराब खरीदने के बाद तुम मेरे खेत में आ जाना। ओम प्रकाश उसी समय अपने घर से मोटरसाइकिल लेकर पास के ही शराब के ठेके पर जाता है। वहां से शराब खरीद ली जाती है और शराब खरीदने के बाद ओम प्रकाश सीधे ही किशनल लाल के खेत में आ जाता है और इसके बाद किशन लाल और ओम प्रकाश ये दोनों बैठकर शराब पीना शुरू कर देते हैं।
जैसे ही किशन लाल को गहरा नशा हो जाता है तो किशन लाल अपने दोस्त ओम प्रकाश को कहने लग जाता है कि देखो आज आत्माराम की बेटी मंजू खेत में आई है और आज मैं इसका फायदा उठाने वाला हूं। लेकिन ओम प्रकाश कहने लगता है कि यह बातें अच्छी नहीं है। यह हमारे नौकर की बेटी है और हमारी बेटी जैसी है। लेकिन जो किशनल लाल होता है वह अपने दोस्त की किसी भी बात को नहीं मानता है।
किशनल लाल उसी समय आत्माराम को आवाज लगाता है। आत्माराम भी दौड़ा दौड़ा इन दोनों दोस्तों के पास आ जाता है। किशनलाल अब अपने इस नौकर आत्माराम को कहता है कि तुम हमारे पास बैठकर शराब पी लो। और इस तरह से अब जो आत्माराम होता है वह शराब का आदि होता है। आत्माराम भी इन दोनों दोस्तों के पास बैठकर शराब पीना शुरू कर देता है।
लेकिन किशनल लाल बहुत ही चालाक व्यक्ति होता है। किशनल लाल धीरे धीरे करके इस आत्माराम को ज्यादा शराब पिलाना शुरू कर देता है और जैसे 20 से 25 मिनट का वक्त गुजर जाता है तो किशनल लाल इस अपने नौकर आत्माराम को इतनी ज्यादा शराब पिला देता है कि उसको गहरा नशा हो जाता है। आत्माराम को इस बात का भी होश नहीं रहता है कि वह कहां पर लेटा है और कहां पर नहीं लेटा है।
जैसे ही आत्माराम गहरी नींद में सो जाता है तो इसके बाद किशनल लाल अपने दोस्त ओम प्रकाश को कहता है कि चलो अब इसकी बेटी मंजू का फायदा उठाते हैं। इस तरह से जैसे तैसे करके अब जो किशन लाल होता है अपने दोस्त ओम प्रकाश को मनाने में कामयाब हो जाता है। अब इसके बाद किशन लाल और ओम प्रकाश ये दोनों ही इसकी बेटी मंजू के पास चले जाते हैं।
किशनलाल के हाथ में दराती थी क्योंकि दराती हमेशा इसके कमरे में रहती थी और किशनलाल और ओम प्रकाश जैसे ही इस लड़की मंजू के पास जाते हैं तो किशनलाल शराब के नशे में धुत होने के कारण इसकी गर्दन पर वही दराती रख लेता है और लड़की मंजू को धमकी देता है। कहता है कि अगर तूने चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो यहीं जान से मार दूंगा। मंजू काफी डर जाती है।
मंजू सोचने लग जाती है कि आज उसके साथ क्या होने वाला है। मंजू नहीं जानती थी कि उसके साथ क्या होने वाला है। और इस तरह से अब ये दोनों दोस्त इस लड़की मंजू को कहते हैं कि तुम्हें हमारे साथ खेत में बने कमरे के अंदर चलना पड़ेगा। इस तरह से यह दोनों दोस्त अब इस लड़की को लेकर कमरे के अंदर चले जाते हैं।
कमरे का दरवाजा बंद कर लिया जाता है और फिर यह दोनों दोस्त बारी बारी से मंजू के साथ गलत काम करना शुरू कर देते हैं। यह दोनों दोस्त इस लड़की का तब तक फायदा उठाते हैं जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं। जब तक इन दोनों का मन नहीं भर जाता है।
दूसरी तरफ मंजू इनके सामने हाथ जोड़ती रह जाती है। मंजू कहती है कि मेरे साथ इतना गलत मत करो। लेकिन यह दोनों दोस्त दोनों जमींदार रुकने वाले नहीं होते हैं। यह बार बार उस लड़की के साथ वही गलत और गंदा काम करना शुरू कर देते हैं। और यह गलत काम काफी देर तक किया जाता है।
और जैसे इन दोनों जमींदारों का मन भर जाता है तो इस लड़की को डराते हैं धमकाते हैं और कहते हैं कि यह बात किसी को मत बताना। अगर तुमने यह बात किसी के सामने बता दी तो तुम्हारे पूरे परिवार को जान से मार देंगे। इस तरह की धमकियां मंजू को दी जाती हैं। मंजू भी काफी डर जाती है और फिर इसके बाद यह दोनों ही जमींदार मोटरसाइकिल पर बैठकर सीधे ही गांव में वापस आ जाते हैं।
इस तरीके से तीन चार घंटों का वक्त गुजरने के बाद जैसे ही मंजू के पिता आत्माराम का नशा ढीला पड़ जाता है तो मंजू अपने पिता आत्माराम को लेकर गांव में आ जाती है। और गांव में आने के बाद मंजू अपनी बहन दीपा से मिलती है और दीपा से मिलने के बाद वह दीपा के सामने रोना शुरू कर देती है। गिड़गिड़ाना शुरू कर देती है।
मंजू दीपा को कहती है कि खेत में किशन लाल जमींदार और ओम प्रकाश जमींदारों ने उसके साथ गंदा और गलत काम किया है। दीपा जैसे ही अपनी बहन की बात को सुनती है तो उसको काफी गुस्सा आता है। दीपा सोचने लग जाती है कि जैसे ही उसके पिता आत्माराम का नशा ठीक हो जाएगा तो फिर वह अपने पिता से इस बारे में बातचीत करेगी।
इसके बाद जैसे ही शाम के करीब 7:00 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है और दीपा के पिता आत्माराम का नशा बिल्कुल ठीक हो जाता है तो दीपा अपने पिता आत्माराम के पास जाती है और आत्माराम को कहती है कि आज मेरी छोटी बहन मंजू के साथ जमींदारों ने गलत काम किया है। दीपा अपने पिता को खुलकर अपनी पूरी बात अपनी पूरी कहानी सुनाती है।
दीपा इस बात को भी कहती है कि उन दोनों जमींदारों ने उसके साथ भी कई दिनों पहले गलत और गंदा काम किया था। और मंजू भी चीख चीख कर अपने पिता को यह सारी बातें कहना शुरू कर देती है। पिता आत्माराम जैसे ही अपनी दोनों बेटियों की बात को सुनता है तो कहने लगता है कि तुम्हें इस बात के बारे में किसी से जिक्र तक नहीं करना है और मैं उन दोनों जमीदारों के पास जाऊंगा और उनसे बातचीत करके देखूंगा।
अगर कोई हल निकलता है तो ठीक है नहीं तो फिर मैं सीधा ही पुलिस स्टेशन में जाने वाला हूं। जैसे ही आत्माराम अपनी दोनों बेटियों को यह बात कहता है तो दोनों बेटियों का मन शांत हो जाता है और इस तरह से आत्माराम अब अपनी दोनों बेटियों को काफी देर तक समझाता है। उनको बार बार एक ही बात दोहराता रहता है कि तुम्हें इस बारे में किसी से जिक्र तक नहीं करना है।
जैसे तैसे करके पूरी रात गुजर जाती है और जैसे अगला दिन होता है तो सुबह के करीब 9:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। आत्माराम उसी समय अपने घर से बाहर निकलता है और सीधा ही किशन लाल जमींदार के घर पर जाता है। किशन लाल जमींदार अपनी बैठक में बैठकर हुक्का पानी पी रहा होता है।
इसके बाद आत्माराम किशन लाल को कहने लगता है कि किशन लाल तुमने मेरी बेटियों के साथ ठीक नहीं किया है। तुमने मेरी बेटियों के साथ बहुत गलत और गंदा काम किया है और साथ में उस जमींदार ओम प्रकाश ने भी मेरी छोटी बेटी मंजू के साथ गलत काम किया है। अब जैसे ही यह बात किशन लाल सुनता है तो किशनल लाल चौंक जाता है।
किशन लाल काफी डर जाता है। लेकिन दूसरे ही पल आत्माराम इस जमींदार किशन लाल को धमकी देता है और कहता है कि मैं अभी इसी समय पुलिस स्टेशन में जाने वाला हूं और तुम दोनों की पुलिस थाने के अंदर रिपोर्ट करने वाला हूं। जैसे यह बात किशन लाल को कही जाती है तो किशन लाल उसी समय आत्माराम को समझाना शुरू कर देता है।
किशनल लाल आत्माराम को कहने लग जाता है कि देखो जो हुआ है वह नशे में हुआ है और नशा होने के कारण मैंने तुम्हारी बेटियों के साथ गलत काम किया है। लेकिन इसमें इतनी बड़ी मेरी कोई गलती भी नहीं है। जैसे यह बात किशनल लाल कहता है तो आत्माराम कहने लग जाता है कि मैं अभी इसी समय पुलिस स्टेशन में जाता हूं।
लेकिन किशनल लाल उसका हाथ पकड़ लेता है। उसको अपने घर के कमरे के अंदर ले जाता है और उसी समय किशनल लाल अपनी तिजोरी का ताला खोलता है और तिजोरी में से लाख निकालता है और लाख अब आत्माराम को दे दिए जाते हैं। किशनल लाल कहने लगता है कि देखो तुम्हारी दोनों बेटियों की इज्जत तो वापस नहीं आ सकती है।
लेकिन यह इतने पैसे मैं तुम्हें देता हूं कि जिससे तुम्हारी जिंदगी बड़ी आसान हो सकती है। और जैसे ही आत्माराम इन लाखों को देखता है तो आत्माराम की आत्मा बिल्कुल मर जाती है। आत्माराम को वहां पर लालच आ जाता है। आत्माराम अपने मन में सोचने लग जाता है कि उसकी दोनों बेटियों की इज्जत तो वापस नहीं आ सकती है।
लेकिन इतने पैसों से उसकी गरीबी दूर हो सकती है। इस तरह से आत्माराम वहां पर शांत पड़ जाता है। लेकिन किशनल लाल आगे भविष्य में चलकर भी इन इसकी तीनों बेटियों के साथ इससे भी बड़ा और गलत काम करने वाला होता है। जिसके बारे में आत्माराम बिल्कुल भी कुछ भी नहीं जानता था।
इस तरह से जैसे तैसे करके आत्माराम अब उन लाखों को लेकर सीधा ही अपने घर पर आ जाता है। आत्माराम उन सारे पैसों को छिपाकर अपने घर के अंदर रख देता है। उनमें से कुछ पैसे लेता है और पैसे लेने के बाद सीधा ही घर से बाहर निकल जाता है। आत्माराम सीधा ही शराब के ठेके पर जाता है।
वहां से शराब खरीदता है और शराब खरीदने के बाद वापस अपने घर पर आता है और घर के अंदर ही बैठकर शराब पीना शुरू कर देता है। उसी समय दीपा मंजू और गीता यह तीनों बेटियां अपने पिता से पूछने लग जाती हैं कि तुमने उस उन दोनों जमींदारों के साथ क्या किया है? लेकिन आत्माराम अपनी तीनों बेटियों को कहने लग जाता है कि उन दोनों से वो काम नशे की हालत में हुआ था।
उन दोनों की कोई भी गलती नहीं है। जैसे यह बात आत्माराम कहता है तो तीनों बेटियां गुस्से में पागल हो जाती हैं। आत्माराम अपनी तीनों बेटियों को समझाते हुए कहता है कि उसने मुझे लाख दिए हैं और वह पैसे मैंने घर के अंदर रख दिए हैं। उन पैसों से तुम्हारी जिंदगी संवर सकती है।
लेकिन उन दोनों जमींदारों का हम कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते हैं। जैसे यह बातें आत्माराम अपनी बेटियों को कहता है तो तीनों बेटियां अलग से कमरे में चली जाती हैं। दीपा अपनी बहन मंजू को कहने लगती है कि हमारे पिता ने हम तीनों बेटियों का सौदा कर लिया है और आने वाले समय में यह दोनों जमींदार हमारे घर आया करेंगे और हमारे साथ गलत और गंदा काम किया करेंगे।
वहां पर मंजू कहने लगती है कि इसमें उन दोनों जमींदारों का कोई भी दोष नहीं है। सारी गलती हमारे पिता की है। हमारे पिता की गलती की वजह से ही हम दोनों के साथ यह बहुत बड़ा हादसा हो गया है। इन सारी बातों का जिम्मेदार हमारा पिता है।
इस तरह से मंजू अब अपनी बहन दीपा को कहने लग जाती है कि हमारे पिता ने जो हमारे साथ करवाया है वह बहुत गलत है और इसकी सजा उसको मिलने वाली है। इस तरह से अब तीनों बेटियां घर में हथियार देखना शुरू कर देती हैं। गीता रसोई में पड़ा हुआ एक चाकू उठा लेती है। दीपक घर के अंदर रखी हुई एक कुल्हाड़ी उठा लेती है।
और तीसरी तरफ जो मंजू होती है वह भी अपने हाथ में डंडा उठा लेती है। और इस तरह से तीनों बेटियां उस कमरे के अंदर जाती हैं जिसमें उनका पिता बैठकर शराब पी रहा होता है। इसके बाद दीपा ना कुछ सोचती है और ना ही कुछ समझती है। उसी समय हाथ में जो कुल्हाड़ी ले रखी होती है उस कुल्हाड़ी से तीन चार बार अपने पिता आत्माराम के सिर में कर देती है और जैसे ही कुल्हाड़ी मारी जाती है तो आत्माराम मोहिन पर नीचे गिर जाता है।
इसके बाद जो गीता के हाथ में चाकू होता है गीता भी तीन चार बार अपने पिता के पेट में चाकू मार देती है और इस तरह से तीनों बेटियां मिलकर अपने पिता का कत्ल कर देती है। बात यहीं पर नहीं रुकती है। दीपा खून से लथपथ कुल्हाड़ी लेकर अपने घर से बाहर निकलती है। साथ में अपनी दोनों बहनों को भी लेती है और एक से डेढ़ घंटे का वक्त गुजरने के बाद अब तीनों बेटियां पुलिस स्टेशन में पहुंच जाती हैं।
पुलिस स्टेशन में जाने के बाद तीनों ही बेटियां अपने आप को पुलिस थाने में सरेंडर कर देती हैं और इसके बाद जब पुलिस वाले दीपा से पूछने लगते हैं कि आखिर तुमने अपने पिता की हत्या क्यों की है तो दीपा अपनी बीती हुई पूरी कहानी और मंजू की बीती हुई पूरी कहानी पुलिस के सामने सुनाती है। इसके बाद पुलिस इन तीनों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर लेती है।
लेकिन दूसरी तरफ पुलिस उन दोनों जमींदारों ओम प्रकाश और साथ में किशनल लाल इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लेती है। यह बात भविष्य के गर्भ में छिपी है कि जज साहब आखिरकार आत्माराम की तीनों बेटियों को क्या सजा सुनाने वाला है। लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम में आत्माराम की तीनों बेटियों ने अपने पिता आत्माराम के साथ जो किया क्या वह सही था या गलत था? कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ।