वह मंदिर में प्रवचन सुनने गई थी। पुजारी ने एक बड़ा अपराध कर दिया। – News

वह मंदिर में प्रवचन सुनने गई थी। पुजारी ने एक बड़ा अपराध कर दिया।

वह मंदिर में प्रवचन सुनने गई थी। पुजारी ने एक बड़ा अपराध कर दिया।

वह मंदिर में प्रवचन सुनने गई थी। पुजारी ने एक बड़ा अपराध कर दिया।

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नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से। अमेठी जिले में एक बरना टीकर नाम का गांव पड़ता है और इसी बरना टीकर गांव में रहने वाला सतबीर सिंह।

सतबीर सिंह एक अपाहिज व्यक्ति होता है। सतबीर सिंह की एक साल पहले एक्सीडेंट की वजह से दोनों टांगें कट जाती हैं। जिसकी वजह से सतबीर सिंह अपने घर पर चारपाई पर बैठ जाता है। सतबीर सिंह कुछ भी काम धंधा करने के लायक नहीं रहता है। अब सतबीर सिंह के परिवार में इसकी धर्मपत्नी होती है जिसका नाम रीना देवी होता है। रीना देवी हर समय अपने घर के कामकाज में व्यस्त रहती थी। रीना देवी बहुत ही धार्मिक और संस्कारी महिला होती है। सतबीर सिंह के परिवार में इसकी एक भाभी भी होती है जिसका नाम बबीता देवी होता है। बबीता देवी के पास अपना एक 10 साल का बेटा होता है जिसका नाम सोनू होता है। लेकिन बबीता देखने में काफी खूबसूरत सुंदर और जवान महिला होती है। बबीता जब भी अपने घर से बाहर निकल जाया करती थी तो इस गांव के मर्द बबीता की खूबसूरती को बस देखते ही रह जाया करते थे। बबीता देवी देखने में इतनी खूबसूरत परी जैसी महिला होती है।

यहां तक सतबीर सिंह के परिवार में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा होता है। लेकिन आगे चलकर सतबीर सिंह की पत्नी रीना देवी और सतबीर की भाभी बबीता के साथ बहुत बड़े बड़े कांड होने वाले थे। जिसके बारे में न तो सतबीर कुछ जानता था और न ही रीना और बबीता कुछ जानती थी। कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक दिन ऐसा भी आ जाता है जिसमें सुबह के करीब 8:30 बजे के आसपास का वक्त होता है। रीना और बबीता अपने घर में कामकाज कर रही होती हैं। और उसी समय पड़ोस की एक महिला जिसका नाम कविता देवी होता है इन दोनों के पास आ जाती है। घर में आने के बाद कविता देवी देखती है कि रीना का पति सतबीर सिंह चारपाई पर लेटा होता है। सतबीर सिंह की हालत थोड़ी सी खराब भी होती है। कविता अब सतबीर सिंह को देखने के बाद सतबीर की पत्नी रीना को कहने लगती है कि देखो रीना तुम बहुत ही संसारी और धार्मिक महिला हो। घर में तुम हर रोज पूजा पाठ करती रहती हो। लेकिन तुम दोनों हर रोज मंदिर में भी जाया करो। मंदिर में जाने से तुम्हारे पति की तबीयत में सुधार हो सकता है। रीना देवी उसी समय कविता को कहती है कि चाची हम दोनों कल सुबह से ही मंदिर में जाना शुरू कर देंगे। इसके बाद कविता कुछ देर तक बैठकर इन दोनों औरतों से बातचीत करती है और बातचीत करने के बाद अपने घर पर चली जाती है।

लेकिन जैसे ही अगला दिन होता है तो सुबह के करीब 5:00 बजे के आसपास बबीता और रीना मंदिर में जाने के लिए तैयार हो जाती हैं। दोनों पूजा अर्चना की थाली लेती हैं और मंदिर की तरफ चल पड़ती हैं। और जैसे ही ये दोनों महिलाएं मंदिर में पहुंचती हैं तो बबीता और रीना देखती हैं कि मंदिर में कोई भी पुजारी नहीं होता है। मंदिर में चारों तरफ गंदगी फैली होती है और पशु भी इधर उधर घूम रहे होते हैं। आवारा जानवर कुत्ते भी यहां पर गंध फैलाकर चले गए थे। अब जैसे ये दोनों महिलाएं इस मंदिर के अंदर पूजा अर्चना खत्म कर लेती हैं तो उसी समय बबीता कहने लगती है कि रीना मंदिर में साफ सफाई रखने वाला कोई भी पुजारी नहीं है और मंदिर में पुजारी की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। इसके बाद रीना कहने लगती है कि बबीता चलो ऐसा करते हैं कि हम गांव के सरपंच सूरजपाल सिंह के पास चले जाते हैं। सूरजपाल गांव का सरपंच है और वह इस मंदिर में एक पुजारी की व्यवस्था करवा सकता है। अब जैसे ही रीना देवी यह सारी बातें कहती है तो इसके बाद रीना और बबीता दोनों सूरजपाल सरपंच के घर की तरफ चल पड़ती हैं।

लेकिन सूरजपाल सरपंच एक ऐसा व्यक्ति होता है जो कि औरतों का गुलाम होता है। सूरजपाल हमेशा खूबसूरत महिलाओं में ज्यादा दिलचस्पी रखा करता है। सूरजपाल सिंह की पत्नी की 3 साल पहले मौत हो गई जिसकी वजह से सूरजपाल अब पराई औरतों को गंदी नजर से देखने का आदि हो चुका होता है। यहां तक कि सूरजपाल सरपंच ने इस गांव की कई खूबसूरत महिलाओं के साथ अपनी रातें भी रंगीन कर रखी होती हैं। और आज के समय में रीना और बबीता जैसी सूरजपाल के घर पर पहुंचती हैं तो सूरजपाल की नजरें जैसे ही इन दोनों महिलाओं के गोरे बदन पर पड़ती हैं तो सूरजपाल की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। सूरजपाल इन दोनों महिलाओं की खूबसूरती, इनकी जवानी और इनकी सुंदरता को देखने के बाद बस देखता ही रह जाता है। सूरजपाल सिंह अपने मन में ठान लेता है कि जैसे तैसे करके इन दोनों महिलाओं को बस हासिल करना है।

इसके बाद बबीता देवी सूरजपाल के पास आती है और सूरजपाल से कहने लगती है कि सरपंच साहब हमारे गांव से बाहर जो मंदिर है उस मंदिर के अंदर कोई भी पुजारी नहीं है और मंदिर के अंदर पुजारी की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। मंदिर में जानवरों ने गंध फैला रखा है। चारों तरफ गंदगी ही गंदगी फैली हुई है। सूरजपाल इस महिला बबीता की खूबसूरती और सुंदरता को देखते हुए कहने लगता है कि बबीता जी तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं आज के आज ही किसी ना किसी पुजारी की व्यवस्था मंदिर में जरूर करवा दूंगा। और इस तरीके से बबीता और रीना बेहद खुश हो जाती हैं। इसके बाद रीना और बबीता दोनों ही सूरजपाल के घर से बाहर निकलती हैं। अपने घर पर आ जाती हैं। लेकिन सूरजपाल की नजरें तो अब इन दोनों औरतों पर टिक चुकी होती हैं। सूरजपाल सिंह इन दोनों औरतों को हासिल करने के लिए किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार हो जाता है।

अब जैसे ही दो दिन का वक्त गुजर जाता है तो सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। सूरजपाल सरपंच अपने घर के अंदर बैठा होता है और उसी समय सूरजपाल सरपंच के घर के अंदर एक बाबा प्रवेश कर जाता है और इस बाबा का नाम किशन दत्त होता है। अब जैसे ही सरपंच सूरजपाल इस किशन दत्त बाबा को अपने घर में देखता है तो इसके पास आ जाता है और किशन दत्त बाबा को कहने लगता है कि बाबा जी हमारे गांव में एक मंदिर है और उस मंदिर में कोई भी पुजारी नहीं रहता है। तुम ऐसा करो कि उस मंदिर में रहना शुरू कर दो। उस मंदिर की साफ सफाई करना शुरू कर दो और उसमें पूजा अर्चना करना शुरू कर दो। किशन दत्त जैसे ही दबंग सरपंच की बात को सुनता है तो बड़ा खुश हो जाता है। लेकिन अब इसके बाद सूरजपाल सरपंच इस किशन दत्त बाबा के सामने दो शर्तें रखता है। सूरजपाल सरपंच अब इस किशन दत्त बाबा को कहता है कि इस मंदिर में जितना भी दान आएगा उस दान में से आधा हिस्सा मेरा होना चाहिए। और इस मंदिर में जितनी भी खूबसूरत औरतें पूजा अर्चना करने के लिए आती हैं, जो भी खूबसूरत महिला मुझे पसंद आएगी, उस खूबसूरत महिला को मेरे बिस्तर तक तुम्हें हिलाना पड़ेगा। जब ऐसी ऐसी बातें इस किशन दत्त बाबा को कही जाती हैं, तो किशन दत्त बाबा लालच का वशीभूत होकर इसकी दोनों शर्तें मान लेता है। किशन दत्त कहता है कि मैं तुम्हारी सारी शर्तों को मंजूर करता हूं। और इस तरीके से किशन दत्त बाबा इस मंदिर में रहना शुरू कर देता है। किशन दत्त बाबा अब बाबा नहीं रहता है बल्कि किशन दत्त बाबा एक पुजारी बन चुका होता है। गांव के लोग इसकी काफी ज्यादा इज्जत करने लगते हैं।

लेकिन किशन दत्त पुजारी एक ऐसा पुजारी होता है कि जिसकी बैकग्राउंड के बारे में ना तो खुद सरपंच जानता था और ना ही गांव के लोग कुछ जानते थे। धीरे धीरे करके अब यह किसत पुजारी लोगों पर अपना विश्वास जमा लेता है और इस तरीके से अब यह पुजारी इस गांव में बहुत बड़ी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने वाला था। कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 10 जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। गांव का दबंग सरपंच सूरजपाल सिंह अब इस मंदिर में आता है और सूरजपाल सरपंच अब किशन दत्त पुजारी को कहने लगता है कि पुजारी जी अब तुम इस मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करना शुरू कर दो। उसी समय के संदत पुजारी कहते हैं कि कोई बात नहीं सरपंच साहब मैं आज से ही गांव के लोगों से चंदा इकट्ठा करना शुरू कर दूंगा। इसके बाद सरपंच इस मंदिर से बाहर निकलता है। अपने घर की तरफ चला जाता है। थोड़ी देर के बाद अब किसत पुजारी भी इस मंदिर से बाहर निकलता है और गांव में घरघर से चंदा इकट्ठा करना शुरू कर देता है। चंदा मांगते मांगते यह पुजारी अब सतबीर सिंह के घर पर पहुंच जाता है।

सतबीर सिंह के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है और सतबीर सिंह की खूबसूरत भाभी बबीता देवी अपने घर का दरवाजा खोलती है। बबीता देवी देखती है कि उसके सामने किशन दत्त पुजारी खड़ा होता है और जैसे ही किशन दत्त पुजारी को बबीता देखती है तो बड़ी खुश हो जाती है। लेकिन जब किशन दत्त पुजारी की नजरें बबीता की खूबसूरती और इसके यौवन पर पड़ती हैं तो किशन दत्त पुजारी की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। किशन दत्त पुजारी ने आज तक अपनी जिंदगी में इतनी खूबसूरत महिला नहीं देखी थी। किस दत्त इस महिला को देखने के बाद अपने मन में सिर्फ एक ही बात सोचने लगता है। इस घर के अंदर तो यह बहुत ही खूबसूरत महिला रहती है और इस महिला को जैसे तैसे करके हासिल करना ही पड़ेगा। जब ऐसे से ख्याल की संगत पुजारी के मन में आने लग जाते हैं तो इसके बाद की संत पुजारी बबीता को कहता है कि मैं मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा कर रहा हूं और तुम्हें भी कुछ दान दक्षिणा देनी ही पड़ेगी। बबीता कहती है कि पुजारी जी तुम घर के अंदर आ जाओ। और इसके बाद यह पुजारी घर के अंदर आ जाता है।

घर के अंदर आने के बाद किशन दत्त पुजारी की नजरें अब सतबीर सिंह की खूबसूरत पत्नी रीना देवी पर पड़ती है। रीना देवी को देखने के बाद किशन पुजारी सिर्फ एक ही बात सोचने लग जाता है कि इस घर के अंदर तो दो दो खूबसूरत महिलाएं रहती हैं और इन महिलाओं को बस हासिल करना ही पड़ेगा। इसके बाद बबीता देवी कुछ पैसे लेकर आती है और इस पुजारी को देती है। लेकिन उसी समय यह पुजारी किस दत्त कहने लगता है कि देखो मैं मंदिर के अंदर अब कथा शुरू करने वाला हूं। कथा शाम के 5:00 बजे के आसपास शुरू हो जाया करेगी और एक घंटे के बाद वो खत्म हो जाया करेगी और तुम्हें भी मंदिर में कथा सुनने के लिए आना पड़ेगा। बबीता देवी हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि पुजारी जी तुम किसी बात की फिक्र मत करो। हम तो वहां हर रोज मंदिर में जाते हैं लेकिन फिर भी आपकी कथा सुनने के लिए शाम के 5:00 बजे के आसपास हम मंदिर में आ जाएंगे। लेकिन उसी समय पुजारी कहने लगता है कि देखो तुम्हारे घर में बहुत ज्यादा गरीबी आने वाली है और अपनी गरीबी को दूर करने के लिए तुम्हें कुछ ना कुछ तो उपाय सोचना ही पड़ेगा। पास में ही रीना भी बैठी होती है। रीना उसी समय इस पुजारी किशन दत्त को कहने लगती है कि मेरे पति की तबीयत बहुत खराब रहती है। किशन दत्त पुजारी कहने लगता है कि तुम्हारे घर की सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। लेकिन तुम दोनों को मंदिर में कथा सुनने के लिए आना पड़ेगा। रीना और बबीता कहने लगती हैं कि पुजारी जी हम हर रोज आपकी कथा सुनने के लिए मंदिर में आया करेंगे और जैसी यह बातें यह पुजारी सुनता है तो बड़ा खुश हो जाता है। इसके बाद उसी समय की संगत पुजारी इस घर से बाहर निकलता है और अपने मंदिर में चला जाता है।

धीरे धीरे करके शाम का समय हो जाता है और जैसे ही 4:30 बजे के आसपास का वक्त होता है तो बबीता देवी अब रीना को कहती है कि रीना आज हम दोनों को मंदिर में जाना है और मंदिर में किस संत पुजारी कथा सुनाने वाला है। लेकिन उसी समय रीना कहने लगती है कि देखो मैं तो नहीं जा सकती हूं। तुम्हें तो पता है कि मेरा पति बहुत ही खराब हालत में रहता है। मुझे उसे दवाइयां भी देनी पड़ती हैं और उसकी सेवा भी करनी पड़ती है। तुम ऐसा करो आज के समय में तुम अकेली चली जाओ। बबीता कहने लगती है कि कोई बात नहीं आज मैं अकेली ही मंदिर में चली जाती हूं। लेकिन कथा मुझे जरूर सुननी है और इस तरीके से अब बबीता देवी अकेली ही इस घर से बाहर निकल जाती है।

थोड़ी देर के बाद बबीता देवी मंदिर में पहुंच जाती है और मंदिर में पहुंचने के बाद देखती है कि मंदिर के अंदर बहुत सारी महिलाएं बैठी होती हैं और यह महिलाएं इस पुजारी की कथा सुनने के लिए आई थी। अब इसके बाद बबीता भी इन महिलाओं के बीच में बैठ जाती है। थोड़ी देर के बाद पुजारी किशन दत्त अपनी कथा सुनाने के लिए यहां पर आता है और जैसे ही किशन दत्त पुजारी की नजरें बबीता देवी पर पड़ती हैं तो बबीता देवी को देखने के बाद किशन दत्त के मन में अजीब तरह के विचार आने लग जाते हैं। किशन दत्त अपने मन में सोचने लग जाता है कि बबीता देवी तो मंदिर में आ चुकी है और आज इस महिला को बस हासिल करना पड़ेगा। इसके बाद किस संदत पुजारी इस मंदिर में बैठकर कथा सुनाना शुरू कर देता है और सारी महिलाएं कथा सुनना शुरू कर देती हैं। लगभग एक घंटे का वक्त गुजर जाता है और इतना वक्त गुजर जाने के बाद अब कथा खत्म हो जाती है और जैसे ये कथा खत्म हो जाती है तो किशन दत्त पुजारी उसी समय बबीता के पास आता है और बबीता को कहता है कि बबीता तुम मंदिर में ही रुक जाना। जब यह सारी औरतें इस मंदिर से बाहर चली जाएंगी तो मैं तुम्हें एक उपाय बताने वाला हूं। और उस उपाय को करने के बाद तेरे घर के जितने भी दुख संकट है वह सारे खत्म हो जाएंगे।

बबीता देवी हंसते मुस्कुराते हुए पुजारी जी को कहती है कि ठीक है पुजारी जी मैं मंदिर में अकेले रुक जाती हूं और इसके बाद जैसे जैसे वक्त गुजरता जाता है वैसेवैसे एक एक महिला इस मंदिर से बाहर निकल जाती है। मंदिर में बिल्कुल खालीपन छा जाता है। मंदिर के अंदर बस यह महिला बबीता देवी रह जाती है और साथ में यह पुजारी किशन दत्त रह जाता है। किशन दत्त पुजारी देखते हैं कि यह महिला अब इस मंदिर में अकेली होती है। किशन दत्त पुजारी सबसे पहले मंदिर का मुख्य दरवाजा बंद करता है और फिर इसके बाद बबीता देवी के पास आता है और बबीता को कहता है कि बबीता तुम्हें मंदिर के तहत खाने में मेरे साथ चलना पड़ेगा। वहां पर मैं तुम्हें दो चार मंत्र सिखाने वाला हूं और जैसे ही तुम उन मंत्रों को पढ़ना सीख जाओगी तो इसके बाद तुम्हारे घर के अंदर सुख समृद्धि आने वाली है। उसी समय बबीता देवी कहने लगती है कि चलो मैं तुम्हारे साथ तहखाने में भी चलने के लिए तैयार हूं।

और इसके बाद यह पुजारी की संतति इस महिला बबीता को मंदिर के तहखाने के अंदर ले जाता है। मंदिर के तहखाने के अंदर ले जाने के बाद बबीता देवी अब उस तहखाने के अंदर बैठ जाती है और मौका पाते ही अब यह पुजारी की संगत अपनी जेब से एक छोटा सा चाकू निकाल लेता है और इस महिला की गर्दन पर रख लेता है। बबीता देवी को बोला जाता है कि अगर तूने चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो तेरा गला यहीं पर काट दूंगा। मैं तुझे जान से मार दूंगा। जब ऐसी ऐसी धमकियां इस महिला बबीता देवी को दी जाती हैं तो बबीता काफी डर जाती है। बबीता के मुंह से एक भी शब्द तक नहीं निकल पाता है और इसके बाद यह किशन दत्त पुजारी चाकू की नोक पर इस महिला के हाथ पैर रस्सी के साथ बांध देता है। इसके मुंह पर कपड़ा बांध दिया जाता है और फिर इसके बाद यह पुजारी किशन दत्त सिंह अब गांव के सरपंच सूरजपाल के पास फोन कॉल करता है और सूरजपाल को कहता है कि देखो एक बहुत ही खूबसूरत महिला जिसका नाम बबीता देवी है वो मेरे मंदिर के तहखाने में है। तुम जल्दी से मंदिर के तहखाने में आ सकते हो। जैसे यह बातें सूरजपाल सुनता है तो सूरजपाल तुरंत समझ जाता है और इसके बाद सूरजपाल अपने घर से मोटरसाइकिल लेकर मंदिर में पहुंच जाता है और मंदिर में पहुंचने के बाद अब पुजारी किशन दत्त से मिलता है और किशन दत्त पुजारी को कहता है कि बबीता देवी कहां पर बंद है? इसके बाद किशन दत्त पुजारी इस गांव के सरपंच सूरजपाल को मंदिर के तह खाने के अंदर ले जाता है और सूरजपाल देखता है कि खूबसूरत महिला बबीता देवी के हाथ पैर रस्सी के साथ बंधे होते हैं।

इसके बाद सूरजपाल कहने लगता है कि पुजारी तुम बाहर चले जाओ और पहरा देना शुरू कर दो। अगर कोई आए तो मुझे बता देना। और इसके बाद किस संदत पुजारी इस तहखाने से बाहर निकल जाता है और फिर इसके बाद सूरजपाल गांव का दबंग सरपंच इस महिला बबीता के साथ आपत्तिजनक स्थिति में आ जाता है। देखते ही देखते सूरजपाल सिंह बबीता देवी के साथ अपने गलत रिश्ते कायम करने लग जाता है और यह गलत रिश्ते तब तक कायम किए जाते हैं जब तक सरपंच की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती है। दूसरी तरफ बबीता देवी इस सूरजपाल सरपंच के सामने हाथ जोड़ती रहती है। लेकिन सूरजपाल इसकी एक भी बात को नहीं सुनता है और अपने काम को अंजाम देता चला जाता है और जैसे ही सूरजपाल की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो इसके बाद सूरजपाल इस तहखाने से बाहर निकलता है और फिर मंदिर के पुजारी किशन दत्त के पास जाता है और किशन दत्त को कहता है कि पुजारी साहब तुम भी अपनी इच्छा पूरी कर सकते हो और इसके बाद किशन दत्त पुजारी भी इस मंदिर के तह खाने के अंदर आता है और फिर किशन दत्त पुजारी भी महिला बबीता के साथ अपने गलत रिश्ते काम करने लग जाता है। किशन दत्त पुजारी भी इस गलत काम को तब तक अंजाम देता है जब तक किशन दत्त की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं। और जैसे ही किशन दत्त की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो किशन दत्त अपनी इच्छाओं को पूरा करने के बाद इस तहखाने से बाहर निकलता है और फिर इसके बाद सरपंच के पास चला जाता है।

सरपंच सूरजपाल को कहता है कि देखो मेरा भी काम खत्म हो चुका है और फिर इसके बाद सूरजपाल इस पुजारी को लेकर फिर से मंदिर के तहत खाने में जाता है। सूरजपाल इस महिला बबीता को धमकी देता है और कहता है कि अगर यह बात तुमने किसी को बताई तो तुम्हारे पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। लेकिन सबसे पहले मैं तुझे मारूंगा। जब इतनी बड़ी बड़ी धमकियां बबीता देवी को दी जाती हैं तो बबीता काफी डर जाती है। बबीता हाथ जोड़ते हुए कहती है कि बस मुझे छोड़ दो मैं यह बातें किसी को नहीं बताऊंगी। और इसके बाद दबंग सरपंच सूरजपाल इसके हाथ पैर खोल देता है। इसके मुंह से कपड़ा भी खोल दिया जाता है। लेकिन सूरजपाल बार बार इसको सिर्फ एक ही धमकी देता है कि यह बात किसी को नहीं बतानी है। इसके बाद जैसे तैसे करके बबीता देवी इस मंदिर से बाहर निकलती है। अपने घर पर आ जाती है और घर पर आने के बाद बबीता देवी ना तो यह सारी बातें अपने देवर सतबीर सिंह को बताती है और ना ही अपनी देवरानी रीना देवी को यह बातें बताती है। बबीता देवी यही सबसे बड़ी गलती कर देती है। यही सबसे बड़ा बबीता की भूल हो जाती है। लेकिन बबीता देवी नहीं जानती थी कि आगे चलकर उसके साथ और उसकी देवरानी रीना के साथ इससे भी बड़े बड़े कांड होने वाले थे। जिसके बारे में रीना और बबीता कुछ भी नहीं जानती थी।

कई दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 25 जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। रीना और बबीता अपने घर में कामकाज कर रही होती हैं और उसी समय मंदिर का पुजारी की संगत अब इन दोनों के घर के अंदर आता है और बबीता देवी को कहता है कि बबीता अब तो तुम मंदिर में क्यों नहीं आती हो? बबीता के पास कोई भी जवाब नहीं होता है। बबीता सिर्फ इस पुजारी को एक ही बात कहती है कि आजकल मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं रहती है। लेकिन पुजारी की संगत अब रीना के साथ बहुत बड़ा कांड करने वाला था। पुजारी की संगत अब रीना को कहने लगता है कि रीना देखो बबीता तो मंदिर में नहीं आती है लेकिन तुम्हारा पति बीमार रहता है। तुम्हारे पति की हालत ठीक नहीं रहती है। अब तो तुम्हें ही कथा सुनने के लिए मंदिर में आना पड़ेगा। रीना उसी समय पुजारी किशन दत्त को कहती है कि कोई बात नहीं पुजारी जी आज शाम के करीब 5:00 बजे के आसपास मैं मंदिर में पहुंच जाऊंगी और आज से मैं तुम्हारी कथा सुनना शुरू कर दूंगी। किशन दत्त बड़ा खुश हो जाता है और कहता है कि आज तुम्हें जरूर मंदिर में आना पड़ेगा। इसके बाद किशन दत्त पुजारी इस घर से बाहर निकलता है और अपने मंदिर में चला जाता है। देखते ही देखते 4:30 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है। उसी समय रीना अपनी जेठानी बबीता को कहती है कि बबीता देखो तुम्हें भी मेरे साथ कथा सुनने के लिए मंदिर में चलना चाहिए। लेकिन बबीता कहती है कि देखो तुम भी मंदिर में मत जाओ। मंदिर में जाने के बाद मेरी हालत बहुत खराब रहती है और मंदिर में जाने के बाद तुम भी बीमार पड़ जाओगी। लेकिन रीना देवी इसकी बातों का मतलब नहीं समझ पाती है और बबीता रीना को साफ साफ सारी बातें नहीं बताती है।

लेकिन जैसे तैसे करके रीना कहने लगती है कि मैं तो मंदिर में जरूर जाऊंगी और मैं अभी इसी समय मंदिर में जा रही हूं। इसके बाद रीना देवी पूजा अर्चना का सामान लेती है और थाली में सामान लगाकर अपने घर से बाहर निकल पड़ती है और मंदिर की तरफ चल पड़ती है। जैसे ही रीना देवी मंदिर की तरफ जा रही होती है तो बीच रास्ते में रीना देवी की मुलाकात गांव के सरपंच सूरजपाल से होती है। सूरजपाल अपनी मोटरसाइकिल लेकर मंदिर की तरफ जा रहा होता है और जैसे ही सूरजपाल की नजरें इस महिला रीना की खूबसूरती इसके यौवन और इसकी जवानी पर पड़ती हैं तो सूरजपाल की नियत खराब हो जाती है। सूरजपाल सरपंच जब रीना के पास आता है और रीना को कहता है कि रीना तुम कहां पर जा रही हो? रीना हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि सरपंच साहब मैं आज मंदिर में जा रही हूं। मुझे आज पुजारी की कथा सुननी है। मेरा पति ज्यादा बीमार रहता है। उसकी हालत खराब रहती है और उसी की लंबी उम्र के लिए मैं कथा सुनने जा रही हूं। लेकिन उसी समय सूरजपाल सरपंच कहता है कि देखो मैं भी मंदिर की तरफ जा रहा हूं। तुम ऐसा करो मेरी मोटरसाइकिल पर बैठ जाओ। मैं तुम्हें मंदिर में छोड़ दूंगा। और इसके बाद हंसते मुस्कुराते हुए रीना देवी सूरजपाल सरपंच की मोटरसाइकिल पर बैठ जाती है और सूरजपाल सिंह मोटरसाइकिल चलाना शुरू कर देता है।

थोड़ी देर में ही सूरजपाल इस महिला रीना देवी को लेकर मंदिर के सामने पहुंच जाता है और फिर इसके बाद रीना देवी इस मोटरसाइकिल से नीचे उतरती है और मंदिर में चली जाती है और उसी समय सरपंच सूरजपाल सिंह यहां से निकल जाता है। अब जैसे ही यह महिला रीना देवी मंदिर में पहुंचती है तो देखती है कि वहां पर काफी सारी औरतें बैठी होती हैं और यह औरतें इस पुजारी की संगत की कथा सुनने के लिए आई थी और आज के समय में रीना भी इन औरतों में शामिल हो जाती है और पुजारी के आने का इंतजार करना शुरू कर देती है। थोड़ी देर के बाद पुजारी किशन दत्त भी मंदिर के ठीक सामने आ जाता है और फिर इसके बाद अपनी कथा शुरू कर देता है। सारी औरतें लगातार कथा सुनती रहती हैं। लेकिन किशन दत्त पुजारी की नजरें जैसे ही रीना पर पड़ती हैं तो रीना की खूबसूरती को देखने के बाद किशन दत्त पुजारी की नियत में कमी आ जाती है। किशन दत्त पुजारी इस महिला को देखने के बाद अपने मन में सोचने लगता है कि आज यह महिला उसके साथ वक्त गुजारने वाली है। जब ऐसे ऐसे ख्याल किशन दत्त पुजारी के मन में आने लग जाते हैं तो किशन दत्त पुजारी जल्दी जल्दी में अपनी कथा पूरी कर देता है और कथा खत्म करने के बाद किशन दत्त पुजारी इस महिला रीना देवी के पास आता है और रीना को कहता है कि रीना देखो तुम्हारा पति काफी बीमार रहता है। उसकी हालत बहुत खराब रहती है। मैं तुम्हें दो चार मंत्र सिखाने वाला हूं। दो चार उपाय बताने वाला हूं। और इन मंत्रों का उच्चारण करने से और दो चार जो मैं उपाय बताऊंगा इनको करने से तुम्हारे पति की हालत सुधर जाएगी। रीना देवी कहती है कि ठीक है पुजारी जी मैं मंत्र सीखने के बाद ही घर पर जाऊंगी। पुजारी कहने लगता है कि जब सारी महिलाएं इस मंदिर से बाहर चली जाएंगी तो इसके बाद मैं तुम्हें कुछ मंत्र सिखाने वाला हूं। और इस तरीके से देखते ही देखते गांव की सारी औरतें इस मंदिर से बाहर निकल जाती हैं और इस मंदिर में रीना देवी अकेली रह जाती है। साथ में पुजारी किशन दत्त रह जाता है।

इसके बाद किशन दत्त पुजारी इस महिला रीना देवी को कहता है कि तुम्हें मेरे साथ मंदिर के तहत खाने में चलना पड़ेगा। क्योंकि वहीं पर मैं मंत्र सिखाने का काम करता हूं। जैसे ही रीना को यह बातें कही जाती हैं तो रीना सीधी साधी महिला होती है। साधारण महिला होती है। रीना कहने लगती है कि कोई बात नहीं पुजारी जी मैं आपके साथ मंदिर के तहखाने में चलने के लिए तैयार हूं। और इसके बाद यह पुजारी इस महिला रीना देवी को लेकर मंदिर के तहखाने के अंदर चला जाता है। मंदिर के तहखाने के अंदर जाने के बाद जल्दी जल्दी में यह पुजारी की संत इस तहखाने का मुखिया दरवाजा बंद कर लेता है। मंदिर के अंदर यह पुजारी एक चाकू रखता था। जल्दी जल्दी में उस चाकू को उठाता है और इस महिला रीना के गर्दन पर रख लेता है और रीना को धमकी देता है और कहता है कि अगर तुमने चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो तुम्हारा गला यहीं पर काट दिया जाएगा। रीना भी काफी डर जाती है। रीना कहने लगती है कि मुझे छोड़ दो मुझे अपने घर पर जाना है। लेकिन उसी समय किसत पुजारी कहते हैं कि तुम्हें आज मेरी इच्छाओं को पूरा करना पड़ेगा और साथ में सूरजपाल सरपंच की इच्छाओं को पूरा करना पड़ेगा। नहीं तो हम दोनों मिलकर तुम्हारे पूरे परिवार को जान से मार देंगे। जब ऐसी ऐसी धमकियां रीना को दी जाती हैं तो रीना काफी डर जाती है और इसके बाद किशन दत्त पुजारी चाकू की नोक पर इस महिला रीना देवी के भी हाथ पैर रस्सी के साथ बांध देता है। इसके मुंह पर कपड़ा बांध दिया जाता है और यह सब काम करने के बाद अब यह पुजारी किशन दत्त अब सरपंच सूरजपाल के पास फोन कॉल करता है। सूरजपाल सरपंच को कहता है कि देखो रीना देवी हमारे मंदिर में फंस चुकी है। तुम जल्दी से आ सकते हो। और इसके बाद सूरजपाल उसी समय अपनी मोटरसाइकिल लेकर मंदिर में आ जाता है।

मंदिर में आने के बाद किशन दत्त पुजारी से मिलता है और कहने लगता है कि रीना कहां पर है? इसके बाद पुजारी कहता है कि मैंने उसको तहखाने में बंद कर रखा है। यहां तक कि उसके हाथ पैर रस्सी के साथ बांध रखे हैं। उसके मुंह पर भी मैंने कपड़ा बांध रखा है। और फिर इसके बाद सूरजपाल सिंह उस मंदिर के तहखाने के अंदर चला जाता है। मंदिर के तहखाने के अंदर जाने के बाद उस महिला के हाथ पैर की जो रस्सी थी वो खोल दी जाती है। सूरजपाल सिंह अब रीना को कहते हैं कि तुम्हें मेरी जरूरतों को पूरा करना पड़ेगा और साथ में इस पुजारी की जरूरतों को भी पूरा करना पड़ेगा। तभी तुम यहां से जा सकती हो और इस तरह से रीना को यह सब करने पर मजबूर कर दिया जाता है। इसके बाद जो सूरजपाल सरपंच होता है इस महिला रीना के साथ अपने गलत रिश्ते कायम करने लग जाता है और यह गलत रिश्ते तब तक कायम किए जाते हैं जब तक इस सरपंच की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं और जैसे ही सूरजपाल सरपंच की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो इसके बाद सरपंच साहब किशन दत्त पुजारी को आवाज लगाता है। किशन दत्त पुजारी इस मंदिर के तह खाने के अंदर आता है और फिर किशन दत्त पुजारी को बोला जाता है कि तुम भी अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकते हो और इसके बाद किशन दत्त पुजारी भी इस महिला के साथ गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है। किशन दत्त पुजारी इस महिला रीना के साथ तब तक इस गलत काम को करता है जब तक इसकी इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं और जैसे किशन दत्त की भी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो इसके बाद सूरजपाल सरपंच और किशन दत्त पुजारी दोनों रीना को डराते हैं धमकाते हैं और कहते हैं कि अगर यह बात किसी को भी बताई तो तुम्हारे पूरे परिवार को हम जान से मरवा सकते हैं। जब ऐसी ऐसी धमकियां रीना को भी दी जाती हैं तो रीना भी काफी डर जाती है। रीना कहती है कि मुझे घर पर जाना है। मुझे छोड़ दो मैं किसी को कुछ भी नहीं बताऊंगी। और इस तरीके से पुजारी और सरपंच ने इस महिला के साथ गंदा और गलत काम कर लिया था। इसके बाद जैसे तैसे करके रीना भी अपने घर पर आ जाती है। लेकिन रीना यह सारी बातें बबीता को भी नहीं बताती है और ना ही अपने पति सतबीर को कुछ बताती है। एक तरफ रीना अपने आप को धोखा दे रही होती है। दूसरी तरफ बबीता भी अपने आप को भी धोखा दे रही होती है और इस पूरे परिवार के सदस्यों को धोके में रख रही होती है। लेकिन दोनों औरतों के साथ बहुत बड़े बड़े कांड हो चुके थे।

लेकिन अब आगे चलकर इन दोनों औरतों के साथ एक ऐसा बड़ा कांड होने वाला था कि जिसकी गूंज पूरे जिले में गूंजने वाली थी जिसके बारे में यह दोनों औरतें कुछ भी नहीं जानती थीं। इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 18 अगस्त 2026 का दिन। सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। गांव का सरपंच सूरजपाल सिंह मंदिर में जाता है। मंदिर में जाने के बाद किशन दत्त पुजारी से मिलता है और किशन दत्त पुजारी को कहता है कि पुजारी साहब आज तुम्हें जैसे तैसे करके बबीता देवी को मंदिर में बुलाना पड़ेगा। क्योंकि आज मंदिर के तहखाने में मैं बबीता देवी के साथ अपना कीमती वक्त गुजारना चाहता हूं। उसी समय किशन दत्त पुजारी कहने लगता है कि कोई बात नहीं सरपंच साहब तुम किसी बात की फिक्र मत करो और मैं खुद ही बबीता देवी को अपने मंदिर में लेकर आऊंगा और इसके बाद तुम बबीता देवी के साथ अपनी रात रंगीन कर सकते हो। इस तरीके से अब सूरजपाल सिंह उसी समय इस मंदिर से बाहर निकलता है। अपने घर पर आ जाता है। आधे घंटे का वक्त गुजरने के बाद किशन दत्त पुजारी भी अपने मंदिर से अकेला बाहर निकलता है। देखते ही देखते किशन दत्त पुजारी अब सतवीर के घर पर पहुंच जाता है। सतबीर के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है और सतबीर की विधवा भाभी बबीता देवी अपने घर का दरवाजा खोलती है। बबीता देवी घर में आज बिल्कुल अकेली होती है।

क्योंकि बबीता देवी का जो देवर सतबीर होता है वह अपनी पत्नी रीना के साथ हॉस्पिटल में गया हुआ था क्योंकि सतवीर के लिए कुछ दवाइयां खरीदनी थीं और बबीता देवी का जो बेटा होता है वह भी सतबीर के साथ ही हॉस्पिटल में गया हुआ था इस तरीके से बबीता अपने घर में अकेली होती है और जैसे ही यह पुजारी इस घर के अंदर प्रवेश करता है तो देखता है कि बबीता देवी घर में बिल्कुल अकेली थी उसी समय पुजारी की संत अब इस महिला बबीता को कहता है कि बबीता आज तुम्हें सरपंच साहब ने याद किया है और तुम्हें शाम के करीब 7:30 बजे के आसपास मंदिर में आना पड़ेगा और मंदिर में आने के बाद सरपंच साहब को खुश करना पड़ेगा। नहीं तो सरपंच साहब तुम्हारे पूरे परिवार को जान से मरवा देगा। जब यह धमकियां बबीता को दी जाती हैं तो डर की वजह से बबीता किशन दत्त पुजारी को कहती है कि कोई बात नहीं पुजारी जी मैं रात के समय मंदिर में पहुंच जाऊंगी और इस तरीके से किशन दत्त पुजारी इस घर से बाहर निकलता है अपने मंदिर में चला जाता है।

आखिरकार पूरा दिन गुजर जाता है और जैसे ही रात के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है तो बबीता देवी दबे पांव अपने घर से बाहर निकल जाती है और अपनी देवरानी रीना को कहती है कि मैं एक पड़ोसन के घर पर जा रही हूं एक घंटे में वापस आ जाऊंगी इस तरह से झूठ बोलकर बबीता देवी घर से बाहर निकल चुकी थी। थोड़ी देर के बाद बबीता देवी मंदिर में भी पहुंच जाती है। लेकिन आज बबीता देवी अपने साथ एक चाकू लेकर गई थी। शायद आज बबीता देवी कोई बड़ा कांड करने वाली थी। बबीता देवी जैसे ही मंदिर में पहुंचती है तो मंदिर में देखती है कि वहां पर किशन दत्त पुजारी और साथ में सूरजपाल सरपंच दोनों बैठे होते हैं और बबीता के आने का इंतजार कर रहे होते हैं। इसके बाद सूरजपाल उसी समय बबीता देवी के पास आता है और बबीता को कहता है कि तुम्हें मेरे साथ तहखाने में चलना ही पड़ेगा। बबीता मान जाती है और इसके बाद सूरजपाल सरपंच इस महिला बबीता देवी को लेकर मंदिर के तहखाने के अंदर चला जाता है। मंदिर के तहखाने का दरवाजा बंद कर लिया जाता है और फिर इसके बाद जो सूरजपाल सरपंच होता है बबीता के साथ गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है। लेकिन उसी बीच बबीता देवी अपना चाकू निकालती है और दबंग सरपंच की पीठ पर चाकू मार देती है। जैसे चाकू मारा जाता है तो दबंग सरपंच की थोड़ी सी चीख निकल जाती है और यह चीखें इस मंदिर के पुजारी तक पहुंच जाती हैं। मंदिर का पुजारी की संदत उसी समय तहखाने में जाता है तो देखता है कि दबंग सरपंच के शरीर से थोड़ा सा खून बह रहा होता है। लेकिन इसी बात पर दबंग सरपंच सूरजपाल को गुस्सा आता है।

सूरजपाल उसी समय एक बड़ी सी ईंट उठाता है और इस महिला बबीता देवी के सिर में जबरदस्त तरीके से उस ईंट को मार देता है। पीठ लगते ही बबीता उसी समय मौके पर अपना दम तोड़ देती है और जैसे ही बबीता देवी अपना दम तोड़ देती है तो इसके बाद सरपंच साहब इस पुजारी की संगत को कहने लगता है कि संगत यह महिला तो मर चुकी है। अब तुम्हें ही इस महिला की लाश को ठिकाने लगाना पड़ेगा। जैसे ही पुजारी को यह बातें कही जाती हैं तो किस संदत पुजारी इस काम को अंजाम देने के पर मजबूर हो जाता है। किशनत पुजारी कहते हैं कि तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं इस महिला की लाश को ठिकाने लगा दूंगा। और अब इसके बाद किशन दत्त पुजारी इस मंदिर के अंदर से एक बोरी लेकर आता है और उस बोरी के अंदर बबीता देवी की लाश डाल ली जाती है। इसके बाद किशन दत्त पुजारी रात के करीब 10:00 बजे के आसपास इस लाश को बोरी में भरकर अपने कंधे पर उठाकर खेतों की तरफ निकल पड़ता है।

और जैसे ही किशन दत्त पुजारी खेतों की तरफ जा रहा होता है तो उसी समय गांव के दो किसान इसको देख लेते हैं। और इन दोनों किसानों के नाम प्रताप और अजय होते हैं। प्रताप और अजय जैसे ही किशन पुजारी के सिर पर बोरी को देखते हैं तो उसी समय प्रताप और अजय दोनों इसके पास आ जाते हैं। प्रताप सिंह कहने लगता है कि पुजारी जी बोरी में क्या रखा हुआ है? पुजारी कहने लगता है कि मंदिर का थोड़ा कूड़ा कर्कट है और इसी को फेंकने के लिए मैं खेतों की तरफ जा रहा हूं। लेकिन प्रताप और अजय जिद पकड़ लेते हैं और कहते हैं कि हमें पहले यह दिखाओ कि इस बोरी में क्या कूड़ा का कट है। और इसके बाद जबरदस्ती करके प्रताप और अजय बोरी को नीचे उतरवा लेते हैं। और प्रताप और अजय जब उस बोरी के अंदर लाश को देखते हैं और लाश को पहचानने के बाद प्रताप और अजय के होश उड़ जाते हैं। प्रताप उसी समय अपने दोस्त अजय को कहता है कि यह तो विधवा महिला बबीता की लाश है और इस पुजारी ने बबीता का कत्ल कर दिया है। इस तरीके से अब अजय और प्रताप दोनों इस पुजारी को वहीं पर पकड़ लेते हैं। काफी देर तक इसकी पिटाई की जाती है और पिटाई करने के बाद प्रताप सिंह नजदीकी पुलिस स्टेशन में फोन कॉल करता है। करीब एक घंटे के बाद घटना स्थल पर पुलिस पहुंचती है।

पुलिस इसके बाद प्रताप और अजय से पूछताछ करना शुरू कर देती है। अजय बताता है कि यह मंदिर का पुजारी बबीता की लाश को फेंकने के लिए खेतों की तरफ जा रहा था। लेकिन हमने इसे हाथ पकड़ लिया है और इसने बबीता देवी का कत्ल किया है। इसके बाद पुलिस लाश को अपने कब्जे में लेती है और पुजारी को मौके पर ही पकड़ कर पिटाई करना शुरू कर देती है। लेकिन किशन दत्त पुजारी अपनी पोल पट्टी खोलना शुरू कर देता है। किशन दत्त पुजारी अब सूरजपाल की पूरी कहानी पुलिस के सामने बताता है। किशन दत्त कहता है कि मैंने और सूरजपाल सरपंच ने मिलकर इस महिला बबीता और इसकी देवरानी रीना के साथ कई बार अनगिनत बार गंदा और गलत काम किया था। लेकिन आज इस महिला का हमारे हाथों कत्ल हो गया है। अब इस तरीके से पुलिस एक घंटे के अंदर अंदर सूरजपाल सरपंच को भी गिरफ्तार कर लेती है। सूरजपाल सरपंच और किशन दत्त को दोनों को पुलिस थाने में ले जाया जाता है। वहां पर दोनों की जमकर पिटाई की जाती है और जैसे ही सूरजपाल सरपंच और पुजारी किशन दत्त की पिटाई की जाती है तो यह दोनों अपना पूरा जो कबूल कर लेते हैं। इसके बाद पुलिस रीना के घर पर भी जाती है और रीना से भी पूछताछ की जाती है। रीना भी अपनी बीती हुई पूरी कहानी पुलिस के सामने बताती है और फिर इसके बाद पुलिस सूरजपाल सरपंच और किशन दत्त पुजारी के खिलाफ आगे की कानूनी कारवाई शुरू कर देती है।

यह बात भविष्य में तय की जाएगी कि जज साहब सूरजपाल सरपंच और किशन दत्त पुजारी को आखिरकार क्या सजा सुनाने वाला है। लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम को सुनाने का मेरा उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं था। बल्कि आपको जागरूक करना था। आपको सावधान करना था। मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ। तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद वंदे मातरम।

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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