आश्रम में बाबा नें महिलाओं के साथ कर दिया कां#ड /बाबा महिलाओं के साथ गलत करता था /
आश्रम में बाबा नें महिलाओं के साथ कर दिया कां#ड /बाबा महिलाओं के साथ गलत करता था /
**नमस्ते दोस्तों, मैं पूजा मीणा।**
आज की हमारी घटना राजस्थान के डूंगरपुर जिले से शुरू होती है। डूंगरपुर जिले में गणेशपुर नाम का एक छोटा सा गांव है। इसी गांव में रहती हैं मीना देवी। मीना विधवा हैं। देखने में वे बहुत खूबसूरत हैं। तीन साल पहले उनके पति की हार्ट अटैक में मौत हो गई। सदमा इतना लगा कि मीना टूट गईं। फिर भी वे हिम्मत करके परिवार और खुद को संभालती रहीं।
उनका एक चार साल का बेटा आकाश है। सासू गिन्नी देवी भी घर में रहती हैं। गिन्नी घर का सारा काम करती हैं। मीना रोज सुबह आठ बजे उठती, खेत जातीं, पशुओं को चारा काटकर लातीं। बस यही उनकी दिनचर्या थी। लेकिन पति के गुजरने के बाद मीना को दौरा पड़ने लगा। तीन-चार घंटे तक बेहोश हो जातीं। डॉक्टरों ने कहा, “लंबे समय तक दवाइयां खानी पड़ेंगी। कोई जादू-टोना वाला बीमारी नहीं है।”
गिन्नी परेशान हो गईं। वे सोचने लगीं कि मेरी बहू पर भूत का साया है। गिन्नी जादू-टोना पर विश्वास रखती हैं। उन्होंने मीना को तांत्रिक के सामने खड़ा करवाया। तांत्रिक ने जड़ी-बूटियां और तंत्र-मंत्र की दवाएं दीं। पैसा भी लिया। लेकिन मीना का दौरा नहीं रुकता था। हर तीसरे-चौथे दिन तीन-चार घंटे बेहोश हो जातीं। गिन्नी थक चुकी थीं।

१० जनवरी २०२६ को शाम चार बजे मीना घर के काम में व्यस्त थी। तभी काव्या नाम की पड़ोसन आई। काव्या विधवा है, चाल-चलन ठीक नहीं। दोनों अंदर बैठकर बातें करने लगीं। गिन्नी ने कहा, “काव्या, मेरी बहू मीना को तीन-चार घंटे तक होश नहीं आता। आपकी पड़ोस में आश्रम है। कल्लूनाथ नाम का बाबा है। वह महिलाओं को ठीक करता है।”
काव्या ने हां कहा। गिन्नी ने तुरंत मीना को बुलाया। मीना ने इनकार किया। गिन्नी ने गालियां दीं, डांटा। लेकिन मीना नहीं मानी। फिर काव्या ने कहा, “मां जी, मैं अकेले जाऊंगी। आप चिंता मत करो।”
दोनों ऑटो पर बैठकर आश्रम पहुंचीं। कल्लूनाथ बाबा मंत्र जप रहे थे। काव्या की खूबसूरती देखकर बाबा की नियत खराब हो गई। काव्या ने प्रसाद मांगा। बाबा ने अतिथि कमरा दिया। दो मिनट बाद काव्या ने दरवाजा बंद कर लिया। दोनों अकेले में चले गए। गलत काम शुरू हो गया। काम पूरा होने पर बाबा ने पैसे दिए। फिर काव्या ने कहा, “कल मीना को लाऊंगी। बाबा जी उसे ठीक कर देंगे।”
काव्या ने गिन्नी को बताया कि मीना कल ठीक हो जाएगी। गिन्नी खुश हुई। लेकिन काव्या ने मीना को अकेले जाने के लिए तैयार किया। दोनों ऑटो पर बैठीं। आश्रम पहुंचीं। मीना ने देखा कि बाबा मंत्र जप रहे हैं। काव्या ने मीना को अकेला कर दिया। बाबा ने प्रसाद दिया। मीना ने खाया। १५-२० मिनट बाद मीना बेहोश हो गई।
काव्या और बाबा ने मीना को कमरे में ले गए। दरवाजा बंद किया। दोनों ने मीना के साथ गलत काम शुरू कर दिया। मीना बेहोश थी। काम पूरा होने पर बाबा ने कहा, “कल मीना ठीक हो जाएगी।” काव्या ने मीना को घर ले आई। गिन्नी ने पूछा, “कितने दिन चली?” मीना ने झूठ बोला, “मुझे दौरा पड़ा, तीन-चार घंटे बेहोश रही। बाबा ने दवाएं दीं।”
गिन्नी खुश हुई। लेकिन मीना के मन में शक था। वह आश्रम में गया था। वहां सिर्फ बाबा ही था। काव्या ने कहा कि कुछ भी गलत नहीं हुआ। मीना ने विश्वास कर लिया। काव्या रोज मीना को आश्रम ले जाती। प्रसाद खाने पर मीना बेहोश हो जाती। काव्या और बाबा कमरे में गलत काम करते। काव्या को पैसे मिलते।
मई २०२६ तक मीना आश्रम जाती, प्रसाद खाती, बेहोश होती। काव्या बाबा के साथ काम करती। काव्या ने मीना को बताया कि बाबा कुछ नहीं करता। मीना ने विश्वास कर लिया। गिन्नी को पता नहीं था कि उनकी बहू के साथ क्या हो रहा है।
१५ मार्च २०२६ को सुबह मीना के अचानक से मामूली सी तबीयत खराब हो गई। उल्टी आने लगीं, चक्कर आने लगे। गिन्नी ने ऑटो बुलाया। हॉस्पिटल ले गईं। डॉक्टर ने चेकअप किया। डॉक्टर बोली, “गिन्नी देवी, आपकी बहू प्रेग्नेंट है।”
गिन्नी स्तब्ध रह गई। बोली, “मेरी बहू विधवा है। कई साल पहले पति की मौत हो चुकी है। प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है?” डॉक्टर हैरान हो गई। गिन्नी ने मीना को डांटा, फटकारा। मीना ने कहा, “मैंने किसी के साथ गलत काम नहीं किया। मुझे पता नहीं कैसे प्रेग्नेंट हो गई।”
गिन्नी ने मीना को घर ले आया। गिन्नी परेशान हो गई। पड़ोसियों के घर गई। मीना अकेली बैठी सोच रही थी। आश्रम में गई थी। बाबा ही था। वहां बेहोश हुई थी। शायद बाबा ने गलत किया है। मीना ने फैसला किया। ऑटो बुलाकर पुलिस स्टेशन पहुंची।
दरोगा मुकेश कुमार ने पूरी कहानी सुनी। मुकेश ने तुरंत पुलिस टीम बुलाई। आश्रम पहुंचा। कल्लूनाथ बाबा को गिरफ्तार किया। थाने ले आए। पिटाई हुई। कल्लूनाथ ने खुलासा कर दिया। बोला, “मैंने मीना को नशीला प्रसाद दिया। काव्या भी आती थी। मैंने उससे भी काम किया। काव्या ने प्रसाद में नशीला मिलाया। काव्या भी मेरी भक्त थी।”
काव्या को भी गिरफ्तार किया। दोनों को चार्जशीट दायर की गई। जज साहब को सजा सुनानी है। गिन्नी की बड़ी गलती थी। गिन्नी ने काव्या के बहकावे में आकर मीना को आश्रम में भेज दिया। आश्रम में मीना पर अत्याचार हुआ। काव्या ने झूठ बोला कि बाबा कुछ नहीं करता। मीना ने विश्वास कर लिया। गिन्नी को पता नहीं था कि उनकी बहू के साथ क्या हो रहा है।
दोस्तों, इस घटनाक्रम को सुनाने का उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं है। बस आपको जागरूक करना है। आश्रमों, जादू-टोना और किसी भी बहकावे से सावधान रहना चाहिए। खासकर महिलाएं और परिवार।
दोस्तों, फिर मिलते हैं अगली कहानी में। जय हिंद।