एक करोड़पति पिता अपनी तलाकशुदा बेटी की शादी करवाना चाहता था। – News

एक करोड़पति पिता अपनी तलाकशुदा बेटी की शादी करवाना चाहता था।

एक करोड़पति पिता अपनी तलाकशुदा बेटी की शादी करवाना चाहता था।

एक करोड़पति पिता अपनी तलाकशुदा बेटी की शादी करवाना चाहता था।

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दोस्तों, आज मैं आप लोगों को सुनाने जा रहा हूं हैदराबाद की एक ऐसी कहानी, जो दिल को छू लेगी। यह कहानी है हैदराबाद के छोटे से इलाके में जूस का ठेला लगाने वाले 24 साल के अमन की। अमन अनाथ था। बचपन से ही माता-पिता का चेहरा याद नहीं रह गया था। अनाथालय में रहने के बाद उसने खुद को जिंदा रखा। सुबह जल्दी उठकर अपनी छोटी सी गाड़ी में फल रखता, जूस का ठेला सड़क के किनारे लगाता। उसकी बेंच पर बुजुर्ग और बच्चे बैठकर जूस पीते थे। अमन गरीबों को सस्ता जूस देता, कभी मुफ्त भी पिलाता।

एक दिन एक बुजुर्ग ने पूछा, बेटा, हर किसी की मदद क्यों करता है? पैसे कमाने हैं ना? अमन मुस्कुराया, पापा, पैसे तो मेहनत से दोबारा कमाए जा सकते हैं। लेकिन किसी जरूरतमंद की मदद का मौका रोज नहीं मिलता। बुजुर्ग ने उसकी पीठ थपथपाई। बेटा, तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है। अमन ने हंसकर अपना काम जारी रखा।

उसी शहर में राजेंद्र मल्होत्रा नाम का बड़ा कारोबारी रहता था। उसके पास करोड़ों की संपत्ति थी। मकान, जमीन, दुकानें। लेकिन उसकी जिंदगी में एक कमी थी। उसकी बेटी शीतल। शीतल 28 साल की समझदार लड़की थी। राजेंद्र उससे बहुत प्यार करता था। शीतल को कभी कमी महसूस नहीं हुई थी। लेकिन जिंदगी में एक तूफान आ चुका था। शीतल की शादी विक्रम नाम के लड़के से हुई थी। विक्रम अमीर परिवार का था। शराब और गुस्से की बुरी आदत थी। छोटी बातों पर झगड़ा, मारपीट। शीतल चुप रहती, सोचती समय ठीक हो जाएगा। लेकिन एक दिन रोते हुए मां से फोन किया। मां, अब मैं और नहीं सह सकती। डर लगता है।

राजेंद्र ने बेटी को घर ले आया। विक्रम के परिवार से बात की, लेकिन मामला सुलझा नहीं। शीतल को ही दोष दे दिया गया। तभी राजेंद्र ने कठिन फैसला लिया। शीतल का तलाक करवा दिया। शीतल टूट गई। एक शाम पिता के सामने बैठी। राजेंद्र ने सर पर हाथ रखा, बेटा जो हुआ उसे भूलने की कोशिश करो। तुम्हारी जिंदगी यहीं खत्म नहीं हुई है। शीतल रो पड़ी। पापा, अब मुझे दोबारा शादी नहीं करनी। डर लगता है। राजेंद्र ने हाथ पकड़ा। मैं तुम्हें किसी के हाथ में नहीं दूंगा जो तुम्हें मेरी बेटी समझे। अगर दूसरी शादी होगी तो सिर्फ ऐसे इंसान से जो तुम्हारी इज्जत करे। चाहे गरीब ही क्यों ना हो।

राजेंद्र ने शीतल के लिए दामाद तलाशा। मेहनती, इंसानियत वाला। लेकिन संपत्ति सुनकर लोग पीछे हट जाते। राजेंद्र परेशान। एक सुबह जॉगिंग के लिए निकला। अचानक सिर में चक्कर आया। जमीन पर बैठ गया। लोग गुजरते रहे। तभी अमन अपनी जूस की गाड़ी लाता दिखा। बुजुर्ग को देखा, दौड़ा। बाबा क्या हुआ? राजेंद्र बोल नहीं पा रहा। अमन ने उसे बेंच पर बैठाया, मौसंबी का जूस पिला दिया। राजेंद्र ने जूस पी लिया। हालत ठीक हुई। बेटा तुमने मेरी बहुत मदद की। धन्यवाद। अमन मुस्कुराया, साहब इसमें धन्यवाद की क्या बात? इंसान ही इंसान का काम आता है।

राजेंद्र घर लौटा। अमन का चेहरा मन में बस गया। अगली सुबह उसी रास्ते पहुंचा। अमन ने देखते ही कहा, साहब आज तबीयत ठीक है? हां बेटा, एक गिलास जूस। अमन ने बनाया। राजेंद्र ने पूछा, बेटा यहां कब से जूस बेच रहे हो? अमन बोला कई साल, यही मेरा काम। घर में कौन है? राजेंद्र ने पूछा। अमन चुप रहा। कोई नहीं साहब, मैं अकेला हूं। बचपन में माता-पिता चले गए। मेहनत करता हूं। राजेंद्र को दया नहीं आई, बल्कि सम्मान पैदा हो गया। उसने सोचा, जिसने इतना सहा फिर भी इंसानियत बची है। वह दिल का अच्छा होगा।

उस दिन अमन को ज्यादा पैसे देने की कोशिश की। अमन ने वापस किया। साहब जितने पैसे हैं उतने ही। ज्यादा नहीं ले सकता। मेहनत की कमाई। अमन ने कहा, मेहनत की कमाई कम हो तो भी ठीक। लेकिन बिना मेहनत के ज्यादा पैसे लेने की आदत इंसान खुद को खो देता है। राजेंद्र के मन में विचार आया। क्या यही वह लड़का है जिसकी मुझे तलाश थी? लेकिन वह जानता था, दो-चार मुलाकात से इंसान समझा नहीं जा सकता।

अगली सुबह अमन ने मुसंबी जूस बनाया। राजेंद्र ने देखा, क्या हुआ? अमन क्या हो रहा है? राजेंद्र बोला, तुम्हारी उम्र के लड़के मौज मस्ती करते हो, तुम मेहनत करते हो। अमन बोला, मौज मस्ती करने के लिए पहले जिंदगी संभालनी पड़ती है। मेरे पास कोई नहीं है। अगर मेहनत नहीं करूंगा तो साथ कौन देगा? राजेंद्र ने पूछा, अगर बहुत पैसे आ जाए तो क्या करोगे? अमन हंसा, पहले छोटा घर बनाऊंगा, जूस दुकान खोलूंगा, फिर किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई करवाऊंगा जिसके मां-बाप फीस नहीं भर सकते। राजेंद्र हैरान। तुम अपने लिए इतना कम और दूसरों के लिए इतना ज्यादा क्यों सोचते हो? अमन बोला, बचपन में अकेलापन देखा है। मैं नहीं चाहता कोई बच्चा सपने छोड़ दे। राजेंद्र चला गया, लेकिन मन में फैसला हो चुका था।

अगले दिन अमन को बुलाया। बेटा आज शाम मेरे बंगले पर आओ खाना खाओगे। अमन चौंक गया। साहब मैं आपके बंगले पर नहीं आ सकता। राजेंद्र हंसा, इंसान बड़ा या छोटा पैसों से नहीं। तुमने मदद की, इसलिए खास हो। शाम जरूर आना। अमन सोचता रहा, आखिरकार बोला ठीक है साहब, आ जाऊंगा। उस शाम अमन पुराने कपड़ों में पहुंचा। बंगला देखकर आंखें खुल गईं। बड़ा गेट, बगीचा। अमन ने खुद से कहा, लालच में नहीं आया। बस खाना खाने आया हूं। इज्जत के साथ जाना और वापस आना। दरवाजे पर नौकर ने पूछा किससे मिलना है? राजेंद्र साहब ने बुलाया। नौकर ने अंदर लिया। राजेंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा, आओ बेटा, खुशी हुई। अमन ने हाथ जोड़े, नमस्ते साहब। राजेंद्र बोला आज साहब मत बोलो, अंकल कह सकते हो। अमन बोला ठीक है अंकल। राजेंद्र ने डाइनिंग टेबल पर ले गया। कई पकवान। अमन ने लालच नहीं भरी। राजेंद्र ने पूछा, बेटा तुम्हें पता है मैंने तुम्हें क्यों बुलाया? अमन बोला नहीं अंकल। राजेंद्र बोला, मैं तुम्हें पसंद करता हूं। बातें अच्छी लगती हैं। अमन ने सिर हिलाया।

तभी शीतल आई। पापा आप खाना खा रहे हैं? राजेंद्र बोला हां बेटा आओ, तुम्हें किसी से मिलवाता हूं। यह अमन है। शीतल ने नजर डाली। अमन ने सम्मान से सिर झुकाया, नमस्ते। शीतल ने भी कहा नमस्ते। पहली मुलाकात थी। कोई लंबी बात नहीं। लेकिन शीतल के पिता की आंखों में चमक देख ली। खाने के बाद अमन उठने लगा। राजेंद्र बोला थोड़ा बैठो। अमन बैठ गया। नौकर से मिठाई का डिब्बा पैक करो। अमन ने कहा नहीं अंकल, इसकी जरूरत नहीं। आपने खाना खिला दिया, वही काफी। राजेंद्र बोला अरे बेटा घर ले जाना। अमन बोला अगर आपने कुछ करना ही है तो अगली बार कोई काम बता दीजिएगा। मुफ्त की चीजों की आदत नहीं है। राजेंद्र शांत हो गया। उसे अमन का जवाब सुनकर खुशी भी हुई और गर्व भी। बेटा तुम बहुत अलग हो। अमन मुस्कुराया और चला गया।

लेकिन बाहर निकलते ही शीतल ने पिता से पूछा, पापा यह कौन है? राजेंद्र बोला एक बहुत अच्छा लड़का है। शीतल चुप रही। फिर बोली पापा इसे घर क्यों बुलाया? राजेंद्र बोला बस ऐसे ही। शीतल कमरे में चली गई। राजेंद्र बैठा रहा। मन में सवाल आ रहा था। क्या अमन मेरी बेटी को वह जिंदगी दे सकता है? लेकिन जल्दबाजी नहीं।

अगले दिन अमन की परीक्षा शुरू हुई। राजेंद्र ने पुराने कर्मचारी को बुलाया। मुझे अमन की जिंदगी के बारे में पता करना है। लेकिन उसे पता नहीं चलना चाहिए। अमन रोज जूस बेचता। दोपहर में बुजुर्ग महिला आई। मेरे पास पूरे पैसे नहीं। आधा गिलास मिल जाएगा? अमन बोला अम्मा पूरा गिलास पीजिए। महिला बोली पैसे कम हैं। अमन बोला आज पैसे रहने दीजिए। जब हो तब दे देना। महिला ने जूस पीते हुए आशीर्वाद दिया। दूर राजेंद्र का कर्मचारी सब देख रहा था। शाम को बताया। राजेंद्र संतुष्ट।

अगली सुबह अमन ठेला पर पहुंचा। राजेंद्र की गाड़ी आई। अमन, आज मुझे तुमसे छोटा काम है। राजेंद्र ने सफेद लिफाफा दिया। मेरे ऑफिस में मैनेजर को दे देना। बहुत जरूरी कागज है। अमन ने कहा ठीक है अंकल। ध्यान रखना खुलना नहीं चाहिए। अमन ने लिफाफा गाड़ी के नीचे रखा, बैग में सुरक्षित। राजेंद्र ने लिफाफे में पैसे भी रखे थे। अमन की जिंदगी बदलने वाला इंसान खड़ा था।

अमन ने लिफाफा बिना खोले पहुंचाया। मैनेजर ने खोला, आंखें रुक गईं। तुमने इसे खोला था? अमन बोला नहीं साहब। मैनेजर पूछा पता था पैसे भी हैं? अमन बोला नहीं। मैनेजर बोला अगर पता होता तो। अमन बोला तब भी नहीं खोलता। मैनेजर ने राजेंद्र को फोन किया। लिफाफा खोला नहीं। राजेंद्र मुस्कुराया। अमन ने कहा अंकल मैंने सिर्फ अपना काम किया। राजेंद्र बोला आजकल लोग मौका देखकर फायदा सोचते हैं। तुमने मौका मिलने के बाद भी ईमानदारी नहीं छोड़ी। अमन बोला अंकल गरीब आदमी के पास पैसा कम है तो कम से कम इज्जत बचा लो। राजेंद्र की आंखें नम हो गईं।

उस शाम राजेंद्र शीतल के कमरे में गया। शीतल खिड़की के पास बैठी थी। बेटा क्या कर रही हो? शीतल बोली कुछ नहीं पापा। राजेंद्र बोला अगर मैं तुमसे दोबारा शादी के बारे में बात करूं तो नाराज होगी? शीतल की आंखें नीचे। पापा मैंने पहले कहा था नहीं करनी। राजेंद्र बोला मैं मजबूर नहीं करूंगा। हर इंसान को दोबारा खुश होने का अधिकार है। शीतल बोली डर लगता है पापा। राजेंद्र बोला इस बार मैं दौलत देखकर नहीं दूंगा। इज्जत वाला इंसान। शीतल ने पूछा क्या आपको कोई लड़का पसंद आया है? राजेंद्र बोला हां। शीतल बोली कौन है? राजेंद्र बोला अमन। शीतल बोली वही जूस वाला। राजेंद्र मुस्कुराया हां। शीतल ने पूछा कितने दिनों से जानते हैं? बहुत ज्यादा नहीं। लेकिन जो देखा बहुत बड़े घरों में भी नहीं मिलता। शीतल बोली क्या उसे मेरे बारे में पता है? राजेंद्र बोला अभी नहीं। शीतल बोली अगर पता चला कि मेरा तलाक हो चुका है तो? राजेंद्र बोला अगर अच्छा इंसान है तो अतीत का इस्तेमाल नहीं करेगा। शीतल रो पड़ी। पापा मैं बस सम्मान चाहती हूं। राजेंद्र बोला मैं भी यही चाहता हूं।

अमन रोज मेहनत करता। राजेंद्र पास आता। एक दिन पूछा अगर जिंदगी में बहुत पैसा मिल जाए तो बदल जाओगे? अमन बोला नहीं अंकल। पैसा इंसान को बदलता है या नहीं उस पर निर्भर। लेकिन अगर बहुत पैसा हुआ तो गरीब को छोटा नहीं समझूंगा। राजेंद्र बोला अगर शादी अमीर परिवार में हो जाए तो? अमन बोला मेरे जैसे लड़के से कौन शादी करेगा? राजेंद्र हंसा। अगर कोई करे तो मैं देखूंगा लड़की मुझे पसंद करती है या नहीं। पैसा देखकर शादी का मतलब नहीं।

कुछ दिन बाद अमन को ऑफिस बुलाया। बेटा मैं तुम्हें प्रोजेक्ट में काम देना चाहता हूं। ईमानदारी से काम करो। अमन चौंक गया। अनुभव नहीं है। राजेंद्र बोला अनुभव काम करते काम आ जाएगा। अमन बोला अगर मौका दे रहे हो तो पूरी मेहनत करूंगा। अब अमन रोज ऑफिस जाता। शीतल भी आई। कर्मचारी की गलती देखा। अमन बोला गलती हो गई तो समझा दीजिए। डांटने से ठीक नहीं। शीतल ने पहली बार मुस्कुराया।

घर लौटते समय शीतल बोली पापा अमन सच में अच्छा लड़का लगता है। राजेंद्र बोला क्या तुम मुझसे शादी के बारे में सोच सकती हो? शीतल चुप। फिर बोली पापा फैसला करने से पहले मैं उससे बात जरूर पूछना चाहती हूं। क्या वह मेरी पूरी सच्चाई जानने के बाद भी स्वीकार करेगा? राजेंद्र का जवाब नहीं था। क्योंकि अमन को शीतल का तलाक पता नहीं था।

अगले दिन अमन को घर बुलाया। बेटा आज मैं तुमसे सबसे बड़ी सच्चाई रखने जा रहा हूं। अमन ध्यान से देखने लगा। राजेंद्र बोला मेरी बेटी शीतल की एक शादी पहले हो चुकी है। अमन की मुस्कान गायब हो गई। राजेंद्र ने पूरी कहानी बताई। विक्रम के साथ झगड़ा, मारपीट। शीतल ने मां से फोन किया। राजेंद्र ने तलाक कराया। अमन चुप था। राजेंद्र बोला बेटा मैं तुम्हें यह इसलिए बताई क्योंकि छिपाना नहीं चाहता। शीतल का कोई दोस्त नहीं था। अमन ने कहा शीतल जी के साथ जो हुआ उसमें उनकी क्या गलती थी? कोई गलती नहीं थी। फिर मैं उन्हें अतीत के लिए दोष क्यों दूंगा? राजेंद्र रो पड़ा। बेटा तुमने मेरे दिल का बोझ हल्का कर दिया। अमन बोला अंकल मैं अभी शादी का फैसला नहीं कर सकता। लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि शीतल जी के साथ जो हुआ उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं मानूंगा। राजेंद्र बोला पहले आप दोनों एक दूसरे को समझो।

कमरे के बाहर शीतल खड़ी थी। आंखों में आंसू थे। पहली बार किसी ने अतीत को अंदर से देखा। शीतल कमरे में चली गई। बिस्तर पर बैठ गई। आंसू बहने लगे। लेकिन इस बार दुख के साथ उम्मीद भी।

अगले दिन अमन और शीतल आमने-सामने। शीतल बोली अमन जी पापा ने आपको मेरे बारे में सब बता दिया होगा। अमन बोला हां। शीतल बोली आपको शायद बुरा लगा होगा। अमन बोला ऐसा मत कहिए। शीतल बोली समाज तो ऐसा नहीं सोचता। अमन बोला समाज क्या सोचता है? हमेशा सही नहीं। शीतल बोली अगर कल आपको मेरे अतीत के बारे में गलत कहे तो। अमन बोला मैं उससे पूछूंगा क्या वह वहां मौजूद था? अगर नहीं तो फैसला सुनाने का अधिकार नहीं। शीतल रो पड़ी। आप बहुत अच्छी बातें करते हैं। अमन बोला अच्छी बातें आसान। असली तब होगी जब मुश्किल समय आएगा। शीतल ने खुलकर देखा। अमन बोला मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूं। शीतल बोली क्या? मैं बस सम्मान से जीना चाहती हूं। कोई मुझे पुराने रिश्ते की वजह से कम न समझे। अमन बोला तो फिर आपको ऐसे इंसान की जरूरत जो बराबर समझे। शीतल बोली और अगर वह इंसान गरीब हो तो। अमन बोला गरीब होना अपराध नहीं। लोग कहेंगे करोड़पति की बेटी जूस वाले से शादी। अमन बोला लोग आज कहेंगे कल किसी और के बारे में। जिंदगी लोगों की बातें सुनने के लिए नहीं। शीतल मुस्कुराई।

कुछ दिनों तक मुलाकातें। कभी ऑफिस, कभी घर। अमन ने कभी अतीत नहीं पूछा। हमेशा वर्तमान। एक दिन शीतल ने पूछा आपको अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा किस चीज की कमी महसूस होती है? अमन बोला अपनेपन की। जब बीमार पड़ता हूं खुद दवा लाता हूं। खुश होता हूं खुद ही खुश। परेशानी आए खुद सामना करता हूं। कभी-कभी सोचता हूं काश मेरा भी कोई अपना। शीतल की आंखें नम। आपको अब अकेले रहने की जरूरत नहीं है। अमन ने देखा लेकिन कुछ नहीं कहा। खामोशी में अपनापन था।

समय आगे बढ़ा। राजेंद्र ने अमन को ऑफिस में बुलाया। मैं चाहता हूं कि तुम और शीतल शादी के बारे में सोचो। अमन चुप रहा। अगर मैं शीतल से शादी करूंगा तो आपकी संपत्ति के लिए नहीं। राजेंद्र मुस्कुराया। अमन बोला और अगर कभी लगे कि संपत्ति की वजह से हूं तो खुद पीछे हट जाऊंगा। राजेंद्र की आंखें भर आईं। कमरे का दरवाजा खुला। शीतल खड़ी थी। उसने बातें सुनीं। पापा मुझे सब पता है। राजेंद्र बोला तुम क्या चाहती हो? शीतल बोली मैं अमन को पसंद करती हूं। कमरे में खामोशी छा गई। राजेंद्र रो पड़ा। अमन शीतल की तरफ देखता रहा। शीतल बोली लेकिन मैं चाहती हूं कि शादी से पहले अमन को हर बात पता हो। अमन बोला मुझे छिपाने की जरूरत नहीं। मैं अतीत से नहीं वर्तमान से देखता हूं।

लगभग दोस्तों, राजेंद्र ने दोनों को देखकर मन ही मन धन्यवाद दिया। लेकिन जिंदगी खुशी बिना परीक्षा नहीं। अमन और शीतल के रिश्ते को रिश्तेदारों को पता चला। विरोध शुरू। किसी ने कहा करोड़पति की बेटी और जूस वाला। लोग क्या कहेंगे? किसी ने कहा राजेंद्र जी कहीं यह लड़का संपत्ति के लिए शादी नहीं कर रहा। अमन ने राजेंद्र से कहा अगर मेरी वजह से बेटी को अपमानित होना पड़े तो पीछे हट जाऊंगा। राजेंद्र बोला बेटा तुम पीछे नहीं हटोगे। फैसला मेरी बेटी करेगी। शीतल ने भी सब सुना। पापा मेरी पहली शादी में सबने फैसला किया था। इस बार मैं खुद करूंगी। राजेंद्र बोला तुम्हारा फैसला मेरा फैसला।

उसी रात अमन को फोन आया। अगर शीतल से शादी की तो बहुत पछताना पड़ेगा। अमन ने पूछा आप कौन? जवाब नहीं। फोन कट गया। अमन सोचता रहा। उसने किसी को नहीं बताया। अगले दिन ठेला पर एक आदमी इंतजार कर रहा। आप कौन हैं? मुझे तुमसे बात करनी है। तुम्हें पता है शीतल की पहली शादी क्यों टूटी? अमन बोला हां पता है। आदमी बोला तुम्हें बताया गया सच्चाई नहीं है। अमन चुप। आदमी ने कागज निकाले। अगर शादी की तो बहुत नुकसान। अमन ने कहा अगर सच्चाई है तो राजेंद्र अंकल के सामने बताइए। अर्ध-सच्चाई मत करो। आदमी गया। अमन के मन में सवाल उठा।

उसी दिन राजेंद्र को बताया। राजेंद्र बोला बेटा मुझे शक है विक्रम के परिवार की चाल। अमन ने पूछा क्या विक्रम फिर आना चाहता है? राजेंद्र बोला नहीं। मैं जोखिम नहीं लेना चाहता। वकील से संपर्क किया। तलाक कानूनी था। कोई ऐसी बात नहीं। राजेंद्र राहत की सांस ली। लेकिन अमन से कहा अगर मुश्किल लगे तो पीछे हटो। अमन बोला अंकल मैं मुश्किल से डरकर रिश्ता नहीं तोड़ना चाहता। लेकिन शीतल की वजह से आपको परेशानी नहीं। राजेंद्र बोला तुम्हारी सबसे बड़ी खूबी दूसरों के बारे में सोचना। अमन बोला अंकल मुझे बचपन से समझ आई इंसान के पास पैसा हो या ना हो अगर दिल में साथ देने का हो तो कभी गरीब नहीं होता।

शीतल ने अमन से कहा अगर मुझे देखकर परेशानी हो तो पीछे हट सकती हूं। अमन बोला शीतल जी मैं एक सवाल पूछना चाहता हूं। बोला क्या? आपने मुझे कभी बोझ नहीं समझा? शीतल बोली नहीं। अमन बोला तो फिर मैं आपको बोझ कैसे समझूंगा? शीतल रो पड़ी। अमन बोला आपके साथ जो हुआ अतीत है। मैं भविष्य देखना चाहता हूं। शीतल बोली लेकिन मुझे डर लगता है। अमन बोला डर मुझे भी लगता है। लेकिन अगर दो लोग हाथ पकड़ लें तो डर छोटा हो जाता है। शीतल ने पहली बार अमन का हाथ पकड़ लिया।

राजेंद्र ने शादी की तैयारी शुरू की। बेटा शादी में नए कपड़े, गाड़ी सब मैं दूंगा। अमन बोला अंकल कपड़े दे सकते हैं। लेकिन ज्यादा खर्च मत कीजिए। मैं नहीं चाहता लोग कहें जूस वाला अमीर बन गया। दो अच्छे इंसानों ने चुना। राजेंद्र रो पड़ा। बेटा आज मुझे गर्व है।

शादी की तारीख तय। दो दिन पहले ऑफिस में फाइल गायब। राजेंद्र ने पूछताछ की। कोई नहीं जानता। शाम को रिश्तेदार ने कहा फाइल अमन के हाथ में देखी गई थी। अमन को बुलाया। बेटा क्या तुमने फाइल देखी? अमन बोला जी देखी लेकिन छुआ नहीं। रिश्तेदार बोला यही तो बात है। शादी के बाद संपत्ति का हिस्सा मिल सकता है। अमन का चेहरा उतर गया। शीतल गुस्से में बोली बस कीजिए। अमन के बारे में बोलने से पहले सबूत दीजिए। अमन राजेंद्र की तरफ देखा। आंखों में दुख। अंकल अगर आपको शक है तो आज ही घर से चला जाऊंगा। राजेंद्र बोला मुझे शक नहीं। अमन बोला लेकिन अगर परिवार में दरार पड़े तो रिश्ता नहीं चाहता। शीतल रो पड़ी। अमन बोला मैं नहीं चाहता शादी के बाद हर बात पर सवाल उठे। राजेंद्र बोला तुम कहीं नहीं जाओगे। मैनेजर से पूछा। मैनेजर बोला पुराने रिकॉर्ड रूम में। राजेंद्र गया। फाइल मिली। कर्मचारी ने गलती से रख दी थी। राजेंद्र ने सबके सामने कहा जिस लड़के पर शक किया आज उसी की ईमानदारी से सबकी सोच छटी। रिश्तेदार की तरफ देखकर बोला अमन को मेरी संपत्ति की जरूरत नहीं। वह दिन लिफाफे में रखी रकम लेकर भाग सकता था लेकिन नहीं लिया। कमरे में खामोशी। अमन की आंखें नम। राजेंद्र बोला आज से यह सिर्फ मेरी बेटी का पति नहीं बल्कि मेरा बेटा है। शीतल पिता से लिपट कर रो पड़ी।

दोस्तों, आखिर वह दिन आया जिसका इंतजार सब करते थे। शादी का मंडप सजा। अमन साधारण कपड़ों में। शीतल दुल्हन बनी। अमन की नजर उस पर। शीतल की आंखों में खुशी और आंसू। पहली शादी याद आ रही थी लेकिन आज डर नहीं। फेरे शुरू। अमन और शीतल साथ फेरे ले रहे। सातवें फेरे के बाद अमन ने शीतल की तरफ देखा। मैं आपसे एक वादा करता हूं। मैं आपको कभी किसी चीज के लिए मजबूर नहीं करूंगा। हम दोनों मिलकर जिंदगी के फैसले करेंगे। शीतल रो पड़ी। मैं भी वादा करती हूं हर मुश्किल में साथ रहूंगी। राजेंद्र दूर देख रहा था। खुशी के आंसू। शादी के बाद राजेंद्र ने अमन को बुलाया। बेटा यह कागज लो। अमन बोला यह क्या है? राजेंद्र बोला तुम्हारे नाम कुछ संपत्ति कर रहा हूं। अमन बोला अंकल मुझे जरूरत नहीं। राजेंद्र बोला यह तुम्हें खरीदने के लिए नहीं। पिता की तरफ से बेटे के लिए। अमन ने कहा अंकल मैं वादा करता हूं इस संपत्ति का इस्तेमाल सिर्फ परिवार के लिए नहीं जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी। राजेंद्र ने गले लगाया।

समय बीतता गया। अमन ने जूस का काम बंद नहीं किया। राजेंद्र ने मदद से बड़ी दुकान शुरू करवाई। अमन ने करोड़ों की संपत्ति के बीच खड़े हुए भी घमंड नहीं किया। आज भी सुबह दुकान पर जाता। एक दिन वही बुजुर्ग महिला आई। अमन ने तुरंत उठकर कहा अम्मा आप बैठिए। महिला बोली बेटा अब बड़ी दुकान हो गई। अमन बोला अम्मा जिसने दुआ दी हो उसे भूल कैसे सकता हूं? शीतल मुस्कुराई। अमन आपने वादा निभा दिया। अमन बोला कौन सा? शीतल बोली आपने कहा था पैसा आया तो गरीब बच्चों की मदद। अमन बोला हां और काम शुरू है। अमन ने गरीब बच्चों के लिए शिक्षा केंद्र खुलवाया। राजेंद्र अक्सर जाता।

एक दिन राजेंद्र ने अमन से कहा बेटा जब पहली बार मेरे घर आए थे तो कहा था बिना मेहनत के ज्यादा पैसे लेने की आदत नहीं डालना। आज करोड़ों के बीच खड़े। लेकिन अंदर कोई बदलाव नहीं। अमन बोला अंकल आपने मुझे पैसा नहीं दिया। आपने परिवार दिया। राजेंद्र रो पड़ा। नहीं बेटा परिवार तुमने मुझे दिया है।

दोस्तों इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि जिंदगी में इंसान की कीमत उसकी जेब से नहीं उसके चरित्र से तय होती है। अमन के पास पैसा नहीं था लेकिन ईमानदारी थी। शीतल के पास टूटा अतीत था लेकिन खुश होने की हिम्मत। राजेंद्र के पास करोड़ों। लेकिन बेटी के लिए सिर्फ सम्मान वाला इंसान चाहता था। तीनों को मिला जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। कभी किसी इंसान को कपड़ों, काम या आर्थिक स्थिति देखकर छोटा मत समझिए। हो सकता है जिसके पास आज कुछ नहीं उसके पास कल पूरी दुनिया हो। और जिसके पास आज करोड़ों वह भी जिंदगी में सिर्फ सच्चे इंसान की तलाश में हो। पैसा अमीर बना सकता है लेकिन संस्कार ही बड़ा इंसान बनाते हैं। रिश्ते दौलत से नहीं भरोसे से टिकते हैं। और सच्चा जीवन साथी वही है जो आपके अच्छे समय में नहीं बल्कि बुरे समय में हाथ पकड़ कर कहे मैं तुम्हारे साथ हूं।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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