दो औरतों ने पुलिस दरोगा को सिखाया सबक/पुलिस दरोगा की तड़प तड़प कर हुई मौ#त/ – News

दो औरतों ने पुलिस दरोगा को सिखाया सबक/पुलिस दरोगा की तड़प तड़प कर हुई मौ#त/

दो औरतों ने पुलिस दरोगा को सिखाया सबक/पुलिस दरोगा की तड़प तड़प कर हुई मौ#त/

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# मेरठ के उलझन गांव में निलंबित दरोगा की हत्या: मजदूरी के लालच से शुरू हुई त्रासदी की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के उलझन गांव में मार्च-अप्रैल 2026 के बीच जो घटनाक्रम चला, वह गरीबी, सत्ता के दुरुपयोग और यौन हिंसा के सबसे कठोर रूपों में से एक बनकर सामने आया। केंद्र में एक सब्जी विक्रेता गोविंद सिंह का परिवार था और एक निलंबित पुलिसकर्मी रणवीर सिंह। आरोप है कि रणवीर सिंह ने मजदूरी का लालच देकर गोविंद की पत्नी ममता देवी और बहन पूनम का यौन शोषण किया, धमकी दी और एक लड़की की आपत्तिजनक वीडियो बनाकर पूरे परिवार को चुप कराए रखा। जब पूनम की गर्भावस्था का पता चला, तो परिवार ने रणवीर सिंह को घर बुलाया और उसकी हत्या कर दी। इसके बाद तीनों ने स्वयं पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

यह लेख उसी प्रकरण का विस्तृत ब्योरा है। उद्देश्य सनसनी नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि गांव में कानून का पुराना चेहरा, जब निलंबित होकर भी दबदबा रखता है, तो गरीब परिवार कितनी आसानी से शिकार बन सकते हैं—और अंत में हिंसा कैसे हिंसा को जन्म देती है।

## उलझन का वह घर, जहां रोजी-रोटी सबसे बड़ी मजबूरी थी

गोविंद सिंह गांव में सब्जी बेचकर परिवार चलाते थे। सुबह आठ बजे निकलते, शाम चार-पांच बजे लौटते। पत्नी ममता देवी घर संभालती थीं। छोटी बहन पूनम ने दो वर्ष पहले बारहवीं पास की थी, लेकिन गरीबी के कारण आगे पढ़ाई नहीं हो सकी। वे घर पर सिलाई-कढ़ाई सीख रही थीं। गोविंद की तबीयत खराब रहने लगी तो सब्जी का काम भी छूटने लगा। ममता ने अस्पताल चलने को कहा, गोविंद ने मना कर दिया।

घर में कमाई एक ही व्यक्ति की थी और पूनम की शादी भी करनी थी। ममता और पूनम दोनों मजदूरी पर उतर आईं। वे रमेश जमींदार के खेत में काम करने लगीं। यहीं से रास्ता रणवीर सिंह के खेत की ओर मुड़ा।

## निलंबित दरोगा, बारह एकड़ जमीन और पुरानी आदत

रणवीर सिंह कभी पुलिस दरोगा थे। महिलाओं में दिलचस्पी और रिश्वत के आरोप में उन्हें निलंबित किया गया था। गांव में रहकर खेती करते थे। बारह एकड़ जमीन और पैसा दोनों थे। निलंबन के बावजूद थाने में रसूख होने का दावा वे स्वयं करते रहे।

एक दिन ममता और पूनम खेत जाते देखकर उनकी नियत खराब हुई। शाम को वे गोविंद के घर पहुंचे। कहा कि रमेश कम मजदूरी देता है, वे दोगुना देंगे। बीस दिन काम करो, पैसे अभी देने को तैयार हैं। गरीबी में फंसा गोविंद मान गया। ममता और पूनम भी पैसों के लालच में तैयार हो गईं।

5 मार्च 2026 की सुबह दोनों दरांती और पानी की बोतल लेकर रणवीर के खेत पहुंचीं।

## 5 मार्च: खेत में अकेली ममता और पहला हमला

दो घंटे काम के बाद पानी खत्म हो गया। ट्यूबवेल के पास गंदा पानी था। पूनम गांव से पानी लेने चली गईं। खेत में दूर तक कोई किसान नहीं था। आरोप है कि रणवीर सिंह ट्यूबवेल वाले कमरे से दरांती लाए, ममता की गर्दन पर रखकर धमकी दी कि चीखीं तो गला काट देंगे। उन्हें पास के खेत में ले गए, हाथ-पैर बांधे, मुंह में कपड़ा ठूंसा और बलात्कार किया। बाद में धमकी दी कि पति को झूठे मामले में फंसाकर जेल भेज सकते हैं—निलंबित होने के बावजूद थाने में चलती है।

ममता चुप रहीं। पूनम पानी लेकर लौटीं तो भाभी ने कुछ नहीं बताया। रात भर ममता ने खाना नहीं खाया, नींद नहीं आई। पति के पूछने पर बहाना बना दिया। अगले दिन तबीयत खराब बताकर खेत नहीं गईं। गोविंद ने पूनम को भी रोक दिया।

रणवीर ने गोविंद को फोन किया। शाम को घर जाकर दबाव डाला कि कल दोनों आएं, नहीं तो मजदूरी काट लेंगे। गोविंद ने कल भेजने का वादा कर दिया। रणवीर ने साफ कहा कि गोविंद की जरूरत नहीं, तबीयत खराब रहती है। मतलब साफ था—वे पुरुष नहीं, दोनों महिलाओं को चाहते थे।

## अगले दिन: पूनम अकेली गईं और वही चक्र दोहराया गया

ममता फिर मना कर गईं। गोविंद नाराज हुए कि काम हाथ में लेकर पीछे क्यों हट रही हो। उन्होंने बहन से कहा कि अकेली चली जाओ। पूनम दरांती लेकर खेत पहुंच गईं।

रणवीर मोटरसाइकिल से आए। पूछा ममता क्यों नहीं आई। फिर मौका देखकर वही तरीका अपनाया—दरांती गले पर, खेत के कमरे की ओर, हाथ-पैर बांधना, मुंह बंद करना और बलात्कार। पूनम हाथ जोड़ती रहीं, कोई बात नहीं सुनी गई।

इस बार रणवीर यहीं नहीं रुके। उन्होंने पूनम की आपत्तिजनक वीडियो बनाई और धमकी दी कि बात किसी से कही तो वीडियो इंटरनेट पर डाल देंगे, मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेंगे। पूनम डर गईं, वादा किया कि नहीं बताएंगी। शाम तक काम करवाया, फिर मोटरसाइकिल पर गांव छोड़ आए।

घर पर गोविंद अभी नहीं लौटे थे। ममता अकेली थीं। रणवीर अंदर घुसे, पूनम की वीडियो ममता को दिखाई और कहा—कल दोनों आओ, नहीं तो वीडियो वायरल कर दूंगा। पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। दोनों महिलाएं दब गईं।

## बीस-पच्चीस दिन का सिलसिला

10 मार्च को ममता ने पति से कहा तबीयत ठीक है, खेत जाएंगी। गोविंद खुश हुए कि कमाई फिर शुरू होगी। खेत पर रणवीर शराब पी रहे थे। पूनम को फिर साथ ले गए। ममता ने बहन से कहा—वीडियो उनके पास है, मना मत करो। इसके बाद जब मन करता, रणवीर पूनम या ममता के साथ समय बिताते। मजदूरी का आवरण बना रहा, असल में यह डर और ब्लैकमेल का चक्र था।

गोविंद रोज सब्जी बेचने जाते रहे। घर की सच्चाई से अनजान।

## 6 अप्रैल: क्लिनिक की रिपोर्ट और टूटा संकोच

6 अप्रैल 2026 की सुबह पूनम को तेज उल्टी हुई। गोविंद घर पर नहीं थे। ममता ऑटो से छोटी क्लिनिक ले गईं। महिला डॉक्टर ने बताया—पूनम करीब एक महीने की गर्भवती हैं। ममता के पैरों तले जमीन खिसक गई। घर आकर उन्होंने बहन से कहा कि भाई को पता चला तो दोनों को जान से मार सकता है। पूनम ने कहा भाई ऐसा नहीं, बताना ही ठीक है।

शाम सात बजे गोविंद लौटे। ममता ने पूरी कहानी रख दी—खेत का पहला दिन, धमकी, पूनम के साथ हुआ जुर्म, वीडियो, बार-बार बुलावा। गोविंद गुस्से में पागल हो गए, लाठी उठाई। ममता ने रोका—सीधे कुछ नहीं बिगाड़ सकते, दिमाग से काम लो।

योजना बनी कि ममता फोन कर रणवीर को रात घर बुलाएंगी, बाकी गोविंद संभालेंगे। पूनम भी मान गईं।

## उसी रात: घर में बुलावा और हत्या

रात साढ़े आठ बजे ममता ने रणवीर को फोन किया। कहा पति घर पर नहीं, दोनों अकेली हैं, समय बिताना चाहती हैं, आ जाओ। रणवीर खुश होकर निकले। साढ़े नौ बजे दस्तक दी। ममता ने दरवाजा खोला, अंदर आने दिया और तुरंत बंद कर दिया।

अंदर गोविंद गंडासे के साथ खड़े थे। सिर पर वार हुए, रणवीर गिर गए। फिर और वार हुए। वे बेहोश हो गए। इसके बाद परिवार ने चाकू से हमला जारी रखा। पूनम ने उनके गुप्तांग काट दिए। रणवीर सिंह मौके पर मारे गए।

गोविंद ने कहा—आज नहीं कल पकड़े जाएंगे, खुद थाने चलकर समर्पण कर देते हैं। तीनों रात में नजदीकी थाने पहुंचे। दरोगा प्रकाश से गोविंद ने कहा—गांव का निलंबित दरोगा है, लाश हमारे घर पड़ी है। प्रकाश हक्के-बक्के रह गए। टीम लेकर घर आए, शव कब्जे में लिया, पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

गोविंद ने चीख-चीखकर पत्नी और बहन की पूरी व्यथा बताई। पुलिस ने तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। सजा अब अदालत तय करेगी।

## कानून, बदला और अधूरे सवाल

यह मामला दो सच्चाइयों को एक साथ रखता है। एक तरफ निलंबित पुलिसकर्मी द्वारा गरीब महिलाओं का यौन शोषण, ब्लैकमेल और गर्भावस्था तक पहुंचा जुर्म है। मजदूरी का लालच देकर परिवार को अपने खेत खींचना, एक-एक कर दोनों को निशाना बनाना, वीडियो से मुंह बंद कराना—यह सत्ता का अवशेष था, पद गया लेकिन डर बाकी था।

दूसरी तरफ परिवार का जवाब भी कानून के बाहर चला गया। पीड़ितों का गुस्सा समझ में आता है। लेकिन घर में बुलाकर हत्या और शव के साथ हुई क्रूरता अलग अपराध है। अदालत को दोनों धाराएं देखनी होंगी—पहले हुए बलात्कार और धमकियों के सबूत, और बाद में हुई हत्या की योजना।

पूनम की गर्भावस्था मेडिकल और कानूनी दोनों स्तर पर जटिल है। ममता स्वयं भी पीड़िता हैं। गोविंद कमाने वाला व्यक्ति था, जो महीनों अनजान रहा क्योंकि घर की स्त्रियां डर और शर्म के कारण चुप रहीं। गांव में ऐसी चुप्पी आम है—थाने वाले से शिकायत करना खुद को और जोखिम में डालना माना जाता है, खासकर जब आरोपी कभी उसी व्यवस्था का हिस्सा रहा हो।

मूल कथा के अंत में दर्शकों से पूछा गया था कि परिवार ने जो किया, सही था या गलत। आसान जवाब नहीं है। बलात्कार गलत था। ब्लैकमेल गलत था। हत्या भी कानून की नजर में गलत है। तीनों सच्चाइयां एक साथ चल सकती हैं। न्याय तभी पूरा होगा जब पहले अपराध की जांच भी उतनी गंभीरता से हो जितनी लाश की हुई।

उलझन गांव की यह घटना सिर्फ एक परिवार की तबाही नहीं। यह उस व्यवस्था की याद दिलाती है जहां निलंबन का मतलब हमेशा शक्ति का अंत नहीं होता, और गरीबी का मतलब अक्सर चुप रहना होता है—जब तक कोई शरीर गर्भ से या खून से सच बोलने न लगे। जय हिंद।

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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