पुलिस दरोगा ने पत्नी को 4 गोलियां मा*री/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
पुलिस दरोगा ने पत्नी को 4 गोलियां मा*री/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/
पाप का अंत: एक भ्रष्ट दरोगा और उसकी बेवफा पत्नी की कहानी
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में फरीदपुर नाम का एक शहर बसा है। इसी शहर की एक शांत सी कॉलोनी, जिसे प्रवेश कॉलोनी कहा जाता था, वहां एक ऐसा परिवार रहता था जिसकी कहानी बाहर से देखने में जितनी सामान्य लगती थी, अंदर से उतनी ही खोखली और पापों से भरी थी। इस कहानी के मुख्य पात्र हैं शेखर कुमार और उसकी पत्नी सीमा देवी। शेखर कुमार नजदीकी पुलिस स्टेशन में एक दरोगा के पद पर तैनात था। पुलिस की वर्दी का काम तो जनता की सेवा करना होता है, लेकिन शेखर के लिए उसकी वर्दी सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने का एक जरिया थी।
शेखर एक ऐसा पुलिसवाला था जिसकी आंखों पर भ्रष्टाचार और पैसों की हवस की पट्टी बंधी हुई थी। वह गरीब और बेबस लोगों से रिश्वत ऐंठता, उन्हें डराता-धमकाता और अपनी जेबें भरता रहता था। पैसा कमाने की धुन उस पर इस कदर सवार थी कि वह कई-कई दिनों तक अपने घर नहीं जाता था। न उसे अपने घर की कोई फिक्र थी और न ही अपनी उस खूबसूरत पत्नी सीमा देवी की, जो घर की चारदीवारी में बंद होकर उसके इंतजार में अपनी जिंदगी काट रही थी। सीमा एक बेहद जवान और आकर्षक महिला थी। वह पूरा दिन घर के कामकाज में लगी रहती, लेकिन जब भी शेखर घर आता, तो वह अक्सर शराब के नशे में धुत होता और सीमा से बात किए बिना ही सो जाता।
सीमा अंदर ही अंदर घुट रही थी। उसे अपने पति से न तो प्यार मिलता था, न समय और न ही सम्मान। धीरे-धीरे सीमा के मन में यह शक पनपने लगा कि उसका पति इतने दिनों तक घर नहीं आता, जरूर उसका बाहर किसी दूसरी औरत के साथ चक्कर है। इन नकारात्मक विचारों ने सीमा को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसने मन ही मन फैसला कर लिया कि अगर उसका पति उसके साथ ऐसा कर सकता है, तो वह क्यों अपने अकेलेपन में घुट-घुट कर मरे? उसने ठान लिया कि वह अपनी जिंदगी अपनी मर्जी से जिएगी और अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए किसी हैंडसम नौजवान लड़के की तलाश करेगी।

समय बीतता गया। 10 मई 2026 की सुबह, करीब आठ बज रहे थे। शेखर घर पर ही था। सीमा ने एक चाल चली और शेखर से कहा, “मेरा वजन आजकल काफी बढ़ गया है। मुझे इसे कम करने के लिए जिम ज्वाइन करना है।” शेखर, जिसे सिर्फ अपने पैसों से प्यार था, उसने चिढ़ते हुए कहा, “जिम यहां से तीन किलोमीटर दूर है। रोज पैदल जाना और पैदल ही आना। तेरा वजन अपने आप कम हो जाएगा।” सीमा ने तुरंत हामी भर दी, क्योंकि उसका मकसद जिम जाकर वजन कम करना नहीं, बल्कि घर से बाहर निकलकर किसी नए रिश्ते की तलाश करना था।
अगले दिन सुबह, शेखर के ड्यूटी पर जाते ही सीमा घर से निकल पड़ी। उसने कुछ दूर तक पैदल चलने का नाटक किया, लेकिन वह जानती थी कि उसे कोई ऐसा जरिया चाहिए जो उसे उसके असली मकसद तक पहुंचा सके। वह थकने का बहाना करके रास्ते में बैठ गई और एक ऑटो रिक्शा का इंतजार करने लगी। करीब बीस मिनट बाद एक ऑटो वहां आकर रुका। ऑटो चला रहा लड़का छह फीट लंबा, हट्टा-कट्टा और बेहद हैंडसम था। उसका नाम तरुण था।
तरुण की नजर जैसे ही सीमा की खूबसूरती और उसके तराशे हुए बदन पर पड़ी, उसकी नियत डोल गई। सीमा ने भी जब तरुण की कसरती कद-काठी देखी, तो उसे लगा कि उसकी तलाश खत्म हो गई है। सीमा ने ऑटो में बैठकर तरुण से बातचीत शुरू कर दी। दोनों के बीच मीठी-मीठी बातें होने लगीं। सीमा ने बड़ी चालाकी से तरुण का नंबर ले लिया और उसे अपना नंबर दे दिया। उसने तरुण से कहा कि वह अब रोज उसी के ऑटो में जिम जाएगी। तरुण भी इस खूबसूरत महिला के करीब आने का मौका नहीं छोड़ना चाहता था।
सीमा जिम पहुंची, लेकिन उसका मन वहां नहीं लगा। आधे घंटे में ही वह बाहर आ गई, जहां तरुण उसका इंतजार कर रहा था। रास्ते में सीमा ने तरुण को अपने अकेलेपन की कहानी सुनाई। उसने बताया कि उसका पति एक पुलिस दरोगा है, लेकिन वह कभी घर नहीं आता और न ही उसे प्यार करता है। तरुण सीमा के इशारों को समझ गया। सीमा ने तरुण को चाय पीने के बहाने अपने घर बुला लिया।
घर पहुंचते ही सीमा के फोन की घंटी बजी। फोन शेखर का था। उसने बताया कि वह किसी जरूरी काम से दो दिन के लिए शहर से बाहर जा रहा है और घर नहीं आएगा। सीमा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने तुरंत अलमारी से दो हजार रुपये निकाले और तरुण के हाथ में रख दिए। “आज रात 10 बजे तुम मेरे घर आओगे,” सीमा ने कहा। लेकिन तरुण की मौजूदगी और अपने घर के खालीपन को देखकर सीमा का सब्र टूट गया। उसने दरवाजा अंदर से बंद किया और तरुण को दिन के उजाले में ही अपने बेडरूम में ले गई। उस दिन दोनों ने अपनी-अपनी हवस और इच्छाओं को पूरी तरह से शांत किया।
सीमा देवी ने अब तरुण को अपना पक्का प्रेमी बना लिया था। वह रोज उसके साथ जिम जाने के बहाने मिलती और घर लाकर उसके साथ रंगरलियां मनाती। लेकिन सीमा की प्यास इतने पर ही नहीं बुझी। कुछ दिनों बाद एक और नया किरदार इस कहानी में जुड़ गया।
25 मई 2026 की सुबह। घर पर दूध देने वाला लड़का सचिन आया और बोला कि उसे कहीं नौकरी मिल गई है, इसलिए वह कल से दूध देने नहीं आ पाएगा। सीमा ने यह बात तरुण को बताई। तरुण ने अपने एक दोस्त रजत का नाम सुझाया जो दूध बेचने का काम करता था। रजत देखने में तरुण से भी ज्यादा आकर्षक और महिलाओं को अपने जाल में फंसाने में माहिर था।
अगले दिन जब रजत सीमा के घर दूध देने आया, तो दोनों एक-दूसरे को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। सीमा ने अपनी पुरानी चाल चली। उसने रजत को घर के अंदर बुलाया, उससे बातें कीं और उसका नंबर ले लिया। रजत भी सीमा जैसी खूबसूरत और जवान महिला को हासिल करने का मन बना चुका था। धीरे-धीरे रजत भी सीमा के प्रेम जाल में पूरी तरह से फंस गया।
अब सीमा के जीवन में दो-दो प्रेमी थे। 6 जून 2026 की रात शेखर घर नहीं आया। सीमा ने इस मौके का फायदा उठाते हुए रजत को रात के समय अपने घर बुला लिया। रजत ने भी सीमा की जिस्मानी जरूरतें पूरी कीं और सुबह होने से पहले वहां से चला गया। अब सीमा अपनी मर्जी की मालकिन बन चुकी थी। जब मन करता, वह तरुण को घर बुलाती और जब मन करता, रजत के साथ रातें गुजारती।
लेकिन सीमा का यह पाप घर की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं रहा। 30 जून 2026 को जब शेखर घर पर था, तो सीमा ने तरुण को घर बुलाने के बजाय एक नई योजना बनाई। उसने तरुण को फोन करके कहा कि वह घर से कुछ दूर ऑटो लेकर खड़ा रहे। सीमा जिम जाने के बहाने घर से निकली और तरुण के ऑटो में बैठकर एक होटल में चली गई। वहां उन्होंने कमरा बुक किया और अपनी हवस मिटाई। अब सीमा का यह नया अड्डा बन गया था। वह कभी तरुण तो कभी रजत को होटल ले जाती और उन्हें पैसे देकर उनके साथ अवैध संबंध बनाती रही।
पाप का घड़ा जब भरता है, तो उसे फूटने में देर नहीं लगती। 20 जुलाई 2026 की सुबह, सीमा घर में शेखर के लिए चाय बना रही थी कि अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। उसे चक्कर आने लगे और उल्टियां होने लगीं। शेखर घबरा गया और तुरंत उसे पास के अस्पताल ले गया।
महिला डॉक्टर ने सीमा का चेकअप किया और थोड़ी देर बाद जब उसने शेखर को जो बताया, उसे सुनकर शेखर के पैरों तले जमीन खिसक गई। “बधाई हो, आपकी पत्नी एक महीने की गर्भवती है,” डॉक्टर ने कहा।
शेखर का खून सूख गया। उसने हकलाते हुए डॉक्टर से कहा, “ये… ये कैसे हो सकता है डॉक्टर? छह महीने पहले एक एक्सीडेंट में मेरे प्राइवेट पार्ट पर गहरी चोट लगी थी, जिसके कारण मैं शारीरिक संबंध बनाने के लायक नहीं रहा। मैं पिछले छह महीनों से अपनी पत्नी के करीब नहीं गया, तो वह प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है?”
डॉक्टर ने साफ कह दिया, “यह आपका निजी मामला है, आप अपनी पत्नी से पूछिए।”
शेखर का दिमाग सुन्न पड़ चुका था। वह सीमा को लेकर घर लौटा। घर पहुंचते ही शेखर का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा। उसने सीमा को बालों से पकड़कर जमीन पर गिरा दिया और चिल्लाते हुए पूछा, “बता, तू किस-किस के साथ अपना मुंह काला करती रही है? मेरे पीठ पीछे तूने क्या-क्या गुल खिलाए हैं?”
सीमा डर के मारे कांपने लगी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। शेखर का गुस्सा अब बेकाबू हो चुका था। उसने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकाली और सीमा के माथे पर तान दी। मौत को सामने देखकर सीमा टूट गई। उसने रोते हुए अपना सारा सच उगल दिया। उसने तरुण और रजत के साथ अपने जिस्मानी रिश्तों, होटलों में बिताई रातों और उन्हें दिए गए पैसों की पूरी कहानी बयां कर दी।
एक पति के लिए अपनी पत्नी के मुंह से ऐसे धोखे की बात सुनना मौत से कम नहीं होता, और वह भी शेखर जैसा क्रूर दरोगा। शेखर के सिर पर खून सवार हो गया। उसने एक पल की भी देरी नहीं की और अपनी रिवॉल्वर का ट्रिगर दबा दिया। एक, दो, तीन, चार… शेखर ने सीमा के सीने और पेट में चार गोलियां उतार दीं। गोलियों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा। सीमा खून से लथपथ होकर वहीं ढेर हो गई। उसने तड़पते हुए दम तोड़ दिया।
गोलियों की आवाज सुनकर पड़ोसी तुरंत शेखर के घर की तरफ दौड़े। जब उन्होंने घर के अंदर का नजारा देखा, तो उनके होश उड़ गए। सामने सीमा की खून से सनी लाश पड़ी थी और शेखर हाथ में रिवॉल्वर लिए बुत की तरह खड़ा था। पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को फोन किया।
कुछ ही देर में पुलिस की गाड़ियां वहां पहुंच गईं। पुलिस ने शेखर को उसी वक्त गिरफ्तार कर लिया और सीमा की लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जब थाने में शेखर से पूछताछ हुई, तो उसने बिना किसी डर के अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी दो लड़कों के साथ मिलकर उसे धोखा दे रही थी और इस बेइज्जती का बदला लेने के लिए उसने उसकी हत्या कर दी।
पुलिस ने शेखर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। यह तो भविष्य में तय होगा कि कानून उसे क्या सजा देगा, लेकिन इस पूरी घटना ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। शेखर कुमार, जिसने अपनी पूरी जिंदगी भ्रष्ट तरीके से पैसे कमाने में निकाल दी, अंत में अपने ही घर की बर्बादी का कारण बना। उसने पैसों के लिए अपना परिवार और पत्नी की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा सीमा की बेवफाई के रूप में सामने आया। वहीं सीमा, जिसने अकेलेपन से बचने के लिए पाप का रास्ता चुना, उसे अपने गुनाहों की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
यह कहानी हमें सिखाती है कि रिश्ते सिर्फ नाम के नहीं होते, उन्हें समय, प्यार और विश्वास से सींचना पड़ता है। जब इंसान लालच, हवस और पाप की दुनिया में कदम रखता है, तो उसका अंत हमेशा खौफनाक और दर्दनाक ही होता है।