भाई ने बहन का फ़ायदा उठाया और इसका नतीजा बहुत बुरा हुआ। जब बहन पु@लिस थाने पहुँची… – News

भाई ने बहन का फ़ायदा उठाया और इसका नतीजा बहुत बुरा हुआ। जब बहन पु@लिस थाने पहुँची…

भाई ने बहन का फ़ायदा उठाया और इसका नतीजा बहुत बुरा हुआ। जब बहन पु@लिस थाने पहुँची…

नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा।
आज हमारी इस घटना की शुरुआत होती है राजस्थान के कोटा शहर से।
इसी कोटा शहर के अंदर एक मंदुगढ़ मोहल्ला होता है।
इसी मोहल्ले में रहने वाली मंजू देवी जिसकी उम्र 17 साल के आसपास की होती है।
मंजू देखने में काफी खूबसूरत और जवान लड़की होती है।
वह अपनी मां कांता के साथ घर में अकेली रहा करती थी।

एक साल पहले मंजू का पिता किसी हादसे का शिकार हो जाता है।
जिसके कारण मंजू के पिता की मौत हो जाती है।
मंजू के घर में दो चार पशु भी होते हैं।
जिनमें एक दो भैंस होती हैं।
अब मंजू और मंजू की मां कांता हर रोज उन भैंसों के लिए खेत में चारा लेने के लिए चली जाया करती थी।

और फिर चारा काटने के बाद घर पर आ जाया करती थी।
उन भैंसों को चारा खिलाकर जो भी उनसे दूध निकाला जाता था उसको दूध की डेयरी में बेचकर कुछ थोड़े बहुत पैसे आ जाया करते थे।
जिससे इनके घर का गुजारा चला करता था।
सब कुछ अच्छा चल रहा होता है।

मंजू संस्कारी लड़की होती है।
अपनी मां का भी ख्याल रखती है।
घर के छोटे-मोटे कामकाज भी करती रहती है।
सारी जिम्मेदारी जो है मंजू और मंजू की मां कांता के कंधों पर आ जाती है।
जब से मंजू का पिता गुजरा था और इस तरह से जीवन का सफर चल रहा होता है।

कुछ दिनों के बाद मंजू की मां कांता थोड़ी बीमार पड़ जाती है।
अब जैसे ही मंजू की मां कांत बीमार पड़ जाती है तो अब मंजू के कंधों पर और भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
वह सारा दिन घर का कामकाज किया करती थी।
पशुओं के लिए खेत से चारा भी लाया करती थी।
इसी दौरान कांता देवी सोचने लगती है कि जवान बेटी खेत में चली जाती है।

कहीं ऊंचनीच हो गई तो गांव में बदनामी हो जाएगी और इस वजह से मुझे कुछ और सोचना चाहिए।
उसी समय कांता देवी रवि के पास फोन कॉल करती है।
रवि को कहती है कि तुम्हारी बहन खेत में अकेली जाती है।
कहीं ऊंचनीच हो गई तो मैं किसी काम की नहीं रहूंगी।
तुम रवि ऐसा करो अपने माता-पिता से पूछकर मेरे घर पर 8-10 दिनों के लिए आ जाओ।

जब तक मैं ठीक हो जाऊंगी तब फिर यहां से चले जाना।
रवि 1920 साल का हैंडसम नौजवान लड़का होता है जो कि मंजू के चाचा का लड़का होता है।
रवि अपने माता-पिता से पूछकर फिर कांता देवी के घर पर आ जाता है।
कांता देवी से मिलता है और कांता चाची को कहने लगता है कि चाची कोई बात नहीं मैं घर में आ गया हूं।
मैं अब सब कुछ संभालूंगा। तुम बस अपनी सेहत का ख्याल रखो।

और इस तरह से अब जो लड़का रवि होता है अपनी बहन मंजू के साथ खेत में हर रोज चारा लेने के लिए चला जाया करता था।
तीन दिन तक यह लगातार चलता रहता है।
उसका भाई मंजू के साथ जो है हर रोज खेत में जाया करता था और चारा काटकर खेत से लौट आया करता था।
जैसे ही चौथा दिन होता है तो सुबह के 10:00 बजे के आसपास मंजू अपने भाई रवि के साथ खेत में चली जाती है चारा काटने के लिए।

दोनों बहन भाई बातें करते हुए हंसते मुस्कुराते हुए खेत में जाते हैं और फिर इसके बाद चारा काटने लगते हैं।
जैसे दोनों चारा काट रहे होते हैं तो उसी दौरान मंजू के ब्लाउज में कहीं से कोई कीड़ा चढ़ जाता है और जैसे ही कीड़ा चढ़ता है तो उसको काफी परेशानी भी होती है।
वो कीड़ा उसको काट भी लेता है और मंजू डर जाती है।
घबराहट के मारे मंजू उसी समय जो है चारा छोड़ देती है और अपना ब्लाउज जो है यानी कि अपने जो ऊपर के कपड़े हैं वह हटा देती है अपने बदन से।

जैसे ही अपने बदन से ऊपर के कपड़े हटाती है तो फिर उसके भाई रवि की नजर उस पर पड़ जाती है।
मंजू जवान थी, खूबसूरत थी और इसके बाद रवि जब उसको ऐसी स्थिति में देख लेता है तो रवि के मन में गया गलत ख्याल आने लगते हैं।
और इसके बाद रवि सोचने पर मजबूर हो जाता है कि खेत में कोई भी नहीं है।
क्यों ना इस बात का फायदा ही उठा लिया जाए और इस तरह से रवि अपनी बहन मंजू के साथ छेड़खानी शुरू कर देता है।
उसकी बहन इस बात का विरोध करती है।

अब रवि देखता है कि पास में ही ईख का खेत होता है और रवि फिर अपनी बहन मंजू की बाजू पकड़ कर उसको घसीटते हुए उस ईख के खेत में ले जाता है।
ईख के खेत में ले जाने के बाद उसके साथ वह दुष्कर्म करने लगता है।
उसके साथ गलत रिश्ते कायम करने लगता है।
रवि तब तक उसके साथ गलत रिश्ते बनाता है जब तक उसकी संतुष्टि नहीं हो जाती है।
आज इस खेत में कोई भी नहीं होता है।

वह दो-तीन बार उसके साथ गलत रिश्ते बना लेता है और यह सब काम करने के बाद इस खेत से बाहर निकलता है और अपनी बहन मंजू को धमकी देता है।
उसको कहता है कि अगर चाची कांता देवी को तुमने यह सब बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा।
तुम्हारी मां को भी जान से मार दूंगा।
और इस तरह से मंजू घबरा जाती है।
मंजू डर जाती है।

इसके बाद यह दोनों बहन भाई चारा काटने के बाद चारे को लेकर फिर घर पर आ जाते हैं।
लेकिन आज के समय में मंजू अपनी मां कांता देवी को इस बारे में कोई बात भी नहीं बताती है।
और इस तरह से इस लड़के रवि की हद और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
अब तो मंजू देवी और साथ में उसका भाई हर रोज ये दोनों ही खेत में चला जाया करते थे।
जब भी खेत में कोई नहीं होता था तब इसका भाई रवि मंजू का फायदा उठा लिया करता था।

यह खेल लगभग चारप दिनों तक चलता रहता है।
मंजू अब सोचने लगती है कि अगर इसका भाई यहां पर रहता है तो यह हर रोज इसके साथ जबरदस्ती किया करेगा।
अब मंजू कुछ और सोचने पर मजबूर हो जाती है।
आखिरकार शाम के 7:00 बजे के आसपास उसका भाई रवि किसी जरूरी काम से बाहर चला जाता है।
तभी मंजू अपनी मां कांता देवी से बातचीत करने लगती है।

बातों ही बातों में वह अपनी मां का जो है कंधा पकड़ कर रोना शुरू कर देती है।
गिड़गिड़ाना शुरू कर देती है।
कांता देवी उसको पुचकारते हुए पूछने लगती है कि बेटी आखिर बात क्या है?
पूरी बात मुझे बताओ।
इसके बाद जो मंजू होती है, वह अपनी मां कांता देवी को कहने लगती है कि रवि हर रोज खेत में जाने के बाद मेरे साथ गलत काम करता है।

कांता जैसे ही अपनी बेटी की इन बातों को सुनती है तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है।
आखिरकार मंजू अपनी मां कांता देवी को उस घटना की पूरी कहानी, पूरी दास्ता बयां कर देती है।
इसके बाद कांता देवी भी गुस्से में पागल हो जाती है।
अब कांता देवी अपनी बेटी मंजू के साथ मिलकर कोई योजना बना लेती है।

रात के 9:00 बजे के आसपास रवि अपनी चाची कांता देवी के घर में आता है।
इसके बाद तीनों मिल बैठकर खाना खाते हैं।
लेकिन आज रवि को इस बात की जरा सी भी भनक नहीं होती है कि आखिर रात के समय उसके साथ क्या होने वाला है।
जैसे ही रात के 10:00 बजते हैं तो फिर कांता देवी अपनी बेटी मंजू को लेकर एक कमरे में जाकर लेट जाती है और दूसरे कमरे में जाकर रवि लेट जाता है।

आखिरकार रात के 11:00 बजे के आसपास कांता देवी अपनी रसोई में जाती है।
वहां से दो धार चाकू उठाकर लाती है।
अपनी बेटी मंजू को समझाती है और फिर मंजू और कांता देवी अपने भतीजे रवि के कमरे में चली जाते हैं।
रवि के कमरे में जाने के बाद कांता देवी एक तकिया उठाती है और रवि के मुंह पर रख लेती है।

देखते ही देखते मंजू अपने भाई रवि के पेट में तीन-चार बार चाकू से वार कर देती है और इस तरह से दोस्तों कांता देवी भी लगातार उसकी छाती पर उसके पेट में चाकू के साथ वार करती रहती है।
इतना ही नहीं कांता देवी उसकी गर्दन पर भी कई वार कर देती है।
और इसके बाद तो मंजू अपनी हद से गुजर जाती है।
मंजू रवि का गुप्तांग भी काट देती है।

यह सब करने के बाद जब वहां पर रवि अपना दम तोड़ देता है तो फिर कांता देवी अपनी बेटी मंजू को लेकर नजदीकी पुलिस स्टेशन के अंदर चली जाती है।
रात के 12:00 बजे के आसपास का वक्त होता है।
पुलिस स्टेशन के अंदर कई कांस्टेबल भी बैठे होते हैं।
और जब कास्टेबल प्रकाश दत्त की नजर इस महिला कांता पर पड़ती है और उसकी बेटी मंजू पर पड़ती है तो इन दोनों को ऐसी हालत में देखकर वो कांस्टेबल सत्य में पड़ जाता है।

अब वो पुलिस कांस्टेबल इन दोनों के पास आता है और पूछने लगता है कि यह तुम्हारे हाथों में खून कैसा लगा हुआ है?
इसके बाद कांता और मंजू दोनों अपनी पूरी कहानी, अपनी पूरी घटना की दास्ता को पुलिस के सामने उजागर कर देती है और कहने लगती है कि मैंने आज रात जो है एक राक्षस का वध किया है।
उसकी लाश मेरे घर में पड़ी है और हम दोनों ने उसका जब कत्ल किया कत्ल करने के बाद हम पुलिस स्टेशन में पहुंच चुके हैं।

हम अपने आप को सरेंडर करते हैं।
और इस तरह से पुलिस फिर घर पर जाती है।
घर पर देखती है कि रवि पर वहां रवि की वहां पर लाश पड़ी होती है।
अब इसके बाद रवि की लाश को कब्जे में लिया जाता है और फिर इसके बाद कांता देवी और मंजू पर एक चार्जशीट दायर कर दी जाती है।
इसके बाद दोनों के खिलाफ एक मुकदमा दायर कर दिया जाता है।

दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम में कांता देवी और मंजू देवी ने रवि का कत्ल करके क्या सही कदम उठाया था या फिर गलत कदम उठाया था?
कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें।
तो मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसी घटना के साथ।

तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद वंदे मातरम।
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जय हिंद!

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