मजदूर की पत्नी के साथ दुबई में जो हुआ
मजदूर की पत्नी के साथ दुबई में जो हुआ
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दोस्तों, आज हम एक ऐसी कहानी सुनाने वाले हैं जो दिल को छू लेती है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की इस कहानी में एक युवक सुनील की जिंदगी का पूरा चक्र आता है। सुनील 2003 में दुबई चला गया और वहां इलेक्ट्रिशियन के रूप में काम करने लगा। वह बहुत अच्छा इलेक्ट्रिशियन था। कई बिल्डिंग्स में वह हेड इलेक्ट्रिशियन बन गया। 2012 तक वह दुबई में रह चुका था। उसकी उम्र तीस साल हो चुकी थी। अच्छी कमाई भी हो चुकी थी। सोचते हुए कि अब पैसे ज्यादा कमाने से क्या फायदा, उसने शादी कर ली।
शादी के बाद सुनील और उसकी पत्नी संध्या का प्यार मोहब्बत बढ़ता गया। तीन महीने गुजरे तो सुनील की छुट्टी खत्म हो गई। उसने संध्या को उसके मायके छोड़ दिया और दुबई लौट आया। अब सुनील का दिल संध्या के बिना अट नहीं पाता था। सुनील रोज फोन करता, लेकिन संध्या रोती हुई कहती, “सुनील, आप मुझे छोड़कर कहां चले गए? आपके बिना मेरा मन ही नहीं लगता।” सुनील भी रोता, “अभी तो एक महीना भी नहीं हुआ। छुट्टी तो दो साल बाद मिलेगी। तुम्हारा हाल मेरा भी है।” संध्या कहती, “मैं कुछ नहीं जानती। कैसे भी करके आप आ जाओ। मैं आपके बिना नहीं रह सकती।”

सुनील ने सोचा कि मेरी उम्र तीस साल हो गई है। शादी हो गई है। पैसे कमा रहा हूं तो अपनी पत्नी को समय क्यों नहीं दे रहा। उसने मालिक से कहा, “सर, मैं घर जाना चाहता हूं।” मालिक ने कहा, “एक ऐसा बंदा है जो बहुत उपयोगी है। आप चले जाओगे तो हमारा काम फंस जाएगा।” सुनील ने कहा, “सर, मैं भी बहुत परेशान हूं।” मालिक ने कहा, “एक काम करो। अपनी पत्नी को ही दुबई बुला लो।” सुनील हैरान रह गया। मालिक ने कहा, “गल्फ कंट्री के नियमों के अनुसार, अगर कोई इंजीनियर है तो उसकी पत्नी को ले जा सकता है। हम गरीबों को यहां आने नहीं देते।”
सुनील समझ गया कि अब पैसे कमाने से क्या फायदा। उसने सोचा कि फर्जी इंजीनियर की डिग्री बना लेता हूं। मालिक ने मदद की। सुनील ने संध्या का पासपोर्ट भी बना लिया। संध्या को दुबई लाने का मौका मिल गया। सुनील ने उसे लेकर अपने फ्लैट पर रहने की व्यवस्था की। सुनील काम पर वापस आ गया। सुनील और संध्या बहुत खुश थे।
एक दिन मैनेजर पारस रेड्डी, जो मद्रास का रहने वाला था, अपने साथ दो लोगों के साथ सुनील के फ्लैट पर आया। पारस ने कहा, “भाई सुनील, तुम्हारी पत्नी बड़ी दमदार है। हम शुक्रवार को आएंगे।” सुनील डर गया क्योंकि उसने सुना था कि शेख लोग पत्नी देखकर हड़प लेते हैं। सुनील ने कहा, “सर, बाहर पार्टी दूंगा।” पारस ने कहा, “नहीं, आपके घर पर ही आएंगे। हम रोज खाते हैं। शुक्रवार को आएंगे।”
शुक्रवार को सुनील और संध्या बहुत प्रयास से खाना बनाया। शाम को पारस आया और पार्टी शुरू हो गई। रात के ग्यारह बजे तक सब पीते रहे। पारस ने कहा, “भाई सुनील, तुमने अपनी पत्नी का मुंह ही नहीं दिखाया।” सुनील ने कहा, “सर, गांव का संस्कार है।” लेकिन पारस जिद पर था। सुनील ने संध्या को कहा, “चलो, मुंह दिखा दो।” संध्या घूंघट में आई। पारस ने देखा और कहा, “बहुत खूबसूरत पत्नी है तुम्हारी। काश ऐसी मेरी भी होती।”
सुनील ने रोका, “सर, रहने दीजिए।” लेकिन पारस ने सोने की चेन निकालकर संध्या को दे दी। सुनील ने कहा, “अरे सर, यह क्या है?” संध्या रो पड़ी। सुनील ने कहा, “सर, अब ऐसे मत कीजिए।” रात के बारह बजे पारस चला गया। सुनील ने संध्या से कहा, “आज से ऐसे लोग मत लाओ। मुझे डर लग रहा है।” संध्या ने कहा, “मुझे भी बहुत डर लगता है।” सुनील ने कहा, “हम अनजान देश में हैं। अगर कुछ हो गया तो कोई मदद नहीं करेगा।”
अगले दिन पारस ने कहा, “भाई, तुम्हारी पत्नी बहुत अच्छी थी। हर शुक्रवार घर पर खाना खाएंगे।” सुनील का मन बिगड़ गया। लेकिन कुछ नहीं कह पाया। अगले शुक्रवार फिर पार्टी हुई। सुनील असमंजस में था। संध्या को डर लगता था। एक दिन संध्या ने सुनील को फोन किया, “भैया, पारस आ गया है। घर में घुस आया है।” सुनील ने कहा, “मैं दूर हूं, जल्दी आ रहा हूं।” सुनील आया तो पारस रो रहा था। सुनील ने पूछा, “सर, क्या हुआ?” पारस ने कहा, “मेरी भी यार तुम्हारी पत्नी जैसी एक पत्नी थी। लेकिन मैंने पैसे के पीछे भागा। उसने दूसरी शादी कर ली। आज करोड़ों रुपये हैं लेकिन मेरी जिंदगी भिखारियों जैसी है।”
सुनील हैरान था। पारस ने कहा, “अगर तुम्हारी नजर में मेरे लिए कोई लड़की हो तो मेरी शादी करवा दो। मेरी उम्र चालीस साल की है। कोई लड़की शादी करेगी?” सुनील ने कहा, “मेरी एक बहन है। तलाकशुदा है। पैंतीस साल की।” पारस ने कहा, “कैसी भी लड़की हो, बस मेरी शादी करवा दो। मेरे माता-पिता गए हैं। रिश्तेदार भी नहीं।” सुनील ने मां से बात की। संध्या ने बहन राधा से बात की। पारस ने राधा का पासपोर्ट बनवाया। राधा को भी दुबई लाया गया। दोनों एक फ्लैट में रहने लगे।
एक साल बाद गांव में सादगी से शादी हुई। पारस और राधा का प्यार बढ़ा। दुबई में वे बहुत आराम से रहे। पारस ने कई देशों की सैर कराई। दोनों को बहुत पैसे थे। एक साल बाद उनके दो बच्चे हुए। सुनील और संध्या के भी दो बच्चे हुए। सब एक साथ रहते। पारस राधा बहुत अच्छे थे।
अब दोस्तों, कहानी की आखिरी घटना। 2023 में पचास साल की उम्र में पारस की हार्ट अटैक से मौत हो गई। पूरा परिवार सदमे में डूब गया। सुनील ने सबको लेकर दुबई से घर लाया। राधा मद्रास चली गई। उसके घर का प्रॉपर्टी और पैसे उसने बेच दिए क्योंकि पारस ने पहले ही बताया था कि उसकी हार्ट की बीमारी है। राधा को पैसों की कमी नहीं रही। लेकिन पारस की कमी उन्हें जिंदगी भर खलती रही।
दोस्तों, इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि प्यार और परिवार का साथ बहुत जरूरी है। पैसे की जगह सच्चा साथ रखो तो जिंदगी खुशहाल रहती है। रिश्ते खून से नहीं, भरोसे से बनते हैं। सुनील की कहानी हमें सिखाती है कि अपनी पत्नी को समय देना कितना जरूरी है। पारस और राधा का प्यार हमें दिखाता है कि अकेलेपन में भी अच्छे इंसान मिल जाते हैं।
यह कहानी सुनकर मन में एक सवाल उठता है कि हम अपने परिवार को कितना समय देते हैं। क्या हम रोज उनके साथ खाने बैठते हैं, बातें करते हैं। सुनील ने अपनी गलती समझ ली कि पैसे के पीछे भागने से परिवार टूट जाता है। संध्या ने भी सिखाया कि प्यार में सब कुछ है। राधा ने भी अपनी मां-बहन की याद में रोया।
कहानी खत्म होने के बाद सुनील और संध्या के घर में शांति छा गई। बच्चे बड़े हुए। सुनील ने अपनी इलेक्ट्रिशियन की दुकान शुरू की। संध्या ने घर संभाला। दोनों ने मिलकर बच्चों को अच्छा खाना-पीना दिया। लेकिन हर शाम सुनील और संध्या के मन में पारस और राधा का चेहरा आता।
दोस्तों, अगर आपने भी कभी अपनी पत्नी को दुबई जैसे दूर देश में छोड़ा हो तो इस कहानी से सीख लीजिए। परिवार पहले है। प्यार पहले है। पैसा बाद में। इस कहानी को पढ़कर आपका दिल भी पिघल गया होगा। अगर अच्छी लगी हो तो कमेंट में बताइए कि आपकी जिंदगी में क्या सीख मिली।
दोस्तों, यह थी सुनील और संध्या की कहानी। शादी, दुबई, प्यार, डर, बहन की शादी, आखिरी इच्छा और रो-रो कर भुलाई हुई यादें। यह कहानी हमेशा याद रहेगी। क्योंकि परिवार के बिना जिंदगी अधूरी है।