महिला के बच्चा नहीं हो रहा था संतान प्राप्ति के लिए की सारी हदें पार
महिला के बच्चा नहीं हो रहा था संतान प्राप्ति के लिए की सारी हदें पार
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आज हम एक ऐसी सच्ची घटना की बात करने वाले हैं जो पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर देगी। दोस्तों, एक 35 साल की महिला जो कि कोचिंग चलाती थी, वह अपने ही घर में रहकर वहीं बच्चों को ट्यूशन देती थी। लेकिन एक दिन उसने अपने इंटर के छात्र को अपने घर पर रोक लिया। दरअसल उस दिन उसका पति बाहर गया हुआ था। महिला ने कहा कि आज मुझे अकेले में बहुत डर लगता है, तुम मेरे घर पर रुक जाओ। इसी वजह से वह छात्र भी रुक गया। दोस्तों, इस घटना के बाद क्या हुआ था, यह सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। आज की कहानी सुनिए और कमेंट में जरूर बताइए कि यह गलती किसकी थी।
कहानी की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक से होती है। उसी गांव में एक व्यक्ति रहता था जिसका नाम राकेश था। राकेश अपने परिवार के साथ रहता था और पढ़ाई-लिखाई कर रहा था। धीरे-धीरे उसकी उम्र करीब 34 साल हो गई। उसके घर वाले परेशान हो गए। उन्होंने उसे समझाया कि बेटा, उम्र निकल रही है, शादी की उम्र हो गई है। अगर ऐसा चलता रहा तो कोई अच्छी लड़की नहीं मिलेगी। राकेश को समझाने पर उसने शादी के लिए हां कर दी।
राकेश के घर वाले रिश्तेदारों में बात फैला रहे थे। अच्छी लड़की ढूंढनी है। लेकिन राकेश की उम्र ज्यादा थी, इसलिए ज्यादातर मना कर देते थे। फिर भी एक दिन एक रिश्ता आया जिसमें लड़की का नाम अंजलि था। अंजलि की उम्र भी करीब 32 साल थी। दोनों परिवारों ने सोचा कि उम्र मैच करती है। अंजलि भी पढ़ाई कर रही थी और शादी का ख्याल नहीं रखती थी। दोनों का रिश्ता फिक्स हो गया और शादी हो गई।
अंजलि राकेश की दुल्हन बनकर उसके घर आई। राकेश अभी नौकरी नहीं पा सका था। इसलिए उसने पुणे जाकर कपड़े की दुकान खोल ली। राकेश पुणे में रहने लगा और अंजलि उसके माता-पिता के साथ अपने घर पर ही रहती थी। दो साल बीत गए। अंजलि ने एक दिन राकेश से कहा कि हमारी शादी दो साल हो गई लेकिन कोई औलाद नहीं हुई। मैं घर पर अकेली रहकर बोर हो जाती हूं। मैं अपने घर पर ट्यूशन खोलना चाहती हूं क्योंकि मैं पढ़ी लिखी हूं। राकेश ने हां कर दी।
दोनों की जिंदगी अच्छे तरीके से चलने लगी। अंजलि ने अपने घर पर कई बच्चों को ट्यूशन शुरू कर दिया। छोटे से लेकर बड़े बच्चे आते थे। उनमें से एक बच्चा इंटर की पढ़ाई कर रहा था जिसका नाम पंकज था। पंकज जवान लड़का था। अंजलि और राकेश को अब तक कोई बच्चा नहीं हो रहा था। उन्होंने दो-तीन डॉक्टरों से चेकअप करवाया लेकिन रिपोर्ट में कोई समस्या नहीं निकली। डॉक्टर ने कहा कि अंजलि में कोई कमी नहीं है लेकिन राकेश की उम्र करीब 40 साल हो चुकी है। राकेश अब बाप बनने लायक नहीं है।
राकेश चिंतित हो गया। शाम को दोनों खाना खाते हुए उसने अंजलि से कहा कि नसीब में बच्चे का सुख नहीं लिखा है। अंजलि ने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं, ऊपर वाला चाहे तो बच्चा नसीब करेगा। लेकिन राकेश का मन उदास था। उसका काम में भी मन नहीं लग रहा था। अंजलि उसे समझाती रही कि जीवन जीना छोड़ नहीं सकते।
एक दिन अंजलि की सहेली से फोन आया। सहेली ने पूछा कि शादी इतने दिन हो गई लेकिन बच्चे का प्लान क्यों नहीं किया? अंजलि ने आंसू पोछते हुए पूरी बात बता दी कि राकेश बाप नहीं बन सकता। सहेली हंसते हुए बोली कि तुम मां बन सकती हो। किसी के साथ संबंध बना लो और बच्चे का सुख पा लो। कोई को नहीं पता चलेगा। अंजलि ने कहा कि मेरा पति तैयार नहीं होगा।
सहेली ने कहा कि तुम राकेश को मत बताना। बस एक तरीका है जिससे तुम्हें बच्चा मिल जाएगा। अंजलि ने सोचा कि क्यों ना मैं ही किसी के साथ संबंध बना लूं और बच्चा पाकर राकेश को बताऊं। अंजलि ने अपना ध्यान पंकज पर केंद्रित कर लिया। पंकज उसी कोचिंग का इंटर का बच्चा था।
एक दिन राकेश बाहर गया और नहीं आया। रात को अंजलि ने पंकज को फोन किया कि आज मेरे अंकल घर पर नहीं है, तुम मेरे घर पर रुक जाओ। मैं तुम्हारे माता-पिता को फोन करके परमिशन ले लूंगी। पंकज ने हां कर दी। शाम को दोनों साथ खाना खाया। अंजलि ने पंकज को बिस्तर लगाया और खुद दूसरे कमरे में सो गई।
रात को अंजलि उठी और पंकज के बिस्तर पर आ गई। पंकज ने पूछा कि मैडम, आप क्यों आ गईं? अंजलि ने कहा कि अकेले डर लगता है, इसलिए आई हूं। पंकज ने सोचा कि मैडम नींद में हैं। लेकिन अंजलि बार-बार शरीर छूने लगी। पंकज पहले विरोध करता रहा लेकिन फिर हौसला बढ़ गया और दोनों के बीच पहली बार संबंध बन गया।
इस तरह का सिलसिला शुरू हो गया। जब अंजलि अकेली रहती तो पंकज को घर बुला लेती। दोनों गलत काम करते। कोई को पता नहीं था। अंजलि और राकेश दोनों अपनी जिंदगी बिता रहे थे। लेकिन एक दिन अंजलि को उल्टी और चक्कर आने लगे। राकेश ने डॉक्टर के पास ले जाया। डॉक्टर ने कहा कि अंजलि गर्भवती है। राकेश चौंक गया। वह सोचने लगा कि मैं तो कभी पिता नहीं बन सकता था।
घर लौटकर राकेश ने अंजलि से पूछा कि यह बच्चा किसका है? अंजलि ने रोते हुए कहा कि मैंने पहले ही सोचा था कि मैं पहले काम कर लूंगी और फिर बताऊंगी। डॉक्टर से पता चला कि बच्चा पंकज का ही है। अंजलि ने कहा कि मैंने सिर्फ बच्चे के लिए संबंध बनाया था। अब मैं पंकज से कोई रिश्ता नहीं रखूंगी। इस बच्चे को आप अपना लीजिए। राकेश ने सहमत होकर कहा कि ठीक है, मैं बच्चे को अपना लूंगा। लेकिन आज के बाद पंकज से कोई संबंध नहीं रखोगी।
अंजलि ने वादा किया। लेकिन राकेश ने शराब पीना शुरू कर दिया। उसका मन उदास था। अंजलि उसे शराब के नशे में लिटा देती। अंजलि को भी अब राकेश से कुछ नहीं चाहिए था। वह अपने बच्चे का सपना देख रही थी।
एक दिन राकेश जल्दी घर आ गया। नशे में था। उसने अंजलि को पंकज के साथ अश्लील हालत में देखा। गुस्सा आ गया। उसने डंडा उठाकर पंकज पर वार करना शुरू कर दिया। पंकज चिल्लाया कि मुझे छोड़ दीजिए, मैडम ही दबाव डालती रहती है। लेकिन राकेश नशे में था। वह पंकज को मार मारकर हत्या कर बैठा।
आसपास के लोग पहुंच गए। शोर सुनकर पुलिस आई। पंचनामा करके पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। राकेश को गिरफ्तार कर लिया गया। पड़ोसियों ने बताया कि पंकज अंजलि का छात्र था और राकेश ने उसे मार दिया। पुलिस ने पूछताछ की तो राकेश ने पूरी सच्चाई बयां कर दी।
पुलिस ने अंजलि को भी गिरफ्तार कर लिया। अंजलि को नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाए रखने के लिए दंड मिला। राकेश ने अपनी पूरी जिंदगी तहस-नहस कर दी। अंजलि ने भी एक गलती के लिए माफ नहीं किया।
दोस्तों, इस कहानी को आप कैसी लगी? सबसे बड़ी गलती किसकी लगी? कमेंट में जरूर बताइए। इस घटना का मकसद कोई को चोट पहुंचाना नहीं था, सिर्फ जागरूक करना था। अगर आपको पसंद आई तो लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। मिलते हैं अगली कहानी में। तब तक अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिए। जय हिंद।