महिला के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/गांव के लोग और पुलिस सभी दंग रह गए/
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ट्रक ड्राइवर और पड़ोसी के जाल में फंसी रोशनी देवी की कहानी: एक साधारण जीवन की त्रासदी
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पतनपुरी नाम का एक छोटा सा गांव है। यहां की एक सड़क के किनारे पर रोशनी देवी नाम की एक महिला रहती थी। उसके पास दो एकड़ जमीन थी, एक अच्छा घर और दो दुकानें भी थीं। लेकिन आजकल दोनों दुकानें बंद पड़ी थीं। पास ही एक खाली कमरा भी पड़ा था। रोशनी देवी के पति की मौत हो चुकी थी। उनके घर में सिर्फ उनका सात साल का बेटा लकी था, जो स्कूल जाता था।

एक दिन रोशनी देवी ने सोचा कि अगर दो दुकानों को किराए पर दे दिया जाए और खाली कमरे को भी किराए पर दे दिया जाए तो घर का गुजारा आसानी से चल जाएगा। उन्होंने अपने पड़ोसियों से कहा कि जो भी दुकान या कमरा किराए पर लेना चाहे तो बताना। इस तरह उन्होंने अपने कामकाज में लगे रहने की कोशिश शुरू कर दी।
दिन गुजरते गए। आखिरकार 5 सितंबर 2025 की सुबह के करीब दस बजे के समय रोशनी देवी अपनी दुकान पर काम कर रही थीं। उसी समय उनके पड़ोसन रजनी देवी आई और बोली कि तुम्हारे पास दो खाली दुकानें हैं। एक दुकान में किराने की दुकान खोल लो तो काम अच्छे से चल सकता है। रोशनी देवी को यह बात पसंद आई। उन्होंने कहा कि उनके पास पैसा है, दो-चार दिन में दुकान खोल देंगे। रजनी देवी चली गई।
दो-चार दिन बाद रोशनी देवी ने अपनी किराने की दुकान खोल दी। ग्राहक आने लगे। सड़क के किनारे होने के कारण यहां मुसाफिर भी रुकते थे। दुकान अच्छे से चलने लगी। रोशनी देवी खुश हो गईं। लेकिन घर में अकेलापन महसूस होने लगा। रात को मन घर के अंदर नहीं लगता था। उन्होंने सोचा कि अकेले रहकर क्या होगा।
22 सितंबर 2025 की शाम सात बजे के आसपास रोशनी देवी अपनी दुकान पर बैठी थीं। कुछ ग्राहक आए थे। जब वे चले गए तो आठ बजे के समय एक ट्रक आया और पंक्चर हो गया। ट्रक ड्राइवर राजकुमार बाहर निकला। वह युवा दिखता था। उसने देखा कि पास ही एक किराने की दुकान है। वह दुकान पर चला गया। राजकुमार की नजर रोशनी देवी पर पड़ गई। उनकी खूबसूरती देखकर राजकुमार मंत्रमुग्ध हो गया।
रोशनी देवी ने पूछा कि साहब, क्या लेना है? राजकुमार ने ठंडा और चिप्स मांगे। जब सिगरेट का पैकेट देना पड़ा तो पैकेट गिर गया। रोशनी ने झुककर उठाया तो राजकुमार को उनकी खूबसूरती और शरीर की बनावट बहुत पसंद आई। बातचीत शुरू हुई। राजकुमार ने पूछा कि तुम्हारा पति कहां है? रोशनी देवी ने बताया कि पति की मौत हो चुकी है और घर में अकेली रहती हैं। उनका बेटा सात साल का है।
राजकुमार ने कहा कि ट्रक का पंक्चर है। रात मेरे साथ गुजारना चाहता हूं। रोशनी देवी ने कहा कि कोई बात नहीं, घर में खाली कमरा है। राजकुमार घर आ गया। रात नौ बजे तक दुकान बंद कर ली गई। घर के मुख्य दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया गया। रोशनी देवी ने पहले ही बेटे को सोने दे दिया था। खाना खिलाने के बाद उसने राजकुमार से कहा कि मैं सोने जा रही हूं।
लेकिन राजकुमार ने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा कि मैं तुम्हारे साथ आज वक्त गुजारना चाहता हूं। रोशनी देवी हंस पड़ी। राजकुमार बोला कि तुम्हारे साथ वक्त गुजारने के बदले पैसे दूंगा। रोशनी देवी लालची हो गई। उसने राजकुमार की सारी शर्तें मंजूर कर लीं। दोनों कमरे में चले गए और गलत रिश्ते कायम करने लगे। रिश्ते बनाते समय कंडोम फट गया। फिर भी दोनों ने काम जारी रखा। पूरे रात गुजारी गई। सुबह राजकुमार ने रोशनी देवी को दस हजार रुपये दिए।
राजकुमार बोला कि अब जब भी वक्त मिलेगा मैं आऊंगा। रोशनी देवी ने मना नहीं किया। वह सोचने लगी कि यह अजनबी है, गांव का नहीं है। कोई नहीं जान पाएगा। इस तरह राजकुमार हर रात घर पर आने लगा। पैसे लेता और चला जाता। रोशनी देवी भी खुश रहने लगी।
लेकिन लालच ने आगे बढ़कर नई समस्याएं खड़ी कर दीं। 5 अक्टूबर 2025 की सुबह राजकुमार अपने दोस्त गुलशन के साथ शराब पी रहा था। नशे में गुलशन को भी रोशनी देवी पसंद आई। राजकुमार ने बताया कि वह रात में बीस सौ रुपये लेता है। गुलशन ने कहा कि मैं भी दे सकता हूं। राजकुमार ने फोन पर रोशनी देवी से बात की। उन्होंने कहा कि मेरा दोस्त गुलशन है, वह तुम्हारे साथ कुछ वक्त बिताना चाहता है। बदले में तुम्हें पंद्रह सौ रुपये मिलेंगे। रोशनी देवी ने हां कर दी।
शाम को रोशनी देवी ने बेटे को खाना खिलाकर सोने दे दिया। रात दस बजे तक राजकुमार और गुलशन दोनों ट्रक पर बैठकर रोशनी देवी के घर पहुंचे। रोशनी ने दरवाजा खोला। राजकुमार ने कहा कि मैंने पैसे का वादा किया था। अगर तुम गुलशन को पैसे दे दोगी तो रात गुजारी जाएगी नहीं तो नहीं। गुलशन ने कहा कि मैं अच्छे पैसे दूंगा। दोनों कमरे में चले गए। रिश्ते बनाने का काम शुरू हुआ। कंडोम फट गया। फिर भी काम जारी रहा। तीनों का मन भरने के बाद राजकुमार ने पैसे दिए। गुलशन चला गया। राजकुमार ने कहा कि अगर तुम चाहो तो मालामाल हो सकती हो। मेरे पास कई ट्रक ड्राइवर हैं। हर रात एक-एक करके आ सकते हैं।
रोशनी देवी ने हां कर दी। राजकुमार ने कहा कि मुझे बीस प्रतिशत कमीशन चाहिए। रोशनी ने स्वीकार कर लिया। इस तरह राजकुमार और गुलशन हर रात घर पर आने लगे। रोशनी देवी मालामाल होने लगी।
लेकिन यह सब राजकुमार और गुलशन को हर रोज नहीं आता। 23 अक्टूबर 2025 की शाम सात बजे रोशनी देवी घर में काम कर रही थीं। पड़ोसन रजनी देवी आई। रजनी ने कहा कि तुम बहुत खुश दिख रही हो। पैसे भी अच्छे से आ रहे हैं। रोशनी ने रजनी के सामने अपना पूरा भेद खोल दिया। बोली कि मेरे घर पर ट्रक ड्राइवर आते हैं। वे पैसे देते हैं और मैं उनके साथ रात गुजारी लेती हूं।
रजनी हैरान हो गई। उसने कहा कि मैं ऐसा काम नहीं कर सकती। मैं जा रही हूं। घर लौटकर रजनी ने अपने पति रणजीत सिंह को सब बताया। रणजीत ने सोचा कि यह मेरी भी फायदा उठानी चाहिए। रात नौ बजे के आसपास रणजीत ने पत्नी रजनी से कहा कि मुझे खेत में काम है। पानी चलाना है। वह खेत चला गया।
कुछ देर बाद रोशनी देवी के घर का दरवाजा खटखटाया गया। रोशनी ने दरवाजा खोला। रणजीत खड़ा था। रोशनी चौंक गई। रणजीत ने अंदर आकर कहा कि रोशनी, अब इस गलत काम को छोड़ दो। नहीं तो मैं गांव के सरपंच अमृत सिंह को पूरी कहानी बता दूंगा। रोशनी ने हां कर दी। दोनों ने प्लान बनाया। दोनों कमरे में चले गए। रिश्ते कायम हुए। मन भरने के बाद रणजीत चला गया।
इस तरह से राजकुमार, गुलशन, रणजीत और कई अन्य ट्रक ड्राइवर रोशनी देवी के घर पर आते। पैसे देते और रात गुजार लेते। सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन रोशनी नहीं जानती थी कि आगे क्या होने वाला है।
12 नवंबर 2025 की सुबह दस बजे रोशनी देवी दुकान पर काम कर रही थीं। अचानक चक्कर आने लगे। सांस फूलने लगी। उन्होंने सोचा कि शायद शहर जाकर चेकअप करवाऊं। उन्होंने दुकान बंद की और शहर पहुंचकर अच्छे अस्पताल में डॉक्टरों से मिली। डॉक्टरों ने कहा कि आजकल आ जाओ। रिपोर्ट देख लेंगे।
अगले दिन रोशनी देवी अस्पताल गई। डॉक्टर रिपोर्ट पढ़ते-पढ़ते बेहोश हो गए। बोले कि तुम्हारी रिपोर्ट बहुत खराब है। तुम्हें एड्स हो चुका है।
रोशनी देवी स्तब्ध रह गई। डॉक्टरों ने बताया कि ट्रक ड्राइवरों के साथ वक्त गुजारा करने से एड्स हो गया है। भविष्य में इतना समय नहीं बचा। फिर भी रोशनी हिम्मत जुटाकर दवाइयां लेने आईं। वे अब अकेली पड़ चुकी थीं। जानलेवा बीमारी लग चुकी थी।
उसने सोचा कि पड़ोसन रजनी के पास फोन करके बात कर लूं। रजनी शाम को आई। रोशनी ने कहा कि रजनी, मुझे जानलेवा बीमारी हो गई है। ट्रक ड्राइवरों के साथ वक्त गुजारा करने से एड्स हो गया। रजनी ने कहा कि तुम्हारे साथ उठने-बैठने में भी फायदा नहीं। तुरंत घर चली गई।
रजनी ने अपने पति रणजीत सिंह को बताया। रणजीत की सांस रुक गई। उसने कहा कि मुझे कुछ काम है, मैं जल्दी लौटूंगा। वह पास के शहर पहुंचकर अस्पताल में चेकअप करवाया। एक दिन बाद रिपोर्ट आई। डॉक्टरों ने कहा कि तुम्हें भी एड्स हो चुका है।
रणजीत स्तब्ध रह गया। उसने सोचा कि यह रोशनी की वजह से लगा है। शाम सात बजे वह घर लौटा। अंदर से तेज हथियार उठाया। रोशनी देवी के घर पहुंचा। घर का दरवाजा खुलवाया और अंदर घुसकर उसने रोशनी देवी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। एक घंटे बाद वह नजदीकी पुलिस थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया। बोला कि मैंने रोशनी देवी की हत्या कर दी है।
पुलिस ने गांव पहुंचकर शव बरामद किया। पूछताछ के दौरान रणजीत सिंह ने कहा कि रोशनी को एड्स थी और मैंने उसके साथ भी रिश्ता बनाया था। इसी वजह से मुझे भी एड्स लगा। इसलिए मैंने उसकी हत्या कर दी।
चार्जशीट दायर कर ली गई। रोशनी देवी की हत्या की सजा पर जज साहब के सामने मामला चलता रहेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या रणजीत सिंह ने सही किया या गलत किया।
यह कहानी सिखाती है कि लालच कितनी बड़ी तबाही ला सकता है। एक छोटी सी दुकान की चाहत से शुरू होकर पूरी जिंदगी खत्म हो गई। रोशनी देवी के अकेलेपन को पूरा कर पाने की कोशिश ने उन्हें एड्स जैसी जानलेवा बीमारी की ओर ले जाया। पड़ोसियों की मदद से शुरू हुई यह कहानी अंत में एक हत्या तक पहुंच गई। रणजीत सिंह ने अपने पाप का मुंह मोड़ने के लिए और भी बड़ा अपराध कर दिया।
गांव में अब भी यह घटना चर्चा का विषय है। लोग सोचते हैं कि अगर रोशनी देवी ने समय पर पड़ोसियों या डॉक्टरों से बात नहीं की होती तो शायद यह त्रासदी न होती। एड्स जैसी बीमारी का इलाज महंगा है। कई लोग इससे जूझते हैं। लेकिन रोशनी देवी की कहानी हमें याद दिलाती है कि लालच और अकेलेपन का सामना सही तरीके से करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पतनपुरी गांव आज भी याद किया जाता है। वहां की सड़क पर अगर कोई ट्रक रुक जाए तो लोग सोचेंगे कि यह किसकी याद दिला रहा है। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है बल्कि समाज की भी।
रोशनी देवी का बेटा लकी अब अनाथ पालक के पास रहता होगा। रणजीत सिंह जेल में कैद है। पुलिस जांच जारी है। जज साहब को अंतिम फैसला देना होगा कि रणजीत सिंह को कितनी सजा मिलेगी। क्या वह हत्या का दोषी ठहराया जाएगा या कुछ और वजह से माफ किया जाएगा।
इस पूरी घटनाक्रम में सबसे बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य और सतर्कता कितनी जरूरी है। अगर कोई बीमारी का संकेत दिखे तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए। अगर अकेलापन महसूस हो तो परिवार या पड़ोस से बात करनी चाहिए। लालच से बचना चाहिए।
गांव के लोग अब ज्यादा सतर्क हैं। कोई भी अजनबी को आसानी से अपने घर पर बुलाने से पहले सोचते हैं। ट्रक ड्राइवरों का हालचाल देखा जाता है। पड़ोस में शिकायतों की संख्या बढ़ गई है।
यह कहानी अंत में हमें एक संदेश देती है कि सही समय पर सही फैसले लें तो जिंदगी आसान हो जाती है। गलती करने पर सजा जरूर मिलती है। लेकिन पछतावा भी जरूर होता है। रोशनी देवी की कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है।