भाई और बहन ने मिलकर अपने माता-पिता की //ह//त्या// कर दी। पुलिस और आम जनता सदमे में रह गई।
भाई और बहन ने मिलकर अपने माता-पिता की //ह//त्या// कर दी।
पुलिस और आम जनता सदमे में रह गई।
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नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा।
आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से।
बलरामपुर जिले में एक बालपुर नाम का गांव पड़ता है
और इसी बालपुर गांव में रहने वाला बसंत कुमार।
बसंत कुमार जो कि इस गांव के जमींदारों के खेत में दिहाड़ी मजदूरी का काम किया करता था।
बसंत कुमार दहाड़ी मजदूरी करके जितने पैसे कमाया करता था, उन सारे पैसों को शराब के नशे में उड़ा दिया करता था।
बसंत कुमार शराब को हासिल करने के लिए किसी भी हद से गुजर सकता था।

जब भी बसंत कुमार के पास पैसे नहीं हुआ करते थे
तो बसंत कुमार अपने घर के सामान को ही बेच दिया करता था
और अपनी शराब की लत को पूरा कर लिया करता था।
बसंत कुमार के परिवार में इसकी धर्मपत्नी होती है
जिसका नाम कांता देवी होता है।
कांता देवी जो कि देखने में काफी खूबसूरत और जवान महिला होती है।
कांता देवी जब भी अपने घर से बाहर निकल जाया करती थी
तो इस गांव के सभी मर्द कांता देवी की खूबसूरती और सुंदरता को बस देखते ही रह जाया करते थे।
बसंत कुमार और कांता देवी के पास अपने दो बच्चे होते हैं।
जिनमें सबसे बड़ा बेटा होता है और इस बेटे का नाम रुद्र होता है।
रुद्र जो कि कक्षा 10 में अपनी पढ़ाई किया करता था
और बसंत कुमार की एक छोटी बेटी भी होती है
जिसका नाम वर्षा होता है।
वर्षा जो कि कक्षा आठ में अपनी पढ़ाई किया करती थी।
रुद्र और वर्षा दोनों ही बच्चे पढ़ाई लिखाई में काफी तेज और होशियार होते हैं।
लेकिन बसंत कुमार की शराब पीने की लत की वजह से
अब इसका काम धंधा भी छूट जाता है
और बसंत कुमार अपने घर पर ही बैठ जाता है।
इसके बाद बसंत कुमार की पत्नी कांता देवी
अपने पति को अक्सर एक ही बात कहती थी
कि तुम यह शराब पीना बंद कर दो।
नहीं तो फिर हमें कटोरा हाथ में लेना पड़ेगा।
लेकिन बसंत कुमार अपनी पत्नी की सारी बातों को
एक कान से सुनता था। दूसरे कान से बाहर निकाल दिया करता था।
इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद
एक तारीख आ जाती है 2 जुलाई 2026 का दिन।
सुबह के करीब 7:30 बजे के आसपास का वक्त होता है।
बसंत कुमार के दोनों बच्चे रुद्र और वर्षा
अपने स्कूल में जाने के लिए तैयार होते हैं।
उसी समय रुद्र अपने पिता बसंत कुमार को कहता है
कि पिताजी आज हमें अपनी स्कूल की फीस भी जमा करवानी है
और हमें अपनी नई किताबें भी खरीदनी है।
लेकिन बसंत कुमार कहने लगता है
कि मेरे पास एक भी पैसा नहीं है।
इसके बाद थक हारकर रुद्र और वर्षा
अपनी मां कांता देवी के पास जाते हैं
और कांता देवी को कहते हैं कि मां आज स्कूल की फीस भी जमा करवानी है
और नई किताबें भी खरीदनी है।
कांता देवी अपने दोनों बच्चों को समझाना शुरू कर देती है।
कहती है कि तुम्हारा पिता काम धंधा छोड़ चुका है
और घर में पैसे नहीं है।
लेकिन आज तुम दोनों स्कूल में चले जाओ
और आज मैं जैसे तैसे करके पैसों का इंतजाम कर लूंगी।
इसके बाद रुद्र और वर्षा दोनों
अपने स्कूल में पढ़ाई करने के लिए चले जाते हैं।
लेकिन जैसे ही थोड़ा सा वक्त गुजर जाता है
तो इसके बाद कांता देवी अपने घर से बाहर निकलती है।
अपनी एक पड़ोसन के घर पर चली जाती है
और इस पड़ोसन का नाम अनीता होता है।
कांता देवी अनीता को कहती है
कि अनीता मुझे 3000 की सख्त जरूरत है।
मुझे अपने बच्चों की स्कूल फीस भी देनी है
और उनके लिए नई किताबें भी खरीदनी है।
जैसे तैसे करके अनीता देवी इस महिला कांता देवी को 3000 कर्ज पर दे देती है
और इसके बाद कांता देवी उन 3000 को लेकर अपने घर पर आ जाती है।
इसके बाद कांता देवी शहर में भी जाती है
और शहर में जाने के बाद अपने बच्चों के लिए
कुछ किताबें खरीदती है
और उनकी नई स्कूल ड्रेस भी खरीदती है
और घर के लिए राशन पानी का सामान भी खरीद लेती है
और यह सब सामान खरीदने के बाद
कांता देवी बस के माध्यम से गांव के मुख्य बस अड्डे पर पहुंच जाती है।
लेकिन जैसे ही कांता देवी गांव के मुख्य बस अड्डे पर पहुंचती है
तो वह देखती है कि वहां पर कोई भी ऑटो रिक्शा नहीं होती है
और मुख्य बस अड्डे से गांव तक की दूरी 3 कि.मी. के आसपास की होती है।
कांता देवी अपने मन में सोचने लग जाती है
कि अगर ऑटो रिक्शा नहीं आती है
तो फिर मुझे पैदल ही चलना पड़ेगा।
इसके बाद थक हारकर कांता देवी गांव की तरफ पैदल चलना शुरू कर देती है।
और जैसे ही कांता देवी सड़क पर पैदल चल रही होती है
तो उसी समय गांव के सरपंच देव सिंह की एक बड़ी सी गाड़ी
इसके पीछे पीछे आ रही होती है।
और देव सिंह सरपंच की नजरें जैसे ही
इस महिला कांता देवी की खूबसूरती और इसकी जवानी
और इसकी सुंदरता पर पड़ती है
तो देव सिंह उसी समय अपनी गाड़ी रोक लेता है।
गाड़ी रोकने के बाद देव सिंह सरपंच कहने लगता है
कि कांता क्या बात आज तुम गांव में पैदल जा रही हो?
कोई ऑटो रिक्शा नहीं मिली है क्या?
उसी समय कांता देवी कहती है
कि सरपंच साहब मुझे कोई भी ऑटो रिक्शा नहीं मिली है।
इसके बाद देव सिंह सरपंच कहता है
कि तुम मेरी गाड़ी में बैठ जाओ।
मैं गांव में ही जा रहा हूं
और तुम्हें गांव में छोड़ दूंगा।
इसके बाद कांता देवी हंसते मुस्कुराते हुए
इस गाड़ी के अंदर बैठ जाती है।
लेकिन देव सिंह की नजरें तो
इस महिला कांता देवी की खूबसूरती और इसकी जवानी पर टिक चुकी थी।
देव सिंह अब इस महिला को हासिल करना चाहता था।
इसके बाद देव सिंह सरपंच कांता देवी से पूछने लग जाता है
कि कांता आजकल तेरा पति बसंत कुमार क्या कामकाज करता है?
कांता देवी कहती है कि वह कोई भी काम धंधा नहीं करता है।
वो तो घर में शराब के नशे में पड़ा रहता है
और आज भी उसने काफी ज्यादा शराब पी रखी है
और आज भी वो घर पर लेटा हुआ है।
लेकिन उसी समय देव सिंह सरपंच कहने लगता है
कि काम तुम किसी बात की फिक्र मत करो।
तुम ऐसा करना आज शाम के करीब 5:00 बजे के आसपास
अपने पति बसंत को मेरे घर पर भेज देना
और इसके बाद मैं उसको कोई काम धंधा दे दूंगा।
अब जैसे ही कांता देवी इस सरपंच की बातों को सुनती है
तो बड़ी खुश हो जाती है।
लेकिन कांता देवी नहीं जानती थी कि
आखिर सरपंच देव सिंह इसके पति को नौकरी क्यों देने के लिए तैयार हो गया था
और इसके बाद देव सिंह सरपंच लगातार कांता से
मीठी मीठी बातचीत करता रहता है।
कांता देवी कहने लगती है कि सरपंच साहब
मेरे घर में बहुत ज्यादा गरीबी है।
मेरा पति कोई भी काम धंधा नहीं करता है
और मैं बहुत परेशान भी हो चुकी हूं।
रात के समय मेरा पति शराब पीने के बाद घर पर आता है
और मेरे साथ लड़ाई झगड़ा करता है।
लेकिन देव सिंह सरपंच कहता है
कि आज के बाद तेरा पति तेरे साथ कोई भी झगड़ा नहीं करेगा
और इस तरीके से गांव आ जाता है।
अब यह महिला कांता देवी इस गाड़ी से नीचे उतरती है
और अपने घर पर पहुंच जाती है।
घर पर जाने के बाद अपने पति बसंत से मिलती है
और बसंत को कहती है कि आज मुझे गांव का सरपंच देव सिंह मिला था
और आज तुम्हें उसने अपने घर पर बुलाया है।
वो तुम्हें कोई काम धंधा देना चाहता है।
बसंत कुमार कहने लगता है
कि यह तो बहुत अच्छी बात है।
कोई बात नहीं
जैसे ही मेरा थोड़ा सा नशा उतर जाएगा
तो इसके बाद मैं सरपंच के घर पर चला जाऊंगा।
और इस तरीके से शाम के करीब 6:30 बजे के आसपास
बसंत सिंह उसी समय देव सिंह सरपंच के घर पर चला जाता है।
देव सिंह सरपंच से मिलता है
और देव सिंह को कहने लगता है
कि जमींदार साहब मैं आपके खेत में कामकाज करना चाहता हूं।
देव सिंह सरपंच कहता है कि मैंने ही तुम्हें बुलाया था
और तुम कल से ही मेरे खेत में कामकाज करना शुरू कर दो।
लेकिन उसी समय बसंत सिंह कहते हैं
कि मुझे 10000 की सब जरूरत है।
मुझे अपने घर के लिए राशन पानी खरीदना है।
देव सिंह सरपंच उसी समय बसंत कुमार को 10000 दे देता है
और बसंत कुमार 10000 लेकर बड़ा खुश हो जाता है।
इसके बाद बसंत कुमार इस घर से बाहर निकलता है।
अपने घर आने के बजाय बसंत कुमार सीधा ही शराब के ठेके पर
पहुंच जाता है। शराब के ठेके से शराब खरीदी जाती है
और ठेके के सामने ही बसंत कुमार बैठकर शराब पीने लग जाता है।
देखते ही देखते बसंत कुमार को गहरा नशा हो जाता है
और इसके बाद बसंत कुमार शराब के ठेके के सामने ही लेट जाता है।
लेकिन इस गांव के कुछ लोग बसंत कुमार की जेब से सारे पैसे निकाल लेते हैं
और रात के करीब 8:00 बजे के आसपास बसंत कुमार अपने घर पर आ जाता है।
बसंत कुमार अपनी पत्नी को कहने लगता है
कि मैंने सरपंच साहब से 10000 लिए थे।
लेकिन मैंने शराब पी ली थी
और शराब पीने की वजह से मुझे नशा हो गया था
और फिर इसके बाद मेरे पैसे चोरी हो गए हैं
और इस तरीके से पूरी रात गुजर जाती है।
अब जैसे ही अगला दिन होता है तो बसंत कुमार
अब देव सिंह सरपंच के खेत में कामकाज करने के लिए नहीं जाता है।
पूरी दिन इंतजार करने के बाद शाम के करीब 4:00 बजे के आसपास
देव सिंह सरपंच अब बसंत सिंह के घर
पर आता है।
बसंत सिंह के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है
और घर का दरवाजा बसंत सिंह की पत्नी कांता देवी खोलती है।
आज कांता देवी अपने घर में अकेली होती है।
कांता देवी के दोनों बच्चे बाहर खेलने के लिए चले गए थे
और कांता देवी का जो पति बसंत कुमार होता है
वो शराब पीने के लिए अपने दोस्तों के पास चला गया था।
अब इसके बाद देव सिंह सरपंच देखता है
कि कांता देवी अपने घर में बिल्कुल अकेली होती है
और देव सिंह सरपंच अब इस महिला कांता देवी को कहता है
कि देखो कांता तेरे पति ने कल मुझसे 10000 लिए थे
और वह आज काम पर नहीं आया है।
लेकिन काम धंधा तो उसको करना ही पड़ेगा।
अब इसके बाद थक हारकर बसंत कुमार की पत्नी कांता देवी कहती है
कि सरपंच साहब वह कोई भी काम धंधा करने वाला नहीं है।
लेकिन देव सिंह सरपंच कहने लगता है
कि ऐसा करो तुम ही मेरे खेतों में काम धंधा करना शुरू कर दो।
उसी समय कांता देवी कहने लगती है
कि मैं खेतों में काम धंधा नहीं करती हूं।
लेकिन सरपंच साहब उसी समय
अपनी जेब से 50000 निकालता है
और कांता देवी को देता है।
कांता को कहता है कि मैं तुम्हें 50000 एडवांस में देता हूं।
लेकिन तुम्हें कल से ही मेरे खेत में कामकाज करने के लिए आना पड़ेगा।
कांता देवी जैसे ही 50000 को देखती है
तो कांता देवी को लालच आ जाता है।
कांता देवी उसी समय सरपंच साहब को कहती है
कि देखो सरपंच साहब मैं कल सुबह खेत में पहुंच जाऊंगी
और मैं तुम्हारे खेत में काम धंधा करना शुरू कर दूंगी।
सरपंच साहब बड़ा खुश हो जाता है।
इसके बाद यह महिला 50000 लेकर
अपने पास रख लेती है।
देव सिंह कहता है कि कल सुबह मेरे खेत में आ जाना
और इस तरीके से ये दो तीन बातें करने के बाद
देव सिंह उसी समय इस घर से बाहर निकल जाता है।
अब जैसे ही अगला दिन होता है तो सुबह के करीब 8:00 बज चुके होते हैं
और कांता देवी ने अपने पूरे घर का कामकाज भी खत्म कर लिया था।
कांता देवी के दोनों बच्चे स्कूल में जा चुके होते हैं।
अब इसके बाद कांता देवी सरपंच देव सिंह के खेत में चली जाती है
और खेत में काम धंधा करना शुरू कर देती है।
पशुओं के लिए चारा काटना शुरू कर देती है।
थोड़ी देर के बाद देव सिंह सरपंच भी खेत में पहुंच जाता है।
अब देव सिंह सरपंच देखता है
कि कांता देवी उसके खेत में चारा काट रही होती है
और कांता देवी की खूबसूरती और सुंदरता को देखने के बाद
देव सिंह सरपंच भी इसके पास आ जाता है
और इसके पास बैठकर मीठी मीठी बातचीत करना शुरू कर देता है।
देव सिंह सरपंच देखता है कि आज खेत में दूर दूर तक कोई भी दूसरा तीसरा किसान नहीं होता है।
और इसी बात का फायदा उठाकर देव सिंह सरपंच अब इस महिला कांता देवी को कहता है
कि देखो कांता देवी तुम्हारा पति तो एक शराबी बन चुका है।
वो तेरी किसी भी जरूरत को पूरा नहीं कर सकता है। ना तो वो तेरी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकता है
और ना ही वह तेरी शारीरिक जरूरतों को पूरा कर सकता है।
लेकिन कांता देवी भी कुछ कम नहीं होती है।
कांता देवी कहने लगती है कि सरपंच साहब तुम्हारी बात बिल्कुल सही है।
मेरा पति किसी काम का नहीं है।
अब इसके बाद सरपंच खुलकर साफ साफ शब्दों में बात करना शुरू कर देता है।
देव सिंह सरपंच कहता है कि देखो पास में ही ई के खेत है
और तुम मेरे साथ ई के खेत में चलो
और मेरे साथ वक्त गुजार कर देखो और तुम्हारी सारी जरूरतों को मैं पूरा कर दूंगा।
तुम्हें पैसे भी दिया करूंगा
और साथ में शारीरिक सुख भी दिया करूंगा।
जब ऐसीऐसी बातें कांता को कही जाती हैं
तो कांता भी हंसते मुस्कुराते हुए देव सिंह सरपंच को कहती है
कि चलो सरपंच साहब मैं तुम्हारे साथ एक के खेत में जाने के लिए तैयार हूं।
और इसके बाद देव सिंह सरपंच और यह महिला कांता देवी
दोनों ही ई के खेत के अंदर चले जाते हैं।
और ई के खेत के अंदर जाने के बाद अब
देव सिंह सरपंच और कांता देवी के बीच गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को
अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर तब तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं
जब तक इन दोनों की अपनी अपनी जरूरतें अपनी अपनी इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है
तो इसके बाद देव सिंह सरपंच कहता है
कि देखो कांता अब तो तुम हमेशा के लिए मेरे खेत में कामकाज करती रहना
और मैं तुम्हें पैसे दिया करूंगा
साथ में शारीरिक सुख भी दिया करूंगा
मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा।
कांता देवी भी कहने लगती है कि देखो सरपंच साहब
मेरे घर में गरीबी है और मैं इसी वजह से तुम्हारे साथ
अपना वक्त गुजार रही हूं
और इस तरीके से जैसे इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है
तो यह दोनों इसी के खेत से बाहर निकल जाते हैं
लेकिन उसी समय देव सिंह सरपंच का इकलौता बेटा अजय सिंह भी खेत में पहुंच जाता है।
अजय सिंह एक ऐसा लड़का होता है जो कि महिलाओं का शौकीन होता है।
महिलाएं अजय सिंह की सबसे बड़ी कमजोरी होती है।
और अजय सिंह जैसे ही इस खूबसूरत महिला कांता देवी को
अपने खेत में कामकाज करते हुए देखता है
तो अजय सिंह की नियत भी कांता देवी पर खराब हो जाती है।
इसके बाद अजय सिंह अपने पिता देव सिंह से मिलता है
और अपने पिता देव सिंह को कहने लगता है
कि पिताजी यह महिला कौन है?
अब इसके बाद देव सिंह कहते हैं
कि यह महिला बसंत सिंह की पत्नी है
और यह आज से हमारे खेत में कामकाज करना शुरू कर रही है।
यह महिला बहुत ही ईमानदार है
और बहुत ही मेहनती है।
अजय सिंह कहता है कि वह तो मुझे दिखाई दे चुका है।
और इसके बाद देव सिंह अपने बेटे अजय सिंह को कहता है
कि बेटा तुम ऐसा करना खेत का थोड़ा सा कामकाज खत्म कर लेना।
तब तक मैं गांव में जाता हूं।
मुझे और भी काम है।
इसके बाद देव सिंह अपनी मोटरसाइकिल लेकर
उसी समय अपने खेत से बाहर निकल जाता है।
लेकिन अब इस खेत में अजय सिंह और साथ में कांता देवी
यह दोनों रह जाते हैं।
अजय सिंह उसी समय इस महिला कांता देवी के पास जाता है
और कहने लगता है कि चाची तुम्हारे घर में काफी गरीबी लगती है
क्योंकि तुम्हारा जो सूट है वह फटा हुआ है।
कांता देवी कहती है कि हां हमारे घर में बहुत गरीबी है।
मेरा पति शराबी है और कमाता धमाता भी नहीं है।
इसी वजह से हमारे घर में काफी गरीबी है।
लेकिन उसी समय अजय सिंह कहता है
कि चाची तुम किसी बात की फिक्र मत करो।
जब भी तुम्हें किसी चीज की जरूरत पड़े
तुम बेझिझक मुझसे मांग सकती हो।
जब ऐसीऐसी बातें कांता देवी को कही जाती हैं
तो उसी समय कांता देवी हंसते मुस्कुराते हुए
इस लड़की अजय सिंह को कहती है
कि जमींदार साहब मुझे 100 की सख्त जरूरत है।
मुझे अपने बच्चों की फीस भरनी है
और घर का राशन पानी खरीदना है
और पैसे मेरे पास नहीं है।
लेकिन अजय सिंह बहुत ही चालाक लड़का होता है।
अजय सिंह कहने लगता है कि कोई बात नहीं
मैं तुम्हें 10000 दे दूंगा।
लेकिन आज रात के समय मैं तेरे घर पर आना चाहता हूं।
तेरे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।
कांता देवी भी हंसते मुस्कुराते हुए कहने लगती है
कि देखो जमींदार साहब तुम्हें फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है।
आज रात करीब 10:30 बजे के आसपास तुम मेरे घर पर आ जाना
मैं तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा कर दूंगी।
अब इसके बाद अजय सिंह कहता है कि चाची तुम मुझे अपना मोबाइल फोन नंबर दे दो।
इसके बाद जो चाची कांता होती है अजय सिंह को मोबाइल फोन नंबर देती है
और अजय सिंह का मोबाइल फोन नंबर अपने मोबाइल में सेव कर लेती है।
अब इसके बाद अजय सिंह उसी समय इस खेत से बाहर निकल जाता है।
थोड़ी देर के बाद कांता देवी भी देव सिंह के पशुओं का चारा काटने के बाद
गांव में आ जाती है। लगभग शाम के करीब 7:00 बज चुके होते हैं
और 7:00 बजे के आसपास अब कांता देवी एक गांव के ही मेडिकल शॉप पर जाती है।
मेडिकल शॉप पर जाने के बाद इस मेडिकल शॉप पर एक लड़का बैठता था
जिसका नाम शंकर होता है। शंकर से मिलती है
और शंकर को कहती है कि देखो शंकर
आज तुम्हें मुझे ऐसी दवाई देनी पड़ेगी
जिसको खाने के बाद आदमी बेहोश हो जाए उसको नींद आ जाए।
शंकर कहने लगता है कि चाची ऐसी दवा तो मैं तुम्हें दे सकता हूं।
लेकिन उसके लिए तुम्हें तीन चार गुना ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।
कांता देवी हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि शंकर मैं तुम्हें पैसे देने के लिए तैयार हूं।
इसके बाद शंकर इससे पैसे लेता है
और पैसे लेने के बाद बेहोश करने की दवाई दे देता है
यानी नींद की दवाई दे देता है
और इन नींद की गोलियों को खरीदने के बाद कांता देवी अपने घर पर आ जाती है।
इसके बाद कांता देवी अपने पूरे परिवार के लिए खाना तैयार करती है
और उस खाने के अंदर नींद की गोलियां मिला दी जाती हैं।
जैसे ही कांता देवी के दोनों बच्चे रुद्र और वर्षा खाना खा लेते हैं
तो आधे पौने घंटे के बाद रुद्र और वर्षा को गहरी नींद आ जाती है।
रुद्र और वर्षा अपने कमरे में जाकर गहरी नींद में सो चुके होते हैं।
रात के करीब 9:30 बजे के आसपास कांता देवी का पति बसंत कुमार
शराब के नशे में धुत होकर घर पर आ जाता है
और बसंत कुमार भी चारपाई पर लेट कर गहरी नींद में सो जाता है
और जैसे ही रात के 10:00 बजते हैं तो अब इसके बाद कांता देवी
देव सिंह के बेटे अजय सिंह के पास फोन कॉल करती है
और अजय सिंह को कहती है कि अजय मेरे दोनों बच्चे गहरी नींद में सो चुके हैं
और मेरा पति जो शराबी बसंत सिंह है वो भी गहरी नींद में सो चुका है।
तुम ऐसा करो मेरे घर पर आ जाओ
और मैं बिल्कुल तैयार हूं।
अह जैसे ही यह बातें अजय सिंह को सुनाई देती है
तो अजय सिंह उसी समय अपनी मोटरसाइकिल लेकर रात के ही समय में
कांता देवी के घर पर पहुंच जाता है।
कांता देवी के घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है।
कांता अपने घर का दरवाजा खोल देती है।
कांता देवी देखती है कि उसके सामने अजय सिंह खड़ा होता है
और इसके बाद अजय सिंह घर के अंदर आ जाता है।
कांता अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद करने के बाद
अजय सिंह को लेकर अपने बेडरूम के अंदर चली जाती है
और फिर इसके बाद अजय सिंह और कांता देवी के बीच दोनों की रजामंदी से
गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
और यह दोनों मिलकर तब तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं
जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो रात के करीब 12:30 बजे के आसपास
अजय इस घर से बाहर निकलता है।
अपने घर पर चला जाता है।
और इस तरीके से कांता देवी ने अब
देव सिंह और उसके बेटे अजय सिंह को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था।
लेकिन कांता देवी इसके बाद तो और भी दो बड़े बड़े कांड करने वाली थी
जिसके बारे में कोई कुछ भी नहीं जानता था।
और इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद
एक तारीख आ जाती है 20 जुलाई 2026 का दिन।
सुबह के करीब 10:30 बजे के आसपास का वक्त होता है।
देव सिंह सरपंच अपने खेत में चला जाता है।
लेकिन खेत में जाने के बाद देव सिंह सरपंच को पता चलता है
कि आज कांता देवी खेत में नहीं आई थी।
उसी समय देव सिंह सरपंच कांता देवी के पास फोन कॉल करता है
और कांता को कहता है कि कांता आज तू खेत में कामकाज करने क्यों नहीं आई है?
कांता देवी कहने लगती है कि सरपंच साहब
आज मुझे बहुत जरूरी काम था
और इसी वजह से मैं खेत में नहीं आई हूं।
सरपंच साहब कहने लगता है कि चलो कोई बात नहीं
आज तुम आराम कर लो
और कल से काम पर आ जाना।
इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है।
और इसके बाद दो घंटे का वक्त गुजर जाने के बाद
अब देव सिंह सरपंच अपने खेत में बैठकर शराब पीना शुरू कर देता है।
लगभग पूरा दिन बैठकर शराब पीता है
और जब शाम के करीब 4:30 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है
तो देव सिंह शराब के नशे में धुत होकर कांता देवी के पास फोन कॉल करता है
और कांता देवी को कहता है कि कांता मुझे तेरे साथ वक्त गुजारे
कई दिनों का समय गुजर चुका है
और आज मैं तेरे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।
मैं तेरे घर पर आना चाहता हूं।
कांता देवी कहती है कि मेरे घर में दोनों बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं
और इस समय तुम मुझसे नहीं मिल सकते हो।
लेकिन देव सिंह सरपंच जिद पकड़ लेता है
और कहता है कि मैं तेरे घर पर इसी समय आ रहा हूं
और तुम ऐसा करना दोनों बच्चों को कुछ पैसे देकर घर से बाहर भेज देना
और इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है।
इसके बाद कांता देवी उसी समय अपने दोनों बच्चों रुद्र और वर्षा को कहती है
कि बेटा तुम हर समय पढ़ाई करते हो। तुम ऐसा करो कुछ पैसे ले जाओ।
और पैसे लेने के बाद बाहर अपने दोस्तों के साथ खेल लेना
और जब मन करे कुछ खा लेना।
इस तरीके से कांता देवी अपने दोनों बच्चों को कुछ पैसे देती है
और पैसे लेने के बाद रुद्र और वर्षा इस घर से बाहर निकल जाते हैं।
थोड़ी देर के बाद अब कांता देवी के घर के दरवाजे पर दस्तक होती है।
कांता देवी जैसे ही अपने घर का दरवाजा खोलती है
तो देखती है कि उसके सामने देव सिंह सरपंच खड़ा होता है।
देव सिंह सरपंच ने शराब भी पी रखी थी।
इसके बाद देव सिंह सरपंच इस घर के अंदर आता है
और उसी समय घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लिया जाता है
और फिर कांता देवी देव सिंह सरपंच को लेकर सीधे ही
अपने बेडरूम के अंदर चली जाती है
और फिर देव सिंह सरपंच और कांता देवी के बीच दोनों की रजामंदी से
आज भी गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को
अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
और जैसे ही ये दोनों इस गलत काम को अंजाम दे रहे होते हैं
तो उसी समय कांता देवी का पति बसंत सिंह घर के दरवाजे पर आ जाता है।
बसंत सिंह अपने बेटे रुद्र और अपनी बेटी वर्षा
को भी साथ में लेकर आया था।
घर के दरवाजे पर खड़ा होकर कई बार आवाज लगाता है।
लेकिन 10 मिनट का वक्त गुजरने के बाद कांता देवी
अपने घर का दरवाजा खोलती है।
कांता देवी देखती है कि उसके सामने उसका पति और उसके दोनों बच्चे खड़े होते हैं।
बसंत सिंह अपने दोनों बच्चों को लेकर घर के अंदर आ जाता है
और बसंत सिंह जैसे ही कमरे में जाकर देखता है
तो बसंत की आंखें फटी की फटी रह जाती है।
बसंत सिंह देखता है कि वहां पर कमरे के अंदर
देव सिंह सरपंच नग हालत में लेटा होता है
और यह ऐसी आपत्तिजनक स्थिति में देखकर
बसंत सिंह को गुस्सा नहीं आता है। बल्कि बसंत सिंह देव सिंह सरपंच को कहता है
कि सरपंच साहब आज तो तुम हमारे घर पर आए हो
और मैं तुम्हारी कुछ सेवा करना चाहता हूं।
देव सिंह सरपंच कहता है कि तुम्हारी पत्नी ने मेरी खूब सेवा कर दी है।
बसंत सिंह सब कुछ समझ चुका होता है
लेकिन बसंत सिंह फिर भी देव सिंह सरपंच को कुछ नहीं कहता है।
उसी समय बसंत सिंह कहने लगता है कि सरपंच साहब मुझे कुछ पैसों की जरूरत थी।
देव सिंह उसी समय बच्चों के सामने कुछ पैसे बसंत सिंह को देता है
और बसंत सिंह पैसे लेकर बड़ा खुश हो जाता है।
लेकिन यह सारी बातें बच्चे भी सुन रहे होते हैं।
रुद्र सिंह और वर्षा अपने मन में सोचने लग जाते हैं
कि देव सिंह सरपंच हमारी मां के साथ गलत और गंदा काम कर रहा था।
लेकिन फिर भी हमारे पिता ने देव सिंह सरपंच को कुछ भी नहीं कहा है।
इस बात से बच्चों के दिलो दिमाग पर गहरा असर पड़ा था।
लेकिन फिर भी देव सिंह सरपंच पैसे देने के बाद
इस घर से बाहर निकल कर चला जाता है।
दूसरी तरफ बसंत सिंह भी पैसे लेकर
शराब के ठेके की तरफ चला जाता है।
अब इसके बाद रुद्र अपनी मां कांता देवी से पूछने लग जाता है
कि मां यह जो सरपंच देव सिंह है
हमारे घर पर क्या काम करने आता है?
उसी समय मां कांता देवी अपने बेटे रुद्र को कहती है
कि बेटा मैं इस सरपंच साहब के खेत में मजदूरी करती हूं
और सरपंच साहब मुझे पैसे देने के लिए मेरे घर पर आया था।
जैसे तैसे करके कांता देवी अपने दोनों बच्चों को समझा देती है।
रुद्र और वर्षा अपनी मां की सारी बातों पर यकीन कर लेते हैं।
लेकिन कहीं ना कहीं रुद्र और वर्षा के मन में
यह बात घर कर चुकी थी।
अब आगे चलकर रुद्र और वर्षा अपने माता-पिता के साथ
बहुत बड़ा कांड करने वाले थे।
इस तरीके से कई दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद
एक तारीख आ जाती है 10 अगस्त 2026 का दिन।
सुबह के करीब 8:00 बज चुके होते हैं
और कांता देवी ने अपने पूरे घर का कामकाज भी खत्म कर लिया था।
कांता देवी के दोनों बच्चे स्कूल में जा चुके होते हैं।
अब इसके बाद कांता देवी सरपंच देव सिंह के खेत में चली जाती है
और खेत में काम धंधा करना शुरू कर देती है।
पशुओं के लिए चारा काटना शुरू कर देती है।
थोड़ी देर के बाद देव सिंह सरपंच भी खेत में पहुंच जाता है।
अब देव सिंह सरपंच देखता है कि कांता देवी उसके खेत में चारा काट रही होती है
और कांता देवी की खूबसूरती और सुंदरता को देखने के बाद
देव सिंह सरपंच भी इसके पास आ जाता है
और इसके पास बैठकर मीठी मीठी बातचीत करना शुरू कर देता है।
देव सिंह सरपंच देखता है कि आज खेत में दूर दूर तक कोई भी दूसरा तीसरा किसान नहीं होता है।
और इसी बात का फायदा उठाकर देव सिंह सरपंच अब इस महिला कांता देवी को कहता है
कि देखो कांता देवी तुम्हारा पति तो एक शराबी बन चुका है।
वो तेरी किसी भी जरूरत को पूरा नहीं कर सकता है। ना तो वो तेरी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकता है
और ना ही वह तेरी शारीरिक जरूरतों को पूरा कर सकता है।
लेकिन कांता देवी भी कुछ कम नहीं होती है।
कांता देवी कहने लगती है कि सरपंच साहब तुम्हारी बात बिल्कुल सही है।
मेरा पति किसी काम का नहीं है।
अब इसके बाद सरपंच खुलकर साफ साफ शब्दों में बात करना शुरू कर देता है।
देव सिंह सरपंच कहता है कि देखो पास में ही ई के खेत है
और तुम मेरे साथ ई के खेत में चलो
और मेरे साथ वक्त गुजार कर देखो और तुम्हारी सारी जरूरतों को मैं पूरा कर दूंगा।
तुम्हें पैसे भी दिया करूंगा
और साथ में शारीरिक सुख भी दिया करूंगा।
जब ऐसीऐसी बातें कांता को कही जाती हैं
तो कांता भी हंसते मुस्कुराते हुए देव सिंह सरपंच को कहती है
कि चलो सरपंच साहब मैं तुम्हारे साथ एक के खेत में जाने के लिए तैयार हूं।
और इसके बाद देव सिंह सरपंच और यह महिला कांता देवी
दोनों ही ई के खेत के अंदर चले जाते हैं।
और ई के खेत के अंदर जाने के बाद अब
देव सिंह सरपंच और कांता देवी के बीच गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को
अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर तब तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं
जब तक इन दोनों की अपनी अपनी जरूरतें अपनी अपनी इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है
तो इसके बाद देव सिंह सरपंच कहता है
कि देखो कांता अब तो तुम हमेशा के लिए मेरे खेत में कामकाज करती रहना
और मैं तुम्हें पैसे दिया करूंगा
साथ में शारीरिक सुख भी दिया करूंगा
मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा।
कांता देवी भी कहने लगती है कि देखो सरपंच साहब
मेरे घर में गरीबी है और मैं इसी वजह से तुम्हारे साथ
अपना वक्त गुजार रही हूं
और इस तरीके से जैसे इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है
तो यह दोनों इसी के खेत से बाहर निकल जाते हैं
लेकिन उसी समय देव सिंह सरपंच का इकलौता बेटा अजय सिंह भी खेत में पहुंच जाता है।
अजय सिंह एक ऐसा लड़का होता है जो कि महिलाओं का शौकीन होता है।
महिलाएं अजय सिंह की सबसे बड़ी कमजोरी होती है।
और अजय सिंह जैसे ही इस खूबसूरत महिला कांता देवी को
अपने खेत में कामकाज करते हुए देखता है
तो अजय सिंह की नियत भी कांता देवी पर खराब हो जाती है।
इसके बाद अजय सिंह अपने पिता देव सिंह से मिलता है
और अपने पिता देव सिंह को कहने लगता है कि पिताजी यह महिला कौन है?
अब इसके बाद देव सिंह कहते हैं कि यह महिला बसंत सिंह की पत्नी है
और यह आज से हमारे खेत में कामकाज करना शुरू कर रही है।
यह महिला बहुत ही ईमानदार है
और बहुत ही मेहनती है।
अजय सिंह कहता है कि वह तो मुझे दिखाई दे चुका है।
और इसके बाद देव सिंह अपने बेटे अजय सिंह को कहता है
कि बेटा तुम ऐसा करना खेत का थोड़ा सा कामकाज खत्म कर लेना।
तब तक मैं गांव में जाता हूं।
मुझे और भी काम है।
इसके बाद देव सिंह अपनी मोटरसाइकिल लेकर
उसी समय अपने खेत से बाहर निकल जाता है।
लेकिन अब इस खेत में अजय सिंह और साथ में कांता देवी
यह दोनों रह जाते हैं।
अजय सिंह उसी समय इस महिला कांता देवी के पास जाता है
और कहने लगता है कि चाची तुम्हारे घर में काफी गरीबी लगती है
क्योंकि तुम्हारा जो सूट है वह फटा हुआ है।
कांता देवी कहती है कि हां हमारे घर में बहुत गरीबी है।
मेरा पति शराबी है और कमाता धमाता भी नहीं है।
इसी वजह से हमारे घर में काफी गरीबी है।
लेकिन उसी समय अजय सिंह कहता है
कि चाची तुम किसी बात की फिक्र मत करो।
जब भी तुम्हें किसी चीज की जरूरत पड़े
तुम बेझिझक मुझसे मांग सकती हो।
जब ऐसीऐसी बातें कांता देवी को कही जाती हैं
तो उसी समय कांता देवी हंसते मुस्कुराते हुए
इस लड़की अजय सिंह को कहती है
कि जमींदार साहब मुझे 100 की सख्त जरूरत है।
मुझे अपने बच्चों की फीस भरनी है
और घर का राशन पानी खरीदना है
और पैसे मेरे पास नहीं है।
लेकिन अजय सिंह बहुत ही चालाक लड़का होता है।
अजय सिंह कहने लगता है कि कोई बात नहीं
मैं तुम्हें 10000 दे दूंगा।
लेकिन आज रात के समय मैं तेरे घर पर आना चाहता हूं।
तेरे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।
कांता देवी भी हंसते मुस्कुराते हुए कहने लगती है
कि देखो जमींदार साहब तुम्हें फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है।
आज रात करीब 10:30 बजे के आसपास तुम मेरे घर पर आ जाना
मैं तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा कर दूंगी।
अब इसके बाद अजय सिंह कहता है कि चाची तुम मुझे अपना मोबाइल फोन नंबर दे दो।
इसके बाद जो चाची कांता होती है अजय सिंह को मोबाइल फोन नंबर देती है
और अजय सिंह का मोबाइल फोन नंबर अपने मोबाइल में सेव कर लेती है।
अब इसके बाद अजय सिंह उसी समय इस खेत से बाहर निकल जाता है।
थोड़ी देर के बाद कांता देवी भी देव सिंह के पशुओं का चारा काटने के बाद
गांव में आ जाती है। लगभग शाम के करीब 7:00 बज चुके होते हैं
और 7:00 बजे के आसपास अब कांता देवी एक गांव के ही मेडिकल शॉप पर जाती है।
मेडिकल शॉप पर जाने के बाद इस मेडिकल शॉप पर एक लड़का बैठता था
जिसका नाम शंकर होता है। शंकर से मिलती है
और शंकर को कहती है कि देखो शंकर
आज तुम्हें मुझे ऐसी दवाई देनी पड़ेगी
जिसको खाने के बाद आदमी बेहोश हो जाए उसको नींद आ जाए।
शंकर कहने लगता है कि चाची ऐसी दवा तो मैं तुम्हें दे सकता हूं।
लेकिन उसके लिए तुम्हें तीन चार गुना ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।
कांता देवी हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि शंकर मैं तुम्हें पैसे देने के लिए तैयार हूं।
इसके बाद शंकर इससे पैसे लेता है
और पैसे लेने के बाद बेहोश करने की दवाई दे देता है
यानी नींद की दवाई दे देता है
और इन नींद की गोलियों को खरीदने के बाद कांता देवी अपने घर पर आ जाती है।
इसके बाद कांता देवी अपने पूरे परिवार के लिए खाना तैयार करती है
और उस खाने के अंदर नींद की गोलियां मिला दी जाती हैं।
जैसे ही कांता देवी के दोनों बच्चे रुद्र और वर्षा खाना खा लेते हैं
तो आधे पौने घंटे के बाद रुद्र और वर्षा को गहरी नींद आ जाती है।
रुद्र और वर्षा अपने कमरे में जाकर गहरी नींद में सो चुके होते हैं।
रात के करीब 9:30 बजे के आसपास कांता देवी का पति बसंत कुमार
शराब के नशे में धुत होकर घर पर आ जाता है
और बसंत कुमार भी चारपाई पर लेट कर गहरी नींद में सो जाता है
और जैसे ही रात के 10:00 बजते हैं तो अब इसके बाद कांता देवी
देव सिंह के बेटे अजय सिंह के पास फोन कॉल करती है
और अजय सिंह को कहती है कि अजय मेरे दोनों बच्चे गहरी नींद में सो चुके हैं
और मेरा पति जो शराबी बसंत सिंह है वो भी गहरी नींद में सो चुका है।
तुम ऐसा करो मेरे घर पर आ जाओ
और मैं बिल्कुल तैयार हूं।
अह जैसे ही यह बातें अजय सिंह को सुनाई देती है
तो अजय सिंह उसी समय अपनी मोटरसाइकिल लेकर रात के ही समय में
कांता देवी के घर पर पहुंच जाता है।
कांता देवी के घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है।
कांता अपने घर का दरवाजा खोल देती है।
कांता देवी देखती है कि उसके सामने अजय सिंह खड़ा होता है
और इसके बाद अजय सिंह घर के अंदर आ जाता है।
कांता अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद करने के बाद
अजय सिंह को लेकर अपने बेडरूम के अंदर चली जाती है
और फिर इसके बाद अजय सिंह और कांता देवी के बीच दोनों की रजामंदी से
गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
और यह दोनों मिलकर तब तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं
जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो रात के करीब 12:30 बजे के आसपास
अजय इस घर से बाहर निकलता है।
अपने घर पर चला जाता है।
और इस तरीके से कांता देवी ने अब
देव सिंह और उसके बेटे अजय सिंह को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था।
लेकिन कांता देवी इसके बाद तो और भी दो बड़े बड़े कांड करने वाली थी
जिसके बारे में कोई कुछ भी नहीं जानता था।
और इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद
एक तारीख आ जाती है 10 अगस्त 2026 का दिन।
सुबह के करीब 10:30 बजे के आसपास का वक्त होता है।
देव सिंह सरपंच अपने खेत में चला जाता है।
लेकिन खेत में जाने के बाद देव सिंह सरपंच को पता चलता है
कि आज कांता देवी खेत में नहीं आई थी।
उसी समय देव सिंह सरपंच कांता देवी के पास फोन कॉल करता है
और कांता को कहता है कि कांता आज तू खेत में कामकाज करने क्यों नहीं आई है?
कांता देवी कहने लगती है कि सरपंच साहब
आज मुझे बहुत जरूरी काम था
और इसी वजह से मैं खेत में नहीं आई हूं।
सरपंच साहब कहने लगता है कि चलो कोई बात नहीं
आज तुम आराम कर लो
और कल से काम पर आ जाना।
इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है।
और इसके बाद दो घंटे का वक्त गुजर जाने के बाद
अब देव सिंह सरपंच अपने खेत में बैठकर शराब पीना शुरू कर देता है।
लगभग पूरा दिन बैठकर शराब पीता है
और जब शाम के करीब 4:30 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है
तो देव सिंह शराब के नशे में धुत होकर कांता देवी के पास फोन कॉल करता है
और कांता देवी को कहता है कि कांता मुझे तेरे साथ वक्त गुजारे
कई दिनों का समय गुजर चुका है
और आज मैं तेरे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।
मैं तेरे घर पर आना चाहता हूं।
कांता देवी कहती है कि मेरे घर में दोनों बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं
और इस समय तुम मुझसे नहीं मिल सकते हो।
लेकिन देव सिंह सरपंच जिद पकड़ लेता है
और कहता है कि मैं तेरे घर पर इसी समय आ रहा हूं
और तुम ऐसा करना दोनों बच्चों को कुछ पैसे देकार घर से बाहर भेज देना
और इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है।
इसके बाद कांता देवी उसी समय अपने दोनों बच्चों रुद्र और वर्षा को कहती है
कि बेटा तुम हर समय पढ़ाई करते हो। तुम ऐसा करो कुछ पैसे ले जाओ।
और पैसे लेने के बाद बाहर अपने दोस्तों के साथ खेल लेना
और जब मन करे कुछ खा लेना।
इस तरीके से कांता देवी अपने दोनों बच्चों को कुछ पैसे देती है
और पैसे लेने के बाद रुद्र और वर्षा इस घर से बाहर निकल जाते हैं।
थोड़ी देर के बाद अब कांता देवी के घर के दरवाजे पर दस्तक होती है।
कांता देवी जैसे ही अपने घर का दरवाजा खोलती है
तो देखती है कि उसके सामने देव सिंह सरपंच खड़ा होता है।
देव सिंह सरपंच ने शराब भी पी रखी थी।
इसके बाद देव सिंह सरपंच इस घर के अंदर आता है
और उसी समय घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लिया जाता है
और फिर कांता देवी देव सिंह सरपंच को लेकर सीधे ही
अपने बेडरूम के अंदर चली जाती है
और फिर देव सिंह सरपंच और कांता देवी के बीच दोनों की रजामंदी से
आज भी गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को
अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
और जैसे ही ये दोनों इस गलत काम को अंजाम दे रहे होते हैं
तो उसी समय कांता देवी का पति बसंत सिंह घर के दरवाजे पर आ जाता है।
बसंत सिंह अपने बेटे रुद्र और अपनी बेटी वर्षा
को भी साथ में लेकर आया था।
घर के दरवाजे पर खड़ा होकर कई बार आवाज लगाता है।
लेकिन 10 मिनट का वक्त गुजरने के बाद कांता देवी
अपने घर का दरवाजा खोलती है।
कांता देवी देखती है कि उसके सामने उसका पति और उसके दोनों बच्चे खड़े होते हैं।
बसंत सिंह अपने दोनों बच्चों को लेकर घर के अंदर आ जाता है
और बसंत सिंह जैसे ही कमरे में जाकर देखता है
तो बसंत की आंखें फटी की फटी रह जाती है।
बसंत सिंह देखता है कि वहां पर कमरे के अंदर
देव सिंह सरपंच नग हालत में लेटा होता है
और यह ऐसी आपत्तिजनक स्थिति में देखकर
बसंत सिंह को गुस्सा नहीं आता है। बल्कि बसंत सिंह देव सिंह सरपंच को कहता है
कि सरपंच साहब आज तो तुम हमारे घर पर आए हो
और मैं तुम्हारी कुछ सेवा करना चाहता हूं।
देव सिंह सरपंच कहता है कि तुम्हारी पत्नी ने मेरी खूब सेवा कर दी है।
बसंत सिंह सब कुछ समझ चुका होता है
लेकिन बसंत सिंह फिर भी देव सिंह सरपंच को कुछ नहीं कहता है।
उसी समय बसंत सिंह कहने लगता है कि सरपंच साहब मुझे कुछ पैसों की जरूरत थी।
देव सिंह उसी समय बच्चों के सामने कुछ पैसे बसंत सिंह को देता है
और बसंत सिंह पैसे लेकर बड़ा खुश हो जाता है।
लेकिन यह सारी बातें बच्चे भी सुन रहे होते हैं।
रुद्र सिंह और वर्षा अपने मन में सोचने लग जाते हैं
कि देव सिंह सरपंच हमारी मां के साथ गलत और गंदा काम कर रहा था।
लेकिन फिर भी हमारे पिता ने देव सिंह सरपंच को कुछ भी नहीं कहा है।
इस बात से बच्चों के दिलो दिमाग पर गहरा असर पड़ा था।
लेकिन फिर भी देव सिंह सरपंच पैसे देने के बाद
इस घर से बाहर निकल कर चला जाता है।
दूसरी तरफ बसंत सिंह भी पैसे लेकर
शराब के ठेके की तरफ चला जाता है।
अब इसके बाद रुद्र अपनी मां कांता देवी से पूछने लग जाता है
कि मां यह जो सरपंच देव सिंह है
हमारे घर पर क्या काम करने आता है?
उसी समय मां कांता देवी अपने बेटे रुद्र को कहती है
कि बेटा मैं इस सरपंच साहब के खेत में मजदूरी करती हूं
और सरपंच साहब मुझे पैसे देने के लिए मेरे घर पर आया था।
जैसे तैसे करके कांता देवी अपने दोनों बच्चों को समझा देती है।
रुद्र और वर्षा अपनी मां की सारी बातों पर यकीन कर लेते हैं।
लेकिन कहीं ना कहीं रुद्र और वर्षा के मन में
यह बात घर कर चुकी थी।
अब आगे चलकर रुद्र और वर्षा अपने माता-पिता के साथ
बहुत बड़ा कांड करने वाले थे।
इस तरीके से कई दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद
एक तारीख आ जाती है 10 अगस्त 2026 का दिन।
सुबह के करीब 8:00 बज चुके होते हैं
और कांता देवी ने अपने पूरे घर का कामकाज भी खत्म कर लिया था।
कांता देवी के दोनों बच्चे स्कूल में जा चुके होते हैं।
अब इसके बाद कांता देवी सरपंच देव सिंह के खेत में चली जाती है
और खेत में काम धंधा करना शुरू कर देती है।
पशुओं के लिए चारा काटना शुरू कर देती है।
थोड़ी देर के बाद देव सिंह सरपंच भी खेत में पहुंच जाता है।
अब देव सिंह सरपंच देखता है कि कांता देवी उसके खेत में चारा काट रही होती है
और कांता देवी की खूबसूरती और सुंदरता को देखने के बाद
देव सिंह सरपंच भी इसके पास आ जाता है
और इसके पास बैठकर मीठी मीठी बातचीत करना शुरू कर देता है।
देव सिंह सरपंच देखता है कि आज खेत में दूर दूर तक कोई भी दूसरा तीसरा किसान नहीं होता है।
और इसी बात का फायदा उठाकर देव सिंह सरपंच अब इस महिला कांता देवी को कहता है
कि देखो कांता देवी तुम्हारा पति तो एक शराबी बन चुका है।
वो तेरी किसी भी जरूरत को पूरा नहीं कर सकता है। ना तो वो तेरी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकता है
और ना ही वह तेरी शारीरिक जरूरतों को पूरा कर सकता है।
लेकिन कांता देवी भी कुछ कम नहीं होती है।
कांता देवी कहने लगती है कि सरपंच साहब तुम्हारी बात बिल्कुल सही है।
मेरा पति किसी काम का नहीं है।
अब इसके बाद सरपंच खुलकर साफ साफ शब्दों में बात करना शुरू कर देता है।
देव सिंह सरपंच कहता है कि देखो पास में ही ई के खेत है
और तुम मेरे साथ ई के खेत में चलो
और मेरे साथ वक्त गुजार कर देखो और तुम्हारी सारी जरूरतों को मैं पूरा कर दूंगा।
तुम्हें पैसे भी दिया करूंगा
और साथ में शारीरिक सुख भी दिया करूंगा।
जब ऐसीऐसी बातें कांता को कही जाती हैं
तो कांता भी हंसते मुस्कुराते हुए देव सिंह सरपंच को कहती है
कि चलो सरपंच साहब मैं तुम्हारे साथ एक के खेत में जाने के लिए तैयार हूं।
और इसके बाद देव सिंह सरपंच और यह महिला कांता देवी
दोनों ही ई के खेत के अंदर चले जाते हैं।
और ई के खेत के अंदर जाने के बाद अब
देव सिंह सरपंच और कांता देवी के बीच गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को
अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर तब तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं
जब तक इन दोनों की अपनी अपनी जरूरतें अपनी अपनी इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है
तो इसके बाद देव सिंह सरपंच कहता है
कि देखो कांता अब तो तुम हमेशा के लिए मेरे खेत में कामकाज करती रहना
और मैं तुम्हें पैसे दिया करूंगा
साथ में शारीरिक सुख भी दिया करूंगा
मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा।
कांता देवी भी कहने लगती है कि देखो सरपंच साहब
मेरे घर में गरीबी है और मैं इसी वजह से तुम्हारे साथ
अपना वक्त गुजार रही हूं
और इस तरीके से जैसे इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है
तो यह दोनों इसी के खेत से बाहर निकल जाते हैं
लेकिन उसी समय देव सिंह सरपंच का इकलौता बेटा अजय सिंह भी खेत में पहुंच जाता है।
अजय सिंह एक ऐसा लड़का होता है जो कि महिलाओं का शौकीन होता है।
महिलाएं अजय सिंह की सबसे बड़ी कमजोरी होती है।
और अजय सिंह जैसे ही इस खूबसूरत महिला कांता देवी को
अपने खेत में कामकाज करते हुए देखता है
तो अजय सिंह की नियत भी कांता देवी पर खराब हो जाती है।
इसके बाद अजय सिंह अपने पिता देव सिंह से मिलता है
और अपने पिता देव सिंह को कहने लगता है कि पिताजी यह महिला कौन है?
अब इसके बाद देव सिंह कहते हैं कि यह महिला बसंत सिंह की पत्नी है
और यह आज से हमारे खेत में कामकाज करना शुरू कर रही है।
यह महिला बहुत ही ईमानदार है
और बहुत ही मेहनती है।
अजय सिंह कहता है कि वह तो मुझे दिखाई दे चुका है।
और इसके बाद देव सिंह अपने बेटे अजय सिंह को कहता है
कि बेटा तुम ऐसा करना खेत का थोड़ा सा कामकाज खत्म कर लेना।
तब तक मैं गांव में जाता हूं।
मुझे और भी काम है।
इसके बाद देव सिंह अपनी मोटरसाइकिल लेकर
उसी समय अपने खेत से बाहर निकल जाता है।
लेकिन अब इस खेत में अजय सिंह और साथ में कांता देवी
यह दोनों रह जाते हैं।
अजय सिंह उसी समय इस महिला कांता देवी के पास जाता है
और कहने लगता है कि चाची तुम्हारे घर में काफी गरीबी लगती है
क्योंकि तुम्हारा जो सूट है वह फटा हुआ है।
कांता देवी कहती है कि हां हमारे घर में बहुत गरीबी है।
मेरा पति शराबी है और कमाता धमाता भी नहीं है।
इसी वजह से हमारे घर में काफी गरीबी है।
लेकिन उसी समय अजय सिंह कहता है
कि चाची तुम किसी बात की फिक्र मत करो।
जब भी तुम्हें किसी चीज की जरूरत पड़े
तुम बेझिझक मुझसे मांग सकती हो।
जब ऐसीऐसी बातें कांता देवी को कही जाती हैं
तो उसी समय कांता देवी हंसते मुस्कुराते हुए
इस लड़की अजय सिंह को कहती है
कि जमींदार साहब मुझे 100 की सख्त जरूरत है।
मुझे अपने बच्चों की फीस भरनी है
और घर का राशन पानी खरीदना है
और पैसे मेरे पास नहीं है।
लेकिन अजय सिंह बहुत ही चालाक लड़का होता है।
अजय सिंह कहने लगता है कि कोई बात नहीं
मैं तुम्हें 10000 दे दूंगा।
लेकिन आज रात के समय मैं तेरे घर पर आना चाहता हूं।
तेरे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।
कांता देवी भी हंसते मुस्कुराते हुए कहने लगती है
कि देखो जमींदार साहब तुम्हें फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है।
आज रात करीब 10:30 बजे के आसपास तुम मेरे घर पर आ जाना
मैं तुम्हारी सारी जरूरतों को पूरा कर दूंगी।
अब इसके बाद अजय सिंह कहता है कि चाची तुम मुझे अपना मोबाइल फोन नंबर दे दो।
इसके बाद जो चाची कांता होती है अजय सिंह को मोबाइल फोन नंबर देती है
और अजय सिंह का मोबाइल फोन नंबर अपने मोबाइल में सेव कर लेती है।
अब इसके बाद अजय सिंह उसी समय इस खेत से बाहर निकल जाता है।
थोड़ी देर के बाद कांता देवी भी देव सिंह के पशुओं का चारा काटने के बाद
गांव में आ जाती है। लगभग शाम के करीब 7:00 बज चुके होते हैं
और 7:00 बजे के आसपास अब कांता देवी एक गांव के ही मेडिकल शॉप पर जाती है।
मेडिकल शॉप पर जाने के बाद इस मेडिकल शॉप पर एक लड़का बैठता था
जिसका नाम शंकर होता है। शंकर से मिलती है
और शंकर को कहती है कि देखो शंकर
आज तुम्हें मुझे ऐसी दवाई देनी पड़ेगी
जिसको खाने के बाद आदमी बेहोश हो जाए उसको नींद आ जाए।
शंकर कहने लगता है कि चाची ऐसी दवा तो मैं तुम्हें दे सकता हूं।
लेकिन उसके लिए तुम्हें तीन चार गुना ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे।
कांता देवी हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि शंकर मैं तुम्हें पैसे देने के लिए तैयार हूं।
इसके बाद शंकर इससे पैसे लेता है
और पैसे लेने के बाद बेहोश करने की दवाई दे देता है
यानी नींद की दवाई दे देता है
और इन नींद की गोलियों को खरीदने के बाद कांता देवी अपने घर पर आ जाती है।
इसके बाद कांता देवी अपने पूरे परिवार के लिए खाना तैयार करती है
और उस खाने के अंदर नींद की गोलियां मिला दी जाती हैं।
जैसे ही कांता देवी के दोनों बच्चे रुद्र और वर्षा खाना खा लेते हैं
तो आधे पौने घंटे के बाद रुद्र और वर्षा को गहरी नींद आ जाती है।
रुद्र और वर्षा अपने कमरे में जाकर गहरी नींद में सो चुके होते हैं।
रात के करीब 9:30 बजे के आसपास कांता देवी का पति बसंत कुमार
शराब के नशे में धुत होकर घर पर आ जाता है
और बसंत कुमार भी चारपाई पर लेट कर गहरी नींद में सो जाता है
और जैसे ही रात के 10:00 बजते हैं तो अब इसके बाद कांता देवी
देव सिंह के बेटे अजय सिंह के पास फोन कॉल करती है
और अजय सिंह को कहती है कि अजय मेरे दोनों बच्चे गहरी नींद में सो चुके हैं
और मेरा पति जो शराबी बसंत सिंह है वो भी गहरी नींद में सो चुका है।
तुम ऐसा करो मेरे घर पर आ जाओ
और मैं बिल्कुल तैयार हूं।
अह जैसे ही यह बातें अजय सिंह को सुनाई देती है
तो अजय सिंह उसी समय अपनी मोटरसाइकिल लेकर रात के ही समय में
कांता देवी के घर पर पहुंच जाता है।
कांता देवी के घर के दरवाजे पर दस्तक दी जाती है।
कांता अपने घर का दरवाजा खोल देती है।
कांता देवी देखती है कि उसके सामने अजय सिंह खड़ा होता है
और इसके बाद अजय सिंह घर के अंदर आ जाता है।
कांता अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद करने के बाद
अजय सिंह को लेकर अपने बेडरूम के अंदर चली जाती है
और फिर इसके बाद अजय सिंह और कांता देवी के बीच दोनों की रजामंदी से
गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
और यह दोनों मिलकर तब तक इस गलत काम को अंजाम देते हैं
जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे इन दोनों की इच्छाएं पूरी हो जाती है तो रात के करीब 12:30 बजे के आसपास
अजय इस घर से बाहर निकलता है।
अपने घर पर चला जाता है।
और इस तरीके से कांता देवी ने अब
देव सिंह और उसके बेटे अजय सिंह को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया था।
लेकिन कांता देवी इसके बाद तो और भी दो बड़े बड़े कांड करने वाली थी
जिसके बारे में कोई कुछ भी नहीं जानता था।
और इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद
एक तारीख आ जाती है 10 अगस्त 2026 का दिन।
सुबह के करीब 10:30 बजे के आसपास का वक्त होता है।
देव सिंह सरपंच अपने खेत में चला जाता है।
लेकिन खेत में जाने के बाद देव सिंह सरपंच को पता चलता है
कि आज कांता देवी खेत में नहीं आई थी।
उसी समय देव सिंह सरपंच कांता देवी के पास फोन कॉल करता है
और कांता को कहता है कि कांता आज तू खेत में कामकाज करने क्यों नहीं आई है?
कांता देवी कहने लगती है कि सरपंच साहब
आज मुझे बहुत जरूरी काम था
और इसी वजह से मैं खेत में नहीं आई हूं।
सरपंच साहब कहने लगता है कि चलो कोई बात नहीं
आज तुम आराम कर लो
और कल से काम पर आ जाना।
इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है।
और इसके बाद दो घंटे का वक्त गुजर जाने के बाद
अब देव सिंह सरपंच अपने खेत में बैठकर शराब पीना शुरू कर देता है।
लगभग पूरा दिन बैठकर शराब पीता है
और जब शाम के करीब 4:30 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है
तो देव सिंह शराब के नशे में धुत होकर कांता देवी के पास फोन कॉल करता है
और कांता देवी को कहता है कि कांता मुझे तेरे साथ वक्त गुजारे
कई दिनों का समय गुजर चुका है
और आज मैं तेरे साथ वक्त गुजारना चाहता हूं।
मैं तेरे घर पर आना चाहता हूं।
कांता देवी कहती है कि मेरे घर में दोनों बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं
और इस समय तुम मुझसे नहीं मिल सकते हो।
लेकिन देव सिंह सरपंच जिद पकड़ लेता है
और कहता है कि मैं तेरे घर पर इसी समय आ रहा हूं
और तुम ऐसा करना दोनों बच्चों को कुछ पैसे देकार घर से बाहर भेज देना
औऔर इसके बाद फोन कॉल काट दिया जाता है।
इसके बाद कांता देवी उसी समय अपने दोनों बच्चों रुद्र और वर्षा को कहती है
कि बेटा तुम हर समय पढ़ाई करते हो। तुम ऐसा करो कुछ पैसे ले जाओ।
औऔर पैसे लेने के बाद बाहर अपने दोस्तों के साथ खेल लेना
औऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔऔर जब मन करे कुछ खा लेना।
इस तरीके से कांता देवी अपने दोनों बच्चों को कुछ पैसे देती है
औऔर पैसे लेने के बाद रुद्र और वर्षा इस घर से बाहर निकल जाते हैं।
थोड़ी देर के बाद अब कांता देवी के घर के दरवाजे पर दस्तक होती है।
कांता देवी जैसे ही अपने घर का दरवाजा खोलती है
तो देखती है कि उसके सामने देव सिंह सरपंच खड़ा होता है।
देव सिंह सरपंच ने शराब भी पी रखी थी।
इसके बाद देव सिंह सरपंच इस घर के अंदर आता है
औऔर उसी समय घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लिया जाता है
औऔर फिर कांता देवी देव सिंह सरपंच को लेकर सीधे ही
अपने बेडरूम के अंदर चली जाती है
औऔर फिर देव सिंह सरपंच और कांता देवी के बीच दोनों की रजामंदी से
आज भी गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी अपनी जरूरतों को
अपनी अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
औऔर जैसे ही ये दोनों इस गलत काम को अंजाम दे रहे होते हैं
तो उसी समय कांता देवी का पति बसंत सिंह घर के दरवाजे पर आ जाता है।
बसंत सिंह अपने बेटे रुद्र और अपनी बेटी वर्षा
को भी साथ में लेकर आया था।
घर के दरवाजे पर खड़ा होकर कई बार आवाज लगाता है।
लेकिन 10 मिनट का वक्त गुजरने के बाद कांता देवी
अपने घर का दरवाजा खोलती है।
कांता देवी देखती है कि उसके सामने उसका पति और उसके दोनों बच्चे खड़े होते हैं।
बसंत सिंह अपने दोनों बच्चों को लेकर घर के अंदर आ जाता है
औऔर बसंत सिंह जैसे ही कमरे में जाकर देखता है
तो बसंत की आंखें फटी की फटी रह जाती है।
बसंत सिंह देखता है कि वहां पर कमरे के अंदर
देव सिंह सरपंच नग हालत में लेटा होता है
औऔर यह ऐसी आपत्तिजनक स्थिति में देखकर
बसंत सिंह को गुस्सा नहीं आता है। बल्कि बसंत सिंह देव सिंह सरपंच को कहता है
कि सरपंच साहब आज तो तुम हमारे घर पर आए हो
औऔर मैं तुम्हारी कुछ सेवा करना चाहता हूं।
देव सिंह सरपंच कहता है कि तुम्हारी पत्नी ने मेरी खूब सेवा कर दी है।
बसंत सिंह सब कुछ समझ चुका होता है
लेकिन बसंत सिंह फिर भी देव सिंह सरपंच को कुछ नहीं कहता है।
उसी समय बसंत सिंह कहने लगता है कि सरपंच साहब मुझे कुछ पैसों की जरूरत थी।
देव सिंह उसी समय बच्चों के सामने कुछ पैसे बसंत सिंह को देता है
औऔर बसंत सिंह पैसे लेकर बड़ा खुश हो जाता है।
लेकिन यह सारी बातें बच्चे भी सुन रहे होते हैं।
रुद्र सिंह और वर्षा अपने मन में सोचने लग जाते हैं
कि देव सिंह सरपंच हमारी मां के साथ गलत और गंदा काम कर रहा था।
लेकिन फिर भी हमारे पिता ने देव सिंह सरपंच को कुछ भी नहीं कहा है।
इस बात से बच्चों के दिलो दिमाग पर गहरा असर पड़ा था।
लेकिन फिर भी देव सिंह सरपंच पैसे देने के बाद
इस घर से बाहर निकल कर चला जाता है।
दूसरी तरफ बसंत सिंह भी पैसे लेकर
शराब के ठेके की तरफ चला जाता है।
अब इसके बाद रुद्र अपनी मां कांता देवी से पूछने लग जाता है
कि मां यह जो सरपंच देव सिंह है
हमारे घर पर क्या काम करने आता है?
उसी समय मां कांता देवी अपने बेटे रुद्र को कहती है
कि बेटा मैं इस सरपंच साहब के खेत में मजदूरी करती हूं
औऔर सरपंच साहब मुझे पैसे देने के लिए मेरे घर पर आया था।
जैसे तैसे करके कांता देवी अपने दोनों बच्चों को समझा देती है।
रुद्र और वर्षा अपनी मां की सारी बातों पर यकीन कर लेते हैं।
लेकिन कहीं ना कहीं रुद्र और वर्षा के मन में
यह बात घर कर चुकी थी।
अब आगे चलकर रुद्र और वर्षा अपने माता-पिता के साथ
बहुत बड़ा कांड करने वाले थे।
इस तरीके से कई दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद
एक तारीख आ जाती है 10 अगस्त 2026 का दिन।
सुबह के करीब 8:00 बज चुके होते हैं
और कांता देवी ने अपने पूरे घर का कामकाज भी खत्म कर लिया था।
कांता देवी के दोनों बच्चे स्कूल में जा चुके होते हैं।
अब इसके बाद कांता देवी सरपंच देव सिंह के खेत में चली जाती है
औऔर खेत में काम धंधा करना शुरू कर देती है।
पशुओं के लिए चारा काटना शुरू कर देती है।
थोड़ी देर के बाद देव सिंह सरपंच भी खेत में पहुंच जाता है।
अब