(PART 3) देहरादून में शहीद आर्मी कर्नल के इकलौते बेटे के कत्ल में करोड़पति सगी मां की भूमिका की पूरी कहानी! – News

(PART 3) देहरादून में शहीद आर्मी कर्नल के इकलौते बेटे के कत्ल में करोड़पति सगी मां की भूमिका की पूरी कहानी!

(PART 3) देहरादून में शहीद आर्मी कर्नल के इकलौते बेटे के कत्ल में करोड़पति सगी मां की भूमिका की पूरी कहानी!

भाग 3: परिवार का अंतिम सदमा और समाज की आवाज

अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने कोर्ट में एक और बयान दिया। उन्होंने आवाज़ काँपते हुए कहा, “मेरा पति बहुत समझदार था, लेकिन बिना शर्मा का डर उसको अंधा कर गया था। वे रोज शाम को फोन करते, ‘मां, मैं तुम्हारे लिए सब कर सकता हूँ, सिर्फ 50 प्रतिशत दे दो।’ लेकिन बिना शर्मा हर बार इंकार कर देतीं। ‘जमीन मेरे नाम है, बेटा, तुम्हारा क्या काम?’ मैंने उन्हें समझाया था कि अर्जुन का बाप कर्नल रमेश चंद शहीद हुए थे, उनकी आत्मा शांति पाए, लेकिन वे शांति नहीं पा रहे थे।” अभिलाषा के आँसू रोक नहीं पा रहे थे। उनके छोटे बेटे विक्रम, जो 12 साल का था, कोर्ट के बाहर बैठा रो रहा था। उसने पूछा, “मम्मी, पापा क्यों नहीं आए?” अभिलाषा ने उसे गले लगाया और फुसफुसाया, “बेटा, पापा अब जाग रहे हैं।”

विक्रम की छोटी बहन प्रिया, 8 साल की, हर रात अपने बिस्तर पर अर्जुन के फोटो को देखती थी। वह सोचती, “पापा ने मुझे साइकिल दी थी, वह कहते थे कि जैसे दादा की।” लेकिन अब दादा नहीं थे। अभिलाषा ने वकील से कहा कि वे बच्चों को अब विनोद के घर नहीं छोड़ना चाहतीं। वे चाहतीं कि बच्चे उनके साथ रहें, ताकि परिवार का कोई टुकड़ा न टूटे। लेकिन बिना शर्मा की प्रॉपर्टी के केस में अब अभिलाषा भी शामिल हो गई थी। कोर्ट ने अभिलाषा को भी गवाह माना और कहा, “तुम अर्जुन की विधवा हो, तुम्हारा बयान बहुत महत्वपूर्ण है।” अभिलाषा ने पुलिस को और सबूत दिए। उन्होंने बताया कि अर्जुन ने उन्हें एक पुराना डायरी में लिखा था, “मां का रिश्ता गलत है, लेकिन मैं हार नहीं मानूँगा।” यह डायरी पुलिस के पास थी और कोर्ट में पेश की गई।

देहरादून में लोग इस घटना पर चर्चा करते थे। बसंत विहार के रिश्तेदार शाम को छत पर बैठकर कहते, “पैसे ने परिवार तोड़ दिया। बिना शर्मा ने 38 साल से विनोद को पैसे दिए, लेकिन कभी उसे बेटा नहीं माना। विनोद अर्जुन को अपना भाई समझता था, लेकिन बिना शर्मा उसे देखकर भी नहीं करती थीं।” कई लोग कहते, “डॉक्टर अजय खन्ना सिर्फ पैसे के लिए था। उसने 14 करोड़ में सौदा किया, लेकिन शर्त रखी 16 करोड़ की। वह जानता था कि बिना शर्मा पैसे लौटाएगी नहीं।” अर्जुन की दादी, कर्नल रमेश चंद की माँ, जो अब देहरादून के एक छोटे से फ्लैट में अकेली रहती थीं, हर शाम अर्जुन के फोटो को देखतीं। वे रोतीं और कहतीं, “मेरा पोता समझदार था, लेकिन मां का अहंकार उसको अंधा कर गया। अर्जुन हर दिन कहता, ‘दादी, मैं मां के साथ बात करूँगा, लेकिन वो नहीं मानतीं।’”

दादी ने पुलिस को एक पुराना फोन कॉल दिया। उसमें अर्जुन ने कहा था, “दादी, मैं विनोद पर एफआईआर कर रहा हूँ। मां का रिश्ता गलत है।” दादी ने कहा, “बेटा, मैंने भी कहा था कि वह रिश्ता अजीब है।” लेकिन बिना शर्मा ने दादी को भी धमकी दी थी। उन्होंने कहा था, “मेरे जमीन के लिए सब कुछ करो, वरना तुम्हारा पोता भी खत्म।” यह बात पुलिस के रिकॉर्ड में थी और अब कोर्ट में सुनवाई हुई।

अब विनोद उनियाल को जेल में सालों गुजरने पड़ेंगे। जेल के अंदर भी उसके साथी उसे घूरते थे। उन्होंने बताया कि विनोद ने अर्जुन को पहले से ही धमकी दी थी। “अगर तुम मां के साथ मतलब नहीं रखोगे, तो मैं सब संभाल लूँगा।” लेकिन अर्जुन ने इनकार कर दिया। विनोद ने फिर भी योजना बनाई। जेल के कैदियों ने विनोद से पूछा, “तुमने अर्जुन को क्यों मारा?” विनोद ने कहा, “मां ने मुझे कभी नहीं माना। वह सिर्फ अर्जुन के पिताजी के नाम की जमीन चाहती थी। मैंने सोचा कि अर्जुन को हटाकर सब अपने नाम कर लूँगा।” विनोद की पत्नी संगीता उनियाल भी जेल में थी। उसने कोर्ट में कहा, “मैंने देखा था कि बिना शर्मा अर्जुन को बेटा नहीं मानती थीं। वह उन्हें सिर्फ ‘बेटा’ कहकर बुलाती थी, लेकिन असल में नहीं।” संगीता ने पुलिस को बताया कि विनोद ने डॉक्टर अजय से कहा था, “अब समय आ गया है। अर्जुन को खत्म कर दो।”

दोस्तों, यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है। यह परिवार के अंदरूनी संघर्ष, पैसे के अहंकार, और रिश्तों की कीमत की कहानी है। बिना शर्मा ने 38 साल से विनोद को पैसे दिए, लेकिन कभी उसे बेटा नहीं माना। विनोद ने अर्जुन को अपना भाई समझा, लेकिन बिना शर्मा ने उसे कभी नहीं देखा। डॉक्टर अजय ने सिर्फ पैसे के लिए साथ दिया। दोनों शूटर पंकज राणा और राजीव उर्फ राजू सिर्फ काम के लिए थे। पंकज ने जेल में कहा, “विनोद ने 10 लाख दिए थे। हमने सीने पर तमंचा लगाया और शूट किया। राजीव ने भी यही किया।” राजीव ने कहा, “मुझे पता था कि अर्जुन बिना शर्मा का बेटा है, लेकिन मैंने सोचा कि मां का पैसे ज्यादा है।”

अब परिवार टूट चुका था। अभिलाषा और उसके बच्चे बेसुध हैं। बिना शर्मा जेल में बैठी सोचती हैं कि अगर उन्होंने अर्जुन से बात की होती, तो शायद यह हत्याकांड नहीं होता। अर्जुन की याद में हर रात वे रोती हैं। उनके बच्चे अब बड़े हो रहे हैं, लेकिन उनके दादा नहीं हैं। विक्रम अब स्कूल में कहता, “मेरा पापा शहीद है, लेकिन मैं मां के साथ रहूँगा।” प्रिया भी वही कहती। लेकिन दिल में सदमा था। अभिलाषा ने सोचा, “मैंने अर्जुन को समझाया था कि बिना शर्मा से बात करो, लेकिन वो नहीं मानता था।”

पुलिस और कोर्ट ने अपना काम किया। सबूत साफ हो गए। विनोद उनियाल, डॉक्टर अजय खन्ना, बिना शर्मा और दोनों शूटर को सजा सुनाई गई। जून 2026 तक सभी जेल में थे। विनोद को गैंगस्टर एक्ट के तहत 15 साल की सजा, डॉक्टर को 12 साल, बिना शर्मा को 25 साल, पंकज और राजीव को 10 साल की सजा। लेकिन हत्या का केस अलग से चल रहा था। कोर्ट ने कहा, “सबूत बहुत मजबूत हैं। सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर, फोन कॉल, सब कुछ साफ है।”

देहरादून में लोग इस घटना की चर्चा करते हैं। कई लोग कहते, “पैसे ने परिवार तोड़ दिया।” कुछ कहते, “बिना शर्मा की अहंकार ने सब बर्बाद कर दिया।” कुछ कहते, “अर्जुन समझदार था, लेकिन मां के डर से अंधा हो गया।” अर्जुन की दादी ने एक इंटरव्यू में कहा, “मेरा पोता कहता था, ‘दादी, मैं मां के साथ बात करूँगा।’ लेकिन मां ने कहा, ‘बेटा, सब मेरे नाम है।’ मैंने कहा था कि वह गलती कर रही है।”

अब इस घटना से सिखने वाले सबक बहुत हैं। परिवार में कोई भी झगड़ा गलत रास्ते की ओर ले जाता है। पैसे, जमीन और रिश्तों को सही तरीके से समझना जरूरी है। अगर मां और बेटे ने एक-दूसरे को समझ लिया होता, तो शायद यह हत्याकांड नहीं होता। अगर बिना शर्मा ने अर्जुन से बात की होती, तो शायद वे आज भी जीवित होते और परिवार खुशहाल होते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

आज भी देहरादून में लोग इस घटना की चर्चा करते हैं और कहते हैं कि हर विवाद को समझदारी से हल करना चाहिए। अगर कोई विवाद हो तो वकील या रिश्तेदारों से बात करो, कोर्ट तक न पहुँचो। यही सीख आज भी कई परिवार ले रहे हैं। पैसे से ज्यादा रिश्ते की कीमत है। रिश्तों को तोड़ने से पहले समझो।

अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने फिर कहा, “मेरा पति बहुत समझदार था, लेकिन मां का डर उसको अंधा कर गया था। मैंने कोर्ट में सबूत दिए हैं कि बिना शर्मा ने साजिश रची थी।” उनके बच्चे अब उसके साथ रहते हैं। वे हर दिन अर्जुन की याद में जीते हैं। बिना शर्मा को अपनी गलती का अहसास हुआ। वे जेल में बैठी खुद को सजा देती हैं कि उन्होंने अपने बेटे को इतना परेशान किया। लेकिन कानून ने सब ठीक कर दिया।

यह घटना सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है। यह परिवार के रिश्तों, पैसे और अहंकार की कहानी है। आज भी कई लोग इस घटना से सीख रहे हैं कि रिश्तों को तोड़ने से पहले समझो। अगर मां और बेटे ने एक-दूसरे को समझ लिया होता, तो शायद अर्जुन आज भी जीवित होते और परिवार खुशहाल होते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पुलिस और कोर्ट ने अपना काम किया। विनोद उनियाल को अब जेल में सालों गुजरने पड़ेंगे। डॉक्टर अजय खन्ना ने अपनी नौकरी और सत्ता गंवा दी। बिना शर्मा की नई जिंदगी बसंत विहार में साधारण और उदास हो गई। बच्चे अर्जुन के अब उनके दादा नहीं रह गए, लेकिन वे उन्हें याद करते थे।

इस कहानी का अंत सदमा का है, लेकिन सबक अच्छा है। परिवार में एक-दूसरे को समझो, झगड़ो मत। पैसे से ज्यादा रिश्ते की कीमत है। अगर कोई विवाद हो तो वकील या रिश्तेदारों से बात करो, कोर्ट तक न पहुँचो। यही सीख आज भी कई परिवार ले रहे हैं।

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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