सौतेली मां ने बेटी की शादी भिखारी से कर दी, फिर सच्चाई ने सबको रुला दिया | Heart Touching Story – News

सौतेली मां ने बेटी की शादी भिखारी से कर दी, फिर सच्चाई ने सबको रुला दिया | Heart Touching Story

सौतेली मां ने बेटी की शादी भिखारी से कर दी, फिर सच्चाई ने सबको रुला दिया | Heart Touching Story

सौतेली मां ने बेटी की शादी भिखारी से कर दी, फिर सच्चाई ने सबको रुला दिया | Heart Touching Story

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मेरी शादी से तुम्हारा क्या लेना देना है

मेरी शादी से तुम्हारा क्या लेना देना है, सीधा लेना देना है। अगर पापा तुम्हारी शादी में सारा पैसा लगा देंगे। पायल ये कैसी बात कर रही हो? शादी में पैसा लगता है। हमारी हालत तुम जानते ही हो। माँ इसकी शादी में ज्यादा खर्च मत करना। मेरे लिए आगे बहुत कुछ करना है। हाँ।

लड़का क्या करता है? कुछ खास नहीं। पापा आप बताइए। वो लड़का मोहन है। शहर में भीख मांगता है। क्या? कमला यह बात मैंने अभी तक मंजूर नहीं की है। तो क्या करोगे? बेटी की शादी में लाखों रुपए खर्च करोगे? घर बेचोगे? माँ आपने मेरे लिए एक भिखारी को क्यों चुना? क्योंकि वो कोई दहेज नहीं मांग रहा। मतलब मैं आपकी बेटी नहीं हूँ।

यह वही मोहन है जिसे मैंने जिंदगी भर भीख मांगने वाला समझा। वो इतना बदल कैसे गया? वो अब एक बड़ी गाड़ी चला रहा था। तो क्या हुआ? ड्राइवर ही तो है। गरीबी मैंने देखी है पापा। लेकिन उसकी बातों में जो सम्मान था। मैडम अगर आज भुगतान नहीं हुआ तो मैं आपके खिलाफ कानूनी कारवाई करूँगा। आप ऐसा मत कीजिए। मैं पैसे दे दूंगी। सुमन की शादी में हमने जितना खर्च नहीं किया उससे कई गुना ज्यादा पैसा पायल के शौक में चला गया। वो हमारी बेटी है।

सुमन इस महीने घर का खर्च फिर बढ़ गया है। तू जितना जल्दी हो सके अपने लिए कोई छोटा-मोटा काम ढूँढ ले। अब तेरी उम्र ऐसी नहीं। तेरे खर्चे भी तेरे बाप को ही उठाने पड़े। माँ, मैं काम करने के लिए तैयार हूँ। आप बस मुझे मौका दीजिए। मैं घर पर बैठकर किसी पर बोझ बनकर नहीं रहना चाहती।

मौका? मौका तो पायल को भी मिला था लेकिन वो अपनी जिंदगी जीना चाहती है। हर वक्त काम काम करना ही जिंदगी नहीं होती। माँ मुझे आज बाजार जाना है। वो नया फोन वाला मॉडल आया है ना वहीं लेना है। आपने पैसे रखे हैं। ये ले बेटी। लेकिन देख ज्यादा महंगा मत लेना। आखिर घर के खर्चे भी हैं।

माँ आप भी ना मैं क्या रोज फोन खरीदती हूँ। एक ही तो जिंदगी है। थोड़ा अच्छा जीना भी चाहिए। अच्छा जीना गलत नहीं है पायल। लेकिन घर की हालत देखकर खर्च करना भी जरूरी होता है। तुम मुझे घर चलाना सिखाओगी? पहले अपने लिए कोई ढंग का कपड़ा खरीदो फिर मुझे सलाह देना। बस यही बात तो मुझे पायल की पसंद है। साफ बोलती है। तू तो हर बात पर उपदेश देती रहती है।

सुबह-सुबह फिर क्या हो गया? कुछ नहीं। मैं तो बस सोच रही हूँ कि सुमन की शादी कर देनी चाहिए। घर का एक खर्च कम होगा और पायल के भविष्य के लिए भी कुछ बच जाएगा। मेरी शादी इसलिए होगी कि घर का खर्च कम हो जाए। ऐसा मत सोच बेटा शादी तेरी जिंदगी का फैसला है। तो क्या सारी जिंदगी इसे घर में बैठा कर रखेंगे? रिश्ते आते हैं, खर्चा आता है।

शादी में पैसा लगता है। हमारी हालत तुम जानते ही हो। माँ, इसकी शादी में ज्यादा खर्च मत करना। मेरे लिए आगे बहुत कुछ करना है। मेरी शादी से तुम्हारा क्या लेना देना है? सीधा लेना देना है। अगर पापा तुम्हारी शादी में सारा पैसा लगा देंगे। पायल, यह कैसी बात कर रही हो? पापा, मैं गलत नहीं बोल रही। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए पैसा चाहिए। बच्ची ने सही ही तो कहा है।

तुम जवान हो, हाथ पैर सही हैं। भीख मांगने में शर्म नहीं आती? शर्म आती है साहब। लेकिन भूख उससे बड़ी है। जिस दिन मुझे मेहनत का काम मिल जाएगा, मैं यह कटोरी खुद फेंक दूँगा। रुक, यह बोरी अकेले मत उठा। कमर खींच जाएगी। मोहन, तू रोज यह काम कर दिया कर। मैं तुझे दिन के पैसे दे दूँगा। भीख से ज्यादा अच्छा है। बस काम रोज मिलना चाहिए। बहन जी आप इसे जानते हो क्या? नहीं। लेकिन अभी इसकी बात सुनी तो लगा कि आदमी गरीब हो सकता है। सोच नहीं।

मैडम गरीब आदमन को देखकर इतनी जल्दी फैसला मत किया करो। कभी-कभी हालात आदमी से वो करवा करवाते हैं जो वो खुद नहीं करना चाहता। मैंने फैसला नहीं किया। बस आपकी बात अच्छी लगी। अच्छी बातों से पेट नहीं भरता। लेकिन शायद जिंदगी थोड़ी आसान जरूर हो जाती है। कहाँ रह गई थी इतनी देर? बाजार में भीड़ थी माँ।

माँ, मैंने अपना नया फोन आर्डर कर दिया है। अरे कल पैसे देने होंगे। पायल अभी पिछले महीने ही तो फोन लिया था। वो पुराना हो गया। 6 महीने भी नहीं हुए? रहने दो। लड़की है। अपनी पसंद की चीज रखेगी तो? सुमन, आज एक रिश्ता आया था। मेरे लिए? हाँ। लड़का क्या करता है? कुछ खास नहीं। पापा आप बताइए। वो लड़का मोहन है। शहर में भीख मांगता है। क्या? कमला यह बात मैंने अभी तक मंजूर नहीं की है।

तो क्या करोगे? बेटी की शादी में लाखों रुपए खर्च करोगे? घर बेचोगे? माँ, आपने मेरे लिए एक भिखारी को क्यों चुना? क्योंकि वो कोई दहेज नहीं मांग रहा। मतलब मैं आपकी बेटी नहीं हूँ। मैंने कब कहा कि तू मेरी बेटी नहीं है लेकिन घर की हालत घर की हालत समझना भी सीख। पायल की जिंदगी खराब। माँ मेरी वजह से ऐसा मत कहिए। तुम्हें सच में लगता है कि मेरी जिंदगी तुम्हारे भविष्य से कम है। मैंने ऐसा नहीं कहा। कहने की जरूरत नहीं है।

चुप्पी भी बहुत कुछ बोल देती है। तुम्हें पता है यह शादी क्यों हो रही है? जी। और यह भी पता है कि मेरी बेटी के पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है? मुझे किसी चीज की मांग नहीं है। तुम्हें मांगने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। तुम तो पहले से लोगों के सामने हाथ फैलाते हो। कमला उन्हें बोलने दीजिए अंकल। उनके सवाल गलत नहीं है।

मैं गरीब हूँ यह सच है। मैं भीख मांगता हूँ यह भी सच है। लेकिन मैं सुमन को कभी भीख में नहीं मांगूँगा। अगर वो मेरे साथ शादी नहीं करना चाहती तो मैं अभी चला जाऊँगा। और अगर शादी हो गई तो? तो मैं कोशिश करूँगा कि वो कभी अपने फैसले पर शर्मिंदा ना हो। तुम्हें क्या लगता है शादी के बाद तुम मेरी बेटी को क्या दोगे? आज मेरे पास देने के लिए ज्यादा पैसे नहीं लेकिन मेहनत करने के लिए दो हाथ हैं। जिम्मेदारी समझने वाला दिमाग है और अपनी पत्नी को सम्मान देने का इरादा है। मैं झूठा वादा नहीं करूँगा कि उसे महल दूँगा। लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि उसे अपने घर में कभी छोटा महसूस नहीं होने दूँगा।

अगर मैं आपके साथ आ गई और जिंदगी मुश्किल हुई तो मुश्किल जिंदगी से डर नहीं लगता। गलत इंसान के साथ आसान जिंदगी से डर लगता है। बहुत बातें हो गई। शादी करनी है तो करो नहीं तो अपना रास्ता देखो। पापा अगर आपको लगता है कि यही सही है तो मैं शादी कर लूँगी। माँ, सुमन सच में उस भिखारी से शादी कर रही है? हाँ। और इससे अच्छी बात क्या होगी? बिना दहेज, बिना खर्चे के शादी हो जाएगी। लोग क्या कहेंगे? लोग दो दिन बोलेंगे उसके बाद सब भूल जाएंगे और अगर वो सुमन को परेशान करे जिसे जो जिंदगी मिली है उसे वही जीनी पड़ती है।

माँ मेरी शादी ऐसी नहीं होनी चाहिए। तेरी शादी शहर के अच्छे घर में होगी। मैं तुझे किसी गरीब घर में नहीं भेजूँगी। बेटा पापा आप रोइए मत। मैं तुझे इस तरह विदा नहीं करना चाहता था। पापा मुझे पैसे नहीं बस इतना चाहता हूँ कि जिस घर में जाऊँ वहाँ मुझे इंसान समझा जाए। मोहन गरीब है। गरीबी मैंने आज देखी है पापा। लेकिन उसकी बातों में जो सम्मान था वो मैंने बहुत अमीर लोगों में भी नहीं देखा। मुझे डर शादी से नहीं लग रहा। मुझे डर कि कहीं मेरी जिंदगी को फिर किसी की जरूरत के हिसाब से तय ना कर दिया जाए।

अगर कभी लगे कि मैंने तुझे गलत जगह भेज दिया तो वापस आ जाना। मैं वापस नहीं आना चाहती पापा। मैं चाहती हूँ कि जहां जाऊँ वहीं अपनी जिंदगी बनाऊँ। बस जल्दी से शादी हो जाए। ज्यादा खर्चा करने का कोई मतलब नहीं है। कमला लड़का करता क्या है? क्या करेगा? सड़क पर बैठता है। लेकिन हमारी बेटी के लिए यही ठीक है। अगर आखिरी वक्त पर भी आपको लगता है कि यह शादी नहीं करनी चाहिए तो मैं आपको रोकूँगा नहीं।

मैंने फैसला कर लिया है। अब मैं गरीबी से नहीं अपनी जिंदगी से लडूँगी। माँ, सच बताऊँ तो मुझे उसके लिए थोड़ा बुरा लग रहा है। तुम भावुक मत बनो। अपनी जिंदगी पर ध्यान दो। पापा, अपना ख्याल रखिएगा। तू जहां भी रहे खुश रहना बेटा। अपने ससुराल में रहना। बार-बार मायके आने की जरूरत नहीं। ठीक है।

तुमने मुझे अभी तक नहीं बताया कि हम कहाँ रहेंगे? एक छोटा सा कमरा है। किराया कम है या अभी वही है। मुझे कोई परेशानी नहीं। एक बात कहूँ? हाँ। आज से मेरे सामने कभी यह मत कहना कि तुम गरीब घर की बहू हो। हमारे पास कम है लेकिन जो है वो हमारा है और तुम मुझे यह बात पक्की। पायल अब घर में खर्च थोड़ा संभाल करना।

सुमन की शादी हो गई है लेकिन घर की हालत अभी भी वही है। माँ मैंने जो चीजें मंगाई हैं उनका पेमेंट कल करना है। कितने का? बस थोड़ा सा करीब ₹८०,०००। ₹८०,०००? हाँ। कपड़े, फोन का नया कवर, घड़ी और कुछ सामान। तूने मुझसे पूछे बिना इतना खर्च कर दिया? पायल जिंदगी सिर्फ खर्च करने का नाम नहीं है।

पापा आप भी शुरू मत हो जाइए। सुमन तो चली गई। अब मेरी जिंदगी में दखल मत दीजिए। जब सुमन की शादी करके आपने पैसे बचा लिए तो अब मेरे लिए खर्च करने में दिक्कत क्यों हो रही है? जिस बेटी को मैंने सबसे ज्यादा समझा, शायद उसे मैंने सबसे कम समझा।

मुझे पता है यह घर बहुत छोटा है। अगर आपको लगे कि मैंने आपको बहुत मुश्किल जिंदगी में ला दिया है तो आप मुझे बता सकती हैं। घर छोटा है लेकिन कम से कम यहां मुझे कोई यह तो नहीं कह रहा कि मैं किसी और के भविष्य में रुकावट हूँ। तुमने खाना खाया? नहीं। क्यों? आज शादी में इतना खाना देखा कि लगा पेट भर गया। झूठ बोल रहे हो। सच कह रहा हूँ। लेकिन अगर आप खाना बना दें तो मैं सच में पेट भर कर खाऊँगा। आज से एक नियम है। क्या? हम दोनों मिलकर घर चलाएंगे। सिर्फ तुम नहीं।

मुझे डर था कि शादी के बाद तुम मुझसे शिकायत करोगी। शिकायत तब होती है जब उम्मीद बहुत बड़ी हो। तुम सच बोलना और मेहनत करना मत छोड़ना। और तुम्हारी? मैं भी मेहनत करूँगी। इतनी सुबह कहाँ जा रहे हो? काम ढूँढने। लेकिन तुम तो भीख मांगता था? हाँ। लेकिन अब मैं नहीं मांगना चाहता। काम मिलेगा? मिलने तक ढूँढता रहूँगा। फिर खाली हाथ मत लौटना। काम लेकर लौटूँगा। पायल उठ बेटी घर का कुछ काम कर दे।

माँ मेरी नींद खराब मत करो। नौकर के पैसे कहाँ से आएंगे? सुमन के जाने से जो पैसे बच रहे हैं उन्हीं से रख लो। तुझे अपनी बहन की शादी भी मजाक लगती है। माँ, आपने ही तो कहा था कि उसकी शादी करके खर्च कम हो जाएगा। बेटी आज दुकान पर मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। पापा मुझे दुकान पर बैठना पसंद नहीं है। तो क्या पसंद है? अच्छी जिंदगी।

अच्छी जिंदगी मेहनत से बनती है। सिर्फ खर्च करने से नहीं। तुमने पहले क्या काम किया है? जो मिला वो किया। सामान उठाया, गाड़ी साफ की, छोटे-मोटे काम किए। तुम भीख मांगते थे? हाँ। लेकिन अब नहीं मांगना चाहता। काम मुश्किल है। सुबह ७:०० से रात तक रहना पड़ेगा। काम दीजिए। मैं करूँगा। कल से आ जाना। नहीं मालिक आज से शुरू कर देता हूँ। अच्छा फिर आज से शुरू कर। काम मिल गया? मिल गया। मैंने कहा था ना खाली हाथ मत लौटना।

आज पहली बार लगा कि जिंदगी सच में बदल सकती। कितने पैसे मिलेंगे? कम है। कम पैसे से शुरुआत हो सकती है। कम सोच से नहीं। तुम्हें पता है सुमन? आज दिन भर मैं यही सोचता रहा कि तुम्हारी सौतेली माँ ने मुझे भिखारी समझकर तुम्हारे साथ भेजा है। लेकिन मैं चाहता हूँ कि एक दिन वही लोग यह समझे कि गरीब आदमी को मौका मिल जाए तो वो अपनी जिंदगी बदल सकता है। और वो दिन हम दोनों मिलकर लाएंगे।

मोहन आज से तुम सिर्फ सफाई का काम नहीं करोगे तो क्या करूँगा? जिस काम में तुम सबसे ज्यादा अच्छे हो वही काम करूँगा तुम्हें। माँ मैं दुकान पर नहीं बैठूँगी। मैंने अपना ऑनलाइन बिजनेस शुरू करने का फैसला कर लिया है। सच में हम कितना पैसा चाहिए? बस पापा की दुकान बेचकर जो पैसा मिलेगा उससे शुरुआत हो जाएगी। क्या कहा तुमने?

जिस दुकान को मैंने २५ साल मेहनत करके खड़ा किया है, उसे बेचकर तुम ऑनलाइन बिजनेस करोगी? पापा, दुकान से कितनी कमाई होती है? आजकल ऑनलाइन काम में पैसा ज्यादा है। मुझे बस शुरुआत के लिए के लिए पूंजी चाहिए। पूंजी चाहिए तो अपनी मेहनत लगा। मेरे खून पसीने की कमाई बेचकर शुरुआत करना बिजनेस नहीं जुआ है।

आप बेटी की बात भी तो समझिए। पायल कुछ करना चाहती है तो उसे मौका दीजिए। मौका देने और अपनी पूरी जमा पूंजी उसके हाथ में रखने में फर्क होता है। आपको मुझ पर भरोसा ही नहीं है। जब सुमन थी तब उसकी हर बात पर भरोसा करते थे। अब वह चली गई तो आपको मेरी चिंता होने लगी। सुमन ने कभी मुझसे यह नहीं कहा कि उसके सपने पूरे करने के लिए तुम्हारा घर बेच दूँ। इतना बड़ा मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है।

पहले थोड़े पैसे दे दीजिए। दुकान बेचने की बात बाद में देखेंगे। नहीं दुकान नहीं बिकेगी। मोहन ये गाड़ी सामने वाले ग्राहक के घर पहुंचानी है। ड्राइव कर सकते हो? जी चला सकता हूँ। तो आज से एक और काम सीख लो। सिर्फ हाथ से काम करने वाला आदमी मत बनो। हम जिस काम में दिमाग और जिम्मेदारी दोनों लगे वो सीखना। किसने भेजा? गैराज से आया हूँ। गाड़ी बहुत संभाल कर चलाते हो। गाड़ी किसी की भी हो साहब जिम्मेदारी अपनी समझ कर चलानी चाहिए।

ऐसे ड्राइवर की जरूरत हो तो तुम्हें बुलाऊँगा। आज कुछ अच्छा हुआ है। आज मालिक ने मुझे ग्राहक की गाड़ी चलाने भेजा। मतलब अब तुम सिर्फ गैराज में काम नहीं करोगे। हाँ। और अगर मैंने यह काम ठीक से किया तो आगे ड्राइविंग का काम भी मिल सकता है। देखा? मैंने कहा था ना मेहनत का रास्ता धीरे चलता है लेकिन कहीं ना कहीं पहुंचाता जरूर है। तुम्हें हर बात में सीख कैसे मिल जाती है?

क्योंकि मेरी जिंदगी में बहुत लोगों ने बिना माँगे सीख दी है। माँ मुझे फोटो शूट के लिए नया फोन और कैमरा चाहिए। लेकिन तूने अभी बिजनेस शुरू ही किया है। इमेज सबसे जरूरी है। अगर सामान अच्छा दिखेगा तभी लोग खरीदेंगे। यह आखिरी बार है। आप देखना माँ, कुछ ही महीने में मैं इतना कमा लूँगी कि आपको काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पापा, मैंने बिजनेस शुरू कर दिया। कितना लगाया? थोड़ा सा। कितना? ₹१,२०,००० बिना मुझसे पूछे आप देते नहीं इसलिए लेना पड़ा। यह घर है तुम्हारा एटीएम नहीं। क्या हिसाब लगा रही हो? इस महीने कितना खर्च हुआ और कितना बचा? बचत भी हो रही है? थोड़ी। ये लो। पहली कमाई? हाँ।

इतनी खुशी क्यों? क्योंकि यह पैसे कम है, लेकिन इनमें किसी के सामने फैला हुआ हाथ नहीं है। इनमें से आधे तुम रखो। नहीं, घर चलाना है। घर दोनों का है। पैसा भी दोनों का रहेगा। मुझे एक भरोसेमंद ड्राइवर चाहिए। कुछ दिन के लिए बाहर जाना है। इसे ले जाइए। पैसा कम है लेकिन भरोसा पूरा है। मैं कोशिश करूँगा कि आपकी उम्मीद पर खरा उतरूँ।

कितने साल से ड्राइविंग कर रहे हो? जिंदगी मुझे बहुत पहले से चला रही है साहब। गाड़ी चलाना तो बाद में सीखा। कोई खरीद ही नहीं रहा। कितना सामान रखा है? बहुत बेचती क्यों नहीं? लोगों को समझ ही नहीं है। मेरे प्रोडक्ट्स अच्छे हैं। बिक्री नहीं हो रही तो ग्राहक गलत नहीं होते। शायद तरीका गलत हो।

आपको बिजनेस की इतनी समझ है तो अपनी दुकान ही संभालिए। तुम अपना काम करो। तुम्हारे पापा को बोलने की आदत है। बेटा, तुमने आज मेरी बहुत मदद की। आपने मुझे काम दिया। मैंने अपना काम किया। तुम्हारा परिवार है, मेरी पत्नी है। और माँ-बाप जिंदगी ने उनसे पहले ही अलग कर दिया। अब मेरी पत्नी ही मेरा परिवार है। उसे खुश रखना। बस यही कोशिश है। मैं भी काम करना चाहती हूँ। करो। तुम्हें कोई दिक्कत नहीं?

दिक्कत क्यों होगी? शादी का मतलब ये थोड़ी है कि एक कमाए और दूसरा सिर्फ देखता रहे। मैं बच्चों को पढ़ा सकती हूँ। मेरे आसपास कई बच्चे हैं जिन्हें ट्यूशन की जरूरत है। तो कल से शुरू करो। तुम्हें नहीं लगता हमारा घर अभी बहुत छोटा है। कमरे की जगह छोटी है। सपने नहीं। मैडम आप यहां स्कूल क्यों नहीं जाती? क्योंकि जिंदगी ने मुझे स्कूल से ज्यादा सिखाया है। अब जो सीखा है वो तुम्हें सिखाऊँगी। भाई आपकी पत्नी बहुत समझदार है। मुझे पता है।

और आप मैं अभी सीख रहा हूँ। मैडम आपके पिछले भुगतान का क्या हुआ? अभी बिजनेस शुरू हुआ है। थोड़ा समय दीजिए। आपने सामान लेते समय कहा था कि भुगतान ७ दिन में हो जाएगा। हो जाएगा। इतना परेशान क्यों कर रहे हैं? किसका फोन था? सप्लायर का। पैसे देने हैं? हाँ। तो दे क्यों नहीं रही?

पापा मुझे ₹लाख चाहिए। किस लिए? बिजनेस में लगाने हैं। पहले वाले पैसे का क्या हुआ? पायल, बिजनेस में पैसा लगाना गलत नहीं है। लेकिन बिना हिसाब के पैसा लगाना गलत है। आप मुझे कभी सफल होते देखना ही नहीं चाहते। मैं चाहता हूँ तू सफल हो। लेकिन सफलता के नाम पर मैं अपनी जिंदगी की कमाई नहीं जला सकता। अब तो तुम सच में ड्राइवर लगने लगे।

और पहले पहले भी ड्राइवर ही लगते थे। लेकिन तुम्हारी माँ के लिए तो मैं भिखारी था। वो दिन याद मत करो। नहीं याद रखना जरूरी है। क्योंकि अगर वो दिन नहीं आता तो शायद मुझे यह समझ नहीं आता कि इंसान को बदलने के लिए कभी-कभी बहुत बड़ा धक्का चाहिए। यह वही मोहन है जिसे मैंने जिंदगी भर भीख मांगने वाला समझा। वो इतना बदल कैसे गया? पायल वो अब एक बड़ी गाड़ी चला रहा था।

तो क्या हुआ? ड्राइवर ही तो है। गरीबी मैंने देखी है पापा। लेकिन उसकी बातों में जो सम्मान था पायल के बिजनेस में कितना पैसा लग चुका है? लगभग ४ लाख। ४ लाख? और अभी भी उसे और चाहिए। मैडम अगर आज भुगतान नहीं हुआ तो मैं आपके खिलाफ कानूनी कारवाई करूँगा। आप ऐसा मत कीजिए मैं पैसे दे दूंगी। सुमन की शादी में हमने जितना खर्च नहीं किया उससे कई गुना ज्यादा पैसा पायल के शौक में चला गया। वो हमारी बेटी है।

और सुमन आज खाना कौन बनाएगा? आज ड्राइवर छुट्टी पर है। और घर का मालिक? वो भी छुट्टी पर है। फिर खाना कौन बना रहा है? तुम्हारा पति? सुमन, मैं चाहता हूँ कि हम अपनी छोटी सी ट्यूशन को बड़ा करें। कैसे? तुम पढ़ाओगी? मैं शाम को बच्चों को लाने छोड़ने की व्यवस्था करूँगा। धीरे-धीरे एक कमरा किराए पे लेकर क्लास बना सकते हैं। मतलब हम दोनों मिलकर कुछ अपना बनाएंगे? हाँ। किसी से पैसे मांग कर नहीं।

ये सब मेरे साथ ही क्यों होता है? तूने किसी से सलाह क्यों नहीं ली? किससे लेती? पापा मुझे समझते नहीं। और सुमन तो घर से चली गई। शायद सुमन होती तो तुझे समझा देती। हरीराम जी आपकी बेटी ने जो ऑनलाइन सामान भेजा था वो खराब निकला मेरी बेटी ने? जी उसने आपका नंबर दिया था। मेरी दुकान का इससे कोई लेना देना नहीं।

तूने मेरे दुकान का नाम अपने बिजनेस में क्यों लगाया? क्योंकि लोगों को भरोसा चाहिए था। भरोसा मेरे नाम से लेना था तो जिम्मेदारी भी मेरी क्यों बना दी? हरीराम, बेटी से इतनी सख्ती मत करो। सख्ती मैं आज कर रहा हूँ क्योंकि तुमने सालों से इसे किसी बात की जिम्मेदारी नहीं लेने दी। तुमने सुमन को हर बात में रोका और पायल को हर गलती में बचाया।

आज एक बेटी अपने छोटे से घर में मेहनत करके अपना रास्ता बना रही है। पापा, मैंने जानबूझकर नहीं किया। यही तो समस्या है बेटी। जिंदगी में सबसे बड़ा नुकसान कई बार गलत इरादे से नहीं गैर जिम्मेदारी से होता है। हेलो पायल। दीदी, तुम ठीक हो? हां, तुम बताओ। मेरा बिजनेस खराब हो गया। पापा मुझसे बहुत नाराज हैं। तुमने उनसे माफी मांगी? नहीं। तो पहले वही करो। तुम मुझे समझाओगी नहीं।

समझाऊँगी। लेकिन पहले खुद को समझना पड़ेगा कि गलती कहाँ? दीदी, क्या तुम मुझसे नाराज हो? मैं नाराज होती तो तुम्हारा फोन नहीं उठाती। एक कंपनी को भरोसेमंद ड्राइवर चाहिए। गाड़ी अच्छी है, तनख्वाह भी अच्छी है। मेरा? हां। क्योंकि मैंने देखा है कि तू काम से भागता नहीं। मैं तैयार हूँ। सुमन मुझे नई नौकरी मिल गई। कहाँ? एक बड़ी कंपनी में ड्राइवर। तो अब तुम सच में ड्राइवर बन गए। हां, जिस नाम से तुम्हारी माँ ने मुझे तुम्हारे साथ भेजा था, अब उसी काम से मैं अपना घर चला रहा हूँ।

फर्क सिर्फ इतना है कि तब लोग तुम्हें देखकर तरस खाते थे। मुझे लोगों के सम्मान से ज्यादा तुम्हारा भरोसा चाहिए। पापा, मैं अपना बिजनेस बंद कर रही हूँ। क्यों? क्योंकि मुझे समझ आ गया है कि सिर्फ पैसा लगाना, बिजनेस करना नहीं होता। मुझे मेहनत, जिम्मेदारी और धैर्य कुछ भी नहीं आता था। और एक बात और मैं सुमन दीदी से मिलना चाहती हूँ। क्यों? माफी मांगने के लिए नहीं उनसे सीखने के लिए।

कल की मीटिंग में आपको कंपनी के मालिक से मिलना है। उन्होंने खासतौर पर आपका नाम मांगा है। मैं तो सिर्फ ड्राइवर हूँ साहब। कंपनी में किसी की कीमत सिर्फ उसके पद से नहीं देखी जाती। तू इतनी सुबह रसोई में क्या कर रही है? माँ, आज नाश्ता मैं बनाऊँगी। तुझे अचानक क्या हो गया? शायद देर से समझ आया कि घर में रहने का मतलब सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करवाना नहीं होता। बातें तो बड़ी समझदारी वाली करने लगी हैं।

माँ, मैं सच में बदलना चाहती हूँ। लेकिन एक बात समझ नहीं आ रही। क्या? दीदी इतनी कम चीजों में भी खुश कैसे रह लेती थी? हमने उसे हमेशा कम दिया। फिर भी उसने कभी हमसे ज्यादा नहीं मांगा। मैंने सब कुछ पाकर भी कभी संतोष नहीं किया। बहन जी सुना है आप बहुत अच्छे से पढ़ाती हैं। मेरा बेटा पढ़ा कमजोर कोई बच्चा नहीं होता। कभी-कभी उसे समझाने वाला तरीका सही नहीं मिलता। फीस कितनी है जितना आप आसानी से दे सकें। लेकिन आप इतना कम क्यों ले रही हैं? क्योंकि मुझे पता है कि पढ़ाई का खर्च कई घरों में बोझ बन जाता है। मैं चाहती हूँ कि कम से कम मेरे पास आने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई बोझ ना बने।

मोहन जी आज आपको कंपनी के चेयरमैन के साथ जाना है। मैं हां उन्होंने खुद आपका नाम मांगा है। लेकिन मैं तो नया ड्राइवर हूँ। आप नए ड्राइवर हैं लेकिन आपकी जिम्मेदारी देखकर उन्होंने आपको चुना है। सर मोहन यहीं हैं तो आप वही मोहन हैं? जी। चलो आज से तुम सिर्फ मेरे ड्राइवर नहीं हो। हां, मेरी कुछ व्यक्तिगत जिम्मेदारियां भी तुम संभालोगे।

आपको याद है जब सुमन की शादी की बात हुई थी? सुना है आप सिर्फ गाड़ी नहीं चलाते जिम्मेदारी भी चलाते हैं साहब गाड़ी चलाते वक्त रास्ता देखना पड़ता है जिंदगी में भी शायद यही नियम है कैसे भूल सकता हूँ मैंने उस दिन बहुत गलत किया था मुझे लगा था कि सुमन को घर से भेज दूँगा तो खर्च कम होगा और पायल का भविष्य सुरक्षित हो जाएगा लेकिन भविष्य सिर्फ पैसे से सुरक्षित नहीं होता।

अब समझ आ रहा है समझ देर से आए तो भी अच्छा है अगर इंसान अपनी गलती सुधार ले क्या सुमन मुझे माफ करेगी गी यह फैसला उसका है। अंदर आओ। दीदी, आपने इतना सब कर लिया थोड़ा-थोड़ा करके। मुझे आपसे कुछ पूछना है। पूछो। आपने मुझसे कभी नफरत क्यों नहीं की? क्योंकि तुम मेरी बहन हो। तुम्हारी गलतियों से मुझे दुख हुआ। लेकिन तुमसे नफरत करने का कोई फायदा नहीं था। मैंने आपको बहुत गलत समझा।

तुम अकेली नहीं थी। मुझे भी कभी-कभी खुद पर शक होता था। दीदी मुझे अपने साथ काम करना सिखा दो। काम सीखना है तो पहले एक चीज सीखो। क्या? जिम्मेदारी मैं सीखूँगी। पायल मैं आपसे भी माफी मांगना चाहती हूँ। माफी किस बात की? मैंने आपको देखकर सोचा था कि आप मेरी बहन के लायक नहीं है। लेकिन आज समझ आया कि इंसान की औकात उसके कपड़ों या काम से नहीं होती। मुझे आपकी माफी की जरूरत नहीं है। बस आगे से किसी गरीब आदमी को छोटा मत समझना।

नहीं समझूँगी। माँ अंदर आने दूँगी? तूने घर बहुत अच्छा बना लिया है। घर छोटा है। घर छोटा नहीं है। मेरी सोच छोटी थी। सुमन, मैं तुझसे माफी मांगने आई हूँ। जिस दिन मैंने तेरी शादी मोहन से कराने का फैसला किया था, उस दिन मेरे दिमाग में सिर्फ एक बात थी। तेरी वजह से घर का खर्च कम हो जाए और पायल का भविष्य सुरक्षित रहे। मैंने तुझे बेटी नहीं जिम्मेदारी समझ लिया था।

माँ उस दिन बहुत दुख हुआ था मुझे पता है। लेकिन अब वो बात मेरे लिए सिर्फ दुख नहीं है। फिर क्या है? उसी फैसले ने मुझे मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा इंसान दिया। मोहन। जी माँ। तुमने मुझे माँ कहा? आप सुमन की माँ है। मेरे लिए इतना काफी है। मैंने तुम्हें बहुत बुरा कहा था। आपने मुझे जैसा देखा वैसा कहा। मैं उस समय सच में गरीब था। लेकिन मैंने तुम्हारी गरीबी को तुम्हारा चरित्र समझ लिया था।

इंसान की सबसे बड़ी गरीबी पैसे की नहीं सोच की होती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि सोच बदली जा सकती है। माँ ऐसा मत कीजिए। आज पहली बार लग रहा है कि मैंने दामाद नहीं। कहाँ से आ रही हो? दीदी के घर से। कैसी है? बहुत खुश हैं पापा। पापा, मैंने अपना ऑनलाइन बिजनेस बंद कर दिया। क्यों? क्योंकि मैं सिर्फ पैसा खर्च कर रही थी। काम नहीं सीख रही थी। तो अब क्या करेगी? दुकान पर आपके साथ बैठूँगी। सच?

हां। और इस बार मैं काम सीखने आई हूँ। मालिक बनने नहीं। दीदी, यह नई किताबें लाई हूँ। तुम अब सच में बदल गई हो? नहीं दीदी, मैं बस पहली बार सही दिशा में चल रही हूँ। सुमन जी, आपके पति को कंपनी में स्थाई नियुक्ति मिल गई है। अब मैं सिर्फ गाड़ी नहीं चलाऊँगा। जीजा जी आपको बधाई। धन्यवाद। लेकिन असली बधाई तो सुमन को मिलनी चाहिए। क्यों? जब मेरे पास कुछ नहीं था तब इसने मुझे गरीब नहीं समझा।

माँ, आप बैठिए मैं कर लेती हूँ। बहुत साल तूने किया है। आज मुझे करने दे। आज घर में बहुत समय बाद सुकून लग रहा है। सुकून तब आता है जब कोई किसी को छोटा समझना छोड़ देता है। मोहन, तुमने मुझे सबसे बड़ी सीख दी है। मैंने कुछ नहीं किया माँ। आपने खुद सीख लिया। एक बात पूछूँ? पूछिए। अगर उस दिन मैं तुझे मोहन से शादी करने के लिए मजबूर ना करती तो क्या तू उससे शादी करती? शायद नहीं। फिर लेकिन अब अगर मुझे दोबारा चुनने का मौका मिले तो मैं वही चुनूँगी।

क्यों? क्योंकि आपने मुझे मजबूरी में उसके साथ भेजा था। लेकिन उसने कभी मुझे मजबूर होकर नहीं रखा। उसने मुझे बराबरी दी। बेटा एक बात कहूँ? जी पापा। पहले जब तेरी शादी सुमन से हुई थी तब मुझे लगता था कि मैंने अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी। आज लगता है कि मेरी बेटी ने अपना घर नहीं खोया। आपने मुझे बेटी दी है पापा। मैं कोशिश करूँगा कि उसे हमेशा खुश रखूँ। बेटी यह सामान कितने का है? इतने का। पापा, अब समझ आया कि छोटी कमाई भी छोटी कमाई भी बड़ी होती है। अगर वो मेहनत से आए। बस यही समझना था।

आंटी, यह मैडम आपकी बेटी हैं? हां। हां। माँ मेरी बेटी है। सगी बेटी बेटी होने के लिए खून का रिश्ता जरूरी नहीं होता। दिल में जगह होना जरूरी है। अगर उस दिन तुम्हें मेरी माँ ने भिखारी कह कर अपमानित नहीं किया होता। मैंने तुम्हारे कपड़े देखे थे लेकिन तुम्हारी नियत भी देखी थी। और मैंने तुम्हारे घर की हालत देखी थी। लेकिन तुम्हारा दिल भी देखा था। हम दोनों गरीब थे।

अब अब पैसे थोड़े ज्यादा हैं। लेकिन असली अमीरी तो उस दिन आई थी जिस दिन हमें एक दूसरे का साथ मिला। कमला याद है तुमने कहा था कि सुमन की शादी करके घर का एक खर्च कम हो जाएगा? आज उसी बेटी की वजह से घर में सबसे ज्यादा खुशी है। और मेरी वजह से तू भी अब सुधर गई है। सुधारा किसने? हम दीदी ने।

इंसान को कपड़ों या पैसों से छोटा बड़ा समझना आसान है। असली पहचान तब होती है जब मुश्किल में व्यवहार सामने आता है। अब तू मेरी सौतेली बेटी नहीं है। फिर अब तू बस मेरी बेटी है। किसी इंसान की गरीबी देखकर उसकी कीमत तय मत कीजिए क्योंकि हालात गरीब हो सकते हैं। इंसान की सोच नहीं। और बच्चों में फर्क करके किसी एक को जरूरत से ज्यादा लाड़ देना भी सही नहीं। क्योंकि जिम्मेदारी से भागने वाला इंसान प्यार नहीं।

अपनी कमजोरी बढ़ाता है तो यह कहानी परिवार में आपसी संबंधों में सही तालमेल बनाए रखने का संदेश देती है। इसी तरह की दिल छू लेने वाली कहानी हमारे चैनल पर आते रहेंगे जिसमें लोगों को सीख और इंस्पिरेशन मिलता रहे। हम

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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