पिता की मौत के बाद तीनों बेटियों ने किया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण, पूछताछ में सामने आई हैरान करने वाली कहानी…
पिता की मौत के बाद तीनों बेटियों ने किया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण, पूछताछ में सामने आई हैरान करने वाली कहानी…
प्रतापगढ़, राजस्थान: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले से सामने आई एक कथित आपराधिक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। एक मजदूर पिता की उसकी ही तीन बेटियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद जब पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की, तो परिवार के भीतर छिपी एक बेहद गंभीर और दर्दनाक कहानी सामने आने का दावा किया गया।
पुलिस के अनुसार, मामला धोला पानी गांव से जुड़ा बताया जा रहा है। मृतक की पहचान आत्माराम के रूप में हुई। आत्माराम मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी तीन बेटियां थीं—दीपा, मंजू और गीता।
मामले की शुरुआत परिवार की आर्थिक परेशानियों से हुई। बताया जाता है कि आत्माराम एक गत्ता फैक्ट्री में मजदूरी करता था और उसकी बड़ी बेटी दीपा भी कुछ समय तक उसके साथ काम करती थी। बाद में नौकरी छूटने के कारण परिवार आर्थिक संकट में आ गया।
इसी दौरान आत्माराम को गांव के एक जमींदार किशन लाल के खेत में काम मिल गया। कुछ समय तक वह वहां मजदूरी करता रहा। लेकिन पुलिस के सामने दर्ज कथित बयान के अनुसार, इसके बाद घटनाओं ने गंभीर मोड़ ले लिया।
बड़ी बेटी ने सुनाई पहली घटना की कहानी
कथित तौर पर 10 फरवरी 2026 को आत्माराम अपनी बड़ी बेटी दीपा को खेत पर अपने साथ ले गया। कुछ समय बाद किशन लाल भी खेत पर पहुंचा। कहानी के अनुसार, आत्माराम को शराब लाने के लिए वहां से भेज दिया गया और दीपा खेत में अकेली रह गई।
आरोप है कि इसी दौरान किशन लाल ने दीपा को धमकाकर खेत में बने कमरे में ले गया और उसके साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन अपराध किया। इसके बाद कथित रूप से उसे धमकी दी गई कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
डर के कारण दीपा ने उस समय किसी को कुछ नहीं बताया। वह अपने पिता के साथ घर लौट आई और घटना को अपने भीतर दबाए रही।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
छोटी बहन मंजू के साथ भी कथित अपराध
कुछ दिन बाद, 17 फरवरी को किशन लाल आत्माराम के घर पहुंचा। उसने आत्माराम से कहा कि खेत में बहुत काम है और वह अपनी बेटी को साथ लेकर आए।
दीपा ने खेत जाने से मना कर दिया। इसके बाद आत्माराम अपनी दूसरी बेटी मंजू को साथ लेकर खेत चला गया।
पुलिस के सामने सामने आई कहानी के मुताबिक, वहां किशन लाल का दोस्त ओम प्रकाश भी पहुंचा। दोनों ने कथित तौर पर शराब पी और बाद में मंजू को धमकाकर खेत के कमरे में ले गए। आरोप है कि वहां मंजू के साथ भी उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन अपराध किया गया।
मंजू जब घर लौटी तो उसने अपनी बहन दीपा को पूरी घटना बताई। इसके बाद दीपा और मंजू ने अपने पिता आत्माराम को भी सब कुछ बताया।

पिता ने पुलिस जाने की बात कही, लेकिन फिर बदल गया फैसला
बेटियों की बात सुनने के बाद आत्माराम कथित तौर पर किशन लाल के घर पहुंचा। उसने दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने की बात कही।
लेकिन आरोप है कि किशन लाल ने आत्माराम को पैसे देकर मामला दबाने की कोशिश की। कहानी के अनुसार, आत्माराम पैसे लेकर घर लौट आया।
इसके बाद उसने अपनी बेटियों को बताया कि उसे पैसे मिले हैं और अब परिवार की आर्थिक समस्या दूर हो सकती है। साथ ही उसने कथित रूप से यह भी कहा कि आरोपियों ने शराब के नशे में गलती की थी और उनका ज्यादा दोष नहीं है।
यही बात तीनों बेटियों के लिए निर्णायक मोड़ बन गई।
बेटियों को लगा कि पिता ने उनका साथ छोड़ दिया
कथित घटनाक्रम के अनुसार, दीपा और मंजू ने महसूस किया कि उनके पिता ने न्याय के बजाय पैसों को प्राथमिकता दी है। उन्हें यह डर भी सताने लगा कि भविष्य में आरोपी फिर उनके साथ अपराध कर सकते हैं।
इसके बाद तीनों बहनों ने कथित तौर पर घर में रखे हथियार उठा लिए।
दीपा ने कुल्हाड़ी, गीता ने चाकू और मंजू ने डंडा उठा लिया। इसके बाद वे उस कमरे में पहुंचीं जहां आत्माराम बैठा था।
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान दीपा ने आत्माराम पर कुल्हाड़ी से हमला किया और गीता ने भी उस पर चाकू से वार किया। तीनों बहनों ने मिलकर अपने पिता की हत्या कर दी।
घटना के बाद तीनों बहनें कथित तौर पर घर से निकल गईं और करीब एक से डेढ़ घंटे बाद पुलिस थाने पहुंचीं।
थाने पहुंचकर तीनों बहनों ने किया सरेंडर
पुलिस के सामने तीनों बहनों ने कथित रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। पूछताछ के दौरान दीपा ने अपने साथ हुई घटना और मंजू ने उसके साथ हुई कथित घटना के बारे में पुलिस को बताया।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने किशन लाल और ओम प्रकाश को भी गिरफ्तार किया। पुलिस ने हत्या के साथ-साथ बेटियों द्वारा लगाए गए यौन अपराध के आरोपों की भी जांच शुरू की।
इस मामले में आगे अदालत में क्या फैसला होता है, यह न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
एक हत्या के पीछे छिपी कई परतें
यह मामला केवल एक पिता की हत्या की कहानी नहीं है। इसके पीछे गरीबी, शराब की लत, कथित यौन हिंसा, धमकी, परिवार के भीतर टूटता भरोसा और कानून पर भरोसा करने की चुनौती जैसे कई गंभीर सवाल जुड़े हुए हैं।
हालांकि, किसी भी आरोपी को दोषी मानने का अंतिम अधिकार अदालत का है। पुलिस में दर्ज आरोप और जांच के दौरान सामने आए बयान अपने आप में न्यायिक रूप से दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होते।
इस घटना ने एक और महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है—अगर किसी परिवार में यौन हिंसा का आरोप सामने आए तो पीड़ितों को सुरक्षित और कानूनी सहायता कैसे मिले? विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में पीड़ितों को चुप कराने के बजाय तुरंत पुलिस, चिकित्सा सहायता और कानूनी सहायता तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
आत्माराम की हत्या के मामले में तीनों बेटियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी, जबकि किशन लाल और ओम प्रकाश के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों की सच्चाई अदालत में जांच और साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
फिलहाल इस मामले की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि एक परिवार के भीतर लंबे समय तक दबे रहे आरोपों ने आखिरकार ऐसी स्थिति पैदा कर दी, जिसका अंत एक व्यक्ति की हत्या और कई लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के रूप में हुआ।