आंटी चारा काटने के लिए खेत में गई थीं और खेत में एक बड़ी घटना हो गई। पुलिस…
आंटी चारा काटने के लिए खेत में गई थीं और खेत में एक बड़ी घटना हो गई। पुलिस…
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नमस्कार दोस्तों, आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से। बागपत जिले में एक पिलाना नाम का गांव पड़ता है और इसी पिलाना गांव में रहने वाली रेशमा देवी।
रेशमा देवी की इस गांव के अंदर एक किराने की दुकान होती है। इसकी दुकान बहुत अच्छी चलती थी।
रेशमा देवी का स्वभाव काफी मीठा होता है। जिसकी वजह से गांव के सभी लोग इसकी दुकान पर सामान खरीदने के लिए आया करते थे।
रेशमा देवी के पास अपनी तीन एकड़ जमीन भी होती है और तीन-चार पशु भी होते हैं।

रेशमा हर रोज सुबह के करीब 7:30 बजे के आसपास अपने इन पशुओं के लिए चारा काटने के लिए खेत में चली जाया करती थी और जल्दी-जल्दी में चारा काटने के बाद चारा लेकर गांव में आ जाया करती थी और इसके बाद रेशमा देवी इन पशुओं को चारा डालने के बाद अपनी दुकान पर जाकर अपनी दुकान खोल लिया करती थी और इस तरीके से रेशमा देवी का पूरा दिन गुजर जाता था।
रेशमा देवी के पति की 8 साल पहले मौत हो चुकी थी। जिसकी वजह से रेशमा देवी अपने जीवन में भी अकेली पड़ गई थी।
लेकिन रेशमा देवी के परिवार में इसकी एक सासू होती है जिसका नाम सुलोचना देवी होता है।
सुलोचना देवी को आंखों से बहुत कम दिखाई देता था। सुलोचना देवी हर समय अपनी चारपाई पर बैठी रहती थी।
लेकिन कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद अब रेशमा देवी अपने आप को असहाय महसूस करने लगती है।
रेशमा अब सोचने लग जाती है कि उससे दो-दो काम धंधे चलने वाले नहीं है। पहले तो वह अपने पशुओं के लिए चारा काटती है और फिर इसके बाद अपनी दुकान भी खोल लेती है।
इसी वजह से रेशमा देवी काफी परेशान और उदास रहते हुए एक दिन अपनी सास सुलोचना देवी को कहती है कि मां मुझसे दो-दो काम नहीं होते हैं। चाहे तो मुझे अपने पशु बेचने पड़ेंगे या फिर अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी।
लेकिन सुलोचना देवी एक सुलझी औरत होती है। सुलोचना देवी कहती है कि बहू तुम किसी बात की फिक्र मत करो। तुम ऐसा करो अपने जेठ करण के लड़के रिंकू को अपने पास बुला लो। उसके पास अपने दो बेटे हैं। रिंकू यहां आ जाएगा और रिंकू तेरे छोटे-मोटे कामकाज कर दिया करेगा और वैसे भी रिंकू ने पढ़ाई लिखाई छोड़ दी है। यह बात रेशमा देवी को भी पसंद आ जाती है।
इसके बाद रेशमा देवी उसी समय अपने जेठ करण के पास फोन कॉल करती है और करण को कहती है कि भाई साहब मैं आपके छोटे बेटे रिंकू को अपने पास बुलाना चाहती हूं। क्योंकि मेरे कामकाज काफी ज्यादा है। मुझे दुकानदारी भी संभालनी पड़ती है और साथ में पशुओं का कामकाज भी करना पड़ता है। करण भी मान जाता है। करण कहता है कि कोई बात नहीं आज शाम के करीब 4:00 बजे के आसपास मैं रिंकू को तेरे घर पर भेज दूंगा।
और इस तरीके से जैसे शाम के करीब 4:00 बजे के आसपास का वक्त होता है तो रिंकू उसी समय अपनी इस चाची रेशमा के घर पर आ जाता है।
रेशमा उस समय अपनी दुकान पर गई हुई थी। रिंकू इसके बाद दुकान पर ही पहुंच जाता है और रिंकू जैसे दुकान के अंदर प्रवेश करता है तो देखता है कि उसकी खूबसूरत चाची रेशमा देवी दुकान के अंदर बैठी होती है।
रेशमा देवी अपने इस भतीजे रिंकू को अपनी दुकान पर देखकर बड़ी खुश हो जाती है। रेशमा कहने लग जाती है कि रिंकू तूने अब मेरे घर के कामकाज संभालने हैं। ऐसा करो कि मैं दुकान संभाल लिया करूंगी और तुम पशुओं की देखभाल करना शुरू कर दो।
इस तरीके से अब रिंकू इस घर में रहना शुरू कर देता है। लेकिन रिंकू एक ऐसा लड़का होता है जो कि बड़ी उम्र की महिलाओं में काफी ज्यादा दिलचस्पी लिया करता था। लेकिन रिंकू की चाची रेशमा देवी इस बात के बारे में अच्छे तरीके से नहीं जानती थी और रिंकू की गंदी नजरें अब इसकी चाची रेशमा देवी पर भी पड़ चुकी होती है।
इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 5 जुलाई 2026 का दिन।
सुबह के करीब 11:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। रिंकू चारा काटने के लिए खेत में चला जाता है।
रिंकू चारा काटने के बाद जैसे ही गांव में पहुंचता है तो तब तक दोपहर के करीब 1:00 बजे के आसपास का वक्त हो चुका होता है।
और उसी समय रिंकू की जो चाची रेशमा होती है वो अपने बाथरूम में नहाने के बाद अपने कमरे में जाकर कपड़े बदल रही होती है।
और रिंकू जैसे इस घर के अंदर प्रवेश करता है तो रिंकू बिना आवाज किए बिना दरवाजा खटखटाए उस कमरे के अंदर चला जाता है।
और रिंकू की नजरें जैसे ही अपनी चाची रेशमा के खूबसूरत बदन पर पड़ती है तो रिंकू की आंखें फटी की फटी रह जाती है।
रिंकू अपनी चाची रेशमा देवी की खूबसूरती और सुंदरता को लगातार देखता ही रह जाता है।
लेकिन उसी समय चाची रेशमा देवी रिंकू को कहती है कि रिंकू तुम्हें ऐसे ही घर के अंदर नहीं आना चाहिए था। तुम्हें दरवाजा खटखटाकर अंदर आना चाहिए था।
रिंकू कहता है कि चाची मुझे इस बात का नहीं पता था कि तुम कपड़े बदल रही हो। मैं जानबूझकर कमरे में नहीं आया हूं।
अब इसके बाद रिंकू की चाची रेशमा देवी कहती है कि चलो कोई बात नहीं तुम बाहर बैठ जाओ तब तक मैं तैयार हो जाती हूं।
रिंकू पूछने लगता है कि चाची आज तुम कहां जाने वाली हो? उसी समय रेशमा देवी रिंकू को कहने लगती है कि रिंकू मुझे तेरी दादी सुलोचना को लेकर पास के ही एक हॉस्पिटल में जाना है।
हॉस्पिटल में जाने के बाद मुझे उसको दवाइयां दिलवानी है। लेकिन रिंकू की नजरें तो अपनी खूबसूरत चाची रेशमा देवी की सुंदरता पर टिक चुकी होती है।
रिंकू अब अपनी चाची रेशमा देवी को हासिल करना चाहता था। और रिंकू अपनी इस चाची रेशमा को हासिल करने के लिए किसी भी हद से गुजर सकता था।
रिंकू आगे चलकर अपनी चाची रेशमा देवी के साथ बहुत बड़े-बड़े कांड करने वाला था। जिसके बारे में रेशमा देवी कुछ भी नहीं जानती थी।
इसके बाद जैसे ही रेशमा तैयार हो जाती है तो अपनी सास सुलोचना को कहती है कि मां जी चलो मैं तुम्हें हॉस्पिटल में लेकर चलती हूं।
और इसके बाद रेशमा देवी अपने इस भतीजे रिंकू को कहती है कि रिंकू तुम घर का ख्याल रखना और साथ में पशुओं का भी ख्याल रखना। मैं शाम तक घर पर आ जाऊंगी।
और इसके बाद रेशमा देवी अपनी सासू सुलोचना देवी को लेकर शहर में चली जाती है। हॉस्पिटल में चली जाती है।
लेकिन जैसे ही आधे घंटे का वक्त गुजर जाता है तो लड़का रिंकू अपने घर में बिल्कुल अकेला होता है और उसी समय घर के मुख्य दरवाजे पर दस्तक होती है।
रिंकू जैसे ही घर के दरवाजे पर दस्तक की आवाज को सुनता है तो अपने घर का दरवाजा खोल देता है।
रिंकू देखता है कि उसके सामने एक पड़ोस की खूबसूरत महिला खड़ी होती है और इस महिला का नाम दिव्या होता है।
दिव्या एक ऐसी महिला होती है कि जिसका चाल चलन और चरित्र कुछ ठीक नहीं होता है। दिव्या इस गांव के अमीर मर्दों को अपने प्रेम जाल में फंसा लिया करती थी और अपने प्रेम जाल में फंसाने के बाद उनके साथ रातें रंगीन करने के बाद उनसे पैसे वसूल कर लिया करती थी। दिव्या का बस यही काम होता है।
और जैसे ही लड़का रिंकू दिव्या को अपने घर के दरवाजे पर खड़ी देखता है तो रिंकू इस दिव्या की खूबसूरती और सुंदरता को देखने के बाद अपने मन में सोचने लग जाता है कि यह महिला तो मेरी चाची रेशमा से भी काफी खूबसूरत है।
जब ऐसे-से ख्याल रिंकू के मन में आने लग जाता है तो रिंकू पूछने लग जाता है कि चाची तुम्हें मेरे घर पर क्या काम है? उसी समय दिव्या कहने लगती है कि मैं किसी जरूरी काम से तुम्हारे घर पर आई थी।
रिंकू पूछने लग जाता है कि ऐसा कौन सा जरूरी काम है? इसके बाद दिव्या घर के अंदर प्रवेश कर जाती है।
दिव्या अब साफ-साफ शब्दों में रिंकू को कहती है कि रिंकू मैं काफी दिनों से तुझ पर नजर रख रही हूं। मुझे तुमसे प्यार हो गया है और मेरा पति कई साल पहले गुजर गया था। जिसकी वजह से मैं अपने घर में बिल्कुल अकेले रहती हूं। मेरे छोटे-छोटे दो बच्चे हैं। लेकिन मेरा अकेलापन मुझे काफी परेशान करता है और मैं अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए तुम्हारा सहारा लेना चाहती हूं।
जैसे ही यह बातें साफ-साफ शब्दों में रिंकू को सुनाई देती हैं तो रिंकू बड़ा खुश हो जाता है।
रिंकू कहने लगता है कि अगर ऐसी बात है तो मैं तुम्हारे साथ अभी इसी समय वक्त गुजारना चाहता हूं।
इसके बाद यह महिला जो दिव्या होती है उसी समय खुद ही अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर देती है और घर का दरवाजा बंद करने के बाद अब रिंकू इस महिला दिव्या देवी को लेकर अपने कमरे के अंदर चला जाता है और कमरे के अंदर जाने के बाद दिव्या और इस लड़के रिंकू के बीच दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतों को अपनी-अपनी इच्छाओं को पूरा करने लग जाते हैं।
और जैसे ही इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है तो दिव्या कहने लगती है कि रिंकू जब भी तेरा मन करे तुम मेरे घर पर आ जाया करो। मैं तुम्हारी सारी इच्छाओं को पूरी करती रहूंगी और तुम्हें भी मेरी जरूरतों को पूरे करते रहना पड़ेगा।
रिंकू भी बड़ा खुश हो जाता है। रिंकू कहता है कि किसी बात की फिक्र मत करो। जब भी तुम मुझे अपने घर पर बुलाओगी मैं तेरे घर पर आ जाया करूंगा और जब भी मुझे मौका मिलेगा मैं तुझे इस घर में बुला लिया करूंगा।
इस तरीके से दिव्या और रिंकू की प्रेम कहानी की यहां से शुरुआत हो जाती है।
लेकिन रिंकू आगे चलकर अपनी चाची रेशमा देवी के साथ भी बहुत बड़ा कांड करने वाला था। जिसके बारे में इसकी चाची रेशमा कुछ भी नहीं जानती थी।
इस तरीके से जैसे इन दोनों का यह काम खत्म हो जाता है तो दिव्या देवी इस घर से बाहर निकलती है और अपने घर पर चली जाती है।
इस तरीके से कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है। 20 जुलाई 2026 का दिन सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त होता है।
रेशमा देवी अपनी दुकान पर जा चुकी थी और रेशमा देवी का भतीजा रिंकू चारा काटने के लिए खेत में जा चुका था और सुलोचना देवी अपने घर में बिल्कुल अकेली बैठी होती है।
उसी समय सुलोचना के घर के दरवाजे पर दस्तक होती है और जैसे ही सुलोचना घर का दरवाजा खोलती है तो सुलोचना देखती है कि उसके सामने दिव्या खड़ी होती है।
दिव्या कहने लगती है कि मां जी आज तुम्हारा पोता रिंकू कहां पर गया है? सुलोचना कहने लगती है कि मेरा पोता रिंकू तो खेत में चारा काटने के लिए गया हुआ है। अगर कोई काम हो तो मुझे बता दो।
लेकिन दिव्या कहने लग जाती है कि मुझे उससे मिलना था कोई जरूरी काम था। लेकिन जब वह खेत से घर पर आएगा तब मैं फिर से घर पर आ जाऊंगी।
यह दो चार बातें करने के बाद दिव्या उसी समय सुलोचना के घर से बाहर निकल जाती है। दिव्या अपने मन में सोचने लग जाती है कि रिंकू तो खेत में गया हुआ है। क्यों ना उन्हें उसके पास खेत में ही चलना चाहिए।
इसके बाद दिव्या जैसे तैसे करके अब खेत में पहुंच जाती है।
खेत में पहुंचने के बाद रिंकू से मिलती है और रिंकू को कहने लगती है कि रिंकू मुझे ₹25,000 की सख्त जरूरत है और ₹25,000 तुम्हें आज के आज ही मुझे देने पड़ेंगे।
रिंकू कहने लगता है कि चाची इतने पैसे तो मेरे पास नहीं है और इतने पैसे मैं कहां से लाऊंगा? लेकिन दिव्या कहने लगती है कि तुम्हें ₹25,000 का इंतजाम जरूर करना पड़ेगा।
रिंकू कहने लगता है कि कोई बात नहीं तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाऊंगा।
और इस तरीके से अब दिव्या बड़ी खुश हो जाती है। जैसे तैसे करके दिव्या ये दो चार बातें करने के बाद इस खेत से बाहर निकलती है। अपने घर पर चली जाती है।
और फिर रिंकू भी चारा काटने के बाद गांव में वापस आ जाता है। जैसे रिंकू घर पर पहुंचता है तो देखता है कि घर के अंदर दादी सुलोचना बैठी होती है।
सुलोचना देवी को बहुत ही कम दिखाई देता था और इसी बात का फायदा उठाकर रिंकू अपने इस घर के अंदर अपनी चाची रेशमा देवी के गहने चोरी करता है।
और गहने चोरी करने के बाद अब यह लड़का रिंकू गहने बेचने के लिए शहर में भी जाता है।
और शहर में गहने बेचने के बाद जितने भी पैसे रिंकू को मिलते हैं उन पैसों को लेकर रिंकू सीधा ही दिव्या देवी के घर पर पहुंच जाता है और दिव्या को कहने लगता है कि मैं पैसों का इंतजाम कर चुका हूं और मैं तुम्हारे लिए पैसे लेकर आया हूं।
इसके बाद रिंकू दिव्या को पैसे देता है और दिव्या को कहता है कि देखो इस समय तो दिन का समय है लेकिन मैं आज रात करीब 10:30 बजे के आसपास तेरे घर पर आऊंगा और तेरे साथ रात गुजारूंगा।
दिव्या पैसे लेकर बहुत खुश हो जाती है। दिव्या कहती है कि कोई बात नहीं तुम आज रात मेरे घर पर आ सकते हो।
इसके बाद लड़का रिंकू उसी समय इस घर से बाहर निकल जाता है और कामकाज में व्यस्त हो जाता है।
देखते ही देखते रात का समय हो जाता है और रात के करीब 8:30 बजे के आसपास रेशमा देवी अपनी दुकान बंद करके अपने घर पर आती है।
पूरे परिवार के लिए खाना बनाती है और फिर सुलोचना देवी भी खाना खाती है और इसका भतीजा रिंकू भी खाना खाता है।
रेशमा भी खाना खाने के बाद अपने कमरे में जाकर लेट जाती है।
इस तरीके से रात के करीब 10:30 के आसपास लड़का रिंकू देखता है कि उसकी चाची रेशमा को गहरी नींद आ चुकी थी और साथ में उसकी दादी सुलोचना को भी गहरी नींद आ चुकी थी।
लेकिन आज के समय में लड़के रिंकू को नींद नहीं आती है।
रिंकू दबे पांव इस घर से बाहर निकलता है और फिर इसके बाद रिंकू दिव्या के घर पर पहुंच जाता है।
दिव्या के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है। दिव्या अपने घर का दरवाजा हंसते मुस्कुराते हुए खोल देती है।
दिव्या देखती है कि रिंकू सामने खड़ा होता है। उसी समय दिव्या रिंकू का हाथ खींचकर इसको घर के अंदर ले जाती है।
घर के अंदर ले जाने के बाद घर का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया जाता है और फिर दिव्या इस लड़के रिंकू को लेकर सीधे ही अपने बेडरूम में चली जाती है और फिर इसके बाद दिव्या और रिंकू दोनों ही अपनी रजामंदी से दोनों गलत रिश्ते कायम करने लग जाते हैं।
यह गलत काम तब तक किया जाता है जब तक इन दोनों की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं और जैसे इन दोनों का गंदा खेल खत्म हो जाता है तो दिव्या कहती है कि रिंकू अब तुम अपने घर पर चले जाओ अगर किसी ने यहां पर देख लिया तो बखेड़ा खड़ा हो जाएगा।
इसके बाद लड़का रिंकू अपना काम खत्म करने के बाद रात के करीब 11:30 बजे के आसपास इस घर से बाहर निकल जाता है।
लेकिन कुछ पड़ोसियों ने इसको घर से बाहर निकलते हुए देख लिया था।
इस तरीके से पूरी रात गुजर जाती है और जैसे अगला दिन होता है तो सुबह के करीब 8:30 बजे के आसपास रेशमा देवी अपने गहने देखना शुरू कर देती है लेकिन रेशमा देवी को गहने घर में दिखाई नहीं देते हैं।
रेशमा अपने मन में सोचने लग जाती है कि आखिरकार उसके गहने कहां पर चले गए हैं?
रेशमा अपने भतीजे रिंकू से भी पूछती है और अपनी सासू सुलोचना देवी से भी पूछती है। लेकिन दोनों ही साफ-साफ मना कर देते हैं। कहते हैं कि हमने गहने नहीं देखे हैं।
जैसे तैसे करके रेशमा देवी अपने मन पर काबू करती है और फिर इसके बाद अपनी दुकान की तरफ चल पड़ती है।
लेकिन बीच रास्ते में कुछ पड़ोसी कहते हैं कि तेरा भतीजा रिंकू दिव्या देवी के साथ अपनी रातें रंगीन करता है।
जैसे यह बातें रेशमा देवी को पता चलती हैं तो रेशमा देवी तुरंत समझ जाती है कि उसके भतीजे रिंकू ने ही जरूर गहने चुराए होंगे और गहने चुराने के बाद वो दिव्या देवी को देकर आया होगा।
अब रेशमा देवी उसी समय दिव्या के घर पर जाती है और दिव्या को कहती है कि दिव्या तू मेरे भतीजे रिंकू का पीछा करना छोड़ दे। अगर तूने आज के बाद मेरे भतीजे रिंकू को अपने घर पर बुलाया तो फिर इसके बाद मैं तेरी पुलिस स्टेशन में शिकायत करूंगी।
जब ऐसी धमकियां दिव्या को दी जाती हैं तो दिव्या देवी काफी डर जाती है। दिव्या कहने लगती है कि आज के बाद मैं तुम्हारे भतीजे रिंकू को अपने घर पर फटकने भी नहीं दूंगी और इस तरीके से यह धमकियां देने के बाद अब रेशमा देवी अपनी दुकान पर चली जाती है।
इस तरीके से बात आई गई हो जाती है। दो-चार दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक रात ऐसी भी आ जाती है जिसमें रात के करीब 10:00 बजे के आसपास रिंकू अपने घर से दबे पांव बाहर निकलता है और सीधा ही दिव्या देवी के घर पर जाता है और दिव्या को कहने लगता है कि मैं तुम्हारे साथ वक्त गुजारने के लिए आया हूं।
लेकिन दिव्या साफ-साफ मना कर देती है। दिव्या कहती है कि तेरी चाची रेशमा को सब कुछ पता चल गया है। तेरी चाची रेशमा ने मुझे धमकी दी है कि अगर मैं तुमसे मिली तो फिर वो पुलिस स्टेशन में हम दोनों की शिकायत करेगी।
अब जैसे यह बात रिंकू को पता चलती है तो रिंकू को अपनी चाची रेशमा देवी पर बड़ा गुस्सा आता है।
रिंकू अपना मन मसोस कर रात के ही समय में अपने घर पर आ जाता है।
अब इसके बाद रिंकू अपनी इस चाची रेशमा के साथ इतना बड़ा कांड करने वाला था कि जिसकी गूंज पूरे जिले में गूंजने वाली थी।
इस तरीके से तारीख आ जाती है 5 अगस्त 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है।
रिंकू घर से बाहर निकलता है और अपने एक दोस्त के पास चला जाता है और इसके दोस्त का नाम लक्ष्य होता है और लक्ष्य के साथ बैठकर रिंकू काफी देर तक नशा करता है और नशा करने के बाद सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास अपने घर पर आता है और अपनी चाची रेशमा देवी को कहता है कि चाची आज मुझसे चारा कटने वाला नहीं है। ना ही मैं चारा काट सकता हूं क्योंकि मेरी उंगली में दराती लग गई है। आज तुम्हें मेरे साथ चारा काटने के लिए खेत में जाना पड़ेगा।
रेशमा कहने लगती है कि कोई बात नहीं मैं तुम्हारे साथ खेत में जाने वाली हूं और आज हम दोनों मिलकर चारा काट कर ले आएंगे।
लेकिन आज रिंकू की गलत नजरें गंदी नजरें अपनी चाची रेशमा देवी पर पड़ चुकी होती है। रिंकू अपनी चाची रेशमा देवी को हासिल करना चाहता था।
और इसके बाद आधे घंटे का वक्त गुजरने के बाद अब रिंकू अपनी चाची रेशमा देवी को लेकर खेत में चला जाता है।
और खेत में जाने के बाद अब रिंकू की जो चाची रेशमा होती है चारा काटना शुरू कर देती है।
लेकिन रिंकू अपनी चाची की खूबसूरती को लगातार ऊपर से नीचे की तरफ देखता रहता है। रिंकू ने काफी नशा भी कर रखा होता है।
इसके बाद नशे की हालत में ही रिंकू इधर-उधर देखना शुरू कर देता है।
रिंकू देखता है कि खेत में दूर-दूर तक कोई भी दूसरा या तीसरा किसान नहीं होता है।
रिंकू इसी बात का फायदा उठाता है। रिंकू अब इसके बाद अपनी चाची रेशमा देवी को कहता है कि चाची आज बहुत ज्यादा गर्मी है। ऐसा करते हैं कि ट्यूबवेल पर जाते हैं। ट्यूबवेल पर पानी पीकर आते हैं।
रेशमा भी कहती है कि मुझे भी प्यास लगी है।
और इसके बाद रेशमा देवी और इसका भतीजा रिंकू यह दोनों ही ट्यूबवेल पर चले जाते हैं। ट्यूबवेल पर बैठकर दोनों पानी भी पीते हैं और कुछ देर तक बातचीत भी करते हैं।
लेकिन रेशमा को इस बात के बारे में जरा सी भी भनक नहीं होती है कि आज उसके साथ क्या होने वाला था।
इसके बाद रिंकू अपने आप पर काबू नहीं रख पाता है। रिंकू उसी समय ट्यूबवेल पर बने कमरे के अंदर जाता है।
कमरे के अंदर एक दराती पड़ी होती है।
रिंकू उसी समय उस दराती को उठाकर अपनी चाची रेशमा देवी की गर्दन पर रख लेता है और अपनी चाची रेशमा देवी को धमकी देता है कि अगर तुमने चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो यहीं पर तेरा गला काट दूंगा।
जब ऐसी-ऐसी धमकियां रेशमा को दी जाती हैं तो रेशमा काफी डर जाती है।
रेशमा अपने मन में सोचने लग जाती है कि आज उसका भतीजा ही उसका भक्षक बनने वाला है और होने वाला भी यही होता है।
इसके बाद रिंकू अपनी चाची रेशमा को लेकर इस कमरे के अंदर चला जाता है।
कमरे के अंदर जाने के बाद इसी की चुन्नी से इसके हाथ पैर तक बांध दिए जाते हैं।
और यह सब काम करने के बाद अब रिंकू इस कमरे का दरवाजा बंद कर लेता है।
और फिर रिंकू अपनी ही सगी चाची रेशमा के साथ गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है।
इसकी चाची इसके सामने हाथ जोड़ती है और कहती है कि तुम यह गंदा और गलत काम मत करो।
लेकिन रिंकू नशे में होता है और नशे की हालत में रिंकू इस गलत काम को तब तक अंजाम देता चला जाता है जब तक रिंकू की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे ही रिंकू की ये सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो रिंकू अपनी चाची को धमकी देता है, डराता है और कहता है कि अगर यह बात तुम्हें किसी को भी बताई तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा और साथ में अपनी दादी को भी जान से मारूंगा और मैं तो मरूंगा ही।
जब ऐसीऐसी धमकियां इस महिला को दी जाती हैं तो रेशमा काफी डर जाती है।
इसके बाद भी रेशमा देवी पशुओं के लिए चारा भी काटती है और चारा काटने के बाद गांव में आ जाती है।
लेकिन रेशमा देवी यहां पर सबसे बड़ी गलती यह कर जाती है कि रेशमा इस बात के बारे में किसी से भी बातचीत नहीं करती है।
रेशमा अपने मन में सोचने लग जाती है कि अगर मैंने यह बात किसी को बताई तो लोग उल्टे मुझे ही ताने देने लगेंगे। कहने लगेंगे कि एक विधवा औरत ने अपने ही भतीजे को अपने जाल में फंसा लिया है।
यह सारी बातें सोचने के बाद अब रेशमा चुप रह जाती है।
लेकिन जैसे ही दो दिन का वक्त गुजर जाता है तो अब रेशमा देवी अपनी सासू सुलोचना देवी को कहती है कि मां जी इस लड़के रिंकू को इसके घर पर भेजना पड़ेगा।
जब ऐसीऐसी बातें सुलोचना को कही जाती हैं तो सुलोचना कहती है कि देखो रेशमा सारे घर का काम धंधा रिंकू संभालता है और जब से रिंकू आया है रिंकू ने सारे घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली है।
रिंकू यहीं पर रहने वाला है और इस तरीके से रेशमा और भी ज्यादा मजबूर हो जाती है।
रेशमा अपने मन में सोचने लग जाती है कि चलो उसके साथ यह घटना एक बार घट गई है। अब आगे उसके साथ कुछ भी नहीं होने वाला है।
लेकिन रेशमा देवी इस बात के बारे में नहीं जानती थी कि उसके साथ इससे भी बड़ी घटना घटने वाली थी।
कई दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 14 अगस्त 2026 का दिन।
सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है और उसी समय रिंकू अपनी दादी सुलोचना को कहता है कि दादी मैं अपने दोस्त लक्ष्या के पास जा रहा हूं। मुझे उससे कुछ जरूरी बातें करनी है।
यह दो बातें कहने के बाद रिंकू अपने घर से बाहर निकल जाता है और अपने दोस्त लक्ष्य के साथ बैठकर नशा करना शुरू कर देता है।
और जैसे इन दोनों लड़कों को काफी ज्यादा वक्त गुजर जाता है तो दूसरी तरफ रेशमा देवी अब अपने मन में सोचने लग जाती है कि आज रिंकू खेत में नहीं जाएगा।
रिंकू तो अपने दोस्त के पास चला गया है। अब रेशमा देवी यह सारी बातें सोचकर अकेली ही खेत में चली जाती है और खेत में जाने के बाद चारा काटना शुरू कर देती है।
लेकिन जैसे ही आधे पौने घंटे का वक्त गुजर जाता है तो अब लड़का रिंकू अपने दोस्त लक्ष्य को कहता है कि लक्ष्य चलो मेरे साथ आज तुम भी खेत में चलो।
इसके बाद रिंकू और लक्ष्य दोनों मोटरसाइकिल लेकर रिंकू के घर पर आ जाते हैं।
रिंकू अपने घर के अंदर जाता है। अपनी दादी सुलोचना से पूछने लग जाता है कि दादी आज रेशमा चाची कहां गई है?
सुलोचना कहने लग जाती है कि रिंकू तेरी चाची रेशमा खेत में चारा काटने गई है। तू तो चारा काटने आज गया ही नहीं है।
रिंकू कहता है कि कोई बात नहीं दादी मैं भी खेत में जा रहा हूं।
और इसके बाद रिंकू और लक्ष्य दोनों मोटरसाइकिल के माध्यम से खेत में पहुंच जाते हैं।
खेत में जाने के बाद रिंकू देखता है कि उसकी चाची रेशमा देवी अकेली ही खेत में चारा काट रही होती है।
रिंकू इस बात को भी नजरअंदाज नहीं करता है कि खेत में दूर-दूर तक कोई भी नहीं होता है।
रिंकू अब इसके बाद अपनी चाची रेशमा देवी के पास चला जाता है और रेशमा को कहने लगता है कि चाची तुम क्यों चारा काट रही हो? मैं ही चारा काट लेता हूं।
इसके बाद रिंकू भी कुछ देर तक चारा काटता है।
लेकिन रिंकू चारा काटते हुए भी अपनी चाची रेशमा की तरफ अजीब तरीके से देखता रहता है।
अब इसके बाद रिंकू अपने दोस्त लक्ष्य को कहता है कि लक्ष्य अगर तुम्हें मजे करने हैं तो मेरे साथ चारा कटवाने लग जाओ।
और इस तरीके से अब दूसरा लड़का लक्ष्य भी चारा काटना शुरू कर देता है।
रिंकू उसी समय अपने दोस्त लक्ष्य को कहता है कि लक्ष्य आज खेत में दूर-दूर तक कोई भी नहीं है और आज मैं अपनी चाची रेशमा के साथ मजे करने वाला हूं।
जैसे ही लक्ष्य अपने दोस्त रिंक की बातों को सुनता है तो लक्ष्य के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है।
लेकिन लक्ष्य भी कुछ कम नहीं होता है। लक्ष्य कहने लगता है कि अगर तुम अपनी चाची के साथ मजे करने वाले हो तो मैं भी तुम्हारे साथ तुम्हारी चाची के साथ मजे लेने वाला हूं।
रेशमा जैसे ही इन दोनों लड़कों की बातों को सुनती है तो रेशमा भागना शुरू कर देती है।
लेकिन लड़का रिंकू दौड़कर उसी समय अपनी चाची को पकड़ लेता है और अपनी चाची के मुंह पर इसी की चुन्नी बांध देता है और इसको घसीट कर कमरे के अंदर ले जाता है।
कमरे के अंदर ले जाने के बाद रिंकू अब अपनी चाची रेशमा के साथ गंद और गलत काम करना शुरू कर देता है।
लेकिन रेशमा आज इस लड़के रिंकू को धक्का देती है। जिसकी वजह से रिंकू का सर दीवार में टकरा जाता है।
रिंकू के पास में एक दराती पड़ी होती है।
रिंकू उसी समय उस दराती को उठाता है और अपनी चाची के सिर में उस दराती को मार देता है।
जिसकी वजह से इसकी चाची मौके पर अपना दम तोड़ देती है।
लेकिन रिंकू बहुत नशे में होता है। रिंकू अपने मन में सोचने लग जाता है कि उसकी चाची तो मर गई है।
लेकिन क्यों ना इसकी लाश के साथ ही गलत काम कर लिया जाए।
और इसके बाद रिंकू अपनी चाची रेशमा देवी की लाश के साथ गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है।
और यह गंदा और गलत काम तब तक किया जाता है जब तक रिंकू की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे ही रिंकू की इच्छा पूरी हो जाती है तो इसके बाद रिंकू अपने दोस्त लक्ष्या को अपने पास बुलाता है और लक्ष्य को कहता है कि तुम भी बहती गंगा में डुबकी लगा सकते हो।
इसके बाद लक्ष्य भी इसकी चाची रेशमा के साथ गलत और गंदा काम करता है।
यह लड़का लक्ष्य भी रेशमा की लाश के साथ इस गंदे और गलत काम को तब तक अंजाम देता है जब तक लक्ष्य की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं।
और जैसे ही लक्ष्य की इच्छा पूरी हो जाती है तो इसके बाद रिंकू अपने दोस्त लक्ष्य को कहता है कि लक्ष्य चलो आज मेरी भाभी की लाश को खेत में ही दफन कर देते हैं।
दोनों लड़के नशे में होते हैं और फिर इसके बाद लक्ष्य और रिंकू दोनों एक कसी उठा लेते हैं और कसी लेकर इस खेत में गड्ढा खोदना शुरू कर देते हैं।
दोनों लड़के लगभग आधे घंटे तक इस खेत में गड्ढा खोदते रहते हैं।
और जैसे ही दोनों लड़के गड्ढा खोद रहे होते हैं तो उसी समय इस खेत में एक जमींदार आ जाता है और इस जमींदार का नाम मोहर सिंह होता है।
मोहर सिंह देखता है कि खेत में दो लड़के गड्ढा खोद रहे होते हैं और इसके बाद मोहर सिंह जमींदार उसी समय इन दोनों लड़कों के पास चला जाता है।
रिंकू और लक्ष्य को कहने लगता है कि तुम दोनों गड्ढा क्यों खोद रहे हो?
लेकिन रिंकू और लक्ष्य जब मोहर सिंह जमींदार को देखते हैं तो उसी समय कशी छोड़ देते हैं। दोनों यहां से भागने लग जाते हैं।
मोहर सिंह इनको पकड़ने की कोशिश करता है लेकिन दोनों लड़के भागने में कामयाब हो जाते हैं।
अब इसके बाद मोहर सिंह कमरे में जाकर देखता है तो मोहर सिंह की आंखें फटी की ही पड़ी रह जाती है।
मोहर सिंह देखता है कि वहां पर रेशमा की लाश पड़ी होती है।
इसके बाद मोहर सिंह उसी समय नजदीकी पुलिस स्टेशन में फोन कॉल करता है।
करीब डेढ़ घंटे का वक्त गुजरने के बाद घटना स्थल पर पुलिस पहुंचती है।
पुलिस देखती है कि कमरे के अंदर रेशमा की लाश पड़ी होती है और इसके बाद पुलिस जब रेशमा को अच्छे तरीके से देखती है तो रेशमा के दिल की धड़कन चल रही होती है।
जल्दी-जल्दी में पुलिस एंबुलेंस का इंतजाम करती है और फिर इसके बाद रेशमा को एंबुलेंस के माध्यम से हॉस्पिटल में एडमिट करवाया जाता है।
और दूसरी तरफ मोहन सिंह से इस घटना के बारे में जब पूछताछ की जाती है तो मोहन सिंह कहता है कि यहां पर दो लड़के गड्ढा खोद रहे होते हैं।
एक रेशमा देवी का भतीजा रिंकू होता है और एक रिंकू का दोस्त लक्ष्य होता है और यह दोनों लड़के मुझे देखकर भाग गए थे।
इसके बाद 4 घंटे का वक्त गुजरने के बाद पुलिस अब रिंकू और लक्ष्य को भी गिरफ्तार कर लेती है।
गिरफ्तार करने के बाद दोनों लड़कों को पुलिस थाने में ले जाया जाता है और वहां पर रिंकू और लक्ष्य की खूब जमकर पिटाई की जाती है।
जैसे ही रिंकू और लक्ष्य की जमकर पिटाई की जाती है तो रिंकू और लक्ष्य दोनों अपना जो खोलते हैं और दोनों अपनी पूरी कहानी पुलिस के सामने रखते हैं और इस पूरी कहानी को सुनने के बाद पुलिस के भी होश उड़ जाते हैं।
लेकिन पुलिस इन दोनों के खिलाफ आगे की कानूनी कारवाई शुरू कर देती है और दूसरी तरफ रेशमा देवी की जान बच जाती है।
लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मोहर सिंह जमींदार समय पर पहुंच गया था।
मोहर सिंह जमींदार को हम दिल से सैल्यूट करते हैं क्योंकि मोहर सिंह जमींदार ने इस महिला रेशमा देवी की जान बचा ली थी।
दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम को सुनाने का मेरा उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं था बल्कि आपको जागरूक करना था। आपको सावधान करना था।
मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ।
तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद वंदे मातरम।
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