माता-पिता की एक गलती की वजह से बेटी ने की उनकी पिटाई / पुलिस प्रशासन के उड़े होश
माता-पिता की एक गलती की वजह से बेटी ने की उनकी पिटाई / पुलिस प्रशासन के उड़े होश
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आज हमारी इस घटना की शुरुआत होती है राजस्थान के जिले अलवर से।
अलवर जिले में ही एक लक्ष्मणगढ़ नाम का गांव पड़ता है और इसी लक्ष्मणगढ़ गांव में रहने वाला कुंदन सिंह।
कुंदन सिंह जो कि एक पेट्रोल पंप पर काम किया करता था।
वह पिछले आठ साल से इसी पेट्रोल पंप पर लगातार काम कर रहा होता है।
महीने में उसको ₹16,000 मिल जाया करते थे।

जिसके कारण उसके घर का चूल्हा जल जाया करता था।
उसके परिवार का गुजारा हो जाया करता था।
अब कुंदन सिंह के परिवार में इसकी धर्मपत्नी सुदेश होती है और दो बेटियां भी होती हैं।
जिनमें बड़ी बेटी का नाम पायल होता है और छोटी बेटी का नाम गुंजन होता है।
पायल ने कई साल पहले दसवीं कक्षा पास कर ली थी और इस समय वह अपनी मां के साथ अपने घर के कामकाज में हाथ बटाती है।
दूसरी तरफ जो छोटी बेटी गुंजन होती है, वह कक्षा आठ में अपनी पढ़ाई किया करती थी।
पढ़ने लिखने में गुंजन काफी तेज और होशियार लड़की होती है।
सभी टीचर इस लड़की गुंजन को काफी पसंद किया करते थे।
गुंजन अक्सर घर पर आने के बाद भी किताबों पर चिपटी पड़ी रहती थी।
वह हमेशा किताबों में उलझी रहती थी। किताबों को ही पढ़ा करती थी।
क्योंकि गुंजन चाहती थी कि वह पढ़ लिखकर अपने माता-पिता का सिर ऊंचा करेगी।
लेकिन यह बात भविष्य में तय होने वाली थी कि कक्षा आठ में पढ़ने वाली गुंजन आगे चलकर अपने माता-पिता के साथ किसी बहुत बड़े हत्याकांड को अंजाम देने वाली थी।
इस बात के बारे में ना तो कुंदन जानता था और ना ही गुंजन जानती थी कि आगे चलकर यह क्यों होने वाला था।
दिन गुजरते चले जाते हैं।
अब कुंदन सिंह का इस गांव के अंदर एक दोस्त भी होता है जिसका नाम सुंदर सिंह होता है।
सुंदर सिंह जो कि इसके ठीक घर के सामने एक छोटे से कमरे में रहा करता था।
उसकी शादी भी नहीं हुई थी।
लेकिन सुंदर सिंह के पास सड़क के किनारे एक एकड़ जमीन होती है जिसके दाम बहुत ऊंचे हो जाते हैं और दाम ऊंचे हो जाने की वजह से एक दिन सुंदर सिंह अपनी एक एकड़ जमीन को ₹58 लाख में बेच देता है और जैसे ही सुंदर सिंह की यह जमीन ₹58 लाख में बिक जाती है तो फिर सुंदर सिंह के जो विचार हैं वो बिल्कुल बदल जाते हैं।
सुंदर सिंह पूरी तरीके से बदल जाता है।
सुंदर सिंह ने अपने पूरे जीवन में कभी मेहनत नहीं करी थी क्योंकि उसको ना तो मेहनत की जरूरत पड़ी थी क्योंकि उसके परिवार में ना कोई आगे पीछे होता है।
उसके माता-पिता उसको बचपन में ही छोड़कर चले गए थे।
यहां तक कि उसकी शादी भी नहीं हुई थी।
इसी वजह से सुंदर सिंह को कोई मेहनत मशक्कत करने की जरूरत ही नहीं पड़ी लेकिन जैसे इसके पास ₹58 लाख आ जाते हैं तो फिर यह बात जब इसके दोस्त कुंदन सिंह को पता चलती है तो फिर कुंदन सिंह इसके आसपास मंडराना शुरू कर देता है।
कुंदन सिंह अब पेट्रोल पंप पर भी जाना छोड़ देता है।
वह हमेशा सुंदर के आसपास रहता था और धीरे धीरे करके जब समय गुजरता चला जाता है तो एक तारीख आ जाती है।
10 अक्टूबर 2025 का दिन सुबह के 11:00 बजे के आसपास का वक्त होता है और फिर सुंदर सिंह अपने दोस्त कुंदन सिंह के पास फोन कॉल करता है।
उसको कहता है कि कहीं बैठकर अच्छी सी पार्टी करते हैं।
और इस तरह से जब सुंदर सिंह अपने दोस्त को अपने पास बुला लेता है तो फिर यह दोनों बैठकर अच्छी खासी पार्टी करने लगते हैं।
काफी देर तक शराब पीते हैं।
शराब पीने के बाद दोनों एक दूसरे के साथ सुखदख की बातें भी करने लग जाते हैं।
जैसे ही समय गुजरता जाता है शाम हो जाती है शाम के समय अब कुंदन सिंह अपने दोस्त को कहने लगता है कि आज घर पर खाना खाना है। मेरे साथ मेरे घर पर चलना है और फिर रात का खाना मेरे घर पर ही खाना है।
अब जैसे ये बातें कही जाती हैं तो सुंदर सिंह कहने लगता है कि दोस्त मैं आज तक तेरे घर पर नहीं गया हूं और ना ही मैं तेरे घर पर जाना चाहता हूं।
लेकिन कुंदन सिंह अपने दोस्त को कहता है कि तुम्हारा ही घर है और आज तुम्हें मेरे साथ चलना ही पड़ेगा।
लेकिन सुंदर नहीं जानता था कि उसका दोस्त कुंदन सिंह उसको अपने घर पर क्यों ले जाना चाहता है।
जैसे ही रात के करीब 9:30 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है तो फिर कुंदन सिंह अपने दोस्त को लेकर अपने घर पर चला जाता है।
घर का दरवाजा खटखटाया जाता है और फिर देखते ही देखते कुंदन की पत्नी दरवाजा खोल देती है और जैसे कुंदन की पत्नी सुदेश देवी घर का दरवाजा खोलती है तो देखती है कि उसके सामने उसका पति और उसका दोस्त खड़ा होता है और फिर ये दोनों घर में आ जाते हैं।
सुदेश देवी दोनों के लिए खाना बनाती है और जैसे ही खाना तैयार हो जाता है तो फिर दोनों दोस्त मिलकर खाना खाने लगते हैं।
लेकिन बातों ही बातों में कुंदन सिंह अब अपनी पत्नी सुदेश को कहने लगता है कि सुदेश मेरा दोस्त लखपति बन चुका है।
इसकी जमीन 58 लाख में बिक चुकी है।
अब मेरा दोस्त लखपति बन चुका है।
सुदेश जैसे ही अपने पति की इन बातों को सुनती है तो वह दंग रह जाती है।
सुदेश सोचने लग जाती है कि उसके दोस्त के पास तो लाखों रुपए आ चुका है।
अब सुदेश देवी के मन का लालच जाग जाता है।
सुदेश देवी अपने पति कुंदन सिंह की तरफ इशारा करती है।
अपने पास बुला लेती है और कुंदन को कहा जाता है कि तुम भी लखपति बन सकते हो।
कुंदन जैसे अपनी पत्नी सुदेश की इन बातों को सुनता है तो दंग रह जाता है।
कुंदन कहने लगता है कि मैं लखपति कैसे बन सकता हूं?
सुदेश कहती है कि मैं इसको अपने जाल में फंसा लेती हूं और फिर जितने पैसे इसके पास है वह सभी हड़प लिए जाएंगे।
इस तरह से कुंदन और उसकी पत्नी सुदेश की जो योजना होती है वो बनकर तैयार हो जाती है।
देखते ही देखते अब कुंदन सिंह अपने दोस्त सुंदर को कहने लगता है कि देखो भाई मुझे बाहर कोई जरूरी काम है। मैं आधे घंटे में अभी आ जाऊंगा तब तक तुम अपनी भाभी के साथ बातचीत करो।
और इस तरह से कुंदन सिंह अपने घर से बाहर निकल जाता है।
दूसरी तरफ सुदेश देखती है कि उसकी बेटी पायल और उसकी छोटी बेटी गुंजन देवी ये दोनों एक कमरे में गहरी नींद में सो चुके होते हैं और इस तरह से अब सुदेश देवी अपना जाल फेंकना शुरू कर देती है।
सुंदर को कहने लगती है कि देखो सुंदर मेरा पति घर पर नहीं है। मेरे दोनों बच्चे अपने-अपने कमरों में जाकर सो चुके हैं। अगर तुम मेरा फायदा उठाना चाहते हो तो फायदा उठा सकते हो।
जैसे ही सुंदर को यह बात बोली जाती है तो सुंदर ने शराब पी रखी थी जिसके कारण उसको गहरा नशा भी हो चुका था और फिर उसके अंदर का शैतान भी जाग जाता है।
सुंदर सोचने लगता है कि आज तो इस मौके का फायदा उठा ही लेना चाहिए और इसके बाद जो सुदेश देवी होती है वह सुंदर का हाथ पकड़ती है और हाथ पकड़ कर उसको अपने बेडरूम में ले जाती है।
बेडरूम का दरवाजा बंद कर लिया जाता है और फिर इन दोनों के बीच इन दोनों की रजामंदी से ही वहां पर गलत रिश्ते कायम होने लग जाते हैं।
यह दोनों तब तक इस गलत काम को करते हैं जब तक इन दोनों की संतुष्टि नहीं हो जाती है।
आखिरकार जैसे ही दोनों की संतुष्टि हो जाती है तो इसके बाद यह दोनों इस कमरे से बाहर आ जाते हैं।
10 मिनट का वक्त गुजरने के बाद जो सुदेश देवी होती है वह सुंदर को कहने लगती है कि देखो सुंदर मुझे ₹00 की सख्त जरूरत है।
मुझे अपने घर का बिजली का बिल भी भरना है।
बच्चों की फीस भी देती है देनी है और घर का खर्च भी है।
अब यहां पर सुंदर सिंह सुदेश को कहने लगता है कि मैं तुम्हें कल सुबह के समय ₹500 दे दूंगा और इस तरह से अब यह दोनों बेहद खुश हो जाते हैं।
करीब 20 मिनट का वक्त गुजरने के बाद कुंदन सिंह भी अपने घर पर आ जाता है और फिर इसके बाद कुंदन सिंह खुद से ही अपने दोस्त सुंदर को अपने घर पर छोड़कर आता है।
अब जैसे ही कुंदन सिंह घर में फिर से वापस आ जाता है तो अपनी पत्नी से पूछने लगता है कि काम बना है या नहीं बना है।
सुदेश अपने पति कुंदन को कहती है कि ₹00 हम हमें कल सुबह मिल जाएंगे और इस तरह से पतिपत्नी बेहद खुश हो जाते हैं।
जैसे ही अगला दिन होता है तो सुबह के करीब 11:00 बजे के आसपास अब सुंदर सिंह ₹00 लेकर इसके घर पर आता है।
इसको ₹00 दे देता है और फिर इसके घर से वापस चला जाता है।
आज पतिपत्नी बेहद खुश हो जाते हैं।
इस तरह से अब तो सुंदर सिंह को जब भी मौका मिलता था यह महिला जो सुदेश देवी होती है खुद से इस सुंदर सिंह को अपने घर पर बुलाती थी और फिर इन दोनों के बीच गलत रिश्ते कायम होते थे।
सुंदर सिंह उसको कुछ पैसे दे दिया करता था जिससे इसके घर का गुजारा होने लग जाता है।
इस तरह से कम से कम 10 दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 20 अक्टूबर 2025 का दिन।
सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त होता है।
अब कुंदन सिंह अपनी पत्नी सुदेश देवी को लेकर शहर में चला जाता है।
जबकि दूसरी तरफ कुंदन सिंह की छोटी बेटी कुंचन अपने स्कूल में चली जाती है और घर पर पायल बिल्कुल अकेली रह जाती है।
अब जैसे ही आधे घंटे का वक्त गुजर जाता है और कुंदन सिंह अपनी पत्नी सुदेश को लेकर शहर में चला जाता है तो इन दोनों की पीठ के पीछे अब सुंदर सिंह इसके घर पर आ जाता है।
सुंदर सिंह अपने दोस्त से मिलने आया था।
सुंदर सिंह जैसे ही कुंदन को आवाज लगाने लग जाते हैं तो फिर बेटी पायल अपने कमरे से बाहर निकलती है और पायल अब सुंदर को कहने लगती है कि मेरे माता-पिता तो उस शहर में गए हैं लेकिन वहां पर सुंदर सिंह की जब नजर इस लड़की पर पड़ जाती है तो फिर पायल को देखकर सुंदर सिंह की नियत खराब हो जाती है।
सुंदर सिंह सोचने लग जाता है कि पायल तो अपनी मां से भी बहुत ज्यादा खूबसूरत है और इस तरह से अब इस सुंदर सिंह का मन खराब होने लग जाता है।
अब सुंदर सिंह के पास बहुत अच्छे खासे पैसे आ चुके थे और पैसों के दम पर सुंदर सिंह अब इस लड़की पायल को हासिल करना चाहता था।
सुंदर सिंह किसी भी हद तक जा सकता था इस लड़की पायल को पाने के लिए।
आज के समय में तो सुंदर सिंह अपने घर पर चला जाता है।
जैसे ही शाम हो जाती है तो शाम के समय पायल के माता-पिता शहर से आ जाते हैं।
दूसरी तरफ गुंजन भी स्कूल से अपने घर पर आ चुकी होती है।
पायल अपने पिता कुंदन सिंह को कहने लगती है कि सुंदर सिंह हमारे घर पर आया वो तो उन्हें पूछ रहा होता है।
और इस तरह से इसका पिता कुंदन सिंह अब अपने दोस्त सुंदर के पास चला जाता है।
सुंदर से कहने लगता है कि दोस्त तुम मेरे घर पे दिन के समय आए थे लेकिन मैं शहर में गया हुआ था। आखिर बात क्या है?
तो फिर जो सुंदर होता है अपने दोस्त को कहने लगता है कि मैं तो तेरे घर पे ऐसे ही चला गया था और फिर इस तरह से दोनों बैठकर शराब पीने लग जाते हैं।
कुछ देर तक शराब पीते हैं और शराब पीने के बाद जो कुंदन सिंह होता है अपने घर पर आ जाता है और देखते ही देखते शाम के करीब 7:00 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है।
सुंदर सिंह अपने दोस्त कुंदन के पास फोन कॉल करता है और कहता है कि आज मेरी नौकरानी घर पर नहीं आई है।
घर के छोटे-मोटे कामकाज पड़े हैं और फिर मेरे लिए खाना भी बनाना है।
कुंदन तुम ऐसे करो अपनी बेटी पायल को मेरे घर पर भेज दो ताकि मेरे लिए वह खाना बना सके और मेरे जो छोटे-मोटे घर के कामकाज है वह भी खत्म कर सके।
अब कुंदन सिंह इतना तो विश्वास अपने दोस्त सुंदर सिंह पर करता ही था और इस तरह से कुंदन सिंह अब अपनी बेटी पायल को कहता है कि तुम अपने अंकल सुंदर के घर पर चली जाओ। उसके लिए खाना तैयार कर दो।
देखते ही देखते रात के करीब 8:00 बजे के आसपास पायल देवी सुंदर के घर पर चली जाती है।
सुंदर आज भी अपने घर में बैठकर शराब पी रहा होता है।
कुछ देर तक तो पायल इसके घर में कामकाज करती है और इसके लिए खाना तैयार करती है।
जैसे ही रात के करीब 8:30 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है तो फिर सुंदर सिंह की नियत अब इस पायल पर खराब हो जाती है।
और फिर देखते ही देखते सुंदर सिंह अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लेता है।
रसोई में जाता है। वहां से धार चाकू उठाता है।
चाकू उठाकर इस लड़की के गर्दन पर रख लेता है और लड़की को धमकाने लगता है कि अगर तुमने शोर मचाने की चिल्लाने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी गर्दन यहीं पर काट दूंगा।
इस तरह से पायल वहां पर काफी डर जाती है। काफी सहम जाती है।
अब यह सुंदर सिंह इस लड़की पायल को लेकर अपने कमरे के अंदर चला जाता है और फिर कमरे के अंदर इस लड़की के मुंह पर कपड़ा बांध दिया जाता है।
और फिर आज सुंदर सिंह इस लड़की के साथ उस काम को कर देता है जिसको हरगिज़ नहीं करना चाहिए था।
सुंदर सिंह अपने मन की इच्छा को पूरा कर लेता है और जैसे उसकी मन की इच्छा पूरी हो जाती है तो सुंदर सिंह अब इस लड़की को कहता है कि अगर तुमने अपने माता-पिता को बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा।
दो चार बार धमकी देने के बाद इस लड़की को कुछ पैसे देकर इसके घर पर भेज देता है।
अब जैसे ही पायल अपने घर पर पहुंचती है तो वह अपने माता-पति से मिलती है और अपनी मां सुदेश को कहने लगती है कि मां उस सुंदर सिंह ने मेरे साथ गंदा काम किया है और इस तरह से सुदेश फिर अपने पति कुंदन सिंह को अपने पास बुलाती है।
कुंदन को कहती है कि आज तुम्हारी बेटी के साथ सुंदर ने गलत काम किया है।
लेकिन वहां पर कुंदन सिंह अपनी बेटी को समझाने लगता है।
कुंदन सिंह और सुदेश यह दोनों मिलकर अपनी बेटी पायल को कहने लगते हैं कि यह बात किसी के सामने मत बताना नहीं तो हमारी बदनामी हो जाएगी।
अब जैसे ही बेटी पायल अपने माता-पिता की इन बातों को सुनती है तो बेहद दुखी हो जाती है।
लेकिन फिर भी सुदेश और कुंदन दोनों अपनी बेटी को दिलाशा देते हैं और कहते हैं कि इसी समय हम उसके घर पर जाते हैं।
और फिर कुंदन सिंह और सुदेश देवी यह दोनों ही घर से बाहर निकलकर सुंदर के घर पर चले जाते हैं।
सुंदर सिंह को कहने लगते हैं कि तुमने मेरी बेटी पायल के साथ गलत काम क्यों किया है?
लेकिन सुंदर सिंह के पास रुपया था, पैसा था।
सुंदर सिंह इनको ₹00 देता है और कहता है कि जो गलती हो गई है उसके लिए मैं माफी चाहता हूं।
अब जैसे ₹00 माता-पति के हाथ पर रख दिए जाते हैं तो सुदेश को वहां पर लालच आ जाता है।
साथ में कुंदन सिंह को भी लालच आ जाता है।
दोनों सोचने लग जाते हैं कि इज्जत तो जा चुकी है।
वह वापस आने वाली नहीं है।
अगर हाथ लगे कुछ पैसे आ जाते हैं तो बहुत अच्छी बात है।
कुंदन सिंह और सुदेश देवी दोनों कहने लगते हैं कि ₹00 में हमारा कुछ भी होने वाला नहीं है।
और इस तरह से सुंदर सिंह देखते ही देखते इनको ₹1 लाख और दे देता है।
माता-पिता खुश होकर सुंदर सिंह के घर से अपने घर पर आ जाते हैं और जैसे ही घर के अंदर प्रवेश करते हैं तो पायल की नजर माता-पति के हाथ में जो पैसे होते हैं उन पर पड़ जाती है और पायल अपने माता-पति को कहने लगती है कि सुंदर के साथ क्या बात हुई है।
तभी माता-पति कहने लगते हैं कि पायल देखो तुम किसी बात की फिक्र मत करो। जो हो गया है उसको भूल जाओ।
अब पायल भी पैसों को देखकर इस बात को समझ जाती है कि उसके माता-पति ने उसकी इज्जत का सौदा कर लिया है।
और इस तरह से जो पायल होती है वो काफी उदास होकर परेशान होकर अपनी बहन गुंजन के कमरे में जाकर लेट जाती है।
पूरी रात ऐसे ही गुजर जाती है।
और इस तरीके से बात आई गई हो जाती है।
लेकिन यहां पर पायल देवी सबसे बड़ी गलती यह कर जाती है कि ना तो इस बात के बारे में वह किसी और से जिक्र करती है और ना ही अपनी छोटी बहन गुंजन को इन सारी बातों के बारे में बताती है।
दिन गुजरते चले जाते हैं।
आखिरकार एक ऐसी तारीख आ जाती है जिसमें 2 नवंबर 2025 का दिन आ जाता है।
सुबह के करीब 9:00 बजे के आसपास का वक्त होता है।
गुंजन बेटी अपने स्कूल में पढ़ाई करने चली जाती है।
दूसरी तरफ गुंजन का पिता कुंदन सिंह अपने किसी जरूरी काम से बाहर चला जाता है।
घर पे सुदेश देवी और उसकी बेटी पायल यह दोनों अकेले रह जाते हैं।
करीब 11:00 बजे के आसपास सुंदर सिंह सुदेश के पास फोन कॉल करता है और सुदेश को बोला जाता है कि आज तुम अपनी बेटी पायल को मेरे घर पर भेज दो।
शाम के समय तुम्हें ₹00 मिल जाएंगे।
अब जैसे ये बात बोली जाती है तो सुदेश इस सुंदर सिंह को कहने लगती है कि तुम ऐसा करो मेरे घर पर आ जाओ।
मेरे घर पर आज कोई भी नहीं है। मेरा पति किसी जरूरी काम से बाहर चला गया है और मेरी छोटी बेटी गुंजन देवी अपने स्कूल में पढ़ाई करने चली गई है और हम दोनों घर पर अकेले हैं।
लेकिन सुंदर सिंह कहते हैं कि तुम उसको मेरे घर पर भेज दो।
सुदेश कहती है कि वो तुम्हारे घर पर नहीं आएगी।
अगर मैं उसके साथ रहती हूं तो तुम्हारी बात बन सकती है।
परेशान होकर थक हार कर सुंदर सिंह दोपहर के करीब 12:00 बजे के आसपास सुदेश देवी के घर पर आ जाता है।
घर का दरवाजा खुलवाया जाता है और फिर देखते ही देखते सुंदर सिंह घर के अंदर प्रवेश कर जाता है।
और फिर इसके बाद सुंदर सिंह सुदेश से बातचीत करता है।
उसको कुछ पैसे देता है और कहता है कि तुम्हारी बेटी पायल के साथ वक्त गुजारना है।
और इस तरह से सुदेश फिर अपनी बेटी पायल को कहने लगती है कि बेटी तुम्हें यह सब करना ही पड़ेगा।
क्योंकि तुम्हारी कल शादी भी होने वाली है। हमारे पास इतने पैसे नहीं है।
पायल वहां पर मना करती रहती है लेकिन उसकी मां सुदेश देवी मानने को तैयार नहीं होती है।
इस तरह से थक हार कर पायल देवी बिल्कुल साफ मुकर जाती है।
लेकिन उसकी मां सुदेश देवी धक्के से उसके साथ धक्का करके उसको कमरे के अंदर बंद कर देती है।
और फिर बाद में सुंदर सिंह को उस कमरे के अंदर भेज दिया जाता है।
आज भी सुंदर सिंह इस लड़की पायल के साथ उसी काम को दोहरा लेता है और जब सुंदर सिंह का मन भर जाता है तो इस कमरे से बाहर निकल जाता है और फिर देखते ही देखते अपने घर पर चला जाता है।
इस तरह से दिन गुजरते चले जाते हैं।
सुंदर सिंह की हद यहां तक बढ़ जाती है जब उसका मन करता था।
अब सुदेश के घर पर आता था सुदेश के सामने ही उसकी बेटी पायल के साथ गलत काम किया करता था।
दिन गुजरने के साथ-साथ अब इस लड़की पायल का मनोबल भी टूटने लग जाता है।
आखिरकार 6 नवंबर 2025 का दिन आ जाता है।
करीब 3:00 बजे के आसपास का वक्त होता है।
गुंजन के स्कूल की छुट्टी का वक्त हो जाता है।
गुंजन अपने घर पर आती है और फिर वह देखती है कि उसकी मां सुदेश देवी घर पर नहीं होती है।
घर में उसकी बड़ी बहन पायल अकेले कमरे में बैठकर रो रही होती है।
उसको रोता देखकर गुंजन उसको पूछने लगती है कि बहन आखिर बात क्या है?
लेकिन बहन वहां पर रोती हुई अपनी बहन गुंजन देवी के गले पर लिपट जाती है।
पायल इसके बाद अपनी बहन गुंजन को अब शुरू से आखिर तक की पूरी कहानी सुनाना शुरू कर देती है।
गुंजन को कहती है कि उसके माता-पति ने मिलकर उसकी इज्जत का सौदा किया है।
सुंदर सिंह अब हमारे घर पर आता है और मेरे साथ गलत काम करता है।
गुंजन अपनी बहन पायल की जैसे इन सारी बातों को सुनती है तो गुस्से में पागल हो जाती है।
गुंजन अपनी बहन को कहने लगती है कि इस बात का बदला तो जरूर लेना पड़ेगा और इस तरह से दोनों बहन मिलजुलकर योजना तैयार कर चुके होते हैं।
शाम का वक्त होता है पूरा परिवार शाम के समय खाना मिलजुलकर खाता है और जैसे ही खाना खा लिया जाता है तो रात के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है।
गुंजन के माता-पति अलग से कमरे में जाकर लेट जाते हैं और दोनों बहनें यानी गुंजन और साथ में पायल देवी यह दोनों एक कमरे में लेट जाते हैं।
जैसे ही रात के करीब 11:00 बजे के आसपास का वक्त होता है तो आज गुंजन देवी को नींद नहीं आ रही थी।
ना ही उसकी बहन पायल को नींद आ रही होती है।
अब गुंजन देवी अपने कमरे से बाहर निकलती है और देखती है कि उसके माता-पति गहरी नींद में सो चुके होते हैं।
गुंजन अपने घर में इधर-उधर हथियार देखना शुरू कर देती है।
पहले उसको एक सरिया मिल जाता है।
सरिया उठा लिया जाता है और फिर इसके बाद दूसरे हथियार की तलाश करना शुरू कर देती है।
घर में कोई भी हथियार नहीं होता है सिवाय एक पुरानी कुल्हाड़ी पड़ी होती है।
उस कुल्हाड़ी को भी उठा लिया जाता है।
और फिर गुंजन अपनी बहन पायल के पास जाती है और कहती है कि आज हमने अपने माता-पति का काम तमाम करना है।
और बाद में फिर उस सुंदर सिंह को भी देख लेते हैं।
इस तरह से दोनों बहनें अब अपने माता-पति के कमरे में घुस जाती है और मौका पाते ही अब जो ये गुंचन देवी थी अपने पिता कुंदन सिंह के सिर में कई कुल्हाड़ी मार देती है।
अब जैसे ही कुल्हाड़ियां मारी जाती हैं तो कुंदन सिंह की केवल एक ही चीख निकल पाती है और उस चीख के कारण उसकी पत्नी सुदेश की आंख खुल जाती है।
सुदेश देखती है कि उसके पति की लाश उसके बिल्कुल नजदीक पड़ी होती है।
उसके शरीर से काफी खून भी बह रहा होता है और इस तरह से वहां पर सुदेश जब अपने पति को ऐसा देखती है तो उसके मुंह को वहीं पर दबा लिया जाता है।
उसकी बड़ी बेटी पायल उसके मुंह पर हाथ रख लेती है और छोटी बेटी जो गुंजन होती है उस पर कुल्हाड़ियों से वार करना शुरू कर देती है और देखते ही देखते पायल देवी भी अपनी मां के पेट में दो चार शरीर घुसा देती है।
अब जैसे ही यहां पर सुदेश देवी की भी मौत हो जाती है तो फिर दोनों बहनें योजना बनाती है कि उस सुंदर सिंह को भी देख लिया जाए और इस तरह से रात के करीब 12:00 बजे के आसपास का वक्त होता है।
दोनों बहनें अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद करने के बाद सुंदर सिंह के घर पर चली जाती है।
सुंदर सिंह के घर का दरवाजा खटखटाया जाता है और नशे की हालत में जब सुंदर सिंह अपने घर का दरवाजा खोलता है तो फिर देखते ही देखते पायल उसके पेट के अंदर सरिया घुसा देती है।
अब यहां पर जो सुंदर सिंह होता है नीचे गिर जाता है और फिर जो छोटी बेटी कुंजन होती है उसके सिर पर दो-तीन बार कुल्हाड़ी मार देती है जिसकी वजह से सुंदर सिंह मौके पर ही अपना दम तोड़ देता है और इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम देने के बाद दोनों बहनें रात के करीब 2:30 बजे के आसपास पुलिस स्टेशन की तरफ चलना शुरू कर देती है।
करीब एक घंटे के बाद दोनों बहनें पुलिस स्टेशन के अंदर पहुंच जाती है और जब वह पुलिस स्टेशन के अंदर पहुंचती है तो फिर वहां पर जो दरोगा किशन दत्त बैठा होता है उससे पूरी कहानी सुनाई जाती है।
पायल कहती है कि हमने अपने माता-पति का कत्ल कर दिया है।
साथ में मेरे पिता कुंदन सिंह के एक दोस्त सुंदर सिंह का भी कत्ल कर दिया है।
और इस तरह से जब वो दरोगा इन दोनों लड़कियों की पूरी कहानी वो सुनता है तो फिर उसके भी होश उड़ जाते हैं।
उसी समय पुलिस टीम गांव में आती है और फिर पायल के माता-पति का शव बरामद कर लिया जाता है।
साथ में सुंदर सिंह की लाश को भी बरामद कर लिया जाता है।
तीनों की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है और फिर पुलिस इन दोनों बहनों के खिलाफ कानूनी कारवाई करने के लिए तैयार हो जाती है।
यह बात भविष्य के गर्भ में छिपी है कि जज साहब आखिरकार इन दोनों बहनों को क्या सजा सुनाएंगे।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में पायल और गुंजन देवी ने जो किया क्या वह सही था या गलत था?
कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसी घटना के साथ।
तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद वंदे मातरम।
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