मां ने अपने सगे बेटे का सिर कुल्हाड़ी से का**ट दिया/ बेटे की हुई मौ**त/
मां ने अपने सगे बेटे का सिर कुल्हाड़ी से का**ट दिया/ बेटे की हुई मौ**त/
शंकर की हत्या और कांता की बदला
नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज हमारी इस घटना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से होती है। बरेली जिले में बुखारा नाम का छोटा सा गांव है और इसी गांव में कांता देवी रहती थीं। कांता देवी बहुत गरीब और विधवा महिला थी। उनके घर में बहुत ज्यादा गरीबी थी। अपनी गरीबी दूर करने के लिए वे जमींदारों के घर में झाड़ू पोछा लगाने का काम करती थीं। इस काम से उनका घर का गुजारा चलता था।
कांता देवी के परिवार में इकलौता बेटा शंकर था। शंकर 11वीं कक्षा में पढ़ाई करता था। लेकिन शंकर बिल्कुल आवारा था। स्कूल में पढ़ाई करता, लेकिन दोस्तों के साथ घूमता। अब तो उसके एक दोस्त गगन के साथ बैठकर नशा करने लगा था। गगन नशेड़ी किस्म का था। धीरे-धीरे शंकर को भी नशे की लत लग गई। दोनों स्कूल से बंक कर खेतों में बैठकर नशा करते। शंकर की मां कांता देवी उसे समझाती थीं, “बेटा पढ़ाई कर ले, अच्छी नौकरी मिलेगी, गरीबी दूर होगी।” लेकिन शंकर एक कान से सुनता, दूसरे कान से निकाल देता।
2 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजे शंकर स्कूल जाने को तैयार होकर घर से बाहर निकला। पड़ोस की चाची पुष्पा देवी ने आवाज लगाई और बोली, “शंकर, मेरे घर आ जाओ।” पुष्पा का चरित्र बिल्कुल खराब था। वह हाथसम नौजवान लड़कों को अपने प्रेम जाल में फंसाकर रातें रंगीन करती और पैसे वसूल लेती थी। शंकर ने कहा, “चाची, कोई जरूरी काम है?” पुष्पा बोली, “मुझे ₹1000 की जरूरत है। शाम को आकर पैसे दे देना।” शंकर ने हां कर दी। शाम को शंकर नशे में डूबा बैठ गया। पुष्पा का काम भूल गया।

7 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजे कांता देवी कामकाज कर रही थीं। शंकर आया और बोला, “मां, मुझे ₹1000 की जरूरत है।” कांता ने कहा, “बेटा, घर में पैसा नहीं है। मैं जमींदारों के घर झाड़ू पोछा लगाकर गुजारा करती हूं।” शंकर परेशान हो गया। कांता ने कहा, “मुझे जाना ही पड़ेगा।” वे घर से बाहर निकलीं। शंकर अकेला रह गया। वह ना स्कूल गया, ना पढ़ाई। दोस्त गगन को फोन किया, “आज घर अकेला हूं। नशा ला दे।” गगन ने चोरी करके नशा लाया। दोनों नशे में डूबे रहे।
15-20 मिनट बाद घर का दरवाजा खुला। पुष्पा देवी खड़ी थी। श्रृंगार कर रखा था। शंकर की नजर पुष्पा के गोरे बदन पर पड़ी तो उसकी नियत खराब हो गई। पुष्पा ने कहा, “शंकर, जरूरी बात करनी है।” शंकर बोला, “चाची, घर में आ जाओ। मां बाहर है।” पुष्पा अंदर आई। गगन भी बैठा था। पुष्पा ने कहा, “शंकर ने पैसे नहीं दिए। अब और पैसे चाहिए।” गगन ने कहा, “चाची, घर का दरवाजा बंद करो। ₹2000 दूंगा।” पुष्पा खुश हुई। दरवाजा बंद किया। दोनों कमरे में गए। गगन और पुष्पा ने गलत काम शुरू किया। इच्छा पूरी हुई। गगन शंकर के पास आया और बोला, “शंकर, तुम भी बहती गंगा में डोकी लगा सकते हो।” शंकर खुश हो गया।
दोनों ने पुष्पा के साथ गलत काम किया। पुष्पा ने कहा, “जब मन करे आना। बदले में पैसे दोगे।” शंकर और गगन खुश हुए। पुष्पा चली गई। अब शंकर और गगन पुष्पा के घर जाते और पैसे देकर रातें रंगीन करते। या शंकर की मां बाहर हों तो शंकर पुष्पा को अपने घर बुलाता।
15 जुलाई 2026 को सुबह 7:30 बजे शंकर ने मां से कहा, “मां, पैसों की जरूरत है।” कांता ने इंकार कर दिया। शंकर पर गुस्सा आया। झगड़ा हुआ। कांता बोली, “मुझे जमींदारों के घर जाना ही पड़ेगा।” वे बाहर निकलीं। शंकर अकेला रह गया। वह घर की चीजों देखने लगा। मां की सोने की अंगूठी हाथ में आ गई। शंकर खुश हुआ। फोन पर गगन को बुलाया, “आज मां की अंगूठी चुरा ली। शहर जाऊंगा, बेचकर नशा लूंगा।” गगन 10 मिनट में आ गया। दोनों मोटरसाइकिल से शहर गए। सुनार की दुकान पर अंगूठी बेच दी। पैसे मिले। नशा खरीदा। खेतों में बैठकर नशा किया।
शंकर ने कहा, “चलो पुष्पा चाची के घर चलते हैं।” दोनों पुष्पा के घर पहुंचे। पुष्पा खुश हुई। घर में अंदर बुलाया। मुख्य दरवाजा बंद किया। शंकर ने कहा, “चाची, आज बहुत पैसे हैं। दिन में ही काम करेंगे।” पुष्पा तैयार हुई। दोनों कमरे में गए। गलत काम शुरू हुआ। इच्छा पूरी हुई। शंकर ने पैसे दिए। गगन भी आया। दोनों ने पुष्पा के साथ काम किया। इच्छा पूरी हुई। दोनों घर से निकले।
पुष्पा की पड़ोसन रीता देवी ने देख लिया। शाम 6 बजे वह कांता के घर पहुंची। बोली, “कांता, तुम्हारा बेटा शंकर और गगन पुष्पा के घर जाते हैं। पुष्पा के साथ रातें रंगीन करते हैं।” कांता ने कहा, “रीता, किसी को मत बताना। मेरी बेइज्जती हो जाएगी, बेटे की शादी नहीं होगी।” रीता बोली, “मैं चुप रहूंगी, लेकिन तुम अपने बेटे पर काबू रखना।” रीता चली गई।
रात 8 बजे शंकर घर पहुंचा। कांता सोने की अंगूठी नहीं मिली। गुस्सा आया। शंकर ने माफी मांगी, “मां, अब गलत काम नहीं करूंगा। पुष्पा के घर नहीं जाऊंगा।” कांता ने माना। अगले दिन शंकर फैक्ट्री में काम करने लगा। हर रोज सुबह 8 बजे जाता। रात को घर आता। कांता की तबीयत खराब थी। शंकर ने कहा, “मां, पैसे दूंगा।” कांता ने भाई मानसिंह को फोन किया। बोली, “बेटी दिव्या भेज दे।” शाम 6 बजे मानसिंह अपनी बेटी दिव्या लेकर आए। कांता ने कहा, “दिव्या, मेरा घर तेरा है। काम कर।” मानसिंह खुश हुआ।
दिव्या कांता के घर कामकाज करने लगी। शंकर भी फैक्ट्री में जाता। कांता चारपाई पर लेटी रहती। 10 दिन बाद 16 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजे कांता ने कहा, “दिव्या, अब एक-दो दिन बाद तुझे घर भेज दूंगी।” दिव्या बोली, “बुआ, मेरा मन लग गया। दो-चार दिन और रहूंगी।” कांता ने हां कर दी। कांता फिर जमींदारों के घर काम पर चली गई। थोड़ी देर बाद शंकर फैक्ट्री से पैसे लेकर आया। गगन को फोन किया, “आज फैक्ट्री से पैसे मिले। नशा लेंगे।” दोनों मोटरसाइकिल से फैक्ट्री से बाहर निकले। नशा खरीदा। खेतों में बैठे।
शंकर ने कहा, “चलो गांव में चलते हैं।” दोनों गांव गए। शंकर ने गगन को घर भेज दिया। खुद घर पहुंचा। दिव्या दरवाजा खोली। शंकर ने देखा, “आज बहुत नशा है।” दिव्या ने कहा, “खाना बनाकर रखूंगी।” शंकर कमरे में बैठ गया। दिव्या खाना लेकर आई। शंकर ने आरी का ब्लेड उठाया। दिव्या के गले पर रख दिया और धमकी दी, “चीखी तो गला काट दूंगा।” दिव्या डर गई। शंकर ने दरवाजा बंद किया। दिव्या को बिस्तर पर घसीटा। नशे में शंकर ने गलत काम शुरू किया। दिव्या रोती रही। शंकर इच्छा पूरी की। धमकी दी, “कोई को मत बताना, वरना मार दूंगा।” शंकर दूसरे कमरे में सो गया। दिव्या रोती रही।
शाम को कांता घर लौटी। दिव्या रो रही थी। कांता ने पूछा, “दिव्या, क्या हुआ?” दिव्या ने रोते-रोते पूरी कहानी बताई, “चाचा ने मेरे साथ गलत काम किया।” कांता गुस्सा हुई। घर में हथियार तलाशे। कुल्हाड़ी मिली। कांता शंकर के कमरे में गई। शंकर की गर्दन काट दी। शंकर की मौत हो गई। दिव्या चीखने लगी। कांता ने मोबाइल निकाला और पुलिस को फोन किया, “मैंने बेटे का कत्ल कर दिया।” पुलिस पहुंची। शंकर का शव बरामद हुआ। कांता को गिरफ्तार किया गया। कांता ने पुलिस को दिव्या की पूरी कहानी बताई। पुलिस ने कांता के खिलाफ कानूनी कारवाई शुरू कर दी।
दोस्तों, इस पूरे घटनाक्रम को सुनाने का मेरा उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं था। बल्कि आपको जागरूक करना था। आपको सावधान करना था। नशे में मत पड़ना। आवारा दोस्तों से दूर रहना। परिवार की इज्जत का ख्याल रखना। अगर किसी लड़की या बहन के साथ गलत काम हो रहा हो तो तुरंत बाहर निकलना और मदद मांगना। शंकर जैसा युवक नशे में घरेलू हिंसा करता है, उसकी मां कांता डर जाती है और बदला ले लेती है। लेकिन यह सब गलत है। शांति से रहो, पढ़ाई करो, मेहनत करो। कांता और शंकर की सजा मिलनी चाहिए। मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ। तब तक के लिए जय हिंद, वंदे मातरम।