देहरादून में शहीद आर्मी कर्नल के इकलौते बेटे के कत्ल में करोड़पति सगी मां की भूमिका की पूरी कहानी! – News

देहरादून में शहीद आर्मी कर्नल के इकलौते बेटे के कत्ल में करोड़पति सगी मां की भूमिका की पूरी कहानी!

देहरादून में शहीद आर्मी कर्नल के इकलौते बेटे के कत्ल में करोड़पति सगी मां की भूमिका की पूरी कहानी!

यह कहानी नोवंबर-दिसंबर 2023 की है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 64 वर्षीय विधवा बिना शर्मा कर्नल रमेश चंद की इकलौती पत्नी, जिनके पति देश के लिए शहीद हो गए थे, हाईकोर्ट की तरफ मुड़ चुकी थीं। “मेरी जान बचा लीजिए,” उनकी आवाज़ कांप रही थी। कोर्ट के जज साहब ने पूरी गंभीरता से केस लिया और सरकार को आदेश दिया कि बिना शर्मा को सुरक्षा दी जाए। सरकार ने एक महिला सिपाही की तैनाती कर दी, जो 24 घंटे उनकी जिंदगी की रक्षा करे।

कुलधारा कर्नल रमेश चंद मेरठ छावनी में शहीद हुए थे। उनकी पत्नी बिना शर्मा बसंत विहार में रहती थीं, जहाँ उनके पास कोई कमी नहीं थी। उनके इकलौते बेटे अर्जुन शर्मा, 45 साल के, ने इंदिरा नगर में अपनी गैस एजेंसी संभाली थी। 2020 में अर्जुन ने अभिलाषा से शादी की, जो उनके दो बच्चों – एक बेटे और एक बेटी – की मां थी।

लेकिन 15 साल से अर्जुन और उनकी मां के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। अर्जुन का बाप कर्नल रमेश शहीद हो गए थे। भारत सरकार ने गैस एजेंसी देहरादून में दे दी थी, ताकि बिना शर्मा अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। पैसे का सिलसिला शुरू हुआ। अर्जुन समझदार होने लगे और सोचने लगे कि मां इतना पैसा विनोद उनियाल को क्यों दे रही हैं, जिनसे मां का रिश्ता अजीब था।

एक दिन अर्जुन ने मां से कहा, “मां, हम कमाते हैं, लेकिन आपके खाते से इतना पैसा कहाँ जाता है? कम से कम 50 प्रतिशत मेरे हिस्से का दे दीजिए। हम कोई झगड़ा नहीं करेंगे।” बिना शर्मा ने साफ इंकार कर दिया। “जमीन मेरे नाम है, सब मेरे नाम है। तुम्हारा क्या काम?” इस जवाब पर अर्जुन का दिल टूट गया।

उसके बाद दोनों के बीच परेशानी बढ़ने लगी। अर्जुन ने वकील से संपर्क किया और कोर्ट से गैस एजेंसी का केस लगा दिया। जॉइंट मेमोरियल्स रोड पर एक प्रॉपर्टी थी, जिसकी कीमत 14 करोड़ रुपये थी। बिना शर्मा ने विनोद उनियाल के जरिए डॉक्टर अजय खन्ना से सौदा किया। डॉक्टर ने 14 करोड़ में सौदा किया, लेकिन शर्त रखी थी – पैसे वापस हो जाएं तो 16 करोड़ देना पड़ेगा। अर्जुन को पता चलते ही वह मां के पास पहुंचा। “मां, मैं भी तो इसी घर का हिस्सा हूं। पिताजी के नाम का हिस्सा भी मेरा है। 50 प्रतिशत दे दीजिए।” बिना शर्मा ने फिर साफ-साफ इंकार कर दिया। “मेरा बेटा विरोध करेगा? नहीं, मैं सब संभाल लूंगी।”

अर्जुन परेशान हो गया। उन्होंने विनोद उनियाल पर एफआईआर करवाई और मां पर भी। दोनों तरफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। अर्जुन ने कोर्ट में केस लगाया, जिससे प्रॉपर्टी विवादित हो गई। डॉक्टर और बिना शर्मा के बीच भी तनाव बढ़ने लगा। अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने पुलिस को पहले ही कुछ बताया था कि मां और डॉक्टर के बीच कुछ गलत चल रहा है।

लेकिन 11 फरवरी 2026 की सुबह देहरादून की तिब्बती मार्केट के फल वाले ठेले पर कुछ न कुछ गड़बड़ होने वाली थी। सुबह-सुबह 10:30 बजे का समय था। फल वाले अंकल से अर्जुन अनेकस का भाव पूछ रहा था। ठीक उसी वक्त नीले स्कूटर पर दो लड़के आ गए। स्कूटर वाले में से एक ने तमंचा निकाला और सीने पर लगाकर गोली चल दी। अर्जुन का शरीर जमीन पर गिर पड़ा। आसपास की दुकानें खुली नहीं थीं, लेकिन भगदड़ मच गई। पुलिस को सूचना मिली। अर्जुन को दून हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर ने बताया कि वह मर चुका है।

पूरे शहर में खबर फैल गई। अर्जुन शर्मा की हत्या की खबर सुनकर मां बिना शर्मा के दिल में भय छा गया। लेकिन कानून ने सब कुछ जाल में फंसाया। पुलिस ने रडार पर नीले स्कूटर को निशाना किया। 12 फरवरी 2026 की सुबह पुलिस ने रायपुर थाना क्षेत्र के जंगल में घेराबंदी की। गोली चल पड़ी। दोनों शूटर घायल हो गए। पंकज राणा और राजीव उर्फ राजू को हिरासत में लिया गया।

पुलिस ने मोबाइल से सीडीआर निकलवाई। पता चला कि विनोद उनियाल नाम का रसूखदार व्यक्ति उनके मालिक था। विनोद उनियाल अर्जुन का मामा का लड़का था, लेकिन उसका रिश्ता बिना शर्मा से अजीब था। पुलिस ने विनोद का रिकॉर्ड देखा। पता चला कि 38 साल पहले कर्नल रमेश शहीद हुए थे। गैस एजेंसी से शुरू हुए पैसे विनोद के खाते में लगातार जाते थे। अर्जुन ने सोचा कि मां का रिश्ता गलत है।

अब पुलिस ने पूरा खेल खोल दिया। विनोद उनियाल, डॉक्टर अजय खन्ना, बिना शर्मा और दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया गया। जून 2026 तक उन्हें गैंगस्टर एक्ट के तहत फरमान भी लगा। अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने पुलिस को पहले ही सब बताया था। सीसीटीवी कैमरे ने शूटरों को भी पहचान लिया।

कोर्ट ने सभी को सजा सुनाई। मां को हत्या का साजिश रचने के लिए जेल की सजा हुई। विनोद उनियाल और डॉक्टर अजय खन्ना को भी सजा मिली। दोनों शूटरों को भी सख्ती से सजा। अर्जुन की पत्नी और बच्चे अब उस घर में रहते थे, लेकिन दिल में सदमा था। बिना शर्मा को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने सोचा कि अर्जुन को बचाने की कोशिश करनी चाहिए थी।

यह कहानी सिखाती है कि परिवार में कोई भी झगड़ा गलत रास्ते की ओर ले जाता है। पैसे, जमीन और रिश्तों को सही तरीके से समझना जरूरी है। अगर मां बिना शर्मा ने अर्जुन से बात की होती, अगर अर्जुन ने मां के साथ अच्छा रिश्ता बनाए रखा होता, तो शायद यह हत्याकांड नहीं होता। आज भी देहरादून में लोग इस घटना की चर्चा करते हैं और कहते हैं कि हर विवाद को समझदारी से हल करना चाहिए।

अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने कहा था, “मेरा पति बहुत समझदार था, लेकिन मां का डर उसको अंधा कर गया था।” बिना शर्मा को अब जिंदगी की सारी यादें पीड़ादायक लगती हैं। वे खुद को सजा देती हैं कि उन्होंने अपने बेटे को इतना परेशान किया। लेकिन कानून ने सब ठीक कर दिया।

यह घटना सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है। यह परिवार के रिश्तों, पैसे और अहंकार की कहानी है। आज भी कई लोग इस घटना से सीख रहे हैं कि रिश्तों को तोड़ने से पहले समझो। अगर मां और बेटे ने एक-दूसरे को समझ लिया होता, तो शायद अर्जुन आज भी जीवित होते और परिवार खुशहाल होते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पुलिस और कोर्ट ने अपना काम किया। विनोद उनियाल को अब जेल में सालों गुजरने पड़ेंगे। डॉक्टर अजय खन्ना ने भी अपनी नौकरी और सत्ता गंवा दी। बिना शर्मा की नई जिंदगी बसंत विहार में साधारण और उदास हो गई। बच्चे अर्जुन के अब उनके दादा नहीं रह गए, लेकिन वे उनको याद करते थे।

इस कहानी का अंत सदमा का है, लेकिन सबक अच्छा है। परिवार में एक-दूसरे को समझो, झगड़ो मत। पैसे से ज्यादा रिश्ते की कीमत है। अगर कोई विवाद हो तो वकील या रिश्तेदारों से बात करो, कोर्ट तक न पहुंचो। यही सीख आज भी कई परिवार ले रहे हैं।

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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