देवर और भाभी दोनों के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/ – News

देवर और भाभी दोनों के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/

देवर और भाभी दोनों के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा/वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए/

देवर और भाभी दोनों के साथ हुआ बहुत बड़ा हादसा: वजह जानकर पुलिस के होश उड़ गए

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित सलेमपुर गाँव में एक ऐसा खौ/फ़नाक हादसा घटा, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। यह कहानी है विश्वासघात, अ/नैतिक सं/बंधों और अनियंत्रित गुस्से के उस भयावह मोड़ की, जहाँ एक ही रात में दो जानें चली गईं और पूरे परिवार का अंत हो गया।

1. परिवार और गरीबी की मार

सलेमपुर गाँव में सुशील कुमार नाम का व्यक्ति अपनी पत्नी अक्षरा देवी और अपने छोटे भाई गौरव के साथ रहता था। सुशील गाँव से लगभग 10 किलोमीटर दूर एक कारखाने में मजदूरी का काम करता था। वह मेहनत मजदूरी करके अच्छे-खासे पैसे तो कमा लेता था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी बुराई उसकी अत्यधिक श/राब पीने की आदत थी। महीने की पूरी कमाई वह अपने दोस्तों के साथ श/राब के नशे में उड़ा देता था, जिसके कारण उसके घर में हमेशा आर्थिक तंगी और गरीबी का आलम छाया रहता था।

सुशील की पत्नी अक्षरा देवी घर का कामकाज संभालने के साथ-साथ पशुओं की देखभाल करती थी। वह रोज़ सुबह दूसरों के खेतों से अपने पशुओं के लिए चारा काट कर लाती थी।

दूसरी ओर, सुशील का छोटा भाई गौरव एक कारखाने में सुरक्षा गार्ड (Security Guard) की नौकरी करता था। उसे महीने में ₹16,000 मिलते थे। अपने बड़े भाई के श/राबी रवैये को देखते हुए गौरव अपनी कमाई में से कुछ पैसे अपनी भाभी अक्षरा को दे दिया करता था, ताकि घर का खर्च चल सके। सुशील रोज़ शाम को श/राब के नशे में धुत्त होकर घर आता और पत्नी अक्षरा के साथ मार-पीट व झगड़ा करता। इस रोज़-रोज़ के क्लेश से घर का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना रहता था।

2. खेत में सौदेबाज़ी और कदम सिंह से अ/वैध सं/बंध

4 दिसंबर 2025 की सुबह लगभग 8:00 बजे सुशील और गौरव दोनों अपने-अपने काम पर निकल चुके थे। घर में अक्षरा अकेली थी। करीब 10:00 बजे वह दरांती लेकर गाँव के खेतों में पशुओं के लिए चारा काटने निकल पड़ी।

अक्षरा गाँव के एक बड़े जमींदार कदम सिंह के खेत से चारा काट रही थी। उसी समय कदम सिंह खेत में पहुँच गया। जब उसने अक्षरा को अपने खेत से चारा काटते देखा, तो वह उसके पास आया। अक्षरा दिखने में बेहद सुंदर थी। कदम सिंह की नीयत खराब हो गई और उसने अक्षरा की सुंदरता पर डोरे डालने शुरू कर दिए।

कदम सिंह ने कहा— “तुम मेरे खेत से बिना पूछे चारा काट रही हो।”

अक्षरा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया— “अगर पूछती तो क्या आप मना कर देते?”

इशारों ही इशारों में बात आगे बढ़ी। कदम सिंह ने कहा कि खेत में दोनों अकेले हैं और इस मौके का फ़ायदा उठाया जा सकता है। इस पर अक्षरा ने शर्त रखी कि उसे मुफ़्त में चारा काटने की इजाज़त भी चाहिए और कुछ पैसे भी। कदम सिंह तुरंत मान गया और उसने ₹2,200 निकालकर अक्षरा को दे दिए।

जब कदम सिंह उसे ईख (गन्ने) के खेत की तरफ़ ले जाने लगा, तो अक्षरा ने सुरक्षा उपकरण (कं/डोम) का इस्तेमाल करने को कहा। कदम सिंह तुरंत अपनी मोटरसाइकिल उठाकर गाँव की मेडिकल दुकान से कं/डोम खरीद लाया। इसके बाद दोनों की रज़ामंदी से ईख के खेत में अ/वैध सं/बंध कायम हुए।

इसके बाद दोनों के बीच यह सिलसिला बन गया। कदम सिंह जब भी फोन करता, अक्षरा खेत में पहुँच जाती। उसे मुफ़्त चारा और पैसे मिल जाते, जिससे उसकी आर्थिक व शा/रीरिक ज़रूरतें पूरी होने लगीं।

3. पड़ोसी की सतर्कता और देवर गौरव की एंट्री

कदम सिंह की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि वह अक्षरा से मिलने उसके घर भी आने-जाने लगा। 11 दिसंबर 2025 को जब सुशील और गौरव काम पर गए थे, तब कदम सिंह अक्षरा के घर आया। पड़ोसी कमल सिंह ने कदम सिंह को अक्षरा के घर में जाते हुए देख लिया।

शाम को जब गौरव काम से लौटा, तो कमल सिंह ने उसे सारी बात बता दी— “तुम्हारी भाभी गलत रास्ते पर चल पड़ी है। तुम्हारी पीठ पीछे कदम सिंह तुम्हारे घर आता-जाता है।”

गौरव को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया। उसने शाम 7:00 बजे घर पहुँचकर अपनी भाभी अक्षरा से सीधा सवाल किया। इस पर अक्षरा ने कोई डर दिखाए बिना कहा— “तुम्हारा भाई तो श/राबी है। वह न मुझे समय देता है, न मेरी आर्थिक और शा/रीरिक ज़रूरतें पूरी करता है।”

गौरव ने गुस्से में कहा— “आज के बाद अगर कदम सिंह यहाँ आया, तो उसकी ला/श ही यहाँ से जाएगी। तुम्हारी हर ज़रूरत मैं पूरी करूँगा।”

इसी दौरान श/राबी पति सुशील घर लौट आया, जिसके कारण देवर-भाभी की बातचीत वहीं रुक गई।

4. देवर-भाभी का भटकाव

15 दिसंबर 2025 की सुबह सुशील और गौरव दोनों छुट्टी पर घर पर ही थे। अक्षरा कपड़े धो रही थी। गौरव की नीयत अपनी भाभी को देखकर डगमगा गई। उसने अपने भाई सुशील को श/राब की बोतल लाकर दी ताकि वह घर में बैठकर पीता रहे और खुद अपनी भाभी को चारा काटने में मदद के बहाने खेत ले गया।

खेत में पहुँचकर कोई दूसरा मौजूद न होने का फ़ायदा उठाते हुए गौरव ने भाभी से अपनी इच्छा जताई। दोनों ईख के खेत में चले गए और बिना किसी सुरक्षा के उन दोनों के बीच भी अ/वैध सं/बंध बन गए। इसके बाद जब भी मौका मिलता, गौरव और अक्षरा के बीच यह सब चलने लगा और गौरव उसे पैसे भी देने लगा।

5. तीसरा मोड़: मोबाइल दुकानदार जतिन

22 दिसंबर 2025 को अक्षरा का मोबाइल गलती से बाल्टी के पानी में गिरकर खराब हो गया। शाम को वह गाँव के ही एक मोबाइल रिपेयरिंग शॉप पर गई, जिसका मालिक जतिन नाम का युवक था। जतिन भी आवारा किस्म का लड़का था।

जतिन ने फ़ोन ठीक करने का खर्च ₹2,000 से ₹2,300 बताया। अक्षरा ने कहा कि उसके पास अभी पैसे नहीं हैं। जतिन ने उसकी सुंदरता देखकर कहा— “भाभी, पैसे देने की ज़रूरत नहीं है, मैं मुफ़्त में फ़ोन ठीक कर दूँगा, लेकिन बदले में मुझे इसकी कीमत दूसरी तरह से चाहिए।”

अक्षरा मुस्कुराई और बोली— “फ़ोन ठीक करके मेरे घर ले आओ, मैं घर में अकेली हूँ।”

आधे घंटे बाद जतिन फ़ोन ठीक करके अक्षरा के घर पहुँच गया। दरवाजा बंद हुआ और दोनों कमरे के अंदर अ/नैतिक काम में लिप्त हो गए।

6. रंगे हाथों पकड़ना और खौ/फ़नाक क/त्ल

इसी बीच देवर गौरव अचानक घर लौट आया। दरवाजा खुला तो उसने जतिन को अपनी भाभी के साथ आ/पत्तिजनक स्थिति में देख लिया। गुस्से में आकर गौरव ने जतिन की पिटाई शुरू कर दी। जतिन जैसे-तैसे धक्का देकर वहाँ से भाग निकला।

लेकिन गौरव का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने सोचा कि भाभी कदम सिंह, जतिन और उसके साथ—सबके साथ संबंध बना रही है। उसने गुस्से में आकर अक्षरा के हाथ-पँव रस्सी से बाँध दिए, मुँह में कपड़ा ठूँस दिया और उसके साथ जब/रदस्ती करने लगा।

इसी दौरान पति सुशील कुमार कारखाने से घर पहुँचा। जब उसने घर का दरवाजा बंद पाया और अंदर से आवाज़ें सुनीं, तो उसने दरवाजा तोड़ दिया। कमरे में पहुँचते ही उसने देखा कि उसका अपना भाई गौरव उसकी पत्नी के साथ बंधक बनाकर ग/लत काम कर रहा है।

सुशील का आपा पूरी तरह से खो गया। उसने कोने में रखी भारी कु/ल्हाड़ी उठाई और सीधे अपने भाई गौरव के सिर पर वार कर दिया। गौरव वहीं ख़ू/न से लथपथ होकर गिर पड़ा। गिरते-गिरते गौरव ने चिल्लाकर कहा— “तुम्हारी पत्नी बेवफ़ा है! कदम सिंह, जतिन और मेरे साथ इसके संबंध हैं!”

सुशील के सिर पर ख़ू/न सवार हो चुका था। उसने अंधाधुंध कु/ल्हाड़ी से गौरव पर तब तक वार किए जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। इसके बाद सुशील अपनी बंधी हुई पत्नी अक्षरा की तरफ़ बढ़ा और कु/ल्हाड़ी से उसके सिर पर भी ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। अक्षरा की चीखें सुनकर आसपास के पड़ोसी इकट्ठा हो गए, लेकिन जब तक लोग दरवाजा तोड़कर अंदर पहुँचे, अक्षरा की भी मौके पर ही म/ौत हो चुकी थी।

7. पुलिस की कार्रवाई और अंत

पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर कमरे का खौ/फ़नाक नज़ारा देखा। गौरव और अक्षरा दोनों की ला/शें ख़ू/न से सने फर्श पर पड़ी थीं। पुलिस ने दोनों श/वों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और आरोपी पति सुशील कुमार को कु/ल्हाड़ी समेत गिर/फ्तार कर लिया।

पुलिस पूछताछ में सुशील ने रोते हुए अपना जुर्म कबूल किया और पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया कि किस तरह अ/वैध सं/बंधों और धोखे के कारण उसने अपने ही भाई और पत्नी की ह/त्या कर दी। पुलिस ने उसके खिलाफ ह/त्या का मामला दर्ज कर जेल भेज दिया।

यह दर्दनाक घटना इस बात की गवाही देती है कि अ/नैतिक सं/बंध, लत और धोखे का अंजाम हमेशा तबाही और मौत ही होता है।

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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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