PART 2: मुझे दादाजी की कब्र के पास ही दफनाना” सायद ऑस्ट्रेलिया से जिंदा वापस न लौटूं | उसे सब पता था! – News

PART 2: मुझे दादाजी की कब्र के पास ही दफनाना” सायद ऑस्ट्रेलिया से जिंदा वापस न लौटूं | उसे सब पता था!

PART 2: मुझे दादाजी की कब्र के पास ही दफनाना” सायद ऑस्ट्रेलिया से जिंदा वापस न लौटूं | उसे सब पता था!

सैम अब्राहम मामला (भाग 2): फॉरेंसिक के सबूत, सोफिया की काली डायरी और बिखरे परिवार की दास्तान

सैम अब्राहम की म/ौत केवल एक ह/त्या नहीं थी, बल्कि यह विश्वासघात, अ/वैध संबंधों और ठंडे दिमाग से रची गई एक खौ/फनाक सा/जिश थी। भाग 1 में हमने देखा कि कैसे ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरियन पुलिस ने सोफिया और उसके प्रेमी अरुण कमलासन को गिर/फ्तार किया। लेकिन इस गिर/फ्तारी के पीछे जो रहस्योद्घाटन हुए और अदालत में जो ड्रामा चला, उसने हर किसी की रूह कंपा दी।

फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की गुप्त चाल

14 अक्टूबर 2015 की सुबह जब सोफिया ने इमरजेंसी सेवा (000) पर कॉल करके सैम की म/ौत को दिल का दौरा बताया, तो शुरुआत में मामला सामान्य लग रहा था। लेकिन विक्टोरियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन के पैथोलॉजिस्ट डॉ. बर्ग को पोस्टमार्टम के दौरान कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई।

जब प्रयोगशाला में सैम के शरीर के नमूनों की जांच की गई, तो रिपोर्ट देखकर वैज्ञानिक भी दंग रह गए:

  • सैम के लिवर और खून में 28 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम साइ/नाइड पाया गया था।
  • किसी भी सामान्य इंसान को पल भर में म/ौत की नींद सुलाने के लिए महज 1 से 2 मिलीग्राम साइ/नाइड ही काफी होता है।
  • इतनी अत्यधिक मात्रा का मतलब था कि सैम को म/रने के बाद भी लगातार ज़/हर दिया जा रहा था ताकि बचने की कोई भी गुंजाइश न रहे।

पुलिस समझ चुकी थी कि यह कोई सामान्य म/ौत नहीं बल्कि योजनाबद्ध ह/त्या है। लेकिन पुलिस ने तुरंत सोफिया और अरुण को भनक नहीं लगने दी। अगर वे तुरंत ह/त्या का मामला दर्ज करते, तो दोनों सावधान हो जाते और साक्ष्य मिटा सकते थे। इसलिए पुलिस ने सोफिया को यही महसूस कराया कि वे इसे ‘हार्ट अटैक’ का मामला ही मान रहे हैं।

बेफिक्र प्रेमी और पुलिस का जाल

पुलिस की इस चाल में सोफिया और अरुण पूरी तरह फंस गए। सैम की ला/श को भारत भेजने और दादाजी की क/ब्र के पास द/फनाने के बाद, सोफिया जब मेलबर्न लौटी तो वह और अरुण खुद को पूरी तरह सुरक्षित समझने लगे।

वे दोनों खुलेआम मेलबर्न के मॉल, पार्कों और सिनेमाघरों में घूमने लगे। लेकिन वे इस बात से बेखबर थे कि विक्टोरियन पुलिस उनके हर कदम का पीछा कर रही थी:

  1. अंडरकवर निगरानी: पुलिस की विशेष टीम सिविल कपड़ों में उन पर नजर रख रही थी।
  2. कॉल ट्रैकिंग: पुलिस ने उनके फोन टेप किए। करीब 6,000 से अधिक फोन कॉल्स और मैसेजेस को रिकॉर्ड किया गया, जिनमें वे अपनी भावी जिंदगी और पैसों के बंटवारे पर बातें करते थे।
  3. वित्तीय सबूत: जांच में पता चला कि सोफिया ने वेस्टर्न यूनियन के माध्यम से भारत में अरुण के पते पर गुप्त रूप से पैसे भेजे थे। साथ ही सैम की महंगी कार और कुछ गहने भी अरुण के कब्जे से बरामद हुए।

सोफिया की काली डायरी और बिना पछतावे की रात

जब पुलिस ने सोफिया और अरुण के ठिकानों पर छापेमारी की, तो अरुण के लैपटॉप से सैकड़ों अ/श्लील और आप/त्तिजनक तस्वीरें व वीडियो मिले। लेकिन सबसे बड़ा सबूत सोफिया की हाथ से लिखी निजी डायरी बनी।

इस डायरी के पन्ने सोफिया के ठंडे दिमाग और क्रू/रता की गवाही दे रहे थे। उसने अपनी डायरी में लिखा था:

  • “मुझे नहीं पता क्यों, पर तुम मुझे दूसरों से बहुत अलग और खास लगते हो…”
  • “काश तुम मुझे कसकर पकड़ लो, मैं पूरी तरह तुम्हारी हूँ…”
  • “मैं इतनी क्रू/र और चा/लाक क्यों हूँ? यू मेक मी सो बैड (तुम मुझे इतना बुरा बना देते हो)।”

सबसे ज्यादा डरावनी बात यह थी कि 13-14 अक्टूबर की उस खौ/फनाक रात को जब सैम तड़प-तड़पकर ज़/हर से म/र चुका था, सोफिया ने अपने 7 साल के मासूम बेटे को उसी कमरे में सुलाया था। वह खुद भी अपने म/ृत पति की ला/श के बगल में उसी बिस्तर पर चैन की नींद सोई थी। उसके चेहरे पर पछतावे या डर का एक भी निशान नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और फर्जी दलीलें

2018 में जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट ऑफ विक्टोरिया में पहुँचा, तो पूरे ऑस्ट्रेलिया और भारत के केरल में हड़कंप मच गया। सुनवाई के दौरान सोफिया और अरुण ने खुद को बेकसूर बताने की हर मुमकिन कोशिश की:

  • अरुण की दलील: अरुण के वकीलों ने दावा किया कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह डिप्रेशन का शिकार है। हालांकि, अदालत ने मनोवैज्ञानिक जांच के बाद इस दलील को खारिज कर दिया।
  • सोफिया का ‘मदर कार्ड’: सोफिया ने अदालत के सामने रोते हुए गुहार लगाई कि उसका एक 7 साल का छोटा बेटा है जिसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, इसलिए उसे कम सजा दी जाए।

लेकिन जज जस्टिस कॉघलन ने सोफिया की इस खिंचाई करते हुए कहा:

“आपने अपने मासूम बच्चे के पिता को उसी के सामने ज़/हर देकर मार दिया। जिस माँ ने अपने स्वार्थ और अ/वैध संबंधों के लिए बच्चे के सिर से पिता का साया छीन लिया, वह माँ होने की दुहाई नहीं दे सकती।”

अदालत ने इसे अत्यंत जघन्य और सुनियोजित सा/जिश माना और निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • सोफिया: 22 साल की कठोर जेल (बिना पैरोल के 18 साल अनिवार्य)।
  • अरुण कमलासन: 27 साल की जेल (जिसे बाद में 2019 में अपील के दौरान घटाकर 24 साल कर दिया गया)।

मासूम बेटे और बूढ़े माँ-बाप की दुर्दशा

इस पूरी दर्दनाक दास्तान में सबसे बड़ा नुकसान सैम के बूढ़े माता-पिता और उनके मासूम बेटे का हुआ।

  • पिता सैमुअल और माँ लीलम्मा: सैम उनके परिवार का इकलौता सहारा था। अपने बेटे की म/ौत और बहू की धो/खेबाज़ नीयत ने उन्हें अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया। सैम के पिता सैमुअल अक्सर रोते हुए यही कहते हैं कि उनके बेटे को पहले से ही अपनी म/ौत का अहसास हो गया था, लेकिन वे उसकी चेतावनी को समझ नहीं पाए।
  • मासूम बेटा: घटना के समय केवल 7 साल का रहा वह बच्चा आज अपने पिता को खो चुका है और उसकी माँ जेल में अपनी सजा काट रही है। बच्चे को वापस केरल लाकर सैम के माता-पिता और रिश्तेदारों की देखरेख में बड़ा किया गया।
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Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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