एक महिला अपने प्रेमी के साथ नदी में नहा रही थी, तभी एक दर्दनाक हादसा हो गया। – News

एक महिला अपने प्रेमी के साथ नदी में नहा रही थी, तभी एक दर्दनाक हादसा हो गया।

एक महिला अपने प्रेमी के साथ नदी में नहा रही थी, तभी एक दर्दनाक हादसा हो गया।

एक महिला अपने प्रेमी के साथ नदी में नहा रही थी, तभी एक दर्दनाक हादसा हो गया।

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दोस्तों, आज मैं आप लोगों को सुनाने जा रहा हूं उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक ऐसी कहानी जो दिल को छू लेगी। यह कहानी है आजमगढ़ के छोटे से गांव बड़ेल की। गांव में रहती थी पुष्पा देवी। पुष्पा देवी एक विधवा महिला थी। उसके पति दिनेश कुमार की सात साल पहले लंबी बीमारी के कारण मौत हो गई थी। पुष्पा देवी देखने में काफी खूबसूरत और जवान थी। उसके पास 25 बकरियां थीं। हर सुबह करीब दस बजे पुष्पा देवी अपनी बकरियों को लेकर नदी के किनारे चली जाती। बकरियां घास चरतीं। पेट भरने के बाद गांव लौट आतीं।

पुष्पा देवी के घर का गुजारा इसी बकरियों के दूध और मांस पर चलता था। उसके घर में सिर्फ एक ही बच्चा था सोनू। सोनू बारह साल का था। वह हमेशा चारपाई पर लेटा रहता। पुष्पा देवी घर के काम में व्यस्त रहती। बकरियों की देखभाल, खाना बनाना, सिलाई सब वह खुद करती। सोनू की तबीयत भी खराब रहती। दवा खिलाने के बाद पुष्पा देवी सोचने लगी कि अकेलापन उसे बहुत परेशान कर रहा है। उसकी जरूरतें पूरी नहीं होतीं। इच्छाएं भी अधूरी रह जातीं। उसने कई साल से किसी गैर-मर्द का सहारा ढूंढने की कोशिश की लेकिन कोई नहीं मिला।

दोस्तों, इस गांव में कोई भी उसकी खूबसूरती पर नजर नहीं रखता था। पुष्पा देवी अकेली पड़ गई थी। लेकिन जिंदगी ने एक दिन मोड़ लिया। पुष्पा देवी की तबीयत थोड़ी खराब होने लगी। वह सोचने लगी कि बकरियां भूखी मर जाएंगी। उसने अपने जेठ अजमेर सिंह को फोन किया। उसने कहा कि भाई साहब मेरी तबीयत खराब है। बकरियां संभालने वाला कौन है। मैं घर का काम भी नहीं कर पा रही। जेठ अजमेर सिंह ने कहा कि मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूं। फिर पुष्पा देवी ने कहा कि अपने बेटे उज्जवल को मेरे घर भेज दो। जब मैं ठीक हो जाऊंगी तो उज्जवल को वापस भेज दूंगी। अजमेर सिंह ने मान लिया। उसने अपने बेटे उज्जवल को घर पर बुलाया।

उज्जवल पंद्रह साल का था। वह बड़े-बड़े घरों में रहता था। उसके पिता अजमेर सिंह उसे बहुत प्यार करते थे। लेकिन उज्जवल औरतों में बहुत दिलचस्पी रखता था। छुपकर शहर में किसी कोठे में भी जाता था। अब पिता ने कहा कि चाची पुष्पा बीमार हैं। बकरियां संभालो। दो-चार हफ्तों के लिए चाची के घर चले जाओ। उज्जवल ने मान लिया। शाम चार बजे वह अपनी चाची पुष्पा देवी के घर पहुंचा। पुष्पा देवी दरवाजा खोलकर देखी कि ठीक सामने उसका भतीजा खड़ा है। उज्जवल की कद-काठी अच्छी थी। उसकी नजरें पुष्पा देवी की खूबसूरती और जवानी पर पड़ते ही उसकी नियत खराब हो गई।

पुष्पा देवी ने कहा कि चाची तुम्हारी तबीयत कैसी है। पुष्पा ने जवाब दिया कि तबीयत ठीक नहीं है। जब तक मैं ठीक नहीं होती तब तक तुम मेरे घर पर रुक जाओ। उज्जवल हंसकर बोला कि चाची किसी बात की फिक्र मत करो। मैं घर के सारे काम खुद कर लूंगा। पुष्पा का मन शांत हो गया। लेकिन इस बात के बारे में उज्जवल कुछ नहीं जानता था कि पुष्पा ने उसे क्यों बुलाया था। उज्जवल घर में रहने लगा। पंद्रह दिन गुजर गए। सोनू भी घर में रहता। वह अपनी मां और उज्जवल पर नजर रखता। लेकिन उज्जवल और पुष्पा मिलने तक का मौका नहीं पाता था।

आखिरकार बीस जुलाई 2026 का दिन आ गया। सुबह आठ बजे पुष्पा ने दोनों बेटों के लिए खाना बनाया। सोनू और उज्जवल खा गए। पुष्पा उज्जवल के पास आई और बोली कि आज मैं भी बकरियों को चराने के लिए साथ जाना चाहती हूं। उज्जवल खुश हो गया। आधे घंटे बाद पुष्पा ने सोनू को दवाइयां दीं और बोली चलो उज्जवल बकरियों को नदी की तरफ ले चलते हैं। दोनों बकरियों को लेकर नदी पर पहुंचे। बकरियां घास चरने लगीं। दोनों एक पेड़ की छाया में बैठ गए। बातचीत शुरू हुई।

तभी एक सांप आ गया। पुष्पा देवी की नजरों पर सांप पड़ा तो वह चीख पड़ी। चीखते हुए उज्जवल से चिपक गई। उज्जवल ने सांप को भगा दिया और अपनी चाची का हाथ पकड़ लिया। बोला चाची देखो यहां दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई देता। यह सुनसान इलाका है। कोई रिश्ता है जिस पर शक नहीं किया जा सकता। पुष्पा ने विरोध नहीं किया। उज्जवल ने कहा चलो झाड़ियों के पीछे चलते हैं। पुष्पा ने कहा ठीक है। दोनों झाड़ियों के पीछे चले गए। यहां से दोनों की रजामंदी से गलत रिश्ते शुरू हो गए।

दोनों मिलकर अपनी-अपनी जरूरतें और इच्छाएं पूरी करने लगे। काफी देर तक गलत काम होता रहा। जब इच्छाएं पूरी हो गईं तो पुष्पा बोली कि उज्जवल मैंने इसी वजह से तुम्हें घर बुलाया था। ताकि तुम मेरी पति की सारी कमियों को पूरा कर सको। उज्जवल खुश हो गया। पुष्पा ने कहा अब तुम हमेशा के लिए मेरे पास रहने वाले हो। उज्जवल बोला मैं पिता को बोल दूंगा कि मैं अपनी चाची के पास रहूंगा। इस तरह दोनों की प्रेम कहानी शुरू हो गई।

लेकिन पुष्पा इससे भी बड़े कांड करने वाली थी। अठाईस जुलाई की सुबह पुष्पा ने घर का काम खत्म किया। सोनू को दवाइयां दीं। फिर उज्जवल के पास आई और बोली कि आज बहुत ज्यादा गर्मी है। बकरियों को नदी पर ले चलो। नदी में जरूर नहा लेंगे। उज्जवल ने कहा पहले नदी देखते हैं। मौका मिला तो नहा लेंगे। दोनों बकरियों को लेकर नदी पहुंचे। इलाका सुनसान था। बकरियां घास खा रही थीं। पुष्पा बोली देखो कोई नहीं है। चलो झाड़ियों के पीछे चलते हैं। उज्जवल मान गया। दोनों झाड़ियों के पीछे चले गए। इच्छाएं पूरी हुईं। फिर पुष्पा बोली चलो अब नदी में नहाते हैं। उज्जवल बोला यहां कोई आ सकता है। बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। पुष्पा जिद कर ली। दोनों नदी में उतरे। नहाते हुए पंद्रह मिनट गुजर गए।

तभी किसान मदन सिंह आया। उसने देखा कि पुष्पा देवी अपने भतीजे उज्जवल के साथ नदी में नहा रही है। उसकी आंखें फटी रह गईं। उसने मोबाइल निकाला और अजमेर सिंह को फोन किया। बोला अजमेर सिंह तेरा बेटा उज्जवल तेरे हाथ से निकल चुका है। तेरी चाची के साथ नदी में नहा रहा है। अजमेर सिंह को गुस्सा आ गया। उसने कहा मदन सिंह मैं आ रहा हूं। पांच मिनट बाद वह मोटरसाइकिल लेकर नदी पर पहुंचा। पुष्पा और उज्जवल को देखकर वह बहुत गुस्सा हो गया। उसने उज्जवल को नदी से बाहर निकलने को कहा। उज्जवल बाहर निकला तो अजमेर सिंह ने उसकी पिटाई की। पुष्पा को भी गालियां दीं। बोला आज के बाद तुम उज्जवल से नहीं मिलोगी। फिर अजमेर सिंह अपने बेटे को लेकर घर चला गया।

पुष्पा अब अकेली पड़ गई। उज्जवल से मिलना नामुमकिन हो गया। वह फिर सोचने लगी। कई दिनों बाद पांच अगस्त 2026 का दिन आया। पुष्पा घर में बैठी थी। उसने कई कमरों में से एक कमरा खाली देखा। उसने पड़ोसियों से कहा कि अगर कोई किराएदार मिले तो मुझे भेज दो। लेकिन कोई नहीं भेजा। कई दिनों बाद उसे लगा कि कोई नौजवान लड़का किराए पर रह सकता है। दस अगस्त की सुबह पुष्पा ने घर का काम किया। सोनू को दवाइयां दीं। कहा मैं बकरियों को लेकर नदी जा रही हूं। सोनू अपना ख्याल रखना। वह बकरियों को लेकर नदी पहुंची। बकरियां चरने लगीं। पंद्रह मिनट बाद उसकी नजर एक सांप पर पड़ी। वह डर गई। चीखी।

तभी मजदूर विक्रम गुजर रहा था। वह पास के कारखाने में काम करता था। वह युवा लड़का था। विक्रम ने सांप को भगा दिया। पुष्पा ने पूछा कि तुम यहां क्या काम करते हो। विक्रम बोला मैं कारखाने में मजदूरी करता हूं। पुष्पा की नजर विक्रम पर पड़ी तो वह उससे आगे बढ़ गई। बोली तुमने मेरी जान बचाई। मैं तुम्हारी मदद करना चाहती हूं। मेरा एक कमरा खाली है। अगर तुम चाहो तो यहां रहना शुरू करो। विक्रम बोला मैं जिस कमरे में रहता था उसका मालिक ने उसे किसी को दे दिया। मैं बिल्कुल बेघर हूं। आज शाम छह बजे सामान लेकर आऊंगा। पता दे दो। पुष्पा ने अपना पता दिया। शाम छह बजे विक्रम सामान लेकर आया। पुष्पा ने उसे कमरा दिखाया। विक्रम ने कमरा पसंद किया। उसने पूछा यह लड़का कौन है। पुष्पा बोली यह मेरा बेटा सोनू है। वह चारपाई पर लेटा रहता है।

विक्रम घर में रहने लगा। वह रोज सुबह आठ बजे कारखाने जाता। शाम सात बजे लौटता। पुष्पा उससे बातें करने लगी। हंस-हंस कर। विक्रम भी उसमें फंसता चला गया। दोनों के बीच लगाव बढ़ गया। अठाईस अगस्त की सुबह विक्रम बोला मैं कारखाने जा रहा हूं। लेकिन पुष्पा ने कहा आज मैं तुमसे अकेले में मिलना चाहती हूं। दोपहर बारह बजे नदी के पुल पर आ जाना। मैं वहीं बकरियों को चराने ले जाऊंगी। विक्रम ने कहा ठीक है। वह दोपहर को पहुंच गया। पुष्पा बोली यहां कोई नहीं है। सुनसान इलाका है। मैं आज तुम्हारे साथ अकेलापन दूर करना चाहती हूं। दोनों झाड़ियों के पीछे चले गए। इच्छाएं पूरी हुईं। फिर पुष्पा बोली आज बहुत गर्मी है। नदी में नहाते हैं। विक्रम ने मना किया। बोला यहां कोई देख सकता है। पुष्पा ने जिद की लेकिन विक्रम ने मना कर दिया।

दो दिन बाद पुष्पा ने विक्रम को कहा कि आज मैं तुम्हारी बात नहीं मानूंगी। नदी में नहाओगे। विक्रम ने कहा ठीक है। वह भी सुबह दस बजे कारखाने से निकला। पुष्पा बकरियों को लेकर नदी गई। विक्रम भी नदी पुल पर पहुंचा। बकरियां चर रही थीं। पुष्पा ने कहा चलो अब इच्छाएं पूरी कर लो। दोनों झाड़ियों के पीछे गए। इच्छाएं पूरी हुईं। फिर पुष्पा बोली चलो अब नदी में नहा लो। विक्रम ने मना किया। पुष्पा ने कहा आज जरूर नहाओ। दोनों नदी में उतरे। पंद्रह मिनट नहाते हुए पुष्पा के कपड़ों में एक सांप घुस गया। पुष्पा चीखी। किसान ओम प्रकाश सिंह आ गया। वह भी नदी में छलांग लगा। सांप ने पुष्पा के प्राइवेट पार्ट में काट लिया। दोनों ने उसे पानी से बाहर निकाला। पुष्पा बोली मुझे सांप ने काट लिया है। दोनों उसे पास के अस्पताल ले गए। सात घंटे बाद पुष्पा देवी की मौत हो गई।

दोस्तों पुष्पा की मौत हो गई। उसका बेटा सोनू अब बिल्कुल अकेला रह गया। विक्रम भी घर छोड़कर चला गया। इस घटना से गांव में हलचल मच गई। लेकिन पुष्पा देवी ने जो गलत रिश्ता बनाया था वह कभी खत्म नहीं हुआ। वह अपनी इच्छाओं और अकेलेपन के लिए मर गई। सोनू अब बिना मां के अकेला कैसे जिंदगी जीएगा सोचता रहा। विक्रम ने भी पछतावा किया कि उसने पुष्पा की बात नहीं मानी थी। लेकिन जिंदगी में कभी-कभी इच्छाएं पूरी होने के बाद ही सच सामने आता है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि रिश्तों में सम्मान और समझ जरूरी है। कोई भी इंसान अकेला नहीं होना चाहिए। अगर पुष्पा ने अपने बच्चे के साथ रहकर अपनी जरूरतें समझकर पूरी की होती तो शायद इस तूफान से बच सकती। लेकिन गलत रिश्ते ने सब बर्बाद कर दिया। दोस्तों इस घटना से हमें सच्ची प्रेम और साथ जीने की सीख मिलती है। कभी किसी की जरूरत का फायदा उठाकर जीवन नहीं जीना चाहिए। पुष्पा की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा परिवार और सच्चा साथी ही इंसान को संभाल सकते हैं।

 

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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