फोन की वजह से पूरे परिवार के साथ हुआ बड़ा हादसा, पुलिस प्रशासन भी रह गया हैरान…
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के गांव बुढ़िया में एक परिवार पर भयानक हमला: बेटी की मौत और पिता का पश्चाताप
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के गांव बुढ़िया में रहने वाले मेघनाथ सिंह की पूरी दुनिया एक ही दिन में उजड़ गई। यह गांव छोटा सा है, जहां लोग सिर्फ खेती करते हैं। मेघनाथ सिंह 40 साल के थे, अनपढ़, और उनकी पत्नी शांति देवी भी पढ़ी-लिखी नहीं थीं। उनके पास 10-12 एकड़ जमीन थी और वे खेती करते थे। उनके पास सिर्फ एक ही बेटी थी – नेहा। नेहा 17 साल की थी, कक्षा 12 में पढ़ती थी और गांव के सरकारी स्कूल में। वह बहुत तेज पढ़ने वाली थी। टीचर उसे पसंद करते थे और कहते थे कि “नेहा जैसी बेटी हर घर में होनी चाहिए”।
लेकिन परिवार में सुख था तो नहीं। नेहा स्कूल जाते समय बार-बार मां-बाप से मांगती, “पापा, मुझे एक अच्छा मोबाइल फोन खरीद दो।” मेघनाथ कहते, “बेटी, तेरे जन्मदिन पर मैं जरूर ला दूंगा।” शांति नाराज होकर कहती, “मोबाइल से पढ़ाई का ध्यान भटक जाएगा।” दोस्तों के साथ ये बातें होती रहतीं।

20 अगस्त 2025 को नेहा का जन्मदिन था। सुबह 8 बजे के आसपास मेघनाथ अपने खेत में गया। वहां अपना अच्छा दोस्त नीरज से मिला। नीरज ने कहा, “आज तेरी बेटी का जन्मदिन है, घर जरूर आना।” दोनों ने वहां बैठकर शराब पीनी शुरू कर दी। शराब का नशा बढ़ने पर मेघनाथ ने कहा, “चलो शहर में जाते हैं, बेटी के लिए केक और शराब ला लो।” दोनों ने मोटरसाइकिल उठाई, शहर गए, केक और शराब खरीद ली। शाम 6 बजे घर पहुंचे। नेहा बहुत खुश थी। उसने पापा से पूछा, “पापा, आपने मुझे मोबाइल फोन नहीं दिया?” मेघनाथ ने जवाब दिया, “कल ला दूंगा।” लेकिन नेहा नाराज होकर कमरे में चली गई।
रात 10:30 बजे के बाद नीरज ने मेघनाथ को कहा, “भैया, मैं शांति देवी के पास जाना चाहता हूं।” मेघनाथ ने हंसकर कहा, “बड़ी भाभी है, जरूर बात कर लेना।” मेघनाथ ज्यादा शराब पीकर सो गया। नीरज शांति के पास गया। दोनों पहले से ही गुप्त मिलते थे। शांति ने भी हां कर दी। नीरज अपने घर आ गया। शांति नेहा के कमरे में गई। नेहा मां से बहुत नाराज थी। शांति ने उसे समझाया, “बेटी, कल पापा मोबाइल फोन ला देंगे।” नेहा मान गई। रात 11 बजे के बाद शांति लेफ्ट हुई। नेहा सो नहीं पा रही थी। उसने देखा कि मां दरवाजा खोलकर बाहर निकल रही है। नेहा भी पीछा कर ली।
शांति नीरज के घर पहुंची। नीरज ने दरवाजा बंद किया। एक घंटे बाद दोनों संतुष्ट हो गए। शांति रात 12:30 बजे घर आई। नेहा अभी जाग रही थी। नेहा ने मां को रोका और कहा, “मां, आप गलत रास्ते पर चली गई हैं! मैंने आपको कई बार नीरज से मिलते देखा था। आज भी देख लिया!” शांति डर गई। नेहा ने कहा, “मैं पापा को यह सब नहीं बताऊंगी, लेकिन एक मोबाइल फोन खरीद दो, वरना मैं बता दूंगी!” शांति ने हां कर दी। दोनों मां-बेटी एक कमरे में सो गईं।
सुबह मेघनाथ ने शांति से पूछा, “बेटी के लिए मोबाइल फोन लाना।” शांति ने जवाब दिया, “हां, ला लो।” मेघनाथ ने पैसे लिए, शहर गए और अच्छा मोबाइल फोन खरीद आया। नेहा को दिया। नेहा बहुत खुश हुई। लेकिन यह मोबाइल फोन परिवार के लिए घातक साबित हुआ। मेघनाथ ने सब खर्चे यूपीआई से करवाने शुरू कर दिए – खाद, बीज, बिजली बिल सब मोबाइल पर। नेहा ने भी देखा।
1 सितंबर 2025 को नेहा स्कूल गई। वहीं कमल नाम के लड़के के साथ मिली। कमल गेम खेल रहा था। नेहा ने पूछा, “कौन सा गेम है?” कमल बोला, “फ्री फायर, मैंने 1125 रुपये जीते हैं।” दोनों खेलने लगे। चार दिन में नेहा ने 12,000 रुपये हार गए। वह उदास हो गई।
5 सितंबर 2025 को मेघनाथ बैंक गया। वहां बैंक वाले ने कहा, “आपके खाते में सिर्फ 600 रुपये बचे हैं।” मेघनाथ गुस्सा हो गया। बैंक मैनेजर ने खाता खोला तो पता चला कि सैकड़ों ट्रांजेक्शन यूपीआई से रिचार्ज हैं। बैंक मैनेजर बोला, “शायद आपकी बेटी ने किया होगा।” मेघनाथ घर आया। नेहा डर गई। मेघनाथ ने पूछा, “मेरे 12,000 रुपये कहां गए?” नेहा रोते-गिड़गिड़ाते हुए अपनी सारी कहानी बता दी – गेम, नीरज, मां की गलती। मेघनाथ का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। उसने पास में पड़ी लोहे की हल चल में चाकू उठाई और नेहा के सिर पर प्रहार कर दिया। नेहा वहीं दम तोड़ गई। गुस्से में मेघनाथ ने अपनी पत्नी शांति को भी मार डाला।
मेघनाथ ने खुद को मारने की कोशिश की। पड़ोसी विनोद कुमार ने उसे रोका। पुलिस पहुंची। नेहा और शांति का शव बरामद हुआ। मेघनाथ को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पूरे परिवार की कहानी दर्ज कर ली। बाद में चार्जशीट दायर कर दी गई।
यह घटना साबित करती है कि मोबाइल फोन और गेम से परिवार कैसे टूट सकता है। मेघनाथ ने जल्दबाजी में गलत कदम उठाया। नीरज, शांति और नेहा का परिवार हमेशा के लिए खत्म हो गया। जय हिंद!