भाभी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/ पुलिस के होश उड़ गए/ – News

भाभी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/ पुलिस के होश उड़ गए/

भाभी के साथ कर दिया बड़ा कां**ड/ पुलिस के होश उड़ गए/

नमस्कार दोस्तों, मैं कुलदीप राणा। आज की हमारी इस घटना की शुरुआत होती है राजस्थान के जिले अलवर से। अलवर जिले में एक बाला टहल नाम का गांव पड़ता है और इसी बाला टहल गांव में रहने वाली मनीषा देवी। मनीषा देवी के पति कदम सिंह को चोरी के इल्जाम में एक साल की सजा हो जाती है। जिसकी वजह से कदम सिंह की पत्नी मनीषा देवी अपने जीवन में अकेली पड़ जाती है। मनीषा देवी फिर भी हिम्मत नहीं हारती है। मनीषा देवी अपने घर में रहते हुए सिलाई कढ़ाई का काम करना शुरू कर देती है। मनीषा देवी का यह काम अच्छा चल पड़ता है। सिलाई कढ़ाई के दम पर ही मनीषा देवी अपने घर का गुजारा कर लिया करती थी। मनीषा देवी के परिवार में इसकी इकलौती ही बेटी होती है जिसका नाम सपना होता है। सपना 11वीं कक्षा में अपनी पढ़ाई किया करती थी। सपना के अलावा मनीषा देवी का इस घर में इकलौता एक देवर भी होता है जिसका नाम रघु होता है। रघु बेहद काले रंग का होता है और एक आंख से कान्हा भी होता है। जिसकी वजह से रघु की शादी तक नहीं हो पाती है। रघु एक ऑटो रिक्शा चलाने का काम किया करता था। रघु दिनभर ऑटो रिक्शा चलाया करता था और खूब पैसे भी कमाया करता था। लेकिन रघु एक ऐसा लड़का होता है जो कि औरतों का महिलाओं का काफी शौकीन होता है। रघु ऑटो रिक्शा चलाकर जितने भी पैसे कमाया करता था उन पैसों में से कुछ पैसे अपनी भाभी मनीषा को दे दिया करता था और बाकी बचे पैसों को शराब कबाब और शबाब में उड़ा दिया करता था। रघु रात के समय हर रोज शराब पीने के बाद होठों पर भी चला जाया करता था और वहां पर अपने पैसे उड़ा दिया करता था। रघु की भाभी मनीषा देवी अक्सर रघु को समझाती रहती थी कि तुम यह शराब पीना छोड़ दो और औरतों के पास जाना बंद कर दो। नहीं तो तुम्हारी जिंदगी खराब हो सकती है। लेकिन रघु एक ऐसा लड़का होता है जो अपनी भाभी मनीषा की सारी बातों को एक कान से सुनता था। दूसरे कान से बाहर निकाल दिया करता था।

कुछ दिनों का वक्त गुजर जाने के बाद एक तारीख आ जाती है 10 जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब 7:30 बजे के आसपास का वक्त होता है। मनीषा देवी अपनी बेटी सपना को कहने लगती है कि सपना तेरे मामा की आजकल तबीयत बहुत ज्यादा खराब रहती है और कल तेरे मामा का फोन कॉल भी आया था और तेरे मामा ने मुझे अपने घर पर बुलाया है। तू ऐसा कर जल्दी से तैयार हो जा और इसके बाद हम दोनों मिलकर तेरे मामा के घर जाने वाले हैं। लेकिन उसी समय सपना कहने लगती है कि मां मैं मामा के घर क्या करूंगी? मेरी जो पढ़ाई है वो बिल्कुल खराब हो जाएगी और तुम तीन-चार दिनों से पहले वापस नहीं आओगी। अब इसके बाद मनीषा कहने लगती है कि कोई बात नहीं तीन-चार दिनों की ही बात है। चलो तुम मेरे साथ जल्दी से तेरे मामा के घर चल पड़ो। लेकिन जो लड़की सपना होती है वो मानने को तैयार नहीं होती है। अब पास में ही रघु भी बैठा होता है। रघु अपनी भाभी मनीषा को कहने लगता है कि भाभी जब सपना अपने मामा के घर नहीं जाना चाहती है तो तुम अकेली ही जा सकती हो। जैसे यह बात रघु कहता है तो उसी समय मनीषा कहती है कि मुझे तो अब अकेले ही जाना पड़ेगा। अब इसके बाद मनीषा अपने देवर रघु को कहती है कि रघु तुम अपना भी ख्याल रखना और अपनी भतीजी सपना का भी ख्याल रखना। लेकिन तुम्हें तीन-चार दिनों तक शराब को हाथ भी नहीं लगाना है। रघु कहने लगता है कि भाभी मैं तीन-चार दिनों तक शराब को बिल्कुल भी हाथ तक नहीं लगाऊंगा। तुम अपने घर पर जा सकती हो और अपने भाई को देख सकती हो। इसके बाद मनीषा काफी देर तक अपनी बेटी सपना को भी समझाती है और कहती है कि घर का ख्याल रखना। बस यह दो चार बातें करने के बाद मनीषा देवी अपने घर से बाहर निकल जाती है और अपने मायके की तरफ चल पड़ती है।

अब जैसे ही 20 से 25 मिनट का वक्त गुजर जाता है तो उसी समय रघु भी अपनी भतीजी सपना को कहता है कि सपना अब तो मैं भी अपनी ऑटो रिक्शा लेकर शहर में जा रहा हूं। मैं शाम के ही समय घर पर लौटूंगा। तब तक तुम घर के सारे कामकाज खत्म कर लेना और रात का खाना मैं तुम्हारे साथ ही बैठकर खाने वाला हूं। बस यह दो चार बातें करने के बाद अब रघु भी अपनी ऑटो रिक्शा लेकर अपने घर से बाहर निकलता है। शहर की तरफ चला जाता है। रघु आज के समय में दिन भर मेहनत मजदूरी करके ऑटो रिक्शा चलाकर खूब कमाई कमा लेता है। और जैसे ही रघु के पास पैसे आ जाते हैं तो इसके बाद शाम के करीब 4:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। रघु अपने मन में सोचने लग जाता है कि आज तो अच्छी कमाई हो चुकी है। अब इसके बाद मुझे अपने घर पर चलना चाहिए। लेकिन ठीक उसी समय रघु का एक दोस्त जिसका नाम कमल सिंह होता है इसके पास आ जाता है। कमल सिंह कहने लगता है कि रघु देखो आज हम दोनों की कमाई अच्छी हो गई है। चलो आज कहीं पर बैठकर पार्टी कर लेते हैं। रघु कहने लगता है कि दोस्त मुझे तीन-चार दिनों तक शराब को हाथ भी नहीं लगाना है। बस मैं तो अपने घर पर जाने वाला हूं। लेकिन कमल सिंह अब अपने दोस्त रघु पर दबाव डालना शुरू कर देता है। कमल सिंह कहता है कि रघु आज की बात है और हम एक-एक बीियर पीने वाले हैं। अब जैसे ही कमल सिंह अपने दोस्त रघु पर ज्यादा दबाव बनाने लगता है तो रघु भी मान जाता है। रघु कहने लगता है कि बस एक-एक बीियर पिएंगे इससे ज्यादा हम हाथ भी नहीं लगाएंगे। और इस तरीके से अब रघु और कमल दोनों ही अपनी ऑटो रिक्शा लेकर शराब के ठेके की तरफ चले जाते हैं। शराब के ठेके से चार बियर की बोतलें खरीद ली जाती हैं। और इतनी बियर की बोतलें खरीदने के बाद यह दोनों दोस्त अब अपनी ऑटो रिक्शा को लेकर एकांत स्थान पर बैठ जाते हैं। और दोनों दोस्त मिल बैठकर बीियर पीना शुरू कर देते हैं। करीब एक घंटे का वक्त गुजर जाता है और दोनों दोस्तों को गहरा नशा हो जाता है। लेकिन उसी समय रघु कहता है कि देखो कमल अब मुझे अपने घर पर चलना चाहिए। लेकिन कमल कहने लगता है कि अभी तो हमने शुरुआत की है। चलो फिर से शराब के ठेके पर जाते हैं और एक दो बीियर और खरीद कर ले आते हैं। लेकिन रघु कहता है कि नहीं बहुत हो चुका है। अब मैं अपने घर पर जाना चाहता हूं। और इस तरीके से अब कमल सिंह अपनी ऑटो रिक्शा लेकर अपने घर पर चला जाता है और दूसरी तरफ रघु भी अपनी ऑटो रिक्शा लेकर अपने घर पर वापस आ जाता है। तकरीबन रात के करीब 8:30 बजे के आसपास का वक्त हो चुका था। रघु अपनी भतीजी सपना को आवाज लगाता है और इसके बाद सपना अपने घर का दरवाजा खोल देती है। आज सपना अपने घर में बिल्कुल अकेली होती है। इस बात के बारे में रघु भी जानता था। सपना जैसे ही अपने चाचा रघु को शराब पीने की हालत में देखती है तो कहने लगती है कि चाचा आज तुम फिर से शराब पीकर घर पर आए हो। सुबह तो तुम मना कर रहे थे लेकिन अब तुम फिर से शराब पीकर घर पर आए हो। अब इसके बाद रघु कहने लगता है कि सपना मेरा एक दोस्त कमल सिंह मिल गया था। उसने मुझे जबरदस्ती शराब पिला दी है। खैर कोई बात नहीं तुम ऐसा करो जल्दी से मेरे लिए खाना तैयार कर दो। मुझे बड़े जोरों की भूख लगी है। सपना कहती है कि तुम कमरे के अंदर बैठ जाओ। मैं तुम्हारे लिए खाना तैयार कर देती हूं। और इसके बाद रघु कमरे के अंदर बैठ जाता है। लेकिन जैसे ही रघु कमरे के अंदर बैठा होता है तो रघु अपने मन में सिर्फ एक ही बात सोचना शुरू कर देता है कि उसकी भतीजी सपना आज घर में बिल्कुल अकेली है और घर में कोई भी दूसरा तीसरा सदस्य नहीं है। क्यों ना इस बात का फायदा उठा लिया जाए। जबकि दूसरी तरफ सपना अपनी रसोई के अंदर खाना बना रही होती है। अब इसके बाद रघु उसी समय इस कमरे से बाहर निकलता है और सपना के पास आ जाता है। सपना रसोई के अंदर खाना बना रही होती है। रघु की नियत आज सपना पर खराब हो चुकी थी। रघु उसी समय रसोई के अंदर से एक तेजधार चाकू उठा लेता है। चाकू उठाने के बाद अपनी भतीजी सपना के गले पर रख लेता है और सपना को कहने लगता है कि अगर तूने चीखने चिल्लाने की कोशिश की तो तेरा गला यहीं पर काट दूंगा। जब सपना को ऐसीऐसी धमकियां दी जाती हैं तो सपना काफी डर जाती है। सपना के गले पर चाकू रखा गया था और सपना इतनी डर जाती है कि सपना के गले से चीख तक नहीं निकल पाती है। इसके बाद रघु अपनी भतीजी सपना को कहता है कि तुम्हें मेरे साथ कमरे में जाना पड़ेगा। लेकिन भतीजी सपना अपने चाचा के सामने हाथ जोड़ना शुरू कर देती है और कहती है कि चाचा मैं तुम्हारी बेटी जैसी हूं। तुम यह गलत और गंदा काम मेरे साथ कैसे कर सकते हो? लेकिन जो चाचा रघु होता है वह हवस की आग में अंधा हो चुका होता है। रघु इसके बाद अपनी भतीजी सपना को घसीट कर कमरे के अंदर ले जाता है। इसके बाद रघु घर का मुख्य दरवाजा बंद करता है और फिर एक रस्सी उठाकर अपनी भतीजी सपना के हाथ पैर तक रस्सी के साथ बांध देता है। और फिर इसके बाद अपनी भतीजी सपना को कहता है कि अगर यह बात तुमने किसी को बताई तो तुम्हें जान से मार दूंगा। और इतनी बात करने के बाद अब रघु अपनी ही सगी भतीजी सपना के साथ गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है।

रघु इस गलत काम को तब तक अंजाम देता है जब तक रघु की इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं। दूसरी तरफ सपना अपने चाचा के सामने हाथ जोड़ती रह जाती है। लेकिन रघु मानने वाला नहीं होता है। रघु इस गलत काम को लगातार अंजाम देता चला जाता है और जैसे ही रघु की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं तो इसके बाद यह सारा काम खत्म करने के बाद रघु अपनी भतीजी को समझाना शुरू कर देता है रघु कहने लगता है कि देखो इस समय घर में कोई भी नहीं है और तुम्हें यह बात किसी को भी नहीं बतानी है और यह बात अगर तुमने किसी को बताई तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा और तेरी मां मनीषा को भी जान से मार दूंगा। जब ऐसीऐसी धमकियां सपना को दी जाती हैं तो सपना काफी डर जाती है। सपना कहने लगती है कि मेरी मां को कुछ भी नहीं करना है। मैं यह बातें किसी को भी नहीं बताऊंगी और इस तरीके से रघु अपना काम खत्म करने के बाद इस कमरे से बाहर निकलता है और दूसरे कमरे में जाकर लेट जाता है। लेकिन आज की रात में सपना को नींद नहीं आती है। सपना हर समय एक ही बात सोचती रहती है कि उसका चाचा नशे की हालत में कुछ भी कर सकता है। उसको भी जान से मार सकता है और जैसे उसकी मां घर पर आएगी तो उसका चाचा उसकी मां को भी जान से मार सकता है। इस तरीके से लड़की सपना खामोश रह जाती है और बिना सोए ही सपना आज की पूरी रात गुजार लेती है। अब जैसे ही अगला दिन होता है तो सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास रघु की आंखें खुलती है। रघु देखता है कि सपना उदास और परेशान बैठी होती है। इसके बाद रघु अपनी भतीजी सपना के पास आता है और सपना को कहता है कि सपना रात के समय नशे के कारण मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। लेकिन फिर भी तुम्हें इस बात के बारे में किसी को जिक्र तक नहीं करना है। इस तरीके से दो चार बातें समझाने के बाद अब रघु अपने घर से ऑटो रिक्शा लेकर शहर में किराया करने के लिए चला जाता है और घर पर सपना बिल्कुल अकेली रह जाती है। लेकिन यह बातें सपना किसी को नहीं बताती है। ना तो अपनी मां के पास फोन कॉल करती है और ना ही इस बात के बारे में किसी पड़ोसी जन से जिक्र तक करती है। क्योंकि सपना काफी डर चुकी थी। और इस तरीके से अब सपना दूसरी बात यह भी अपने मन में सोच लेती है कि उसके चाचा से शराब के नशे में यह गलती हो गई है और उसका चाचा रघु दोबारा यह गलती करने वाला नहीं है। इस तरीके से पूरा दिन गुजर जाता है और रात के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त हो जाता है। रघु आज बहुत अच्छे खासे पैसे कमा चुका होता है। उसी समय रघु अपनी ऑटो रिक्शा लेकर फिर से अपने घर की तरफ चल पड़ती है। लेकिन बीच रास्ते में फिर से शराब का ठेका आ जाता है। और आज भी रघु इस शराब के ठेके से शराब खरीदता है और बीच रास्ते में बैठकर शराब पीता है। और जब रघु को गहरा नशा हो जाता है तो इसके बाद रघु अपनी ऑटो रिक्शा लेकर अपने घर पर वापस आ जाता है और घर पर आने के बाद रघु अपनी भतीजी सपना को कई बार आवाज लगाता है। लेकिन आज सपना घर का दरवाजा नहीं खोलती है। इसके बाद रघु अपनी भतीजी सपना को धमकी देना शुरू कर देता है और कहता है कि मैं दरवाजा तोड़कर घर के अंदर आ जाऊंगा। इस तरीके से सपना मजबूर होकर घर का दरवाजा खोल देती है और फिर इसके बाद रघु घर के अंदर प्रवेश कर जाता है। रघु अपनी भतीजी सपना को कहता है कि मेरे लिए जल्दी से खाना तैयार कर दो। आज भी सपना डर की वजह से अपने चाचा रघु के लिए खाना तैयार कर देती है। खाना खाने के बाद रघु अपने घर का मुख्य दरवाजा फिर से बंद कर लेता है। और इसके बाद सपना को कहते हैं कि तुम्हें मेरे साथ कमरे में चलना पड़ेगा। नहीं तो तुम्हें इसी समय मैं जान से मार दूंगा। जब जान से मारने की धमकी सपना को दी जाती है तो सपना काफी डर जाती है और इसके बाद सपना अपने चाचा रघु के साथ कमरे में चली जाती है और आज के समय में भी रघु अपनी भतीजी सपना के साथ फिर से गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है। रघु इस गंदे और गलत काम को तब तक अंजाम देता है जब तक उसकी इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं। और जैसे ही रघु का यह काम खत्म हो जाता है तो इसके बाद रघु फिर से अपनी भतीजी सपना को डराता है, धमकाता है और कहता है कि अगर यह बात किसी को बताई तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा। इस तरह की धमकियां देने के बाद रघु दूसरे कमरे में जाकर लेट जाता है और देखते ही देखते रघु को गहरी नींद आ जाती है। लेकिन दूसरी तरफ सपना को दूसरी रात में भी नींद नहीं आती है। सपना जैसे तैसे करके रात के ही समय में अपनी मां मनीषा देवी के पास फोन कॉल करती है और मनीषा को कहती है कि मां दो दिनों का समय गुजर चुका है और तुम अभी तक घर पर क्यों नहीं आई हो? लेकिन मनीषा कहने लगती है कि तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं कल सुबह घर पर आ जाऊंगी। और इसके बाद मनीषा अपनी बेटी सपना से पूछने लग जाती है कि घर पर कैसा चल रहा है? बेटी अपनी मां मनीषा को कहने लगती है कि मां यहां पर सब कुछ ठीक है। बस तुम जल्दी से घर पर आ जाओ और इसके बाद सपना फोन कॉल काट देती है।

आखिरकार पूरी रात गुजर जाती है और जैसे ही अगला दिन होता है तो सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त हो चुका था। सपना अपनी मां मनीषा के पास फिर से फोन कॉल करती है और अपनी मां को कहती है कि मां तुम किस समय घर पर पहुंच जाओगी? मनीषा कहने लगती है कि बेटी तुम किसी बात की फिक्र मत करो। मैं बीच रास्ते में हूं और करीब एक डेढ़ घंटे के बाद मैं घर पर पहुंच जाऊंगी। लेकिन दूसरी तरफ रघु अपनी ऑटो रिक्शा लेकर शहर में किराया कमाने के लिए चला गया था। और इस तरीके से एक डेढ़ घंटे का वक्त गुजर जाने के बाद अब मनीषा देवी वापस अपने घर पर आ जाती है। मनीषा देखती है कि उसकी बेटी सपना काफी परेशान और उदास बैठी थी। मनीषा अपनी बेटी सपना को पूछने लग जाती है कि बेटी तुम काफी परेशान बैठी हो। काफी उदास बैठी हो। आखिर बात क्या है? लेकिन सपना कहने लगती है कि मां मैं घर में बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। तुम्हारे बिना मेरा मन ही नहीं लगता था। बस इसी वजह से मैं काफी उदास और परेशान हूं। और इस तरीके से बेटी सपना अपनी मां के सामने झूठ बोल देती है। सपना अपने आप को भी धोखा देना शुरू कर देती है और अपनी मां को भी धोखा देना शुरू कर देती है। यही सपना की सबसे बड़ी भूल हो जाती है। यही सपना की सबसे बड़ी पहली और आखिरी गलती हो जाती है। लेकिन सपना नहीं जानती थी कि आगे चलकर उसकी मां मनीषा के साथ कितने बड़े-बड़े कांड होने वाले थे। इस तरीके से दो दिन का वक्त गुजर जाता है लेकिन दो दिनों के दौरान सपना अपने स्कूल में पढ़ाई करने नहीं जाती है। थक हार कर मां मनीषा अपनी बेटी से पूछने लगती है कि बेटी पिछले दो दिनों से तुम स्कूल भी नहीं जा रही हो। आखिर बात क्या है? लेकिन सपना कहने लगती है कि मां मेरा पढ़ाई में बिल्कुल भी मन नहीं लगता है और मैं आज के बाद स्कूल में बिल्कुल भी नहीं जाऊंगी। मनीषा कहने लगती है कि बेटी यह बात सही नहीं है। पढ़ाई तुम्हारे लिए बिल्कुल सही रहेगी। लेकिन सपना जिद पकड़ लेती है। सपना कहने लगती है कि मां मैं बिल्कुल भी स्कूल में नहीं जाऊंगी। थक हार कर मनीषा भी मान जाती है और कहती है कि जैसी तेरी मर्जी है तू वैसा ही कर ले। और इसके बाद मनीषा अपने कामकाज में व्यस्त हो जाती है। लेकिन बेटी सपना अपने कमरे में अकेली बैठी रह जाती है। इस तरीके से कई दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 26 जुलाई 2026 का दिन। सुबह के करीब 8:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। रघु अपने घर से ऑटो रिक्शा लेकर किराया कमाने के लिए शहर में चला जाता है और घर में मनीषा और मनीषा की बेटी सपना यह दोनों अकेली रह जाती है। लेकिन जो बेटी सपना होती है इस बात के बारे में अपनी मां को कुछ भी नहीं कहती है। दूसरी तरफ जो रघु होता है दिन भर कमाई करता है और कमाई करने के बाद शाम के करीब 4:00 बजे के आसपास अपनी ऑटो रिक्शा लेकर अपने घर पर आ जाता है। घर पर आने के बाद रघु देखता है कि उसकी भाभी मनीषा के कपड़े फट गए थे क्योंकि वह कपड़े काफी पुराने हो चुके थे। उसी समय रघु अपनी भाभी मनीषा को कहने लगता है कि भाभी तुमने पिछले तीन-चार साल से कोई भी अपने लिए कपड़ा नहीं खरीदा है। चलो ऐसा करते हैं कि आज शहर में चलते हैं और तुम्हारे लिए कुछ कपड़े खरीद लेते हैं। मनीषा भी अपने देवर रघु को हंसते मुस्कुराते हुए कहती है कि रघु आज तो तुम्हें अपनी भाभी पर काफी ज्यादा प्यार आ रहा है। ऐसी क्या बात है? लेकिन रघु कहने लगता है कि भाभी अगर तुम फटे पुराने कपड़े पहनोगी तो यह बात अच्छी नहीं है। और इसके बाद मनीषा कहने लगती है कि चलो शहर में चलते हैं। लेकिन दूसरे ही पल मनीषा अपनी बेटी सपना को भी पूछने लग जाती है कि सपना चलो मेरे साथ तुम भी शहर में चलो। लेकिन बेटी सपना कहने लगती है कि मां मेरे पास तो बहुत कपड़े पड़े हैं। मुझे कपड़ों की कोई भी जरूरत नहीं है। इस तरीके से रघु भी कहने लगता है कि भाभी सपना को साथ में ले जाना ठीक नहीं है। इसके पास तो काफी ज्यादा कपड़े हैं। लेकिन आज रघु की नियत अपनी भाभी मनीषा पर खराब हो जाती है। आगे चलकर रघु अपनी भाभी मनीषा के साथ बहुत बड़ा कांड करने वाला था। देखते ही देखते रघु घर की रसोई में जाता है। रसोई से एक धारधार चाकू उठाकर अपनी जेब में रख लेता है। और इसके बाद रघु अपनी भाभी मनीषा को कहने लगता है कि चलो भाभी शहर में चलते हैं। मनीषा भी घर से तैयार होकर इसकी ऑटो रिक्शा में बैठ जाती है और इसके बाद रघु अपनी ऑटो रिक्शा चलाना शुरू कर देता है।

लेकिन बीच रास्ते में रघु देखता है कि एक सुनसान इलाका आ चुका था और सुनसान इलाके को देखने के बाद रघु की नियत खराब हो जाती है। रघु अपने मन में सोचने लग जाता है कि इतना सुनसान इलाका है। यहां पर दूर-दूर तक कोई भी व्यक्ति नजर तक नहीं आता है। क्यों ना इस सुनसान इलाके में अपनी भाभी का फायदा उठा लिया जाए। और इसके बाद रघु उसी समय अपनी ऑटो रिक्शा रोक लेता है। और अपनी भाभी मनीषा को कहने लगता है कि भाभी ऑटो रिक्शा खराब हो चुकी है। और इसके बाद मनीषा कहती है कि तुम अपनी ऑटो रिक्शा को ठीक करने की कोशिश करो। उसी समय रघु अपनी ऑटो रिक्शा से नीचे उतरता है और अपनी ऑटो रिक्शा को ठीक करने की कोशिश करना शुरू कर देता है। लेकिन रघु यह सब जानबूझकर कर रहा होता है। रघु मौका पाते ही उसी समय अपनी जेब से चाकू निकाल लेता है और अपनी भाभी मनीषा के पास आता है। देखते ही देखते वो चाकू मनीषा के गले पर रख लिया जाता है। इसके बाद रघु अपनी भाभी मनीषा को कहता है कि अगर चीक ने चिल्लाने की कोशिश भी की तो तेरा गला यहीं पर काट दूंगा। अब जैसे ही मनीषा के गले पर चाकू रखा जाता है तो मनीषा भी काफी डर जाती है। मनीषा के गले तक से आवाज तक नहीं निकल पाती है। रघु कहने लगता है कि तुम्हें मेरे साथ झाड़ियों के पीछे चलना पड़ेगा। लेकिन मनीषा कहती है कि तुम मेरे साथ यह गलत काम क्यों कर रहे हो? लेकिन रघु मनीषा की कोई भी बात मानने को तैयार नहीं होता है। रघु इसके बाद अपनी भाभी मनीषा को जबरदस्ती करके झाड़ियों के पीछे ले जाता है। झाड़ियों के पीछे ले जाने के बाद अपनी भाभी मनीषा के हाथ पैर इसी की चुन्नी के साथ बांध देता है। अपनी जेब से रुमाल निकालता है और अपनी भाभी मनीषा के मुंह में रुमाल ठूस देता है। और फिर इसके बाद रघु अपनी भाभी मनीषा के साथ गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है। रघु अपनी भाभी मनीषा के साथ इस गंदे और गलत काम को तब तक अंजाम देता है जब तक उसकी इच्छाएं पूरी नहीं हो जाती हैं। दूसरी तरफ रघु की भाभी मनीषा अपने देवर के सामने हाथ जोड़ती रहती है और कहती है कि मेरे साथ गंदा और गलत काम मत करो। लेकिन रघु की हवस बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। रघु लगातार अपने इस गलत काम को अंजाम देता चला जाता है और जैसे ही रघु की इच्छा पूरी हो जाती है तो इसके बाद रघु अपनी भाभी मनीषा को धमकी देता है और डराता है और कहता है कि अगर यह बात तुमने घर में किसी को बताई या किसी पड़ोसी जन को बताई तो मैं तुम्हें और तुम्हारी बेटी सपना दोनों को जान से मार दूंगा। जब ऐसीऐसी धमकियां मनीषा को दी जाती हैं तो मनीषा काफी डर जाती है। मनीषा अपने मन में सोचने लग जाती है कि उसका देवर शराबी है और यह कुछ भी कर सकता है। यह सारा काम खत्म करने के बाद अब रघु अपनी भाभी मनीषा को शहर में भी ले जाता है और शहर में ले जाने के बाद कपड़े की खरीददारी भी करवाता है और कपड़े की खरीददारी करने के बाद रघु अपनी भाभी मनीषा देवी को लेकर अपने घर पर आ जाता है। लेकिन मनीषा जैसे ही घर पर पहुंचती है तो यह बातें ना तो अपनी बेटी सपना को बताती है और ना ही किसी पड़ोसीजन को बताती है। क्योंकि मनीषा के मन में सिर्फ एक ही बात का डर छिपा था कि उसका देवर रघु उसकी बेटी के साथ भी गलत काम कर सकता है और उसको भी जान से मार सकता है। यह सारी बातें सोचने के बाद मनीषा खामोश रह जाती है। लेकिन मनीषा नहीं जानती थी कि आगे चलकर उसका देवर रघु उसके साथ कितना बड़ा कांड करने वाला था। इस तरीके से कई दिनों का वक्त गुजर जाता है और एक तारीख आ जाती है 14 अगस्त 2026 का दिन। सुबह के करीब 10:00 बजे के आसपास का वक्त होता है। मनीषा अपने घर में कामकाज कर रही होती है। बेटी सपना अलग से कमरे में बैठकर उस हादसे के बारे में सोच रही होती है। उसी समय घर के मुख्य दरवाजे पर दस्तक होती है। मनीषा अपनी बेटी सपना को कहने लगती है कि बेटी घर का दरवाजा खोल दे। कोई ना कोई घर के दरवाजे पर खड़ा है। और इसके बाद सपना जैसे ही घर का दरवाजा खोलती है तो देखती है कि उसके सामने उसकी सहेली अंजलि खड़ी थी। अंजलि को देखकर सपना बहुत खुश होती है। सपना अंजलि को कहती है कि अंजली तुम घर के अंदर आ जाओ और इसके बाद अंजलि सपना के घर के अंदर प्रवेश कर जाती है। अंजलि कहने लगती है कि सपना तू काफी दिनों से मेरे घर पर एक बार भी नहीं आई है और मैं तेरा इंतजार करने के बाद तेरे घर पर आई हूं। आज मेरा जन्मदिन है और मेरा जन्मदिन मनाने के लिए तुझे मेरे साथ मेरे घर पर चलना पड़ेगा। लेकिन सपना कहने लगती है कि अंजली मैं तेरे घर पर नहीं जा सकती हूं क्योंकि मेरा मन कहीं भी नहीं लगता है। लेकिन अंजली जिद पकड़ लेती है और कहती है कि आज मेरा जन्मदिन है और जन्मदिन की खुशी में तुझे मेरे साथ चलना ही पड़ेगा। पास में मनीषा भी बैठी होती है। मनीषा कहने लगती है कि बेटी सपना तुम्हें अंजलि के साथ जरूर जाना चाहिए। क्योंकि अंजलि भी तेरे जन्मदिन पर हर साल तेरे घर पर आती है। जब ऐसीऐसी बातें मनीषा अपनी बेटी सपना को कहती हैं तो सपना मान जाती है। सपना कहती है कि चलो अंजली तुम्हारे घर पर चलते हैं। और इसके बाद सपना और अंजलि दोनों इस घर से बाहर निकलते हैं और अंजलि के घर पर चले जाते हैं। लेकिन जैसे ही आधे घंटे का वक्त गुजर जाता है तो इसके बाद मनीषा देवी अपने घर में बिल्कुल अकेली रह जाती है। मनीषा घर के कामकाज में व्यस्त होती है। लेकिन दूसरी तरफ मनीषा का देवर रघु आज बड़ी जल्दी ही अपनी ऑटो रिक्शा लेकर अपने घर पर आ जाता है। रघु जैसे ही घर के अंदर प्रवेश करता है तो रघु देखता है कि उसकी भाभी मनीषा घर में बिल्कुल अकेली होती है। इसके बाद रघु अपनी भाभी मनीषा से पूछने लग जाता है कि भाभी आज सपना कहां पर चली गई है। मनीषा कहती है कि उसकी सहेली अंजलि घर पर आई थी। आज अंजलि का जन्मदिन है और अंजलि अपनी इस सहेली सपना को लेकर अपने घर पर चली गई है। जैसे यह बातें मनीषा रघु को कहती हैं तो रघु अपने मन में सिर्फ एक ही बात सोचता है कि आज उसकी भाभी मनीषा घर में बिल्कुल अकेली है। क्यों ना आज अपनी भाभी मनीषा का फायदा उठा लिया जाए। जब ऐसे-ऐसे ख्याल इस लड़के के मन में आने लग जाते हैं तो उसी समय रघु अपनी भाभी मनीषा को कहता है कि भाभी घर का दरवाजा बंद कर दो। लेकिन मनीषा कहती है कि मैं घर का दरवाजा बंद बिल्कुल भी नहीं करूंगी। तुम्हें मेरे साथ गंदा और गलत काम फिर से नहीं करना है। लेकिन रघु नशा करके आया था और नशे में रघु एक जानवर बन जाता था। रघु उसी समय जबरदस्ती करके अपने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर लेता है और अपनी भाभी मनीषा को कहता है कि तुम्हें मेरे साथ सोना पड़ेगा। जब ऐसीऐसी बातें मनीषा को कही जाती हैं तो मनीषा भी जिद पकड़ देती है। मनीषा कहती है कि मैं तेरे साथ कमरे में नहीं जाऊंगी। लेकिन फिर भी रघु अपनी भाभी मनीषा देवी को घसीट कर कमरे के अंदर ले जाता है और अपनी भाभी के साथ गंदा और गलत काम करने की कोशिश करने लग जाता है। लेकिन रघु नशे में होता है और नशे में होने की वजह से अब जो इसकी भाभी मनीषा थी रघु को जोरदार धक्का मार देती है। जिसकी वजह से रघु नीचे गिर जाता है। लेकिन इसी बात पर रघु को और भी ज्यादा गुस्सा आ जाता है। रघु उसी समय बड़े जोरदार तरीके से अपनी भाभी मनीषा देवी को धक्का दे देता है। जिसकी वजह से मनीषा देवी का सिर दीवार से टकरा जाता है और सिर दीवार से जैसे ही टकराता है तो मनीषा देवी मौके पर ही अपना दम तोड़ देती है और जैसे ही मनीषा की मौत हो जाती है तो फिर भी रघु अपने मन में सिर्फ एक ही बात सोचने लग जाता है कि उसकी भाभी की मौत हो चुकी है। लेकिन उसके पास यह सबसे अच्छा मौका है कि उसे अपनी भाभी के साथ अपना वक्त गुजार लेना चाहिए। अब इसके बाद रघु अपनी भाभी की लाश के साथ ही गंदा और गलत काम करना शुरू कर देता है।

रघु जैसे ही अपनी भाभी मनीषा के साथ इस गलत काम को अंजाम दे रहा होता है तो उसी समय घर के मुख्य दरवाजे पर दस्तक होती है। जिसकी वजह से रघु डर जाता है। फिर भी रघु हिम्मत करके अपने घर का मुख्य दरवाजा खोल देता है। रघु देखता है कि घर के दरवाजे पर उसकी भतीजी सपना और उसकी जो सहेली अंजलि थी यह दोनों खड़ी होती हैं। अंजलि और सपना घर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। और जब सपना घर के अंदर प्रवेश करती है तो देखती है कि उसकी मां मनीषा देवी की लाश घर के कमरे में पड़ी होती है। अपनी मां की लाश को देखने के बाद सपना काफी डर जाती है। सपना उसी समय चीखना चिल्लाना शुरू कर देती है और पड़ोसी जनों को वहां पर इकट्ठा कर लेती है। पड़ोसी जन जैसे ही घर में पहुंचते हैं तो पड़ोसी देखते हैं कि मनीषा के कमरे के अंदर लाश पड़ी होती है और लाश को देखने के बाद पड़ोसी भी थर-थर कांपना शुरू कर देते हैं। लेकिन मौका पाते ही रघु वहां से फरार हो चुका होता है और इसके बाद इन्हीं पड़ोसियों में से एक पड़ोसी जिसका नाम फूल सिंह होता है नजदीकी पुलिस थाने में फोन कॉल कर देता है और एक घंटे का वक्त गुजरने के बाद घटना स्थल पर पुलिस पहुंचती है। पुलिस जैसे ही घर के अंदर प्रवेश करती है तो देखती है कि वहां पर मनीषा की लाश पड़ी होती है और पुलिस की एक महिला कर्मचारी जैसे ही मनीषा की लाश को बारीकी से जांच करके देखती है तो मनीषा की धड़कनें चल रही थीं। जल्दी-जल्दी में पुलिस एंबुलेंस का इंतजाम करती है और इसके बाद मनीषा को जैसे तैसे करके एंबुलेंस के माध्यम से हॉस्पिटल में पहुंचा दिया जाता है और मनीषा देवी की हॉस्पिटल में जाने के बाद जान बच जाती है। लेकिन जैसे ही 3 घंटे का वक्त गुजर जाता है तो इसके बाद जो पुलिस होती है रघु की तलाश करना शुरू कर देती है। पुलिस यहां तक कि मनीषा की बेटी सपना से भी पूछताछ करती है और जैसे ही सपना से पूछताछ शुरू कर दी जाती है तो सपना अपनी बीती हुई पूरी कहानी पुलिस के सामने रखती है और सपना पुलिस को बताती है कि जैसे ही मैं घर में आती हूं तो मेरा चाचा मेरी मां के साथ गंदा और गलत काम कर रहा था। अब इस तरीके से पूरे जोर शोर से पुलिस रघु की तलाश करना शुरू कर देती है और रात के करीब 12:00 बजे के आसपास अब पुलिस रघु को गिरफ्तार कर लेती है और जैसे ही रघु को गिरफ्तार कर लिया जाता है तो इसके बाद रघु को पुलिस थाने में भी ले जाया जाता है। पुलिस थाने में ले जाने के बाद रघु की जमकर पिटाई की जाती है और पिटाई होने के बाद रघु अपना पूरा जुल्म कबूल कर लेता है। दूसरी तरफ तीन दिनों का वक्त गुजरने के बाद मनीषा को भी होश आ जाता है और इसके बाद मनीषा भी अपनी पूरी बीती हुई कहानी पुलिस के सामने रखती है।

अब इसके बाद पुलिस रघु के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर देती है। यह बात भविष्य में तय की जाएगी कि जज साहब रघु को आखिरकार क्या सजा सुनाने वाला है। लेकिन दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम के दौरान रघु ने अपनी भाभी और अपनी खुद की सगी भतीजी के साथ जो गंदा और गलत काम किया था उसके लिए रघु को क्या सजा मिलनी चाहिए कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। मिलते हैं दोस्तों किसी ऐसे घटनाक्रम के साथ तब तक के लिए दोस्तों जय हिंद वंदे मातरम।

 

Disclaimer: This story is fictional and created for entertainment purposes only. Any names, characters, places, or events are fictitious or used fictitiously. No real person or organization is intended to be portrayed.

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