Bhaskar Shetty case 300 करोड़ के मालिक की पत्नी को बेटे की उम्र के ज्योतिषी से इश्क में एक कत्ल!
एक लड़का अपने 18 साल पूरे होने का इंतजार कर रहा था। इंतजार इसलिए कर रहा था क्योंकि उसे किसी ने तसल्ली दी थी कि तुम 18 साल कंप्लीट कर लोगे तब तुम्हारी विदेश में नौकरी लग जाएगी। हालांकि वो ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं होता है लेकिन उसको पहले ही दिखाया गया था बताया गया था कि तुम्हें मजदूरी ही मिलेगी इसलिए तुम तैयारी करना। जैसे ही लड़का 18 साल का कंप्लीट हो जाता है उसके बाद उसका पासपोर्ट बन जाता है। उसका वीजा लगता है। सीधा दुबई पहुंच जाता है। दुबई में तेल कंपनी में वो मजदूरी करना शुरू कर देता है और वहां से जो पैसे कमाता था उसके बाद फिर अपने परिवार को भेजना भी शुरू कर देता है। देखते ही देखते उसके दिमाग में कब आया आइडिया कि इंडिया के मसाले अगर दुबई में लाकर बेचे जाए तो उससे भी इनकम बढ़ सकती है।
उसने एक छोटी सी दुकान खोली। दुकान कब बड़ी हो जाती है उसको पता ही नहीं चलता। देखते ही देखते वह सुपरमार्केट का रूप ले लेती है और जैसे ही उसकी दुकान सुपरमार्केट का रूप लेती है तो उसके पास पैसे और ज्यादा इकट्ठे होने लगते हैं। जब पैसे इकट्ठे हो रहे थे तो उसने एक और सुपरमार्केट खोला फिर एक और खोलता है। दो से तीन तीन से चार चार से पांच इस तरह से करते करते वो सात सुपरमार्केट खोल लेता है। अब उसके पास पैसे की कोई कमी नहीं थी। उसके पास रुतबे की कोई कमी नहीं थी। उसने इस पैसे का इस्तेमाल भी करना शुरू कर देता है। इंडिया में वो बहुत ही आलीशान अपना एक घर बनाता है। साथ ही जो प्रॉपर्टी होती है उसको खरीदता है और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसने एक बड़ा सा होटल खोलता है।

आलीशान होटल जब खोलता है तो उसके पास अब पैसे की कमी नहीं थी। लगातार पैसे पर पैसा उसका बढ़ता चला जाता है। तो यह संपत्ति लगभग उसकी आंख ही जाती है तीन सौ करोड़ के आसपास। एक मजदूर से उसने सफर की शुरुआत की थी और देखते ही देखते वह अरबपति हो जाता है। वह भी तीन सौ करोड़ की संपत्ति का मालिक। अब उसकी उम्र थोड़ी जब ज्यादा होने लगती है यानी कि लगभग पचास साल के आसपास वो हो जाता है। तभी अपने आसपास के लोगों से वह बात करता है। कहता है कि मैंने बहुत पैसा कमा लिया है। अब मैं इंडिया जाना चाहता हूं। अपने परिवार के पास जाना चाहता हूं। अपने बेटे के पास जाना चाहता हूं। अपनी मां के पास जाना चाहता हूं। वहीं रहूंगा। उनके साथ रहूंगा। जो बिजनेस है वो यहां संभालते रहेंगे। जैसे चलता रहेगा चलता रहेगा। लेकिन अब परिवार के पास जैसा उसने सोचा था ठीक वैसा ही करता है। जब उसकी उम्र लगभग पचास या इक्यावन साल के आसपास होती है। जब वो अपने घर पहुंचता है घर आने के महज ढाई महीने के बाद उसका बेदर्दी से बहुत ही भयानक रूप में कत्ल कर दिया जाता है और जिसने भी इस कत्ल के बारे में सुना था वो लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। जिस इलाके की जिस जगह की जिस प्रदेश की ये घटना है उस प्रदेश में इस घटना को लेकर आज भी लोग सिहर जाते हैं। सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिरकार कोई ऐसा कदम क्यों उठा सकता है? कैसे उठा सकता है?
आदाब नमस्कार सत श्री अकाल। मैं उस्मान सैफी। आठ मई दो हजार सोलह की यह बात है। भास्कर शेट्टी नाम का एक व्यक्ति होता है। भास्कर शेट्टी जिसकी उम्र लगभग इक्यावन साल के आसपास होती है। दुबई से वह अपने घर आया हुआ था। उसका घर होता है कर्नाटक प्रदेश में जिला उदुपी होता है। उदुपी में थाना मणिपाल लगता है और मणिपाल पुलिस स्टेशन के इलाके में आने वाला इंद्राली है गरीब नगर उसमें उसकी कोठी होती है। एक बड़ा बड़ा आलीशान बंगला होता है। जब वो यहां पहुंचता है। यहां आने के बाद अपना सामान रखता है। सब परिवार वालों से मुलाकात करता है और मुलाकात करने के बाद अब उसका सबसे पहला सफर था जो उसका आलीशान होटल होता है। उस होटल में जाने का। घर में उसकी पत्नी है जिसका नाम राजेश्वरी होता है। उम्र जिसकी लगभग अड़तालीस साल के आसपास होती है। इकलौता बेटा है जिसका नाम नवनीत होता है जिसकी उम्र लगभग बीस साल के आसपास है। अब वो खुश तो था ही यहां से सीधा पहुंच जाता है अपने होटल में। होटल का जो नाम होता है दुर्गा इंटरनेशनल होटल होता है। वहां जैसे ही जाता है तो उसको एक सरप्राइज उसको मिलता है और सरप्राइज कुछ ऐसा मिलता है दरवाजे जैसे ही खुलते हैं उसके लिए तो सामने उसका एक बहुत बढ़िया तरीके से वेलकम हो जाता है। जब वेलकम होता है तो जितने भी
कर्मचारी उसके होटल में काम कर रहे थे या फिर जो भी उससे जुड़े हुए लोग थे सभी उसका वेलकम कर रहे थे सब लोग खुश थे और वह इन खुशी के पलों को बस बजाय उनको एंजॉय करने वो टेंशन में आ जाता है। परेशान होने लगता है। उसके चेहरे पर यह परेशानी के भाव साफ साफ नजर आ रहे थे दिख रहे थे। वह जाता है जाने के बाद जब वेलकम का पूरा मामला खत्म होता है तो फिर सीधा अपने ऑफिस पहुंच जाता है और ऑफिस में जाने के बाद आराम से बैठा हुआ था। मुंह लटकाया हुआ था। उसने अपने जो चेहरा था उसको झुकाया हुआ था। इसी बीच में जो मैनेजर होता है मैनेजर अंदर आने की परमिशन मांगता है। कहता है कि मैं अंदर आ सकता हूं सर। तो मैनेजर अंदर आता है। अंदर आने के बाद वो पूछता है कि सर हमसे कोई गलती हुई है क्या? कहीं आपके वेलकम में कोई कमी तो
नहीं रह गई थी। आप कुछ उदास लग रहे हैं परेशान लग रहे हैं। आपको तो खुश होना चाहिए। आपका तो यही सपना था कि दुबई से सब कुछ छोड़ छाड़ के बस यहां अपने लोगों के बीच में रहेंगे। अपने परिवार के बीच में रहेंगे। इसी बीच में जब बार बार उस व्यक्ति से जिसका नाम भास्कर शेट्टी होता है उससे पूछा जा रहा था तो भास्कर शेट्टी कहने लगता है कि हां मैं परेशान हूं। हां मुझे चिंता हो रही है। चिंता मुझे इस बात की हो रही है कि मेरे साथ काम करने वाले जितने भी कर्मचारी हैं उन्होंने तो मेरा स्वागत बहुत ही धूमधाम के साथ किया। बहुत अच्छे से वेलकम किया। हर किसी के चेहरे पर खुशी के भाव नजर आ रहे थे। लेकिन जैसे मैं घर के अंदर प्रवेश करता हूं तो ना तो पत्नी खुश थी और ना ही इकलौता बेटा खुश था। जिनकी जिसके लिए मैंने इतनी मेहनत की इतने पापड़ बेले सब कुछ तो उनके लिए इकट्ठा किया था। जब यह बात सुनी जाती है कहते हैं कि हो सकता है कि आपका बच्चा ज्यादातर बीमार रहता है परेशान रहता है। पत्नी को भी शायद कोई दिक्कत परेशानी होगी। आप इतना टेंशन क्यों ले रहे हैं सर? जब इस तरह की बात मैनेजर समझाने की बात कर रहा है तो यह मालिक जो होता है मालिक कहता है कि नहीं नहीं ऐसा कभी नहीं हुआ है। इससे पहले भी मैं आता रहा हूं। उनके चेहरे पर हमेशा खुशी के भाव देखने को मिलते रहे हैं। मैं तुम्हें एक काम देता हूं। काम यह है कि तुम्हें मेरी पत्नी की जासूसी करनी है। मेरी पत्नी के बारे में मेरे बेटे के बारे में यह पता करना है कि आखिरकार यह खुश क्यों नहीं है? इसके पीछे की वजह क्या है?
हालांकि जो मैनेजर होता है वह साफ साफ मना कर देता है। लेकिन जब मालिक का आदेश था तो वो टाल कैसे सकता था। अब मैनेजर को यह काम दिया जाता है। मैनेजर ने जिसको भी काम पे लगाया काम पर लगाने के बाद यह पता करने की कोशिश करने लगता है कि आखिरकार इसके पीछे का माजरा क्या है। इसी बीच में जो बेटा है बेटा नवनीत जिसकी अक्सर तबीयत खराब रहती है। थोड़ा डिस्टर्ब सा रहता है। तभी उसकी पत्नी यानी कि राजेश्वरी कहती है कि मैं बेटे का इलाज कराने के लिए कहीं बाहर जा रही हूं और दो चार दिन के बाद लौट कर आऊंगी। तो तुम टेंशन मत लेना परेशान मत होना। जब यह बात कही जाती है तो वो अपने बेटे को लेकर यहां से इस शहर से दूसरे शहर जाती है और पीछे पीछे उसका एक जासूस भी चला जाता है। देखता क्या है जासूस कि जो बेटा है वो तो किसी रिश्तेदार के यहां पर उसको शिफ्ट कर दिया जाता है दो चार दिन के लिए और जो पत्नी होती है वो किसी होटल में पहुंच जाती है। होटल में उसका पहले से ही एक व्यक्ति इंतजार कर रहा था। हालांकि जो इंतजार कर रहा था और जो उसका बेटा है उन दोनों की उम्र में चार या पांच साल का मुश्किल से अंतर रहा होगा। जब यह बात वह व्यक्ति देखता है देखने के बाद सूचना देता है मैनेजर को। मैनेजर ने सूचना दी उस उद्योगपति को उस मालिक को उसने कहा कि साहब आपका शक बिल्कुल सही है। कुछ तो गड़बड़ है। तो जब यह बात गड़बड़ की पता चल जाती है तभी उसे थोड़ा अफसोस हो रहा था एहसास हो रहा था। उसने और पता करने की कोशिश की। जब उसे पूरी तरह से कंफर्म हो जाता है कि हां उसकी पत्नी ठीक रास्ते पर नहीं चल रही है। तभी वो पंद्रह जुलाई साल दो हजार सोलह को अपनी मां के पास जाता है। भास्कर शेट्टी जैसे अपनी मां के पास जाता है मां की उम्र लगभग इक्यासी साल के आसपास होती है। नाम जिनका गुलाबी होता है। गुलाबी के पास जाता है। जाकर मां के जो गोद में सर रखकर वो रोना शुरू कर देता है। मां उसे पुचकारती है। पुचकारते हुए पूछती है बेटा क्या हुआ? तुम इतना परेशान क्यों हो? इतना उदास क्यों हो? तभी वो बताता है माना मां मैंने अपनी जिंदगी में बहुत ईमानदारी के साथ ये सब कुछ हासिल किया है। आज जो भी कुछ है ये तीन सौ करोड़ की संपत्ति एक मजदूर से मैंने सफर तय किया था। आज देखो मैं कहां से कहां पहुंच गया हूं। बस मैं तुमसे यह पूछना चाहता हूं कि तुम्हें क्या चाहिए? मैं तुम्हें क्या दे सकता हूं? मेरे पास सात सुपरमार्केट है। मेरे पास प्लॉट है।
बंगला है। किसी चीज की कोई कमी नहीं है। होटल है। सब कुछ मेरे पास है। बस तुम मुझे बताओ कि मैं तुम्हें क्या दे सकता हूं? मां अपने बेटे की तरफ देखते देखते खुश होने लगती है। कहती है बेटा सब कुछ मेरा ही तो है। तू ऐसी बातें क्यों कर रहा है? जब बेटा बार बार मां से पूछ रहा है तो मां ने कहा कि जो तेरा मन करता है तू मुझे वो दे सकता है। जब यह बात मां और बेटे के बीच में चल रही थी तभी बेटा कहता है अपनी मां से कि जो तुम लेना चाहती हो मैं तुम्हें दूंगा और जो तुम नहीं लोगी उस बाकी सब कुछ अनाथ अहले को दान करने वाला हूं। जब बात दान करने वाली आती है तो मां के भी पैर तुले जमीन खिसक जाती है कि बेटा ऐसा क्या कर रहा है? क्यों कर रहा है? उसने कहा मां मैं सब कुछ देना चाहता हूं। अपने पास अब कुछ भी नहीं रखना चाहता। बिल्कुल जैसे जीरो से शुरुआत की थी उसी जीरो पे मैं वापस आना चाहता हूं। मां ने जैसे ही बात सुनी मां ने कहा ठीक है बेटा अगर तू जैसा चाहता है वैसा अपना कर ले। बेटे ने वैसा ही किया और वैसा करने के बाद वसीयत बनाता है और वसीयत बनाने के बाद अपने काम में बिजी हो जाता है। लेकिन यह वसीयत की बात कब जाकर लीक हो जाती है पता ही नहीं चलता। यानी कि घर से निकलकर होटल होटल से कर्मचारियों और कर्मचारियों से फिर सीधा घर में परिवार के हर एक सदस्य तक बात पहुंच जाती है। और ये तारीख आती है अट्ठाईस जुलाई दो हजार सोलह। अट्ठाईस जुलाई दो हजार सोलह को भास्कर शेट्टी अचानक से लापता हो जाता है गायब हो जाता है। दोपहर दो बतीस बजे के बाद से उसका जो संपर्क सूत्र थे सब कट जाते हैं। वो किसी से मिलनाजुलना उसका हो नहीं पा रहा था। बस सबसे ज्यादा किसी को चिंता हो रही थी। तो इक्यासी साल की जो मां होती है गुलाबी उसको टेंशन हो रही थी। चिंता हो रही थी। मां परेशान हो जाती है और अगले ही दिन उनतीस जुलाई दो हजार सोलह को नजदीकी पुलिस स्टेशन मणिपाल पहुंच जाती है और मणिपाल जाने के बाद कहती है कि मेरा बेटा है जो पीछे दिन गया है दो बतीस बजे से मेरे बेटे से मेरी बातचीत नहीं हो पा रही है मेरे बेटे से बातचीत कराओ। पुलिस वाले शुरुआत में जो उस बुजुर्ग महिला को देख रहे थे इक्यासी साल की उस महिला को देखकर हंसने लगते हैं। कहते हैं अम्मा परेशान क्यों हो रही हो? अब तुम्हारा बेटा कुछ छोटा तो रहा नहीं है। लगभग पचास से इक्यावन साल के आसपास के हैं। शहर के जाने माने हैं तो कोई दिक्कत नहीं। कहीं चले गए होंगे। उन्होंने कहा कि कुछ भी करो कैसे करो घर की तलाशी लो कहीं भी जाओ मुझे मेरे बेटे से बातचीत कराओ कराओ। जब बुजुर्ग मां लगातार पीछे पड़ जाती है तब पुलिस वाले कोशिश करने लगते हैं और जब कोशिश कर रहे थे तो इसी बीच में पता चलता है कि वो दुबई से जो आए थे उस वापस दुबई चले गए हैं। कह रहे हैं कि वही काम करेंगे। लेकिन मां को तसल्ली नहीं हो रही थी। मां ने कहा कि जब तक तुम मेरे बेटे के बारे में पता नहीं करोगे मैं थाने से नहीं जाऊंगी। आखिरकार पुलिस पर दबाव बढ़ने लगता है और जैसे ही पुलिस पर दबाव बढ़ने लगता है पुलिस भी अपना काम करना शुरू कर देती है लेकिन दो तीन दिन का समय बीत जाता है और दो तीन दिन के समय के बाद भी कहीं कुछ अता पता नहीं चल पा रहा था। जब इस व्यापारी की सीडीआर निकलवाई जाती है तो सीडीआर से पता चलता है कि जो इसकी अंतिम आखिरी लोकेशन है आखिर लोकेशन उसकी घर की ही होती है और घर में भी इसने परिवार के लोगों से ही बातचीत की थी। तभी पुलिस की रडार पर अब उसकी जो पत्नी होती है राजेश्वरी वो आ जाती है और जैसे ही पुलिस की रडार पर वो आती है तो उसकी भी लोकेशन निकलवाई जाती है। उसकी भी सीडीआर निकलवाई जाती है और जैसे ही उसकी सीडीआर निकलवाई जाती है तो पता चलता है कि मुंबई में एक व्यक्ति से उसी वक्त में बातचीत हुई थी जब पति का नंबर बंद होता है। पति का नंबर बंद हुआ। एक आध घंटे बाद बातचीत हुई थी। पुलिस ने उसी नंबर पर कॉल लगाया और कॉल लगाने के बाद पूछा कि तुम्हारे पास एक महिला का फोन आया था। क्या तुम उसे जानते हो? पहचानते हो।
उसने कहा मैं जानता हूं। मेरी अच्छी खासी दोस्त हैं। जब आज दोस्ती वाली बात आती है तो उनसे पूछा जाता है कि तुम्हारे पास फोन आया था। फोन पर वो क्या चीज बात कर रही थी? क्या कहना चाहती थी? बस हमें वो सुनना है। जब पुलिस ने अपने तरीके से बातचीत करना शुरू किया। उस व्यक्ति ने कहा कि साहब मेरे पास एक ऑफर आया था। ऑफर था एक करोड़ का। एक हमारा काम है उस काम को अगर तुम कर दोगे तो हम तुम्हें एक करोड़ देंगे। यानी कि उसने कहा कि एक लाश है उसको ठिकाने लगाना है। उसका जो भी इल्जाम है उसे अपने ऊपर लेना है। यदि तुमने इल्जाम को अपने ऊपर ले लिया एक करोड़ का तुम्हें इनाम मिलेगा। पुरस्कार मिलेगा। जब यह बात आती है उसने कहा कि मैं अपनी जिंदगी खराब नहीं करना चाहता हूं। मैं कोई भी पैसे हाथ में नहीं थामूंगा और मैं यह कोई काम करना नहीं चाहता हूं। दोस्त ने मना कर दिया। पुलिस ने अब अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया। आखिरकार पुलिस ने उस महिला जिसका नाम राजेश्वरी होती है जो पत्नी होती है उसको हिरासत में लेती है और हिरासत में लेने के बाद एक नई कहानी सामने आ जाती है जो पति पति है भास्कर शेट्टी जो कि दुबई में रहकर काम कर रहा है मेहनत कर रहा है एक के बाद एक सुपरमार्केट बना रहा है इंडिया में उसके अपने होटल बनाने की कोशिश कर रहा है घर को आलीशान बनाने की कोशिश कर रहा है प्रॉपर्टी को लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है उसका तो पूरा ध्यान था कमाने पर और पत्नी का जो ध्यान था वो बेटे पर होता है। बेटा शुरू से ही थोड़ा कमजोर था और कमजोर होने की वजह से ही उस बेटे का कहीं ना कहीं इलाज होता था। जब इलाज होता था अब चाहे वह डॉक्टर हो चाहे वह तांत्रिक हो चाहे वह ज्योतिषी हो चाहे कोई मौलवी हो जो भी जहां से इलाज होना संभव हो सकता था वह महिला अपने बेटे को लेकर वहां वहां जाती थी और पैसे को पानी की तरह बहाती थी। लेकिन बेटे का दिमाग पर कोई ज्यादा असर तो हो नहीं रहा था। लेकिन एक दिन उसकी किसी से किसी ने मुलाकात कराई एक ज्योतिषी से और ज्योतिषी का नाम था निरंजन भट्ट। निरंजन भट्ट जो होता है वो बेटे की उम्र से महज चार या पांच साल के आसपास बड़ा होता है। इससे ज्यादा अंतर नहीं होता। लेकिन मां को ऐसा लगता है कि बेटे का इलाज यह पूरी तरह से कर देगा। यानी कि उसने ज्योतिषी ने यह भरोसा दिलाया था कि तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। थोड़ा वक्त लग सकता है लेकिन तुम्हारा बेटा पूरी तरह से ठीक हो जाएगा।
बेटे के साथ जो भी अनुष्ठान करना होता है वो जो काम करने होते हैं वो काम करना शुरू कर देता है और फिर यह आना जाना मिलना मिलाना और हर बार होता रहता था राजेश्वरी कब उस निरंजन भट्ट के बहुत करीब पहुंच जाती है। कब दोस्ती हो जाती है दोस्ती प्यार में बदल जाती है। और ऐसा दावा किया जाता है कि दोनों के बीच में अवैध संबंध भी बन जाते हैं। और जब अवैध संबंध बन जाते हैं तो फिर इन्हें मिलने जुलने के लिए कोई रोक टोक था ही नहीं। क्योंकि पति रहता है दुबई में। जब ये इंडिया पति आ जाता है तो उसको एहसास होता है और एहसास उसको तो खैर नहीं होता जितना एहसास उसे पत्नी को होता है कि ये यहां रहेगा तो फिर मिलना जुलना हो नहीं पाएगा। बेटा जो है वो अपनी मां के ही सपोर्ट में रहता है। पिता के सपोर्ट में नहीं रहता। और इसी बीच में इन्हें जब यह बात पता चल जाती है कि जो भी संपत्ति बाप ने या पत्नी ने इकट्ठा की है उस संपत्ति को उसने वसीयत कर दी है। मां को भी दे दी है और साथ ही जो अनाथालय है उसको भी दे दी है। तो हमारे पास बचेगा क्या? तभी ये प्लान बनाते हैं और प्लान बनाने के बाद अब ये इस भास्कर शेट्टी जो होता है उसको ठिकाने लगाने के लिए प्लानिंग तो काफी समय से कर ही रहे थे। पहले कोशिश थी कि जहर देके इसको मार देंगे। उसके बाद इस लाश को ठिकाने लगा देंगे। ऐसे ही वो अट्ठाईस जुलाई दो हजार सोलह को जैसे ही घर पहुंचता है घर आने के बाद वो अपनी पत्नी के पास जैसे ही जाता है जाने के बाद यहां पर पत्नी ने सबसे पहले उसको ऑफर किया चाय का। चाय पियोगे तो जब बात चाय पीने वाली बात आती है तो एकदम छूट के कहता है कि चाय पिलाओ या कुछ भी पिलाओ। ध्यान रखना अब मैं बहुत जल्दी तलाक लेने वाला हूं। तुमसे दूर जाने वाला हूं। तुम्हें अपनी जिंदगी से पूरी तरह से दूर करने वाला हूं। जब बात तलाक की आती है तो पत्नी कहती है चाय पी लो। चाय में क्या दे रखा है? तो जब बात चाय की आती है तो चाय में उस जहर मिला के लेके आई थी। उसने अपने पति को जैसे चाय दी तो एकदम चाय पीने के बाद उसकी हालत जो होती है वो कुछ अजीब सी हो जाती है। उसी के हाथ में एक स्प्रे होता है। पेपर स्प्रे देखते ही मौका वो अपने पति के मुंह चेहरे पर पेपर स्प्रे मार देती है। उधर जो बेटा था वो पूरी तैयारी में था। उसके पास एक लोहे की रोड होती है। लोहे की रोड से बेटे ने अपने बाप पर ही हमला करना शुरू कर देता है। एक के बाद एक जब लगातार रोड मार रहा था तो बेटा जो मार रहा है तो पिता एकदम खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर जाता है। तो मां और बेटे उसे पकड़ के खींचते हैं और खींचने के बाद व्यापारी को सीधा बाथरूम के अंदर लेके जाते हैं। बाथरूम में ले जाने के बाद जो टब होता है पानी भरा हुआ होता है उसमें भी जहर मिलाया हुआ था उसे उसके अंदर डालते हैं। लेकिन उसका दम नहीं निकल रहा था। जब दम नहीं निकल रहा है तब गला घोटकर उसकी हत्या कर देते हैं। अब यह मर जाता है। जब मर जाता है तो उसके बाद फिर उस ज्योतिषी से बातचीत की जाती है कि इनका काम तमाम हो गया है। अब आगे क्या करें? क्या ना करें? कहते हैं कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। एक काम करते हैं मैं तुम्हारी मदद करता हूं। अब यह मदद की जाती है। उसकी लाश को पॉलिथीन में पैक किया जाता है। पैक करने के बाद छत्तीस किलोमीटर दूर अब इस बंगले से सीधा लेके जाया जाता है। करकेला के पास एक नंद नंदाली एक जगह लगती है। नंदाली के नंदालिके में लेके जाते हैं। वहां
पर जो ज्योतिषी होता है ज्योतिषी का अपना एक बड़ा सा हवन कुंड होता है और उस हवन कुंड में ले जाने से पहले ही उसके लाश के कई टुकड़े किए जाते हैं। टुकड़े करने के बाद उस हवन कुंड में उसको डाल देते हैं और जैसे डालते हैं तो पहले से ही वहां पर ज्वलनशील पदार्थ रखे हुए थे। जैसे पेट्रोल वगैरह लगभग बीस लीटर की मात्रा में रखा हुआ था। उसके बाद फिर हवन कुंड में लगातार वह आहुति देना शुरू कर देते हैं। इतनी आहुति देते हैं कि जो इसकी लाश थी वो लगभग लगभग जल चुकी थी। अब उसकी जो भी राख वगैरह थी वो सब चीजें इकट्ठी की जाती है। इकट्ठी करने के बाद उनका एक ड्राइवर होता है। ड्राइवर जिसका नाम राघवेंद्र होता है। राघवेंद्र से कहा जाता है कि राघवेंद्र इसको यहां से दूर फेंक के आना है। तो राघवेंद्र ने उसे यहां से लगभग प्ले नदी में ऐसा दावा किया जाता है कि राघवेंद्र का ही सहारा लिया गया था। जो पल्ली नदी में पंद्रह किलोमीटर दूर वो जाकर उसे राख को वगैरह के जो भी अस्थियां थी उनको फेंक देता है। अब यहां से जो ज्योतिषी होता है ज्योतिषी अपने पिता जिसका नाम श्रीनिवास होता है उससे संपर्क करता है। कहता है पिताजी जो हवन कुंड है उसकी टाइल्स वगैरह को बिल्कुल साफ सुथरा कर दीजिए। नई लगा दीजिए। ये सब कुछ खत्म कर दीजिए। क्योंकि अगर भविष्य में कोई जांच पड़ताल होने लगी तो यहां इस हवन कुंड की पड़ताल भी होगी। तो यहां कोई सबूत ना मिल जाए। यानी कि एक भी निशान नहीं मिलनी चाहिए। तो उधर तो उसकी जो हड्डियां थी जो भी उसके राख बची हुई थी तो पल्ली नदी में डाल दी जाती है और जो यहां पर जहां जलाया गया था उस जगह को भी पूरी तरह से परिवर्तित कर दिया जाता है बदल दिया जाता है। इस मामले की जांच बाद में अठारह अगस्त दो हजार सोलह को सीआईडी को सौंप दिया जाता है। सीआईडी ने एक एक कड़ियों को जोड़ना शुरू किया और जोड़ने के बाद जो आरोपी होते हैं उनको गिरफ्तार किया और गिरफ्तार करने के बाद उनको जेल भेज दिया जिसमें पत्नी होती है बेटा होता है प्रेमी होता है प्रेमी का पिता होता है। साथ ही ड्राइवर होता है। पांचों के पांच को गिरफ्तार करने के बाद जब उनके जेल में भेजा जाता है तब यह अपनी तगड़बाजी लगाना शुरू कर देते हैं। वकीलों का सहारा लेने के बाद वहां से निकलने की कोशिश करते हैं। लेकिन इनकी कोशिश रंग नहीं लाती है। बल्कि यह उलझते ही चले जाते हैं। नौ जून दो हजार इक्कीस को इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। उधर जो ज्योतिषी का पिता था श्रीनिवास उसके बारे में पता चलता है कि साल दो हजार बाईस में उसकी तो मौत हो जाती है। लेकिन जो ड्राइवर होता है ड्राइवर के खिलाफ कोई पर्याप्त सबूत नहीं मिलते हैं। तो इसलिए उसको बरी कर दिया जाता है। अब यह बचते हैं। मां और बेटा और प्रेमी होता है। इनको ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। कुछ समय के बाद ऐसा भी बताया जाता है कि उनको फिर जमानत मिल जाती है। अब आगे इस कहानी में क्या है? उन्होंने हाईकोर्ट की तरफ रुख किया है या नहीं किया है? ये सब प्रक्रिया है। हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के बाद अब बार में बाद में और भी अपील कर सकते हैं। लेकिन जो इक्यासी साल की मां होती है इक्यासी साल की मां ने उस बिजनेस व्यापार को अपने आप से संभालना शुरू किया। अपने आप से संभालते संभालते जो बेटे ने दिया था उसको तो उसने संभाला और जो अनाथ हाल्य को दान कर दिया गया था। बेटे की आखिरी इच्छा के मुताबिक उसको अनाथालय को दान कर दिया जाता है। कुल मिलाकर पत्नी और उसके बेटे के हिस्से में ज्यादा कुछ आता नहीं है। आती है तो सलाखें आती हैं। आती है तो फिर जेल का खाना आता है और आता है तो फिर जेल की तनहाइयां आती हैं। दोस्तों इस पूरे घटनाक्रम को सोने का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है। किसी का दिल दुखाना नहीं है। बल्कि आपको जागरूक करना है। आपको सचेत करना है। आपको बताना है कि क्राइम को कितने भी शातिर तरीके से क्यों ना कर लिया जाए। क्राइम कभी छिपता नहीं है। इस कहानी में भी ऐसे होता है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी पैसे कमाने में लगाए अपने लिए अपने बेटे के लिए अपनी मां के लिए अपनी पत्नी के लिए। लेकिन उस पैसे का लाभ लेने के लिए कोई नहीं बचता सिवाय उस बूढ़ी मां के। क्योंकि बूढ़ी मां बहुत ज्यादा ईमानदार थी। अगर मां ईमानदार ना होती मां कोशिश ना करती तो शायद यह केस कभी खुलता नहीं। दोस्तों जाते जाते अशफा खान है औरंगाबाद बुलंदशहर की रहने वाली हैं। आज इनका जन्मदिन है। इनको जन्मदिन की ढेरों सारी शुभकामनाएं। बहुत बहुत मुबारकबाद। और कुछ लोगों ने नाम लेने की अपील की है जिसमें मोहम्मद कयूम इटावा सैफई हरदोई के रहने वाले हैं। मोहम्मद रब्बानी सेंथल बरेली उत्तर प्रदेश से शमशेर फरीदी मुजफ्फरनगर से राजीव कुमार कोलकाता से गुलाम सरवर भागलपुर बिहार से रंजीत कुमार जायसवाल चंपारण बिहार से एमडी राजा मुरादा राजा मुराद बेगूसराय बिहार से आशीष मिश्रा जिला न्यायालय बलिया से रितेश पवार छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश से सोनिया पासवान दिल्ली तेजिंदर पाल दिल्ली से आप सब लोग अपना ख्याल रखें सुरक्षित रहें। जय हिंद जय भारत।